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Tuesday, August 11, 2026
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पेट्रोल पम्प पर जारी रहेगा कार्ड पेमेंट, ट्रांज़ैक्शन चार्ज वसूलने का मामला टला

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

नोट बंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की कोशिशों में समय-समय पर तमाम रुकावटें आ रही हैं और उनका उचित समाधान भी खोजा जा रहा है। इन्हीं समस्याओं के तहत पेट्रोल पंप मालिकों और बैंकों के बीच कार्ड पेमेंट को लेकर  विवाद शुरू हुआ था, जो फिलहाल सुलझा लिया गया है। 13 जनवरी तक अब पेट्रोल पंप पर डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट करने में लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पेट्रोल पंप के मालिकों ने बीती रात क्रेडिट और डेबिट कार्ड से ईंधनों की बिक्री के लिए भुगतान को स्वीकार नहीं करने के अपने फैसले को 13 जनवरी तक टाल दिया है, जिससे ग्राहकों को थोड़ी राहत मिली है। यह कदम उन्होंने बैंकों के ट्रांजैक्शन (एमडीआर) शुल्क लगाने के कदम को टालने के बाद उठाया

गौरतलब है कि कैशलेस लेन-देन को बढावा देने के लिए सरकार ने नोटबंदी के बाद ईंधन की खरीद पर मर्चेंट डिस्काउन्ट रेट (एमडीआर) को उपभोक्ताओं के लिए माफ कर दिया था, लेकिन 50 दिन की अवधि बीतने के बाद बैंकों ने पेट्रोल पंप मालिकों पर एमडीआर लगाने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि पेट्रोल पंपों को नौ जनवरी से क्रेडिट कार्ड के जरिए सभी लेन-देन पर एक प्रतिशत और डेबिट कार्ड के जरिए सभी लेन-देन पर 0.25 फीसदी से एक फीसदी के बीच खर्च वहन करना होगा।

इस कदम के विरोध में पेट्रोल पंप संचालकों ने कल से कार्ड के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला किया था। ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने कहा, “हमें तेल विपणन कंपनियों से आधिकारिक पत्र मिला है कि ट्रांजैक्शन शुल्क की वसूली को 13 जनवरी 2017 तक टाल दिया गया है। एआईपीडीए ने भी आंदोलन को 13 जनवरी तक टालने का फैसला किया है।”

अब 13 जनवरी तक पेट्रोल पंपों तथा ग्राहकों की यह समस्या टल तो गई है, लेकिन उसके बाद कौन सा नियम लागू होगा, उस फैसले पर सबकी नज़र टिकी हुई है।

जम्मू-कश्मीर : अखनूर इंजीनियरिंग कैंप पर आतंकी हमला, 3 जवान शहीद

अनुज हनुमत | Navpravah.com

आज सुबह कश्मीर के अखनूर में आतंकी हमले में तीन जवान शहीद हो गए और एक घायल हो गए। सूत्रों द्वारा बताया जा रहा है कि सीमापार से आतंकी घुसपैठ करने की फिराक में थे, इसलिए उन्होंने अखनूर इंजीनियरिंग फोर्स के कैंप को निशाना बनाया। इस हमले में तीन भारतीय जवान मौके पर ही शहीद हो गए जबकि एक जवान के घायल होने की ख़बर है।

आपको बता दें कि इंजीनियरिंग फोर्स कैंप अखनूर के बटला गांव के पास स्थित है और इस हमले के बाद आसपास की सेना को अलर्ट कर दिया गया। सेना ने हमलावरों को चारो तरफ से घेर लिया है। दोनों तरफ से गोलीबारी जारी है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार जिस समय पहरे पर तैनात जवानों की ड्यूटी बदलती है, उसी समय यह हमला हुआ है। रात करीब दो बजे के आसपास आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया। पूरे इलाके को घेर लिया गया है। आतंकवादियों को घेरकर पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यह इलाका एलओसी से सटा हुआ है। सेना के जिस कैंप पर हमला हुआ है, उसमें रह रहे जवान एलओसी के पास सड़क निर्माण के लिए यहां आए थे। पूरे क्षेत्र में सेना काम्बिंग कर जाँच कर रही है।

