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कांग्रेस में चल रहे शीतयुद्ध पर विराम लगाने के लिए अब पार्टी उपाध्यक्ष को ही मैदान में उतारना पड़ रहा है. पिछले कुछ समय से कांग्रेस दर्शन में प्रकाशित विवादित लेख को लेकर मुंबई कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष संजय निरूपम निशाने पर हैं. जिसका फायदा उठाने के लिए निरूपम विरोधी गुटों ने दिल्ली पहुंच कर अपनी-अपनी फील्डिंग शुरू कर दी है. मुंबई कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी २ दिवसीय मुंबई यात्रा पर १५ तारिख को आएँगे. लेकिन सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ राहुल दिल्ली से गुरूवार (आज) शाम 4.45 बजे एयर इंडिया की फ्लाइट न. 102 से मुम्बई के लिए उड़ान भरेंगे और 6.55 बजे मुम्बई एयरपोर्ट पर टेक ऑफ करेंगे.
मुंबई में इस बार की राहुल गांधी पार्टी में गुटबाज़ी करने वाले नेताओं की क्लास ले सकते हैं. विश्वस्त सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ गुरूवार को शाम मुंबई आने के बाद ही राहुल कुछ वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करेंगे, जिसमें वर्तमान में चल रही पार्टी नेताओं की गतिविधियों पर चर्चा होगी.
अगर अचानक राहुल का पठानकोट (पंजाब) का दौरा तय नहीं हुआ तो गुरूवार शाम 7 बजे राहुल मुंबई एयरपोर्ट पहुंच जाएंगे. साथ ही 17 जनवरी को वे वापस दिल्ली के लिए रवाना होंगे. वह 17 जनवरी को मुम्बई से एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर 809 से सुबह 10 बजे उड़ान भरेंगे और 12.20 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरेगे.
मुंबई कांग्रेस से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ राहुल गांधी का कार्यक्रम-
15 जनवरी 2016
1.30 बजे : मुंबई एयरपोर्ट पर उतरेंगे
3 बजे : मालाड(प.) में कार्यकर्ता सम्मलेन को संबोधित करेंगे
4.30 बजे : मुंबई कांग्रेस कार्यालय में स्व. मुरली देवड़ा सभागृह का नामकरण
6 बजे : महालक्ष्मी रेसकोर्स स्थित टर्फ क्लब में मीडिया से बातचीत
16 जनवरी 2016
सुबह साढ़े 9 बजे : विलेपार्ले पश्चिम स्थित एनएम कालेज में छात्रों से संवाद
11 बजे : बांद्रा से धारावी तक सस्ती बिजली अभियान यात्रा का नेतृत्व. 8 किमी तक पैदल यात्रा.
कांग्रेस के मुखपत्र ‘कांग्रेस दर्शन’ में सोनिया गांधी के पिता और उनके ससुर के बारे में विवादित लेख को लेकर पत्रिका के संपादक संजय निरुपम फंसते नज़र आ रहे हैं. प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ प्रकाशित लेख को लेकर पार्टी की मुखिया ने निरुपम से इस सन्दर्भ में जवाब माँगा है.
कांग्रेस दर्शन में छपे विवादित लेख को लेकर पत्रिका कांग्रेस दर्शन के कंटेंट एडिटर को निलंबित ज़रूर किया गया था, बावजूद इसके संजय निरूपम की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं. हालाँकि इस सन्दर्भ में निरुपम ने माफी माँगी थी. वरिष्ठ कांग्रेस नेता ए.के. एंटनी की अध्यक्षता वाली कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति ने इस विवाद को लेकर निरूपम को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
सूत्रों के मुताबिक़ कांग्रेस दर्शन में प्रकाशित लेख को लेकर निरूपम से कुछ ही दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है. पार्टी आलाकमान ने पत्रिका में जवाहर लाल नेहरू की आलोचना करने और सोनिया गांधी के पिता को ‘फासीवादी सैनिक’ करार देते हुए, लिखे गए लेख के मुद्दे पर उनसे जवाब तलब किया है.
पार्टी की मुंबई ईकाई के जर्नल ‘कांग्रेस दर्शन’ में प्रकाशित लेख में कश्मीर, चीन और तिब्बत के हालात के लिए जवाहर लाल नेहरू को दोषी ठहराया गया था और एक अन्य लेख में पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी के बारे में विवादित टिप्पणियां की गई थीं. मामला और गर्म इसलिए भी हो गया था क्योंकि यह विशेष अंक पार्टी के 131वें स्थापना दिवस के मौके पर प्रकाशित हुआ था.
