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Thursday, August 6, 2026
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देश के खिलाफ बोलने वालों को सबक सिखाना ज़रूरी -मनोहर पर्रिकर

शिखा पाण्डेय,

पिछले वर्ष अभिनेता आमिर खान द्वारा दिया गया असहिष्णुता संबंधित बयान एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गया है। इस बार रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने आमिर के इस पुराने बयान को याद करते हुए कहा,” एक अभिनेता ने कहा है कि उनकी पत्नी भारत से बाहर जाना चाहती है। यह दंभपूर्ण बयान है। यदि मैं गरीब हूं और मेरा घर छोटा है तो क्या हुआ? मैं तब भी अपने घर से प्यार करूंगा और हमेशा उसे बंगला बनाने का सपना देखूंगा।”

जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी की घटना का भी जिक्र करते हुए पर्रिकर ने कहा कि कैसे कुछ लोगों को देश के विरोध में बोलने का साहस हो जाता है। ऐसे लोग जो देश के खिलाफ बोलते हैं, उन्हें इस देश के लोगों द्वारा सबक सिखाए जाने की जरूरत है। आपको बता दें कि पर्रिकर, सियाचिन पर मराठी पत्रकार-लेखकर नितिन गोखले की पुस्तक का विमोचन करने के बाद अपनी बात रख रहे थे।

रक्षामंत्री द्वारा यह बयान देते ही इसपर राजनीती शुरू हो गई। कांग्रेस के नेता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया,” मनोहर पर्रिकर का काम पाकिस्तान जैसे बाहरी दुश्मनों से हमारी रक्षा करना है या फिर आमिर खान जैसे साथी को धमकाना है?”

सुरजेवाला ने ट्वीट कर प्रश्न किया,” क्या यह राज धर्म है?पर्रिकर के बयान से यह साबित होता है कि हर तरह की विरोधी आवाज़ों को दबाने और दलितों और अल्पसंख्यकों को खदेड़ने की साज़िश की जा रही है।

कंदील के चचेरे भाई हक़ ने घोंटा था गला

आशीष पाण्डेय,

पाकिस्तानी सोशल मीडिया स्टार कंदील बलोच की हत्या के मामले में एक सनसनीखेज़ खुलासा हुआ है। पता चला है कि बलोच का गला उसके भाई ने नहीं बल्कि उसके चचेरे भाई ने घोंटा था। यह खुलासा एक पॉलीग्राफ टेस्ट में हुआ है।

इससे पहले बलोच के सगे भाई तथा मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद वसीम ने माना था कि उसने अपनी 26 वर्षीय बहन का गला घोंटा है। लेकिन दोनों संदिग्धों के पॉलीग्राफ टेस्ट से पता चला कि यह दावा गलत था। पॉलीग्राफ टेस्ट के अनुसार, उसके भाई ने नहीं बल्कि उसके चचेरे भाई हक नवाज ने गला घोंट कर उसे  मार डाला था।

जियो न्यूज की खबर में कहा गया है कि 15 जुलाई को हुई कंदील की हत्या से पहले वसीम ने कंदील के हाथ और पैर पकड़े थे, जबकि हक नवाज ने उसका गला घोंटा था। खबर में यह भी कहा गया है कि हत्या से पहले संदिग्धों ने उसे और उसके अभिभावकों को कोई नशीला पदार्थ खिला दिया था।

जांच के दौरान यह भी पता चला है कि सऊदी अरब में रह रहे कंदील के बड़े भाई आरिफ ने वसीम पर दबाव डाला था कि कंदील ने परिवार के मान सम्मान को ताक पर रख दिया है।  इसलिए वह बहन कंदील को मार डाले।

जीतेगा ‘बुडविग प्रोटोकॉल’, तो होगी कैंसर की हार

शिवानी दीक्षित,

कहते हैं कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन निवास करता है और स्वस्थ तन मन स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में सहायक होता है। यही कारण है कि मानव के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्राचीन काल से ही गहन विवेचन और महत्त्वपूर्ण अनुसंधान होते रहे हैं। परन्तु 21वीं सदी में आधुनिकता की दौड़ ने मानव स्वास्थ्य को अत्यधिक प्रभावित किया है। कैंसर, रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोगियों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। हालांकि चिकित्सा विज्ञान भी इन विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए नवीन तकनीकों को विकसित करने में लगा हुआ है, जिससे रोगों की विस्फोटक स्थितियों को नियंत्रित किया जा सके।

