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Tuesday, August 4, 2026
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कोरोना संकट: जब महिला को मजबूरन बेचना पड़ा मंगलसूत्र

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

कोरोना ने सबकी मुसीबतें बढ़ा दी हैं। देश में कोरोना के मामले 2 लाख तक पहुंचने वाले हैं, वहीं लॉकडाउन ने में दिहाड़ी मजदूरी पर काम करने वाले लोगों की मुसीबतें भी काफी बढ़ा दी हैं।

काम न होने के साथ-साथ आर्थिक तंगी और संसाधनों की कमी की वजह से प्रवासी मजदूरों को कई किलोमीटर पैदल चलकर अपने-अपने घर वापस जाना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र आदि जगहों से मजदूर अपने घर लौट रहे हैं।

ऐसा करते वक्त बहुत से लोगों ने अपनों को भी खो दिया है। इसी बीच हाल ही में एक मामला सामने आया है, जहां एक महिला को अपने जेवर बेचने पड़े ताकि वह वापस अपने घर जा सके। 3 प्रवासियों को बेंगलुरु से अपने घर कटक जाना था और इसमें एक जोड़ा भी शामिल था, इसके लिए उन्हें साइकिल की जरूरत थी लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। इस वजह से महिला को 15,000 रुपये में अपना मंगलसूत्र बेचना पड़ा।

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, ‘मंगलसूत्र बेचकर मिले पैसों से उन्होंने दो साइकिल खरीदी और अपनी लंबी यात्रा शुरू की’ इस बारे में बताते हुए चंदन जेना ने कहा, ‘हमने पिछले 2 महीनों से पैसे नहीं कमाएं और हमारा सारा पैसा खत्म हो गया, इस वजह से आखिर में मेरी पत्नी को अपना मंगलसूत्र बेचना पड़ा, ताकि हम घर वापस जा सकें।

चंदन और उसके दोस्त ने 5-5 हजार की दो साइकिल खरीदी और अपनी लंबी यात्रा शुरू कर दी, इसके बाद उन्हें कटक में कुछ सोशल वर्कर्स मिले, जिन्होंने उन्हें खाना खिलाया और साथ ही उनके घर भद्रक तक भी पहुंचाया।

बोलती तस्वीरें- “उड़ान (1989)”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

हमारे देश में, नारी सम्मान की अनेक कथाएं हैं और उनके महत्व की तो इतनी बातें हैं कि आज की स्थितियों में, सहज इन वर्णनों पर विश्वास कर पाना कठिन सा लगता है। आज भी तथाकथित कवि सम्मेलनों में, महिलाओं के ऊपर जुमले कह कर, छुटभैये कवियों को ठहाके लगाते देखा जा सकता है। पिछले कुछ समय में जो हिंसात्मक प्रवृत्ति, महिलाओं के प्रति देखने को मिली है, वो समाज के लिए अत्यंत लज्जाजनक है। इसके लिए पुरूषों को तो सजग होना ही पड़ेगा, लेकिन साथ-साथ, प्रस्तुतियों के सशक्त माध्यमों, जैसे टेलीविज़न और सिनेमा को और स्वयं महिलाओं को कामुकता दर्शाने का माध्यम मात्र बनने से भी बचना होगा, क्योंकि सृष्टि का सृजन भले ही ईश्वर ने किया हो, उसे बसाया स्त्री ने ही है और सुन्दर भी बनाया है।

सिनेमा और टेलीविज़न का बहुत गहरा प्रभाव जनमानस पर, हमारे देश में पड़ता है और इसी का ध्यान रखते हुए, 80 के दशक में टेलीविज़न पर ऐसे धारावाहिक प्रस्तुत किए गए, जिन्होंने न केवल महिलाओं को प्रेरित किया, उन्हें सजग भी बनाया। 1985 में धारावाहिक “रजनी” से ये शुरू हुआ और 1989 में, इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए, एक नई प्रस्तुति हुई, जिसे हम आज भी याद करते हैं, और इसका नाम था “उड़ान”।

