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Thursday, September 10, 2026
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जून-जुलाई में आएँगे मानसून के अच्छे दिन -मौसम विभाग

ब्यूरो 

देश भर के अधिकतर राज्य सूखे की मार झेल रहे हैं। बूँद-बूँद जल को तरस रहे किसानों के दुश्वार जीवन में मौसम विभाग ने उम्मीद के कुछ बीज बो दिए हैं। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून पहले से बेहतर रहेगा और सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश होगी।

मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक पत्रकार वार्ता में कहा कि उनका पूर्वानुमान है इस वर्ष 104 से 110 प्रतिशत वर्षा हो सकती है। ये किसानों और सूखे की चपेट में राज्यों के लिए एक ख़ुशी की खबर है। मौसम विभाग के डीजी एल०एस० राठौर ने मंगलवार को एक पत्रकार वार्ता में ये सूचना दी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 2016 का मानसून सामान्य से बेहतर होगा ऐसा आंकलन है और सूखा ग्रसित मराठवाड़ा भी अच्छे मानसून का हिस्सा बनेगा। मराठवाड़ा क्षेत्र में भी बारिश अच्छी होगी।

राठौर के अनुसार साउथ एशिया में बने अल-नीनो के कारण सूखे की स्थिति उत्पन्न हुई थी जो कि जून-जुलाई के बीच हल्का होगा और बेहतर बारिश के लिए अल-नीना का मार्ग सुगम करेगा। जून के बीच में ही मानसून आने की संभावना जताई जा रही है।

मौसम का अनुमान लगाने वाली प्राइवेट कम्पनी स्काईमेट ने इस बार 105 प्रतिशत वर्षा का अनुमान जताया था। सूखे की वजह से भारी नुक्सान सामने आ चुका है। महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्य इसकी चपेट में हैं, जहां बूँद-बूँद पानी के लिए जनजीवन संघर्षमय है। ऐसी परिस्थिति में मौसम विभाग ने ये उम्मीद जगा दी है कि मानसून के अच्छे दिन आने वाले हैं।

मशहूर बाइक राइडर वीनू पालीवाल नहीं रहीं

आनंद द्विवेदी
ब्यूरो
हार्ले गर्ल के नाम से मशहूर बाइक राइडर वीनू पालीवाल की एक सड़क दुर्घटना में सोमवार को मृत्यु हो गई। अपने साथी दीपेश तंवर के साथ वो बाइक से ही भारत भ्रमण पर निकली हुई थीं। एक हादसे में बाइक फिसल जाने के कारण उन्हें चोटें आईं थी जिससे उनकी मृत्यु हुई। वीनू अपनी हार्ले डेविडसन बाइक से यात्रा पर निकली थीं।
पुलिस के मुताबिक़ वीनू और दीपेश अलग अलग गाड़ियों से इस यात्रा पर निकले थे। उन्हें लखनऊ से जयपुर जाना था। यात्रा के दौरान सोमवार को दोपहर ढाई बजे बागरोड़ा तिराहे पर उनकी बाइक फिसल गई जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं थीं। वीनू की बाइक तकरीबन 100 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रही थी। पुलिस के अनुसार वीनू आगे चल रही थीं और दीपेश पीछे अपनी बाइक से आ रहे थे। दुर्घटना के फ़ौरन बाद उन्हें ग्यारसपुर हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया जहाँ से प्राइमरी ट्रीटमेंट के बाद ही उन्हें विदिशा रेफर कर दिया गया था। विदिशा हॉस्पिटल ले जाते समय रास्ते में वीनू की मृत्यु हो गई। यात्रा का जरूरी सामान दीपेश की बाइक में रखा हुआ था।
विदिशा कोतवाली के टीआई राजेश तिवारी के अनुसार वीनू के पार्थिव शरीर को शवालय में रखा गया है। मंगलवार को उनका पोस्टमॉर्टेम होना है। वहीँ दीपेश ने आरोप लगाया है कि ग्यारसपुर में जो इंजेक्शन वीनू को लगाया गया है उसके कारण वीनू की मृत्यु हुई है।

