बॉलीवुड में अपनी अच्छी खासी जगह बना चुके पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की धमकी का अच्छा खासा असर पड़ा और उन्होंने यहाँ से नौ दो ग्यारह हो जाने में ही अपनी भलाई समझी। फवाद खान ने चुपचाप भारत छोड़ दिया है और वापस आने की कोई योजना नहीं है। एएनआई ने ट्वीट कर इस बारे में जानकारी दी है।
करण जौहर के टॉक शो ‘कॉफी विद करण’ के पांचवे सीजन में फवाद खान पहले गेस्ट बनने वाल थे लेकिन इस धमकी के बाद करण ने फवाद को आलिया भट्ट और शाहरुख खान से रिप्लेस कर दिया है। उल्लेखनीय है कि करण जौहर ने ही पहले कहा था कि पाकिस्तानी कलाकारों का जाना आतंकवाद जैसी समस्याओं का समाधान नहीं है। अभिनेता सलमान खान ने भी इस मामले में कहा था कि बॉलिवुड किसी की बाप की जागीर नहीं है। यहां कोई भी काम कर सकता है।
करण जौहर की आगामी फिल्म, जिसमें फवाद मुख्य भूमिका में हैं, ‘ऐ दिल है मुश्किल’ के प्रोमोशन शुरू होने वाले हैं, लेकिन फवाद प्रोमोशन का हिस्सा नहीं होंगे।
गौरतलब है कि उरी हमले के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने पाकिस्तानी ऐक्टर्स को धमकी दी थी कि यदि वे लोग 25 सितंबर तक भारत नहीं छोड़ते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके अतिरिक्त देश के प्रत्येक कोने से लगातार पाकिस्तानी कलाकारों का विरोध हो रहा था और उन्हें यहां से वापस भेजने की बात की जा रही थी। हालांकि मुंबई पुलिस की ओर से पाकिस्तानी कलाकारों को भरोसा दिलाया गया था कि उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा, लेकिन फवाद ने भारत छोड़ने का विकल्प ही सबसे सुरक्षित समझा।
अर्धसैनिक बल के जवानों के लिए बड़ी खबर है। अर्धसैनिक बलों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर मोदी सरकार ने बड़ी घोषणा की है। इस फैसले के मुताबिक़, सेना और अर्धसैनिक बलों में अब कोई फर्क नहीं होगा। अर्धसैनिकों बलों को भी वही सभी सुविधाएं मिलेंगी, जो सेना को मिलती है।
गृह मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो फैसले के लागू होने के बाद शहीद अर्धसैनिक बलों के जवानों के परिवारों को भी सेना की तर्ज पर सरकारी मदद दी जाएगी।
गौरतलब है कि इससे पहले अर्धसैनिक बलों के रिटायर सैनिकों ने वन रैंक वन पेंशन की मांग उठाई थी। अब देखना है कि अर्धसैनिक बलों को यह सुविधा कब तक मिलेगी।
भ्रष्टाचार के आरोप में घिरे और काफी शर्मिंदगी झेल चुके कॉरपोरेट मंत्रालय के पूर्व महानिदेशक ने अपने बेटे के साथ फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। उन दोनों का शव दिल्ली के मधु विहार स्थित उनके आवास में मिला है। बंसल के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई की जांच चल रही थी। बंसल की पत्नी और बेटी ने भी 19 जुलाई को ख़ुदकुशी कर ली थी।
पुलिस के मुताबिक दोनों शव सुबह नौ बजे नौकरानी ने देखे। दोनों ने दो अलग-अलग सुसाइट नोट छोड़े हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
क्या है पूरा मामला
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी बंसल को एक प्रमुख फार्मा कंपनी से कथित रुप से रिश्वत लेने के आरोप में 16 जुलाई 2016 को गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने उनके बेटे से भी पूछ ताछ की थी। इस मामले के सिलसिले में सीबीआई ने आठ स्थानों पर छापेमारी की थी। एजेंसी ने इस छापेमारी के दौरान नकदी बरामद करने का दावा किया था। बंसल को बाद में गिरफ्तार किया गया था लेकिन फिर जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
