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Thursday, September 10, 2026
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‘भारत माता की जय’ न बोलें मुसलमान- देवबंद

Bureau@Navpravah.com
‘भारत माता की जय’ बोलने को लेकर रोज़ एक नया बयान सुनने को मिल रहा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ अब इस मसले पर दारुल उलूम देवबंद ने एक फतवा जारी कर मुसलामानों को भारत माता की जय बोलने से रोका है। देवबंद ने फतवा के ज़रिए कहा कि जैसे हम ‘वंदे मातरम’ नहीं बोल सकते, उसी तरह भारत माता की जय भी नहीं बोला जा सकता।

 

‘भारत माता की जय’ के घोष पर आजकल भारी राजनीति की जा रही है। इसी तर्ज़ पर मौके पर चौका अब दारूल उलूम देवबंद ने लगाया है। देवबंद ने फतवा जारी कर मुसलमानों को भारत माता की जय बोलने से मना कर दिया है।

 

यही नहीं देवबंद ने जारी फतवा में यह प्रश्न भी किया कि ‘इंसान ही इंसान को जन्म दे सकता है। धरती मां कैसे हो सकती है? मुसलमान अल्लाह के अलावा किसी की पूजा नहीं कर सकता तो भारत को देवी कैसे माने? मुसलमानों को खुद को इस नारे से अलग कर लेना चाहिए।

 

फतवा में आगे कहा गया है कि हम देश से प्यार करते हैं, लेकिन हम सिर्फ एक ईश्वर में यकीन रखते हैं।’ इसलिए भारत माता की जय कैसे बोला जा सकता है।
देवबंद के प्रवक्ता ने इस मामले के बारे में कहा कि हम अल्लाह के अलावा किसी की इबादत नहीं कर सकते। इसका मतलब यह नहीं कि हम देश से प्रेम नहीं करते। उन्होंने बताया कि देश की आज़ादी में उलेमाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, इसे हमें नहीं भूलना चाहिए।

 

की & का …एक विचित्र प्रयोग

अमित द्विवेदी
रेटिंग-🌟🌟/5
फ़िल्म समीक्षा – की & का
निर्माता- एरोस इंटरनेशनल
लेखक-निर्देशक- आर. बाल्की
संगीत- इल्याराजा
आर. बाल्की की इस फ़िल्म का इंतज़ार दर्शक काफी समय से कर रहे हैं. चीनी कम, पा और शमिताभ जैसी बड़ी फिल्में निर्देशित करने वाले बाल्की से इस बार भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं. आइए जानते हैं कि क्या ख़ास है फ़िल्म की & का में.

 

फ़िल्म दो युवाओं के इर्द गिर्द घूमती है. एक लड़की है जिसे ज़िन्दगी में बहुत काम करके नाम कमाना है और लड़का जिसके पास परिवार का सबकुछ होता है लेकिन वो अच्छे से जीवन जीना चाहता है. उसका फंडा है कि जितनी ज़रूरत है अगर उतना मिल जाए तो ज़िन्दगी को जीना चाहिए न कि उसे और आगे बढ़ाने के चक्कर में जो मिला है उसका भी मज़ा न ले पाएं.

 

कहानी-
फ़िल्म में कबीर (अर्जुन कपूर) एक बड़े बाप का लड़का है, जो एमबीए टॉपर है और किया (करीना कपूर) एक एडवरटाइजिंग एजेंसी में बड़े पद पर कार्यरत है. दोनों की मुलाक़ात हवाई जहाज़ में होती है. कबीर को फ्लाइट की विंडो सीट के पास बैठकर रोते हुए देखकर किया उससे वजह पूछती है. दोनों की दोस्ती हो जाती है और तभी किया को पता चलता है कि कबीर दिल्ली के सबसे बड़े बिज़नेसमैन का बेटा है लेकिन उसे अपने बाप के बिज़नेस में ज़रा सा भी इंटरेस्ट नहीं है और वो कुछ अलग ही करना चाहता है.

