हाल ही में ढाका और बगदाद सहित कई जगहों पर हुए बम विस्फोटों के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। आतंकवादी संगठन आईएसआईएस पर आग उगलते हुए एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इसके सदस्यों को ‘जहन्नम के कुत्ते’ करार दिया है।
ओवैसी ने यहां मुस्लिम संगठनों द्वारा आयोजित एक विरोध सभा को संबोधित करते हुए कहा, “आईएसआईएस ने अपने एक आत्मघाती हमलावर को मदीना भेजा। यह धोखाधड़ी है। ये अपराधियों का गिरोह है। ये लोग जहन्नम के कुत्ते हैं।” ओवैसी ने कहा, “आईएसआईएस न सिर्फ मुस्लिमों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा है।” सभा में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें कहा गया है कि आईएसआईएस का इस्लाम से कोई लेनादेना नहीं है और उसकी गतिविधियां इस्लाम की जडों पर ही चोट करने के लिए हैं।
ओवैसी ने मुस्लिम युवाओं से कहा कि वे इस्लाम के लिए जिएं, न कि इसके लिए जान दें। उन्होंने कहा, “हमें यह तथ्य स्वीकार करना चाहिए कि आईएसआईएस हमारे बीच है। लेकिन निश्चित रुप से वे इस्लाम से संबंधित नहीं हैं और उन्हें नष्ट करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।” उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर भी निशाना साधा और कहा कि जहां आईएसआईएस इस्लाम का दुश्मन है, वहीं संघ परिवार भारत में धर्मनिरपेक्षता का शत्रु है।
दुनिया की नंबर एक अमेरिकी खिलाड़ी सेरेना विलियम्स ने जर्मनी की एंजेलिक कर्बर को महिला एकल फाइनल में सीधे सेटों में 7-5, 6-3 से हराकर सातवां विंबलडन खिताब जीत लिया है। इसी के साथ सेरेना ने जर्मनी की स्टेफ़ी ग्राफ़ के 22 ग्रैंड स्लैम जीतने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली।
कुल 81 मिनट चले मुकाबले के दौरान, कुछ मौकों पर कर्बर ने सेरेना को कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंत में उन्हें सेरेना के 39 विनर और 13 ऐस के बदले में हार का सामना करना पड़ा। अपने नौवें विंबलडन और 28वें ग्रैंडस्लैम फाइनल में खेल रहीं सेरेना से जर्मनी की खिलाड़ी ने तीन ब्रेक प्वाइंट बचाए। अपने पहले विंबलडन और दूसरे मेजर फाइनल में खेल रही कर्बर ने इसके बाद पहले सेट में सेरेना को कड़ी टक्कर भी दी, पर सेरेना ने मौकों की तलाश जारी रखी। अंतत: कर्बर की सर्विस तोड़कर पहला सेट जीत लिया। कर्बर ने सेट प्वाइंट पर गलती करते हुए सेट सेरेना की झोली में डाला।
दूसरे सेट की शुरूआत में कर्बर ने अच्छा खेल दिखाया। उन्हें सातवें गेम में ब्रेक प्वाइंट मिला, लेकिन सेरेना ने लगातार दो ऐस के साथ अपनी सर्विस बचा ली। सेरेना ने अगले ही गेम में कर्बर की सर्विस जोड़ी और फिर अपनी सर्विस बचाते हुए सेट, मैच और खिताब, तीनों अपने नाम कर लिया। अपनी जीत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सेरेना ने कहा, “यहां होना शानदार एहसास है। 22वीं ग्रैंड स्लैम जीत शानदार है। सेंटर कोर्ट घर की तरह लगता है।” कर्बर ने सेरेना की जीत पर कहा, “सेरेना महान चैम्पियन है।” उन्होंने कहा, “सेरेना आप इसकी हकदार थीं। आप महान चैम्पियन और शानदार इंसान हैं। हमने शानदार मैच खेला।”
भोजपुरी गायक और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना मथुरा कांड के मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव से कर दी। मनोज तिवारी का कहना है कि मथुराकांड के रामवृक्ष यादव और केजरीवाल में काफी समानताएं हैं।