उनकी गिरफ़्तारी के बाद उनकी पत्नी सत्यबाला (58) और बेटी नेहा (28) ने 19 जुलाई को पूर्वी दिल्ली के मधु विहार के नीलकंठ अपार्टमेंटस के अपने आवास में अलग-अलग कमरों में पंखे पर लटककर कथित रुप से खुदकुशी कर ली थी। दोनों ने अलग-अलग सुसाइड नोट छोड़े थे, जिनमें उन्होंने किसी को अपनी मौत का जिम्मेदार नहीं ठहराया था। उसमें केवल इतना लिखा था कि ‘सीबीआई की छापेमारी’ से ‘भारी बदनामी’ हुई है और वे इसके बाद जीना नहीं चाहतीं।
पत्नी और बेटी के अंतिम संस्कार के लिए जब उन्हें जमानत दी गई थी तब उन्होंने बस इतना ही कहा था- जीवन चलता रहना चाहिए। बंसल और उनका बेटा 10 दिन पूर्व ही अपार्टमेंट में आए थे। गौरगलाब है कि उन्हें 26 अगस्त को रिहा किया गया था।
भगतसिंह ने देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए आदर्श है। इन्होंने केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। आज भारत माता के ऐसे ही वीर सपूत का जन्मदिन है ।
फाँसी के पहले 3 मार्च को अपने भाई कुलतार को भेजे एक पत्र में भगत सिंह ने लिखा था-
“उन्हें यह फ़िक्र है हरदम, नयी तर्ज़-ए-ज़फ़ा क्या है?
हमें यह शौक है देखें, सितम की इन्तहा क्या है? दहर से क्यों ख़फ़ा रहें, चर्ख का क्या ग़िला करें। सारा जहाँ अदू सही, आओ! मुक़ाबला करें।”
इन जोशीली पंक्तियों से उनके शौर्य का अनुमान लगाया जा सकता है।”
आज भगत सिंह के जन्मदिवस के मौके पर उस विषय पर भी बात करना आवश्यक है, जो युवाओं के बीच हमेशा चर्चा का केंद्र बना रहता है। गांधीजी द्वारा भगत सिंह की फाँसी की सजा रूकवाने के लिए किए गए प्रयासों को लेकर लोगों के बीच तमाम गलत धारणाएं व्याप्त हैं। कहा जाता है कि गांधी भगत सिंह की लोकप्रियता से घबरा गए थे। इसलिए उन्होंने भगत सिंह की सजा माफ करने की शर्त को गांधी-इरविन पैक्ट का हिस्सा नहीं बनाया।
दरअसल, यह एक गलत प्रवृत्ति का नतीजा है। जिसमें एक महानायक को ऊँचा दिखाने के लिए किसी दूसरे महान व्यक्तित्व केा प्रतिनायक बना दिया जाता है। यह सही है कि स्पेशल ट्रिब्यूनल के सामने ट्रायल के दौरान भगत सिंह की लोकप्रियता चरम पर पहुुँच गई थी। किवदंतियाँ प्रचलित हो गई थीं कि भगत सिंह की हड्डियों के जोड़ों को भारी हथौड़ों से कुचल दिए जाने के बावजूद उन्होंने उफ् तक नहीं की। या, भगत सिंह इतने ताकतवर हैं कि भारत-विरोधी बातें करते हुए दो अंग्रेजों को उन्होंने कान पकड़कर पानी के जहाज से बाहर फेंक दिया। जबकि असलियत में भगत सिंह ने कभी समुद्र-यात्रा नहीं की थी।
भगत सिंह के भाषण लोगों की संघर्ष-क्षमता को उभारने वाले होते थे। इन कम उम्र नौजवानों के अडिग साहस ने लोगों को अपने पौरूष पर गर्व करना सिखाया था। परन्तु यह भी उतना ही सत्य है कि गाँधीजी ने अपनी ओर से भगत सिंह को बचाने के लिए लार्ड इरविन से हरसंभव आग्रह किया था, सिवाय गाँधी इरविन पैक्ट तोड़ने की धमकी देने के।ऐतिहासिक रूप से इतना ही सत्य है। दोनों नेताओं की अपनी सोंच थी।
दोनों ही अपनी राह चल रहे थे। परन्तु इस मामले में गाँधी को खलनायक बना दिया जाता है। वास्तव में, भगत सिंह यह हरगिज़ नहीं चाहते थे कि गाँधी ही क्या, कोई भी उनकी सजा कम करने के लिए ब्रिटिश साम्राज्य के सामने हाथ पसारे।
