मायावती के ऊपर अभद्र टिप्पणी करने को लेकर बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह के खिलाफ बसपा कार्यकर्ताओं ने लखनऊ की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर जल्द गिरफ्तार करने की मांग की।
बसपा नेता मेवालाल ने दयाशंकर के खिलाफ अनुचित जाती एवं जनजाति अधिनियम दंड संहिता की धाराएं लगाने की मांग की है। कार्यकर्ताओं ने हज़ारों की तादात में इक्कठा होकर अम्बेडकर की प्रतिमा पर प्रदर्शन करते हुए कई गाड़ियों की तोड़फोड़ की और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
प्रदर्शन में महिलाओं ने भी जम कर हिस्सा लिया।
प्रदर्शनकारियों ने भाजपा के कार्यालय को घेरने की घोषणा की है। भाजपा ने दयाशंकर के द्वारा की गई टिप्पणी की निंदा की और खेद प्रकट करते हुए उन्हें पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पद से हटा दिया है।
सिंह अब छह साल तक पार्टी में काम नहीं कर पाएंगे।
इस बात को ले कर संसद में भी हंगामा हुआ, अरुण जेटली ने खेद जताते हुए की गई टिप्पणी की निंदा की है। मायावती अभी भी दयाशंकर की पार्टी से निकाले जाने भर से संतुष्ट नहीं है। वो उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग कर रही है।
लखनऊ। प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर में अपनी रैली से ठीक पहले पूर्वांचलवासियों को एक बड़ा तोहफा दिया है । केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में नया अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्थापित करने को अपनी मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य राज्य के लोगों को सुपर स्पेशिएलिटी स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना और डॉक्टरों का बड़ा पूल तैयार करना है, जिससे मरीजों को बाहर रिफर न किया जा सके।
नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) के तहत 1011 करोड़ रूपए की लागत से एम्स स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। जैसे ही पता चल रहा है कि पूर्वांचल में एम्स को हरी झंडी मिल गई है, जनता में खुशी देखी जा रही है।
केंद्र सरकार की तरफ से एक आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया कि नए एम्स की स्थापना आबादी को सुपर स्पेशिएलिटी स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के उद्देश्य को पूरा करेगी, जबकि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों का बड़ा पूल तैयार होगा, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैयार की जा रही प्राथमिक और द्वितीयक स्तर की सुविधाओं के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।
इसी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया कि यह संस्थान प्रचलित क्षेत्रीय बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य मुद्दों पर शोध करेगा और इस तरह की बीमारियों के बेहतर नियंत्रण और उपचार प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में अस्पताल स्थापित करने को मंजूरी दे दी गई, जिसकी क्षमता 750 बिस्तरों की होगी और इसमें आपात या ट्रामा और आयुष खंड होगा।
बता दें की अगले साल यूपी में विधानसभा के चुनाव होने हैं और अगर हम सियासी चश्मे से इसे देखे तो ये मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है।क्योंकि पूर्वांचल यूपी की राजनीती में एक अलग महत्व रखता है। बहरहाल गोरखपुर में एम्स हो जाने से आस-पास के लोगों को भी इलाज के लिए काफी सहायता मिलेगी।
मुंबई-अहमदाबाद के बीच चलने वाली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन का रेल कॉरिडोर प्रोजेक्ट 6 साल में पूरा कर लिया जाएगा। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बुधवार को लोकसभा में प्रश्न काल के दौरान कहा कि बुलेट ट्रेन में सफर करने के लिए पैसेंजर्स को प्लेन से कम किराया देना होगा।
