लगभग 64 दिनों से जारी हिंसा के बीच आज पूरी कश्मीर घाटी से कर्फ्यू हटा लिया गया है। आठ जुलाई को सुरक्षा बलों द्वारा हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी को मार गिराने के बाद घाटी में झड़पों का सिलसिला शुरू हो गया था। जिसके चलते अब तक 73 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई हजार लोग घायल हुए हैं।
कश्मीर के क्षेत्रीय पुलिस मुख्यालय की ओर से कल जारी वक्तव्य में कहा गया है कि पूरी घाटी में हालात आमतौर पर नियंत्रण में रहे। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “पूरी कश्मीर घाटी से कफ्र्यू हटा लिया गया है।” उन्होंने बताया कि श्रीनगर के कुछ इलाकों- नोहट्टा, एम आर गंज और खानयार में कर्फ्यू जैसी बंदिशें लगाई गई हैं, जबकि पूरी घाटी में लोगों के एक जगह जमा होने पर पाबंदी लगी हुई है।
शुक्रवार की नमाज के मद्देनजर कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए कल अधिकारियों ने शहर के 12 पुलिस थानों समेत घाटी के कई इलाकों में कर्फ़्यू लगा दिया था। इस बीच पाबंदियों और अलगाववादियों द्वारा हड़ताल के आह्वान के कारण जनजीवन प्रभावित रहा।
देश के सबसे प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनावों के नतीजे आ गए हैं । बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी ने लगातार तीसरी बार विजय पताका लहराते हुए अध्यक्ष समेत तीन पदों पर जीत हासिल की है। अध्यक्ष पद अमित तंवर, उपाध्यक्ष प्रियंका और सचिव पद अंकित सांगवान ने जीता है । वहीं एनएसयूआई के मोहित ने संयुक्त सचिव के पद पर जीत हासिल करते हुए एक अर्से के बाद सूखे को खत्म किया है।
चुनाव के पहले ABVP ने कहा था कि वो सभी पदों पर जीत हासिल करेगी लेकिन महासचिव के पद पर एनएसयूआई की जीत ने कांग्रेस को थोड़ी राहत जरूर दी होगी ।जीत की खबर मिलते ही नॉर्थ कैंपस में छात्र संगठनों ने जोर शोर से जश्न मनाना शुरू कर दिया है और जश्न के माहौल में कोई खलल न पड़े, इसको देखते हुए कैंपस में सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की गई है।
आपको बता दें की डीयू में छात्रसंघ चुनाव भले ही छोटी मोटी घटनाओं को छोड़ शांतिपूर्ण रहा है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले इस साल वोट बेहद कम पड़े हैं। इस साल महज 36.9 प्रतिशत वोट पड़े हैं, जो की पिछले साल के 44 फीसदी से बेहद कम है।
इस साल सबसे कम वोट लॉ सेंटर में पड़ा है जो कि 6.79 फीसदी है ।कम वोटिंग की शिकायत छात्र संगठन के नेताओं ने चुनाव अधिकारी डीएस रावत से भी की है। वैसे मुख्य चुनाव अधिकारी डीएस रावत की मानें तो वोटिंग प्रतिशत मे हुई गिरावट के पीछे 2 बड़ी वजहें हैं। पहली तो ये कि इस बार कई कॉलेजों मे होने वाले छात्र चुनाव रद्द हो गए है, वहीं दूसरी वजह इस बार फर्स्ट इयर के कई छात्रों को अब तक आईकार्ड नहीं मिल सका है, जिसकी वजह से छात्र वोट देने कॉलेज ही नहीं पहुंचे।
आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन सीवाईएसएस के मैदान में नहीं होने से इस बार सीधा मुकाबला एबीवीपी और एनएसयूआई के बीच था। अब देखना दिलचस्प होगा की जेएनयू के परिणामों में भी ABVP का पलड़ा भारी रहेगा या कन्हैया कुमार का मुद्दा वहां के चुनावों में ABVP को भारी पड़ जायेगा।
तेजाब कांड में हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भागलपुर जेल से रिहा हुए सिवान के पूर्व राजद सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन तेरह सौ गाड़ियों के लाव लश्कर के साथ खगड़िया पहुंचे। शहाबुद्दीन समर्थकों ने उन्हें माला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया।
