भारतीय मौसम विज्ञान केन्द्र ने गुरुवार को पूर्वानुमान लगाया कि अगले सप्ताह देश के कई इलाके में गर्मी अपना कहर ढा सकती है। मौसम विभाग के अनुसार महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा, तेलंगाना, पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान, दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र, पंजाब और हरियाणा, ओडिशा और गंगा वाले पश्चिम बंगाल के क्षेत्र में लू जैसी स्थितियां रह सकती हैं।
मौसम विभाग के आमजनमानस को चेताते हुए कहा कि देश के आधे से अधिक इलाके में सुरक्षित रहने की आवश्यकता है। आईएमडी के अनुसार 12 से 21 अप्रैल के दौरान भारत के ज्यादातर भागों में रात का भी तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। उत्तर पश्चिम के इलाके में (राजस्थान,गुजरात और जम्मू कश्मीर) तापमान सामान्य रहने की सम्भावना है।
मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के अनुसार देश के कई भागों में लू कीस्थितियां बनती नज़र आ रही हैं। कई स्थानों पर तापमान 40 डिग्री के आंकड़े को पार कर गया है। उदाहरण के लिए, ओडिशा के टिटलागढ़ और आंध्र प्रदेश के नालगोंडा में अधिकतम तापमान क्रमश: 45 और 44 डिग्री सेल्सियस रहा। हैदराबाद में भी अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस रहा जो 43 वर्ष में अधिकतम है।
तेलंगाना राज्य में भीषण गर्मी के चलते अब तक 35 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। राज्य सरकार ने एहतियातन सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है, जिससे समस्या और न बढ़ने पाए। एक अधिकारी द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ अगले 24 घंटे में तापमान के 40 डिग्री सेल्सियस के पार रहने की सम्भावना है।
शराब के ठेके में हिस्सेदारी का लालच देकर व्यापारी से एक करोड़ रुपये ठग लिए गए। ठगी का आरोप व्यापारी ने अपने परिचितों पर लगाया है। बुधवार को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। आरोपी धोखाधड़ी के मामले में पहले भी जेल जा चुका है।
मामला कैंट थाना क्षेत्र का है। जानकारी के मुताबिक विजय सिंघल निवासी कौलागाढ़ शहर के बड़े व्यापारी हैं। उन्होंने पुलिस में अपने कुछ साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार विजय सिंघल से उनके परिचित अमित अग्रवाल ने पिछले साल फरवरी में कहा कि वह शराब का ठेका ले रहा है।
ठेके में 50 प्रतिशत पार्टनरशिप देने की बात कहकर अमित ने विजय से एक करोड़ रुपये मांगे और कहा कि जो भी लाभ होगा आधा-आधा कर लेंगे। इस बात पर विजय राजी हो गए और अमित व उसके साथियों को एक करोड़ रुपये दे दिए। इसके बाद मार्च 2015 में शराब के ठेकों की लॉटरी हुई तो अमित अग्रवाल को कोई ठेका नहीं मिला। इसके बाद विजय ने अमित से रुपये वापस मांगे तो वह एक साल के लिए टाल गया। इस बीच जब विजय को पता चला कि अमित के खिलाफ पहले से धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज हैं, तो उन्होंने अमित पर रुपये वापस करने के लिए दबाव बनाया, लेकिन अमित ने इंकार कर दिया।
इस साल भी अमित के नाम कोई दुकान नहीं आई तो विजय ने दोबारा रुपये वापस मांगे। आरोप है कि इस पर अमित ने विजय को जान से मारने की धमकी भी दी। सीओ सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि विजय की तहरीर पर कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अब तक की पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अमित अग्रवाल कुछ समय पहले धोखाधड़ी के एक मामले में जेल भी जा चुका है।
