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Tuesday, July 28, 2026
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मेरे घर वाले खाते हैं गोमांस- जयराम रमेश

Amit Dwivedi @Navpravah.com

गोमांस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि खाने पीने की चीज़ों पर प्रतिबन्ध लगाना गलत है। उन्होंने कहा मैं शाकाहारी हूँ लेकिन मेरे परिवार के लोग गोमांस खाते हैं। सबकी अपनी पसंद है और इस पर कोई प्रतिबन्ध नहीं होना चाहिए।

जयराम रमेश ने चुटकी लेते हुए कहा कि आज गोमांस को बैन किया जा रहा है, कल कहेंगे कि दाल मखनी नहीं खा सकते, मटर पनीर नहीं खा सकते। इस तरह की गतिविधि बीजेपी नेताओं की असहिष्णुता को प्रदर्शित करता है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश किस तरफ जा रहा है। किसी पर अपनी मर्ज़ी थोपना गलत है। किसको क्या खाना है क्या नहीं, यही व्यक्ति विशेष की इच्छा पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को (आरएसएस) मूल रूप से एक लोकतंत्र-विरोधी संगठन बताया। रमेश ने कहा कि सब कुछ आरएसएस नहीं तय करेगा।

रमेश ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुस्लिमों को भारत में रहना है तो गोमांस खाना छोड़ना पड़ेगा।

छेड़छाड़ मामले में अभिजीत के खिलाफ दर्ज़ हुआ एफआईआर, पत्रकार को कहा पाकिस्तानी मीडिया का नुमाइंदा

AmitDwivedi @Navpravah.com

गुरूवार रात एक 34 वर्षीय महिला ने ओशिवारा पुलिस स्टेशन में पार्श्व गायक अभिजीत पर दुर्गा पूजा के दौरान गलत तरीके से छूने और गाली देने का आरोप लगाया और प्राथमिकी दर्ज़ कराया। एफआईआर दर्ज़ हो जाने की वजह से झल्लाए अभिजीत ने एक वरिष्ठ पत्रकार को पाकिस्तानी मीडिया वाला कहा और कहा कि पाकिस्तान वाले मुझसे चिढ़ते हैं और इसलिए मुझे टारगेट किया जा रहा है।

हमेशा किसी न किसी मामले की वजह से सुर्ख़ियों में रहने वाले अभिजीत इस बार एक महिला से छेड़छाड़ के आरोप में चर्चा में हैं। ओशीवारा पुलिस के मुताबिक़ शिकायतकर्ता महिला गायक कैलाश खेर का लाइव शो देखने पंडाल पहुंची थी। भीड़ होने कारण महिला अपनी सीट से उठ गई और खड़े होकर शो देखने लगी।

महिला शिकायतकर्ता के मुताबिक़ उस समय पास में ही खड़े 45 वर्षीय अभिजीत ने उसे गलत तरीके से छूने की कोशिश की। जब महिला ने इसका विरोध किया तो उन्होंने लोगों के बीच उसे गाली देना शुरू कर दिया। वहां तैनात महिला वॉलंटियर्स से उसे पंडाल के बाहर ले जाने को कहा। शिकायतकर्ता के अनुसार, अभिजीत वॉलंटियर्स के साथ उसे पंडाल के कार्यालय में ले गए और परिणाम भुगतने की धमकी दी। महिला ने अभिजीत और उनकी बहन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

मनोरंजन से जुडी कई महिला पत्रकारों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि यह कोई नई बात नहीं है। वे हमेशा ही मौके का गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। लेकिन कभी नौकरी बचाने तो कभी बदनामी के डर से कोई मामले को उछालता नहीं है।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने जब अभिजीत को इस मामले में उनकी राय जानने के लिए मैसेज किया तो उन्होंने पत्रकार को पाकिस्तानी आईएसआई मीडिया का नुमाइंदा कहा।

जमकर फैलाया रायता

Amit Dwivedi@Navpravah.com
रेटिंग*/*****
निर्माता– धर्मा प्रोडक्शन्स और फैंटम
निर्देशक– विकास बहल
संगीत– अमित त्रिवेदी
कलाकार– पंकज कपूर, शाहिद कपूर,संजय कपूर, आलिया भट्ट और सुषमा सेठ।