 

दोनों की कुछ ही समय में गहरी दोस्ती हो जाती है और एक दिन कबीर किया को शादी के लिए प्रपोज़ करता है. दोनों तय करते हैं कि वे शादी करेंगे लेकिन किया ऑफिस में काम करेगी और कबीर घर संभालेगा. यही कहानी का बेस है. दोनों की शादी होती है. सब सही चल रहा होता है. एक दिन किया का प्रमोशन होता है और वो ख़ुशी में एक चैनल को इंटरव्यू देते समय बताती है कि उसकी सफलता का श्रेय उसके पति को जाता है, जो आईआईएम का टॉपर होने के बावजूद अच्छे से घर का काम काज देखता है और वो अपने सपने को साकार कर पा रही है. इस बात से मीडिया वाले काफी प्रभावित होते हैं और कुछ ही समय में कबीर काफी पॉप्युलर हो जाता है. यह देखकर किया को अच्छा नहीं लगता कि उसका पति उससे ज़्यादा मशहूर हो रहा है. यहीं से फ़िल्म एक नया मोड़ ले लेती है.

 

फ़िल्म इंटरवल के पहले काफी ढीली और बोरिंग है लेकिन इंटरवल के बाद अपनी पकड़ मज़बूत बनाती है. प्रोडक्ट्स की इन फ़िल्म ब्रांडिंग इतनी ज़्यादा है कि कुछ समय के लिए लगता है हम किसी प्रोडक्ट की कॉर्पोरेट फ़िल्म देख रहे हैं.

 

फ़िल्म में करीना की अदाकारी प्रभावित करती है लेकिन कुछ दृश्य ऐसे भी हैं फ़िल्म में जो अनावश्यक लगते हैं. आर. बाल्की अर्जुन कपूर से कैसे प्रभावित हुए, जो कबीर के रूप में उन्होंने उनका चुनाव किया यह नहीं समझ आया. अगर निर्देशक बाल्की ऐसे दृश्यों को न डालते तो शायद फ़िल्म की पकड़ और मज़बूत होती.

 

संगीत- इलयाराजा का बैकग्राउंड स्कोर और संगीत चीनी कम से अधिक लिया हुआ सहयोग लगता है. संगीत में कुछ कमाल नहीं कर पाई है संगीतकारों की टीम.

 

क्यों देखें- वीकेंड में कुछ बेहतर विकल्प न हो तो.
क्यों न देखें- फ़िल्म में कबीर के फैसले में अलावा कुछ भी ख़ास नहीं है.

 

स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम: मोदी 5 अप्रैल को देंगे 151 महिलाओं को ई-रिक्शा

अमित द्विवेदी,
देश में रोज़गार को एक नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार पुरज़ोर कोशिश में लगी है. इसी क्रम में स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम के तहत आगामी 5 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नोएडा में 151 महिला चालकों को मुफ़्त ई रिक्शा प्रदान करेंगे. ये सभी महिला चालक दिल्ली और आस पास के इलाके की हैं.

रोज़गार को लेकर केंद्र सरकार स्टैंडअप इंडिया कार्यक्रम के तहत सराहनीय कार्य करने जा रही है. नोएडा में 151 महिलाओं को मुफ़्त रिक्शा दिया जाएगा, जिनमे से 21 ट्रांसजेंडर भी शामिल होंगी. कार्यक्रम से जुड़े हुए एक अधिकारी ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत कुल 5100 लोगों को मुफ़्त वितरण का लाभ दिया जाएगा.

कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ट्रांसजेंडर्स को प्रोत्साहित करने के लिए पहले 151 लाभार्थियों में से 21 ट्रांसजेंडर्स को भी शामिल किया गया है. इन्हें रिक्शा सिर्फ दिया ही नहीं जाएगा बल्कि इन्हें बाकायदा प्रशिक्षित भी किया जाएगा. जिससे इन्हें किसी तरह की किसी समस्या का सामना न करना पड़े. यही नहीं, महिलाओं को सेल्फ डिफेन्स की ट्रेनिंग भी दी जा रही है, जिससे ये किसी विषम परिस्थिति में अपनी रक्षा स्वयं कर सकें.

