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Thursday, July 30, 2026
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शहीदों की चिताओं पर सियासत!

AnandDwivedi@Navpravah.com

 

पठानकोट हमले में शहीदों की चिताएं सर्द भी न पडीं कि सियासती लोगों ने दांव पेंच खेलने शुरू कर दिए। कोई इसे प्रधानमंत्री मोदी को नवाज़ शरीफ़ की तरफ़ से मिला पठानकोट रिटर्न गिफ्ट मानता है, तो कोई अजीत डोवाल की नाकामी। विपक्ष तो पुरवाई भांपते ही शुरू हो जाता है। इस सबके बावजूद देश की अखंडता के प्रति कुछ उद्विग्न मन हैं, जिन्हें आतंकी हमले का जवाब पाकिस्तान पर सैन्य हमला बिलकुल नहीं दिखता। पाकिस्तान पूरी तरह से सैन्य नियंत्रण में है, लोकशाही के वहां कोई मायने नहीं। पीएम नवाज़ सेना के हिसाब से ही काम कर सकते हैं, भारत से उनकी कोई तुलना नहीं क्योंकि, भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था जैसा दूसरा लोकतंत्र इस विश्व में कहीं नहीं है।

देखा जाए तो ये भी सही है कि पठानकोट की घटना ने मोदी सरकार और उसकी नीतियों पर भी सवालिया निशाँ खड़े कर दिए हैं। सवाल बड़े वाज़िब जान पड़ते हैं, क्योंकि मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान भाजपा नेता उन्हें नाकारा कहते थे। पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने का वादा करने वाले नरेंद्र मोदी आज तक देशवासियों को यह नहीं बता पाए हैं कि उनकी पकिस्तान नीति क्या है जबकि वह रेडियो पर नियमित रूप से ‘मन की बात’ कार्यक्रम के अंतर्गत देश की जनता को संबोधित करते हैं। हुर्रियत नेताओं से भेंट के पीछे क्या सोच है? सत्तारूढ़ होने पर परिस्थितियों में परिवर्तन हो जाता है, मंच और कुर्सी में ये बारीक फर्क है।

खबर आ रही है कि भारत दोनों देशों के विदेश सचिवों की इस माह होने वाली बातचीत को टाल सकता है। कहा जा रहा है कि मोदी सरकार, नवाज़ शरीफ सरकार को कुछ समय देना चाहती है ताकि बातचीत होने से पहले वह जैश-ए-मुहम्मद के खिलाफ कार्रवाई कर सके। संदेह इस बात का भी है कि क्या नवाज़ शरीफ सरकार, इस संगठन के खिलाफ कोई कदम उठा पाएगी क्योंकि पाकिस्तानी फौज उन्ही आतंकी संगठनों के खिलाफ़ कार्रवाई के पक्ष में है जो पाकिस्तानी हितों के खिलाफ़ काम करते हैं। जिन संगठनों के निशाने में भारत रहता हैं, उन्हें पाकिस्तानी सेना का हमेशा से समर्थन मिलता रहा है। कई सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी सरकार से हुई किसी भी बातचीत और समझौते का तब तक कोई अर्थ नहीं है, जब तक उसे वहां की सेना की मंजूरी ना मिले। वैसे तो जब पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष परवेज मुशर्रफ़ वहां के राष्ट्रपति भी थे, तब 6 जनवरी, 2004 को उन्होंने भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई जी को लिखित आश्वासन दिया था कि पाकिस्तान के नियंत्रण वाली ज़मीन को भारत-विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन इस आश्वासन का कितना ध्यान रखा गया ये 26 /11 के मुंबई हमलों और पठानकोट हमलों से साफ़ हो जाता है।

जिस एयरबेस पर आतंकवादियों ने तड़के हमला बोला, पठानकोट का वह एयरफ़ोर्स स्टेशन हमेशा से पाकिस्तान को खटकता रहा है। इसका एक कारण 1971 की जंग की वो यादें भी हैं, जिनमें इसी एयरबेस से भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को छठी का दूध  याद  दिला दिया था। और तो और पठानकोट के इस स्टेशन के बारे में जानकर आपको गर्व  महसूस होगा। 5 दिसंबर 1971 को भारतीय वायुसेना ने सुबह 4 बजे इसी एयरफोर्स  स्टेशन से उड़ान भरी थी। उस वक्त सीमा पर जंग छिड़ी हुई थी और पाकिस्तानी फ़ौज तेजी से आगे बढ रही थीं। सुबह तड़के जंग पर निकले चार विमानों  ने पाकिस्तानी फ़ौज पर बम गिराए और साथ ही साथ वाल्टन एयरफील्ड पर एक पाकिस्तानी रडार को नष्ट कर दिया। उस दिन वायुसेना ने लाहौर सेक्टर तक पाकिस्तानी सेना को परेशान करके रख दिया था ! शाम को तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने युद्धविराम का ऐलान कर दिया।

