भारतीय श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाले पाकिस्तानी गायक आतिफ असलम का 15 अक्तूबर को हरियाणा के गुड़गांव (गुरुग्राम) में होने वाला कंसर्ट रद्द कर दिया गया है। यह कार्यक्रम उरी हमले के मद्देनजर रद्द कर दिया गया है।
गुड़गांव (गुरुग्राम) के उपायुक्त टीएल सत्यप्रकाश ने एक बयान में कहा, “सशस्त्र बलों और सीमा पर तैनात सैनिकों की भावनाओं पर विचार करते हुए जिला प्रशासन ने कंसर्ट के आयोजक ‘कोन्सेप्ट एंटरेटनमेंट’ को आतिफ असलम का कसंर्ट टालने की सलाह दी है।” हालांकि जिला प्रशासन द्वारा यह कदम ‘अखिल भारतीय हिंदू क्रांति दल’ (एबीएचकेडी) की कड़ी आपत्ति के बाद उठाया गया।
एबीएचकेडी के राष्ट्रीय महासचिव राजीव मित्तल ने कहा कि सीमा पर सैनिक पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का शिकार बन रहे हैं, जबकि गुड़गांव प्रशासन आर्थिक लाभ के लिए उस देश से मेहमानों को आमंत्रित कर रहा है।
मित्तल ने कहा, “हम पाकिस्तानी अभिनेताओं की किसी फिल्म या कार्यक्रम का प्रदर्शन या आयोजन करने की इजाजत नहीं देंगे और इस बारे में प्रशासन को पहले ही से आगाह कर दे रहे हैं। हर समय, गुड़गांव जिला प्रशासन आतिफ असलम को यहां कंसर्ट करने के लिए बुलाता है। हम इसके खिलाफ हैं। अगर उनका कंसर्ट गुड़गांव में होता है, तो शहर में किसी भी अनहोनी के लिए जिला प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा। “
उल्लेखनीय है कि एबीएचकेडी ने बुधवार को सत्यप्रकाश को एक ज्ञापन देकर गुड़गांव में किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए 15 अक्तूबर को होने वाले आतिफ असलम के कंसर्ट को दी गई अनुमति को वापस लेने की मांग की थी।
भारत द्वारा पाकिस्तान को दिए गए मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) के दर्जे पर आज पुनर्विचार किया जायेगा। उरी हमलों जैसी पाकिस्तान की कई ओछी हरकतों के मद्देनजर भारत इस दर्जे को वापस लेने या इस विषय में पाकिस्तान को विश्व व्यापार संगठन में घसीटने के विकल्प पर भी विचार कर सकता है।
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि आज की बैठक में भारत इस मुद्दे पर पाकिस्तान को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में घसीटने पर विचार कर सकता है।
पुनर्विचार का यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उरी हमले के मद्देनजर लिया गया है। आपको बता दें कि भारत द्वारा मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्ज़ा पाकर इतरा रहे पाकिस्तान ने अपनी तरफ से भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा नहीं दिया है।
गौरतलब है कि भारत ने 1996 में पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा दिया था लेकिन पाकिस्तान ने भारत को यह दर्जा कभी नहीं दिया। पाकिस्तान ने इसके लिए दिसंबर 2012 की समयसीमा रखी थी, लेकिन अपनी ज़ुबान से फिर पलट गया।
टीवी शो ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ’ में अपने सांवले रंग का बेहुदा मज़ाक बनाये जाने से ख़फ़ा ‘पार्च्ड’ स्टार तनिष्ठा चटर्जी से कलर्स चैनल ने माफी मांगी है। तनिष्ठा द्वारा किए गए नाराज़गी भरे फेसबुक पोस्ट के बाद चैनल ने इस मामले को ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ’ के निर्माताओं के साथ बहुत गंभीरता से उठाया है। साथ ही कलर्स टीवी के एक प्रवक्ता ने तनिष्ठा के इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि जब उस एपिसोड का प्रसारण हो तो उसमें कुछ भी आपत्तिजनक न हो।
चैनल ने कहा, ‘‘हमारा इरादा यह कभी नहीं रहा और न ही शो के निर्माताओं का स्वभाव ऐसा है कि चुटकुलों या मज़ाक मस्ती में किसी को शर्मिंदा किया जाए। हमने क्रिएटिव टीम और प्रोडक्शन हाउस के साथ इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। अनजाने में यदि आपकी भावनाएं आहत हुई हैं तो उसके लिए हम माफ़ी मांगते हैं।”
तनिष्ठा ने इस प्रतिक्रिया पर जवाब दिया, “कलर्स टीवी आपके जवाब के लिए धन्यवाद, लेकिन यह मेरी व्यक्तिगत बात नहीं है। यह पूर्वाग्रहों की बात है।”
आपको बता दें कि तनिष्टा चटर्जी इस शो में फिल्म ‘पार्च्ड’ के प्रोमोशन के लिए गई थीं। तनिष्ठा ने अपने फेसबुक पोस्ट में नाराजगी जाहिर करते हुए बताया था कि कैसे वह टीवी शो ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ’ को बीच में ही छोड़कर चली गईं, क्योंकि उसमें उनके रंग को लेकर अपमानजनक मजाक (Roasting) किया गया।
उन्होंने फेसबुक पर लिखा,” मुझे इस पॉपुलर टीवी शो में बुलाया गया, जिसमें मैं अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘पार्च्ड’ की निर्देशक लीना यादव और साथी कलाकार राधिका आप्टे के साथ गई थी। मुझे कहा गया था कि इस शो में मेहमानों को ‘रोस्ट’ किया जाता है। ‘रोस्ट’ में हंसी मजाक करें, लेकिन किसी के रंग का मजाक कैसे उड़ा सकते हैं?”