ब्रुसेल्स में छाए मोदी, आतंकवाद को बताया वैश्विक समस्या

आनंद द्विवेदी
ब्रसेल्स में मोदी पूरी तैयारी के साथ भाषण देते नज़र आये. एक ओर जहाँ उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाई, वहीँ पिछली सरकार को आड़े हाथ भी लिया.
भ्रष्टाचार, आतंकवाद,अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर बोलते हुए पीएम मोदी ने हॉल में बैठे सभी आगंतुकों का भरपूर अभिवादन प्राप्त किया. पीएम मोदी ने आधार कार्ड से गैस सब्सिडी एकॉउंट होल्डर के खाते में सीधे भेजने का भी उल्लेख किया. किस प्रकार उनके उठाये क़दमों से प्रधानमंत्री जन धन योजना को कार्यान्वित किया गया. किस प्रकार यूरिया का उत्पादन नीम कोटिंग से किया गया.
मोदी ने तंज कसते हुए पिछली सरकार को आड़े हाथो लिया.  मोदी ने कहा कि,”अगर मोदी के खिलाफ कहीं जोर से आवाज़ आई है तो समझिये की मोदी ने कहीं चाबी टाइट की है.” आतंकवाद पर बोलते हुए पीएम ने कहा देश पिछले 40 वर्षों से आतंकवाद से जूझ रहा है. उन्होंने इसे वैश्विक समस्या बताते हुए सबको मिलकर इसे नियंत्रित करने की बात पर ज़ोर दिया.

असम में मोदी लहर, बंगाल में दीदी का डंका

AnandDwivedi@Navpravah.com
अगले सप्ताह पांच विधान सभाओं के चुनाव शुरू होने वाले हैं जिसके लिए तरह तरह के लोक लुभावन वायदों सब्ज़ बागों से लबरेज़ अलग अलग राजनीतिक दलों के नेतागण मंच से भाषण दे रहे हैं. अभी पार्टियाँ एड़ी चोटी का जोर लगाकर चुनाव प्रचारों में मशगूल हैं.  इन्हीं पांच राज्यों में से दो ऐसे प्रमुख राज्य पश्चिम बंगाल और असम भी हैं जिनमे प्रधानमंत्री प्रचार में कमरकस हिस्सा ले रहे हैं.

अलग अलग सर्वेक्षण एजेंसियां और मीडिया ग्रुप आगामी चुनावी लहरों की कयास भी लगा रहे हैं. सभी अपने सर्वे के मुताबिक़ किस राज्य में किस पार्टी की लहर होगी इसकी भविष्यवाणियाँ भी कर  रहे हैं. ऐसे ही एक सर्वेक्षण से सामने आया है कि एक ओर जहाँ असम की गोगोई सरकार को पीछे छोड़ते हुए बीजेपी अपना खाता खोल सकती है तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार एक बार फिर सरकार बना सकती है. २०११ के असम विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने 78 सीटें हथियाई थीं लेकिन बीजेपी को केवल 6 सीटों से ही संतोष करना पड़ा. BPF को 12 , AUDF को 18 और अन्य पार्टियों को 3 सीटें ही हासिल हुई थीं.

सर्वेक्षण ने इस बार पलटी मारते हुए कांग्रेस की झोली में केवल 36 सीटें, बीजेपी,AJP, BPF को जोड़कर 78 सीटे मिलने का दावा किया है. AUDF को सर्वे अनुसार 11  सीटें और  अन्य पार्टियों को भी 11 सीटें मिल सकती हैं.

एक्सपर्ट्स की मानें तो गोगोई सरकार के कामों और बंगलादेशी शरणार्थियों का मुद्दा इस चुनाव में बाजी पलट सकता है. लगभग 40% लोग गोगोई के कामों से संतुष्ट पाए गए तो 33% ने इसे औसत श्रेणी में रखा. 26% लोग इनके कामों से नाखुश मिले. असम के लिए UPA और NDA दोनों में से किसने बेहतर काम किये ये देखे जाने पर बहोत करीबी मामला दिखाई पड़ता है. 52% लोग बंगलादेशी शरणार्थियों के मुद्दे को चुनावी पलटवार की वजह भी मानते हैं. असम में 39 % लोगों ने गोगोई सरकार को अपनी पहली पसंद माना ,वहीँ सोनोवाल के समर्थन में 29% लोग ही नजर आये.

