28.5 C
Mumbai
Wednesday, July 29, 2026
Home Blog Page 13

उत्तर प्रदेश: स्कूल की तरक़्क़ी के लिए 9 वर्षीय छात्र की बलि, प्रबंधक गिरफ़्तार

इशिका गुप्ता | navpravah.com

लखनऊ | उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 9 वर्षीय छात्र कृतार्थ की हत्या का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, छात्र की हत्या तंत्र-मंत्र और काले जादू की मान्यता के कारण की गई। स्कूल के प्रबंधक का पिता एक तांत्रिक है, और उसका मानना था कि एक बच्चे की बलि देने से उसके स्कूल की तरक्की होगी। इसी सोच में उन्होंने 22 सितंबर को कक्षा दो के छात्र की हत्या कर दी। बाद में, प्रबंधक छात्र के शव को अपनी कार में रखकर ठिकाने लगाने जा रहा था लेकिन परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने उसे पकड़ लिया।

पुलिस ने प्रबंधक और उसके पिता समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना के बाद, छात्र के परिजनों ने एसपी कार्यालय का घेराव किया, यह मांग करते हुए कि हत्याकांड का जल्द खुलासा किया जाए। इस दौरान कई महिलाएं भी उनके समर्थन में आईं। पुलिस अधिकारियों ने कुछ ही घंटों में मामले का खुलासा कर दिया।

सोमवार की सुबह, स्कूल के प्रबंधक दिनेश बघेल ने कृतार्थ के परिवार को बताया कि उसकी तबीयत खराब है। जब परिजन स्कूल पहुंचे, तो उन्हें कृतार्थ नहीं मिला। दिनेश ने परिवार को यह कहकर गुमराह किया कि वह कृतार्थ को इलाज के लिए ले गया है।

परिजनों ने सादाबाद के पास दिनेश बघेल को उसकी कार सहित पकड़ लिया, जहां कार की पिछली सीट पर कृतार्थ का शव मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कृतार्थ के पिता ने दिनेश बघेल और अन्य चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला कि कृतार्थ की गला दबाकर हत्या की गई थी, और उसकी गर्दन पर चोट के निशान थे।

यह घटना बहुत गंभीर और चौंकाने वाली है। पुलिस की जानकारी के अनुसार, प्रबंधक दिनेश बघेल और उसके पिता जशोधन भगत ने तंत्र-मंत्र के जरिए आर्थिक लाभ के लिए छात्र कृतार्थ की हत्या की। यह सोचना ही भयावह है कि किसी ने अपने स्वार्थ के लिए एक निर्दोष बच्चे की जान ली। इससे पहले भी इन लोगों ने ऐसी घटनाओं की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

यह मामला तंत्र-मंत्र और बलि जैसी कुरीतियों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता को दर्शाता है। पुलिस को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि ऐसे अपराधी सजा पा सकें और भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

एक लाश और 59 टुकड़े, जानिये बेंगलुरु के दिल दहला देने वाली घटना की पूरी कहानी

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली। बेंगलुरु में फ्रिज के अंदर 29 साल की महालक्ष्मी की लाश मिली, वो भी टुकड़ों में. बेहद खौफनाक मंजर था. अब पुलिस के हाथ कातिल का सुराग लग चुका है. पुलिस के मुताबिक, कातिल ने बेंगलुरु छोड़कर भागने से पहले अपने भाई के सामने कहा था कि उसी ने महालक्ष्मी का कत्ल किया है. अब कातिल को पकड़ने के लिए बेंगलुरु पुलिस की टीमें पश्चिम बंगाल और ओडिशा भेजी गई हैं. इस बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ये खुलासा हुआ है कि लाश के टुकड़े चालीस नहीं बल्कि उससे कहीं ज्यादा थे.

कातिल बैग में ले जाना चाहता था लाश के टुकड़े

बेंगलुरु के व्यालीकवल इलाके में मौजूद एक तीन मंजिला घर की पहली मंजिल पर महालक्ष्मी रहा करती थी। महालक्ष्मी के कमरे से 21 सितंबर को फ्रिज और कमरे में बिखरे उसी की लाश के टुकड़े मिले थे। अंदेशा है कि महालक्ष्मी का क़त्ल करीब 19 दिन पहले हुआ था। जांच के दौरान पुलिस को महालक्ष्मी के कमरे में रखा एक ट्रॉली बैग भी मिला है। बेंगलुरु पुलिस सूत्रों के मुताबिक बहुत मुमकिन है कि कातिल ने लाश के टुकड़ों को इसी बैग में रख कर कहीं बाहर ठिकाने लगाने की साजिश रची थी। पर चूंकि ये इलाका काफी भीड़भाड़ वाला है, इसीलिए उसे लाश के टुकड़ों को ठिकाने लगाने का शायद मौक़ा नहीं मिला। कमरे की तफ्तीश के बाद पुलिस सूत्रों का ये भी मानना है कि क़त्ल इसी कमरे में हुआ और लाश के टुकड़े भी यहीं किए गए। क्योंकि जिस तरह कमरे से बैग में लाश के टुकड़ों को बाहर ले जाना आसान नहीं था, उसी तरह लाश को बाहर से कमरे तक लाना भी मुमकिन नहीं। क्राइम सीन के मुआयने के बाद पुलिस का ये भी कहना है कि क़त्ल और लाश के टुकड़े करने के बाद कमरे और बाथरूम को साफ करने की भी कोशिश की गई थी। पोस्टमार्टम के बाद टुकड़ों में जमा लाश को महालक्ष्मी के घर वालों को सौंप दिया गया। जिसके बाद बेंगलुरु में ही उसका अंतिम संस्कार भी हो गया।