ये धारावाहिक, कई अर्थों में विशेष था। इसकी पटकथा, कहानी और निर्देशन, कविता चौधरी के ज़िम्मे था और वे ख़ुद ही धारावाहिक की मुख्य पात्र भी थीं। इस धारावाहिक की कहानी, कंचन चौधरी भट्टाचार्या जी के जीवन पर आधारित थी, जो कि कविता चौधरी की बड़ी बहन और देश की प्रथम महिला DGP थीं। इस धारावाहिक में कविता चौधरी (कल्याणी सिंह) की कहानी है जो कि सभी विषम परिस्थितियों से लड़ती हुई, IPS ऑफिसर बनती हैं। विक्रम गोखले ने इनके पिता की भूमिका निभाई।

“यह धारावाहिक इस लिए भी बहुत ख़ास है, क्योंकि इसमें शेखर कपूर जैसे फ़िल्मकार ने भी भूमिका निभाई और अखिलेन्द्र मिश्रा, जो कि 90 के दशक से लेकर अब तक कई अविस्मरणीय किरदारों में, टेलीविज़न और फ़िल्मों में ख्याति अर्जित करते रहे हैं, पहली बार दर्शकों को दिखें। यह उनका पहला धारावाहिक था। उनका किरदार ठाकुर हृदयपाल सिंह का था, जो खलनायक था।”

सतीश कौशिक जैसे दिग्गज अभिनेता भी इस धारावाहिक में थे। इनके अलावा, उत्तरा बाओकर, संदीप बसवाना, डॉ० अनिल रस्तोगी और सूरज थापर जैसे कलाकारों के सधे हुए अभिनय ने भी इसे सजाया। कविता चौधरी (कल्याणी सिंह) के बचपन से उनके बड़े होकर सफल होने तक की कहानी को इस धारावाहिक में दिखाया गया। कहानी बताने की इस शैली को ‘Bildungsroman’ कहते हैं।

इस धारावाहिक में एक अधिकारी के ऐसे व्यवहार को दिखाया गया, जिसमें जन कल्याण की भावना है और जो अपना मानवीय पक्ष, हमेशा प्रमुख रखता/रखती है।

उड़ान के एक दृश्य में ‘शेखर कपूर’ और ‘कविता चौधरी’

ये धारावाहिक इतना प्रसिद्ध हुआ कि उस समय की पत्रिकाओं और अख़बारों ने कई बार ये लिखा कि अधिकारियों को इस धारावाहिक से व्यवहार कुशलता सीखनी चाहिए।

इस धारावाहिक का कला निर्देशन, सुब्रतो घोष ने किया और इसके निर्माता, मदन मोहन एवं देव भट्टाचार्या थे। धारावाहिक का एक टाइटल ट्रैक था, जो उस समय में प्रचलित, सिल्वेस्टर स्टैलोन की “रैम्बो” के जैसा ही प्रेरणादायक था। ये संगीत शारंग देव ने दिया था।

अखिलेन्द्र मिश्र (फ़ाइल फ़ोटो)

इस धारावाहिक के प्रसारण के बाद बहुत सी लड़कियों ने एक साहसिक स्वप्न देखना शुरू किया और अपना जीवन संवारा।

आज भी ऐसी प्रस्तुतियों की आवश्यकता है ताकि समाज के लोग, विशेषकर महिलाएं ये समझें और जानें कि रेत-घड़ी के आकार के अलावा भी उनके कई वर्णन और अर्थ हो सकते हैं और कपड़ों के छोटा-बड़ा होने को लेकर किए जाने वाले शोर को क्रांति और अधिकार की लड़ाई नहीं कहते, उनके सपने और उसके लिए की जाने वाली तपस्या ही संघर्ष है और वही वांछित क्रांति का शंखनाद भी।

“उड़ान” को एक शानदार और सार्थक धारावाहिक के रूप में हमेशा याद रखा जाएगा।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

“निर्मल पाण्डेय स्मृति ऑनलाइन फ़िल्म फेस्टिवल 2020”: 10 अगस्त को होगा आगाज़

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

‘ऋषिमम प्रोडक्शन’ एवं उनके सहयोगी (एसोसिएट पार्टनर) ‘चम्बल सिने प्रोडक्शन’ के द्वारा अभिनेता निर्मल पाण्डेय की स्मृति में ऑनलाइन लधु व वृत फ़िल्म फेस्टिवल का आयोजन हो रहा है।

