रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रघुराम राजन ने आज जारी मौद्रिक नीति समीक्षा में मुख्य नीतिगत दरों को 6.50 फीसदी पर अपरिवर्तित रखने की घोषणा की। साथ ही आरबीआई ने अच्छे मानसून के बाद दरें घटाने के संकेत भी दिये हैं।चालू वित्तीय वर्ष में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की दूसरी माैद्रिक से बात चीत की।
उनसे उनकी दूसरी पारी के विषय में पूछे जाने पर राजन ने बहुत शालीनता भरा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह सरकार के फैसले पर निर्भर करता है और जब फैसला होगा तो आपको पता चल जाएगा। मज़ाकिया लहज़े में राजन ने कहा कि मीडिया अभी थोड़ा और मजा ले ले। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल पर मीडिया में जो अटकलें लगाई जा रही हैं, वे उसका मजा खत्म नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि उनकी दूसरी पारी पर सरकार को निर्णय करना है और प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री इस संबंध में फैसला लेंगे। सुब्रमण्यम स्वामी की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि यह पता है कि चिट्ठियां लिखी गयी हैं। देखिए परिणाम क्या निकलता है।
गौरतलब है कि राजन का कार्यकाल सितंबर में समाप्त हो रहा है और उनकी दूसरी पारी पर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। अपनी दूसरी पारी पर वे पहले कह चुके हैं कि उनसे भी पूछा जाना चाहिए कि आखिर वे क्या चाहते हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा था कि यह प्रशासनिक विषय है और इसमें मीडिया को रुचि नहीं लेनी चाहिए।
राजन ने अपनी दूसरी पारी पर उसी तरह सस्पेंस कायम रखा है, जिस तरह वे अपनी मौद्रिक नीति व फैसलों में सस्पेंस कायम रखते हैं। राजन ने कहा कि बैंकों के लेखे-जोखे को साफ सुथरा बनाने का काम जारी रहेगा, किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
रिजर्व बैंक ने अपनी द्वैमासिक नीतिगत समीक्षा में आज अपने अल्पकालिक ऋण पर ब्याज (रेपो रेट) को 6.5 प्रतिशत और बैंकों पर लागू आरक्षित-नकदी भंडार की अनिवार्यता चार प्रतिशत पर फिलहाल बरकरार रखा।
राजन ने समीक्षा में कहा है, “मुद्रास्फीति के अप्रैल के आंकड़े अप्रत्याशित रूप से ऊंचे रहने से मुद्रास्फीति की भावी दिशा कुछ और अधिक अनिश्चत हो गयी है।” उन्होंने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन को इस मामले में बड़ा जोखिम बताया है। राजन ने ब्याज कम न करने के औचित्य के बारे में कहा, “अप्रैल की मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद आए आंकड़ों में मुद्रस्फीतिक का दबाव उम्मीद से अधिक तेजी से बढ़ा है। ऐसा कई खाद्य उत्पादों और जिंसों के मूल्यों के बढ़ने से प्रेरित हुआ है जिसका मौसमी उतार चढ़ाव से संबंध नहीं है।”
आगामी दो दिनों में दक्षिण पश्चिम मॉनसून के केरल तट पर पहुंचने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर पश्चिम भारत में अगले पांच दिनों तक तापमान के जस के तस रहने की उम्मीद है। तो लगभग एक सप्ताह देश के उत्तर पश्चिमी भाग के ऐसे ही तापमान में झुलसते रहने की उम्मीद है।
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक़ केरल में अगले 48 घंटे में दक्षिण पश्चिम मानसून के पहुंचने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। हालाँकि मौसम विभाग ने इसके पहले कहा था कि मॉनसून सात जून को केरल के तट पर पहुंच सकता है। लेकिन उसके बाद मानसून के चार दिन आगे या पीछे होने की बात कही गई थी।