 

ये दास्ताँ कुछ नई नहीं है, पाकिस्तान हर बार मुह की खाता है फिर भी बाज़ नहीं आता। नीयत में खोट दरअसल पाकिस्तानी सेना के है, जिसके हुक्मरान भारत पाक के बीच किसी भी शांतिवार्ता को सफ़ल नहीं होने देना चाहते। पकिस्तान सेना चीफ़ राहील शरीफ भारत के खिलाफ भड़काऊ टिपण्णी करते बाज नहीं आते। पीएम मोदी की इस यात्रा से कुछ समय पहले ही राहील शरीफ ने जंग की सूरत में भारत को अंजाम भुगतने की चेतावनी देते हुए कहा था , “हमारी फौज हर तरह के हमले के लिए तैयार है। अगर भारत ने छोटा या बड़ा किसी तरह का हमला कर जंग छेड़ने की कोशिश की तो हम मुहतोड़ जवाब देंगे और उन्हें ऐसा नुक्सान होगा जिसकी भरपाई भी मुश्किल होगी।” ये शब्द पाकिस्तानी सेना की 1971 वाली करारी शिकस्त से पैदा हुई अविस्मर्णीय झुंझलाहट के द्योतक हैं। आज पाकिस्तानी सेना भ्रष्टाचार, कालाबाजारी, स्मगलिंग और आतंकवाद में बुरी तरह उलझी हुई है। पकिस्तान की सारी संपत्ति का 56 फ़ीसदी सेना के अधिकारियों ने हथिया रखा है। पकिस्तान के जितने भी आर्मी चीफ रहे हैं, चाहे वो जिया उल हक हों या परवेज़ मुशर्रफ, सब धुर भारत विरोधी रहे हैं। ऐसी सेना का मनोबल कैसा होगा, ये अनुमान लगा पाना मुश्किल नहीं।

बहरहाल, युद्ध किसी भी समस्या का हल कतई नहीं। ये समय प्रधानमन्त्री मोदी के इम्तेहान का नहीं बल्कि पाकिस्तानी सरकार है, जिसे भारत ही नहीं बल्कि दुनिया को ये माकूल जवाब देना ही होगा कि और कितने पठानकोट,मुंबई, संसद भवन हैं जिनपर उन्हें अपने आतंकी कदम रखने पड़ेंगे ? क्या हासिल होगा मासूमों के क़त्ल से ? ज़मीन? वही ज़मीन जिसमे भारतीय सेना के शौर्य ने पाकिस्तानी सेना के जवानों को जाने कितनी बार दो गज नीचे दफ्न किया है। जरूरत हमारे देश के अवाम और नेताओं को भी एक सबक लेने की है, वो ये कि कोई भी नेतागिरी और सत्ता स्वार्थ देश के हित से ऊपर नहीं है। हमें एकजुटता और अखंडता से कभी मुह नहीं मोड़ना चाहिए। इससे सेना को बल मिलता है। सरहद पर जान देने वाला सिपाही मासिक वेतन के लिए नहीं बल्कि, राष्ट्रीय सुरक्षा में अपने प्राण देता है। कुछ लोग इसे मज़हब से भी जोड़ देते हैं। उनकी सोच कब बदलेगी ये तो पता नहीं, लेकिन दुनिया की सोच बदल रही है, भारतवर्ष के प्रति। अमेरिका ने भी इस हमले पर चिंता जताते हुए पकिस्तान से निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, “हमें गहन, पूर्ण निष्पक्ष और पारदर्शी जांच प्रक्रिया की उम्मीद है और इसके परिणाम का इन्तेजार है। यह पता करना पकिस्तान का काम है कि जांच में कितना समय लगेगा। ”

दुनिया की नज़र भारत की तरफ़ है, पठानकोट ने पकिस्तान के आतंक प्रेम का चेहरा एक बार फिर दुनिया के सामने उघाड़ कर रख दिया है। ऐसे में हमें धैर्य और सामंजस्य बनाए रखने की महती आवश्यकता  है।

मुंबई पुलिस पर है पूरा भरोसा -आमिर

Bureau@Navpravah.com

 

असहिष्णुता मामले पर विवादित बयान देने के बाद से ही लगातार मुश्किलों का सामना करने वाले मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने मुंबई पुलिस द्वारा अपनी सुरक्षा में कटौती किए जाने के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि उन्हें मुंबई पुलिस पर पूरा भरोसा है.