पार्टी के मुखपत्र में ही इस तरह के विवादित लेख के छप जाने की वजह से अन्य पार्टियों ने भी काफी चुटकी ली थी, जिसके चलते कांग्रेस काफी शर्मसार हुई थी. और अपनी ही पार्टी के मुखपत्र से दूरी बना ली थी. सोनिया गांधी के पिता को फांसीवादी सैनिक बताने और नेहरू की कश्मीर नीति पर प्रश्न चिन्ह उठाने की वजह से पार्टी के ही वरिष्ठ नेताओं को कोई जवाब नहीं सूझ रहा था.
अमेरिका में फॉर्च्यून मैगज़ीन के कवर पेज पर अमेजॉन के सीईओ जेफ बेजस को भगवान विष्णु के रूप में दिखाये जाने पर विवाद खड़ा हो गया है. फॉर्च्यून मैगज़ीन के अंतराष्ट्रीय एडिशन ने भारत में अमेजॉन के कारोबार को बढ़ाने के लिए इस बार कवर स्टोरी छापी है. कवर पेज की तस्वीर पर जेफ बेजस हाथ में कमल का फूल लिये हैं. अमेरिका में रह रहे भारतीयों ने इस तस्वीर को आपत्तिजनक बताया है. भारत में भी इसे लेकर नाराजगी जाहिर की जा रही है.
मैगज़ीन के कवर पेज पर जेफ बेजस को भगवान विष्णु के रूप में दिखाया गया है.इतना ही नहीं, पहले पृष्ठ पर अमेजॉन की भारत पर चढ़ाई का स्लोगन भी लिखा गया है. सोशल मीडिया पर इस कवर पेज को लेकर लोग अपनी नाराज़गी व्यक्त कर रहे हैं. हालांकि विवाद होने के बाद मैगज़ीन के एडिटर इन चीफ ने माफी मांगी है.
गौरतलब है कि भारत में भी क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को एक विज्ञापन में भगवान विष्णु के तौर पर पेश किया गया था जिसपर विवाद हुआ था. इसके बाद यहां उनपर मुकदमा भी हुआ था और हाल ही में उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया है.
कानपुर की एक पत्रकार वार्ता में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐलान किया कि आगामी विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी और सपा अकेले अपने दम पर सरकार बनाएगी.
आध्यात्मिक गुरु श्री एम् द्वारा कानपुर के ग्रीनपार्क में आयोजित कन्याकुमारी से कश्मीर की आशा यात्रा के स्वागत समारोह में हुई पत्रकार वार्ता में जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पूछा गया कि उत्तरप्रदेश में सपा किस पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाएगी, तब अखिलेश ने जवाब दिया कि सपा अकेले अपने दम पर यूपी में सरकार बनाएगी. अखिलेश ने इशारों इशारों में कहा कि जो लोग ऐसे पदों पर बैठे हैं, उन्हें इस बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि मुख्यमंत्री किसी पार्टी का नहीं होता. वह राज्य की तरक्की के लिए समझौता करता है और उसे आगे बढ़ाने के लिए बलिदान देता है. हम प्रदेश में विकास बेरोज़गारी व तरक्की के लिए काम कर रहे हैं.
भाजपा नेताओं द्वारा राम मंदिर बनाने का पक्ष लेने के विषय में उन्होंने भाजपा का नाम लिए बिना कहा कि जो लोग माहौल बिगाड़ने का काम कर रहे हैं उन्हें पकड़ कर सवाल पूछो. वे लोग प्रदूषण फैलाने का काम कर रहे हैं, क्योंकि कोई भी चीज़ यदि सीमा के बाहर जाए तो वह गलत है. अब कौन देश-प्रदेश में प्रदूषण फ़ैलाने का काम कर रहा है, ये आप हमसे बेहतर समझते हैं.
उन्होंने कहा कि सपा सरकार विकास का जो भी कार्य कर रही है, चाहे वो एम्बुलेन्स सेवा हो, मेट्रो सेवा हो, वह केवल सपा नेताओं के लिए तो है नहीं,पूरे समाज के लिए है.
शोभा यात्रा के स्वागत समारोह में अखिलेश ने कहा कि आज से कुछ साल पहले गंगा इतनी साफ़ थी कि लोग उसका पानी पीने के लिए इस्तेमाल करते थे. उन्होंने दिल्ली के प्रदूषण का भी उदाहरण दिया कि किस तरह प्रदूषण कम करने के लिए सम विषम नियम का सहारा लेना पड़ रहा है. उच्चतम न्यायालय इस बात का निर्धारण करेगी की आवाज़ कितनी तेज़ हो. यह सब केवल हमारी आपकी वजह से हो रहा है. इसलिए इस दिशा में फ़िक्र करने की व काम करने की ज़रूरत है.