विवेकानंद यूथ कनेक्ट: स्वामी विवेकानंद के लिए दौड़ी मुम्बई

इंद्रकुमार विश्वकर्मा । Navpravah.Com

स्वामी विवेकानंद जयंती के निमित्त ‘राष्ट्रीय युवा दिन-१२ जनवरी ‘ के अवसर पर रविवार, ८ जनवरी को विवेकानंद के विचार नवयुवकों तक पहुँचाने के उद्देश्य से ‘विवेकानंद यूथ कनेक्ट’ संस्था की ओर से ‘विवेकानंद यूथ कनेक्ट रन’ का आयोजन मुम्बई के जुहू चौपाटी में किया गया। संस्था के संस्थापक डॉ.राजेश सर्वज्ञ ने संस्था के उद्देश्य की जानकारी दी। इस अवसर पर हजारों की संख्या में विद्यार्थियों, युवक-युवतियों, महिलाओं व पुरुषों ने दौड़ में भाग लिया। विभिन्न समाजसेवी संस्थओं ने भी इस कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थीं।

मुम्बई के समुद्री किनारे से स्वामी विवेकानंद का विशेष संबंध था। ‘विवेकानंद यूथ कनेक्ट रन’ जुहू चौपाटी के किनारे से ठीक सुबह ७ बजे शुरू हुआ। इसमें १२ किमी, ५ किमी और २ किमी दौड़ का समावेश किया गया था, जिसमें हजारों युवकों और युवतियों के साथ ही वरिष्ठ महिलाओं और पुरूषों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मुम्बई विद्यापीठ व एसएनडीटी के करीब ८ हज़ार विद्यार्थियों ने इसमें हिस्सा लिया।

‘विवेकानंद यूथ कनेक्ट’ संस्था के संस्थापक डॉ. राजेश सर्वज्ञ ने संस्था के उद्देश्य की जानकारी देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने अपना सम्पूर्ण जीवन एक सच्चे साधक, योगी के रूप में व्यतीत किया। सम्पूर्ण संसार में शांति व समभाव लाना ही उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य था। उन्हें युवाओं की शक्ति पर पूरा विश्वास था। इसी विश्वास के बल पर उन्होंने सम्पूर्ण विश्व को बदलने की बात की थी। उनके आचार-विचार और उनके जीवन से युवाओं को सीख लेनी चाहिए। इस मैराथन का उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानंद के इन्हीं गुणों से अवगत करना है और उन्हें एक नई दिशा प्रदान करनी है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी व समाजसेवी अमृता फडणवीस इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने नवयुवकों से स्वामी विवेकानंद के जीवनपथ पर चलने का आग्रह किया व प्रतियोगियों का उत्साह वर्धन किया।

पेपर कटिंग आर्ट कलाकार ऋषिकेश पोतदार ने स्वामी विवेकानंद व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का चित्र बनाकर सबको अचंभित कर दिया। अमृता फडणवीस ने ऋषिकेश की सराहना करते हुए उनका सम्मान किया। इस अवसर पर तीन युवतियों द्वारा शानदार ज़ुम्बा डांस भी प्रस्तुत किया गया, जिस पर सभी लोग झूम उठे।

भरत विश्वकर्मा ने इस कार्यक्रम में मुख्य समन्वयक की भूमिका निभाते हुए कार्यक्रम के आयोजन से लेकर अतिथियों के स्वागत व विजेताओं को पुरस्कार वितरण समारोह तक पूर्ण सहयोग किया और मंच पर कार्यक्रम के सञ्चालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दौड़ के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किया गया। इस अवसर पर १२ कोच भी अपने उल्लेखनीय कार्य के लिए संस्था द्वारा सम्मानित किए गए।

अमर सिंह को मिली ‘ज़ेड’ श्रेणी की सुरक्षा, अखिलेश ने कहा, “सपा को तोड़ने का मिला ईनाम”