फिलहाल मौसम विभाग ने केरल, तटीय कर्नाटक, अरूणाचल प्रदेश और लक्षदीप में ‘भारी बारिश’ का अनुमान लगाया है। तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक के कई इलाकों में गरज के साथ बारिश और आंधी आ सकती है। विभाग ने कहा कि उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के दूरदराज के इलाकों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
देश के कई हिस्से खासकर राजस्थान के कुछ इलाकों और पश्चिम एवं पूर्व मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, दक्षिण उत्तर प्रदेश और गुजरात में लू के बने रहने का अनुमान है।
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम दिल्ली में धमाके करवाने की योजना बना रहा है।खुफिया एजेंसियों ने इस बारे में अलर्ट जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दाऊद दिल्ली को धमाकों से दहलाने की योजना बन रहा है। मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर आतंकवादी हमला हो सकता है।
खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद से ही राजधानी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खबरों के मुताबिक़, दाऊद ने दिल्ली एयरपोर्ट, दिल्ली विधानसभा, दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हमले की साजिश रची है। सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, दाऊद इब्राहिम ने दिल्ली में बम ब्लास्ट की साजिश रची है।
खुफिया विभाग की इस जानकारी के बाद से ही देश के लगभग सभी इलाकों में प्रशासन सख्त नज़र आ रहा है। गौरतलब है कि दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट का गुनहगार है, जिसमें दो सौ से ज्यादा बेगुनाह लोग मारे गए थे।
बीजेपी ने आगामी यूपी विधानसभा चुनाव के लिए बहुत खास रणनीति बनाई है। पार्टी की रणनीति के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव तक हर महीने यूपी में किसी न किसी कार्यक्रम या रैली में हिस्सा लेंगे। पिछले एक साल में पीएम दस से भी अधिक बार यूपी में कई कार्यक्रमों और रैलियों में हिस्सा ले भी चुके हैं। पहले पीएम ने बलिया में उज्ज्वला कार्यक्रम की शुरुआत की। फिर अपनी सरकार के दो साल पूरे होने पर सहारनपुर की रैली में उन्होंने ये कह कर पार्टी की चुनावी रणनीति का खुलासा भी कर दिया था कि वे यूपी वाले हैं।
इस महीने प्रधानमंत्री 12 और 13 जून को इलाहाबाद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में भी हिस्सा लेंगे। बीजेपी नेताओं के मुताबिक प्रधानमंत्री 13 जून को इलाहाबाद में एक बड़ी रैली को संबोधित करेंगे। संभावना है कि पीएम अगले महीने अपने संसदीय क्षेत्र बनारस का भी दौरा करें।
उल्लेखनीय है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने यूपी का विधानसभा चुनाव उसी रणनीति से लड़ने का फैसला किया है, जो उन्होंने पार्टी महासचिव रहते हुए लोकसभा चुनाव में अपनाई थी। तब उनकी अगुआई में बीजेपी ने यूपी की 80 में से 71 सीटें जीती थीं। बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं से जीवंत संवाद इस रणनीति का अहम हिस्सा था। इस बार भी वे खुद बूथ लेवल पर सक्रिय करीब सवा लाख पार्टी कार्यकर्ताओं से संपर्क स्थापित करेंगे। इसके अलावा शाह और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह हर महीने कई कार्यक्रमों और रैलियों में अलग-अलग हिस्सा भी लेंगे। पार्टी ने यूपी को छः क्षेत्रों में बांटा है और हर क्षेत्र में बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
पार्टी के अनुसार सीएम उम्मीदवार घोषित करने के बारे में अभी चर्चा चल रही है। सितंबर तक इस बारे में फैसला होने की संभावना है। बीजेपी का मानना है कि ग्रामोदय से भारतोदय और विकास पर्व जैसे कार्यक्रमों से उसे फायदा पहुंचा है। इससे ज़मीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने में मदद मिली है।