आज हम आपको कैंसर के इलाज़ की किसी नई तकनीक के बारे में नहीं बल्कि अतीत के पन्नों से एक ऐसी खोज से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिसे कैंसर के इलाज में पहली बड़ी सफलता माना जा सकता है। कहते हैं कि यदि किसी रोग के कारणों का पता चल जाए तो उसका उपचार खोज पाना आसान हो जाता है। कैंसर जैसे असाध्य रोग के लिए इसी सोच को डॉ. ओटो वारबर्ग ने सन् 1931 में कैंसर के कारणों का पता लगाकर यथार्थ में बदला। इस उपलब्धि के लिए डॉ. वारबर्ग को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

डॉ. वारबर्ग ने बताया था कि यदि सामान्य कोशिकाओं को 48 घंटे के लिए 35 प्रतिशत से कम ऑक्सीजन दिया जाये तो कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं में परिवर्तित हो जाती हैं। उन्होंने ऑक्सीजन को कोशिकाओं तक पहुँचाने के लिए सल्फरयुक्त प्रोटीन और वसा तत्त्वों को आवश्यक पाया, किन्तु कौन सा वसीय अम्ल इसके लिए उत्तरदायी था, इस विषय में डॉ. ओटो वारबर्ग भी नहीं जान सके।

इस घटना के डेढ़ दशक बाद डॉ. जोहना बुडविग ने इस रहस्य से पर्दा उठाया। डॉ. जोहना बुडविग जानी मानी क्वांटम फिजिसिस्ट और बायोकेमिस्ट थीं। वे फेडरल इंस्टिट्यूट ऑफ फैट्स रिसर्च, जर्मनी में चीफ़ एक्सपर्ट थीं। डॉ. बुडविग ने जिन वसीय अम्लों की खोज की थी वे अलसी के तेल में पाए जाने वाले लिनोलिक और अल्फा लिनोलिक एसिड थे। अपने शोध के दौरान उन्होंने पाया कि ऊर्जा के भंडार माने जानेवाले इन तत्त्वों की उपस्थिति में कैंसर का अस्तित्व ही संभव नही है।

डॉ. बुडविग ने कैंसर के इलाज़ की जो आहार पद्धति विकसित की थी, वह अपने आप में अनोखी थी क्योंकि इसमें इलाज की कीमियोथैरेपी और रेडियोथेरैपी जैसी तकनीकों की तरह स्वस्थ कोशिकाओं के क्षतिग्रस्त होने का खतरा नहीं था। बुडविग की आहार उपचार पद्धति को ही ‘बुडविग प्रोटोकॉल’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने इस पद्धति द्वारा कैंसर के इलाज में 90 प्रतिशत तक सफलता प्राप्त की थी।

इसके अलावा बुडविग ने अपने प्रयोगों के आधार पर बताया कि तेल को गर्म करने से उसके ऊर्जावान तत्त्व नष्ट हो जाते हैं और कैंसरकारी रसायन बन जाते हैं। उन्होंने इसे प्रतिबंधित करने की माँग की, परंतु बदले में प्रतिबंधित कर दिए गए उनके शोध पत्रों के प्रकाशन। कितने आश्चर्य की बात है कि सात बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित होने पर भी वह पुरस्कार नही पा सकीं।

आज जब कैंसर हमारे सामने दानव रूप में खड़ा है, बुडविग प्रोटोकॉल पर हो रहे शोध कार्यों ने उम्मीद की एक नई किरण दिखाई है। पोलिश, फ्रांस और जर्मनी में हुए प्रयोगों ने बुडविग प्रोटोकॉल को कैंसर के लिए लाभकारी माना है। ‘कैंसर फ्री’ बुक के लेखक बिल हेन्डरसन का भी मानना है कि कोशिका में ऑक्सीजन को आकर्षित करने के लिए ओमेगा -3 चुम्बक की तरह काम करता है। बुडविग की खोज कई मायने में विशिष्ट सिद्ध हुई है। यदि बुडविग प्रोटोकॉल को विशेषज्ञों की देख-रेख में कार्यान्वित किया जाये तो यह निश्चित रूप से कैंसर के इलाज के एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आएगा।

जन्मदिन विशेष: साहित्य के क्षेत्र में 136 वर्ष बाद भी जीवन्त हैं ‘कलम के सिपाही’ मुंशी प्रेमचंद