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

‘समाजवादी’ खेमे में छिड़े युद्ध के दरम्यान पार्टी में ‘फूट’ डालने का श्रेय पानेवाले राज्यसभा सदस्य अमर सिंह की जान को खतरे में होने की आशंका के तहत ज़ेड दर्ज़े की सिक्योरिटी दे दी गई है। सरकार ने अमर सिंह को केंद्रीय अर्द्धसैनिक कमांडो वाला ‘ज़ेड’ श्रेणी का सुरक्षा घेरा तो प्रदान कर दिया, लेकिन समाजवादी पार्टी के ‘बागी’ दल को अमर सिंह पर फब्तियां कसने का भी मौका दे दिया। अखिलेश दल ने साफ़ तौर पर इस सुरक्षा को भाजपा द्वारा अमर सिंह को समाजवादी पार्टी तोड़ने का ईनाम करार दिया है।

अमर सिंह को प्रदान किया गया खास सुरक्षा का फैसला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले समाजवादी पार्टी के आंतरिक कलह को देखते हुए किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कल रात इस संबंध में एक आदेश जारी किया और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) से तुरंत यह जिम्मेदारी संभालने को कहा है।

केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दी गयी जानकारी का हवाला देते हुए एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हालिया गतिविधियों के मद्देनजर सिंह को खतरे की आशंका है।’’ इस सुरक्षा घेरे के तहत मुलायम सिंह यादव के करीबी अमर सिंह के साथ सीआईएसएफ के दो दर्जन सशस्त्र कमांडो की टुकड़ी होगी और उत्तर प्रदेश में उनके दौरों के समय उनके साथ यह सुरक्षा घेरा पूरे वक्त मौजूद रहेगा। अधिकारी के मुताबिक अमर सिंह 2008 से 2016 के मध्य तक सीआईएसएफ के केंद्रीय सुरक्षा घेरे में रहे और बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी।

जेड श्रेणी की सुरक्षा के अतिरिक्त जब अमर सिंह दिल्ली में होेंगे तोे दिल्ली पुलिस की छोटी सी टीम उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल सकती है। आपको याद दिला दें कि सपा नेता मुलायम सिंह से कुछ दिन तक संबंधों में तनाव रहने के बाद अमर सिंह फिर से उनके करीब आ गये थे और मई में फिर से पार्टी के राज्यसभा सांसद बनाये गये थे। गौर करने की बात यह है कि जब से अमर सिंह की पार्टी में वापसी हुई थी, पिता पुत्र के बीच शीत युद्ध तभी से शुरू को गया था, जो अब खुले विद्रोह का रूप ले चुका है।

इधर केंद्र सरकार की तरफ से अमर सिंह को जेड श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने पर अखिलेश यादव गुट ने इसे पार्टी तोड़ने की कोशिश करार दिया है। समाजवादी पार्टी सांसद नरेश अग्रवाल ने कहा कि अमर सिंह को बीजेपी का एजेंट होने का इनाम दिया गया है, हालांकि एजेंसियों ने खतरे के संबंध में ज्यादा ब्योरा नहीं दिया।

तनाव ने ले ली पुरी की जान -नसीरुद्दीन शाह

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

ओम पुरी जैसा एक महान और उम्दा कलाकार इस दुनिया को बड़ी जल्दी अलविदा तो कह गया, लेकिन छोड़ गया कई ऐसे अनसुलझे रहस्य, जिनके बारे में उसके चाहनेवालों ने कभी सोचा ही न होगा। ओम पुरी से जुड़ी ऐसे ही कुछ खास बातों को उजागर किया है, उनके परम मित्र नसीरुद्दीन शाह ने।  शाह ने ओम पुरी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें एक अति अद्भुत कलाकार बताया। नसीर ने ट्विटर पर भी लिखा, ” हमने एक उम्दा कलाकार खो दिया। पूरे हिंदुस्तान को और सिनेमा जगत को बहुत बड़ी क्षति पहुंची है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।”

शाह ने ओम पुरी के व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी कुछ समस्याओं का ज़िक्र करते हुए कहा, “उनकी व्यक़्क्तिगत समस्याएं, जिनमें मैंने कभी हस्तक्षेप नहीं किया, उन समस्याओं ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कमज़ोर बना दिया था।” शाह ने बताया कि अपने अंतिम सालों में ओम किसी ऐसी समस्या से जमकर जूझ रहे थे, जिससे बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था।