इस हाईस्पीड ट्रेन से मुंबई-अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 2 घंटे में पूरी हो जाएगी। बुलेट ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 350 किलोमीटर प्रति घंटे होगी, जबकि इसकी ऑपरेटिंग स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। बता दें कि मौजूदा समय में सबसे तेज चलने वाली ट्रेन दूरंतो है। दूरंतो को मुंबई और अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी तय करने में 7 घंटे लगते हैं।
2023 से बुलेट ट्रेन की सेवा शुरु हो जाएंगी और हर रोज इस कॉरिडोर को 40 हजार लोग इस्तेमाल करेंगे। नरेंद्र मोदी ने सरकार में आने से पूर्व लोगों से बुलेट ट्रेन का वादा किया था। मोदी सरकार ने वादा किया था कि वो जापान की तरह ही भारत के लोगो को भी बुलेट ट्रेन देंगे। उन्होंने ये वादा पूरा करने की पुरज़ोर कोशिश कर दी है।
भारतीय उद्योगपति विजय माल्या ने भारतीय अधिकारियों से कहा है कि वे उनसे लंदन में ही पूछताछ करें। ‘फोर्स इंडिया फार्मुला 1′ के मालिक माल्या ने इस हफ्ते प्रकाशित खेल पत्रिका ‘ऑटोस्पोर्ट’ के साथ अपने साक्षात्कार में कहा कि भारत में उनकी उपस्थिति असंभव है, क्योंकि उनका कूटनीतिक पासपोर्ट निरस्त कर दिया गया है। माल्या ने भारतीय अधिकारियों पर प्रतिशोध की कार्रवाई का भी आरोप लगाया।
माल्या ने कहा,” मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। लेकिन यह अंतरविरोधी और चिंताजनक है। बस इस वजह से कि मैं भारत में मौजूद नहीं हूं, वे गिरफ्तारी वारंट भेजें और मेरा पासपोर्ट रद्द कर दें। ” ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ के नाम से मशहूर माल्या ने पत्रिका से कानून के साथ अपने तजुर्बो के बारे में कहा कि वह पहले भी इससे गुजर चुके हैं। उन्होंने कहा, “जांच अधिकारियों से मेरा पहला सामना 1985 में हुआ। वे दो साल तक मेरे पीछे पड़े रहे और अंतत: उन्होंने कुछ नहीं पाया और मुझे पूरी तरह आरोप-मुक्त कर दिया गया।” माल्या ने कहा, “बदकिस्मती से भारत में ये जांच एजेंसियां राजनीतिक औजार हैं, जो किसी के पीछे पड़ने में नहीं हिचकिचाती हैं, और यह प्रक्रिया कुछ और नहीं बल्कि उत्पीड़न है।”
माल्या ने पत्रिका से कहा, “भारतीय अधिकारियों की पहुंच किंगफिशर एयरलाइन्स के अनेक कार्यकारियों और हजारों दस्तावेजों तक है। अगर मुझसे पूछताछ करना ही बचा है तो लंदन आएं और मुझसे पूछताछ करें, रेडियो कान्फ्रेंस पर आएं और मुझसे पूछताछ करें, मुझे सवालों के साथ ईमेल भेजें और मैं जवाब दूंगा।”
उल्लेखनीय है कि अब निष्क्रिय हो चुकी किंगफिशर एयरलाइन्स से जुड़े तकरीबन 1.4 अरब डालर के कथित कर्ज के संबंध में अदालती कार्रवाई का सामना कर रहे माल्या इस साल मार्च से ब्रिटेन में हैं। माल्या को हाल ही में इंग्लैंड के नार्थम्पटनशायर में ब्रिटिश ग्रांड प्रिक्स के दौरान सिल्वरस्टोन ट्रैक पर अपनी फोर्स इंडिया टीम का हौसला बढ़ाते देखा गया था।
इलाहाबाद। देश की राजनीति को एक से बढ़कर एक नायाब हीरे देने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय हमेशा से छात्र राजनीति का गढ़ माना जाता रहा है। पिछले कुछ समय को अगर छोड़ दिया जाए, तो यहाँ के छात्र संघ से चुने हुए नेता, देश की राजनीति के मुख्य केंद्रबिंदु में रहे हैं।
इविवि में नये सत्र की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है और कैम्पस में प्रवेश के लिए छात्रों में भारी उत्साह देखने को भी मिल रहा है। इसी के साथ विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई लेकिन अभी भी ज्यादातर उम्मीदवार खुलकर सामने नही आ रहे हैं।खासकर वो संभावित उम्मीदवार जिन्हें ABVP के पैनल से इस चुनावी समर में उतरना है।