क्या कूल हैं हम सिरीज़ की फिल्मों का सबसे बड़ा फैन तो हमेशा से ही यूथ वर्ग रहा है. सूत्रों की माने तो गर्ल्स के बीच तुषार और आफताब और उनकी आने वाली फिल्म क्या कूल हैं हम काफी पॉपुलर है. इसलिए भारत के अलग – अलग शहरों में गर्ल्स की डिमांड पर दोनों कलाकार फिल्म को प्रमोट करने के लिए जा रहे हैं. खास बात यह है कि प्रमोशन्स केवल गर्ल्स कॉलेजेस में होंगे. कैंपस में जाकर टीम फिल्म के सीन और डॉयलॉग के बारे में स्टूडेंट्स के साथ रुबरू होगी.
करीब 15 दिन बाद क्या कूल हैं फिल्म रिलीज होने वाली है. फिल्म को देखने के लिए दर्शन कितने बेकरार हैं इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि फिल्म का ट्रेलर लॉन्च होने के बाद रिकार्ड तोड़ बार इसे देखा गया. 15 दिसंबर को लॉन्च हुए इसके ट्रेलर को 15 दिनों से कम समय में ही 13 मिलियन बार देखा जा चुका है. ट्विटर पर कई नामों से साल के आखिरी तक लगातार ट्रेंड में बना रहा.
आह हाय जवानी ले डूबी और आई एम कमिंगगगग…को बैकग्राउंड में बजाकर क्या कूल हैं हम-3 का ट्रेलर लॉन्च हुआ और दर्शकों ने इसे पलकों पर उठा लिया. पिछली दोनों फिल्मों की अपेक्षा इस फ़िल्म में एडल्ट कॉमेडी का डोज़ ज्यादा है.
क्या सुपर कूल हैं हम 2005 में आई थी। करीब 7 साल बाद इसका सीक्वल आ रहा है, तो फिल्म को केवल सेक्स कॉमेडी के अलावा कुछ और भी पुट अप किया गया है. जैसे दूसरी फिल्मों और कलाकारों का जमकर मजाक उड़ाना तथा फेमस कैरक्टर्स पर जोक बनाना.
फ़िल्म मेकर ट्रेलर के रिलीज होने के बाद से ही काफी उत्साहित हैं और हों भी क्यों न ,15 दिनों के अंदर ही फिल्म के ट्रेलर को 13 मिलियन से ज्यादा व्यू मिले हैं. और सबसे बड़ा बोनस तो ईरानी मॉडल मंदना करीमी रही। मंदना फिल्म के आने से पहले ही भारतीय दर्शकों के बीच बिग-बॉस में अपनी ज़बरदस्त इमेज बना चुकी हैं. मंदना फैक्टर कई दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच के तो जरूर लाएगा क्योंकि वो भी कईयों की फैंटसी हैं और फिल्म भी कुछ एसी ही है.
पश्चिम बंगाल के मालदा में बीजेपी सांसद एसएस अहलूवालिया, भूपेंद्र यादव और बीडी राम हिरासत को हिरासत में लिया गया है. इन तीनों सांसदों को पुलिस ने मालदा जाते वक्त हिरासत में लिया है.
सूत्रों के अनुसार मौके पर हालात की जानकारी लेने के लिए पार्टी की ओर से तीन सदस्यीय दल को मालदा भेजा गया था. लेकिन, स्थानीय प्रशासन ने उन्हों हिरासत में ले लिया है ताकि मामले और ज़्यादा तूल न पकड़े और इलाके में शांति बनाई जा सके.
गौरतलब है कि कमलेश तिवारी के पैगम्बर पर दिए गए विवादित बयान के बाद हुए मुस्लिम प्रदर्शन में जम के हिंसा हुई थी.इसीलिए शांति बनाए रखने के उद्देश्य से बीजेपी नेताओं को जाने से रोका गया है क्योंकि अभी भी वहाँ तनाव की स्थिति बरक़रार है और भारी मात्रा में पुलिस बल की तैनाती की गई है.
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने आज श्रीनगर जाकर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्षा महबूबा मुफ़्ती सईद से मुलाकात की व उनके पिता दिवंगत नेता मुफ़्ती मोहम्मद सईद के निधन पर शोक व्यक्त किया. उनके साथ अम्बिका सोनी,गुलाम नबी आज़ाद तथा अन्य कई कांग्रेस नेता भी उपस्थित थे.