डीएनए को दिए अपने इंटरव्यू में शाह ने बताया, “हालांकि उनकी मृत्यु अचानक हुई, लेकिन मैं इसे पूर्णतः अकस्मात् मृत्यु नहीं मनाता। कहीं न कहीं, उनकी मृत्यु ने उन्हें तनाव भरे जीवन से पूर्णतः मुक्ति दिला दी। इस तनाव में उनकी वे बुरी फिल्में भी शामिल हैं, जो उन्होंने शायद आर्थिक परिस्थितियों की वजह से चुनी हों।”

शाह ने बताया कि ओम पुरी कभी भी छोटे किरदार निभाने में भी हिचकिचाये नहीं। शाह ने बताया, “हम दोनों बहुत करीबी मित्र थे। अक्सर हम कई फिल्मों में एक दूसरे के लिए सपोर्टिंग किरदार निभाते थे। ओम ने अक्सर मेरी फिल्मों में कैमियो रोल्स निभाए, जैसे साई परांजपे की फिल्म ‘स्पर्श’ में। मैं उन्हें अक्सर पूछता था कि क्या उन्हें मेरे लिए ऐसे छोटे रोल निभाना बुरा नहीं लगता? वे गालियां देते हुए कहते, “अरे यार, मैं ये सब तुम्हारे लिए नहीं करता। इसलिए करता हूँ, क्योंकि मुझे फिल्म पर पूरा विश्वास है।” अर्थपूर्ण सिनेमा में उनका अटल विश्वास डिगा पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन था।”

उल्लेखनीय है कि शाह ने ओम पुरी के साथ ऑनस्क्रीन और ऑफस्क्रीन बहुत लंबा वक़्त गुज़ारा है। ‘जाने भी दो यारों’ और ‘मिर्चमसला’ जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में दोनों ने साथ मिलकर काम किया है।

सलमान और रणबीर में बढ़ सकती है दूरी!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

सलमान खान और रणबीर कपूर के बीच का क्लैश नए साल में भी अपने कदम जमा चुका है। एक ओर दोनों के बीच क्लैश की मुख्य वजह, दोनों की एक्स गर्लफ्रेंड रह चुकी कटरीना ने रणबीर के साथ एकदम दूरी बना ली है, तो दूसरी ओर सलमान से नजदीकी भी बढ़ा ली है। लेकिन इस बार क्लैश की वजह कट्रीना नहीं, कुछ और ही है। दोनों के बीच का वह क्लैशिंग पॉइंट है, दोनों की एक ही समय पर रिलीज़ हो रही फिल्में। मज़े की बता यह है कि इस क्लैश में कटरीना सलमान खान के साथ हैं।

सलमान और रणबीर की जो फिल्में क्लैश होने जा रही हैं, उनमें एक तरफ़ है सलमान खान की टाइगर जिंदा है, जो 2012 में आई एक था टाइगर की सीक्वल है और खास बात यह है कि इस फिल्म में कटरीना कैफ भी हैं। दूसरी तरफ है राजकुमार हिरानी की संजय दत्त की बायोपिक जिसमें रणबीर कपूर है। आपको बता दें कि सलमान और रणबीर ने दो फिल्मों में स्क्रीन शेयर किया है। पहली फिल्म रणबीर की डेब्यू ‘सावरियां’ और दूसरी ‘अजब प्रेम की गज़ब कहानी’ जिसमें रणबीर के साथ कटरीना भी थी।

जबसे रणबीर कपूर के साथ कटरीना का ब्रेकअप हुआ है, वे सलमान खान के साथ अक्सर दिखाई दी हैं। ख़बरों के मुताबिक वे सलमान से अपने करियर को आगे बढ़ाने और रणबीर के साथ अपनी आगामी फिल्म ‘जग्गा जासूस’ के प्रमोशन्स के लिए टिप ले रहीं हैं। आपको बता दें कि ‘टाइगर जिंदा है’ और संजय दत्त की बायोपिक इस साल क्रिसमस पर रिलीज़ होगी।