आज जाने माने फ़िल्म व टेलीविजन निर्देशक अनिल दुबे ने फ़िल्म फेस्टिवल से सम्बन्धित पोस्टर, तिथियों की आधिकारिक घोषणा, फेसबुक पेज आदि का शुभारंभ फेस्टिवल के संस्थापक व निदेशक अनिल दुबे (निर्देशक फ़िल्म व टेलीविजन) ने करते हुए कहा “निर्मल पाण्डेय बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता थे, जिन्होंने रंगमंच के साथ साथ फ़िल्म इंड्रस्ट्री में बहुत ही उल्लेखनीय काम किये। अच्छे कलाकार होने के साथ ही वो अच्छे गायक भी थे। सबसे बड़ी बात वो एक ज़िंदादिल इंसान थे। स्व. निर्मल पाण्डेय की याद में उनके जन्मदिन 10 अगस्त को “निर्मल पाण्डेय स्मृति शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 2020″ का ऑनलाइन आयोजन पहली बार होने जा रहा है।”

महत्वपूर्ण तारीखें:

  • फ़िल्म सबमिशन- 15 से 30 जून 2020 तक 
  • फ़िल्म स्क्रीनिंग- 7 से 9 अगस्त 2020 तक 
  • ऑनलाइन पुरूस्कार वितरण– 10 अगस्त 2020 को

अनिल दुबे के अनुसार, ‘इस फेस्टिवल को करने के पीछे ये उद्देश्य है कि निर्मल भाई हमेशा नई प्रतिभाओं की मदद करते थे और वो चाहते थे कि नई प्रतिभाओं को आगे लाना चाहिए। इस फेस्टिवल के माध्यम से हम उनके इस सपने को साकार करने का प्रयास करेंगे।’

फ़िल्मकार ‘अनिल दुबे’

इस फेस्टीवल के ज्यूरी जज डॉ कुमार विमलेन्दु जी (जाने माने लेखक, साहित्कार और शिक्षाविद) , सुनील मिश्रा जी (समालोचक : फ़िल्म और संस्कृति), आरिफ शहडोली जी (अभिनेता एवं निर्देशक) और अशोक मेहरा जी (अभिनेता एवं निर्देशक) है।’

नवप्रवाह के स्तंभकार व जाने-माने साहित्यकार ‘डॉ.कुमार विमलेन्दु सिंह’ भी होंगे इस फेस्टिवल के जज

फेस्टिवल के सह संस्थापक एवं फेस्टिवल सहायक रवीन्द्र चौहान ने कहा “यह फ़िल्म फेस्टिवल अभी ऑनलाइन है। भविष्य में इसे ऑफलाइन कर अन्य प्रांतों में करने की योजना है,,इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में कला सिनेमा को विकसित करना है। शीघ्र ही हम अपने फेस्टिवल के मुख्यातिथि के नाम की घोषणा करेगें।

“फेस्टीवल मैनेजर व संस्थापक सदस्य कनुप्रिया ने बताया ” इस फेस्टिवल में हम चुनी हुई शॉर्ट फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को डिजिटल प्रदर्शन के साथ सर्टिफिकेट देगें। इसके अतिरिक्त हम फिल्म से जुड़ी किसी एक हस्ती को लाईफटाईम एचीवमेंट अवॉर्ड के सर्टिफिकेट से सम्मानित करेंगे। फिल्मों की स्क्रीनिंग 7,8 व 9 अगस्त को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी। 10 अगस्त को विजेताओं के नाम घोषित किये जायेगें। फ़िल्म एन्ट्री निःशुल्क है।”

निर्मल पाण्डेय स्मृति ऑनलाइन फ़िल्म फेस्टीवल 2020 में संस्थापक सदस्य व सलाहकार मिथलेश पाण्डेय, टेक्निकल हेड ऋत्विक ऋषभ, मीडिया हेड कविता गाँधी, प्रोग्राम सहायक प्रशान्त पचौरी, डिज़ाइन कंसलटेंट ईशा दुबे सहयोगी की भूमिका निर्वाह कर रहे है।