पिछली बार अध्यक्ष पद को छोड़कर छात्र संघ के चारों पदों पर कब्जा करने वाली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस बार सभी पद जीतना चाहेगी और इसलिए इस बार संगठन चाहता है कि एक मजबूत कैंडिडेट पर दांव लगाया जाए, जो हर हाल में जीत के झंडे कैम्पस में गाड़ सके।
वैसे AVBP के पैनल की घोषणा तो चुनाव से ऐन पहले ही होगी लेकिन कुछ चेहरे अपनी दावेदारी पूरी मजबूती के साथ पेश कर रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर ने तो अपना चुनावी अभियान तेज भी कर दिया है। सभी प्रवेश भवन पर नए छात्रों की मदद में पूरी लगन के साथ जुटे हैं।
हमने इस बार अध्यक्ष पद के कुछ ऐसे ही संभावित उम्मीदवारों से बातचीत करके उनका मन टटोलना चाहा जिनके नाम ABVP पैनल में सबसे ऊपर आ रहे हैं, कि उनकी क्या मंशा है ! लेकिन अभी सीधे तौर पर कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं। हमने सर्वप्रथम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की छात्रा प्रमुख और कैम्पस में लगातार सक्रिय रहने वाली संभावित महिला उम्मीदवार नलिनी मिश्रा से चुनाव लड़ने की बात पूछी तो उन्होंने कहा कि, ‘ये तो संगठन तय करेगा कि कौन लड़ेगा। लेकिन अगर संगठन मुझे मौक़ा देता है तो मैं बिल्कुल चुनाव लड़ूंगी।’ इसके बाद हमने बात की ABVP से अध्यक्ष पद के प्रबल उम्मीदवार सूरज दुबे से, जो अपनी उम्मीदवारी को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट दिखें लेकिन उनका भी यही कहना था कि संगठन का निर्णय सर्वोपरि होगा।
ABVP से अगले उम्मीदवार के रूप में अनुभव उपाध्याय भी मजबूती से अध्यक्ष पद की दावेदारी पेश कर रहे हैं। उनका कहना है कि मैं अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ूंगा, इसमें किसी भी प्रकार का संदेह नहीं है। संगठन जो भी फैसला करेगा, मुझे स्वीकार्य होगा और मुझे भरोसा है कि संगठन सही उम्मीदवार ही चुनेगा। कुछ और नाम भी अध्यक्ष पद के लिए सामने आ रहे हैं, जो भगवा रथ पर सवार होकर इस चुनावी समर को जीतना चाहते हैं लेकिन अभी उनसे हमारी किसी प्रकार की बात नहीं हुई है। इसलिए हम उनके नामों का जिक्र नहीं कर सकते।
बहरहाल, धीरे धीरे जैसे ही चुनाव का समय नजदीक आएगा उम्मीदवारों की संख्या और भी बढ़ेगी। लेकिन अगर हम पिछले चुनाव की बात करें तो संगठन ने एक मजबूत पैनल उतारा था लेकिन एक सच ये भी है कि संगठन ने जैसे ही पैनल घोषित किया, वैसे ही संगठन में आपसी गतिरोध भी देखने को मिला। जिसका सीधा प्रभाव अध्यक्ष पद के चुनाव पर पड़ा। जिसका निष्कर्ष ये निकला कि चुनाव के बाद अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को लेकर संगठन की काफी आलोचना भी हुई। इसलिए इस बार संगठन छात्र संघ चुनाव खासकर अध्यक्ष पद को लेकर काफी सजग दिख रहा है। चुनाव में अभी भी महीनेभर से अधिक का समय है और अभाविप के कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द पैनल घोषित करें, जिससे उम्मीदवारों को पूरी तैयारी का मौक़ा मिल सके। लेकिन संगठन के मौजूदा रवैये को देखकर तो ऐसा नही लगता है कि पैनल जल्द घोषित हो सकता है।
अब ऋतिक रोशन की फिल्म ‘क़ाबिल’ और शाहरुख खान की फिल्म ‘रईस’ एक ही दिन रिलीज़ नहीं होंगी। ये दोनों फिल्में अलग-अलग तारीख़ पर रिलीज़ होंगी। दरअसल ‘क़ाबिल’ और ‘रईस’ दोनों 26 जनवरी को रिलीज़ होनी थीं। इन दोनों फिल्मों के बॉक्स ऑफिस पर टकराव को टालने की कोशिश हो रही थी। सूत्रों के अनुसार अब 26 जनवरी को शाहरुख़ की फिल्म को रिलीज़ करने के लिए राकेश रोशन ने रास्ता साफ कर दिया है।
बताया जा रहा है कि इस टकराव को रोकने के लिए शाहरुख, फरहान अख़्तर और ‘रईस’ के निर्माता रितेश सिधवानी ने जुहू स्थित ऋतिक के घर पर मीटिंगग की। यहां ये सब ऋतिक और ‘क़ाबिल’ के निर्माता राकेश रोशन से मिले। इनकी यह मुलाक़ात क़रीब 5 घंटे तक चली और 5 घंटे की लंबी मुलाकात के बाद निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी को शाहरुख अपनी फ़िल्म रिलीज़ करेंगे और ऋतिक की फिल्म ‘क़ाबिल’ किसी और तारीख़ पर आएगी।