अनुज हनुमत,

बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएँ नहीं थीं, फिर भी इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ। तारीख 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के लमही गांव में एक युग पुरूष का जन्म हुआ, जिसने विश्व साहित्य की फलक पर भारत के नाम को बुलंदियों पर पहुँचा दिया। गोदान, रंगभूमि, कर्मभूमि व गबन जैसे विश्व प्रसिद्द उपन्यासों व शतरंज के खिलाड़ी, ठाकुर का कुआँ, कफ़न, पूस की रात व दो बैलों की कथा जैसी सशक्त कहानियों के रचयिता प्रेमचंद किसी एक भाषा के लिए गर्व का विषय नहीं हैं, वरन समस्त साहित्य जगत के शाश्वत युग द्रष्टा हैं।

प्रेमचंद जी कहते हैं कि समाज में ज़िन्दा रहने में जितनी कठिनाइयों का सामना लोग करेंगे उतना ही वहाँ गुनाह होगा। अगर समाज में लोग खुशहाल होंगे तो समाज में अच्छाई ज़्यादा होगी और समाज में गुनाह नहीं के बराबर होगा। प्रेमचन्द ने शोषितों को उठाने का हर संभव प्रयास किया। उन्होंने आवाज़ लगाई ‘ए लोगों जब तुम्हें संसार में रहना है, तो जिन्दों की तरह रहो, मुर्दों की तरह ज़िन्दा रहने से क्या फ़ायदा।’

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प्रेमचंद के उपन्‍यास न केवल हिन्‍दी उपन्‍यास साहित्‍य में बल्कि संपूर्ण भारतीय साहित्‍य में मील के पत्‍थर हैं। प्रेमचन्द कथा-साहित्य में उनके उपन्यासकार का आरम्भ पहले होता है। उनका पहला उर्दू उपन्यास (अपूर्ण) ‘असरारे मआबिद उर्फ़ देवस्थान रहस्य’ उर्दू साप्ताहिक ‘’आवाज-ए-खल्क़’’ में ८ अक्टूबर, १९०३ से १ फरवरी, १९०५ तक धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ। उनका दूसरा उपन्‍यास ‘हमखुर्मा व हमसवाब’ जिसका हिंदी रूपांतरण ‘प्रेमा’ नाम से १९०७ में प्रकाशित हुआ। चूंकि प्रेमचंद मूल रूप से उर्दू के लेखक थे और उर्दू से हिंदी में आए थे, इसलिए उनके सभी आरंभिक उपन्‍यास मूल रूप से उर्दू में लिखे गए और बाद में उनका हिन्‍दी तर्जुमा किया गया।

प्रेमचंद एक संवेदनशील कथाकार ही नहीं, सजग नागरिक व संपादक भी थे। उन्‍होंने ‘हंस’, ‘माधुरी’, ‘जागरण’ आदि पत्र-पत्रिकाओं का संपादन करते हुए व तत्‍कालीन अन्‍य सहगामी साहित्यिक पत्रिकाओं ‘चांद’, ‘मर्यादा’, ‘स्‍वदेश’ आदि में अपनी साहित्यिक व सामाजिक चिंताओं को लेखों या निबंधों के माध्‍यम से अभिव्‍यक्‍त किया। अमृतराय द्वारा संपादित ‘प्रेमचंद : विविध प्रसंग’ (तीन भाग) वास्‍तव में प्रेमचंद के लेखों का ही संकलन है |

कलम के सिपाही प्रेमचन्द नाम लेते ही आँखों के समक्ष एक चित्र उभरता है- गोरी सूरत, घनी काली भौंहें, छोटी-छोटी आँखें, नुकीली नाक और बड़ी- बड़ी मूँछें और मुस्कुराता हुआ चेहरा। टोपी, कुर्ता और धोती पहने एक सरल मुख-मुद्रा में छिपा एक सच्चा भारतीय। एक महान कथाकार- जिसकी तीक्ष्ण दृष्टि समाज और उसकी बुराइयों पर केन्द्रित थी। एक समग्र लेखक के रूप में उन्होने मध्यवर्गीय समाज को अपने साहित्य में जीवित किया। मुंशी प्रेमचंद ने कहा था कि, ” जो आदमी दूसरी कौम से जितनी नफरत करता है, समझ लीजिये वह खुदा से उतना ही दूर है।”

पीएम मोदी ने ‘रन फॉर रियो’ दौड़ को दिखाई हरी झंडी

शिखा पाण्डेय,

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रियो ओलंपिक जा रहे भारतीय दल का हौसला बढ़ने के लिए आज ‘रन फॉर रियो’ दौड़ को हरी झंडी दिखाई। राजधानी दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।