स्टार क्रिकेटर व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी उर्फ़ माही के जीवन पर आधारित फिल्म ‘एम एस धोनी : द अनटोल्ड स्टोरी’ 30 सितंबर को रिलीज़ होने जा रही है, जो 60 देशों के 4500 सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज़ होगी। माहि की जीवनी पर बनी यह फिल्म तमिल और तेलुगू (डब करके) में रिलीज होने वाली भी पहली हिंदी फिल्म है।
फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत धोनी की भूमिका में हैं।
फिल्म के निर्माता व फॉक्स स्टार स्टूडियोज के सीईओ विजय सिंह ने बताया, ” ‘एम एस धोनी : द अनटोल्ड स्टोरी’ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और भारत में किसी भी भारतीय फिल्म के लिए बड़े पैमाने पर रिलीज होने वाली फिल्म बनने जा रही है। यह बड़े पैमाने पर तमिल और तेलुगू (डब करके) में रिलीज होने वाली भी पहली हिंदी फिल्म होगी।”
रिलीज़ होने से पहले ही से यह फिल्म काफ़ी सुर्ख़ियों में है, जिससे फिल्म के निर्माता अरुण पांडे और निर्देशक नीरज पांडे बेहद खुश हैं।
सिंह ने इस बात का खेद भी जताया कि दुनिया भर में फिल्म की अभूतपूर्व मांग और निश्चित समय में विभिन्न भाषाओं में प्रिंट उपलब्ध कराने की मजबूरी के चलते फिल्म पंजाबी और मराठी भाषा में रिलीज नहीं हो सकेगी।
नई दिल्ली। कल यूएन में सुषमा स्वराज ने जिस कड़े अंदाज में पाकिस्तान को फटकार लगाई, उस अंदाज की पूरे देश में तारीफ हुई। देर रात दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी सुषमा स्वराज की जमकर तारीफ की।
गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा पर हर समय हमलावर रुख अपनाए रहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के यूएन में दिए गए भाषण के मुरीद हो गए हैं। उन्होंने ट्वीट कर सुषमा स्वराज को बधाई दी है। केजरीवाल ने कहा कि सुषमा जी ने UNGA में भारत का पक्ष बहुत अच्छी तरह से रखा है। इसके बाद आप नेता कुमार विश्वास भी सुषमा स्वराज के हिंदी में दिए गए भाषण से खुश नजर आए। उन्होंने ट्वीट किया कि सुषमा स्वराज ने सिद्ध किया है कि मां हिंदी की शक्ति कागज से पढ़ी गई कंपित अंग्रेजी से कहीं अचूक है। उन्होंने सुषमा को भारतीय सिंहनी का दर्जा देते हुए कहा कि पाक को यूएन में तार-तार कर दिया।
इसके बाद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुषमा स्वराज के साथ पूरा देश खड़ा है, क्योंकि ये सरकार का स्पीच था। उन्होंने पूरी कोशिश की। मैं उनके स्पीच की कोई बुराई नहीं करूंगा। पर अगर जाने से पहले सुषमा स्वराज ने कुछ होमवर्क किया होता, तो उनके वक्तव्य का ज्यादा असर होता।
कुलमिलाकर जिस अंदाज में सुषमा स्वराज ने कल यूएन में पाकिस्तान को फटकार लगाई उसकी चारों तरफ तारीफ हो रही है। लेकिन सबसे ख़ास बात यह है कि सभी दल इस पर एकमत दिख रहे हैं।
Sushma ji presented India’s viewpoint very well at UNGA. Congratulations to her
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) September 26, 2016
#SushmaSwaraj ने #UNGA में सिद्ध किया कि माँ हिन्दी की शक्ति काग़ज़ से पढ़ी गई कम्पित अंग्रेज़ी से कहीं अचूक है.जय हिंद,जय हिंदी — Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) September 26, 2016
सधे-गूँजते स्वर के पाक के लुँजपुँज पक्ष को #UNGA में तार-तार किया भारतीय सिंहनी @SushmaSwaraj ने.शरीफ़ नामधारी नवाज़ व राहिल लम्पटो सुनो अब
— Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) September 26, 2016