क्वीन जैसी बेहतरीन फिल्म के निर्देशक विकास बहल फिल्म शानदार में कोई जौहर नहीं दिखा पाए। निर्देशक ने सभी मझे कलाकारों का दुरुपयोग किया है। बिना किसी ओर-छोर की कहानी लिए फिल्म के डायरेक्टर विकास और स्क्रीनप्ले राइटर अन्विता दत्त ने साथ में जमकर रायता फैलाया है। फिल्म एक सपने जैसा ही लगता है। फिल्म की शुरुआत और मध्य में नसीरुद्दीन शाह के नैरेशन का हिस्सा ही शानदार है।

पंकज कपूर (टाटा) का परिवार दिवालिया होता है, आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पंकज कपूर की माँ (सुषमा सेठ) ने खानदान की बड़ी बेटी ईशा (सना कपूर) की शादी एक संपन्न सिंधी परिवार के एक लड़के से तय कर देती हैं। बाद में यह पता चलता है कि सिंधी परिवार भी दिवालिया है। दोनों परिवारों के बीच एक बिज़नेस डील होती है, इसी डील का नाम होता है ‘शानदार’। अब इसका नाम शानदार क्यों है, बिज़नेस डील कब हुआ, कहाँ और क्यों यह बताना निर्देशक और लेखिका ने उचित नहीं समझा।

एकदम फ़िल्मी अंदाज़ में यूरोप की खूबसूरत वादियों की सड़क पर पंकज कपूर की कार से शाहिद के मोटर साईकिल की भिड़ंत हो जाती है। और इसी घटना में हीरो मिलता है अपनी हीरोइन से। इसके बाद फ़िल्म में घटने वाली हर एक चीज़ मात्र सपने की तरह है। कब क्या हो जाएगा, इसका कोई ठिकाना नहीं। आलिया को इनसोमनिया नामक बीमारी होती है, जिसमें रात में नींद नहीं आती। संयोग देखिए कि शाहिद को भी नींद नहीं आती। पंकज शाहिद को इसलिए पसंद नहीं करते कि कार एक्सीडेंट के दौरान शाहिद ने अच्छा व्यवहार नहीं किया था। इसलिए दोनों में नोक झोक भी दिखाया गया है। ईशा की जिस लड़के से शादी तय की जाती है वह उसकी बेइज़्ज़ती करता है जिसकी वजह से ईशा दुखी रहती है। ईशा के मोटापे का मज़ाक उड़ाने और उस पर हँसने की वजह से ईशा भी हैरी को पसंद नहीं करती।

फ़िल्म में कलाकारों के अभिनय में ज़रा भी बनावटीपन नहीं नज़र आती। पूरी फ़िल्म में निर्देशक,कहानीकार और पटकथा लेखक ही कमज़ोर सिद्ध होते दिखे हैं।

ज़बरदस्ती के संवाद भर-भर के डाला गया है, जिनकी कोई ज़रूरत नहीं थी। अंजना सुखानी जैसी कलाकारा को फ़िल्म में एक भी डायलॉग नहीं दिया गया।

अगर आप समीक्षा को पढ़कर ऊब गए हैं तो मान लीजिए कि फ़िल्म को झेल पाना मुश्किल है। कहानी को दिशाहीन भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि किसी भी एंगल से फ़िल्म में कहानी नज़र ही नहीं आई। हाँ, अमित त्रिवेदी के संगीत ने जान ज़रूर बचा ली। संगीत ने फ़िल्म में ऑक्सीजन का काम किया है।

क्यों देखें- ऐसी कोई वजह नहीं है, जो आपको फ़िल्म देखने पर मजबूर करे।

क्यों न देखें- फ़िल्म की कहानी का कोई अता पता नहीं है। समय और पैसा ज़ाया नहीं करना है तो मनोरंजन का कोई और विकल्प तलाश लें।

लेखकों का विरोध साहसिक- शर्मिला टैगोर

Amit Dwivedi@Navpravah.com

साहित्य अकादमी द्वारा प्रदान किए गए सम्मान को लौटाने का सिलसिला तो जारी ही है, साथ ही लौटाने वाले साहित्यकारों के समर्थकों की भीड़ भी बढती ही जा रही है। इसमें एक नया नाम जुड़ गया है, मशहूर अदाकारा शर्मिला टैगोर का। शर्मिला ने देश में बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ साहित्य अकादमी लौटाने वाले लेखकों का खुलकर समर्थन करते हुए इसे लेखकों का साहसिक कदम बताया।

अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने सीआईआई बिग पिक्चर समिट 2015 में अपने वक्तव्य में यह बात कही। शर्मिला ने कहा कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

वर्तमान स्थिति के बारे में शर्मिला ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि लेखकों का विरोध प्रदर्शन असहिष्णुता के खिलाफ अल्टिमेटम है।