शाहरुख ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर इस बात की ख़ुशी ज़ाहिर की। शाहरुख़ ने ट्वीट कर कहा, “दोस्त, मेंटर और फ़ैमिली से कई दिनों बाद मुलाक़ात हुई। रोशन साहब ने हमसे कहा कि ज्यादा करना ज़रूरी नहीं, एक सही करना ज़रूरी है। शुक्रिया सर।”
आपको बता दें कि मोहन जोदड़ो के प्रमोशन के समय ऋतिक ने इस मुद्दे पर कहा था कि मैं और शाहरुख़ कलाकार हैं। रिलीज़ की ज़िम्मेदारी निर्माताओं पर छोड़ देनी चाहिए। इससे पहले ‘रईस’ ईद के मौक़े पर रिलीज़ होने वाली थी, मगर यशराज फिल्म्स ने ‘सुलतान’ को भी ईद पर रिलीज़ करने का फ़ैसला लिया और ‘रईस’ को ईद छोड़नी पड़ी। अब ‘क़ाबिल’ के साथ टकराव पर ‘रईस’ दोबारा मुश्किल में आ गई थी पर साझा बातचीत के चलते अब शाहरुख़ के लिए रास्ता साफ़ है।
पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान मोहम्मद शाहिद का आज निधन हो गया। वे लीवर की बीमारी से पीड़ित थे। वे भारत के चुनिंदा बेहतरीन फील्ड खिलाड़ियों में शुमार थे। शाहिद को उनके बेहतरीन ‘ड्रिब्लिंग स्कील’ के लिए जाना जाता था। शाहिद 1980 में मास्को ओलंपिक गेम्स में स्वर्ण पदक जितने वाली हॉकी टीम के सदस्य भी रहे थे।
मोहम्मद शाहिद को वर्ष 1980-81 में अर्जुन पुरस्कार और 1986 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। पिछले महीने ही मोहम्मद शाहिद को गुड़गांव के एक अस्पताल में लीवर की गंभीर बीमारी के बाद भरती कराया गया था। शाहिद का जन्म 14 अप्रैल 1960 में उत्तर प्रदेश के बनारस शहर में हुआ था।
मो. शाहिद को 1980 में बेस्ट फारवर्ड प्लेयर का अवार्ड भी मिल चुका है। वे 1980 में मास्को में आयोजित ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा रहने के साथ ही, 1982 में एशियन गेम्स में रजत और 1986 एशियन गेम्स के कांस्य पदक विजेता टीम के सदस्य भी रह चुके हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति के सियासी गलियारों में अमूमन नेताओं को अपने बड़बोलेपन के लिए जाना जाता है पर कभी कभी इन नेताओं द्वारा एक दूसरे के प्रति शब्दचयन इतना निम्न स्तर का हो जाता है कि शर्म महसूस होती है। ऐसी एक तस्वीर आज भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दया शंकर सिंह ने पेश की जब उन्होंने मऊ में एक कार्यक्रम के दौरान बसपा सुप्रीमो मायावती पर बहुत ही आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें वेश्या से भी बदतर बता डाला । मायावती के खिलाफ की गयी इस टिप्पणी पर सिंह ने माफी मांग ली है। परंतु पार्टी ने कार्रवाई करते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश के पार्टी उपाध्यक्ष पद से हटा दिया है।
दयाशंकर ने माफी मांगते हुए कहा,” मैं इस तरह से सोच भी नहीं सकता। मायावती इतनी बड़ी नेता हैं,वो अपनी मेहनत और लगन से यहां तक पहुंची हैं। इस मुद्दे को गलत तरह से उठाया गया गलत है। मैं इस तरह से सोच भी नहीं सकता। मैं अपने द्वारा की गयी टिप्पणी के लिए माफी मांगता हूं।” यूपी भाजपा अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि दयाशंकर सिंह को पार्टी के सभी पदों से हटा दिया गया है।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मऊ में एक संवाददाता सम्मेलन में दया शंकर सिंह ने कहा था, ‘‘स्वामी प्रसाद मौर्या, आर.के. चौधरी और जुगल किशोर जैसे नेता बसपा छोड़कर जा रहे हैं,जो कांशीराम के साथ जुड़े थे। ये लोग मायावती पर आरोप लगा रहे हैं कि पैसे के लिए वह टिकट बेंच रही हैं। अगर टिकट बेंच रही हैं, तो विधानसभा चुनाव तक रहने तो दीजिए। उन्हें अगर कोई अधिक पैसा देता है तो उसे टिकट दे देती हैं। ऐसा वेश्या भी नहीं करती हैं।’’