यह मुलाक़ात गुपकर स्थित महबूबा के फेयरव्यू निवास पर हुई जहां दोनों ने तक़रीबन 20 मिनट तक बातचीत की.
सोनिया गांधी व महबूबा मुफ़्ती की इस मुलाक़ात को काफी अहम् बताया जा रहा है और राजनीतिक गलियारों में उनकी यह मुलाक़ात खासी चर्चा का विषय है क्योंकि मुफ़्ती मोहम्मद सईद के निधन के पश्चात् भाजपा ने मेहबूबा के मुख्यमंत्री बनाने के विषय में कोई औपचारिक समर्थन नहीं दिया है.
सूत्रों के अनुसार पीडीपी और भाजपा सरकार के गठन पर नए सिरे से बातचीत कर रहे हैं.राज्यपाल एन एन वोहरा ने शुक्रवार को भाजपा व पीडीपी से इस विषय में जल्द से जवाब माँगा था.पीडीपी के सभी 28 विधायकों ने राज्यपाल को महबूबा के पक्ष में अपना समर्थन पत्र सौंप दिया है पर अब तक भाजपा की ओर से कोई जवाब नहीं आया है इसीलिए राज्यपाल ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया है.
गौरतलब है की 2002 से 2008 तक कांग्रेस व पीडीपी ने जम्मू कश्मीर में गठबंधन सरकार बनाई थी परंतु 2008 में यह गठबंधन ख़त्म हो गया.अब भाजपा की ओर से कोई औपचारिक समर्थन ना मिलने व इस बीच सोनिया के महबूबा से मुलाक़ात करने के कारण यह मुद्दा सुर्ख़ियों में है कि मुलाक़ात के पीछे वास्तविक वजह क्या है.
उस ऐतिहासिक खंडहर का परिसर पर्यटकों की सरगर्मी से पुनः जीवंत होने लगा।शांति बनाए रखने और मोबाइल बंद रखने के निर्देश जारी हो गए।इसी गहमा-गहमी में जगजीत सिंह की मखमली आवाज़ उभरने लगी -” एक गुलशन था जलवानुमां इस जगह , रंग-ओ-बू जिसकी दुनिया में मशहूर थी।बेगमों की हंसी गूंजती थी यही , शाह की शानोशौकत में भरपूर थी।”साथ ही रंगीन प्रकाश-पुंज के साथ-साथ महानायक अमिताभ बच्चन का गम्भीर घोष उभरने लगा। अद्भुत कमेंट्री , संगीत , संवाद और प्रकाश के समवेत मिश्रण में गोलकुण्डा का इतिहास उतरने लगा।सोते हुए इतिहास का स्रोत रिस-रिस कर टलमल कर रहा था।तारों से भरे आकाश के नीचे सदियां बोल रही थीं।ध्वनि और प्रकाश के सम्मिलित प्रभाव से हम जान पाए कि चार मील के दायरे में फैले गोलकुण्डा फोर्ट की गाथा सन् 1364 से शुरू होती है।आठ द्वारों और 87 बुर्जों से सुसज्जित यह किला ऊँची-ऊँची चारदीवारियों से घिरा है।मूसी नदी के किनारे बसा यह दुर्ग ग्रेनाइट पहाड़ी के तीन परकोटों पर बना है। शुरूआती दौर में यह वारंगल के काकतिया और देवगिरि के यादव वंश के अधीन रहा ।इस काल में भारतीय शिल्पकारी अपने वैभव पर थी।किले के भित्तियों पर कमल, पुष्प , पत्र , कलियां स्वस्तिकार स्तम्भ शीर्ष आदि विशिष्ट चिह्न बने हैं। ध्वनि-प्रसारक तकनीकी का बेजोड़ उदाहरण यहां देखने को मिलता है।मुख्य द्वार के निकट बने एक गुम्बद के नीचे से जब ताली बजाई जाती है तो यह 400 मीटर ऊपर बने दरबार तक सुनाई देती है।सम्भवतः यह तकनीकी सुरक्षा की दृष्टि से विकसित की गई होगी।