आमिर खान ने मुंबई पुलिस के इस फैसले पर ट्वीट किया कि मैं पूर्ण रूप से मुम्बई पुलिस के इस फैसले का समर्थन करता हूँ.मुझे पूरा विश्वास है कि मुंबई पुलिस इस व्यवस्था का बेहतर इस्तेमाल मुंबई को और अधिक सुरक्षित बनाने में करेगी.और मुझे इस बात का भी भरोसा है कि जब मुझे सुरक्षा की ज़रूरत होगी तब मुंबई पुलिस खुद इस विषय में पहल करेगी.

“अतुल्य भारत” कैंपेन से हटाए जाने के विषय में आमिर ने कहा कि,” मैं सरकार के इस फैसले का सम्मान करता हूँ . देश की सेवा के लिए मैं हमेशा तत्पर था और हमेशा रहूँगा.”

आज पठानकोट जाएंगे मोदी

Bureau@Navpravah.com

 

एयरबेस पर हमले के बाद आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थिति का जायजा लेने के लिए पठानकोट जा रहे हैं। फिलहाल सुरक्षा बलों ने पठानकोट के वायुसेना स्टेशन को पूरी तरह सुरक्षित घोषित कर दिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ दौरे में प्रधानमंत्री शहीदों के परिवार वालों से मुलाकात भी कर सकते हैं।

पिछले कुछ समय से पठानकोट हमले को लेकर विपक्ष सरकार पर लगातार हमले कर रहा है। फिलहाल पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से पठानकोट के दौरे को सरकार की एक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। हालाँकि अभी तक दौरे का पूरा विवरण नहीं मिल सका है, लेकिन यह तय मन जा रहा है कि प्रधानमंत्री पठानकोट जा रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान पूरा करने की घोषणा की। फिलहाल, एयरबेस को पूरी तरह साफ कर लिया गया है।

पठानकोट हमले के बाद सरकार की गतिविधियों और पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने के माले को विपक्ष लगातार तूल दे रही है। विपक्ष का कहना कि आखिर पाकिस्तान ऐसा कौन सा कदम उठाया, जिससे प्रधानमंत्री मोदी को लगा कि पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाया जाना चाहिए। अचानक हुए पाकिस्तान के दौरे से विपक्ष ही नहीं तमाम मोदी समर्थकों ने भी इसकी आलोचाना की है। सबका यही कहना है कि पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ने से पहले मोदी को सोचना चाहिए। खासकर सोशल मीडिया पर मोदी को भारी विरोध झेलना पड़ रहा है।

मालदा में लगी ‘सांप्रदायिक आग’ की लपटें पहुँचीं पूर्णिया

ShikhaPandey@navpravah.com

हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी के पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ दिए गए विवादित बयान के कारण माहौल और ज़्यादा बिगड़ता नज़र आ रहा है. पश्चिम बंगाल के मालदा के बाद अब बिहार के पूर्णिया में भी हिंसा का मामला सामने आया है.

पूर्णिया में आल इंडिया इस्लामिक काउंसिल के बैनर तले यूपी के अखिल भारतीय हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी के एक भड़काऊ बयान के विरोध में जुलूस निकाला गया था . बायसी के पूर्व विधायक मोहम्मद रुखनुद्दीन के नेतृत्व में यह जुलूस निकाला गया था . काउंसिल की ओर से कमलेश तिवारी को फांसी देने की मांग हो रही थी . इसी दौरान जुलूस में शामिल लोगों ने बायसी थाने पर अचानक धावा बोल दिया . भीड़ ने थाने में जमकर तोड़फोड़ की . थाने के अंदर सामानों को भी नुकसान पहुंचाया . थाने के जरूरी कागजात भी लेकर चले गए .