Daring voice of Indian Pride in #UNGA #SushmaSwaraj Di One of the finest orator of Indian Politics. — Dr Kumar Vishvas (@DrKumarVishwas) September 26, 2016
India's Minister of External Affairs Sushma Swaraj addresses the United Nations General Assembly in the Manhattan borough of New York, U.S., September 26, 2016. REUTERS/Brendan McDermid
अनुज हनुमत,
आज यूएन की विशेष सभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया। यूएन में पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, ‘कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और रहेगा। पाकिस्तान इसको लेकर ख्वाब पालना छोड़ दे।’
सबसे खास बात यह रही कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी में बोलते हुए भारत का पक्ष सधे शब्दों में रखा और तथ्यों को दुनिया के सामने रखकर पाकिस्तान की दुनिया में असलियत उजागर कर दी। सुषमा ने पूरी दुनिया को पाकिस्तान की पोल खोलने वाले कई तथ्य सामने रखे। उन्होंने कहा कि ‘हमने शर्तों के साथ नहीं मित्रता के साथ पाकिस्तान की तरफ हाथ बढ़ाया है। हमने दो साल में मित्रता का जो पैमाना तय किया, वो पहले कभी नहीं था। लेकिन हमें इसके बदले क्या मिला? पठानकोट, उरी और बहादुर अली।’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शपथ ग्रहण में नवाज शरीफ को बुलाया। उनके जन्मदिन पर लाहौर गए बदले में हमें पठानकोट, उरी और बहादुर अली मिला। बहादुर अली सीमा पार से आया आतंकी है, जो भारत की गिरफ्त में है। आगे उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ ने कश्मीर में मानवाधिकार के उल्लंघन को उठाया था। ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साथ मानवाधिकार का हनन हो रहा है। अगर किसी को मानवाधिकार हनन देखना है, तो बलूचिस्तान को देखे।’
अपने भाषण के दौरान सुषमा स्वराज ने आगे कहा, ‘आज हमें देखना होगा कि इन आतंकवादियों को कौन पनाह दे रहा है। इतिहास गवाह है कि जिसने हिंसक विचारधारा को पनाह दी है, उसे इसका कड़वा फल ही मिला है। मेरा और तेरा आंतकवाद की मानसिकता से निकलना होगा और एक दृड़ निश्चय के साथ आज हमें आतंकवाद का सामना करना पड़ेगा।’
कुछ देश हैं जो आतंकवाद ही बोते हैं-
कड़े औए बेबाक अंदाज को जारी रखते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, ‘दुनिया में कुछ देश ऐसे हैं जो बोते भी हैं तो आतंकवाद, काटते भी हैं तो आतंकवाद निर्यात भी करते हैं तो आतंकवाद। आतंकवाद को समर्थन देने वाले देशों को विश्व समुदाय में कोई जगह नहीं देनी चाहिए।’ सुषमा ने मांग की कि दुनिया ऐसे देश को अलग थलग करे।
आगे उन्होंने पाकिस्तान को चेताते हुए बताया कि ‘1996 से लंबित CCIT यानी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते पास करना होगा। हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की जरूरत है। अगर ऐसा होता है तो मैं समझूंगी कॉन्फ्रेंस सफल रही।
बहरहाल जैसे ही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का भाषण खत्म हुआ, वैसे ही उनके इस भाषण की सभी प्रमुख नेताओ ने बड़ाई की। सबसे पहले खुद प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने सुषमा स्वराज को उनके बेबाक अंदाज के लिए बधाई दी और बाकी कई नेताओ ने तारीफ की।
बनारस। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों से ठीक पहले बनारस से ABVP के लिए बुरी खबर आई है। आज शाम काशी विद्यापीठ के छात्र संघ चुनावों के परिणाम जारी हुए, जिसमे चौकाने वाले परिणाम सामने आये।