मनोज तिवारी अध्यक्ष पद से हटाए गए, आदेश गुप्ता सम्भालेंगे कमान

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com
भारतीय जनता पार्टी ने दो प्रदेशों में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने मनोज तिवारी को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर आदेश गुप्ता को कमान सौंपी है। इस सम्बंध में पार्टी के महासचिव अरुण सिंह ने आधिकारिक पत्र जारी कर इसकी जानकारी दी।
छत्तीसगढ़ में भी बदले गए प्रदेश अध्यक्ष-
पिछले कुछ समय से राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा थी कि दिल्ली प्रदेश में भाजपा आलाकमान कुछ फेर-बदल कर सकते हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के बीजेपी अध्यक्ष को भी हटा दिया गया है। उनकी जगह पर विष्णुदेव साय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है।
मणिपुर में भी नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की गई है। अब एस टिकेंद्र सिंह के हाथों में मणिपुर बीजेपी की कमान दी गई है। तीनों प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के निर्देश पर हुई।

बोलती तस्वीरें- “मुंगेरीलाल के हसीन सपने (1989)”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

अचेतन मन में जब दमन की गई इच्छाएं होती हैं और समाज की नियमावली या स्वयं की अक्षमता के कारण कोई मनुष्य अपनी इच्छाएं दबा लेता है, तो वे मरती नहीं। स्वप्न में मस्तिष्क उन अतृप्त कामनाओं की पूर्ति करवाता है। महान ऑस्ट्रियन मनोवैज्ञानिक सिग्मंड फ़्रॉयड ने इसे Wunscherfullung कहा, जिसे अंग्रेज़ी में wish fulfillment  भी कहते हैं। इस मनोवैज्ञानिक तथ्य का प्रयोग हास्य प्रस्तुति में कर पाना, कलात्मकता के शिखर पर ही संभव है और इस प्रयोग के सफलता के बारे में शंका का बना रहना भी स्वभाविक है। लेकिन ऐसी सभी शंकाओं को दरकिनार करते हुए दूरदर्शन ने इस प्रयोग के प्रस्तुति की सहमति दी और अपनी कहानी नीरज कुमार ने पूरे भारत को सुनाई, इस कहानी का नाम था, “मुंगेरीलाल के हसीन सपने” और ये साल था, 1989।

बतौर मुंगेरीलाल, ‘रघुबीर यादव’

“मुंगेरीलाल के हसीन सपने” दूरदर्शन पर धारावाहिक के रूप में प्रसारित किया गया। ये धारावाहिक, तत्कालीन समाज पर करारा व्यंग्य था और इसके मुख्य पात्र थे रघुबीर यादव (मुंगेरीलाल), जो कि बिहार के मुंगेर ज़िले से रोज़गार के सिलसिले में दिल्ली आ बसे थे।  रघुबीर यादव (मुंगेरीलाल), तीन विषयों ( साहित्य, संस्कृत और दर्शनशास्त्र में M.A. थे, और उन्हें कोई ढंग की नौकरी नहीं मिली थी। प्रतिभाओं के हनन पर ये खड़ा व्यंग्य प्रहार था। इनके ससुर बजरंगीलाल (प्यारे मोहन सहाय) ने सिफ़ारिश से, इनकी नौकरी, वानर छाप वनस्पति कंपनी में लगा दी। यहाँ भी इनका शोषण होता रहा या ये कहना भी ठीक होगा कि ये शोषण करवाते रहे।

“शोषित जब प्रतिकार नहीं कर पाता, तो उसके पास काल्पनिक प्रतिशोध के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं बचता। यही, मुंगेरीलाल का भी रास्ता था। अपने ऊपर हो रहे व्यवहार का प्रतिशोध वे अपने सपनों में लेते थे और उनकी कनखियों के साथ वे सपनों की दुनिया में प्रवेश पा जाते थे। इनके हर सपने में, इनके ससुर, इनकी पत्नी, इनकी कम्पनी का मालिक और ऑफिस के सारे लोग होते थे, जिनपर ये सवार होकर, उन्हें दंडित करते थे। सपनों में सफलता का पूर्ण स्वाद चखने के पहले ही इनकी पत्नी इनके सपने तोड़ देती थीं।”

इसका शीर्षक गीत, अशोक चक्रधर और नीरज कुमार ने बनाया था और बड़े सीधे बोल थे, “सपनों के दाम नहीं, सपनों के नाम नहीं, सपनों के घोड़ों पर किसी का लगाम नहीं।” इस धारावाहिक में कला निर्देशन प्रभात झा ने किया था। पटकथा और संवाद, मनोहर श्याम जोशी ने लिखा था और संपादन और निर्देशन, प्रकाश झा ने किया था।