इससे पहले कमलेश तिवारी के विवादित बयान को लेकर मालदा में हजारों की भीड़ ने हिंसा फैलाई थी . थाने के अंदर भी आगजनी की गई थी . दो दर्जन से ज्यादा गाड़ियों में आग लगा दी गई थी . मालदा में भी मुस्लिम समुदाय कमलेश तिवारी को फांसी की मांग कर रहा था.

कमलेश तिवारी पर कई बार भड़काऊ बयान और धार्मिक उन्माद फैलाने के आरोप लग चुके हैं और कई विवादों में वो जेल भी जा चुके हैं . कमलेश के ताजा विवाद की शुरुआत नवंबर में हुई थी जब उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खान ने कुछ दिन पहले कहा था कि आरएसएस में लोग इसलिए शादी नहीं करते हैं क्योंकि वो समलैंगिक होते हैं. इसके जवाब में कमलेश तिवारी ने पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी.सोशल मीडिया पर तिवारी का बयान आग की तरह फैला और उतनी ही तेजी से देश भर में विरोध प्रदर्शन भी हुए . 2 दिसंबर को लखनऊ में कमलेश तिवारी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. कमलेश तिवारी पर कानूनी कार्यवाही होने के बाद भी मुस्लिम समुदाय के विरोध प्रदर्शन नहीं रुक रहे हैं .

पठानकोट हमला: एक और कर्मचारी हिरासत में

ShikhaPandey@Navpravah.com

पठानकोट हमले में आतंकियों के एयरबेस में घुसने के मामले में एयरफोर्स स्टेशन का एक कर्मचारी शक के घेरे में आ गया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पठानकोट हमले की जांच कर रही एजेंसी ने पठानकोट एयरबेस के एक कर्मचारी को हिरासत में लिया है.

कर्मचारी सेना के मिलिट्री एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज का कर्मचारी है. यही कर्मचारी तब एयरबेस में तैनात था. शक है कि कर्मचारी ने आतंकियों के घुसने में मदद की होगी.

जिस दीवार को लांघकर आतंकी एयरबेस में दाखिल हुए थे, उसके तीन प्लडलाइट्स काम नहीं कर रहे थे. जिस जगह से आतंकी अंदर घुसे थे वो मिलिट्री एंड इंजीनियरिंग सर्विसेज के वेहिकल मेंटेनेंस शेड के पास था. हिरासत में लिया गया कर्मचारी कुछ वक्त पहले उधमपुर से पठानकोट ट्रांसफर होकर आया था. कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी का बताया जा रहा है.

एक और पुख्ता जानकारी ये भी मिली है कि इसकी पूरी प्लानिंग पाकिस्तान में हुई थी. भारत के पास उन हैंडरों की जानकारी भी है, जो पठानकोट में आतंकियों को निर्देश दे रहे थे. भारत सरकार ने ये सभी नाम पाकिस्तान को बताए हैं और उन पर जल्द से जल्द कार्रवाई करने को कहा है.

गौरतलब है कि पठानकोट एय़रबेस हमले में सात जवान शहीद हुए थे जबकि 6 आतंकी मारे गए थे.

आमिर की हटाई गई सुरक्षा

Bureau@Navpravah.com

 

असहिष्णुता पर विवादित बयान देना अब अभिनेता आमिर खान को भारी पड़ता नज़र आ रहा है. अतुल्य भारत अभियान से हटाए जा चुके अभिनेता आमिर खान को सरकारी सुरक्षा भी नहीं मिलेगी. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मामले की समीक्षा में पाया गया कि अभिनेता को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है, इसलिए यह सुरक्षा वापस ली जा रही है.

अतुल्य भारत अभियान से हटाने के बाद आमिर को एक और झटका लगा है. आमिर खान को प्रदान की गई सरकारी सुरक्षा अब नहीं मिलेगी. हालाँकि वे अकेले फ़िल्मी सितारे नहीं हैं, जिनकी सरकारी सुरक्षा हटाए जाने का निर्णय लिया गया है बल्कि अभिनेता शाहरुख खान समेत ऐसे 25 बॉलीवुड सितारे हैं, जिनसे यह सुरक्षा छीन ली गई है. हालाँकि एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुंबई पुलिस अब आमिर खान को दो सशस्‍त्र कांस्‍टेबलों की सुरक्षा दे रही है जो दो शिफ्ट में उनके साथ रहेंगे.