हाल ही में आपने नवप्रवाह.कॉम में पढ़ा होगा कि कैसे छत्तीसगढ़ में एक साहू परिवार का समाज ने सामूहिक बहिष्कार कर जीवन दुर्वार कर दिया है। सामाजिक चेतना और वैधानिक अवमूल्यन की ऐसी ही परंपरा में महाराष्ट्र सरकार का सराहनीय फैसला सामने आया है। सामाजिक बहिष्कार जैसे घृणित कृत्यों की रोकथाम के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सर्वसहमति से सामाजिक बहिष्कार (रोकथाम,निषेध और निवारण) अधिनियम 2016 पारित किया है।
इस अधिनियम के अनुसार यदि कोई भी व्यक्ति या समूह दूसरे किसी व्यक्ति या समूह का सामाजिक बहिष्कार करता है या ऐसे मामले में किसी भी तरह दोषी सिद्ध होता है, तो उसे तीन सालों तक जेल की हवा खानी पड़ सकती है। साथ ही 1 लाख रुपये तक का अर्थदंड भी भरना पड़ सकता है।
इस कानून के अनुसार आर्थिक दंड में प्राप्त राशि का पूरा या एक हिस्सा पीड़ित व्यक्ति को दिया जाएगा, जिससे वो अपना जीवन सामान्य स्थिति में भी ला सके। देवेन्द्र फडनवीस की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार ने बहिष्कार को अपराध का दर्जा दिया है। साथ ही महाराष्ट्र भारत का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने इस सम्बन्ध में कानून भी बना डाला है। इस क़ानून के मुताबिक़ बहिष्कार पीड़ित व्यक्ति या उसके परिवार का कोई भी सदस्य सीधा या तो पुलिस या फिर जज के सामने अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है। चार्जशीट दाखिल होने के 6 महीने के अंदर मामले की सुनवाई पूरी किये जाने और दोषियों को दण्डित किये जाने के प्रावधान हैं।
इसी अधिनियम ने न्यायालय को ये शक्ति दी है कि वह दोषी पाए गए व्यक्ति या समूह को दंड देने से पूर्व सामाजिक बहिष्कार के पीड़ित का बयान सुन सकती है और उसके आधार पर दंड निर्धारित कर सकती है।
विधान सभा के समक्ष इस बिल को लाने से पूर्व सीएम फडनवीस ने परिषद को बताया कि राज्य में सामूहिक बहिष्कार के 68 वाकये सामने आये, जिसमें अकेले रायगढ़ जिले में 633 लोग इसे झेल रहे हैं।
अब तक आपने अधिकारियों को गरीबों का खून चूसते तो खूब देखा और सुना होगा पर कभी किसी अधिकारी द्वारा किसी गरीब को खून देने की बात शायद ही सुनी या देखी हो। दो दिन पहले शाहजहांपुर के डीएम विजय किरण आनंद जिन्होंने एक महिला की जान बचाने के लिए ऑन ड्यूटी बिना कुछ सोचे हुए अपना खून दे दिया।
ब्लड बैंक में नही मिल रहा था। डीएम विजय किरन आनंद अपने जिस अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं, आज उन्होंने इसे सिद्ध भी कर दिया। एक साँस की मरीज को अपना खून देकर डीएम ने उस महिला की जान बचाकर मानवता को कायम कर दिया। कलयुग में जब अपने भी साथ छोड़ देते हैं, वहां जिले के उच्च अधिकारी द्वारा एक अनजान महिला के लिए किये कार्य की जन जन में प्रशंसा हो रही है।
सोमवार को जिला अस्पताल के निरिक्षण के दौरान डीएम विजय किरन आनन्द को शहर के मोहल्ला निवासी रीना की बहन मिली। दरअसल रीना साँस की रोगी है और उसका इलाज जिला अस्पताल में ही चल रहा है। रीना को ब्लड की जरुरत थी, मगर ब्लड बैंक में एबी निगेटिव ब्लड उपलब्ध न होने के कारण रीना की बहन बार-बार ब्लड बैंक के चक्कर काट रही थी। जब डीएम ने उससे उसकी परेशानी पूछी तो उसने बताया कि अस्पताल में उसकी बहन को चढने वाला एबी निगेटिव ब्लड नही मिल पा रहा है। वह जिला अस्पताल में स्थित ब्लड बैंक के कई चक्कर लगा चुकी है। इस पर डीएम ने मौके पर ही ब्लड बेंक जाकर जानकारी की।