शाहिद-करीना की केमिस्ट्री का दर्शकों को बेसब्री से इंतज़ार, रॉकस्टार के अंदाज़ में दिखे शाहिद

एंटरटेनमेंट डेस्क
पंजाबी गानों पर पिछले एक दशक से पूरा देश झूम रहा है। इसी ट्रेंड को भांपते हुए पंजाबी गानों से भरपूर म्यूजिकल सेंसेशन फिल्म आ रही है। पृष्ठभूमि को 70 एमएम पर्दे पर अभिषेक चौबे ने उड़ता पंजाब के रूप में उतारा है। फिल्म के लीड हीरो शाहिद कपूर का फर्स्ट लुक जारी हो गया है। जिसमें शाहिद कपूर एक पंजाबी रॉकस्टार दिख रहे हैं।
शाहिद कपूर टॉमी सिंह नाम के किरदार को प्ले कर रहे हैं। किरदार के बारे में बात की जाए तो शाहिद ने अपनी पूरी बॉडी लेंग्वेज, तौर-तरीका और एक पंजाबी रॉकस्टार की तरह अपनाया है। शाहिद की पंजाबी पहले से अच्छी है जिसका जलवा दर्शक ‘जब वी मेट’ में देख चुके हैं। इस फिल्म में शाहिद अपने किरदार को और ज्यादा मांजते हुए नज़र आ रहे है।
इस पंजाबी रॉक मूवी में शाहिद के साथ करीना कपूर, आलिया भट्ट, पंजाब के दलजीत दोशांज हैं। फिल्म 17 जून को रिलीज हो रही है। जिसका निर्देशन अभिषेक चौबे ने किया है और फैंटम प्रोडक्शन हाउस और बालाजी मोशन ने प्रोड्यूस किया है। दर्शकों को फिल्म का बेसब्री से इंतजार है क्योंकि कहीं न कहीं उनके मन में शाहिद-करीना के जब वी मेट वाली केमेस्ट्री बसी हुई है। और अब दोनों ने अलग-अलग शादियां भी कर ली हैं।

केजरीवाल ने की मोदी की तारीफ’, कहा- सूखाग्रस्त इलाके की मदद के लिए हम भी तैयार

ब्यूरो
केंद्र सरकार को हमेशा खरी-खोटी सुनाने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने मोदी सरकार की तारीफ कर सबको चौंका दिया। दरअसल केजरीवाल ने नरेंद्र मोदी सरकार के ‘वाटर एक्सप्रेस’ की सराहना की। और कहा कि महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे मराठवाड़ा के लातूर इलाके में मदद भेजने के लिए वे भी तैयार हैं।
महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे लातूर क्षेत्र में आज सुबह 5 लाख लीटर लेकर ‘वाटर एक्सप्रेस’ पहुंच गई है। सरकार का दावा है कि अगले 2 दिन में घरों तक इसकी पहुँच हो जाएगी। इस कृत्य के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भाजपा सरकार की तारीफ की। केजरीवाल ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर लातूर में पानी भेजने के काम की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार भी इस कार्य में सहयोग करना चाहती है। चिट्ठी में केजरीवाल ने लिखा कि यदि प्रधानमंत्री पानी भिजवाने का प्रबंध करा दें तो वे भी पानी भेजने को तैयार हैं।
सीएम केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा, ‘लातूर में गंभीर जल संकट है। हम सबको मदद करनी चाहिए। क्या दिल्लीवासी प्रतिदिन कुछ पानी बचाने और इसे लातूर के लोगों को भेजने के लिए तैयार हैं?’
इसके पहले भी केजरीवाल ने लातूर की जनता की समस्या का ज़िक्र करते हुए दिल्लीवासियों से अपील की है कि मराठवाड़ा की मदद के लिए वे पानी बचाने की कोशिश करें।

क्या ‘नारे’ में ही सिमट कर रह गया है राजनीतिक पार्टियों का अस्तित्व!