तनिष्ठा ने आगे लिखा कि बदतमीज़ी की शुरुआत इससे हुई कि ज़रूर आपको जामुन बहुत पसंद होगा, कितना जामुन खाया आपने बचपन से.. मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं नेशनल चैनल पर बैठी हूं। क्या उनकी नज़र में यही कॉमेडी है? मैं इसे मजाक नहीं कह सकती। मैं वहां और देर बैठे नहीं रह सकती थी और मैंने उठकर जाने का निर्णय लिया।
आपको बता दें कि अपनी हालिया रिलीज़ फिल्म ‘पार्च्ड’ में तनिष्ठा ने सुरवीन चावला और राधिका आप्टे के साथ एक ग्रामीण महिला का किरदार निभाया है। इसमें उन्होंने विधवा मां का किरदार निभाया है, जो अपने बेटे के लिए दुल्हन खोज कर लाती है। इससे पहले तनिष्ठा ब्रेट ली के साथ ‘अनइंडियन’ में भी लीड रोल निभा चुकी हैं।
उरी हमले के बाद भले ही भारत ने पाकिस्तान पर किसी प्रकार की कोई सैन्य कार्रवाई न की हो, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में केंद्र सरकार द्वारा उठाये गए कड़े क़दमों के बाद से पूरी दुनिया में पाकिस्तान के लिए रवैया बदल गया है।
अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने पाकिस्तान के रुख की आलोचना की है। जिसमें उसने लिखा है कि पाकिस्तान लम्बे समय तक भारत के संयम को हल्के में नहीं ले सकता है। यदि पाकिस्तान मोदी के सहयोग के प्रस्ताव को नकारता है, तो वह पूरी दुनिया में एक अछूत देश बन जायेगा।
अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल ने यह भी लिखा है कि नरेंद्र मोदी फ़िलहाल संयम बरत रहे हैं। अगर पाकिस्तान मोदी के प्रस्ताव को ख़ारिज करेगा तो पहले से अछूत देश और अछूत हो जायेगा। अख़बार ने कहा है कि सीमा पार पाकिस्तान से भारत में हथियार और आतंकवादी भेजता रहेगा तो पीएम मोदी की कार्रवाई न्यायसंगत होगी।
आतंकवाद के मुद्दे पर नैतिकतापूर्ण व्यवहार करने के चलते भारत का सम्मानजनक दर्जा है। लेकिन पूर्व की सरकारों में इसे स्पष्ट रूप से दिखाने का साहस नहीं था।
समाचार पत्र ने कोई भी सैन्य कार्रवाई न करने के लिए पीएम मोदी की प्रशंसा की है। अख़बार ने कहा है कि हालाँकि, भारत ने सैन्य कार्रवाई नहीं की है। लेकिन भारत पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए संकल्पित है। 1960 में हुए सिन्धु जल समझौते को भी भारत रद्द कर सकता है। साथ ही पाकिस्तान से व्यापार में सबसे तरजीह राष्ट्र का दर्जा भी छीन सकता है। गौरतलब है कि पाकिस्तान को 1966 में यह दर्जा मिला था, जिसका प्रतिफल उसने आज तक नहीं दिया है।
उरी हमले के बाद भारत के दबाव से पाकिस्तान डर गया है। राजस्थान के जैसलमेर से सटे अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पाकिस्तान सैन्य अभ्यास में जुटा है। इस अभ्यास में पाकिस्तानी सेना के 15 हजार जवान और एयरफोर्स के 300 जवान शामिल हुए। यह अभ्यास 30 सितंबर तक चलेगा। पाकिस्तान ने इस अभ्यास को डेजर्ट वॉर गेम एक्सरसाइज का नाम दिया है। इस अभ्यास के बाद सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने अपनी सर्तकता बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी सेना की गाड़ियां, टैंकों और लड़ाकू विमानों की आवाज भारत में भी सुनाई दे रही है। बीएसएफ के जवान लगातार सीमा पर गश्त कर रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा अपनी ताकत को और मजबूत करने के लिए इस युद्धाभ्यास में सैनिकों की हौसला अफजाई करने के लिए कई पाक सेना के उच्चाधिकारी पहुंच रहे हैं।