समस्याओं के तूफान में घिरी कांग्रेस पार्टी पर दुःख का एक और पहाड़ टूट पड़ा है। एक पखवाड़े के भीतर पार्टी के दो दिग्गज नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दिया है। पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता अजीत जोगी ने पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी। अब कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता गुरुदास कामत ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने अभी तक इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है।
40 सालों से सक्रिय राजनीतिक जीवन जीने के बाद गुरुदास कामत ने राजनीति से सन्यास लेने का मन बनाया है। वे कांग्रेस पार्टी से पांच बार सांसद रह चुके हैं। वे पेशे से वकील हैं और उनकी गिनती कांग्रेस के श्रेष्ठ नेताओं में होती है। महाराष्ट्र से आने वाले गुरूदास कामत ने मुंबई नार्थ ईस्ट से चुनाव जीते हैं। कामत केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने आज राज्य में एक नई पार्टी बनाने की घोषणा कर दी। राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी ने अपने बेटे अमित जोगी के विधानसभा क्षेत्र बिलासपुर के मरवाही में नई पार्टी के गठन की घोषणा की। जोगी ने एक घोषणापत्र भी जारी किया, जिसमें उन्होंने वर्ष 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ने की बात कही है।
घोषणा पत्र के मुताबिक राज्य के कोने-कोने से पहुंचे छत्तीसगढ़ के शुभचिंतकों की सर्वसम्मिति और मरवाही विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठजनों के आशीर्वाद से नए दल का गठन करने का निर्णय लिया गया है। गौरतलब है कि 2 जून को ही जोगी ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी थी और नई पार्टी के गठन का संकेत दिया था।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने मथुरा के जवाहरबाग मामले में खुद अखिलेश सरकार को दोषी करार दिया है। शंकराचार्य का कहना है कि समाजवादी सरकार में जातिवाद का बोलबाला है और मथुरा में इतनी बड़ी घटना यादव कनेक्शन के चलते ही हुई है।
अखिलेश यादव सरकार पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि यूपी में यादवों का राज है और मथुरा के जवाहर बाग में जिन लोगों ने कब्जा किया था वो भी यादव थे। उन्होंने कहा कि हथियारों का इतना बड़ा ज़खीरा इकट्ठा करना आसान बात नहीं है। ये सब सरकार की लापरवाही के चलते ही हुआ है।
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए शंकराचार्य ने मोदी सरकार को भी घेरने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के भी दो वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन यह सरकार जनता से किए अपने वादों पर खरी नहीं उतर सकी है। विकास के नाम पर मोदी सरकार शौचालयों का ही निर्माण करा रही है।
शंकराचार्य ने कहा कि सभी स्कूलों और कॉलेजों में भगवान राम के चित्र लगना चाहिए। उनके अनुसार मुसलमान मदरसों में इस्लाम की शिक्षा दे सकता है, ईसाई मिशनरी स्कूलों में बाइबिल की शिक्षा दे सकता है, हिन्दू बच्चे धर्म की शिक्षा के लिए कहाँ जाएँ, यह अत्यंत सोचनीय विषय है। उन्होंने कहा कि हिन्दू बच्चों को भी उनके धर्म और धर्मग्रंथों से परिचित कराना अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच देशों की अपनी यात्रा के तीसरे पड़ाव के तहत रविवार रात को स्विट्जरलैंड पहुँचे। प्रधानमंत्री ने सोमवार सुबह राष्ट्रपति जोहान श्नीडर अम्मान से मुलाकात