1518 के आसपास कुतुबशाही शासक अस्तित्त्व में आए।सुलतान कुतुबशाह ने किले का विस्तार करना शुरू किया।कुतुबशाही वास्तु शैली में अनेकों निर्माण कराए गए।तारामती , प्रेमामती , हयात बख्शी बेग़म और भागमती के महल भी यहीं हैं।अनेक मधुर और रोमांटिक प्रेम कथाओं का सम्बन्ध इन्हीं महलों से था।इनके अलावा शाही महल ,सभागार , बारूदखाना , शाहीहरम के खंडहर तथा बाटिकाओं , बीथियों और जलाशयों का वैभवशाली रूप चारों ओर बिखरा है। क़ुतुबशाही की प्रारम्भिक राजधानी गोलकुण्डा हीरों का विश्व बाज़ार- थी।मुसलीपट्टम यहां का विश्व प्रसिद्ध बन्दरगाह है।नृत्य , संगीत , कला और साहित्य का यह स्वर्णिम काल था।हैदराबाद का संस्थापक मुहम्मद कुली उर्दू कविता का आदि कवि था।उसे उर्दू कविता के जन्मदाता के रूप में जाना जाता है।राजदरबार में उर्दू साहित्य के पनपने और विकसित होने की उर्वर जमीन भी उसी ने मुहैया कराई थी।28 जनवरी 1627 ई. के एक छद्म युद्ध में औरंगज़ेब ने इस किले को जीत लिया।एक बार फिर एक भरी-पूरी संस्कृति को मटियामेट करने की क्रूर कोशिशे हुईं। गोलकुण्डा फोर्ट मुगलों के अधीन आ गया।लगभग एक शताब्दी बाद हिन्दू राजा शिवाजी ने बीजापुर और गोलकुण्डा की सल्तनत में अपना हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया।महाकवि भूषण ने शिवाजी की ऐसी कोशिशों के बारे में लिखा है – ” बीजापुर, गोलकुण्डा आगरा दिल्ली कोट । बाजे-बाजे रोज़ दरवाजे उधरत है।”टूरिस्ट गाइड ने हमे बताया कि गोलकुण्डा का कोहिनूर हीरा ब्रिटेन की राजशाही मुकुट का शान था ।
इसी तरह लगभग डेढ़ घण्टे तक हम गोलकुण्डा के प्रांगण में बैठे इतिहास के वैभव और पतन के महानद में डूबते- उतराते रहे।हम अपनी – अपनी थकान भूल तरोताज़ा महसूस कर रहे थे। हमारी सहयात्री श्रीमती संध्या पिसाल ने कहा ” इतनी लम्बी यात्रा तय करने के बाद मैं तो भूल ही गई कि हम थके भी हैं।गोलकुण्डा के इतिहास की इतनी खूबसूरत प्रस्तुति नायाब थी।” आज ही हम दोपहर एक बजे शताब्दी एक्सप्रेस से सिकन्दराबाद उतरे थे।हमारी इस यात्रा का जिम्मा “ऐडवेंचर ग्रुप” को सौंपा गया था।लगभग तीन बजे हम मानसरोवर चार सितारा होटल में पहुंचे।जल्दी-जल्दी तैयार होकर हम गोलकुण्डा फोर्ट की तरफ बढ़ चले।यहां आकर हम तृप्त थे क्योंकि भारतीय इतिहास के एक वृहद कालखण्ड को नज़दीक से देख पाए थे।
दूसरे दिन सुबह तकरीबन दस बजे हम रामोजी फिल्म सिटी पहुंचे।टिकट आदि औपचारिकता के बाद 2000 एकड़ में फैले इस विस्तृत भूखण्ड में हमने विधिवत प्रवेश किया।अंदर, बस से उतरने के बाद पता चला कि शोज़ शुरू होने वाले हैं।झटपट थिएटर में आ विराजे । ‘रामोजी फ़िल्म सिटी’ के मालिक रामोजी राव के परिचय से शो शुरू हुआ ।इसमें फ़िल्म-निर्माण से सम्बंधित उन सभी चीजों पर प्रकाश डाला गया जिसके विषय में आमतौर पर लोगों में कौतूहल बना रहता है।बतौर डेमो हमारी एक साथी श्रीमती शमशाद पठान को बसंती के रोल में प्रस्तुत किया गया।इन्हें एक बग्घी में बिठाकर नेपथ्य में एक आदमी से बग्घी को हिलाने के लिए कहा गया।बाद में विकसित तकनीकी की सहायता से डाकुओं के डर से बग्घी पर सवार बसंती (जो कि श्रीमती शमशाद स्वयं थीं) को भागते हुए दिखाया गया जो दर्शकों को बिल्कुल वास्तविक लगा।इसी तरह फ़िल्म- निर्माण से सम्बंधित कई बारीकियों को अलग-अलग सभागृहों में बिठाकर समझाया गया।