केजरीवाल भी रामवृक्ष की तरह पूरी संवैधानिक व्यवस्थाओं के खिलाफ हैं। केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देते हैं। सीबीआई को सरकार का गुंडा बताते हैं। पुलिस को गरियाते हैं। तिवारी ने कहा कि दिल्ली सीएम पद पर केजरीवाल जैसा व्यक्ति बैठा है। उनके विधायक, पत्नी को मारते हैं, औरत को छेड़ते हैं, घोटाला करते हैं।
मनोज तिवारी ने सवाल किया कि क्या भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव ऐसे ही थे। तिवारी ने कहा कि केजरीवाल ने अपने विधायकों की तुलना स्वतंत्रता सेनानी से की, इसके लिए वे तुरंत माफी मांगे, क्योंकि यह हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है। तिवारी ने कहा कि मथुरा के रामवृक्ष यादव और केजरीवाल में काफी समानताएं हैं।
केजरीवाल हमेशा आरोप लगते रहे है कि बीजेपी उन्हें दिल्ली में सही से सरकार नहीं चलाने दे रही हैं। केजरीवाल भी रोज़ाना किसी न किसी वजह से ख़बरो में बने ही रहते हैं। इनका मन काम से ज़्यादा खबरों में रहना पसंद है।
हिज्बुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर बॉय बुरहान वानी के मारे पर घाटी में भड़की हिंसा के कारण अब तक कुल 15 लोगों की मौत हो गई है। उत्तरी कश्मीर के खादिनायर से दक्षिण के कुलगाम तक हिंसक प्रदर्शनों और पत्थरबाजी में करीब 100 सिक्योरिटी स्टाफ घायल हो गये। इसमें कुछ बड़े अफसर शामिल हैं और 3 पुलिस कर्मी लापता है। हिंसा में करीब 200 लोग घायल हो गए है, जिनमे से 35 लोगों को गोलियां लगी हैं।
अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस ने आज और सोमवार को भी प्रदर्शन जारी रखने की चेतावनी दी है। सरकार ने हिंसा बढ़ने के कारण श्रीनगर, पुलवामा और शोपियां सहित और भी इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है और सारे इलाकों की इन्टरनेट सेवाएँ बंद कर दी है। अमरनाथ यात्रा पर भी रोक लगा दी है, 10 हज़ार से भी ज्यादा श्रद्धालु विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए है।
कहा जा रहा है कि आतंकी बुरहान की प्रेमिका ने उसे किसी दूसरी लड़की के साथ व्हाट्सएप पर चैटिंग करते देखा था। इसी बात में दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। बुरहान ईद के दिन किसी दूसरी लड़की से मिलने गया था और उसकी प्रेमिका ने ही उसकी सूचना दी थी, हालांकि पुलिस इस बात में कुछ नहीं कह रही है।
बुरहान के पिता का कहना है कि मुझे ख़ुशी है कि मेरा बेटा शहीद हुआ है, मेरा पहला बेटा भी इसी कारण शहीद हुआ था और अगर छोटा बेटा भी उस रास्ते में जाना चाहता है, तो में उसे नहीं रोकूँगा बुरहान के पिता एक स्कूल के प्रिंसिपल है।
‘डॉ.भानुमति ऑन ड्यूटी’ सीरियल में अपने चिर परिचित अंदाज़ में नज़र आई टीवी एक्ट्रेस कविता कौशिक अब यह सीरियल छोड़ने वाली हैं। जी हाँ! कविता कौशिक, जिन्हें आप ‘एफआईआर’ सीरियल वाली चन्द्रमुखी चौटाला के नाम से बखूबी पहचानते हैं, उन्होंने सब टीवी पर के सीरियल ‘डॉ. भानुमती ऑन ड्यूटी’ को छोड़ने का मन बनाया है।