13 साल बाद जमानत पर जेल से रिहा होने के बाद शहाबुद्दीन काफी खुश नजर आए। शहाबुद्दीन ने न्यायलय पर विश्वास जताया और कहा,”मुझे न्याय मिलेगा इसपर पूरा भरोसा था। लंबे अंतराल के बाद जेल के बाहर की हवा और परिवार के पास जाने की खुशी है।”
शहाबुद्दीन ने मीडिया के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा,” मुझे आतंक का पर्याय कहना गलत है। ये सरासर गलत है कि लोग मुझसे डरे हुए हैं। मैं कोई डरावनी चीज नहीं हूँ। आखिर कोई मुझसे क्यों डरेगा? मैं 13 साल बाद अपने घर जा रहा हूं। पिछले 10 साल से मैंने किसी से मुलाकात नहीं की है और न कोई पब्लिक मीटिंग की है।”
जेल से बाहर आते ही वे अपना राजनीतिक रंग दिखाने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा,” नीतीश कुमार हमारे परिस्थितियों के नेता हैं, लेकिन लालू यादव ही हमारे नेता हैं।”
पत्रकार राजदेव रंजन हत्याकांड मामले में पूछे जाने पर शहाबुद्दीन ने कहा कि यह मामला किसी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से आया था। वही लोग बताएंगे या सीबीआई ही बताएगी।
उन्होंने कहा कि जो लोग यह कह रहे हैं कि सीवान के लोग मुझसे डरे हुए हैं, वो लोग मेरी इमेज खराब कर रहे हैं। शहाबुद्दीन ने कहा कि वह घर जाने के बाद राजदेव के परिवार से भी मिलेंगे।
आपको बता दें कि शहाबुद्दीन का यह काफिला मुजफ्फरपुर होते हुए शाम 6 बजे तक सिवान पहुंचेगा जहां उनके पिता उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
पूर्व सांसद ने कहा कि पहले वे सिवान की 22 लाख जनता के बीच लंबे अरसे के बाद जा रहे हैं। उनके बीच जाकर उन्हें देखेंगे, उनकी सुनेंगे। फिर बड़ी लड़ाई की तैयारी में लगेंगे।
रियो में चल रहे पैरा ओलिंपिक खेलों में दो भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्ण और कांस्य पदक जीतकर करोड़ों हिंदुस्तानियों का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है। भारत ने पुरुषों की ऊंची कूद टी-42 स्पर्धा में गोल्ड और ब्रॉन्ज पदक अपने नाम किया है। ऊंची कूद में मरियप्पन थांगावेलू ने गोल्ड पर कब्जा जमाते हुए इतिहास रच दिया है तो वहीं, वरुण सिंह भाटी ने 1.86 मीटर कूद कर इसी इवेंट में कांस्य पदक अपने नाम किया है।
मरियप्पन थांगावेलू ने 1.89 मी. की जंप लगाते हुए स्वर्ण पदक जीता। रजत पदक अमेरिका के सैम ग्रेवी को मिला। वरुण सिंह भाटी ने 1.86 मी. की जंप लगाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। दूसरी ओर भारत के ही संदीप ‘भाला फेंक’ में कांस्य जीतने से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे।
मरियप्पन मुरलीकांत पेटकर (स्वीमिंग 1972 हेजवर्ग) और देवेंद्र झाझरिया (भाला फेंक, एथेंस 2004 ) के बाद गोल्ड जीतने वाले तीसरे भारतीय हैं। मरियप्पन और भाटी की इस सफलता के बाद अभी तक के सभी पैरा ओलिंपिक खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या 10 हो गई है जिसमें 3 स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य शामिल हैं।
लखनऊ। पूरे देश में तीन तलाक को लेकर छिड़ी बहस के बीच ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने शुक्रवार को मॉडर्न निकाहनामा पेश किया, जिसमें महिलाओं को समान अधिकार के अलावा पत्नी को भी तलाक देने का हक दिया गया है। इसके लिए मौलाना यासूब अब्बास ने मॉडर्न निकाहनामा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक को सौंपा है ।