दादरी मामले पर उन्होंने कहा कि दादरी में जो हुआ वह खौफनाक था। ऐसी घटनाओ की निंदा करने भर से कुछ नहीं होगा। इस मामले में दोषी को सज़ा मिलना आवश्यक है। अगर सज़ा न मिली तो देश में गलत सन्देश का प्रसार होगा जोकि बिलकुल गलत है। उन्होंने कहा कि अगर हम खामोश रह जाएंगे तो ऐसा करने वालों का साहस बढ़ता जाएगा।

शर्मिला टैगोर ने कहा कि बॉलीवुड अनेकता में एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि इस तरह के विरोध से देश की इमेज सुधारने का मौका मिलेगा।

ज़रूरतमंदों को दी जाए यश भारती पेंशन की राशि- अमिताभ बच्चन

Amit Dwivedi@Navpravah.com

अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध किया है कि उनकी पत्नी जया बच्चन और बेटे अभिषेक बच्चन को यश भारती पुरस्कार में प्राप्त होने वाले मासिक 50-50 हज़ार रुपए की की पेंशन राशि को गरीबों और ज़रूरतमंदों को दे दिया जाए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यश भारती पुरस्कार प्राप्त करने वालों को 50,000 रुपए मासिक पेंशन देने की घोषणा की थी। यश भारती पुरस्कार कला, संस्कृति, खेल, साहित्य, चिकित्सा, पत्रकारिता और समाजिक सेवाओं से जुड़े राज्य के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से संबंध रखने वाले 73 साल के अभिनेता ने कहा कि इस सन्दर्भ में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से स्वयं बात करेंगे और आग्रह करेंगे कि जया और अभिषेक की पेंशन उन लोगों में वितरित की जाए, जिन्हें सही मायने में इसकी ज़रुरत है।

अमिताभ बच्चन ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है, जिसमें स्पष्ट है कि ‘मैं अपने परिवार के सदस्यों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के यश भारती अवॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हर अवॉर्ड प्राप्त करने वाले को 50,000 रुपए प्रति माह पेंशन देने के निर्णय का सम्मान करता हूं। मैं बड़ी विनम्रता से प्रदेश सरकार से मेरे परिवार को मिलने वाली संपूर्ण राशि को परोपकार से जुड़ी किसी योजना या गरीबों एवं जरूरतमंदों की भलाई के लिए देने का आग्रह करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री से इस सन्दर्भ में व्यक्तिगत रूप से भी संपर्क करूँगा।

वीरेंद्र सहवाग के संन्यास की घोषणा

Sports Team@Navpravah.com

पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के संन्यास की घोषणा के बाद ही उनके साथियों और प्रशंसकों केव ओर से बधाइयों का तांता लग गई है। उनके साथियों और पूर्व सहयोगियों ने उनके बेहतर भविष्य की बधाई ट्वीट के ज़रिए दी।

मास्टर बलास्टर सचिन तेंडुलकर ने ट्वीट कर कहा कि वीरेंद्र सहवाग ने शानदार खेल से क्रिकेट की दुनिया में अपनी एक अलग ही जगह बनाई है। जीवन और बैटिंग के प्रति उनके सहज दृष्टिकोण से मुझे प्रेम था। सचिन ने कहा कि सेहवाग के साथ फील्ड पर खेलने का अलग ही मज़ा आता था। उन्होंने कहा कि  मुझे उम्मीद है कि सहवाग आगे भी सबके चेहरों पर मुस्कान लाएंगे।

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने ट्वीट किया कि मैंने विवियन रिचर्ड्स को खेलते हुए नहीं देखा है लेकिन मैं गर्व से कह सकता हूं कि मैंने सहवाग को बेस्ट बॉलिंग अटैक को खेलते देखा है। धोनी ने उन्हें उनके शानदार भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।

विराट कोहली ने अपने ट्वीट में लिखा, ‘सहवाग भाई आपके साथ खेलकर बहुत खुशी हुई। आपकी सलाह और यादों के लिए शुक्रिया।’

वीवीएस लक्ष्मण ने सहवाग को शानदार करियर की बधाई दी। लक्ष्मण ने सभी यादों के लिए सहवाग को शुक्रिया कहा और उनके परिवार को भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

