एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
देश के पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने फिर से विवादित बयान दिया है, दिल्ली में आयोजित सईद नकवी की किताब ‘बीइंग द अदर-द मुस्लिम इन इंडिया’ के विमोचन समारोह में अंसारी उपस्थित हुए थे।
समारोह में उन्होंने कहा कि 1947 में हुए विभाजन के लिए भारत भी जिम्मेदार है, उन्होंने कहा कि उस समय हुए देश के बंटवारे के लिए सिर्फ पाकिस्तान ही जिम्मेदार नहीं है, बल्कि भारत भी इसमें जिम्मेदार था।
पूर्व उप राष्ट्रपति ने समारोह में कहा कि, सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा था कि एकता के लिए बंटवारा जरूरी है, उन्होंने कहा कि हम सबका फर्ज है कि एकता के लिए काम करें, देश के बंटवारे के लिए सियासी वजहों से मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
अंसारी ने कहा कि, जहां भी किसी ने गलत काम किया तो मुल्जिम एक ही..आप सब जानते हैं, भारत की जनसंख्या में 20 फीसदी धार्मिक अल्पसंख्यक हैं, इसमें 14 फीसदी मुसलमान हैं, हर पांचवां शख्स धार्मिक अल्पसंख्यक है, तो क्या इतनी बड़ी आबादी को आप गैर बना सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि, आजादी के चार दिन पहले सरदार पटेल ने दिल्ली में कहा था कि, अगर देश को एक रखना है तो विभाजन जरूरी है, अंसारी ने कहा कि लेकिन सियासत ने जो रुख पलटा तो किसी को जिम्मेदार बनाना था।

















CBI मामले में अरुण जेटली ने दी सफाई
एनपी न्यूज़ नेटवर्क | Navpravah.com
सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को अचानक छु्ट्टी पर भेजे जाने के मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि जिन पर आरोप हैं, वे जांच एजेंसी में नहीं रह सकते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक फैसला दिया है।
अरुण जेटली ने कहा है कि सीबीआई में जो मौजूदा घटनाक्रम चल रहा है, वो सकारात्मक है। सरकार पूरी कोशिशों के साथ सीबीआई की साख को बनाए रखना चाहती है। बता दें कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को अचानक छु्ट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई, सुप्रीम कोर्ट में इस दौरान वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने आलोक वर्मा की पैरवी की है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि, सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ सीवीसी 2 हफ्ते में जांच पूरी करे, मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
हालांकि सॉलीसिटर जनरल तुषार महता ने कोर्ट से कहा कि, इस मामले की जांच इतने कम समय में नहीं हो सकती, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच इतने ही दिनों में पूरी होनी चाहिए, इसे लंबा नहीं खींचना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जब तक मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में होगी तब तक सीबीआई के अंतरिम निदेशक एम नागेश्वर राव नीति से संबंधी कोई भी निर्णय नहीं ले सकते हैं।