बात पश्चिम बंगाल की करें तो ममता बनर्जी सरकार के दोबारा बनने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं. 2011 के चुनावों में TMC ने 294 सीटों में से 184 पर अपनी जीत दर्ज की थी. इसी सर्वे के अनुसार इस बार भी पार्टी लगभग 178 सीटों पर कब्ज़ा बनाने में सफल रहेगी. लेफ्ट और कांग्रेस की खिचड़ी को 110 सीटें मिलने की उम्मीद है.  केन्द्रासीन बीजेपी को 1 सीट से ही संतोष करना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार से 58% लोग संतुष्ट नजर आये तो 37 % लोगों के हिसाब से ममता ने कुछ ख़ास काम नहीं किये. लोगों का मानना यह भी है कि शारदा चिटफंड घपले और रोज़ वैली काण्ड से ममता बनर्जी सरकार की छवि पर बुरा असर पड़ा है.

सीएम की कुर्सी पर 62% लोग ममता बनर्जी , 12 % लोग बुद्धदेब भट्टाचार्य तो 3% लोग रूपा गांगुली को देखना चाहते हैं. जब लोगों से पूछा गया कि क्या वो राहुल गांधी और बुद्धदेब भट्टाचार्य को एकसाथ रैली करते देखना चाहते हैं तो 43 % लोगों ने असमंजस व 38% लोगों ने स्वीकृति की स्थिति दर्ज कराई. 19% लोगों को ये सम्मेलन नागवार गुजरा.
एक निजी टीवी चैनल और सर्वेयर एजेंसी के द्वारा किया गया यह सर्वे 8 से 20 मार्च में पश्चिम बंगाल और 9 से 17 मार्च में असम में करवाया गया जिसमे पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 118 पर ये सर्वे किया गया तथा असम की 126 में से 50 विधानसभा सीटों पर सर्वे किया गया. पश्चिम बंगाल में जहाँ 14450 तो असम में 6027 वोटर्स से आम राय ली गई है.

पत्रकारिता के नाम पर मात्र ‘दुकानदारी’, गणेश शंकर विद्यार्थी को भी भूले पत्रकार!

अनुज हनुमत

पिछले दिनों गणेश शंकर विद्यार्थी जी का बलिदान दिवस था. उस महान कलम के सिपाही का बलिदान दिवस, जिसने पत्रकारिता को एक मिशन मानकर समाज की उन्नति के लिए निरंतर काम किया. ऐसी शख्सियत को याद करने की जहमत किसी भी बड़े पत्रकार ने नही उठाई. वे भी नहीं जो आज के मौजूदा समय में खुद को तटस्थ विचारों का अगुवा मानते हैं. उन्होंने भी नही जो बाजारीकरण के इस दौर में पत्रकारिता को एक मिशन मानकर कार्य करने का राग अलापते हैं.

 

छोटे स्तर पर कुछ संगठनों द्वारा उनका बलिदान दिवस मनाया गया, पर वहां भी केवल खाना पूर्ति ही की गई. सारा ढकोसला फ़ोटो खिंचवाने से लेकर फेसबुक में अपलोड करने तक जारी रहा.

 

जिस व्यक्ति ने अपने छोटे से जीवन में ही समाज को एकता के सूत्र में पिरोने के लिए दिन रात एक कर दिए, आज उसे और उसके योगदान को याद करने के लिए किसी के पास पल भर का समय नहीं. ऐसे बहुत से लेखक हैं, जिन्हें मैं प्रतिदिन पढता हूँ जिनमे से कुछ स्थापित लेखक हैं और कुछ संघर्ष कर रहे लेखक. लेकिन किसी ने भी ‘विद्यार्थी’ के बलिदान को याद भी नहीं किया. सोशल साइट्स के बहुत से ‘स्ट्रीट लेखकों’ पर तो मुझे पक्का विश्वास था कि उनकी पोस्ट में गणेश शंकर विद्यार्थी जी के बलिदान का जिक्र होगा, पर उन्होंने भी इसे महत्वपूर्ण नही समझा.

 

अब प्रश्न ये उठता है कि आखिर अधिकांश लेखकों द्वारा, जिस व्यक्ति को लेखनी का पैमाना माना जाता है उसके योगदान को याद करने के लिए उनके पास पर्याप्त समय नहीं.