प्रकाश झा

रघुबीर यादव और प्यारे मोहन सहाय के अलावा, रूमा घोष और कामिया मल्होत्रा का भी सधा हुआ अभिनय था। इस धारावाहिक के कुल 52 एपिसोड प्रसारित किए गए।

हर जगह अक्षम और दुर्बल व्यक्ति प्रताड़ना सहता है और प्रतिरोध नहीं कर पाता। मुंगेरीलाल सपने देखता था और प्रतिशोध (काल्पनिक) लेता था लेकिन अपनी ज़िम्मेदारियों से बंधा हुआ, अपना जीवन चुपचाप जीता था।  आज के दौर के लोग इन कल्पनाओं की प्रस्तुति सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर करते हैं और अपनों के बीच इन कल्पनाओं को कहते भी हैं और इनकी मान्यता बनाए रखने के लिए कई अभ्यास भी करते हैं। सब स्थितियां यथावत बनी हुई हैं आज भी, बस कुंठा और झूठ थोड़ा ज़्यादा बढ़ गया है।

“मुंगेरीलाल के हसीन सपने”, उस समय की निश्छल दुनिया और सादा जीवन दिखाने वाला एक अविस्मरणीय धारावाहिक है।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, फ़िल्म समालोचक, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

CII अधिवेशन: पीएम मोदी ने देश के विकास को लेकर कही ये बड़ी बात

बिज़नेस डेस्क | navpravah.com
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उद्योग संघ सीआईआई के वार्षिक अधिवेशन को सम्बोधित किया। अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत निश्चित रूप से अपनी आर्थिक वृद्धि दोबारा पा लेगा, क्योंकि देश ठोस सुधारों की राह पर है और हम सुधार-प्रक्रिया को जारी रखेंगे।
सीआईआई के वार्षिक अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार ने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए कठोर कदम उठाए हैं और साथ ही अर्थव्यवस्था का भी ध्यान रखा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को विकास के रास्ते पर वापस लाने के लिए इच्छाशक्ति, समावेश, निवेश, बुनियादी ढांचा और नवाचार महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए सुधार कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है। हमारे लिए सुधार व्यवस्थित, योजनाबद्ध, एकीकृत, आपस में जुड़ी हुई और भविष्य को ध्यान में रखकर की गई प्रक्रिया है।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पष्ट किया कि ‘‘एक तरफ हमें अपने लोगों के जीवन को सुरक्षित करना होगा और दूसरी तरफ हमें अर्थव्यवस्था को स्थिर करना होगा और अर्थव्यवस्था को गति देनी होगी।” मोदी ने कहा कि भारत अब लॉकडाउन से आगे बढ़कर अनलॉक के पहले चरण में प्रवेश कर चुका है। अनलॉक चरण-1 ने अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से को फिर खोल दिया है।”

Corona: संक्रमण की रफ़्तार हुई तेज़, देश में लगभग दो लाख मामले

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

24 घंटों के दौरान देश में कोरोना वायरस के आठ हजार से अधिक नये मामले दर्ज हुए हैं, अब तक कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या २ लाख के करीब पहुंचने वाली है, अब तक इस वायरस से मरने वालों की संख्या 5598 हो गई है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 8171 नए मामले सामने आए हैं और 24 घंटों में 204 लोगों की मृत्यु हो गई है। अब तक कुल देश में 95527 लोगों ने कोरोना वायरस से जंग भी जीती है। महाराष्ट्र इस महामारी से देश में सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। राज्य में पिछले 24 घंटों में 2358 नए मामले सामने आए हैं और 76 लोगों की मौत हुई है।

वहीं दिल्ली में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 20 हजार पार कर गया है, दिल्ली में बीते 24 घंटे में कोरोना के 990 नए मामले सामने आए हैं। दिल्ली सरकार की तरफ से कल शाम जारी आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में अभी कोरोना संक्रमण के 20834 मामले हैं और अब तक 523 लोगों की इससे मौत हो चुकी है, वहीं, पिछले 24 घंटों में 268 मरीज ठीक भी हो चुके हैं।

Input: Saumya Kesarwani

Cyclone Nisarga: रेड अलर्ट पर मुंबई, 100 किमी. प्रति घंटे की रफ़्तार से चल सकती हैं हवाएं

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में चक्रवात निसर्ग बुधवार तीन जून को दस्तक दे सकता है। एहतियातन सरकार ने मुंबई और आस-पास के जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है और एनडीआरएफ की टीम ने पालघर तटीय इलाकों पर दलों को तैनात कर दिया हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये राज्य की तैयारियों का जायजा लिया है।