खबरों की मानें तो कविता कौशिक के कार्यक्रम छोड़ने का मुख्य कारण यह है कि ‘डॉ. भानुमती ऑन ड्यूटी’ सीरियल में उनका किरदार हू-ब-हू उनके पुराने सीरियल ‘एफआईआर’ के चंद्रमुखी चौटाला जैसा ही है। उन्हें इस सीरियल में कुछ नया करने जैसा नहीं लग रहा। जिसकी वजह से कविता ने सीरियल छोड़ने का मन बना लिया है।
इस सीरियल में अब देबिना बनर्जी अब कविता कैशिक की जगह लेंगी। साथ में सीरियल का नाम बदल कर ‘डॉक्टर मधुमति ऑन ड्यूटी’ कर दिया जाएगा। इस रेस में श्वेता तिवारी और रति पाण्डेय का भी नाम आया था, मगर ये रोल देबिना बनर्जी को दिया गया।
ढाका में आतंकी हमले के बाद से जांच के घेरे में आए जाकिर नाईक के लिए मुश्किल बढ़ने वाली हैं। बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि वो इस्लाम के विवादित प्रचारक जाकिर नाईक के भाषणों की जांच करेगी और फिर जाकिर पर बैन पर फैसला करेगी।
डॉ ज़ाकिर नाईक की संस्था चंदे का इस्तेमाल धार्मिक कट्टरता फैलने में करती है या नहीं, इसकी जांच शुरू हो गयी है। हालाँकि नाईक की संस्था पर इस्लाम को मानने वालों से ज़कात के रूप में पैसे देने को कहा गया है। जांच इसलिए की जा रही है क्योंकि मारे गए आतंकियों के बारे में पता चला कि वो जाकिर नाईक के भाषणों से प्रभावित थे।
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर और बीजेपी सांसद सत्यपाल का कहना है कि 2008 में जब वे मुम्बई पुलिस कमिश्नर थे, तब उन्होंने उसकी जांच कर एक रिपोर्ट राज्य सरकार और तत्कालीन भारत सरकार को भी भेजी थी। उन्होंने उस पर कार्रवाई के लिए कहा था, लेकिन उस वक़्त भारत सरकार जाकिर नाईक पर गंभीर नहीं हुई।
गृहमंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि डॉ ज़ाकिर की हवाला के ज़रिये फंडिंग की जाँच के लिए प्रवर्तन निदेशालय से जाँच शुरू करने को कहा गया है। सूत्रों का कहना है कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज़ हो सकता है।
गौरतलब है कि जाकिर नाईक की संस्था सामाजिक कामों के नाम पर विदेशी अनुदान के ज़रिये रकम जुटाती रही है। उनकी संस्था में रक़म चेक़, ड्राफ्ट या फिर ऑनलाइन ट्रांसफर के जरिये दी जा सकती है। जाँच एजेंसियों को शक है की सऊदी अरब के वहाबी संगठनों से इस्लाम की विचारधारा के प्रचार के नाम पर करोड़ों रुपए हवाला के ज़रिये आते हैं।
दो दशक बाद अभिनेता संजय दत्त ‘खलनायक रिटर्न्स’ में गैंगस्टर बल्लू बलराम के तौर पर फिर नज़र आएंगे। इस फिल्म का निर्माण फिल्मकार सुभाष घई करेंगे। सुभाष घई के ‘मुक्ता आर्ट’ और संजय दत्त प्रोडक्शंस ने इस साल के अंत तक ‘खलनायक रिटर्न्स’ के निर्माण के लिए एक समझौता किया है।
घई ने बताया, “संजय दत्त बल्लू बलराम का किरदार निभाएंगे, जो 20 साल बाद जेल से बाहर आएगा। पटकथा अंतिम चरण में है। एक बार यह पूरी हो जाने पर हम बाकी कलाकार आदि के बारे में बताएंगे।” उन्होंने बताया कि नया निर्देशक फिल्म की कमान संभालेंगे।
उन्होंने प्रोजेक्ट में टाइगर श्रॉफ के शामिल होने संबंधी खबरों को खारिज कर दिया। घई ने कहा, “हम अब भी पटकथा पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं और जल्द ही बाकी कलाकारों के बारे फैसला करेंगे।”
संजय दत्त ने 1993 की एक्शन थ्रिलर ‘खलनायक’ में ‘बल्लू बलराम’ का किरदार निभाया था और इसमें उनके साथ माधुरी दीक्षित व जैकी श्रॉफ भी थे। सुभाष घई निर्देशित यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में थी।