 

वर्तमान समय में पत्रकारिता पर भी बाजार खूब हावी हो गया है, जिसके कारण हमें केवल विज्ञापन ही देखने को मिल रहा है. जिसे हम आज कल समाचार मानकर देखते हैं. ये सब इसलिए भी चलन में आ गया है क्योंकि अधिकांश लोगों के द्वारा बिना किसी उद्देश्य को हाथ में लिये ही पत्रकारिता की कठिन डगर चुन ली जाती है. जो आगे चलकर ख़बरों की दलाली करते हैं और पत्रकारिता को शर्मसार करते है. ऐसे महापुरुषों को अगर हम ज़रा सा भी समय नहीं दे पाते हैं तो हमें किसी भी प्रकार के बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

 

आज गणेश शंकर विद्यार्थी तो हमारे बीच नही हैं पर उनके बताये गए आदर्श व् सिद्धांत जरूर हमें मजबूती प्रदान करते हैं. वे अक्सर कहा करते थे कि समाज का हर नागरिक एक पत्रकार है, इसलिए उसे अपने नैतिक दायित्वों का निर्वाहन सदैव करना चाहिए. गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता को एक मिशन मानते थे, पर आज के समय में पत्रकारिता मिशन नही बल्कि इसमें बाजार हावी हो गया है. जिसके कारण इसकी मौजूदा प्रासंगिकता खतरे में है. हम सूचना क्रांति के दौर में जी रहे हैं, जिसने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अमूल चूल परिवर्तन किया है. एक पत्रकार के ऊपर समाज की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है, इसलिए इसे हमेशा सजग व सचेत रहना चाहिए.

यूपी पुलिस के हवलदार ने किया नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार

ब्यूरो लखनऊ
मानवता को शर्मसार कर देने वाला एक और मामला सामने आया है. उत्तर प्रदेश पुलिस के एक और घिनौना चेहरा बेनकाब हुआ है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक मैनपुरी ज़िले के एक पुलिस हवलदार द्वारा एक नाबालिग लड़की के बलात्कार का मामला सामने आया है.
उत्तर प्रदेश पुलिस के एक हवलदार ने 14 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार कर आम जनता का प्रशासन पर से भरोसा उठाने वाला कुकृत्य अंजाम दिया है. सूत्रों के हवाले से पता चला है कि मात्र 14 साल की इस बच्ची के साथ इस हैवान ने होली के दिन बलात्कार किया था.
बताया जा रहा है कि राजेश यादव नामक इस हवलदार की शिकायत करने जब लड़की अपनी माँ के साथ थाने गई तो उसके साथ न्याय की जगह मामले को रफा दफा करने के लिए दबाव डाला गया. हवलदार ने उस समय भी लड़की और उसकी माँ को भद्दी गालियां दी.
हालाँकि जब यह खबर फैलने लगी तो एएसपी दिगंबर कुशवाहां के आदेश पर मामला दर्ज़ किया गया. मामला दर्ज़ होने के बाद आरोपी हवलदार को गिरफ्तार कर लिया गया है. जिस लड़की के साथ यह हैवानियत हुई है, उसका भरोसा अब पूरे प्रशासन तंत्र से ही उठ गया है. लड़की का पूरा परिवार सदमे में है.

वकील की भूमिका में लारा दत्ता

Entertainment Desk
फिल्म ‘फितूर’ में अपनी दमदार परफॉर्मेंस के बाद अभिनेत्री लारा दत्त एक बार फिर फिल्म “अज़हर” में एक अहम किरदार में नज़र आएँगी. इस फिल्म में लारा के किरदार का नाम है मीरा, जो एक सरकारी वकील है. लारा अपने किरदार के बारे में बताती हैं कि वे इस फिल्म में एक ऐसे वकील का किरदार निभा रही हैं जो निडर और बेबाक है, जो सच्चाई की लड़ाई लड़ती है.

लारा जो इस फिल्म में अज़हरुद्दीन को मैच फिक्सिंग के आरोप में दोषी साबित करने में लगी रहती हैं, अपने किरदार के बारे में लारा दत्ता ने कहा कि मेरे लिए यह किरदार बहुत ही चुनौतीपूर्ण रहा, क्योकि यह पूरी तरह फिक्शनल केरेक्टर है.

लारा ने अपने इस किरदार के लिए काफी मेहनत की है. वे अपनी एक दोस्त से मिली जो पेशे से वकील हैं, वे उनके साथ कुछ दिन रही, उनके काम करने के तरीके और हर बारीक़ से बारीक़ गतिविधियों को ध्यान से अनुसरण किया.