उरी आतंकी हमले के बाद राजस्थान सीमा पर अब पाकिस्तानी स्ट्राईक कोर की वॉर गेम एक्सरसाइज हर मायने में काफी महत्वपूर्ण समझी जा रही है।
सामान्यतः पाकिस्तान द्वारा अक्टूबर माह में एक्सरसाइज़ शुरू की जाती है, लेकिन दोनों देशों के बीच उरी हमले के बाद बढ़े हुए तनाव के बीच एक माह पहले ही पाकिस्तानी सेना ने एक्सरसाइज शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि 18 सितंबर को जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना की छावनी पर आतंकियों ने हमला किया था। इस आतंकी हमले मेंं सेना के 18 जवान शहीद हो गए थे, जबकि 30 जवान भी घायल हो गए थे। इसके बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है।
बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने आज कहा कि भारत मे काम कर रहे पाकिस्तानी कलाकारों का उरी में सेना के शिविर पर हुये आतंकवादी हमले की निंदा न करना बहुत दुखद है।
अनुपम खेर ने कहा कि हम बहुत व्यावहारिक दुनिया में रहते हैं और भावनात्मक रूप से देश के सैनिकों के साथ जुड़े हुये हैं। मुझे लगता है कि सीमा पार के उन अभिनेताओं की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि उरी हमलों की निंदा करें, जिसमें हमारे देश के 18 जवान शहीद हो गये, लेकिन किसी भी पाकिस्तानी कलाकार से ऐसी प्रतिक्रिया नहीं मिली।
अनुपम खेर ने कहा कि मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप अपने देश की निंदा करें, वे वहां रहते है और उनके लिये अपनों की निंदा करना आसान नहीं होगा लेकिन पाकिस्तानी कलाकार हमले की निंदा तो कर सकते हैं।
हम अपने देश में उनका स्वागत करते हैं, उन्हें मंच देते हैं, वे यहां से पैसे कमा रहे हैं, लोकप्रिय हो रहे हैं। इससे मुझे या किसी को भी कोई शिकायत नही। शिकायत यह है कि आतंकवादी हमले में हमारे 18 जवान शहीद हो जाते हैं लेकिन फिर भी वे शांत हैं। मुझे लगता है कि अगर वे यहां है तो यह जरूरी है कि भारत और भारत के लोगों के प्रति संवेदनशील रहें।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा पाकिस्तानी कलाकारों को वापस पाकिस्तान चले जाने की धमकी पर और पाकिस्तानी अभिनेता फवाद खान के पाकिस्तान लौट जाने पर बॉलीवुड जगत से मिली जुली प्रतिक्रिया आ रही है। कुछ लोग पाकिस्तानी कलाकारों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं, तो कुछ यह तर्क दे रहे हैं कि कलाकारों को देश से भगाने से आतंकवाद कैसे ख़त्म होगा।
निर्देशक करण जौहर, जिनकी आगामी फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में फवाद मुख्य भूमिका में हैं, पहले ही अपना विरोध जाता चुके हैं। अब उनके समर्थन में फिल्मकार अनुराग कश्यप भी आगे आए हैं। अनुराग ने हैरानी जताई है कि पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध लगाकर आतंकवाद से किस तरह से मुकाबले की बात हो रही है।
कश्यप ने करण का समर्थन करते हुए संवाददाताओं से कहा, ”करण जौहर ने बहुत अच्छी चीज कही है। अगर आप फवाद खान को वापस भेजना चाहते हैं, तो ठीक है, लेकिन इसके बाद आप और कौन सा कदम उठाएंगे? आप मुझे पांच ऐसे कदमों के बारे में बताएं जो इसके बाद उठाया जाएंगे?’’