आपको बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में मिली जबरदस्त जीत और जेएनयू में मिली करारी शिकस्त के बाद महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में ABVP को एक बार फिर जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा है। इन चुनावों में ABVP के हाथ सिर्फ महामन्त्री पद लगा, जिसमें अभाविप उम्मीदवार समीर मिश्रा को जीत हासिल हुई। उन्हें कुल 2270 वोट प्राप्त हुए।
सबसे ख़ास बात ये रही कि बाकि सभी पदों पर समाजवादी छात्रसभा की जीत हुई। अध्यक्ष पद पर अनूप कुमार सोनकर 2249 वोटों के साथ विजयी रहे। उन्होंने abvp के उम्मीदवार प्रशांत राय (1066 वोट) को बड़े अंतर से हराया। उपाध्यक्ष पद पर भी समाजवादी छात्र सभा के उम्मीदवार प्रेमप्रकाश गुप्ता की जीत हुई, उन्हें कुल 2155 वोट प्राप्त हुए। इस पद पर abvp के उम्मीदवार तीसरे नम्बर पर रहे। पुस्तकालय मंत्री के पद पर भी समाजवादी छात्र सभा के अंगद यादव ने बाजी मारी, उन्हें कुल 966 वोट प्राप्त हुए। इस चुनाव में भी प्रत्याशियों द्वारा जमकर धनबल प्रयोग किया गया।
जानकारों की मानें तो इस चुनाव में तमाम प्रत्याशियों द्वारा कुल 50 लाख रूपये खर्चा हुए। मतदान से ठीक पहले एक आडियो रिकार्डिंग भी वायरल हुई, जिसमें एक खास पैनल के कुछ प्रत्याशियों द्वारा सीधे तौर पर वोट खरीदने के लिए मोटी रकम की पेशकश की जा रही थी।
Abvp ने आरोप लगाया कि कुछ खास पैनल के प्रत्याशी धनबल और बाहुबल के प्रयोग से चुनाव जीते हैं और इन्होंने वोटों की खरीद फरोख्त भी की है। जीते हुये प्रत्याशियों में ऐसे सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि कुछ लोगोंको जीत पच नही रही है । अभी तो ये जाँच का विषय है लेकिन ऐसे चुनावों में ऐसे घृणित कार्य आम बात हो गए हैं ।
कुलमिलाकर इस चुनाव परिणाम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में Abvp पैनल के ऊपर दबाव बढ़ा दिया है। आज काशी विद्यापीठ में मिली करारी हार के बाद संगठन के प्रति कार्यकर्ताओं का गुस्सा भी फूटा। कई कार्यकर्ताओं की मानें, तो इस हार के लिए संगठन के अंदर हुई भीतरघात जिम्मेदार है, जिसे अगर सही समय पर सुधार लिया जाता तो आज ऐसी करारी हार न मिलती। कुछ ने माना कि गलत तरीके से टिकट वितरण किया गया। सच्चाई चाहे कुछ भी हो लेकिन उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आ रहे छात्र संघ चुनावों के ऐसे परिणाम अभाविप और भाजपा के लिए ठीक नहीं, क्योंकि इसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों में देखने को मिल सकता है।
“कलाकार कभी मरता नहीं, वह हमेशा ज़िंदा दफनाया जाता है।” इस कथन को शत प्रतिशत सत्य साबित करने वाले एवरग्रीन सुपरस्टार देव आनंद की उपलब्धियां बताना, सूरज को दिया दिखाने के समान है। बॉलीवुड में कई हीरो आए और चले गए, लेकिन देव साहब के ज़िक्र के बिना हिंदी सिनेमा का इतिहास अधूरा है और हमेशा रहेगा।
देव आनंद का असली नाम धर्मदेव पिशोरीमल आनंद था। उनका जन्म 26 सितंबर, 1923 को अविभाजित पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुआ था।उन्होंने अंग्रेजी साहित्य में अपनी स्नातक की शिक्षा 1942 में लाहौर में पूरी की। देव को आगे पढ़ने की चाह थी पर पिताजी उन्हें नौकरी कर खुद कमाते देखना चाहते थे। इस जद्दोजहद में 1943 में सुनहरे सपने लिए मात्र 30 रुपये लेकर देव लाहौर से मुंबई पहुंचे। सपना बहुत बड़ा था और कुल पूँजी मात्र 30 रुपये!