40 नहीं 59 थे लाश के टुकड़े

बेंगलुरु का बॉवरिंग अस्पताल. वही सरकारी अस्पताल जहां 21 सितंबर को 29 साल की महालक्ष्मी की टुकड़ों में बंटी लाश को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया था. जब मुर्दा घर में कमरे और फ्रिज से बरामद लाश के टुकड़ों की गिनती हुई, तो पता चला क़ातिल ने महालक्ष्मी के 30 से 40 नहीं बल्कि कुल 59 टुकड़े किए थे. जी हां, 59 टुकड़े. एक इंसान के इतने टुकड़े देख कर खुद मुर्दा घर के कर्मचारी तक हैरान थे. बेंगलुरु के अस्पताल में इससे पहले इतने टुकड़ों में बंटी लाश कभी नहीं आई थी.

महालक्ष्मी के कमरे से मिला ट्रॉली बैग

बेंगलुरु के व्यालीकवल इलाके में मौजूद तीन मंजिला घर की पहली मंजिल पर महालक्ष्मी रहा करती थी. महालक्ष्मी के कमरे से 21 सितंबर को फ्रिज और कमरे में बिखरे उसी की लाश के टुकड़े मिले थे. अंदेशा है कि महालक्ष्मी का क़त्ल करीब 19 दिन पहले हुआ था. महालक्ष्मी के कमरे में पुलिस को एक ट्रॉली बैग भी रखा मिला है. बेंगलुरु पुलिस सूत्रों के मुताबिक बहुत मुमकिन है कि कातिल ने लाश के टुकड़ों को उसी बैग में रख कर कहीं बाहर ठिकाने लगाने की साजिश रची थी. पर चूंकि ये इलाका काफी भीड़भाड़ वाला है, इसीलिए उसे लाश के टुकड़ों को ठिकाने लगाने का शायद मौक़ा नहीं मिला.

कमरे में ही कत्ल के बाद किए गए लाश के टुकड़े

कमरे की जांच पड़ताल के बाद पुलिस सूत्रों का ये भी मानना है कि क़त्ल उसी कमरे में हुआ और लाश के टुकड़े भी वहीं किए गए. क्योंकि जिस तरह कमरे से बैग में लाश के टुकड़ों को बाहर ले जाना आसान नहीं था, उसी तरह लाश को बाहर से कमरे तक लाना भी मुमकिन नहीं. क्राइम सीन के मुआयने के बाद पुलिस का ये भी कहना है कि क़त्ल और लाश के टुकड़े करने के बाद कमरे और बाथरूम को साफ करने की भी कोशिश की गई थी. पोस्टमार्टम के बाद टुकड़ों में जमा लाश को महालक्ष्मी के घर वालों को सौंप दिया गया. जिसके बाद बेंगलुरु में ही उसका अंतिम संस्कार किया गया.

सीसीटीवी में कैद हैं कातिल की तस्वीरें

कातिल के भाई की गवाही के अलावा कातिल के बारे में बेंगलुरु पुलिस को सीसीटीवी कैमरों से भी काफी अहम सबूत और सुराग़ मिले हैं. जिस व्यालीकवल इलाके में महालक्ष्मी रहा करती थी, उसके घर को आने और जाने वाले रास्तों पर कुछ जगह सीसीटीवी कैमरे लगे थे. उनके कैमरों में भी वो क़ातिल कैद हो चुका था. बेंगलुरु के पुलिस ने कमिश्नर ने खुद ये बात बताई कि पुलिस कातिल की शिनाख्त कर चुकी है और उसे पकड़ने के लिए देश के कई हिस्सों में पुलिस टीमें भेजी गई हैं.

पहले हेमंत ने अशरफ पर लगाया था इल्जाम

महालक्ष्मी के कत्ल के बाद उसके पति हेमंत दास ने शुरुआत में ये शक जताया था कि इस क़त्ल के पीछे उसका एक और दोस्त अशरफ शामिल हो सकता है. अशरफ भी एक हेयर ड्रेसर है और उत्तराखंड का रहने वाला है. सूत्रों के मुताबिक महालक्षमी के साथ अशरफ की भी करीबी दोस्ती थी. हेमंत दास ने तो अशरफ को लेकर ये भी इल्जाम लगाया कि अशरफ और महालक्ष्मी के बीच अफेयर था और उसी अफेयर की वजह से 9 महीने पहले वो और महालक्ष्मी अलग हो गए थे.

पुलिस ने अशरफ को पूछताछ के बाद छोड़ा

हेमंत की शिकायत के बाद पुलिस ने अशरफ की तलाश की. अशरफ बेंगलुरु में ही था और अपने काम पर था. पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने लाई. और उससे लंबी पूछताछ की. उसके बयान पिछले 20 दिनों में उसकी लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और चश्मदीदों की गवाही के बाद पुलिस ने पूछताछ के बाद अशरफ को छोड़ दिया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक महालक्ष्मी के क़त्ल से अशरफ का कोई संबंध नहीं है. बल्कि असली क़ातिल इस वक्त बंगाल में है.