UP चुनावी दंगल: भाजपा से टिकट के लिए फौजी ने दिया मौत का शपथ पत्र

अनुज हनुमत | Navpravah.com

यूपी में विधानसभा चुनाव नजदीक है और यहाँ दिन प्रतिदिन सियासी गलियारों में एक नई कहानी देखने को मिल रही है। सूबे में अभी कई पार्टियों ने अपने उम्मीदवारों भी घोषित नहीं किये हैं। हाल ही में एक अजीब सियासी तस्वीर देखने को मिली। टिकट पाने के लिए लोग ऐसे-ऐसे जतन कर रहे हैं, जिससे हर कोई हैरान और परेशान हैं। इस कड़ी में भाजपा से टिकट पाने की आस में एक रिटायर्ड फौजी भी शामिल हो गए हैं।

दरअसल, मैनपुरी के निवासी रिटायर्ड फौजी अशोक सिंह चौहान ने भारतीय जनता पार्टी से टिकट पाने के लिए मौत का शपथ पत्र तैयार कराया है। फेसबुक पर पोस्ट किया गया यह शपथ पत्र उस भोगांव सीट के लिए है, जो अभी भी समाजवादी पार्टी के पास है। सबसे मुख्य बात यह है कि भोगांव से मौजूदा सपा विधायक आलोक शाक्य जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। अशोक सिंह चौहान भटपुरा गांव के रहने वाले हैं और भोगांव सीट से भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं।

फौजी का दावा है कि अगर बीजेपी उसे भोगांव विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित करे, तो वो जरूर चुनाव जीत जाएंगे। अगर वह हारते हैं, तो चौराहे पर खड़े होकर खुद को गोली मार लेंगे। इस पत्र के सामने के आने के बाद सबके होश फाख्ता हैं।

आगे अशोक सिंह चौहान ने शपथ पत्र में यह भी लिखा है कि अगर बीजेपी ने किसी और को टिकट दिया, तो उसकी जीत मुश्किल है। समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर 25 साल राज किया है, मैं उसे तोडूंगा।

यह पूरा वाकया तब सामने आया जब उन्होंने फेसबुक पर यह शपथ पत्र अपलोड किया। इसके बाद ये पोस्ट इतनी वायरल हुई कि देखते ही देखते सबके सामने आ गई। आपको बता दें कि फिलहाल आधिकारिक रूप से किसी भाजपा पदाधिकारी को नहीं भेजा गया है, लेकिन टिकट आवेदन के साथ इसे नत्थी करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि आत्महत्या की चुनौती देने वाले इस फौजी पर पुलिस कार्रवाई भी कर सकती है।

गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव सात चरणों में होने जा रहे हैं। पहले चरण का मतदान 11 फरवरी, दूसरे चरण का मतदान 15 फरवरी, तीसरे चरण का मतदान 19 फरवरी, चौथे चरण का मतदान 23 फरवरी, पांचवें चरण का मतदान 27 फरवरी, छठे चरण का मतदान 4 मार्च और सातवें चरण का मतदान 8 मार्च को होगा। वोटों की गिनती 11 मार्च को होगी। चुनाव से पहले ऐसे बहुत से मामले सामने आते रहे हैं लेकिन ये मामला अपने आप में अजीब है। देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी इससे किसी निपटती है।

‘दिव्य नयन’: दृष्टिबाधितों के लिए वरदान, अब नहीं होगी पढ़ने में दिक्कत

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

ऐसा माना जाता है कि ईश्वर ने यदि आपको कोई शारीरिक कमी दी है, तो कोई न की ऐसी शक्ति अवश्य दी होगी, जो अन्य साधारण लोगों के पास नहीं है। इसीलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी दिव्य शक्ति के धनी लोगों को एक नया संबोधन दिया ‘दिव्यांग’। ऐसे दिव्यांगों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में विज्ञान व तकनीक हमेशा से प्रयत्नशील रहे हैं।