देव के पैसे ख़त्म हो रहे थे और असल यात्रा शुरू भी न हुई थी। काफी मशक्कत के बाद उन्हें मिलिट्री सेंसर ऑफिस में लिपिक की नौकरी मिल गई। यहां उन्हें सैनिकों की चिट्ठियों को उनके परिवार के लोगों को पढ़कर सुनाना होता था। मिलिट्री सेंसर ऑफिस में देव आनंद को 165 रुपए मासिक वेतन मिलना था। इसमें से 45 रुपए वह अपने परिवार के खर्च के लिए भेज देते थे।
एक दिन उन्होंने एक सैनिक की चिट्ठी पढ़ी जिसमें उसने अपनी पत्नी को लिखा था, “जी करता है सब छोड़ छाड़ कर तुम्हारी बाँहों में आ जाऊँ।” बस, इस चिट्ठी ने देव साहब की ज़िन्दगी बदल दी। देव साहब ने भी सब छोड़कर अपने लक्ष्य की आगोश में जाने का निर्णय लिया, जो था बेहतरीन अभिनेता बनने का लक्ष्य। इसके तुरंत बाद वह अपने बड़े भाई चेतन आनंद के ज़रिये भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) से जुड़ गए। इस बीच देव आनंद ने नाटकों में छोटे-मोटे रोल किए और ऐसे शुरू हुआ उनका अभिनय का सफर।
हिंदी सिनेमा में तकरीबन छह दशकों तक दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाले सदाबहार अभिनेता देव आनंद को एक्टर बनने के लिए कई पापड़ बेलने पड़े। वर्ष 1945 में प्रदर्शित फिल्म ‘हम एक हैं’ से बतौर अभिनेता देवानंद ने अपने सिने कैरियर की शुरुआत की जो सफल नहीं रही। लेकिन इसी दौरान उनकी मुलाक़ात निर्देशक व अभिनेता गुरुदत्त से हुई और यहां हुई उनकी दोस्ती वर्ष 1951 में फिल्म ‘बाज़ी’ के रूप में धमाल मचा गई। वर्ष 1948 में कामिनी कौशल के साथ आई देवानंद की फिल्म ‘जिद्दी’ उनके फिल्मी कैरियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई थी। इस फिल्म की कामयाबी के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रख दिया और ‘नवकेतन बैनर’ की स्थापना की। बतौर निर्माता देवानंद ने कई फिल्में बनाईं। वर्ष 1970 में फिल्म ‘प्रेम पुजारी’ के साथ देव ने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रख दिया।
देव आनंद में जीवन से जुड़े कुछ यादगार किस्से-
देव आनंद प्रख्यात उपन्यासकार आर. के. नारायण से काफ़ी प्रभावित थे और उनके उपन्यास पर फ़िल्म बनाना चाहते थे। फिल्म शुरू भी हो गयी लेकिन कुछ खटपट के बाद फिल्म के निर्देशक ने काम छोड़ दिया।फिल्म इंडस्ट्री में भी बातें होने लगी कि देव साहब अपनी छवि को तोड़कर ऐसी फिल्म क्यों बना रहे हैं। लोगों का मानना था कि यह फिल्म उन्हें ले डूबेगी।
फिल्म अधर में थी, तभी देव साब के छोटे भाई विजय आनंद ने निर्देशन की बागडोर हाथ में ली। उस समय वे बहुत युवा थे और करीब करीब अनुभवहीन थे, लेकिन देव साहब को उस फिल्म और विजय पर पूरा भरोसा था।
वह फिल्म बनी और ऐसी बनी कि तब से लेकर आज तक इस फिल्म को ना सिर्फ देव साहब की सर्वश्रेष्ठ फिल्म कहा जाता है, बल्कि हिंदी सिनेमा की सबसे उम्दा फिल्मों में से एक माना जाता है। देव साहब की बहुत बड़ी गलती मानी जा रही यह फिल्म थी “गाइड”। देव आनंद की इस पहली रंगीन फिल्म में उनके जबर्दस्त अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फ़िल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया।