कमरे से आ रही बदबू ने खोला राज

2 सितंबर से महालक्ष्मी का मोबाइल भी बंद था. लेकिन इसके बावजूद अगले 19 दिनों तक यानी 21 सितंबर तक घरवालों ने कभी पलट कर महालक्ष्मी की खबर तक लेने की कोशिश नहीं की. वो तो 21 सितंबर को जब महालक्ष्मी के कमरे से बदबू आने की शिकायत आई, तब कहीं जाकर मकान मालिक ने महालक्ष्मी की मां को फोन किया, जिसके बाद महालक्ष्मी के कमरे और फ्रिज की सच्चाई घर से बाहर आई. कर्नाटक के गृहमंत्री तक ने ये कहा है कि महालक्ष्मी के क़ातिल का पता चल चुका है. उसकी गिरफ्तारी के बाद ही कत्ल की वजह और बाकी सच्चाई सामने आएगी.

19 दिनों तक फ्रिज में थे लाश के टुकड़े

इस बीच कमरे से बरामद उस फ्रिज को भी जांच के लिए फॉरेंसिक लैब पहुंचा दिया गया है. महालक्ष्मी का केस 2022 के श्रद्धा केस से काफी मिलता जुलता है. महालक्ष्मी के क़त्ल के बाद 19 दिनों तक लाश के टुकड़े फ्रिज में थे. दिल्ली में श्रद्धा का क़त्ल 18 मई 2022 को हुआ था. जबकि क़त्ल का खुलासा नवंबर में हुआ था. क़त्ल के बाद आफताब करीब महीने भर तक किश्तों में फ्रिज से निकाल निकाल कर लाश के टुकड़ों को जंगलों में ठिकाने लगाता रहा.

श्रद्धा मर्डर केस जैसा है ये मामला

महालक्ष्मी शादीशुदा थी. लेकिन पति से अलग रह रही थी. श्रद्धा बिना शादी के आफताब के साथ रह रही थी. श्रद्धा के किसी और साथ रिश्ते को लेकर आफताब को शक था. यहां महालक्ष्मी केस में उसके पति हेमंत को उसके अफयेर का शक था. लेकिन ये शक महालक्ष्मी के क़त्ल की वजह बनी या वजह कुछ और है, इसका खुलासा तभी होगा, जब क़ातिल पुलिस की गिरफ्त में होगा.

हालांकि आफताब की तरह महालक्ष्मी के केस में फिलहाल पुलिस ने उसके पति हेमंत दास को एक तरह से क्लीन चिट दे दी है. यानी वो अपनी पत्नी का कातिल नहीं है. श्रद्धा केस ने पहली बार लाश के टुकड़े कर उसे फ्रिज में रखने या छुपाने का आइडिया दिया था. ठीक उसी तरह महालक्ष्मी की लाश के साथ भी किया गया. फिलहाल श्रद्धा केस दिल्ली की एक अदालत में है. मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में है. लेकिन इसके बावजूद अभी इस केस में गवाही तक पूरी नहीं हो पाई है. सजा का ऐलान कब होगा, पता नहीं.

दुल्हन का ये कारनामा आप का दिमाग़ घुमा देगा, पढ़िए पूरी कहानी

सौम्या केसरवानी । navpravah.com

नई दिल्ली | अलीगढ़ में एक युवक को प्रेम विवाह करना भारी पड़ गया है, प्रेम विवाह के डेढ़ साल बाद युवती गायब हो गई| युवती के गायब होने के बाद मायके ने ससुरालियों पर दहेज के उत्पीड़न दर्ज करा दिया, जब खोजबीन के बाद पुलिस ने उसे किसी दूसरे के साथ पकड़ लिया तो युवती ने उस पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा दिया।

पुलिस ने उस दूसरे युवक को पकड़ लिया और सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में उस दूसरे व्यक्ति को जेल भेज दिया, मगर पहले युवती से प्रेम विवाह करने वाला युवक व उसका परिवार दहेज उत्पीड़न के मुकदमे से घिरा है और उससे बचने के लिए भटक रहा है।

दरअसल, जुलाई में युवती के पिता ने अपनी बेटी के दहेज उत्पीड़न, मारपीट, बेटी को गायब करने संबंध में मुकदमा दर्ज कराया, इस मुकदमे में कहा कि उनकी बेटी ने इलाके के ही युवक से परिवार की बिना मर्जी के खिलाफ प्रेम विवाह किया था, उसके बाद से ही उसका दहेज के लिए उत्पीड़न हो रहा था।

मुकदमे के आधार पर जब पुलिस ने विवेचना शुरू की तो सीसीटीवी की मदद से उसे एक सप्ताह बाद ही क्षेत्र के दूसरे गांव के एक युवक संग बरामद कर लिया गया, जब युवती से पूछताछ शुरू हुई तो उसने दूसरे युवक पर यह कहते हुए आरोप लगा दिया कि, ससुरालियों द्वारा मारपीट की गई थी, जब इस वाक्ये के बाद वह अपने मायके जा रही थी।श, तभी इस आरोपी प्रशांत ने उसे अपने एक अन्य साथी मनोज की मदद से पकड़ लिया और सामूहिक दुष्कर्म किया।

सावधान! कहीं आप न हो जाएँ ‘डिजिटल अरेस्ट’ का शिकार

 

इशिका गुप्ता | navpravah.com

नई दिल्ली | पहली घटना है, कन्या इंटर कॉलेज की शिक्षिका की जो सुबह घर से विद्यालय की ओर निकलने वाली थी। उसे व्हाट्सएप पर एक कॉल आई जिस पर कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान राकेश सिंह राठौड़, दरोगा के रूप में कराई और बोला कि वह नोएडा में स्थित हेडक्वार्टर से बात कर रहा है।