जिन 15 हस्तियों की सुरक्षा बरकरार है, उसमें एक्‍टर अक्षय कुमार, प्रोड्यूसर महेश और मुकेश भट्ट शामिल है. अक्षय कुमार को ‘खिलाड़ी 786’ और ‘ओह माई गार्ड’ फिल्‍म के दौरान धमकी मिली थी. इतना ही नहीं, उन्‍हें अंडरवर्ल्‍ड से भी फिरौती के लिए फोन आया था. अक्षय ने जब अपने घरेलू नौकर को काम से निकाल दिया था तो उसने भी जान से मारने की धमकी दी थी. वहीं दोनों भट्ट भाइयों को अंडरवर्ल्‍ड और आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन से भी धमकी मिल चुकी है. पुलिस ने लता मंगेशकर, दिलीप कुमार और अमिताभ बच्‍चन की सुरक्षा को भी बरकरार रखा है.

 

जानकारी के मुताबिक़ अभी तक कुल 40 बॉलीवुड हस्तियों को सुरक्षा प्रदान की गई थी. लेकिन अब इसे घटाकर 15 हस्तियों पर सीमित कर दिया है. एक अधिकारी ने बताया कि फ़िल्मी हस्तियों को सुरक्षा देने पर काफी मैन पावर खराब होती है. मुंबई पुलिस ने जिन 25 हस्तियों की सुरक्षा वापस ली है, उसमें बॉलीवुड के डायरेक्‍टर-प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा, राजकुमार हिरानी, फराह खान, सिबलिंग अली और करीम मोरानी शामिल हैं.

फिल्म समीक्षा- “वज़ीर”

ShikhaPandey@navpravah.com

फिल्म समीक्षा: वज़ीर

निर्देशक: बिजॉय नाम्बियार
प्रमुख कलाकार: फरहान अख्तर, अमिताभ बच्चन ,अदिति राव हैदरी, मानव कौल, नील नितिन मुकेश ,अंजुम शर्मा और जॉन अब्राहम
अवधि: 1 घंटा 43 मिनट
रेटिंग: 3/5 स्टार

 

‘शैतान’ और ‘डेविड’ जैसी फिल्मों को डायरेक्ट करने वाले डायरेक्टर बिजॉय नाम्बियर अपनी अलग तरह की फिल्मों के लिए प्रसिद्ध हैं, और साथ ही ‘पिज्जा’ और ‘कुकु माथुर की झंड हो गयी’ फिल्मों को प्रोड्यूस भी कर चुके हैं.निर्माता विधु विनोद चोपड़ा की आईडिया पर आधारित थ्रिलर फिल्म ‘वजीर’ को भी बिजॉय ने बखूबी डायरेक्ट किया है.

यह कहानी एटीएस ऑफिसर दानिश अली (फरहान अख्तर) की है जो अपनी पत्नी रुहाना अली (अदिति राव हैदरी) और बेटी के साथ ख़ुशहाल जिंदगी बिताता रहता है,मगर इस बीच एक हादसा उनकी ज़िदगी को हिला कर रख देता है. दानिश खुद को इस हादसे का ज़िम्मेदार मानता है. उसे एटीएस की नौकरी से भी सस्पेंड कर दिया जाता है. ऐसे वक़्त में उसकी मुलाक़ात पंडित ओंकारनाथ धर (अमिताभ बच्चन) से होती है जो व्हील चेयर शतरंज मास्टर हैं . अपना सारा वक़्त वो शतरंज खेलते हुए बिताते हैं. वो भी एक हादसे की याद से जूझ रहे हैं. उन्हें लगता है कि मंत्री यज़ाद क़ुरैशी (मानव कौल) ने उनकी बेटी को मार दिया, जिसका वो बदला लेना चाहते हैं. पंडित जी और दानिश क़रीबी दोस्त बन जाते हैं. दानिश उनसे वादा करता है कि पंडित जी को इंसाफ़ दिलाएगा. सिलसिलेवार घटनाओं के बीच कई अहम बातों का खुलासा भी होता है और शतरंज के खेल का ‘वजीर’ एक निर्णायक मोहरा बनकर सामने आता है. फ़िल्म को खास तौर से ‘वज़ीर’ नाम ही क्यों दिया गया है, इसका पता आपको इस थ्रिलर फिल्म को देखकर ही चलेगा.