डाक्टर ने डीएम को बताया कि ब्लड बैंक में एबी निगेटिव का एक यूनिट ही ब्लड मौजूद है। एक यूनिट ब्लड की बरेली से व्यवस्था की जायेगी। पूरी जानकारी होने पर डीएम ने डाक्टर से कहा कि उनका ग्रुप भी एडी निगेटिव है और उनका ब्लड लेकर उस लड़की को दें। डीएम ने ब्लड बैंक स्थित ब्लड डोनेट केन्द्र में जाकर अपना एक यूनिट ब्लड दान किया। डीएम द्वारा स्वयं का ब्लड देकर मरीज को बचाने के लिए किये गये कार्य की वहां उपस्थित रोगियों तथा उनके तीमारदारों ने प्रशंसा करते हुए उन्हें दुआये दी। और कहा कि इतने समय से ऐसा जिले में कोई अधिकारी नही आया जिसने रोगियों को अपना ब्लड दिया हो।
मुंबई में एक बार फिर पालतू जानवर प्रेमियों के लिए ५० – ६० से भी ज्यादा अनोखी और दुर्लभ पक्षियों, रंग बिरंगी मछलियों और विभिन प्रजाति की बिलियो की प्रदर्शनी का आयोजन आज से शुरू हो गया है।
‘बबलू जोरंग’ यह प्रदर्शन १४ अप्रैल से अँधेरी के चित्रकूट ग्राउंड में शुरू हो गया है। यह अनोखी प्रदर्शनी १९ अप्रैल तक चलेगी। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन अभिनेत्री अमीषा पटेल के हाथो से किया गया।
प्रदर्शनी के आयोजक बबलू अजीज बरुदगर का कहना है की ग्रीष्मावकाश में स्कूल बंद होने के कारन बच्चों और बड़ो के लिए दुनिया भर के दुर्लभ पक्षियों और पालतू जानवरों को नज़दीक से देखने का एक सुनहरा मौका है।
पहले मैरीटाइम इंडिया समिट 2016 का उदघाटन प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया, जिसकी शुरुआत से पहले पीएम ने डॉ भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा पर हार चढ़ाया और नमन किया। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें इस बात पर बेहद ख़ुशी है कि आज जल परियोजनाओं के मुद्दों पर डॉ अम्बेडकर की दूरदर्शी सोच का पालन हो रहा है।
इसी समारोह में पीएम मोदी ने कहा कि भारत के मैरीटाइम सेक्टर को परिवहन का सबसे वृहद् रिसोर्स बनाया जा सकता है। ये इको फ्रेंडली भी है। पीएम मोदी ने इसके साइड इफेक्ट्स पर चिंता जताते हुए ये भी कहा कि ये बेहद ध्यान देने योग्य है कि हमारी इस प्रणाली, जीवन शैली, परिवहन सिस्टम और व्यापारिक तरीकों से समुद्र महासागरों के स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर भी न पड़ने पाए।
पीएम मोदी ने हर्ष जताते हुए कहा कि ये पहली बार है जब भारत में इतने बड़े स्तर पर किसी वैश्विक समिट का आयोजन किया जा रहा है।
इस उदघाटन समारोह में प्रधानमन्त्री ने डॉ अम्बेडकर को याद करते हुए कहा कि आज एक ऐसे व्यक्ति की 125वीं जयंती है, जो कि मुंबई में रहे और यहीं काम भी किया। पीएम मोदी ने डॉ अम्बेडकर को भारतवर्ष की जल व सिंचाई परियोजनाओं का शिल्पकार भी बताया। पीएम ने कहा कि डॉ अम्बेडकर ने हमेशा नवीन जल परियोजनाओं पर बल दिया ताकि देश के करोड़ों गरीब जनों तक समुचित जल पहुँचाया जा सके।
समारोह के दौरान केन्द्रीय सड़क, परिवहन,एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि शिपिंग कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लगातार कई वर्षों से घाटे से जूझ रहा है जो जल्द ही मुनाफ़ा भी कमाएगा। मंत्री ने कहा कि आने वाले दस वर्षों में भारतीय बंदरगाहों की क्षमता को दोगुना कर दिया जायेगा।