उसने आगे बात करते हुए शिक्षिका से पूछा: “क्या आपको बेटी है?” शिक्षिका ने जवाब दिया: “हां है।” उस दरोगा ने शिक्षिका की बेटी की और जानकारी लेनी चाही पर शिक्षिका ने बीच में उसे रोकते हुए कहा कि आप क्या कहना चाहते हैं सीधी बात पर आइए, तब दरोगा ने कहा: “आपकी बेटी का आपत्तिजनक वीडियो पोर्न साइट पर वायरल हुआ है और उसपर एक केस किया गया है।” शिक्षिका को उस कॉलर की बातों से आभास हुआ कि वह झूठ बोल रहा है और यह एक फर्जी कॉल है। यह सोचकर वह कॉल काट दी।

यह फर्जी कॉल की बात सुनकर उसकी बेटी अपनी मां से बोली कि इसकी शिकायत करनी चाहिए और इसके लिए उसकी बेटी ने फिर से उसी नंबर पर कॉल मिलाया।

कॉल उठने पर फिर वही कॉलर से उस शिक्षिका की बेटी ने बात करनी शुरू की। शिक्षिका की बेटी ने उस कॉलर को आभास कराया कि वह उसकी जाल में फंस गई है और रोने व डरने का नाटक करने लगी। उसके बाद दरोगा ने उसे बोला कि मामला रफा दफा हो सकता है अगर वह उसे ₹50,000 दे। दरोगा ने आगे कहा: “मैं जानता हूं तू गरीब घर से है और तू 50,000 अफोर्ड नहीं कर पाएगी और तू समाज में बच नहीं पाएगी मैं जानता हूं ,मैं समझता हूं।” शिक्षिका की बेटी ने आगे नाटक करते हुए बोला कि मैं 50,000 नहीं दे सकती मैं क्या करूं। तब उसे फर्जी दरोगे ने उससे बोला: “तू 10,000 ही दे दे, मैं तुझे इसी नंबर पर बारकोड भेजूंगा और तू इस पर पैसे ट्रांसफर कर दे, इसके बाद मामला मैं दबा दूंगा।” शिक्षिका की बेटी ने उस फर्जी दरोगा से और जानकारी इकट्ठी करनी चाही कि वह कहां से किसका लिंक जोड़कर बात कर रहा है। यह सब सवाल सुनकर उस कॉलर ने उसे कॉल पर ही डराना धमकाना शुरू कर दिया। फिर शिक्षिका की बेटी ने नाटक बंद करते हुए कहा कि मैं तुम्हारी कंप्लेंट टेलीकॉम विभाग पर दूंगी और तुम्हारी असलियत सामने आ जाएगी, यह बोलकर उसने कॉल काट दिया।

दूसरी घटना है, एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी की, उसे भी एक व्हाट्सएप कॉल द्वारा बोला गया कि उसके सभी रजिस्टर्ड नंबर बंद किया जा रहे हैं व उसके आधार कार्ड द्वारा केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है जिसमें 6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया है। कॉल करने वाला अपनी पहचान टेलीकॉम विभाग के कर्मचारी के रूप मे बता रहा था। इस तरह बात करते हुए उसने बैंक कर्मचारी को कई दिनों तक मानसिक तनाव में रखा। कॉलर ने उन्हें बोला की उनके खिलाफ महाराष्ट्र में केस दर्ज किया गया है और इसी तरह डरा धमका कर उनका घर से निकलना बंद करवा दिया था।

कॉलर ने उन्हें आगे कहा: “आपको इस केस से बचना है तो सभी पैसे आरबीआई के खाते में आपको ट्रांसफर करना होगा।”  इस तरह बैंक कर्मचारी ने पहले 3.80 लाख रुपए अपने बैंक खाते से ट्रांसफर करे दूसरी बार 5 लाख व तीसरी बार 21 लाख ,चौथी बार 30 लाख और पांचवी बार 45 लाख और इस तरह लगभग उन्होंने 1 करोड़ 73 लाख 80 हजार रुपए ट्रांसफर किए।

रिटायर्ड बैंक कर्मचारी को जब ठगी का आभास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तब उन्होंने थाने में जाकर ठगी की शिकायत दर्ज कराई।

उपर्युक्त कहानियों से यही प्रतीत हुआ कि यह ठगी व्हाट्सएप कॉल के द्वारा एक फर्जी किरदार के रूप में की गई जिस पर कुछ लोग भरोसा जता कर उस जाल में फंस गए और कुछ लोगों ने भरोसा ना करके उस जाल में फंसने से बच गए।

इस स्कैम को “डिजिटल अरेस्ट” का नाम दिया गया है।

क्या होता है डिजिटल गिरफ्तारी (digital arrest)?:

डिजिटल गिरफ्तारी एक नया साइबर अपराध है, जिसमें धोखेबाज़ लोग खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर लोगों को पैसे ठगते हैं। ये अपराधी AI-जनरेटेड आवाज़ों और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल करके लोगों को धोखा देते हैं।

इस घोटाले में लोग घंटों वीडियो कॉल पर रहते हैं, जब तक कि वे अपना सारा पैसा ट्रांसफर नहीं कर देते। लेकिन असल में, कानून में ऐसी कोई “डिजिटल गिरफ्तारी” नहीं होती।

जैसे-जैसे तकनीक में प्रगति हो रही है, वैश्विक स्तर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए साइबर अपराध एक बड़ा खतरा बन गया है। इसलिए, ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर जागरूकता और सावधानी बेहद जरूरी है।

इस स्कैम से कैसे करें खुद का बचाव ?