आपको बता दें कि डॉ. सादिक ने इसे मंजूरी देते हुए बोर्ड के अन्य सदस्यों से बातचीत कर लागू कराने का भरोसा दिया है। लेकिन अभी इसके लागू होने में कई अड़चने आ सकती हैं। ज्ञात हो कि देश में ज्यादातर मुस्लिम आबादी सुन्नी मुस्लिमों की है और सुन्नी मुस्लिमों की संस्था ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस में हलफनामा देकर कह चुकी है कि सामाजिक सुधार के नाम पर पर्सनल लॉ को बदला नहीं जा सकता। इसलिए महिला ऐक्टिविस्टों ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार देने की मांग की है।
ये मांग पिछले दिनों कुछ मुस्लिम महिला संगठनों ने पर्सनल लॉ बोर्ड के बारे में कहा था कि इसका रुख इस्लाम और महिला विरोधी है। इसके बाद कई महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने तीन तलाक और बहुविवाह जैसी रवायतों पर रोक लगाने की मांग की थी। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही संज्ञान में लेते हुए तीन तलाक, बहुविवाह को गैरकानूनी बताया है। फिलहाल अभी तो यह मुद्दा इतनी जल्दी शांत होता नहीं दिख रहा है, क्योंकि इस विषय पर दोनों पक्ष अब मैदान पर आ गए हैं ।
श्रीलंका के महान बल्लेबाज और पूर्व कप्तान तिलकरत्ने दिलशान ने आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया है। दिलशान ने आज ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टी 20 मैच खेला। श्रीलंका के इस महान खिलाड़ी को उनके टीम के सदस्यों ने भव्य विदाई दी। आईसीसी ने भी श्रीलंका के इस पूर्व कप्तान को शानदार अंतरराष्ट्रीय कैरियर के लिये बधाई दी है।
हालांकि अपने आखिरी मैच में दिलशान बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये और मात्र एक रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन उनके अब तक के शानदार क्रिकेट करियर के लिए सभी खिलाड़ियों ने बल्ला ऊपर उठाकर दिलशान को सम्मान दिया।
आईसीसी के मुख्य कार्यकारी डेविड रिचर्डसन ने अपने बयान में कहा, ‘‘दिलशान की सभी प्रारुपों में उपलब्धियां शानदार हैं। मजबूत बल्लेबाज के तौर पर शुरुआत करनेवाले दिलशान खेल की जरुरतों के हिसाब से खुद को ढालते रहे और वनडे और टी20 अंतरराष्ट्रीय खेलों में सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटरों में से एक रहे।”
उन्होंने कहा, ‘‘वह अपने लाजवाब स्ट्रोक्स और आक्रामक सलामी बल्लेबाज के तौर पर हमेशा याद किए जायेंगे। हम दिलशान को शानदार कारियर के लिये बधाई देते हैं और भविष्य में उनकी सफलता की कामना करते हैं।” आपको बता दें कि दिलशान उन 11 खिलाडियों में से एक हैं जिन्होंने खेल के प्रत्येक प्रारुप में शतक जड़ा है।
गौरतलब है कि दिलशान ने 2013 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने 87 टेस्ट मैचों में 16 शतक से 5,492 रन, 330 वनडे में 22 शतकों से 10,290 रन जोड़े हैं। टी20 में उनके 80 मैचों में 1889 रन हैं, जिसमें एक शतक भी शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी को टैग कर बीएमसी पर लगाए गए संगीन आरोप में खुद फंसे कॉमेडी किंग कपिल शर्मा ने अपने विवादित ट्वीट पर फिर ट्वीट कर सफाई दी है। कपिल ने ट्वीट किया है कि उन्होंने किसी राजनीतिक पार्टी पर आरोप नहीं लगाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर केवल अपनी चिंता जाहिर की है।
दरअसल कपिल ने बीएमसी पर आरोप लगते हुए ट्वीट किया था कि वह पांच साल में 15 करोड़ रुपये टैक्स देते हैं, इसके बाद भी उन्हें ऑफिस बनाने के लिए घूस देना पड़ रहा है। साथ ही प्रधानमंत्री को टैग करते हुए कपिल ने पूछा था कि क्या यही हैं आपके अच्छे दिन?