की। दोनों देशों के प्रमुखों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई। एनएसजी सदस्यता के लिए स्विटजरलैंड की सरकार ने परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह में भारत के प्रवेश का समर्थन किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्विटरलैंड के इस समर्थन के लिए वहां के राष्ट्रपति जोहान श्नीडर को धन्यवाद कहा। कालाधन व टैक्स जैसे मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच सूचनाएं साझा करने पर सहमति बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “स्विस टेनिस स्टार मार्टिना हिंगिस के साथ हमारे टेनिस स्टार सानिया मिर्जा व लिएंडर पेस के पार्टनरशिप की तरह ही भारत व स्विटजरलैंड के बीच विभिन्न क्षेत्र में सफल सहभागिता है।” उन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग द्वारा स्विटजरलैंड की प्राकृतिक सुंदरता को बॉलीवुड फिल्मों में दिखाने का भी उल्लेख किया।
स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्तव्य जारी किया। उन्होंने कहा कि काला धन व टैक्स के संबंध में सूचनाएं साझा करना दोनों देशों की प्राथमिकता है।
राष्ट्रपति अम्मान से मुलाकात के बाद उन्होंने वहां के टॉप बिजनेस लीडर्स को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम वैश्विक स्तर का विनिर्माण करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि स्किल डेवलपमेंट का स्विस मॅाडल हमारे लिए काफी प्रासंगिक है।
उल्लेखनीय है कि स्विटजरलैंड परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों का एक अहम सदस्य और महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है। मोदी ने शनिवार को अफगानिस्तान की यात्रा की थी। इसके बाद वे कतर की दो दिनों की यात्रा के बाद स्विट्ज़रलैंड पहुंचे। कतर की यात्रा के दौरान उन्होंने वहां के नेतृत्व से कई मामलों पर बातचीत की।
गजानन ऑइल प्रायवेट लिमिटेड के खाद्य तेल के ब्रांड “GO”, की शनिवार को हुई शुरुआत के साथ ही जीवन आधिक स्वस्थ हो रहा है। इसकी प्रस्तुति नितिन जाधव, अध्यक्ष व एमडी, गजानन समूह की कंपनियाँ एवं सैराट फिल्म की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रिंकू राजगुरु की मौजूदगी में हुई। इस कार्यक्रम के दौरान जीओपीएल ने तीन विभिन्न प्रकार के खाद्य तेल अर्थात, सोयाबीन, सूर्यमुखी व कॉटनसीड रिफाइंड ऑइल प्रस्तुत किए जो संपूर्ण महाराष्ट्र में विभिन्न स्थलों पर उपलब्ध रहेंगे।
कार्यक्रम के दौरान जीओपीएल द्वारा कंपनी की भविष्य की योजनाओं की घोषणा करते हुए बताया गया कि सन 2020 तक 5050 करोड़ का कारोबार प्रतिवर्ष कर लिया जायगा व अगले दो वर्षों में जेएनपीटी के नजदीक 600 टीपीडी का रिफायनरी प्लांट स्थापित किया जाएगा।
प्रारम्भ करने पर श्री नितिन जाधव, अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक, गजानन समूह की कंपनियाँ ने कहा कि, “ब्रांड की शुरुआत हमारे आदर्श-वाक्य ‘स्वस्थ तेल, स्वस्थ जीवन’ व हमारी दीर्घावधि की वृद्धि की योजना के अनुरूप ही है। हमारे विस्तार के समर्थन में हम अगले कुछ वर्षों में 1 और सुविधा जेएनपीटी के नजदीक उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही विदेश में उत्पादन सुविधाओं हेतु किसी एक देश जैसे कि यूएसए, अर्जेंटीना, ब्राजील व पूर्वी अफ्रीका हेतु हम आगे बढ़ रहे हैं। ब्रांडेड खंड में प्रवेश करने से हमें अखिल भारतीय स्तर पर विस्तृत होने में सहुलियत मिलेगी।”