अनुज हनुमत
यूपी में विधानसभा चुनावों का शंखनाद हो चुका है और अब सारी पार्टियों ने कुर्सी पर काबिज होने के लिए अपने-अपने राजनीतिक पेंच कसने शुरू कर दिये हैं। ऐसे में इस समय भाजपा के नये प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या की ताजपोशी ने यूपी के राजनीतिक गलियारों की गर्मी फिर से से बढ़ा दी है । कल लखनऊ में केशव प्रसाद मौर्या जी के ताजपोशी समारोह के दौरान कई नये नारे लगे पर एक नारा ऐसा भी था जिसने इस समय सोशल साइट्स पर धूम मचा रखी है – “केशव नही संत है ,अब सपा का अंत है।”
ऐसे में पार्टी आलाकमान को ध्यान रखना चाहिए ऐसे संवेदनशील समय में अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सोशल साइट्स की सक्रियता पर कड़ी नजर रखें। अक्सर देखा गया है कि हमारे देश के चुनावों में नारों का अपना विशेष महत्व रहा है, पर यूपी के चुनावों में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। पिछले कई चुनावों में ‘नारों’ ने ही जीत भी दिलाई और हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ऊपर की पंक्ति में जिस नारे का वर्णन किया गया है, ज्यादातर राजनीतिक पंडितों को उसमे कुछ गलत नहीं नजर आएगा, पर अत्यधिक आक्रामकता से भी शुरुआती दौर में बचना चाहिए। एक बात और ख़ास है कि अमूमन देखा जाता है कि कुछ ख़ास विद्वानों द्वारा नारे बनाये जाते हैं और पार्टी हित में सक्रिय कार्यकर्ताओं के सुपुर्त कर दिए जाते हैं। जिससे उन नारों का गलत प्रभाव पड़ने पर पार्टी उससे किनारा कर सके। ऐसा ही एक उदाहरण दशको पुराना है जो इसी यूपी की राजनीतिक धरती का है। दशको पहले एक बार नारा चला था कि –

“तिलक- तराजू और तलवार,
      इनको मारो जूते चार”

इस नारे के आने के बाद उस समय प्रदेश के सियासी गलियारों में भूचाल आ गया था। उस समय इस नारे के लिए बहुजन समाज पार्टी को जिम्मेदार ठहराया गया था पर पार्टी ने इससे पल्ला झाड़ते हुये साफ़ तौर पर यह कह दिया था की इस नारे से हमारा कोई सरोकार नहीं। बहरहाल पिछले लोकसभा चुनावों में भी ऐसे ही एक नारे ने खलबली मचा दी थी और यूपी की राजनीति में भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी थी। उस समय बनारस की सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ रहे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जी का चुनावी प्रचार अपने सबाब पर था और उसी समय एक नारा आया –
“हर हर मोदी, घर घर मोदी” 
इस नारे की वजह से भी उस दौरान माहौल गर्म हो गया था। विरोधियों ने भाजपा को आड़े हाथों लिया और कहा कि ये काशी की धरती का ही नहीं वरन् भगवान शिव का अपमान है और इस एक गलत नारे ने कुछ समय के लिए भाजपा को बैकफुट पर ला दिया और इसके लिए बनारस के कुछ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराया गया।
पार्टी के पदाधिकारियों ने कहा कि ये नारा भाजपा का आधिकारिक नारा नही है बल्कि कुछ उत्साहित कार्यकर्ताओं ने बनाया है। विवाद को ज्यादा तूल पकड़ता देख आखिरकार मोदी को ट्वीट करके अपने कार्यकर्ताओं से आग्रह करना पड़ा कि ऐसे नारों से बचे और मुझे भी इन नारों से खुशी नहीं मिलती। इसलिये मैं उन तमाम लोगो से आग्रह करता हूँ कि कृपया इस नारे को न दोहरायें’
कुलमिलाकर देखा जाए तो ‘नारों’ ने ही पिछले लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया और हाल में ही बिहार में सत्ता में काबिज हुई महागठबंधन की सरकार को भी बहुमत दिलाने में नारों का ही महत्वपूर्ण योगदान रहा। अब बारी यूपी की है और दो बड़े चुनावों में अपनी रणनीति के चक्रव्यूह में विरोधियों को फंसाने में सफल रहे वर्त्तमान भारतीय राजनीति के सबसे सफल रणनीतिकार प्रशांत किशोर की अब असल परीक्षा है ।