यह दौड़ मेजर ध्यान चंद नेशनल स्टेडियन (एमडीसीएनएस), इंडिया गेट से जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम (जेएनएस), लोधी रोड तक के लिए आयोजित की गई है। इस दौड़ में करीब 20,000 स्कूली बच्चों ने भाग लिया। इस आयोजन के ज़रिये केंद्र सरकार देश में खेल को लेकर बेहतर माहौल बनाना चाहती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त से शुरू हो रहे रियो ओलंपिक के लिए जाने वाले सभा 119 खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की। उन्होंने कहा कि सभी खिलाड़ियों को देश के सवा सौ करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं। हमारे खिलाड़ी अपने खेल से दुनिया का दिल जीतेंगे और देश की शान बढ़ाएंगे।

मोदी ने कहा “ज्यादातर खेलों का मूल्यांकन सिर्फ जीत और हार में सिमट जाता है। लेकिन, खेल का मूल्याकंन जीत और हार में नहीं समेटा जा सकता है।” मोदी ने आगे कहा कि ‘हमारे खिलाड़ी पूरी ताकत से देश के सम्मान के लिए जूझते हैं। यहीं उनकी सबसे बड़ी कसौटी होती है। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे खिलाड़ी अपने खेल से दुनिया का दिल जीत लेंगे।”

प्रधानमंत्री ने बताया कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए हमने खिलाड़ियों को अतंरराष्ट्रीय ट्रेनिंग दी है, ताकि भारतीय खिलाड़ी हर कसौटी पर खरे उतर सकें। प्रधानमंत्री ने 2020 के ओलंपिक का ज़िक्र करते हुए कहा ,”इस बार ओलंपिक में देश के 119 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं लेकिन हम 2020 ओलंपिक में देश के 200 खिलाड़ियों के भाग लेने का संकल्प आज लेते हैं।”

युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल ने कहा कि इस दौड़ का उद्देश्य सिर्फ खिलाड़ियों के प्रति राष्ट्र के गर्व को प्रदर्शित करना और उन्हें आगामी रियो ओलंपिक खेलों के लिए शुभकामनाएं देना भर ही नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर जनता, विशेषकर बच्चों और युवाओं को ओलंपिक की भावना और शक्ति के साथ जोड़ना भी है।

सऊदी अरब: बेरोज़गारी के चलते 10 हज़ार भारतीय मज़दूर भूखे , केंद्र सरकार सक्रिय

अब्दुल फ़हद,

सऊदी अरब के जेद्दा शहर में नौकरी गंवाने की वजह से लगभग 10 हज़ार लोग भूख से तड़प रहे हैं। इस बात की जानकारी सुषमा स्वराज को ट्विटर के ज़रिए मिली। भारतीय मज़दूरों की इस बदहाली की ख़बर एक व्यक्ति ने ट्वीट करके दी।

केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस मामले में तेज़ी बरतते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किए। उन्होंने अपने ट्वीट में सऊदी अरब में रह रहे भारतीयों से भूखे मज़दूरों की मदद करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि ऐसे भारतीय जो समृद्ध हैं, वे अपने देशवासियों की मदद के लिए आगे बढ़ें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सऊदी के भारतीय दूतावास में सभी भूखे लोगों को भोजन मुहैया कराए जाने का आदेश दिया है।

विदेश राज्य मंत्री वी के सिंह इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सउदी अरब रवाना होने वाले हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि वह हर घंटे इस मामले पर नजर रख रही हैं। सुषमा को ट्वीट कर एक भारतीय ने कहा था कि जेद्दा में करीब 800 भारतीय भूखे हैं। उस शख्स ने सुषमा से दखल देने की गुहार लगाई थी। सुषमा ने कहा कि विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर कुवैत और सउदी अरब के अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठाएंगे।

विदेश मंत्री ने कहा,‘‘सउदी अरब और कुवैत में हमारे भाइयों-बहनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।’’ उन्होंने कहा कि कुवैत में तो चीजें ‘‘संभालने लायक हैं’’, लेकिन सउदी अरब में मामला ‘‘बदतर’’ है। बाद में सुषमा ने भारतीय कामगारों को मुहैया कराए गए भोजन तस्वीरें ट्विटर पर डालीं।