फिल्म की स्क्रिप्ट को बड़े ही बेहतरीन अंदाज में शतरंज के खेल पर आधारित किया गया है, किस तरह से एक प्यादा ,आखिरी घर में जाकर वजीर बन जाता है, कैसे हाथी अपने सामने वाले सैनिक के धराशायी होते ही पागल हो जाता है, और घोड़े के साथ साथ ऊँट की चालें कितनी अहम होती हैं; ये सारी बातें इंसानो के रवैये के आधार पर दर्शायी गयी हैं. लेखक अभिजात जोशी ने विधु विनोद चोपड़ा के कांसेप्ट को फिल्म की कहानी में तब्दील किया है जो काफी मुश्किल काम जान पड़ता है. स्क्रिप्ट के साथ साथ इस फिल्म की रफ्तार काबिल ए तारीफ है , एडिटिंग टेबल पर इस फिल्म को मात्र 103 मिनट का बनाया जाना भी सराहनीय है. स्क्रिप्ट लेवल पर फिल्म का हरेक किरदार बखूबी सजाया गया है.

एक्टर फरहान अख्तर ने एक बार फिर से बता दिया है कि वो किस तरह से किरदार को पूरी तरह खुद जीने का प्रयास करते हैं और सफल भी हो जाते हैं, वहीँ अदिति राव हैदरी का काम भी एक पत्नी के किरदार में सराहनीय है.फिल्म में कश्मीरी पंडित का किरदार निभा रहे अमिताभ बच्चन ने बहुत ही उम्दा काम किया है और जिस तरह से उन्होंने किरदार का हाव भाव और लहजा पकड़ा है वो अद्भुत है. वहीं अभिनेता ‘मानव कौल’ फ़िल्म में एक सरप्राइज पैकेज के रूप में सामने आते हैं , जिन्होंने एक दबंग मंत्री के रूप में अद्भुत काम किया है. नील नितिन मुकेश के साथ साथ फिल्म में फरहान अख्तर के दोस्त का किरदार निभा रहे अंजुम शर्मा ने भी सहज अभिनय किया है. जॉन अब्राहम का भी छोटा लेकिन अच्छा कैमियो रोल है.

फिल्म का शुरुवाती गीत ‘तेरे बिन’, रिलीज से पहले ही हिट हो चुका है ,इसके अलावा ‘मौला’ ‘तू मेरे पास’ ‘खेल खेल में’ और ‘अतरंगी यारी’,इन सभी गीतों को भी फ़िल्म में बहुत अच्छे ढंग से फ़िल्माया गया है.

नहीं रहे मुफ़्ती मोहम्मद सईद

ShikhaPandey@navpravah.com

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद का आज निधन हो गया. दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में उन्होंने अंतिम सांस ली. पिछले काफी समय से वे बीमार चल रहे थे. गत रविवार से ही उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था. 1 मार्च 2015 को उन्होंने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. 79 वर्ष के सईद ने गुरुवार सुबह 8 बजे आखिरी सांस ली. इसी माह 12 जनवरी को उनका जन्मदिन था.

22 दिसंबर को गर्दन में दर्द और बुखार के कारण तबियत ज़्यादा बिगड़ने से उन्हें एयर एम्बुलेंस से दिल्ली लाया गया था व एम्स में भर्ती किया गया था। उन्हें सेप्सिस, रक्त कणिकाएं कम होने और निमोनिया की परेशानी थी। रविवार को उनकी हालत जब ज्यादा बिगड़ गई तो उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया.

मुफ्ती, कांग्रेस के शासन के पहले मुस्लिम गृहमंत्री बने थे. कांग्रेस से अलग होने के बाद 1998 में उन्होंने अपनी अलग पार्टी पीडीपी की स्थापना की थी.

कई राजनीतिक दलों और अलग-अलग नेताओं की ओर से उनके निधन पर अफसोस जाहिर किया जा रहा है. इसके साथ ही सईद की बेटी महबूबा मुफ्ती को सीएम बनाने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. उनका सीएम बनना लगभग तय माना जा रहा है.