भरपूर मनोरंजन से सुसज्जित रामोजी फ़िल्म सिटी की हैसियत विश्व-स्तर की है।यहां 20 विदेशी और 40 देशी फिल्मों का निर्माण एक साथ हो सकता है।मशहूर फिल्म निर्माता और मीडिया बैरॉन रामोजी राव ने 1996 में इसकी नींव रखी थी।हिंदी , मलयालम , तेलुगु , तमिल , कन्नड़ , मराठी , बांग्ला आदि भाषाओँ में सौ से अधिक फिल्मों का निर्माण यहां हो चुका है।फिल्म निर्माण उपकरण , ऑडियो प्रोडक्शन , फिल्म प्रोसेसिंग , कॉस्ट्यूम डिज़ाइन लोकेशन जैसे कई प्रभागों में बंटी यह फिल्म सिटी अपनी खूबसूरती में बेजोड़ है।हैदराबाद आने वाले पर्यटकों के लिए रामोजी फिल्म सिटी आकर्षण का एक कारण भी है।खुले- लाल रथनुमा कोच में गाइड उसी स्टूडियो में दुनिया की सैर कराते हैं। जापानी गार्डेन , ईटीवी प्लेनेट , ताल , कृत्रिम जलप्रपात , हवाई अड्डा , अस्पताल , रेलवे स्टेशन , चर्च , मंदिर . शॉपिंग काम्प्लेक्स आदि से रू-बरू कराता हुआ हमारा गाइड चुटीली भाषा में मनोरंजन भी कर रहा था। हैदराबादी तहज़ीब समेटे स्टूडियो का एक-एक लोकेशन दिखाता हुआ उसे किसी न किसी फिल्म से लिंक कर देता।फिल्मी- ज्ञान से लवरेज़ हम “हुसैन सागर लेक” की तरफ बढ़े।
हुसैन सागर झील हैदराबाद और सिकन्दराबाद के मध्य स्थित है।छोटी-छोटी जल-तरंगों पर पड़ते हज़ारों प्रकाश-वृत्त गोधूलि की बेला से भोर होने तक झिलमिल-झिलमिल करते रहते हैं।शाम होते ही सैलानी क्रूज़ पर सवार हो इस विहंगम दृश्य को सहेज लेना चाहते हैं।हम भी एक क्रूज़ पर सवार हुए।मनोरंजन के सभी साधनों से यह सुसज्जित था।धीरे-धीरे डीजे का कानफोड़ू संगीत शुरू हुआ।साथ ही छह नवयुवक और नवयुवतियों का एक समूह क्रूज़ के एक छोटे से स्टेज पर प्रकट हुआ।वे पूरी स्टैमिना से फिल्मों के अद्यतन गीतों पर नाचने लगे।न मेकअप न ही कोई विशेष कॉस्ट्यूम।पसीने से तर-बतर।अपने कर्म को तरज़ीह देते ये कलाकर अति साधारण कपड़ों में कुछ थके से नज़र आए।सम्भवतः उस दिन की अपनी ड्यूटी के अंतिम दौर में हों।जल्दी ही उस नृत्य और संगीत से अपने को अलग कर मैं क्रूज़ के पिछले हिस्से में आ गया।नज़रें झील पर तैरते दर्ज़नों क्रूजों पर पड़ीं।कमोबेश सभी पर डीजे की संगीत बज रहा था और सैलानी अविराम थिरक रहे थे।हम झील के बीचों बीच स्थापित महात्मा बुद्ध की प्रतिमा से गुज़र रहे थे।प्रतिमा पर तीन रंगों में गिरता प्रकाश बुद्ध की शांति को मुखर कर रहा था।कोई खलल नहीं। 18 मीटर ऊँची यह प्रतिमा रॉक ऑफ गिब्राल्टर पर स्थापित है।कहा जाता है कि 350 टन की इस मूर्ति को यहां तक लाते समय नाव पलट गई ।बाद में तकनीकी सहयोग से इसे सन् 1992 में स्थापित किया जा सका।धीरे-धीरे क्रूज़ किनारे लगी।लुम्बिनी पार्क में संगीतमय फव्वारों को देखते हुए हम अपनी बस की तरफ बढ़े।
रास्ते में रात्रि -भोजन के मेनू की चर्चा करते हुए मांड्रे जी ने बताया कि हैदराबादी बिरयानी और पुलाव यहां का शाही व्यंजन है।लज़ीज़ इतना कि बस उंगलियां चाटते रहें।मांसाहारी लोग शाही कबाब , दम का मुर्ग , मुर्ग , मेथी और शाही कोरमा सर्वाधिक पसंद करते हैं जबकि शाकाहारी पर्यटक मिर्ची का सालन , बघारे बैगन और शाही दही बड़े चाव से खाते हैं।भोजन के बाद मीठे में शाही कोरमा , खीर , फिरनी या कबाबी मीठा परोसा जाता है।यहां आने वाले सैलानी बेकरी के उत्पाद जरूर अपने साथ ले जाते हैं।मांड्रे साहब की आंखों की चमक साफ-साफ बता रही थी कि आज के डिनर में ये सभी व्यंजन अवश्य होंगे।