इसी दिशा में काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) के वैज्ञानिकों ने एक अद्भुत खोज की है। सीएसआईआर ने दृष्टि बाधितों के लिए पढ़ने वाली एक अत्याधुनिक मशीन बनाई है, जिसका नाम ‘दिव्य नयन’ रखा गया है। इस मशीन के जरिए दृष्टिहीन लोग बिना किसी की सहायता के अब फटाफट पढ़ सकेंगे। इस मशीन की कीमत भी बहुत कम रखी गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ ले सकें।

कैसे काम करता है यह यन्त्र-

* ‘दिव्य नयन’ वायरलेस पोर्टेबल डिवाइस है, जिसमें ओपेन सोर्स हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया है।

* सीएसआईआर के तहत चंडीगढ़ स्थित सेन्ट्रल साइंटिफिक इन्स्ट्रूमेन्ट्स ऑर्गनाइजेशन (सीएसआईओ) के वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई इस मशीन में स्कैनर लगा हुआ है, जो हिन्दी और अंग्रेजी की किसी भी स्क्रिप्ट को पढ़ सकता है और उसे जोर-जोर से बोल सकता है ताकि दृष्टिहीन उसे समझ सकें।

* यह पोर्टेबल डिवाइस किसी भी कंटेंट को स्कैन कर पढ़ने और उसे स्पीच में बदलने की तकनीक पर आधारित है।

* यह उपकरण एक साथ एक से अधिक दस्तावेजों को सहज तरीके से पढ़ सकता है और उसका विश्लेषण भी कर सकता है। सीएसआईओ के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशीष गौरव ने बताया कि यह डिवाइस शब्द, पेज और पाठ स्तर का नेविगेशन पढ़ने में सक्षम है।

* वाई-फाई और ब्लूटूथ इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैस इस मशीन के अंदर 32 जीबी की इंटरनल स्टोरेज कैपसिटी है जो 3 घंटे तक चल सकता है।

* इस मशीन का वजन केवल 410 ग्राम है। इसे किसी कम्प्यूटर मॉनीटर से भी जोड़ा जा सकता है और इसे मिनी कम्प्यूटर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

 सीएसआईओ के निदेशक डॉ. आर के सिन्हा ने बताया, “यह फास्ट ट्रैक परियोजनाओं में से एक है, जो अनुवाद को एक उत्पाद के तौर पर पेश करता है। इस डिवाइस को हिंदी के अलावा अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी सक्षम बनाया गया है। हम एक वर्ष के भीतर इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे। हम लोग पाठकों की इच्छा के अनुरूप कोई भी पाठ पढ़ने की गति पर भी काम कर रहे हैं।” उन्होंने बताया कि जल्द ही इस मशीन का व्यापारिक स्तर पर उत्पादन शुरू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि फिलहाल, यह मशीन सिर्फ हिन्दी और अंग्रेजी कन्टेन्ट ही पढ़ सकती है, लेकिन बहुत जल्द इसे अन्य भारतीय और विदेशी भाषाओं में भी विकसित किया जाएगा।

कांग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले इलाके ‘अमेठी’ की हालत ख़स्ता

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

उत्तर प्रदेश का अमेठी क्षेत्र कहने को तो राहुल गाँधी का संसदीय क्षेत्र और कांग्रेस का गढ़ है, लेकिन यहाँ की हालत बदतर होती जा रही है। विकास की रफ्तार धीमी होने की वजह से ज्यादातर लोग असंतुष्ट हैं। लोगों का मानना है कि उनको जो मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। यहाँ न तो पुरानी ऐतिहासिक इमारतों को बचाया जा रहा है, न ही गरीब जनता को घर मुहैया कराया जा रहा है। गरीबों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही इंदिरा और लोहिया आवास जैसी योजनाओं की नींव अमेठी में तो सिर्फ कागज के ऊपर ही डाल दी गई है।

अमेठी के शुकुल बाजार में स्थित 1940 में बना ऐतिहासिक डाक बंगला भवन वर्षों से जर्जर पड़ा है। ब्रिटिश कालीन भारत में बने इस ऐतिहासिक डाक बंगला भवन में कभी प्रदेश तो कभी केंद्र सरकार के बड़े बड़े नेताओं का जमघट लगता था। इसी डाक बंगला भवन में कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी अपने परिवार के साथ रात्रि विश्राम किया करते थे, लेकिन वक़्त के साथ साथ देखभाल से वंचित ये डाक बंगला अब भूत बंगले में तब्दील होता जा रहा है।