सामाजिक न्याय और संविधान के प्रणेता कहे जाने वाले डॉ भीमराव अम्बेडकर ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने सामाजिक समरसता पर अधिक जोर देते हुए न्याय व्यवस्था की कल्पना की। संविधान निर्मात्री सभा का ख़ास चेहरा माने जाने वाले डॉ अम्बेडकर ने आजीवन शोषित समाज के उत्थान की बात कही और उनके अगुवाई में बने संविधान में इस बात की पुष्टि होती है।
तत्कालीन भारतीय समाज की सनातनी व्यवस्था जिसमें भारतीय दीन-दलित समाज अज्ञानांधकार में लिप्त तथा चातुर्वर्ण्य की व्यवस्था में पिसने के साथ दरिद्रता की आग में जल रहा था, इसका कारण यह था कि हमारी व्यवस्था के सिद्धान्त सदियों से ईश्वरकृत, अपौरूषेय एवं प्रश्नों से परे माने जाते रहे। क्योंकि इन सिद्धान्तों की जड़ें इन लोगों के मस्तिष्क में इतनी गहरी कर दी गयीं थीं, जिसका कोई अकाट्य प्रमाण तत्कालीन समय में नहीं था।
गौतम बुद्ध और महात्मा गाँधी के पश्चात समरसता पर यदि किसी ने जोर दिया, तो वो थे डॉ अम्बेडकर। हजारों वर्षों से जिन्हें अछूत मानकर समाज के हाशिये में रखा गया उनके मर्म को हृदय से लगा डॉ अम्बेडकर ने कुरीतियों का मुखर विरोध किया। डॉ अम्बेडकर ने दीन-दलित को समाज में सर ऊंचा कर परम्परागत सोच से ऊपर उठ चलना सिखाया।
राजनीतिक मौकापरस्तों ने डॉ अम्बेडकर के विचारों को आजकल अपना कॉपीराइट बना रखा है, जबकि सबसे असामाजिक आचरण उन्ही राजनीतिक सत्तालोलुप नेताओं का है जिसके विरुद्ध आजीवन डॉ अम्बेडकर लड़ते रहे। डॉ अम्बेडकर न केवल दलित उत्थान पर केन्द्रित थे बल्कि समाज के अन्य विषयों पर भी उनकी पैनी नजर होती थी। उन्होंने भारत विभाजन पर भी बहुत गहराई से विचार विमर्श किया।
रुपये की समस्या पर भी डॉ साहब ने लम्बे आलेख लिखे और वक्तव्य दिए। डॉ अम्बेडकर एक महान सामजिक चिन्तक थे, जिन्हें अब कुछेक राजनीतिक दलों ने केवल दलित चिन्तक का तमगा दे रखा है। इन सभी नेतागणों की सोच सत्ता तक ही सीमित है, जबकि डॉ अम्बेडकर एक ऐसे भारतदेश की कल्पना करते थे, जिसमें सभी को समान न्याय और अधिकार मिलें और किसी भी प्रकार की सामाजिक विषमता के लिए जहां कोई स्थान न हो। इसीलिए संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी की अगुवाई में जब किसी का नाम सामने आया तो वो थे डॉ भीमराव अम्बेडकर। कांग्रेस के कुछ नेतागण ये दावा करते हैं कि वो डॉ अम्बेडकर के प्रति पूर्ण निष्ठा रखते आये हैं, जबकि इसी कांग्रेस ने संसद में डॉ अम्बेडकर को दो बार दबाया। कांग्रेस पार्टी ये भी दावा करती आयी है कि डॉ अम्बेडकर को संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी की अगुवाई कांग्रेस की वजह से मिली जबकि सत्य ये है कि डॉ भीमराव अम्बेडकर का नाम मुस्लिम लीग द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
संविधान देश की आत्मा है, जिसके हित में ही सर्वजन हित संभव है। ये एक ऐसा दस्तावेज है जिसके प्रति सम्पूर्ण निष्ठा ही हमें सभ्य सामाजिक जीव के रूप में स्थापित कर सकती है। आज दलित चिंतकों ने डॉ अम्बेडकर की सोच को केवल विरोध और बहिष्कार के स्वरों में गूंथ दिया है, जबकि डॉ अम्बेडकर की सोच इन सभी विषयों से कहीं ऊपर थी। डॉ अम्बेडकर यदि दलित विचारक ही होते तो तत्कालीन संसद में उन्हें कानून मंत्री का दर्जा कैसे मिल सकता था?