शहीद भगत सिंह के विचारों को आत्मसात करने की आवश्यक्ता है- अभितेज सिंह

शहीद भगत सिंह का सपना था कि आजादी के बाद एक ऐसा मुल्क बनाएंगे, जिसमें कोई एक व्यक्ति इतना अमीर नहीं होगा कि किसी को खरीद सके और कोई इतना गरीब न हो कि खुद को बेच सके। भगत सिंह की शहादत का आज के वर्तमान समय में कितना असर पड़ा है, ऐसे तमाम मुद्दों पर हमारे संवाददाता अनुज हनुमत ने की भगत सिंह के प्रपौत्र अभितेज सिंह से बातचीत। प्रस्तुत उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश –

प्रश्न- आज की युवा पीढी को आप शहीद-ए-आजम भगत सिंह के कितने करीब पाते हैं ?

अभितेज- देखिए दिली तौर पर तो आज के युवा भगत सिंह के बहुत करीब हैं। भगत सिंह एक युवा एक रिबेल की निशानी हैं, विरोध की भी निशानी हैं। नौजवान साथी खुद को भगत सिंह जैसा ही समझते हैं पर असल मायने में भगत सिंह को समझने की भी बहुत जरूरत है।

प्रश्न- आज के समय में आप किस युवा नेतृत्व को भगत सिंह के नजदीक पाते हैं ?

अभितेज- नौजवानों को नेतृत्व पर निर्भर होने की या हर जगह नेतृत्व ढूँढने की जरूरत नहीं। हम हमेशा आशा करते हैं कि हमें कोई आगे ले जायेगा। एक तर्ज पर जंग-ए-आजादी लड़ी गई थी, तब वो पंक्ति थी ‘खुदी को कर बुलन्द इतना की खुदा बन्दे से खुद पूछे, बता तेरी रजा क्या है’। तो इसके ऊपर पूरी जंगे आजादी लड़ी गई थी, तो आज नौजवानों को भी खुद को बुलन्द करने की आवश्यकता है और उसमें से ही भगत सिंह और राजगुरु निकलेंगे।

प्रश्न – अभी हाल में कई लोगों ने कन्हैया कुमार की तुलना भगत सिंह के साथ की ,इसे आप कैसे देखते हैं ?

अभितेज- देखिये भगत सिंह एक व्यक्ति का नाम नही बल्कि एक विचार है। उनको मानने वाले उनका अनुसरण करने वाले और उनको जीने वाले लाखों लोग हैं। इस दुनिया में तो उनकी तुलना करना बिल्कुल भी उचित नहीं।

प्रश्न – दोनों में आप क्या फर्क मानते हैं ?

अभितेज – मैं एक बात मानता हूँ कि कन्हैया कुमार ने जो सवाल उठाये हैं वो बड़े वाजिब हैं। कोई सवालों की बात नहीं कर रहा पता नही क्यों नही कर रहा है। उन्होंने जिन बातों को उठाया है वो बहुत काबिलेतारीफ हैं।

प्रश्न – क्या कन्हैया कुमार की शहीद ए आजम भगत सिंह से तुलना की जा सकती है? कांग्रेस नेता शशि थरूर ने तो कहा है साफ़-साफ!

अभितेज – शहीद भगत सिंह और कन्हैया की तुलना कतई नही की जा सकती है। भगत सिंह 23 साल में शहादत प्राप्त कर गए थे, इसलिए तुलना तो हरगिज नही की जा सकती है। और हाँ, शशि थरूर ने जो कहा है, उसका जवाब तो वही दे सकते हैं। शशि थरूर जी की राजनीतिक अकुशलता हो सकती है पर मुझे पता नहीं कि इतने बड़े नेता हैं, तब भी उनका ऐसी तुलना करना बड़ा चकित करता है।

प्रश्न – एक युवा होने के नाते आप शहीद भगत सिंह की शहादत को कैसे देखते हैं?