एनडीआरएफ ने खतरे की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले जिलों में नौ दल तैनात किये गए हैं। तीन दल मुंबई में, दो पालघर, एक ठाणे, एक रायगढ़, एक रत्नागिरी और एक सिंधुदुर्ग में एनडीआरएफ ने बचाव कार्य दल तैनात कर दिए हैं। एनडीआरएफ महाराष्ट्र सरकार के राहत और पुर्नवास विभाग के साथ मिलकर काम कर रहा है। एनडीआरएफ इन जिलों के स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर पहले से अपनी तैयारी में जुटी है।

एनडीआरएफ अधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि निसर्ग एक भयानक चक्रवात है, जिसमें 90-100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की उम्मीद है। हालाँकि NDRF की टीम महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाकों के आस-पास से लोगों को निकालने का काम कर रही है।

एनडीआरएफ अधिकारियों ने कहा कि कोरोना वायरस संकट के समय में राज्य में चक्रवात की वजह से कोई परेशानी न आये, यही हमारी कोशिश है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश यही रहेगी कि इस संकट के दौर में बिजली की कटौती न हो। मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि मछुवारों को समुद्र से वापस आने के लिए बोल दिया गया है, ताकि इस चक्रवात में किसी एक की भी जान ना जाए।

झारखण्ड: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने प्रधानमंत्री मोदी पर लगाया गम्भीर आरोप

न्यूज़ डेस्क  | navpravah.com 
झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार पर देश की जनता के प्रति अनदेखी का आरोप लगाया। सोरेन ने कहा कि केन्द्र सरकार ने चार लॉकडाउन लगाया, उसके बाद देश की जनता को उन्होंने भगवान के भरोसे छोड़ दिया।
झारखण्ड में पत्रकारों से बात करते समय प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि चार लॉकडाउन के बाद देश की जनता को खुली छूट दे देना बुद्धिमानी नहीं है। इसके भयंकर परिणाम हो सकते हैं, जो निकट भविष्य में दिखाई दे सकता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में पांचवें लॉकडाउन अथवा अनलॉक-1 में झारखंड में दी जाने वाली रियायतों के बारे में यहां एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह आरोप लगाये।
सोरेन ने अभी भी देश भर में मिल रहे कोरोना के मामले को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अगर कोरोना से संक्रमित लोग खुलेआम घूमने लगे तो कितनी बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने देश भर में बढ़ रहे मामलों पर चिंता व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यक है कि व्यवसायिक छूट देने के साथ नियम व सख़्ती पर लगातार सरकार की नज़र हो।  लेकिन केंद्र ने राज्यों को ये ज़िम्मा देकर अपना पल्ला छुड़ा लिया है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में संक्रमण का मामला कम नहीं हुआ, तो हम छूटों पर पुनर्विचार भी कर सकते हैं।

चीनी कम्पनी का दावा, बना ली है कोरोना की वैक्सीन

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com
 
कोरोना की वजह से पूरे विश्व में तबाही मची है। इसी बीच चीन की एक बायोफ़ार्मास्यूटिकल कम्पनी सिनोवैक बायोटेक लिमिटेड ने दावा किया है कि उनकी बनाई एक दवाई ९९ प्रतिशत कोरोना वाइरस ख़त्म करने में कारगर है। 
 
दरअसल सिनोवैक बायोटेक लिमिटेड का कहना है कि उनकी दवा वैक्सीन ‘कोरोनावैक’ COVID-19 के SARS-CoV-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम कर सकती है और यह 99% रोग पर असरकारक है।
सिनोवैक का दावा है कि उनका यह टीका COVID-19 के खिलाफ निश्चित ही सफल होगा। कम्पनी का कहना है कि वर्तमान में वे एक कामर्शियल वैक्सीन उत्पादन संयंत्र का निर्माण कर रहे हैं, जो सालाना अपने टीके की 100 मिलियन खुराक बनाने में मदद करेगा।
कम्पनी के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि COVID-19 की वैक्सीन के विकास में तेजी लाने के लिए फ़ार्मास्यूटिकल फ़र्म ने 15 मिलियन डॉलर का फंड भी हासिल किया है।