कंपनी ने अपनी यात्रा क्रूड ऑइल से प्रारम्भ की थी और रिफाइंड खाद्य तेल की आपूर्ति की और हम शुरू से अंत तक के तेल उत्पादक से बीजों की प्राप्ति, उसके एक्सट्रेक्शन और फिर रिफाईनिंग करने वाले के रूप में उभरे। एक्सट्रेक्शन के लिए कंपनी एकल स्तर कॉटनसीड एक्सट्रेक्शन [एसएससीएसई] की वैज्ञानिक पद्धति अपनाती है और उसके बाद मिसेला रिफाईनिंग है।
क़तर में अपनी दो दिवसीय यात्रा के अंत में भारतीय समुदाय के लोगों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचारियों की चुटकी ली। मोदी ने कहा, “उनकी सरकार की वजह से कई लोग मिठाई’ से वंचित हो गए। इसी वजह से उन लोगों ने उनकी सरकार के लिए कई समस्याएँ खड़ी की हैं। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने सरकारी योजनाओं में लीकेज तथा चोरी रोककर सालाना 36000 करोड़ रुपये बचाए हैं।”
कतर में दो दिनों की यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने केवल सतह साफ की है और गहराई से सफाई अभी बाकी है।” मोदी ने उनकी सरकार से ख़फ़ा चल रहे लोगों की तुलना मिठाई न मिलने पर नाराज़ बच्चे से करते हुए कहा, “हमने कई लोगों की मिठाई रोक दी और ऐसा करने में मुझे कई दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। लेकिन मुझे इन समस्याओं का डर नहीं, क्योंकि इनसे लड़ने की ताकत मुझे 125 करोड़ भारतीयों से मिलने वाले स्नेह से मिलती है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्तीय पारदर्शिता, अनुशासन और कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के प्रयासों के अच्छे परिणाम मिलने शुरू हो गये हैं।
कतर में बसे भारतीयों को अपने काम का लेखा जोखा देते हुए मोदी ने कहा कि 1.62 करोड़ फर्जी राशनकार्ड का पता लगाया गया और सब्सिडी वाले चावल, गेहूं, केरोसिन और एलपीजी के करोड़ों रूपए बचाये गये हैं। उन्होंने कहा, “आज पूरी दुनिया में भारत की छवि सुधरी है और देश को सम्मान के साथ देखा जा रहा है। सभी भारत की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जब दूसरे देशों के लोग भारतीयों से मिलते हैं तो आप अंतर देखते होंगे।”
कठिनाइयों के बावजूद बढ़ रहा है देश-
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार दो साल से सूखे का सामना कर रहा है, उसके बावजूद उसने बीते वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में 7.9 प्रतिशत की विकास दर हासिल की है। उन्होंने कहा,” दुनिया की अर्थव्यवस्था में मंदी है और अच्छे से अच्छे देश भी आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं, लेकिन भारत विभिन्न कठिनाइयों के बावजूद तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।” उन्होंने कहा कि सभी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था मान रहे हैं।
कतर में बसे भारतीयों के महत्वपूर्ण योगदान के साथ भारत-कतर के संबंधों में विकास को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘जब किसी देश के शासक भारतीयों की तारीफ करते हैं, तो आप कल्पना कर सकते हैं कि मेरा सीना गर्व से कैसे फूलता होगा।” उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग के बाद हालात बदल गये हैं, जहां देश का 65 प्रतिशत राजस्व राज्यों को जा रहा है और केंद्र के पास केवल 35 प्रतिशत रहेगा। प्रधानमंत्री ने सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना का भी जिक्र किया, जो चार दशक से अधिक समय से लंबित थी।
गौरतलब है कि पाँच देशों की यात्रा के दूसरे चरण के तहत मोदी कल यहां दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचे। इस यात्रा का मुख्य केंद्र भारत और कतर के बीच आर्थिक संबंधों को (विशेष तौर पर हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में) एक नयी गति देना है।