गौरतलब है कि सईद ने पिछले साल नवंबर में जम्मू में एक संवाददाता सम्मेलन में खुद भी संकेत दिया था कि वह अपनी बेटी महबूबा मुफ्ती को कमान सौंपना चाहेंगे.भाजपा ने भी स्पष्ट शब्दों में इस बात के लिए सहमति जताई है।

“पोते को भी करूँगा सेना में भर्ती”

पठानकोट एयरबेस में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो गुरसेवक सिंह के पिता  सुच्चा सिंह भले ही बेटे के जाने की भयंकर पीड़ा झेल रहे हैं, लेकिन देश की सेवा का उनका जज्बा अभी भी जस का तस बना हुआ है। सुच्चा सिंह भी सेना में ही थे। बेटे के अंतिम संस्कार के बाद उन्होंने कहा, ‘मेरा एक बेटा शहीद हो गया तो क्या, मेरा बड़ा बेटा भी अभी सेना में है। मैं अपने पोते को भी फौज में भेजूंगा।’

शहीद गुरसेवक के पिता ने कहा कि उनके बेटे ने देश की रक्षा के लिए अपनी जान दी है और पूरे परिवार को इसपर फख्र है। सुच्चा सिंह भी सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

बता दें कि सोमवार को अंबाला स्थित बरनाला गांव में गुरसेवक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। कमांडो को अंतिम विदाई देने उनके गांव के ही लोग नहीं, बल्कि पूरा जिला प्रशासन उमड़ा था। इसके अलावा राज्य के तमाम सीनियर मंत्री भी देश के लिए शहीद हुए गुरसेवक सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे थे। गुरसेवक को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

गुरसेवक सिंह एयरफोर्स की क्विक रिस्पॉन्स टीम में शामिल थे। आतंकी हमले के बाद दहशतगर्दों से सबसे पहले क्विक रिस्पॉन्स टीम ने ही मोर्चा लिया था। गुरसेवक के अंतिम संस्कार के मौके पर सेना के जवानों ने हवाई फायरिंग कर सलामी दी। उन्हें श्रद्धांजलि देने हरियाणा सरकार के कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यु और अनिल विज भी पहुंचे थे।

वायुसेना में गरुड़ कमांडो रहे गुरसेवक सिंह की 26 वर्षीय पत्नी जसप्रीत कौर ने कहा, ‘मैंने उन्हें शुक्रवार को कॉल किया था, लेकिन उन्होंने फोन काट दिया था। उन्होंने मेसेज कर कहा था कि बाद में फोन करूंगा। उन्होंने कहा, फोन करूंगा, लेकिन फोन नहीं आया तो सो जाना। लेकिन उनका फोन नहीं आया।’

सुरक्षा तैयारियों में हैं खामियां -मनोहर पर्रिकर

ShikhaPandey@Navpravah.com

पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकवादी हमले पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने 6 आतंकवादियों को मार गिराने पर भारतीय सुरक्षाबलों की प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा तैयारियों में कुछ खामियां दिखती हैं। पर्रिकर ने बताया कि आतंकवादी 40-50 किलो ग्रेनेड लेकर एयरबेस में दाखिल हुए थे। उनके पास से मिले कुछ सामान पाकिस्तान में बने हैं।

सर्च ऑपरेशन के चौथे दिन रक्षामंत्री पर्रिकर ने मीडिया से बात चीत के दौरान कहा कि एयरबेस में अब संभवतः और आतंकवादी नहीं हैं। एनकाउंटर 28 घंटों तक चला, बाकी समय सर्च ऑपरेशन में लगा। उन्होंने बताया कि एयरबेस में तक़रीबन 3000 परिवार रहते हैं और उन सब को पूरी तरह सुरक्षित बचाना था, इसलिए इतना समय लगा।

रक्षामंत्री ने कहा कि उन्हें पता है कि आतंकवादी एयरबेस में कैसे दाखिल हुए, पर अभी वे इस विषय में कुछ नहीं कहेंगे।उन्होंने सुरक्षाबलों की प्रशंसा करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि संभवतः कल तक यह सर्च ऑपरेशन ख़त्म हो जायेगा। यह काफी कठिन ऑपरेशन था मगर एक इमारत को छोड़ कर एयरबेस को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

रक्षामंत्री ने इस ऑपरेशन में शहीद हुए जवानों की शहादत पर हार्दिक दुःख जताते हुए ये ऐलान  किया कि सरकार पठानकोट ऑपरेशन में जान गंवाने वाले जवानों को ‘शहीद’ का दर्ज़ा देगी व उनके परिवार को सरकारी नौकरी और 25 लाख रुपये देगी।