कश्यप ने पूछा, ”क्या उन्हें वापस भेजकर समस्या सुलझ जाएगी? उन्हें वापस भेजने के बाद आपका अगला कदम क्या होगा? कम से कम मुझे बताएं कि अगले पांच कदम कौन से होंगे।”
इलाहाबाद। पूरब का आक्सफोर्ड कहा जाने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय इन दिनों चारों तरफ से छात्र संघ चुनावों के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है। महज कुछ घण्टे बाद देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा के केंद्र को अपना नया छात्र संघ पैनल मिल जायेगा। सबसे ख़ास बात ये है कि इस विवि ने देश को कई प्रधानमन्त्री सहित सैकड़ों बड़े नेता दिए हैं, लेकिन आज की स्थिति अब वैसी नहीं रही।
जब से विवि को केंद्रीय विवि का दर्जा प्राप्त हुआ है, तब से शिक्षा के साथ साथ राजनीती की प्राथमिक पाठशाला का स्तर भी गिरा है। आज विवि, देश के प्रमुख 50 शिक्षण संस्थानों में अपनी जगह नहीं बना पा रहा है और अगर राजनीति की प्राथमिक पाठशाला ‘छात्र संघ’ की बात करें, तो स्थिति और भी दयनीय हो चुकी है। पहले चुनाव छात्रों की प्रमुख समस्यायों पर आधारित एजेंडों के दम पर लड़ा जाता था, लेकिन आज जातीय-क्षेत्रीय और धार्मिक समीकरण परिणाम को जबरदस्त तरीके से प्रभावित करते हैं।
पिछले कई चुनावों में स्पष्ट रूप से देखा गया है कि चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशी जोर शोर से छात्र संघ चुनाव को एक पर्व की तरह लेते हैं और शुरू शुरू में तो सभी संभावित प्रत्याशी कैम्पस की प्रमुख समस्यायों पर ही छात्रों से संवाद स्थापित करना शुरू करते हैं। लेकिन जैसे जैसे मतदान का दिन पास आता है, यही मुद्दे हवा होते जाते हैं और अंत में जातीय, क्षेत्रीय और धार्मिक समीकरण ही जीत के खाने में फिट बैठते हैं। छात्र संघ चुनाव के सबसे महत्वपूर्ण अध्यक्ष पद पर इस बार कुल 9 उम्मीदवार, उपाध्यक्ष पद पर 8 उम्मीदवार, महामन्त्री पद पर 6 उम्मीदवार, संयुक्त मंत्री पद पर 8 उम्मीदवार और सांस्कृतिक सचिव पद पर 9 उम्मीदवार चुनावी मैदान में भाग्य आजमाने उतरे हैं। इन सभी में सबसे खास महत्वपूर्ण पद अध्यक्ष का होता है, जिस पर सभी की नजरें टिकी रहती हैं।
चन्द घंटे बाद दक्षता भाषण होगा और उसके बाद चुनावी परिणाम की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जायेगी। आइये समझने का प्रयास करते हैं कि आखिर इस बार के चुनाव में कौन-कौन से फैक्टर मुख्य भूमिका निभा सकते हैं –
जातीय फैक्टर-
विवि के छात्र संघ चुनावों के इतिहास में अध्यक्ष पद पर लड़ाई हमेशा ब्राह्मण बनाम ठाकुर ही रही है और मौजूदा समय में भी कुछ ऐसी हे तस्वीर देखने को मिलती है। पिछले कई वर्षों से चुनाव में समीकरण इतना प्रभावी हो गए हैं कि अब तो तमाम पैनल भी इस फैक्टर को ध्यान में रखकर ही अपना उपयुक्त उम्मीदवार मैदान में उतारते हैं। जानकारों की मानें तो इस बार भी असल लड़ाई ब्राह्मण और ठाकुर प्रत्याशियों में ही है। इस लिहाज से अगर अध्यक्ष पद पर देखा जाये तो मैदान में ब्राह्मण, ठाकुर और यादव जाति से कई अलग अलग उम्मीदवार मैदान में हैं।
अगर जातीय फैक्टर के चश्मे से इस बार के चुनाव को देखें तो जानकारों के मुताबिक अध्यक्ष पद पर दो उम्मीदवार टक्कर में नजर आते हैं। पहले उम्मीदवार हैं abvp पैनल से ब्राह्मण उम्मीदवार रोहित मिश्रा और दूसरे हैं युवा छात्र अधिकार मंच से ठाकुर उम्मीदवार अतुल नारायण सिंह। सबसे खास बात यह है कि पिछले कई चुनावों से इस पद पर ठाकुरों का वर्चस्व रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि आखिर ये फैक्टर इस चुनाव में कितना प्रभाव डाल पायेगा!