अगले दिन सुबह हम सालारजंग म्यूज़ियम देखने गए।इस म्यूज़ियम में स्त्री की वह मूर्ति सबके आकर्षण का केंद्र बनी । चेहरे पर पड़ा झीना घूंघट वास्तविक लगता था।प्रतिमा को बड़ी बारीकी से तराशा गया था।बताया गया इसे रोम से मंगाया गया है।दो मंजिला इस इमारत में देश-विदेश से एकत्रित 30 हज़ार से अधिक कलाकृतियां संग्रहीत हैं।निज़ाम के प्रधानमंत्री सालारजंग के शौक को जानकर आश्चर्य होता है कि एक अकेला व्यक्ति मूर्तियों , चित्रों , परिधानों , पांडुलिपियों , हथियारों आदि का इतनी प्रचुर मात्रा में कैसे संग्रह कर सकता है ? हमारे पहुंचने के तुरन्त बाद “क्लॉक शो” शुरू हुआ किन्तु समयाभाव के कारण हम खरीददारी की तरफ बढ़ गए।शॉपिंग के शौकीनों के लिए पर्ल सिटी (हैदराबाद) बिलकुल माकूल जगह है।वस्त्र , आभूषण तथा हस्तशिल्प (बीदर आर्ट , निर्मल आर्ट इत्यादि) की विविधता लोगों को आकर्षित करती है।हैदराबादी ढंग से बनी माला , नथ , टीका , लाचा , कर्णफूल , बाजूबन्द स्त्रियों की पसन्द हैं।इनके अलावा वेंकटगिरि , पोचम्पल्लि , धर्मावरम सिल्क और जामदानी साड़ियों की अनेक किस्में यहां के बाज़ार में भरी पड़ी हैं।
हमने अपनी शॉपिंग सालारजंग म्यूज़ियम के पास ही की।बाद में पता चला कि लाड बाज़ार , सुल्तान बाज़ार , नामपल्ली, बशीर बाग और आबिद एरिया ऐसे व्यावसायिक हब हैं जहां हर वस्तुओं के अनेकों विकल्प आसानी से मिलते हैं।
उसी दिन हम देश का सबसे बड़ा चिड़ियाघर ” नेहरू प्राणी उद्यान” पहुंचे।मुख्य द्वार पर ही हमें वहां के एक ऑफिसर से उलझना पड़ा ।वह सभी पर्यटकों और ट्वायकार्ट चालकों से बदसलूकी कर रहा था।किसी प्रकार हमें एक ट्वायकार्ट मिली।चालक ने उस ऑफिसर की ज़्यादती पर रोष व्यक्त करते हुए बताया-“इसने सबके नाक में दम कर रखा है।अगर आप लोग इसकी शिकायत बड़े अधिकारी से करें तो शायद सुना जाय।” लगे हाथ हम इस पुण्य काम को अंजाम देते हुए आगे बढ़ गए।इस चिड़ियाघर में दुर्लभ प्रजाति के जानवर और पक्षी मौजूद हैं।ऐडवेंचर ग्रुप के टीम लीडर और हमारी यात्रा के प्रबन्धक यूसुफ़ भाई बड़े चाव से एक-एक जानवर का परिचय करवा रहे थे।उनका जैवकीय ज्ञान क़ाबिले तारीफ था।इन्हीं की अनुकम्पा से हमारी यात्रा आरामदेह व सुरक्षित थी।नाना प्रकार के देशी-विदेशी जानवरों को देखते हुए हम आगे बढ़ रहे थे।मन में ख्याल आया – “मनुष्य ईश्वर की सर्वोत्तम रचना है।मनोरंजन के नाम पर जीवों को कैद करना कितना उचित है ? काश ! इन बेजुबानों के दर्द की एक लिपि होती। ये भी न्याय की फ़रियाद कर पाते । मनुष्य ने अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कचहरियां तो बना ली किन्तु इनका क्या ? कुछ सौभाग्यशाली पशु-पक्षियों के अलावा बाकी न्याय की अनंत प्रतीक्षा में रत।” दूसरी तरफ विलुप्तप्राय प्राणियों का संरक्षण करता मानव देवतुल्य लगा। इन्हीं विचारों में डूबता-उतराता मैं चिड़ियाघर से बाहर निकल आया।
यात्रा के अंतिम दिन हैदराबाद के सेंट्रल मॉल में मामूली शॉपिंग की गई।बड़े-बड़े सुडौल पत्थरों से अभी-अभी दिल्लगी शुरू ही हुई थी कि अलविदा कहने का वक़्त आ गया।विजयवाड़ा सहित अनेक दर्शनीय स्थलों को न देख पाने का मलाल किन्तु भरपूर ताज़गी और स्फूर्ति के साथ उस नवाबी शहर से हम विदा हुए।
पठानकोट आतंकी हमले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीती रात प्रधानमंत्री निवास पर उच्च स्तर की बैठक बुलाई. बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, विदेश सचिव एस. जयशंकर समेत कई अहम अधिकारी व खुफिया एजेंसियों के बड़े अधिकारी भी उपस्थित थे.