अभितेज – हर एक युवा भगत सिंह से बेहद प्यार करता है। वो हर एक नौजवान के आदर्श हैं। हाँ, पर एक बात है कि 70 वर्ष बाद भी आज भगत सिंह दिलों पर राज करते हैं, पर आज जरूरत है कि युवा शहीद भगत सिंह को दिल के साथ दिमाग पर भी पहुंचाएं। शहीद भगत सिंह को फैशन के तौर पर न लें क्योंकि वे बहुत कूल किस्म के व्यक्ति थे। आज के युवाओं को उनके विचारों का भी अध्ययन करना चाहिए।

प्रश्न – अभी हाल ही में एक आर टी आई द्वारा जानकारी मांगने पर यह पता लगा था कि सरकार आज भी भगत सिंह को शहीद नही मानती। इस पर आपका क्या कहना है?

अभितेज – देखिये, आज की तारीख में मुद्दा ये नहीं है कि भगत सिंह हैं या नही। भगत सिंह की आत्मा रोती होगी या हसती होगी। भगत सिंह ने देश के लिए जो शहादत दी थी, वो किसी दर्जे के लिए नही दी थी। शहीद भगत सिंह का जो नाम है वो किसी टाइटल का मोहताज नहीं। वो आज भी सबके दिलों में राज करते हैं। मुद्दा ये है कि भगत सिंह ने जिस कारण के लिए कुर्बानी दी थी, क्या हमारी सरकार ने उस तरफ कदम बढ़ाये हैं।

प्रश्न – शहीदों के जो शहीद स्थल या जन्म स्थान हैं, ऐसे सभी स्थल आज जिस बदहाल स्थिति में हैं वो सरकार की उपेक्षा का ही परिणाम है। आपको क्या लगता है ये सही है?

अभितेज – बिल्कुल सहेजना चाहिए, क्योंकि जिनके कारण हम आज आजाद हैं और हमारे पास राजनैतिक, सामाजिक आजादी है। उनको जो लोग या जो जो कौमें अपने इतिहास को भूल जाती हैं, उनमे इतिहास रचने की शक्ति नही होती है। यह जरुरी है कि ऐसे जो भी स्थान हैं, वहां सरकार को प्रयास तेज करना होगा। ये आजादी मुफ्त में तो मिली नहीं। जितने भी महापुरुषों के स्थल हैं, उन्हें अच्छी तरीके सहेजना चाहिए ताकि आने वाले पीढियां भी उससे सीख ले सकें। जंग ए आजादी कोई खैरात पर नहीं मिली। लाखों लोगों को अपनी कुर्बानी देनी पड़ी है, ऐसी कुरबानियों को पूरा देश याद रखता है। आजादी की कीमत वही बता सकता है जिसने कुछ गंवाया हो, इसलिए जरुरी है कि ऐसे स्थानों को सहेजना चाहिए।

प्रश्न – आज के युवाओं के लिए आप क्या सन्देश देना चाहते हैं?

अभितेज – निःसंदेह हम भगत सिंह को दिल से बहुत प्रेम करते हैं। जैसा देश में माहौल बन रहा है और जो अव्यवस्थायें देखी जा रही हैं, उनका हल केवल भगत सिंह के विचारों को पढ़कर अपनाने पर होग। वाकई अगर भगत सिंह को सम्मान देना है तो सर्वप्रथम हमें भगत सिंह के लिखे विचारों को पढ़ना होगा। मेरा युवाओं से निवेदन है कि अगर आप वाकई में भगत सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, तो उनकी मूर्तियों के अलावा उनकी सोंच के ऊपर फूल चढ़ायें और उनके लिखे हुए लेखों का अध्ययन करें ताकि हमें जो परिस्थितियां और चुनौतियाँ देश में दिख रही हैं, युवाओं के प्रति हम उन्हें हल कर सकें।

दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा पर सवालिया निशान, चाकू दिखाकर 12 लाख लूटे

ब्यूरो
सोमवार सुबह साढ़े पांच बजे दिल्ली के राजेन्द्र नगर मेट्रो स्टेशन में एक कंट्रोलर को चाक़ू मारकर 12 लाख रुपये लूटने की खबर आई है। मेट्रो स्टेशन के अंदर बने कंट्रोल रूम में ये लूट की घटना अंजाम दी गई है।
इससे मेट्रो स्टेशनों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि सीआईएसएफ के जवानों के रहते हुए कोई ऐसी वारदात कैसे कर सकता है? जबकि दिल्ली मेट्रो में किसी तरह का कोई भी हथियार ले जाना प्रतिबंधित है।
मौका-ए-वारदात पर पुलिस पहुंचकर जांच भी शुरू कर चुकी है। मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। मेट्रो स्टेशन में हुई ये पहली घटना है जिसमें किसी ने स्टेशन के अंदर घुसकर लूट की वारदात की है।
दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा का जिम्मा केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा (CISF) के जिम्मे है जिसके अधिकारियों ने दो संदिग्धों की तलाशी लेने का दावा किया है। सुरक्षा बल का कहना है संभवतः इन्हें ये चाकू मेट्रो स्टेशन के अंदर भी मिला हो।

छत्तीसगढ़: सामने आया साहू समाज का काला सच, प्रताड़ित परिवार ने माँगा इच्छा मृत्यु

आनंद द्विवेदी
छत्तीसगढ़, धमतरी के मगरलोड ब्लॉक स्थित कमरौद में सामाजिक बहिष्कार की एक ऐसी घटना सामने आई है। जिसने सामाजिक भेदभाव का काला सच उजागर कर दिया है। कमरौद गाँव के साहू समाज ने एक परिवार का हुक्का-पानी पिछले तीन वर्षों से बंद कर रखा है। इस परिवार ने समाज को 5000 रुपये आर्थिक दंड भी भरा है फिर भी समाज ने इन्हें स्वीकार नहीं किया।
न्याय की तलाश में कमरौद गाँव का यह परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहा है। इसी त्रास से तंग आकर परिवार की एक बेटी ने गत वर्ष जहर पीकर आत्महत्या कर ली थी। दैनिक अखबार ‘नई दुनिया’ के अनुसार रविवार को हुई प्रेस कांफ्रेंस में पीड़ित परिवार ने इच्छा मृत्यु की मांग की है।
परिवार के मुखिया पूनाराम साहू के अनुसार, “ तीन साल पहले उसकी बड़ी पुत्री का ब्याह पास के ही एक गाँव में हुआ था। जिसके कुछ दिनों बाद ही लड़की की तबीयत खराब रहने लगी। ससुराल वालों ने कहा कि आप अपनी बेटी को घर वापस ले जाइए. हमने उनकी यह बात स्वीकार कर ली, और इलाज करवाने के बाद बेटी को वापस ससुराल भेज दिया। इस घटना पर समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि इस परिवार ने समाज को बिना सूचित किये ऐसा काम किया इसलिए अर्थदंड दिया जाएगा। अर्थदंड भरने के बावजूद समाज ने इस परिवार का बहिष्कार कर दिया।
जब परिवार की बेटी ने आत्महत्या की तो उसके दाह संस्कार में शामिल होने न तो परिवार में से कोई और न ही समाज से कोई आया। इक्कीसवीं सदी में भी ये परिवार सामाजिक बहिष्कार जैसी कुरीतियों का भुक्तभोगी बना है। गौरतलब है कि जब पूनाराम के छोटे भाई नेकराम ने इस बहिष्कार के खिलाफ पुलिस में गवाही दी तो उनका भी समाज से बहिष्कार कर दिया गया।
इस सामजिक त्रासदी से तंग आकर परिवार ने एसपी कलेक्टर, डीजी, गृहमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक को शिकायत भेजी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई है। इसी के चलते परिवार ने इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है।