दयाशंकर सिंह ने इस दौरान सपा सरकार पर भी हमला बोला था। उन्होंने कहा,” समाजवादी पार्टी गुंडो की पार्टी है और सपा में दुर्गा प्रसाद यादव, शिवपाल यादव जैसे गुंडे हैं,ये जिसको चाहते हैं उसको थाने में बंद करा देते हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी के लोगों से बात करना गुंडों से बात करना है।” साथ ही कहा कि समाजवादी पार्टी गुंडो से भरी पड़ी है, अगर पार्टी से इन गुंडों को निकाल दिया जाए तो पार्टी खत्म हो जाएगी ।
मायावती पर हुए इस बयान से सूबे का सियासी पारा चढ़ गया और सभी ने इस बयान की आलोचना की। मायावती ने अपने ऊपर की गई अभद्र टिप्पणी को राज्यसभा में भी उठाया और इसके विरोध में सड़क पर उतरने की चेतावनी तक दे डाली । राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली तथा मुख़्तार अब्बास नक़वी ने मायावती पर की गयी आपत्तिजनक टिप्पणी पर खेद प्रकट किया।
वैसे इस बयान ने भाजपा की बहुत किरकिरी करवा दी है, लेकिन किसी भी सियासी दल के लिए ये नई बात नहीं है । अभी तो महज चुनाव की उल्टी गिनती ही शुरू हुई है और सूबे के अधिकांश नेताओं का राजनीतिक स्तर क्रमशः दिखने लगा है ।
गुजरात मे दलितों पर हो रहे अत्याचार पर विपक्ष के कुछ दल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में जुटे हैं। दलित युवकों की पिटाई को मुद्दा बना कर कांग्रेस सहित बीसपी और टीएमसी व अन्य पार्टियों के सांसदो ने लोकसभा में हंगामा तो खड़ा कर दिया मगर इसी बीच कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पार्टी का साथ देने के बजाए औंघाई लेते हुए नज़र आये।
एक तरफ राजनाथ सिंह विपक्ष का जबाब दे रहे थे और दूसरी तरफ राहुल गांधी झपकियां लें रहे थे और उसी दौरान उनकी तस्वीर मीडिया में छा गई। आज ही सोनिया गांधी ने मीडिया से कहा था कि कांग्रेस इस बात को बड़ी गंभीरता से लोकसभा में पेश करेगी।
राहुल का बचाव करते हुए कांग्रेस की नेता रेणुका चौधरी ने कहा इतने शोर में कोई सो नहीं सकता। लोकसभा में राहुल के सोने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दे है इसे बेवजह इतना बड़ा बनाया जा रहा है।
राहुल के इस बर्ताव को ले कर कोंग्रेस को इसका उत्तर देना भारी पड़ सकता है, राहुल पहले भी संसद में सोते हुए कैमरे में कैद हो चुके है, 9 जुलाई 2014 में संसद में चल रही मंहगाई जैसे महत्वपूर्ण मसले में भी राहुल सोते हुए नज़र आये थे। इस बात का अभी तक पता नहीं चल पाया है कि राहुल सचमुच में सो रहे थे या किसी गहन चिंतन में थे।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से यहां मंगलवार को मुलाकात करने के बाद अभिनेता इरफान खान ने बताया कि उन्होंने महसूस किया कि राजनेताओं के सामने कई चुनौतियां हैं और एक व्यक्ति व्यवस्था नहीं बदल सकता। इरफान ने कहा, “अगर लोग बदलाव देखना चाहते हैं, तो उन्हें एकजुट होना होगा।”
अभिनेता ने अपनी आने वाली फिल्म ‘मदारी’ के प्रमोशन के तहत आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की और राजनीतिक दुनिया में बदलाव और देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बारे में बातचीत की।
बैठक के बाद, इरफान ने मीडिया से कहा, “हमें व्यवस्था चलाने वालों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझना चाहिए। एक व्यक्ति व्यवस्था नहीं बदल सकता। हर किसी को एकजुट होना होगा।”
पिछले दिनों इरफान ने पटना में लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की थी। फिल्म ‘मदारी’ में पिता और बेटे के रिश्ते पर प्रकाश डाला गया है, जो अपने बेटे को एक हादसे में खो देता है। फिल्म शुक्रवार को रिलीज होगी, जिसमें देश की राजनीतिक व्यवस्था पर प्रकाश डाला गया है।
केजरीवाल के साथ की गई बातचीत के बारे में इरफान ने कहा, “उन्होंने (केजरीवाल) कहा कि आम आदमी को बदलाव के लिए एकजुट होना होगा। एक व्यक्ति बदलाव नहीं ला सकता। यह इस तरह नहीं हो सकता। हमें एकजुट होकर व्यवस्था को समझना होगा और बदलाव के लिए भागीदार बनना होगा।”