धार्मिक फैक्टर-
अगर इस फैक्टर की बात करें तो अभी तक तो इसका प्रभाव कम ही देखने को मिला है। यानि कि कुछ मात्रा में धार्मिक फैक्टर भी नजर आता है, जो चुनावी परिणाम को प्रभावित करता है।
क्षेत्रीय फैक्टर-
अगर इस फैक्टर के मुताबिक मौजूदा चुनाव का आंकलन करें, तो सबसे चौंकाने वाली स्थिति ये है कि विवि के इतिहास में अब तक जिस फैक्टर ने चुनावों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, वो क्षेत्रीय फैक्टर ही है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों में क्षेत्रीय स्तर पर दो क्षेत्रों का प्रमुख प्रभाव देखने को मिलता है। पहला ‘पूर्वांचल’ और दूसरा ‘बुन्देलखण्ड’। सबसे ज्यादा प्रभाव पूर्वांचल का देखने को मिलता है, लेकिन पिछले कुछ समय से बुन्देलखण्ड का भी प्रभाव बढ़ा है। जानकारों के मुताबिक इस चुनाव में भी क्षेत्रीय फैक्टर सबसे अहम रोल अदा करेगा ।
पैनल का फैक्टर-
राजनीति की प्राथमिक पाठशाला कहे जाने वाले छात्र संघ चुनावों में विभिन्न पार्टियों के छात्र संघठनों का भी काफी अहम रोल रहता है। इन तमाम छात्र संगठनों द्वारा जाँच पड़ताल के बाद सभी पदों पर उम्मीदवार चुनकर सभी को एक पैनल के रूप में मैदान में उतारा जाता है। पिछले चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पैनल ने तीन पद जीते थे और एक पद समाजवादी छात्र सभा के खाते में गया था। जानकारों की मानें तो सभी पैनलों का अपना एक बंधा हुआ वोट बैंक होता है।
अगर विद्यार्थी परिषद की बात करें तो, दिल्ली विश्वविद्यालय में जबरदस्त जीत मिलने के बाद तुरन्त जेएनयू में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इसके बाद अभी हाल में ही महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्र संघ चुनावों का परिणाम आया, जिसमें अभाविप को सिर्फ एक पद पर ही जीत हासिल हुई और बाक़ी सभी पदों पर समाजवादी छात्र सभा ने कब्जा कर लिया। इन सभी परिणामों पर अगर गौर किया जाए तो अभाविप के लिए इविवि के छात्र संघ चुनावों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड सकता है, क्योंकि टिकट बंटवारें के समय कुछ ऐसे उम्मीदवारों को टिकट नही दिया गया, जो वर्षों से संगठन की सेवा में लगे थे।
महिला छात्रावास के वोटों का फैक्टर-
इलाहाबाद विवि के छात्र संघ चुनावों में महिला छात्रावास के वोट चुनाव परिणाम में काफी असर डालते हैं। सबसे बड़ी बात ये भी है कि उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा मशक्कत भी इन्ही वोटों के लिए करनी पड़ती है। पिछले चुनाव में महिला छात्रावास के वोटों का ही असर था कि विवि इतिहास में पहली बार आजादी के बाद एक महिला अध्यक्ष पद पर काबिज हुई ।
किसी को नहीं पता कि इन चुनावों का भविष्य क्या होगा, लेकिन वर्तमान तो सबके सामने है। अगर छात्र संघ -2017 के लिए अध्यक्ष पद पर कब्जा ज़माने वाले तीन संभावित उम्मीदवारों की बात करें, जो एक दूसरे को जबरदस्त टक्कर दे रहे हैं वो हैं – रोहित मिश्रा, अतुल नारायण सिंह और अजीत यादव ‘विधायक’।
मुकेश अंबानी की नई कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम और अनिल अंबानी की कंपनी रिलांयस कम्युनिकेशंस के बीच अपने मोबाइल स्पेक्ट्रम बांटने पर सहमति बन गई है। रिलायंस कम्युनिकेशन के कर्ता धर्ता अनिल ने अपनी कंपनी और अपने बड़े भाई मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो के साथ वर्चुअल मर्जर (आभासी विलय) की घोषणा की है। मुंबई के बिड़ला मातोश्री में अपनी चार कंपनियों की सालाना आम बैठक के दौरान शेयरहोल्डर्स को संबोधित करते हुए अनिल ने यह बात कही।