1. संदिग्ध कॉल्स से बचें: अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स को नजरअंदाज करें।

2. जानकारी साझा न करें: व्यक्तिगत जानकारी, जैसे बैंक डिटेल्स, किसी को न दें।

3. सत्यापन करें: किसी भी कानून प्रवर्तन अधिकारी की पहचान की पुष्टि करें।

4. वीडियो कॉल्स से सावधान रहें: अनजान लोगों के साथ वीडियो कॉल पर रहने से बचें।

5. AI तकनीकों की जानकारी: AI-जनरेटेड आवाज़ों और टेक्नोलॉजी के बारे में जानें।

6. सुरक्षा सॉफ्टवेयर का उपयोग: अपने उपकरणों में साइबर सुरक्षा सॉफ्टवेयर लगाएं।

7. दो-चरणीय प्रमाणीकरण: अपने ऑनलाइन अकाउंट्स में दो-चरणीय प्रमाणीकरण सक्षम करें।

8. सीधे संपर्क करें: यदि कोई कॉल संदिग्ध लगे, तो सीधे संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसी से संपर्क करें।

9. सोशल मीडिया पर सावधानी: व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने से बचें।

10. फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन चेक करें: अपने बैंक स्टेटमेंट को नियमित रूप से जांचें।

11. ऑनलाइन शिक्षा: साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी और शिक्षा प्राप्त करें।

12. संदेशों का ध्यान रखें: संदिग्ध टेक्स्ट या ईमेल पर क्लिक न करें।

13. पब्लिक Wi-Fi से सावधान रहें: पब्लिक Wi-Fi पर संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचें।

14. नियमित अपडेट्स: अपने सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन को अपडेट रखें।

15. समुदाय में जागरूकता: अपने मित्रों और परिवार को साइबर अपराध के बारे में जागरूक करें।

इन उपायों का पालन करके आप डिजिटल गिरफ्तारी जैसे साइबर अपराधों से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।

इन स्कैम्स की शिकायत कैसे की जाए: 

यदि आप डिजिटल गिरफ्तारी या किसी अन्य साइबर अपराध का शिकार हुए हैं, तो शिकायत दर्ज करना बहुत महत्वपूर्ण है। यहां कुछ कदम दिए गए हैं जिनका पालन करके आप सही तरीके से शिकायत कर सकते हैं:

1. जानकारी इकट्ठा करें:

सबसे पहले, अपनी सारी जानकारी इकट्ठा करें। इसमें धोखेबाज का नंबर, कॉल का समय, बातचीत का सारांश और अगर कोई ट्रांजैक्शन हुआ है, तो उसकी पूरी जानकारी शामिल करें। स्क्रीनशॉट्स और अन्य सबूत भी जमा करें।

2. स्थानीय पुलिस स्टेशन:

अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में जाकर शिकायत दर्ज कराएं। अपनी समस्या को स्पष्ट रूप से बताएं और सभी सबूत पुलिस को दें। यदि संभव हो, तो एक लिखित शिकायत भी तैयार रखें।

3. साइबर क्राइम पोर्टल:

भारत सरकार का राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाकर भी आप ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं। यहाँ आपको एक फॉर्म भरना होगा जिसमें सभी आवश्यक जानकारी भरें। यह प्रक्रिया सुविधाजनक और त्वरित है।

 4. बैंक से संपर्क:

यदि आपके पैसे किसी बैंक खाते में ट्रांसफर हुए हैं, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें। उन्हें बताएं कि यह एक धोखाधड़ी का मामला है और लेन-देन को रोकने के लिए कहें।

5. टेलीकॉम कंपनी:

अगर कॉल किसी मोबाइल नंबर से आई थी, तो अपनी टेलीकॉम कंपनी को भी इसकी सूचना दें। उन्हें धोखाधड़ी से संबंधित नंबर की जानकारी दें ताकि वे उचित कार्रवाई कर सकें।

6. सामाजिक जागरूकता:

अपने अनुभव को सोशल मीडिया या स्थानीय समुदाय में साझा करें ताकि अन्य लोग इस तरह के धोखे से सतर्क हो सकें।

शिकायत दर्ज करने में देरी न करें। समय पर कार्रवाई करना न केवल आपके लिए बल्कि दूसरों के लिए भी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

क्या आप भी लेते हैं विटामिन C की गोली? हो जाइये सावधान!

नृपेंद्र कुमार मौर्य| navpravah.com

नई दिल्ली| जब हम बीमार पड़ते हैं, तो अक्सर सुनने में आता है कि विटामिन सी के सप्लीमेंट लेने से हमारी इम्यूनिटी मजबूत होती है। कोविड-19 के दौरान तो यह बात और भी ज्यादा सुर्खियों में रही, जब लोग इस विटामिन को अपने दैनिक आहार में शामिल करने लगे। लेकिन क्या हम जानते हैं कि विटामिन सी का सेवन कैसे और कितना करना चाहिए?

विटामिन सी का महत्व

विटामिन सी, जिसे एस्कॉर्बिक एसिड भी कहते हैं, एक वॉटर-सॉल्यूबल विटामिन है, जो हमारे शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह शरीर में कोलेजन, स्किन और बालों के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन सी की कमी से स्कर्वी जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है, जिसमें त्वचा फट जाती है, मसूड़ों से खून निकलता है, और बालों का झड़ना शुरू हो जाता है।

रोज़ कितना विटामिन सी लेना चाहिए?