श्रीनगर। भारत का जन्नत कहे जाने वाले कश्मीर के कई स्थानों पर हिंसा की घटनाएं हुईं। हिजबुल मुजाहिदीन के शीर्ष कमांडर बुरहान वानी की मौत के विरोध में कुलगाम में भीड़ ने पुलिस चौकियों, सुरक्षा बलों और भाजपा कार्यालय पर हमला बोला। घाटी में हिंसा यहीं नही रुकी, इसके बाद कुछ और झड़पों की खबरे भी आईं। इस पूरी हिंसा के दौरान तीन पुलिसकर्मियों समेत कुल 11 लोग घायल हुए हैं।
एक पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया कि युवकों के समूहों ने अनंतनाग जिले के बांदीपोरा, काजीगुंड और लारनू में पुलिस चौकियों और पुलिस थानों पर पथराव किया। इसके बाद कुलगाम जिले के धमहाल हांजीपोरा तथा मीर बाजार और बारामला जिले के सोपोर के वारपोरा में भी हिंसक प्रदर्शन हुए। अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के वेसु क्षेत्र में अल्पसंख्ययक समुदाय की सुरक्षा में तैनात पुलिस बल पर भी हमला किया गया। उन्होंने बताया कि कुलगाम जिले के नीलो-बुगम क्षेत्र में भीड़ ने भाजपा कार्यालय पर भी हमला किया, जिसके कारण इमारत को काफी नुकसान पहुंचा है।
भाजपा कार्यालय पर हुए इस हमले की गूँज दिल्ली तक पहुँचते देर नहीं लगी। दक्षिण कश्मीर के बारामुला जिले के शीरी, क्रीरी, डेलिना, पट्टन और पालहालन क्षेत्रों में भी पथराव की घटनाएं हुईं। अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के अवंतिपुरा के शरीफाबाद और बारसू इलाकों में भी हिंसक प्रदर्शन हुए। उन्होंने बताया कि खबरें आने तक झड़पों में 11 लोगों को चोट पहुंची है, इनमें से तीन पुलिसकर्मी हैं। शहर के विभिन्न इलाकों से प्रदर्शन की छिटपुट घटनाओं की भी खबर है।
ऐहतियाती तौर पर हड़ताल का आह्वान करने वाले शीर्ष के अलगावावादी नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। अब देखना दिलचस्प होगा की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अलगावादियों के विरुद्ध क्या रणनीति अपनाती हैं ।
किसी भी राष्ट्र की दिशा और दशा वहां की शिक्षा व्यवस्था तय करती है। जब शिक्षा के केंद्र में भौतिक विकास को रखा जाता है तो नैतिक मूल्य हाशिए पर चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में सामाजिक समरसता खतरे में पड़ जाती है। भ्रष्टाचार चरम पर होता है, युवा आतंक का रास्ता चुनने लगते हैं, वृद्धाश्रमों की बाढ़ आ जाती है। आत्महत्याओं का आंकड़ा आसमान छूने लगता है, सबके मंगल की कामना पूज्य ग्रन्थों में सिमट कर रह जाती है। कट्टरपंथी शक्तियां धर्म को हथियार बनाकर समाज को लहूलुहान करने लगती हैं।
वर्तमान में शिक्षा अपने स्वरूप को खो चुकी है। बिहार बोर्ड में घटित एक टॉपर की घटना से पूरा देश सन्न रह गया। कमोबेश, यही हाल पूरे राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था का है। शिक्षा माफिया चारों ओर सक्रिय हैं। परीक्षा केंद्र धन उगाही के केंद्र बनते जा रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों में दाखिला देना मोटी कमाई का जरिया बन चुका है। इस संदर्भ में बॉम्बे उच्च न्यायालय की टिप्पणी सटीक बन पड़ी है, “इन दिनों स्कूल कानून को अपने हाथों में ले रहे हैं और वे ‘पैसा कमाने का धंधा’ बन चुके हैं।” शिक्षा जगत के लिए इससे शर्मनाक बात कुछ नहीं हो सकती। कोचिंग सेंटर इतने सबल और प्रभावशाली हैं कि राज्य सरकारें उन पर कार्यवाही से डरती हैं।