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में हुई बात चीत के अनुसार सरकार, पठानकोट ऑपरेशन खत्म होने के बाद ही पाकिस्तान के साथ होने वाली बातचीत की रणनीति बनाएगी.
दो दिनों के कर्नाटक दौरे से लौटने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये हाईलेवल बैठक बुलाई. इस बैठक में आतंकी हमले को लेकर लंबी चर्चा हुई.
यह बैठक करीब दो घंटे तक चली. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पठानकोट में आतंकी हमले को लेकर हालात की समीक्षा की. अजीत डोभाल ने पीएम को ताजा हालात की जानकारी दी. सूत्रों के मुताबिक अजीत डोभाल ने पीएम के सामने वो सारे सबूत पेश किए जिनसे साबित होता है कि पठानकोट आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई.
इस हमले के बाद पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर भी इस बैठक में चर्चा हुई क्योंकि इसी महीने की 15 तारीख को भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की बातचीत दिल्ली में होनी है लेकिन जिस तरह पाकिस्तान से आए आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला बोला है, उसके बाद इस बातचीत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.
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पाकिस्तान ने भारत द्वारा प्रदान किए गए ८ सबूतों को अपर्याप्त करार दिया और यह कहा कि ये सबूत नाकाफी हैं और पाकिस्तान को कार्रवाई करने में समय लगेगा. आज ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पठानकोट में एयरफोर्स स्टेशन का मुआयना किया. पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन के दौरे के बाद पीएम ने पूरे ऑपरेशन पर मुहर लगाई.
पठानकोट हमले पर कार्रवाई को लेकर एनएसए अजीत डोभाल पाकिस्तान पर लगातार दबाव बनाए हुए हैं लेकिन पाकिस्तान अपने रवैये पर अड़ा हुआ है. पठानकोट हमले के बाद केंद्र सरकार पर विपक्ष लगातार निशाना बनाए हुए है. साथ ही अब भाजपा के समर्थक बाबा रामदेव ने भी सरकार से मांग कर डाला कि देश के एक शहीद के बदले में उन्हें दुश्मनों के दस सिर चाहिए.
पाकिस्तान के रुख को लेकर सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज़ी के साथ हो रही है कि क्या केंद्र सरकार ने पाकिस्तान पर भरोसा कर गलती कर दी?
भारत ने पाकिस्तान को 8 सबूत दिए थे, जिनमे ये चीज़ें शामिल हैं-
15 कॉल डिटेल्स. एक आतंकी की मां का वॉयस सैंपल. चीन में बने आतंकियों के हथियार, यही कंपनी पाकिस्तानी सेना को भी हथियार सप्लाई करती है. आतंकियों के कपड़े और जूते जो पाकिस्तान के बने हुए हैं. पाकिस्तान से इनोवा कार के लिए हुई बुकिंग की जानकारी. आतंकियों के हाथों अगवा हुए एसपी सलविंदर सिंह का बयान. और एसपी के दोस्त राजेश वर्मा का बयान.
आगामी 15 जनवरी को भारत और पाकिस्तान के बीच में सचिव स्तर की वार्ता होनी है, जिसपर भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि पाकिस्तान ने आतंकी हमलों की जांच में सहयोग नहीं किया तो सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी जाएगी.