एक वयस्क को प्रतिदिन लगभग 50 मिलीग्राम विटामिन सी की आवश्यकता होती है, जबकि गर्भवती महिलाओं को यह मात्रा 150 मिलीग्राम तक हो सकती है। 200 मिलीग्राम तक विटामिन सी लेना सुरक्षित माना जाता है। यह ध्यान देने योग्य है कि विटामिन सी का एक हिस्सा ऑक्सैलिक एसिड में परिवर्तित होता है, जो किडनी में स्टोन बनने का खतरा बढ़ा सकता है।

किडनी पर असर

हालिया अध्ययनों में यह पाया गया है कि यदि आप हर दिन 1000 मिलीग्राम से अधिक विटामिन सी का सेवन करते हैं, तो किडनी में स्टोन बनने का जोखिम बढ़ सकता है। यह समस्या विशेष रूप से उन लोगों में अधिक होती है जिनकी किडनी में पहले से ही स्टोन हैं या जो पर्याप्त पानी नहीं पीते हैं। इसलिए, संतुलित मात्रा में विटामिन सी का सेवन करना चाहिए।

विटामिन सी के स्रोत

विटामिन सी की पर्याप्त मात्रा पाने के लिए आपको किसी विशेष सप्लीमेंट की आवश्यकता नहीं है। इसे प्राकृतिक रूप से फलों और सब्जियों से प्राप्त किया जा सकता है। संतरे, नींबू, टमाटर, मिर्च, और आलू जैसे खाद्य पदार्थ विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। एक बैलेंस्ड डाइट में ये सभी तत्व शामिल करना आसान है।

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए विशेष ध्यान

गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को विटामिन सी की थोड़ी अधिक आवश्यकता होती है। उन्हें अपनी डाइट में हरी सब्जियाँ और खट्टे फल शामिल करने चाहिए, ताकि उन्हें और उनके बच्चे को आवश्यक पोषण मिल सके।

सही सलाह लें

विटामिन सी के फायदों के साथ-साथ इसकी सही मात्रा को समझना भी महत्वपूर्ण है। अक्सर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के ज्यादा सप्लीमेंट लेने लगते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए, यदि आप विटामिन सी का सेवन बढ़ाने की सोच रहे हैं, तो बेहतर होगा कि आप पहले अपने डॉक्टर या न्यूट्रीशियन से सलाह लें।

विटामिन सी निश्चित रूप से इम्यूनिटी को मजबूत बनाने में मददगार है, लेकिन इसकी अधिकता से होने वाले संभावित जोखिमों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। संतुलित आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता ही इस विटामिन का सही उपयोग सुनिश्चित करेगी। इसलिए, इसे अपने आहार में शामिल करें, लेकिन सीमित मात्रा में और सही तरीके से।

ऐसा क्या कह गए तमिलनाडु के राज्यपाल जिस पर मचा बवाल ? जानिये पूरी कहानी

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने हाल ही में एक कार्यक्रम में धर्मनिरपेक्षता को यूरोप का कॉन्सेप्ट बताते हुए कहा कि भारत को इसकी आवश्यकता नहीं है। उनके इस बयान ने सत्तारूढ़ द्रमुक और कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है।

रवि ने कन्याकुमारी में कहा, “धर्मनिरपेक्षता यूरोप की एक अवधारणा है, जो वहां चर्च और राजा के बीच संघर्ष के कारण विकसित हुई। भारत एक धर्म का देश है और हमें इसकी आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के मूल पाठ में ‘धर्मनिरपेक्षता’ का जिक्र नहीं था, बल्कि इसे आपातकाल के दौरान जोड़ा गया था।

इस पर द्रमुक के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि राज्यपाल को संविधान पढ़ने की सलाह दी जानी चाहिए, क्योंकि अनुच्छेद 25 धार्मिक स्वतंत्रता की बात करता है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी रवि के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत में धर्मनिरपेक्षता का मतलब सभी धर्मों और परंपराओं का सम्मान करना है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी राजा ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की, जबकि सीपीआईएम की नेता वृंदा करात ने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि राज्यपाल को धर्मनिरपेक्षता के महत्व को समझना चाहिए, जो कि हमारे संविधान का एक अभिन्न हिस्सा है।

धर्मनिरपेक्षता का अर्थ स्पष्ट करते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि यह सरकार को धर्म से दूर रखने और सभी नागरिकों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करने की अवधारणा है। भारतीय संविधान में इसे विभिन्न संदर्भों में देखा गया है और 1976 में पंथ निरपेक्षता के रूप में पुनर्परिभाषित किया गया।

यह विवाद स्पष्ट करता है कि धर्मनिरपेक्षता का विषय भारतीय राजनीति में कितना संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, और यह देश की विविधता को कैसे प्रभावित करता है।

सेक्युलरिज्म का मतलब

धर्मनिरपेक्षता, जिसे अंग्रेजी में सेक्युलरिज्म कहते हैं, का अर्थ है कि सरकार और राज्य को धर्म से पूरी तरह अलग रखा जाए। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी धर्म का विरोध किया जाए, बल्कि यह है कि सभी को अपने धार्मिक विश्वासों का पालन करने की स्वतंत्रता दी जाए। एक धर्मनिरपेक्ष राज्य हर नागरिक के साथ समानता से पेश आता है, चाहे उनकी धार्मिक पहचान जो भी हो।