डॉ अम्बेडकर का संविधान सभा में दिया हुआ भाषण इस बात का साक्षी है- ‘हमने कानून द्वारा राजनीतिक समानता की नींव रख दी है पर यह समानता तभी पूरी तरह से चरितार्थ होगी जब आर्थिक समानता भी देश में स्थापित होगी। यह चुनौती न केवल बनी हुई है बल्कि और तीव्र हो रही है।’
देश की तत्कालीन स्थिति वैसी ही थी जैसी कभी नस्लभेदी अमेरिका की हुआ करती थी, जहां मार्टिन लूथर किंग जैसे महान प्रणेताओं ने सामाजिक समरसता व अधिकारों के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की। राजनीतिक स्वार्थों से इतर आज समाज को जरूरत है एकात्मता के स्वर की। एक ऐसा स्वर जिसमें विधिक धर्म की स्थापना हो और प्राणी मात्र को श्रेष्ठ समझा जाय। समय समय पर धार्मिक रीतियों में परिवर्तन होता रहा है। ये ऐतिहासिक तथ्य है और यही परिवर्तनशीलता धर्म की विशेषता होती है।
धर्म का अर्थ किसी पंथ या सम्प्रदाय से नहीं लगाया जाना चाहिए। इसके व्यापक और वृहद् मायने हैं। “धार्यते इति धर्मः” अर्थात् “जो धारण किया जाय वही धर्म है”। हम जिस भी चीज़ पर विश्वास करेंगे वह हमारा धर्म हो जाएगा। इसीलिए जिन्होंने अस्पृश्यता पर विश्वास किया वो उनका धर्म हो गया, जिन्होंने सामाजिक समरसता पर यकीन किया और प्राणिमात्र पर विश्वास रखा उनका धर्म वही हो गया। यही कारण है कि जो धर्म को बुरा कहते हैं वो दरअसल अपनी कमियों को दूर करने की बजाय धर्म की आड़ में महज पाखण्ड कर रहे होते है।
सद्कर्मों से यदि धर्म न बनता तो कबीर, रहीम, मीरा,तुलसी, दादू जैसे संतों की समाज को आवश्यकता ही क्यों पड़ती? जरूरी नहीं कि हम सब स्वीकार कर लें। ये भी जरूरी नहीं कि डॉ अम्बेडकर की कही हर बात में हम अंधविश्वास करें किन्तु तर्क जिसे स्वीकार करे वही श्रेष्ठ है। प्राणीमात्र के हित की जो बात हो वो श्रेष्ठ है। फिर वही बात डॉ अम्बेडकर करें, महात्मा गांधी करें, या कोई भी महापुरुष करे।
डॉ अम्बेडकर ने दलितों को पूजा-पाठ इत्यादि से दूर रहने को कहा और अपने उत्थान की ओर अग्रसर रहने की सीख दी। इसका अर्थ यह बिलकुल नहीं है कि वो पूरे संसार को नास्तिकता की ओर विमुख कर रहे हैं। जिसका कल्याण पूजा पाठ से न हो वो यदि उसे न करें तो इसमें ईश्वर को क्या आपत्ति हो सकती है। परमात्मा तो हर जीव को बराबर स्थान देते हैं, उनकी पूजा करने से यदि किसी को सुख मिले तो अच्छा और यदि पूजा न करने से किसी का हित होता है तो उसमे भी कुछ बुरा नहीं।
सबको अपने रास्ते चुन लेने का बराबर अधिकार स्वयं परमसत्ता दे चुकी है। जन और मानहानि ही यदि इस धर्म विरोधी आडम्बर का लक्ष्य है, तो इसे भी सिरे से अस्वीकार कर देना चाहिए जैसा कि आजकल अमूमन नेता और उनके पिछलग्गू करते हैं। ये भी बेहद छोटी बात है कि डॉ अम्बेडकर ने दलितों को हिंदुत्व का विरोध करना सिखाया बल्कि दलितों द्वारा दुसरे धर्मों को अपनाए जाने का पूर्ण रूप से विरोध डॉ अम्बेडकर ने ही किया।