बॉलीवुड के महानायक बिग बी अमिताभ बच्चन का कोलकाता (बंगाल) से ख़ास रिश्ता है। अपनी कई फिल्मों में बंगाली बाबू का किरदार निभा चुके बच्चन साहब, एक बार फिर कुछ इसी रूप में नज़र आएंगे अपनी आगामी फिल्म ‘तीन’ में, हालाँकि यह किरदार बंगाली नहीं, बल्कि ऐंग्लो बंगाली होगा। नवप्रवाह.कॉम से बातचीत के दौरान अमिताभ बच्चन ने इस फिल्म के विषय में, अपने अभिनय और फिल्म निर्माण के सफ़र के विषय में कई दिलचस्प बातें बताईं। प्रस्तुत हैं बातचीत की कुछ प्रमुख अंश-
प्रश्न: फिल्म ‘तीन’ के विषय में कुछ बताइए।
अमिताभ: दरअसल फिल्म के निर्माता सुजॉय घोष केरल की एक फिल्म का रीमेक बनाना चाहते थे। लेकिन एक दिन निर्देशक ऋभु दासगुप्ता व सुजॉय ने मिलकर विचार विमर्श किया कि उनकी यह फिल्म एक कोरियाई फिल्म पर आधारित होगी। जैसे ही उन्होंने मुझे कहानी के बारे में बताया, मैं राज़ी हो गया। वे लोग फिल्म सेट गोवा में चाहते थे परंतु अनुमति नहीं मिल रही थी। मैंने कोलकाता का नाम सुझाया और उन्हें यह विचार उत्तम लगा।
प्रश्न: अपने किरदार के विषय में कुछ बताइए।
अमिताभ: मैं फिल्म में 74 वर्षीय जॉन बिस्वास का किरदार निभा रहा हूँ, जो कि मेरी वास्तविक उम्र भी है। यह एक अति महत्त्वाकांक्षी किरदार नहीं है। यह एक बहुत ही मधुर व्यक्तित्त्व वाला शख़्स है, जिसकी किसी भी विषय में बहुत अधिक रुचि नहीं है। उसकी पोती के साथ एक हादसा हुआ है। वह उस घटना की तह तक जाना चाहता है। उसके मन में बदले की भावना नहीं है। वह केवल सच्चाई जानना चाहता है। वह मृदुभाषी है, भीरू किस्म का व्यक्ति है, जो किसी को सरेआम चुनौती नहीं दे सकता। सुजॉय और ऋभु के अनुसार, मैंने कई फिल्मों में सच के लिए लड़ाई लड़ी है। यह किरदार अलग है।
प्रश्न: आप फिल्म में एक ब्रिटिश मूल के बंगाली का किरदार निभा रहे हैं, जो भारत में बहुत ही कम हैं। एंग्लो -बंगाली का किरदार कैसे दिमाग में आया?
अमिताभ: यह एक कोलकाता में स्थित ईसाई का किरदार है, जिसका ऐंग्लो कनेक्शन है। इसलिए इस किरदार को ऐंग्लो-बंगाली बना दिया गया। सन 1962 में मैंने अपनी पहली नौकरी कोलकाता में की थी। वहाँ ऐंग्लो इंडियंस का एक बड़ा समुदाय रहता है। मैंने उनके साथ थिएटर में काम भी किया है। इसलिए मैं उनके रहन-सहन और भाषा-उच्चारण से भली-भाँति वाकिफ़ हूँ। और हाल ही में पीकू में एक बंगाली किरदार निभाने के बाद इस फिल्म में भी बिल्कुल वैसा ही किरदार ठीक नहीं था। हमने खोज की और पाया कि ऐंग्लो बंगाली भी अन्य हिंदी भाषियों की तरह बोलते हैं। इसलिए अंततः इस किरदार को चुना गया।
प्रश्न: क्या पूरी फिल्म कोलकाता में ही सेट बनाकर फिल्माई गई है?
अमिताभ: फिल्म में कहीं भी सेट का उपयोग ही नहीं हुआ है। पूरी फिल्म वास्तविक स्थानों पर शूट हुई है, वो भी वास्तविक प्रकाश में, जो कि हमारे फोटोग्राफी के डायरेक्टर तुषार कांति रे की निपुणता का कमाल है। पुराने समय में शार्प रिफ्लेक्टर्स के साथ बड़ी बड़ी लाइट्स का इस्तेमाल होता था। आप उस प्रकाश में बड़ी मुश्किल से आँखें खोल पाते हैं। इस अलग माहौल में बिना कृत्रिम लाइट के काम करने का अनुभव एकदम निराला था। यह सब आज के तकनीकी विकास का कमाल है। नई तकनीकों के चलते अगर मैं ज़रा सा भी ज़ोर से बोलूँ, ऋभु को बताना पड़ता था कि और धीरे और सरल बोलना है।
प्रश्न: फिल्म ‘पा’ में आपकी माँ का किरदार निभा चुकी विद्या बालन इस फिल्म में आपके साथ काम कर रही हैं। उनके किरदार के विषय में बताइए।
अमिताभ: (हँसते हुए) हो सकता है कि अगली फिल्म में वे मेरी बहन या प्रेमिका के किरदार में हों।
प्रश्न: आपने कई दिग्गज, अनुभवी और कई नए फिल्म निर्माताओं के साथ काम किया है। दोनों में क्या अंतर महसूस करते हैं?