एजीएम में बोलते हुए अनिल ने बताया कि उनकी कंपनी ने 4जी सेवाओं को शुरू करने के 90 दिनों के भीतर 10 लाख उपभोक्ता जोड़ लिए हैं। उन्होंने कहा, ”हम दोनों भाई अपने पिता के सपनों को पूरा करने के लिए एक साथ काम कर रहे हैं।”
अनिल ने बताया, ”हमारे पास 2जी, 3जी और 4जी स्पेक्ट्रम है, साथ ही रिलायंस जियो के साथ स्पेक्ट्रम ट्रेडिंग और समझौते भी किए गए हैं। सभी व्यवहारिक उद्देश्यों के लिए हमने रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस जियो के बीच आभासी विलय पूरा कर लिया है।” जानकारी के मुताबिक रिलायंस कम्युनिकेशंस के मोबाइल टावर इस्तेमाल करने के लिए जियो ने पहले ही समझौता कर रखा है। गौरतलब है कि धीरूभाई के निधन के बाद कई साल तक अनिल और मुकेश के बीच अनबन रही थी।
एयरसेल के रिलायंस कम्युनिकेशंस में विलय के बाद, अंबानी ने कहा कि अब उनकी कंपनी देश के 12 सर्कलों में टॉप ऑपरेटर बन जाएगी। जियो के साथ हुए इस समझौते से रिलायंस कम्युनिकेशंस को लागत कम करने में मदद मिलेगी। जहां अन्य टेलिकॉम कंपनियों को बाजार में बने रहने के लिए स्पेक्ट्रम पर भारी खर्च करना पड़ेगा, अनिल अंबानी ने दावा किया कि वह अपनी कंपनी पर भारी कर्ज को साल भर के भीतर ही 75 प्रतिशत से ज्यादा कम कर लेंगे।
आपको बता दें कि आज की एनुअल जनरल मीटिंग में अनिल अंबानी ने अपने बेटे अनमोल को कंपनी का नया डायरेक्टर बनाने की भी घोषणा की। अनिल अंबानी ने कहा कि उनके बेटे के “अनमोल प्रभाव” से कंपनी के स्टॉक में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह तरक्की आगे भी जारी रहेगी।
उरी हमले के बाद भारत द्वारा उठाये जा रहे कड़े कदमों से पाकिस्तान झल्ला गया है। भारत द्वारा सिंधु समझौते की समीक्षा किए जाने के बाद पाक ने इस मामले में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस जाने की धमकी दी है। पाकिस्तान का मानना है कि समझौते को एकतरफा तौर पर रद्द करना पाकिस्तान और इसकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी होगी।पाकिस्तान के वरिष्ठतम राजनयिक सरताज अजीज ने दावा किया कि अगर भारत ने 56 वर्ष पुरानी सिंधु जल संधि का उल्लंघन किया तो इस मामले को लेकर पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) जाएगा। साथ ही अजीज़ ने कहा कि समझौता रद्द करने की भारत की कार्रवाई को दोनों देशों के बीच युद्ध की कार्रवाई के तौर पर लिया जा सकता है।
नेशनल एसेंबली को संबोधित करते हुए सरताज अजीज ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत भारत खुद को समझौते से अलग नहीं कर सकता है। अजीज ने दावा किया कि यह संधि कारगिल और सियाचिन युद्ध के दौरान भी रद्द नहीं हुई थी।
अजीज़ ने कहा, “इस भारतीय कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय शांति का उल्लंघन माना जा सकता है और इस तरह पाकिस्तान एक मज़बूत वजह लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रूख कर सकता है।”
बता दें कि हमेशा की तरह उरी हमले जैसी पाकिस्तान की ओछी हरकत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 56 वर्ष पुराने इस सिंधु जल समझौते की कल एक बैठक के दौरान समीक्षा की थी। इस दौरान यह फैसला किया गया कि भारत झेलम सहित पाकिस्तान नियंत्रित नदियों के जल का, बंटवारा समझौते के मुताबिक ‘अधिकतम दोहन’ करेगा।