डॉ अम्बेडकर को ये बात भी व्यथित करती थी कि उन्हें जातिवादी और दलितवादी कहा जाता है। एक बार उन्होंने एक सभा में कहा था कि मेरी प्रत्यक्ष गतिविधियाँ चूॅकि दलितों के उद्धार से जुड़ी हैं। इसलिए मुझे दलितवादी ठहराने की कोशिश की जा रही है। इसी प्रकार धर्म के विषय में डॉ अम्बेडकर ने कहा कि ‘‘कुछ लोग सोचते है कि धर्म समाज के लिए अनिवार्य नहीं है। मैं इस दृष्टिकोण को नहीं मानता। मैं धर्म की नींव को समाज के जीवन तथा व्यवहारों के लिए अनिवार्य मानता हूँ।”
समाज को किसी लकीर का फ़कीर कतई नहीं बनना चाहिए अन्यथा आज भी इंसान कमर झुकाकर पत्थरों की आड़ में चलता, पत्ते लपेटकर जंगली पशुओं का शिकार करता और अपनी भूख मिटाता। विकास और उत्थान समाज का अहम हिस्सा है, जिसके लिए हर किसी को प्रातिमात्र के प्रति सद्भाव रखते हुए अग्रसर होना चाहिए।
⚜मेष (Aries): किसी नए कार्य को प्रारंभ करने के लिए प्रातःकाल का समय अनुकूल रहेगा। आज सरकारी लाभ होने की संभावना है। व्यापार और व्यावसायिक लाभ होगा। विचारों में शीघ्र ही परिवर्तन होंगे।
⚜वृषभ (Tauras): आज का दिन आप के लिए मध्यम फलदायी है। आज मित्रों और स्नेहीजनों के साथ हुई भेंट आनंदप्रद रहेगी। दिन का अधिकांश भाग धन सम्बंधित योजना बनाने में ही बिता देंगे।
⚜मिथुन (Gemini): आर्थिक दृष्टिकोण से आज का दिन लाभदायी रह सकता है। मित्रों एवं परिवारजनों का सहयोग दिन को आनंदमय बना देगा। मन में किसी प्रकार के निषेधात्मक विचार को प्रवेश न करने दें।
⚜कर्क (Cancer): आज आय के मुकाबले खर्च अधिक रह सकता है। नेत्रों के दुःख से व्यग्रता बढ़ सकती है साथ में मानसिक चिंता भी बनी रह सकती है। वाणी पर संयम रखें। किसी के साथ भ्रांति न हो इसका भी ध्यान रखें।
⚜सिंह (Leo): प्रातः काल का समय बहुत अच्छी तरह से बीतेगा। सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्र में आनंदप्रद और लाभप्रद समाचार मिल सकते हैं। आय में वृद्धि होगी। अकस्मात के भी योग हैं। मानसिक चिंता रह सकती है।
⚜कन्या (Virgo): दिन काफी हद तक अनुकूल रहेगा। परिवारजनों के साथ सम्बंध प्रेमभरा होगा। व्यावसाय में उच्चाधिकारी आप के कार्य से प्रसन्न रहेंगे। आप की प्रसन्नता में भी इससे वृद्धि होगी। मित्रों से लाभ।
⚜तुला (Libra): प्रातः काल में आप का मन चिंताग्रस्त रह सकता है। शारीरिक रूप से शिथिलता और आलस्य की भी स्थिति बन सकती है। अधिकारी के अप्रसन्न होने की आशंका। परंतु मध्याह्न के बाद सुधार।
⚜वृश्चिक (Scorpio): आध्यात्मिकता और ईश्वर की प्रार्थना से अनिष्ट विषयों से छुटकारा प्राप्त कर सकेंगे। शारीरिक और मानसिक रूप से आप अस्वस्थ अनुभव कर सकते हैं। मानहानि न हो इसका ध्यान रखें।
⚜धनु (Sagittarius): सुख और दुःख की मिश्रित भावना आज दिनभर रह सकती है। पारिवारिक वातावरण भी आनंदप्रद रहेगा। मध्याह्न के बाद मन में नकारात्मक विचारों की भावनाओं से भारीपन का अनुभव हो सकता है।
⚜मकर (Capricorn): बातचीत करते समय क्रोध पर संयम बरतें। मान-सम्मान मिलने की भी संभावना। आर्थिक लाभ होने के योग। मध्याह्न के बाद का समय मित्रों और स्वजनों के साथ सावधानीपूर्वक बिताएं।