सेक्युलरिज्म का इतिहास

सेक्युलरिज्म की अवधारणा सबसे पहले यूरोप में विकसित हुई, जहाँ धार्मिक और राजनीतिक संस्थाओं के बीच संघर्ष हुआ। भारत में इसका परिचय अंग्रेजों के समय में हुआ, जब उन्होंने धर्म के आधार पर समाज में विभाजन किया। आज़ादी के बाद, भारतीय संविधान ने धर्मनिरपेक्षता को एक मूलभूत सिद्धांत के रूप में अपनाया, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार शामिल है।

भारतीय संविधान में सेक्युलरिज्म

1976 में, भारतीय संविधान के 42वें संशोधन के तहत पंथ निरपेक्षता को संविधान की प्रस्तावना में जोड़ा गया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकार किसी विशेष धर्म का पक्ष न ले और सभी नागरिकों को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने का अधिकार मिले।

रिटायर्ड बैंक कर्मचारी को डिजिटल अरेस्ट कर ठगा पौने दो करोड़ रुपए

इशिका गुप्ता | navpravah.com

लखनऊ | मेरठ में एक हैरान कर देने वाली घटना हुई, जहां 71 वर्षीय रिटायर्ड बैंक कर्मचारी को मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर 1 करोड़ 73 लाख रुपये ठग लिए गए। पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने उन्हें चार दिन तक मानसिक दबाव में रखा और फिर ऑनलाइन पैसे अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने तुरंत साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अब आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां पांडव नगर के निवासी 71 वर्षीय रिटायर्ड सरकारी बैंक कर्मचारी सूरज प्रकाश के साथ ठगी की गई। उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई कि बदमाशों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लगभग 1 करोड़ 73 लाख रुपये ठग लिए।

सूरज प्रकाश ने बताया कि 17 सितंबर को उन्हें एक कॉल आई। कॉलर ने खुद को टेलीकॉम विभाग से बताते हुए कहा कि उनके सभी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बंद किए जा रहे हैं। साथ ही, यह भी बताया गया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर कैनरा बैंक में एक खाता खोला गया है, जिसमें 6.80 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है।

पीड़ित सूरज प्रकाश ने बताया कि उन्हें एक वाट्सऐप नंबर से कॉल आई, जिसमें कॉलर ने कहा कि उनके खिलाफ महाराष्ट्र में रिपोर्ट दर्ज की गई है और जेल भेजने की धमकी भी दी। इसके बाद उन्हें घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी गई।

18 सितंबर को, उनके एक बैंक खाते में 3.80 लाख और फिर 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद, 20 सितंबर को एक खाते में 90 लाख रुपये और 21 सितंबर को एक खाते में 45 लाख और दूसरे खाते में 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।

पुलिस ने सूरज प्रकाश की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कुल चार दिनों में उनसे 1 करोड़ 73 लाख 80 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई। जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ, तब तक काफी देर हो चुकी थी।

मेरठ के साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद, पुलिस ने ठगी करने वालों के बैंक खातों को सीज करने के लिए संबंधित बैंकों को पत्र लिखा है।

एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि पीड़ित ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि उनके खिलाफ महाराष्ट्र में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज है और इसके बचाव के लिए उन्हें आरबीआई के खाते में पैसे ट्रांसफर करने होंगे। इस बहकावे में आकर उन्होंने अपने खाते से करीब 1 करोड़ 73 लाख रुपये आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर दिए। उन्होंने बताया कि आरोपी के खाते को तुरंत फ्रीज कर दिया गया है और इस मामले की जांच के लिए दो टीमें गठित की गई हैं।

योगेश्वर दत्त ने विनेश फोगाट पर लगाए गम्भीर आरोप, कहा, “विनेश को देश से माफ़ी माँगनी चाहिए”

नृपेंद्र कुमार मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | योगेश्वर दत्त ने हाल ही में विनेश फोगाट के कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ने के फैसले पर एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीति में जाना व्यक्तिगत विकल्प है लेकिन देश को सच्चाई का पता होना चाहिए। उन्होंने पिछले एक साल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ओलंपिक में विनेश का डिसक्वालिफाई होना और पहलवानों का जंतर-मंतर पर आंदोलन, दोनों ही मामलों ने भारत की गलत छवि पेश की है।

योगेश्वर ने यह भी कहा कि जब कोई खिलाड़ी ओलंपिक में डिसक्वालिफाई होता है, तो उसे पूरे देश के सामने माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विनेश के मामले में इसे साजिश का नाम दिया गया और पीएम मोदी पर अनावश्यक आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में भी गलत जानकारी फैलाई गई और लोगों को एकत्रित किया गया। ऐसा माहौल बनाने का कोई औचित्य नहीं है, खासकर जब देश को एक मेडल का नुकसान उठाना पड़ा हो।

जब उनसे पूछा गया कि राजनीति और कुश्ती में क्या फर्क है, तो उन्होंने कहा कि कुश्ती कहीं ज्यादा आसान है। राजनीति में झूठ बोलना और लोगों को भ्रमित करना सबसे गलत बात है। योगेश्वर का मानना है कि राजनीति का उद्देश्य समाज की भलाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति में सिर गिने जाते हैं, जबकि कुश्ती में आपकी ताकत मायने रखती है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे पहले चुनाव में जीत जाते, तो शायद उन्हें बहुत कुछ सीखने का मौका नहीं मिलता। बीजेपी के प्रति उन्होंने कोई विरोध नहीं जताया और कहा कि हरियाणा में बीजेपी की सरकार फिर से बनने जा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों में बीजेपी को जीताने की भावना है और कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

केजरीवाल की कुर्सी ख़ाली रखकर क्या संदेश देना चाहती हैं आतिशी ?