बॉर्डर सिक्यूरिटी: 2900 किलोमीटर की सीमा होगी लॉक, घुसपैठ रोकने हेतु सेंसर और लेज़र बैरियर्स का इस्तेमाल

ब्यूरो
भारत सरकार ने सीमा की सुरक्षा को गंभीरता से लेते हुए पाकिस्तान से लगी लगभग 2900 किलोमीटर की पश्चिमी सीमा को और भी मजबूत बनाने का फैसला किया है। एक योजना के अनुसार सीमा की पांच तहों वाली सुरक्षा की जानी है।
अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के अनुसार पश्चिमी सीमा को पूरी तरह से लॉक कर दिया जाएगा और हर मिनट नई तकनीकी का प्रयोग करते हुए कड़ी निगरानी भी की जाएगी।
स्वतंत्रता के पश्चात भारत सरकार पहली बार सीमा को पूरी तरह से लॉक करने की तैयारी में है. गृह राज्य मंत्री किरन रिजीजू ने इस योजना को मंजूरी मिलने की पुष्टि की और कहा है, “भारत-पाक सीमा में कुछ जगहें ऐसी हैं जहाँ से लगातार घुसपैठ की नापाक हरकतें की जाती रही हैं, ऐसे में इन जगहों को फुल प्रूफ करना आवश्यक है जो सरकार का काम है. हम नई तकनीकी का इस्तेमाल करेंगे, जिनमें, कैमरे और थर्मल इमेज अंडर ग्राउंड मॉनिटरिंग सेंसर आदि तकनीक शामिल है.
सीमापार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे, थर्मल इमेज और नाइट विजन उपकरण, युद्ध के मैदान में निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले राडार, भूमिगत मॉनिटरिंग सेंसर और लेजर बैरियर्स लगाए जाएंगे.
ऐसे सभी यंत्र एकसाथ मिलकर काम करेंगे जिससे घुसपैठ किये जाने पर एक यन्त्र बंद हुआ तो दूसरा कण्ट्रोल रूम को सूचना मुहैया कराएगा. लेजर बैरियर्स को 130 स्थानों पर लगाया जाना है जहाँ फेंसिंग नहीं है. ऐसे इलाके जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों व नदी वाले इलाकों से लेकर गुजरात के कुछ हिस्सों तक फैले हुए हैं.ज्यादातर तस्करों-आतंकियों द्वारा सीमापार से घुसपैठ को इन्हीं इलाकों से  अंजाम दिया जाता है.

महाराष्ट्र: डांस बार बिल को मंजूरी, 21 साल से कम उम्र की नहीं होंगी बार बालाएं

ब्यूरो

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र कैबिनेट द्वारा डांस बार बिल को मंजूरी मिल गई है और संभवतः बिल मंगलवार को विधानसभा में पेश भी किया जा सकता है। इस बिल के मुताबिक डांसर की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए।

महाराष्ट्र कैबिनेट ने डांस बार बिल मंजूर कर लिया है। बिल के मुताबिक़ ग्राहक बार बालाओं पर पैसे नहीं उछाल सकेंगे। प्रस्तावित कानून पहले की अपेक्षा सुरक्षा को लेकर थोड़ा सख्त है। जिससे अपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित की जा सकें। डांस बार शाम के 6 बजे से रात के 11.30 बजे तक ही खुला रहेगा।

बार बालाओं की सुरक्षा के मद्देनज़र प्रत्येक बार में तीन महिला सुरक्षाकर्मियों का विधान है। साथ ही यह भी स्पष्ट है कि कोई भे ग्राहक डांसर से पांच फ़ीट की दूरी पर ही होगा। नज़दीक आने पर ग्राहक कानूनी घेरे में आ जाएगा।

यही नहीं, डांस बार अश्लील गानों पर नृत्य नहीं किया जा सकेगा। हर बार में सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे और तकरीबन 30 दिन की रिकॉर्डिंग संभाल कर रखनी होगी, जिससे जांच में पुलिस को आसानी हो।