पाकिस्तान द्वारा संचालित आतंकी शिविरों को ध्वस्त करने की ज़रूरत -बाबा रामदेव

शिखा पाण्डेय,

योग गुरु बाबा रामदेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को लेकर वे मुक्ति आंदोलन चलायें। बाबा रामदेव ने कहा, “भारत इतना बलशाली देश है। इसके बावजूद नापाक पाकिस्तान कश्मीर पर अपना अधिकार जता रहा है।” बाबा रामदेव ने कहा कि कश्मीर में पाक संचालित आतंकी शिविरों को भी ध्वस्त करने की जरूरत है।

बाबा मस्तनाथ मठ स्थल बोहर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कश्मीर को लेने की बात कर रहे हैं, लेकिन उनको यह नहीं पता कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने पाक को कायर और कमजोर बताया और कहा कि भारत जैसे शक्तिशाली देश को कश्मीर के मुद्दे पर मौन रहना ठीक नहीं है। रामदेव बोले,” हमारे बच्चे मानचित्र पर जिस कश्मीर को देखते हैं उस पर पाकिस्तान अपना हक़ जताता है। जब एक कायर देश एक महान देश के एक हिस्से पर कब्जा कर लेता है, तो हम चुप-चाप नहीं बैठ सकते।”

बाबा रामदेव ने यह भी बताया कि अगले माह स्वतंत्रता दिवस समारोह में वे अमेरिका जाएंगे। वहां करीब एक लाख लोगों को योग सिखाएंगे व कई अन्य कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेंगे। इसके अलावा कनाडा व अन्य देशों में भी इसी तरह के कार्यक्रम हैं। उन्होंने बताया कि इन देशों की यात्रा पर योग का प्रचार प्रसार भी किया जाएगा।

आपको बता दें कि रोहतक में ही पिछले दिनों एक कार्यक्रम में योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा था कि कानून आगे न आता तो भारत माता जय नहीं बोलने वाले लाखों लोगों के सिर कलम कर देते। इस बयान को लेकर कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मंत्री सुभाष बतरा ने कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी, जो अभी तक विचाराधीन है।

अखिलेश है अच्छा लेकिन सरकार नहीं चला पा रहा -राहुल गाँधी

ब्यूरो,

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला वहीं यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बारे में कहा कि अखिलेश अच्छा लड़का है पर काम नहीं कर पा रहा है। हालांकि, राहुल की ऐसी राय अखिलेश की सरकार के बारे में नहीं है।

लखनऊ के आशियाना इलाके में स्थित रमाबाई अंबेडकर मैदान में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रैली में तकरीबन 40 हजार लोग शामिल हुए। 2017 के विधानसभा चुनावों के लिए लखनऊ में चुनावी शंखनाद करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा,” वैसे तो बीते 27 साल से यूपी में गैर कांग्रेसी सरकारों ने राज किया है, पर इन सभी सरकारों ने यूपी में केवल नफरत की राजनीति करके एक-दूसरे को लड़ाने व उपद्रव करवाने का काम किया है। मौजूदा सरकार की यदि बात करें, तो अखिलेश लड़का अच्छा है, लेकिन सरकार नहीं चला पा रहा है। इसी का नतीजा है कि यूपी में कानून व्यवस्था इतनी खराब हो चुकी है।”

राहुल ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि पुलिस स्टेशन को राजनीतिक दलों का कार्यालय बना दिया गया है। राहुल ने कहा कि गरीबों को थानों में परेशान किया जा रहा है। राजनीति करने वाले थानों से आम जनता पर दबाव बनाकर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश नहीं आ सकता क्योंकि एक ओर बीएसपी भ्रष्टाचार, दूसरी ओर एसपी ‘गुंडागर्दी’ को बढ़ावा देती है।

मुख्यमंत्री को सरकार की समझ नहीं-

राहुल गांधी ने पूछा,” यूपी में जो यह सब हो रहा है, इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है? अखिलेश मुख्यमंत्री हैं पर मुख्यमंत्री साहब को सरकार की समझ नहीं है , यही वजह है कि यहां बीते पांच साल से सरकार जैसी कोई चीज रह ही नहीं गई है। यहां सिर्फ जाति धर्म की राजनीति हो रही है। “

राहुल ने नेताओं से गुटबाज़ी छोड़कर पार्टी के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश चुनाव में पूरी ताकत से उतरेगी। शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाये जाने के विषय में उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ-साथ पार्टी को अनुभव की भी जरूरत है। राहुल बोले कि शीला दीक्षित ने दिल्ली का विकास किया है और अब बारी उत्तर प्रदेश की है।

उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी के रमाबाई अम्बेडकर मैदान में पहुंचते ही कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उनका जोर-शोर से अभिवादन किया। राहुल ने बड़े आत्मविश्वास के साथ जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हम वापस आ रहे हैं। आपको बता दें कि रैली में राहुल के साथ प्रशांत किशोर की टीम भी मौजूद रही।

छात्रों से जुड़ाव या विश्वविद्यालय प्रशासन से टकराव ! कैसा होगा अगला छात्र संघ चुनाव ?