आरक्षण की आग में झुलस रही प्रतिभाएं-
आरक्षण की आग में झुलसती प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। उपेक्षित युवाओं के कदम विनाश की तरफ बढ़ने लगे हैं, जबकि देश में पिछड़ेपन का तमगा पाने के लिए होड़ मची है। यहां तक कि हिंसा और लूटपाट से भी गुरेज़ नहीं किया जा रहा है।राजनीति लाचार और नपुंसक बन चुकी है। यह सिद्ध हो रहा है, “यह देवकन्या नहीं बल्कि विषकन्या की आत्मजा है।”
यदि इन समस्याओं की सूक्ष्म पड़ताल की जाय तो हमारी शिक्षा व्यवस्था कटघरे में खड़ी होती है। हमने कैरियर को संवारने के लिए अंकों को इतना महत्त्व दे दिया कि चरित्र पीछे छूट गया। परिणामस्वरूप इसका खामियाजा पूरा समाज भुगत रहा है। विवेक कुंद हो गया है, कोई भी सिरफिरा धर्म की आड़ में यहां के युवाओं को बन्दूक थमा सकता है। कोई भी पथभ्रष्ट और चरित्रहीन खलनायक आज की पीढ़ी का आदर्श बन सकता है। आखिर, कौन सी ऐसी स्थितियां हैं, जो छात्रों को उनकी संस्कृति और विरासत से दूर कर रही हैं ? राम-कृष्ण, गौतम-महावीर, सुभाष-भगत जैसे महापुरुष दूर की कौड़ी प्रतीत होने लगते हैं। वर्तमानजीवी पीढ़ी के साथ क्या सब कुछ सामान्य है या कुछ अधूरा-सा, खोया-खोया ? जो भी हो, कहीं न कहीं एक असंतोष, उदासी और भटकाव की स्थिति अवश्य है।
निराशा और कुंठा में डूबे युवाओं की पीड़ा की जिम्मेदारी कौन लेगा? कहां से उनमें आत्मविश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति जागेगी ? इसके लिए हमारे नौनिहालों को संजीवनी की ज़रूरत है। यह संजीवनी भारत की शिक्षा व्यवस्था ही दे सकती है। यह तभी संभव होगा, जब हमारी शिक्षा में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा मिलेगा। शैक्षणिक संस्थान व्यावसायिक हब बनने से बचेंगे। इस क्षेत्र में पूंजीनिवेश का मुख्य उद्देश्य चरित्र-निर्माण के साथ-साथ राष्ट्र-निर्माण होगा। उन सभी तत्वों को ढूंढ़कर शिक्षा का अंग बनाना होगा, जो भारत को पुनः विश्वगुरु का दर्ज़ा दिला सकते हैं। हमें दुनिया के साथ कदम-ताल ही नहीं बल्कि उनका नेतृत्व भी करना है।
मेरठ प्रशासन द्वारा चलाये गए डिमॉलिशन अभियान के तहत अवैध कॉम्पलेक्स ढहाने की प्रक्रिया में एक बिल्डिंग के ध्वस्त हो जाने से पांच लोगों से अधिक की मौत हो गई। सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने शॉपिंग कॉम्पलेक्स में डिमॉलिशन अभियान चलाया हुआ था जो अवैध निर्माण ढहा रहा था। यह दुर्घटना सदर बाज़ार इलाके में हुई है।
बताया जा रहा है कि अवैध कॉम्पलेक्स में लोगों को हटाए बिना ही अतिक्रमण हटाया गया। खबरों के मुताबिक लोग कॉम्पलेक्स से सामान निकाल ही रहे थे कि अतिक्रमण को ढहा दिया गया। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया।
लोगों के दबे होने की खबर सुनकर कैंटोनमेंट बोर्ड के कर्मचारी मौके से भाग गए। हालांकि बचाव कार्य जारी है। मौत के बाद क्षेत्र के लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। सूत्रों के अनुसार अतिक्रमण हटाने पहुंचे अमले ने पहले लोगों को कॉम्पलेक्स से दूर हटने की सूचना नहीं दी थी।
मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। रेस्क्यू के लिए नेशनल डिसास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (एनडीआरएफ) की टीम भी पहुंची है। मलबे से लोगों को निकालने का काम जारी है।