⚜कुंभ (Aquarius): कला के प्रति विशेष अभिरुचि रह सकती है। खर्च की मात्रा अधिक रहेगी। मध्याह्न के बाद घर में शांतिपूर्ण वातावरण। अपूर्ण कार्य पूर्ण होंगे। शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार और आर्थिक लाभ। वाणी पर संयम रखें।
⚜मीन (Pisces): बहुत अधिक भावनाशील न ही बनें तो बेहतर। विचारों की अधिकता के कारण मानसिक रूप से शिथिलता का अनुभव हो सकता है। विद्यार्थियों के लिए लाभकारी दिन। सम्मान भंग होने की आशंका।
(प्रोफ़ेसर एम. तिवारी प्रसिद्ध खगोलशास्त्री एवं दस महाविद्याओं के ज्ञाता हैं। अपनी समस्याओं का हल प्राप्त करने के लिए आप पंडित जी से 09919499991 पर संपर्क कर सकते हैं।)
गुजरात दंगों का भयावह सच केवल दंगा पीड़ितों के लिए ही नहीं बल्कि राजनीतिक अवसरवाद के लिए भी जीवन में किसी भूचाल से कम नहीं रहा है। दंगों की तस्वीरें मानवता के उस भयावह सच को बयां करती हैं, जिसमें इंसान और शैतान के फर्क को महसूस करना भी मुश्किल हो जाता है।
समय समय पर अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए पार्टियों ने इन तस्वीरों को भुनाने में कोई कोर कसर नहीं रख छोड़ी। एक ऐसी ही तस्वीर है गुजरात के अहमदाबाद में एक साधारण इंसान ,पेशे से दर्जी, कुतुबुद्दीन अंसारी की जो गुजरात दंगों की दर्दनाक दास्तां बयान करती है। अंसारी अपनी इस तस्वीर को देखकर स्वयं विचलित से हो जाते हैं। इस तस्वीर में अंसारी की आँखों में आंसू थे और वो दया की गुहार लगा रहे थे। इस बात को चौदह बरस बीत चुके हैं लेकिन जब कांग्रेस पार्टी द्वारा असम-पश्चिम बंगाल के चुनावों में अंसारी की इस मार्मिक तस्वीर को चुनावी मैदान में इस्तेमाल किया गया तो वो स्वयं वेदना से भर गये।
अंसारी ने कहा, “जब कोई मेरी तस्वीर देखता है तो उसे मेरी नीयत पर शक होने लगता है। मुझे तो इस बात का भान भी नहीं था कि कोई पार्टी मेरी तस्वीर का इस्तेमाल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए कर रही है और वो भी बिना मुझसे पूछे। कभी मुझसे और मेरे परिवारजनों से भी पूछ लेते कि इस सब के बाद उनपर क्या गुजरती है। मैं 43 साल की उम्र का हूँ। मेरी इस तस्वीर का बेजा इस्तेमाल नेताओं, फ़िल्मी लोगों से लेकर आतंकवादियों तक ने किया है। कभी-कभार तो मुझे लगता है कि काश उन दंगों में मैं मर ही गया होता तो अच्छा होता। मेरे बच्चे जब पूछते हैं तो मैं उनसे बता भी नहीं सकता कि मैं उन तस्वीरों में क्यों रो रहा हूँ और दया की भीख क्यों मांग रहा हूँ।
कुतुबुद्दीन अंसारी अपने पत्नी और बच्चों के साथ अहमदाबाद के एक छोटे से घर में रहते हैं। घर चलाने के लिए वो दरजी का काम करते हैं। वो कहते हैं जब भी मेरी तस्वीरों का इस्तेमाल इन राजनीतिक पार्टियों के द्वारा किया जाता है तो मुझे इससे कुछ लाभ तो नहीं होता बल्कि मेरी जिन्दगी और भी मुश्किल हो जाती है। इन सभी नेताओं को मेरा ये दर्द समझना चाहिए।
हाल ही में कांग्रेस द्वारा असम-पश्चिम बंगाल के चुनावों में अंसारी की तस्वीरों को मोदी के गुजरात मॉडल बताकर पेश किया गया और पूछा गया कि क्या यही है मोदी का गुजरात मॉडल और क्या आप असम को गुजरात बनाना चाहते हैं।