अमेठी के सासंद राहुल गांधी सहित अन्य जनप्रतिनिधि, मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी भी शुकुल बाजार दौरे पर आते हैं, लेकिन उसके बाद भी आज तक इस डाक बंगला भवन की हालत में सुधार नहीं आया। कुछ सालों पहले ही शासन द्वारा दावा किया गया था कि अब जर्जर हालत में पड़े सभी डाक बंगले चमक जायेंगे, लेकिन अभी तक वही पुरानी स्थिती है।

अमेठी में गरीबों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही इंदिरा और लोहिया आवास जैसी योजनाओं की नींव सिर्फ कागज के ऊपर ही है। प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री ने लोहिया आवास योजना चलाकर गरीबों को आवास देने का कार्य भी किया। लेकिन अमेठी में सरकार की आवासीय योजना अधूरे सपने की तरह बिखर गयी। अमेठी जनपद के विकास खण्ड शुकुल बाजार के ग्राम सभा इक्का ताजपुर निवासिनी एक गरीब विधवा महिला को आवास न मिल पाने के कारण पल्ली लगाकर अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है। ग्रामीणों कहना है आवास के संबंध मे विद्यावती ने कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाये, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

कभी वीवीआईपी क्षेत्र होने का गौरव प्राप्त लोग अमेठी क्षेत्र में रहने का गर्व किया करते थे, लेकिन आज यहां की विकास की धीमी गति और बदहाली के कारण लोगों को अब अमेठी क्षेत्र को अब अपना कहना भी नागवार गुजर रहा है।
अरबों रुपए खर्च होने के बाद भी यहाँ की बदहाली जस की तस है। जिसे लेकर लोगों में काफी निराशा देखने को मिल रही है।

आम बजट पर विपक्ष के विरोध के बाद चुनाव आयोग ने माँगा सरकार से जवाब

इंद्रकुमार विश्वकर्मा | Navpravah.com

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आम बजट की तारीख पर विपक्ष की आपत्ति जताने के बाद चुनाव आयोग ने इस बारे में सरकार से जवाब मांगा है। इस मुद्दे पर चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखकर उनकी टिप्पणी मांगी है। विपक्षी दलों ने मांग की है कि बजट पेश करने की तारीख को 1 फरवरी से आगे बढ़ा दिया जाए। इस पर चुनाव आयोग ने केंद्र का रुख जानना चाहा है।

विपक्षी दलों ने मांग की है कि पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की वोटिंग हो जाने के बाद आम बजट पेश किया जाना चाहिए। इस सन्दर्भ में केंद्र सरकार का रुख जानने के बाद ही चुनाव आयोग आगे कोई फैसला लेगा।

बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 4 फरवरी से चुनाव शुरू हो रहे हैं और बजट भी 1 फरवरी को पेश होना है। चुनावी घोषणा होने के एक दिन बाद ही आम बजट को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग में अपना विरोध दर्ज कराया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे केंद्र की सरकार को फायदा हो सकता है। गुरुवार को कई विपक्षी दलों के नेता इस मामले की शिकायत लेकर चुनाव आयोग पहुंचे थे।

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने मांग की थी कि निष्पक्ष चुनाव के लिए बजट को 8 मार्च के बाद पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक कभी भी बजट पेश किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी चिट्ठी लिखी गई है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने 2012 में यह मुद्दा उठाया था कि चुनावों के दौरान आम बजट पेश नहीं किया जाना चाहिए। हमारा कहना है कि यह सत्तापक्ष द्वारा एक तय प्रथा है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले आम बजट पेश पेश नहीं किए जाने संबंधी याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया है।

शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को कहा कि समय आने पर इस मामले पर विचार किया जाएगा। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एक फरवरी को पेश किए जाने वाले बजट पर रोक लगाने की मांग की थी।