इस बारे में फिल्म के डायरेक्टर टोनी डिसूज़ा का कहना है कि लारा दत्ता के लुक और हावभाव इस किरदार के लिए बहुत ही सटीक थे. इसीलिए हमने उन्हें इस किरदार के लिए चुना, अपने किरदार को वास्तविक रूप देने के लिए लारा ने बहुत मेहनत की है. उन्होंने हर क़ानूनी दस्तावेजों सम्बंधित माध्यमों पर भी काफी ध्यान दिया है. लारा और टोनी इससे पहले हिंदी फिल्म ‘ब्लू’ में भी एक दूसरे के साथ काम कर चुके हैं.

इजिप्ट एयरलाइन्स का यात्री विमान हाईजैक, 4 विदेशी यात्री और क्रू सदस्य बंधक

Bureau@navpravah.com
एलेक्जेंड्रिआ से काहिरा की ओर यात्रा करने वाले MS181 विमान जोकि इजिप्ट एयरलाइन्स का यात्री विमान है और लगभग  60 यात्रियों के साथ उड़ान भर रहा था, को एक आतंकी द्वारा हाइजैक कर लिया गया है. अपने ट्विटर पर इस हाइजैक की पुष्टि इजिप्ट एयरलाइन्स द्वारा कर दिया गया है.

सूत्रों के अनुसार विमान को हाईजैक करने के बाद साइप्रेस के लरनाका एअरपोर्ट पर लैंड करवाया गया है. आतंकी हाइजैकर से बातचीत भी जारी है. इस आतंकी ने खुद को बमों से बाँध रखा है. अब तक की अपडेट्स के मुताबिक़ लगभग 25 से 30 यात्रियों को विमान से छोड़ा भी जा चुका है.

इजिप्ट सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने आतंकी के द्वारा 60 यात्रियों के बंधक बनाये जाने की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया की हाइजैकर एक सुसाइड बॉम्बर है. उसने विमान के पायलट को धमकी देकर लरनाका एअरपोर्ट पर लैंड करने पर मजबूर किया है.

इस घटना के बाद से ही साइप्रेस एंटी-टेरर पुलिस लरनाका एअरपोर्ट को घेर चुकी है लेकिन पुलिस को अब विमान से दूरी बनाये रखने के लिए कहा गया है.
सूत्रों के अनुसार विमान में सवार महिलाओं और बच्चों को हाईजैकर ने मुक्त कर दिया है. इजिप्त एयरलाइन्स ने हाइजैकर से बातचीत जारी रखी हुई है. विमान में केबिन-क्रू के मेम्बर्स के साथ अन्य विदेशी नागरिकों को भी बंधक बनाया गया है.

गुजरात : सीमावर्ती इलाके में सेटेलाइट सिग्नल से खलबली, अलर्ट जारी

Bureau@navpravah.com

गुजरात के कच्छ इलाके में कल रात सेटेलाइट फ़ोन के सिग्नल पकड़े जाने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां सकते में आ गईं. सिग्नल पकड़े जाने की जानकरी जैसे ही एजेंसी को मिली, तत्काल जांच शुरू कर दी गई और इलाके में अलर्ट जारी कर दिया गया. प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ सेटेलाइट फोन से सीमा पर बात चल रही थी.

कच्छ के सीमावर्ती इलाके में सेटेलाइट फोन के सिग्नल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी. बीती रात सुरक्षा एजेंसियों को खबर लगी की सीमावर्ती इलाके में सेटेलाइट फोन का सिग्नल है, जिसके ज़रिए सीमा पार बात की जा रही है. हालाँकि इलाके में है अलर्ट जारी कर दिया गया है. इस मसले में सुरक्षा एजेंसी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है.

सूत्रों से यह तो पता चला है कि सीमावर्ती इलाके में इस तरह की घटना को अंजाम दिया जा रहा है लेकिन सेटेलाइट फोन के ज़रिए बात क्या हो रही थी, यह स्पष्ट नहीं हो सका है. जानकारी के मुताबिक़ लिसी फोन से सरहद पार तीन बार बात हुई.

फ़िलहाल सरहद के आस पास के इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है. इस मामले में इंटेलिजेंस ब्यूरो भी अपने स्तर पर जांच कर रहा है.