अनुज हनुमत,

पिछले वर्ष पूरे सत्र भर इलाहाबाद विश्वविद्यालय का कैम्पस छात्र संघ और विवि प्रशासन के आपसी विवाद की आग में जलता रहा। इस विवाद से आम छात्रों की पढ़ाई का भी जमकर नुकसान हुआ। पिछला सत्र समाप्त हो चुका है और एक साल की इस पूरी समयावधि में छात्र संघ के अंदर ही तनातनी जारी रही। इस बीच कई दफे पूरा कैम्पस छावनी में तब्दील रहा। हंगामे की आग दिल्ली के सियासी गलियारों से होती हुई, लोकसभा तक भी पहुंची। लेकिन अब सभी को उम्मीद है कि नए छात्र संघ चुनाव के बाद बहुत कुछ बदल जायेगा।

दरअसल इविवि ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर इस प्रतिष्ठित शैक्षिणिक संस्थान में होने वाले आगामीे छात्र संघ चुनावों पर टिकी है। अगर हम पिछले वर्ष की घटनाओं पर नजर डालें तो इसका कारण आसानी से समझ आ जायेगा। पिछले वर्ष अनगिनत ड्रामों के बीच छात्र संघ का चुनाव सम्पन्न हुआ और विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार स्वतन्त्रता के बाद कोई महिला छात्र संघ अध्यक्ष बनी। बाकी के पदों पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का कब्जा हुआ। बस यहीं से शुरू हुई आपसी खींचातानी, जिसने देखते ही देखते प्रतिद्वंद्व का स्वरुप ले लिया। लेकिन अब सबको आशा है कि आने वाला नया छात्र संघ जरूर इन कमियों को पूरा करेगा।

allahabad

अगले चुनाव को लेकर हमने कैम्पस में कई छात्रों से बातचीत की। अधिकांश छात्र इस विषय पर एकमत दिखे। छात्रों ने कहा,” इस बार का चुनाव शांति से सम्पन्न होना चाहिए और हम उसी उम्मीदवार को प्राथमिकता देंगे, जो वास्तव में छात्रों की समस्याओं के लिए लगातार कैम्पस में रहकर संघर्ष करे और जिसे छात्रों और कैम्पस की समस्याओं का समुचित ज्ञान हो। हमें इस बार किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहिए और न ही कैम्पस में पुलिस या मिलिट्री चाहिए। हमें तो पढ़ाई लिखाई का स्वच्छ, सुंदर और शांत माहौल चाहिए जिसमें डर, भय और लड़ाई न हो।
हमने अध्यक्ष पद के कुछ संभावित उम्मीदवारों से भी बातचीत की तो उन्होंने एक सुर में कहा कि हमारे लिए छात्रहित ही सर्वोपरि होगा।

इस बार के चुनाव को लेकर जिस प्रकार का उत्साह कैम्पस में देखने को मिल रहा है, उससे इतना तो स्पष्ट है कि इस बार का चुनाव काफी जबरदस्त होने वाला है। वोट डालने वाला छात्र भी जागरूक दिख रहा है और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार भी। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बार छात्र संघ चुनाव का क्या परिणाम होगा।

कर्नाटक के सी.एम. सिद्धारमैया के बेटे राकेश की ब्रसेल्स में मौत

ब्यूरो,

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे राकेश की ब्रसेल्स में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक़, सिद्धारमैया भी ब्रसेल्स में ही हैं। राकेश के पेट में दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद राकेश को बचाया नहीं जा सका।

सिद्धारमैया के बड़े बेटे राकेश की तबियत खराब होने की सूचना के बाद ही उनके छोटे बेटे यतेन्द्र और चिकित्सक भी पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक़ राकेश के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। जिसकी वजह से उन्हें बचाया नहीं जा सका।

राकेश की उम्र 39 साल थी। तबियत बिगड़ने के बाद राकेश का ब्रसेल्स के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। जानकारी के मुताबिक़, राकेश अपने दोस्तों के साथ 21 जुलाई को बेल्जियम पहुंचे थे। बेल्जियम में वे इलेक्ट्रोथॉनिक म्यूजिक फेस्टिवल टुमॉरोलैंड में जाने वाले थे।