गोमूत्र पियो और गोबर खाओ- मार्कंडेय काटजू

Amit Dwivedi@Navpravah.com

हमेशा किसी न किसी बात पर चर्चा में बने रहने वाले मार्कण्डेय काटजू ने बढ़ती मंहगाई पर एक बार फिर से केंद्र सरकार पर हमला बोला है। दाल,सब्ज़ी और दवाइयों के दामों में लगातार हो रहे इज़ाफ़े पर उन्होंने केंद्र पर तंज कसते हुए कहा कि आज से गौमूत्र पीजिए और गोबर खाइए क्योंकि दवाइयां, दाल और प्याज बेहद महंगी हो गई है।

काटजू अक्सर ऐसे बयान देते रहते हैं, जो विवाद का रूप ले लेती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही बयान उन्होंने दे दिया है। काटजू ने अपने दूसरे पोस्ट में लिखा है कि बैन गोमांस खाने पर है न कि गाय के गोबर पर। इसलिए उम्मीद है कि अगर मैं गोबर खाऊंगा तो मेरी हत्या नहीं की जाएगी।

काटजू का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब विश्व हिंदू परिषद ने गोमूत्र और गोबर के वैज्ञानिक फायदों पर एक बुकलेट जारी किया है।

काटजू ने वर्तमान में बढती मंहगाई पर अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि ‘मैं मानता हूं कि गोमूत्र बीमारियों को दूर करता है और गोबर दाल और प्याज का बेहतर सब्सिट्यूट बन सकती है जो महंगे हो गए हैं।’

इस समय दालों की कीमत 200 रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गई। फिलहाल मंहगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्र ने 3 हजार टन मसूर की दाल आयात करने का फैसला किया है। साथ ही केंद्र ने राज्य सरकारों पर जमाखोरों पर सख्त कार्रवाई करने की हिदायत दी है।

कॉंग्रेस में टिकट के लिए होता है यौन शोषण- चेरियन फिलिप

Amit Dwivedi@Navpravah.com

कॉंग्रेस के पूर्व नेता चेरियन फिलिप ने वरिष्ठ कॉंग्रेसी नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी में महिलाओं को टिकट लेने के लिए यौन सम्बन्ध बनाना पड़ता है। फिलिप ने यह बयान अपने फेसबुक पेज पर दिया। जिसके बाद से कॉंग्रेसी नेताओं के होश उड़े हुए हैं।

फिलिप एक समय में कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता ए.के. एंटनी के बेहद करीबी थे, जिसकी वजह से इस बयान से खलबली मची है।

फिलिप ने फेसबुक पर लिखा कि यूथ कांग्रेस ने शर्ट उतार कर जो प्रदर्शन किया यह मात्र एक मॉडल प्रदर्शन था। अतीत में जिन महिलाओं ने इस तरह का प्रदर्शन गुपचुप तरीके से किया, उन्हें कांग्रेस का टिकट मिल गया।

हाल ही में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय निकाय चुनाव में टिकट न दिए जाने के विरोध में शर्ट उतार कर प्रदर्शन किया था जिसके बाद फिलिप का यह बयान आया।

फिलिप के इस बयान के बाद से ही पार्टी में रोष व्याप्त है और इस बयान को वापस लेने की मांग भी की जा रही है लेकिन फिलिप अपने इस बयान को लेकर अडिग हैं। केरल प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष बिंदू कृष्णा ने कहा कि फिलिप के इस बयान से महिला सदस्यों का अपमान हुआ है और वे इस बात से आहात हुई हैं। अगर वे अपना बयान वापस नहीं लेते तो उन्हें न्यायालय का सहारा लेना पड़ेगा।

बिंदू कृष्णा को जवाब देते हुए फिलिप ने कहा कि यह मेरी शालीनता है कि मैंने कांग्रेस के कई राज नहीं खोले हैं। अगर मुझे महिलाओं का विरोधी बताया गया तो मुझे उन तमाम घटनाओं का जिक्र करना होगा, जिसमें कांग्रेस नेताओं द्वारा महिलाओं का शोषण की बात साफ़ हो जाएगी। और जो अभी तक दुनिया के सामने नहीं आया है वह भी उजागर हो जाएगा। उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी सब पता है। अगर कृष्णा कोर्ट जाती हैं तो कॉंग्रेस को कलई सबके सामने खुल जाएगी।

फिलिप ने कहा कि मेरा पॉलीग्राफी टेस्ट करा लिया जाए, ताकि सारा सच ख़ुद-ब-ख़ुद दुनिया के सामने आ जाए।