अमिताभ: मैंने दोनों में कोई कलात्मक अंतर नहीं महसूस किया। नए निर्माता भी उतने ही कलात्मक हैं, जितने पुराने। उनकी कला अत्यंत सराहनीय है। मैं उनकी कला का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। मैं यह सोचकर बहुत विस्मित हो जाता हूँ कि अपने शुरुआती दौर में ही वे इतने कुशल कैसे हो सकते हैं! मैं अब तक सीख रहा हूँ और अक्सर कई गलतियाँ करता हूँ। इस उम्र में सेट्स पर जाने में भी मैं थोड़ी हिचकिचाहट महसूस करता हूँ, क्योंकि वहाँ उपस्थित लोगों की औसतन उम्र 25 वर्ष होती है। मैं सोचता हूँ कि मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ। वास्तव में मैं उनको काम करते देख बहुत आनंदित होता हूँ। वे लोग काम करते वक़्त कितने सहज होते हैं जो मैं अब तक नहीं हो पाता।
प्रश्न: आप अभिनेताओं और अभिनेत्रियोंं को प्रोत्साहित करने के लिए पत्र भेजते हैं, कभी किसी निर्देशक को भी भेजा?
अमिताभ: (हँसते हुए ) मैं अक्सर भेजता हूँ, फर्क सिर्फ इतना है कि अभिनेता और अभिनेत्रियों को लिखे गए पत्र सोशल मीडिया पर आ जाते हैं और निर्देशकों के नहीं आते।
प्रश्न: दर्शकों की बदलती पसंद के विषय में आपका क्या कहना है?
अमिताभ: आज दर्शक दुनिया भर की जानकारियों से वाकिफ़ हो चुके हैं। उनकी पसंद बदल गई है। अब उन्हें और ज़्यादा आकर्षक और तकनीकी रूप से उम्दा फिल्में देखनी हैं क्योंकि अब उनके पास टीवी और इंटरनेट पर ऐसी चीज़ें देखने की सुविधा उपलब्ध है। अगर उन्हें ऐसा कंटेंट न मिले तो वे आपकी फिल्में देखने की बजाय घर बैठे टेलीविज़न देखना बेहतर समझेंगे।
प्रश्न: फिल्म निर्माण में आपने कौन कौन- से बड़े बदलाव अनुभव किए हैं?
अमिताभ: आज के फिल्म निर्माताओं के समक्ष पैसों की दिक्कत नहीं होती। वास्तव में, उसके विषय में उन्हें सोचना ही नहीं होता। फंडिंग आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जैसा कि हमारे समय में नहीं था। हम लोगों को कर्ज़ लेना पड़ता था। मान लीजिए, यदि हमारे पास 7-8 दिनों की फिल्म शूट करने के पैसे हों, तो निर्माताओं को पहले उतनी फिल्म शूट कर ऋण दाताओं को दिखानी पड़ती थी और ऋण की उम्मीद लगानी पड़ती थी। इसलिए हम लोग एक साथ 10-12 फिल्मों में काम करते थे, एक दिन में 2-3 फिल्में। हम लोग अगले ऋणदाता के इंतज़ार में बैठ नहीं सकते थे, वर्ना हम लंबे समय तक बिना काम धाम के घर पर बैठे रह जाते।