कपिल के ट्वीट के बाद बीएमसी ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि कपिल उस अधिकारी का नाम बताएं, जिन्होंने उनसे घूस मांगा है, पर कपिल ने अब तक नाम का खुलासा नहीं किया है।
बीएमसी ने यह भी साफ कर दिया कि कपिल जिस जगह पर अपना ऑफिस बनाना चाह रहे हैं, उस जगह का इस्तेमाल व्यवसायिक तौर पर नहीं किया जा सकता और इसके लिए उन्हें पहले ही नोटिस भेज दिया गया है।
कपिल द्वारा बीएमसी पर लगाये इस आरोप पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। कई राजनीतिक पार्टियों का मानना है कि यह सवाल उन्हें प्रधानमंत्री मोदी से नहीं पूछना चाहिए। यह मामला राज्य का है, उन्हें इसकी शिकायत महाराष्ट्र सरकार से करनी चाहिए।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने कपिल के इस ट्वीट पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि कपिल को साबित करना होगा कि किसने उनसे घूस मांगा था। जब तक वह अपने लगाये आरोप को साबित नहीं करते उन्हें मुंबई में शूट करने नहीं दिया जायेगा। मनसे ने कहा कि यदि कपिल ने किसी कार्यकर्ता पर घूस मांगने का आरोप लगाया है, तो उन्हें साबित करना होगा और यदि वे इस आरोप को साबित नहीं कर पाये तो उन्हें सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी होगी।
बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने दो हजार करोड़ रुपये के ड्रग मामले में अपने ऊपर लगाये सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा,” इस मामले में मेरा नाम बेवजह ठाणे पुलिस ने लिया है। मैं बिल्कुल निर्दोष हूँ।”
पत्रकारों से वीडियो कांफ्रेंस के ज़रिये बातचीत में ममता ने कहा,” मैंने भारतीय संविधान के तत्वों के विरुद्ध कोई भी गलत कदम नहीं उठाया। मैं ठाणे पुलिस और अमेरिका के ‘ड्रग एन्फोर्समेन्ट ऍडमिनिस्ट्रेशन’ संस्था के उच्च स्तरीय लोगों की हीन और अनैतिक साजिश से पीड़ित हूँ।” ममता ने कहा,” गत बीस वर्षों से मैं बैरागी के भांति जीवन जी रही हूँ। पैसा, संपत्ती, ऐशोआराम इन भौतिक चीजों से मैंने अपने आपको दूर रखा है। ऐसा होते हुए भी मुझे ठाणे पुलिस ने इस ड्रग मामले में क्यों खींचा, यह मेरी समझ से परे है।”
ममता के अनुसार ठाणे पुलिस दो हजार करोड़ रुपयों की बात भले कर रही हो, लेकिन उनके बैंक खाते में सिर्फ पच्चीस लाख रूपये ही हैं, जो उन्होंने सिनेमा के माध्यम से कमाए हैं। ममता का कहना है,” मेरी जिंदगी सूर्यप्रकाश जितनी ही साफ और स्वच्छ है। इस साजिश से मुझे मेरा भगवान ज़रूर बाहर निकालेगा। “
आपको बता दें कि ममता कुलकर्णी इस समय केनिया के मोम्बासा सिटी में संन्यासी की जिंदगी जी रही हैं। ममता ने अपने आप को निर्दोष साबित करने के लिये विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और केंद्रीय गृहराज्यमंत्री किरन रीजीजू से मदद मांगी है।