कोंग्रेसी नेताओं को फंसा कर सपा कर रही है मोदी को खुश- जायसवाल

Amit Dwivedi@navpravah.com

वाराणसी में साधुओं द्वारा निकाले गए विरोध मार्च को पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने साज़िश कहा है। उन्होंने सपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ताधारी सपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुश करने के लिए कॉंग्रेसी नेताओं को गिरफ्तार करवा रही है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री जायसवाल ने आरोप लगाया कि सपा अपने नेताओं को सीबीआई के मामलों से बचाने के लिए प्रधानमंत्री को खुश करने में जुटी है। उन्होंने कहा कि सपा को डर है कि अगर किसी भी वजह से केंद्र सरकार नाराज़ हुई तो उनके नेताओं की असलियत सबके सामने आ जाएगी। इसलिए ये कॉंग्रेसी नेताओं को फंसा रहे हैं।

जायसवाल ने धमकी भी दिया कि अगर कांग्रेस विधायक अजय राय को छोड़ा नहीं गया तो वे विधानसभा की कार्यवाही होने नहीं देंगे। उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि ये दोनों एक जैसे हैं और यूपी की सरकार मोदी सरकार को खुश करने में लगी है।

जायसवाल ने राय पर रासुका लगाए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि क्या राय कोई पाकिस्तानी आतंकवादी हैं जो राज्य सरकार उनपर इस तरह की ज़्यादती कर रही हैं।

कहीं आपकी लव लाइफ का न हो जाए पंचनामा..!

Amit Dwivedi@Navpravah.com,

निर्देशक : लव रंजन

संगीत : हितेश सोनिक, शरीब साबरी, तोषी साबरी

कलाकार : कार्तिक आर्यन, नुसरत भरूचा, सनी सिंह, ओंकार कपूर, सोनाली सहगल, इशिता शर्मा, शरत सक्सेना

‘प्यार का पंचनामा 2’, बेहद गुदगुदाने वाली फ़िल्म है। फ़िल्म में दिखाया गया है कि लडकियां आज अपनी ख्वाहिशें पूरी करने के लिए कितनी खूबसूरती से लड़कों का इस्तेमाल करती हैं। इसलिए अगर आप अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फ़िल्म देखने जा रहे हैं तो इस बात का ख़याल रखें कि इस फ़िल्म का कांसेप्ट आपकी निजी ज़िन्दगी पर भारी न पड़ जाए!

कहानी आगे बढती है और दिल्ली में रहने वाले तीन लड़कों गोगो (कार्तिक आर्यन), ठाकुर (ओंकार कपूर) और चौका (सनी सिंह) की ज़िन्दगी में चीकू, सुप्रिया और कुसुम की एंट्री होती है। इश्क़ की सरहद को पार करते हुए ये तीनों पहले तो उनकी हर फरमाइश पूरी करते हैं और रिश्ते को लेकर गंभीर भी होते हैं लेकिन धीरे-धीरे इन्हें समझ आता है कि लड़कियां बस इनका फायदा उठा रही हैं।

जवानी में लड़कियों को पाने के लिए लड़के किस हद तक जाते हैं ये बात फिल्म में अच्छे से दिखाई गई है।

लगातार गुदगुदाने वाले दृश्य आपको बोर नहीं होने देंगे। निर्देशक लव की कल्पनाशीलता अवश्य ही लडखडाती नज़र आती है लेकिन फ़िल्म के लेखक ने अपनी ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई है। गाने बहुत अधिक आकर्षित नहीं कर पाए हैं। हाँ, सिनेमैटोग्राफी आपको ज़रूर अच्छी लगेगी।

फिल्म के संवाद चुटीले हैं लेकिन अपशब्दों का भी जमकर इस्तेमाल हुआ है। बीप का भरपूर इस्तेमाल हुआ है लेकिन डायलॉग आपको आसानी से समझ में आ जाएंगे।

कार्तिक आर्यन, सनी सिंह और ओंकार कपूर, इन तीनों कलाकारों की ट्यूनिंग ज़बरदस्त है। वहीं लड़कियों के किरदार नुसरत भरुचा, ईशिता शर्मा और सोनाली सहगल ने निभाए हैं, जिनसे जमकर ओवर एक्टिंग कराई गई है।

जिन्होंने प्यार का पंचनामा का पहला भाग देखा है, उन्हें इस फ़िल्म में चेहरे के अलावा कुछ भी फ्रेश नज़र नहीं आएगा। कहना ग़लत न होगा कि दूसरा पंचनामा मात्र टाइम पास है। दर्शक इस बात का ख़याल रखें कि इस फ़िल्म के कांसेप्ट को उनकी गर्लफ्रेंड दिल पर न लें।