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली | आतिशी ने सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद का चार्ज ग्रहण किया, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाएँ शुरू हो गईं। उन्होंने इस अवसर पर अनोखे तरीके से सीएम की कुर्सी के बगल में एक कुर्सी रखी और कहा कि यह कुर्सी पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कुछ महीनों में दिल्ली की जनता उन्हें फिर से चुनकर सीएम बनाएगी और तब तक यह कुर्सी यहीं रहेगी।

आतिशी ने यह संदेश भी दिया कि वे केजरीवाल के विचारों को आगे बढ़ा रही हैं। केजरीवाल ने इस्तीफा देने के बाद कहा था कि जनता ही अब निर्णय करेगी, और आतिशी भी उसी दिशा में बढ़ रही हैं। यह संकेत मिलता है कि वे केजरीवाल के संदेश को जनता तक पहुंचाना चाहती हैं।

आतिशी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की कुर्सी का स्थान इसी कमरे में रहेगा, जो उनकी वापसी का प्रतीक है। उन्होंने सीएम ऑफिस में केजरीवाल की कुर्सी को बगल में रखकर इमोशनल संदेश देने की कोशिश की, यह दर्शाते हुए कि सभी को केजरीवाल का इंतज़ार है।

सीएम पद की शपथ लेने के बाद की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में, आतिशी ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आज अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री क्यों नहीं हैं। उनके अनुसार, बीजेपी की केंद्र सरकार ने केजरीवाल के खिलाफ साजिश रची, उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया और छह महीने से अधिक समय तक जेल में रखा।

आतिशी की यह कोशिश स्पष्ट करती है कि वे न केवल केजरीवाल के विचारों को आगे बढ़ा रही हैं, बल्कि केंद्र सरकार के खिलाफ भी आवाज उठा रही हैं। उनकी यह रणनीति अगले चुनावों को ध्यान में रखते हुए है, जिसमें वे जनता के सामने केजरीवाल की सरकार की उपलब्धियों और उनकी वापसी का मुद्दा उठाना चाहती हैं।

इस प्रकार, आतिशी ने अपने पदभार ग्रहण के साथ ही एक राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया है, जो न केवल अरविंद केजरीवाल की विरासत को संरक्षित करता है, बल्कि आगामी चुनावों की तैयारियों का भी संकेत देता है।

ऑस्कर में ‘लापता लेडीज़’ की एंट्री, पढ़िए पूरी ख़बर

नृपेंद्र कुमार मौर्या | navpravah.com

नई दिल्ली | किरण राव द्वारा बनाई गई फिल्म “लापता लेडीज” ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस फिल्म को ऑस्कर 2025 के लिए आधिकारिक भारतीय प्रविष्टि के रूप में चुना गया है। फिल्म की पहली स्क्रीनिंग पिछले साल टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में हुई, जहां इसे दर्शकों और आलोचकों से जबरदस्त प्रशंसा मिली।

“लापता लेडीज” एक अनोखी कहानी पेश करती है, जो सामाजिक मुद्दों और मानवीय भावनाओं को गहराई से छूती है। किरण राव ने इसकी पटकथा और निर्देशन पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे यह फिल्म न केवल मनोरंजक बल्कि गहराई से प्रभावित करने वाली भी बन गई है।

किरण ने इस बारे में कहा, “यह कहानी उन महिलाओं की है जो समाज में अदृश्य हैं। मैं चाहती थी कि दर्शक उनकी यात्रा को महसूस करें।” फिल्म में नारीवादी दृष्टिकोण को दर्शाया गया है, जो भारतीय सिनेमा में एक नया आयाम जोड़ता है।

आमिर खान प्रोडक्शन द्वारा निर्मित, “लापता लेडीज” इस प्रोडक्शन हाउस की चौथी फिल्म है, जो ऑस्कर की दौड़ में शामिल हो रही है। आमिर खान के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि उनकी फिल्मों ने हमेशा वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व किया है।

मार्च 2024 में रिलीज़ होने वाली “लापता लेडीज” के प्रति दर्शकों की उत्सुकता बढ़ती जा रही है। फिल्म का ट्रेलर और पोस्टर पहले ही लोगों का ध्यान खींच चुके हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह फिल्म ऑस्कर में भारत का नाम रोशन कर पाएगी।

इस उपलब्धि के साथ, किरण राव और उनकी टीम ने भारतीय सिनेमा में एक नई लहर को जन्म दिया है, जो न केवल मनोरंजन प्रदान करती है बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालती है।

‘लापता लेडीज’ को भारत के तरफ से ऑफिशियल ऑस्कर एंट्री बनाए जाने पर फिल्म के एक्टर रवि किशन ने खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए ये सपना सच होने जैसा मोमेंट है. ये सबसे बड़ा सम्मान है और मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं कभी इतनी दूर पहुंच पाऊंगा. ये मेरी जिंदगी की बेस्ट और सबसे बड़ी खबर है. ये फिल्म भारत का रिफ्लेक्शन है और सबसे खूबसूरत तरीके से महिला सशक्तिकरण को दिखाती है.’