शुक्रवार को ममता के वकिलों की टीम मुंबई आयी थी। उस समय उन्होंने ममता पर लगाये सभी आरोपो का खंडन किया। इस टीम में एम. झेड. एम. लीगल के ऍड.परवेझ मेमन, न्यूयॉर्क से ममता के वकील ऍड. डॅनियल अरशक, केनिया से ममता के वकील ऍड. क्लिफ ओंबेटा और इस मामले के और एक अन्य आरोपी जय मुखी के वकील ऍड. सुदीप पासबोला, मशहूर वकील तथा मानवाधिकारविशेषज्ञ एवंम सांसद ऍड. माजिद मेमन उपस्थित थे।
ममता के वकीलों का कहना है कि ‘ड्रग एन्फोर्समेन्ट ऍडमिनिस्ट्रेशन’ के हस्तक्षेप,जानकारी और निर्देशन पर ठाणे पुलिस ने सिने अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को इस मामले में फसाया है। उनका इस मामले से कोई लेन-देना नही है। कोई भी ठोस सबूत दिखाये बिना पुलीस ने दो हजार करोड़ के ड्रग मामले में उन्हें फंसाया है।
भारतीय रेल द्वारा 9 सितम्बर से लागू किए जानेवाले फ्लेक्सी फेयर नियम से कांग्रेस पार्टी एकदम ख़फ़ा है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार से यह मांग की है कि वह तुरंत राजधानी, शताब्दी और दुरंतो रेलगाड़ियों के किराये में वृद्धि को वापस ले।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर इस विषय में कहा था,” रेलगाड़ियों की स्पीड बढ़े ना बढ़े लेकिन मोदीजी ने रेल किराये को फास्ट ट्रैक पर रखा है।” राहुल ने सीधे इस वृद्धि को ‘लूट’ करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनके विकास के एजेंडे में आम आदमी को लूटा जाता है और उद्योगपतियों को राहत दी जाती है।
राहुल के ट्वीट के बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी कहा कि त्योहारों के मौसम में यह केंद्र सरकार द्वारा जनता को दिया गया बदसूरत तोहफा है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत रेल किराया में वृद्धि को वापस ले।
समाजवादी पार्टी के ‘बोलबचन’ मंत्री आजम खान ने आरएसएस को चुनौती देते हुए कहा है कि संघ यदि मुझे प्रधानमंत्री बना दे, तो मैं उसके अखंड भारत के सपने को पूरा कर दूंगा।
कल मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद, मीडिया से बात करते हुए आजम खान ने अपने अंबेडकर वाले बयान पर भी सफाई दी, जिसमें उनपर बाबा साहेब का अपमान करने का आरोप लगा था। उन्होंने कहा,” मेरे बयान को गलत ढंग से पेश किया गया है। मैंने बाबा साहब के बारे में कुछ नहीं कहा था।”
आपको बता दें कि आजम खान द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर पर दिए अपमानजनक बयान के विरोध में मथुरा में सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने धरना भी दिया था। मायावती ने भी आजम खान के इस बयान की कड़ी आलोचना की थी और उनसे माफ़ी माँगने को कहा था।
आजम खान ने ऐसा कारनामा पहली बार नहीं किया है। वे अकसर अपनी बयानबाजी के कारण चर्चा में रहते हैं। पिछले दिनों उन्होंने ई-रिक्शा वितरण के दौरान प्रधानमंत्री को मेंढक और स्वामी प्रसाद मौर्य को मोरनी कह दिया था।