अपने दौर में अभिनय, अदा, खूबसूरती,रूमानियत व फैशन की मिसाल रहे देव आनंद को लेकर यूं तो कई किस्से मशहूर हैं, लेकिन सबसे खास उनके काले कोट पहनने से जुड़े किस्से हैं। देव आनंद सफेद कमीज़ व काले कोट में इस कदर फबते, कि लड़कियां उन्हें देखकर बेहोश हो जातीं। इसलिए एक दौर वह भी आया जब देव आनंद पर सार्वजनिक स्थानों पर काला कोट पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
वर्ष 2001 में देव आनंद को भारत सरकार की ओर से कला क्षेत्र (फ़िल्म जगत में योगदान) में पद्म भूषण सम्मान प्राप्त हुआ। वर्ष 2002 में उनके द्वारा हिंदी सिनेमा में महत्त्वपूर्ण योगदान को देखते हुए उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
भारत के बाहर जितनी प्रसिद्धि देव साहब को मिली, उतनी शायद ही किसी को मिली हो। चार्ली चैपलिन से लेकर फ्रैंक काप्रा और डी सिका तक सब उनके मुरीद थे। भारतीय सिनेमा के इस सदाबहार अभिनेता का लंदन में दिल का दौरा पड़ने से 3 दिसंबर 2011 को 88 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
हफ़्तों चले पारिवारिक ड्रामे के बाद सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आखिरी कैबिनेट विस्तार करते हुए, आज दागी पूर्व खनन मंत्री गायत्री प्रजापति सहित चार मंत्रियों को शामिल कर लिया। इसी क्रम में छह राज्य मंत्रियों को ‘पदोन्नत’ भी किया गया है। सबसे ख़ास बात यह है कि गायत्री प्रजापति वहीं हैं, जिन्हें अभी कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंत्री पद से हटाया था।
पारिवारिक दबाव के चलते आखिरकार अखिलेश को दोबारा गायत्री प्रजापति को मंत्रिमंडल में शामिल करना पड़ा। आज दोबारा शपथ लेने के बाद गायत्री प्रजापति ने तीन बार अखिलेश यादव के पैर छुए और इसके बाद सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह को दण्डवत प्रणाम किया।
आपको बता दें कि आज राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल राम नाईक ने गायत्री, मनोज पाण्डेय, शिवाकांत ओझा और जियादुद्दीन रिजवी को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। गौरतलब हो कि दो हफ्ते पहले बर्खास्त गायत्री को राज्य कैबिनेट में शामिल करने के फैसले को एक सामाजिक कार्यकर्ता ने हालांकि चुनौती दी थी। वहीं पहले बर्खास्त किए गए गायत्री प्रजापति दोबारा मंत्री बने तो मुलायम को ही भगवान बता दिया।
आज शपथ के बाद प्रजापति ने कहा, नेताजी को बधाई, मुख्यमंत्री जी को विशेष बधाई। नेताजी भगवान हैं। मुख्यमंत्री जी ने अन्याय के खिलाफ काम किया। मैं गरीब के घर पैदा हुआ हूं। मुझ पर विरोधियों ने झूठे आरोप लगाए हैं। फिर उन्होंने मुलायम के पैर तो छुए ही सीएम अखिलेश के पैर भी छुए। उन्होंने तीन बार अखिलेश के पांव छुए और मुलायम के पैर पर दंडवत लेट गए। वहीं मुलायम सिंह यादव ने मंत्रिमंडल विस्तार पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा सबको बधाईयां, मुझे उम्मीद है कि जनता की ईमानदारी से सेवा करेंगे।