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Tuesday, August 11, 2026
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इस सपा कार्यकर्ता ने कहा, ‘अखिलेश की सेवा के लिए आजीवन रहूँगा अविवाहित’

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

बरेली के समाजवादी लॉयर्स फ्रंट के पूर्व शहर अध्यक्ष प्रमोद यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए भीष्म प्रतिज्ञा ली है। प्रमोद यादव ने अखिलेश की सेवा के लिए शादी न करने का फैसला किया है, क्योंकि उनकी ‘शादी’ तो समाजवादी पार्टी से हो चुकी है।

अखिलेश को पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने विरोधस्वरूप लॉयर्स फ्रंट से भी नाता तोड़ लिया। भले ही मुलायम परिवार में चल रहे उठापटक से वह परेशान हैं, लेकिन अखिलेश के लिए उनके सपोर्ट में कोई कमी नहीं आई। प्रमोद कहते हैं, ‘नेताजी को अखिलेश को पार्टी अध्यक्ष बना देना चाहिए, जो भी हो मैं हमेशा अखिलेश के साथ हूं।’

प्रमोद ने बताया कि अखिलेश ने एक बार उन्हें एक लडक़ी से शादी का सुझाव दिया था, लेकिन पार्टी वर्कर और वकील होने के नाते अपने टाइट शेड्यूल का हवाला देकर बड़ी विनम्रता से शादी से इनकार कर दिया।

प्रमोद की लंबाई 4 फुट से भी कम है। 3 फुट 8 इंच के प्रमोद पार्टी या अखिलेश के हर कार्यक्रम का आकर्षण बिंदु बने रहते हैं। हाल में सीएम अखिलेश ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर प्रमोद की कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं।

प्रमोद कहते हैं, पार्टी में इस स्तर तक पहुंचने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है, उनका छोटा कद इस काम में बहुत मददगार साबित हुआ। प्रमोद बताते हैं कि साल 2003 में पहली बार उनकी मुलायम सिंह से मुलाकात हुई थी। उस वक्त उन्होंने पार्टी में शामिल होने को कहा था। इसके बाद प्रमोद ने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। प्रमोद के विरोधी उनके छोटे कद को उनकी सफलता का कारण बताते हैं।

नहीं बनवाया है ड्राइविंग लाइसेंस, तो बुरे फंसे

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

अगर अब तक आपने अपना ड्राइविंग लाइसेंस नहीं बनवाया है, तो आपके लिए एक बुरी खबर है। लाइसेंस बनवाने की फीस 5 गुना बढ़ा दी जायेगी। सड़क परिवहन मंत्रालय ने यह फैसला लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब और तमिलनाडु ने इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू भी कर दिया है।

सड़क परिवहन मंत्रालय द्वारा लिए गए इस नए निर्णय के अनुसार अब ड्राइविंग लाइसेंस इशू करने की फीस 40 रुपए से बढ़ाकर 200 रुपए कर दी जाएगी। अगर आपको स्मार्ट कार्ड जैसा लाइसेंस चाहिए तो फिर उसके लिए थोड़े और ज्यादा पैसे देने होंगे। मिली इसके अलावा एक नोटिफिकेशन और लगाई गई है। उसमें बताया गया है कि जो लोग वक्त पर अपना लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाएंगे उन्हें भी अब पहले से ज्यादा पेनाल्टी देनी होगी। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अब 300 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। इसके अलावा प्रति साल के हिसाब से एक हजार रुपए और देने होंगे। साथ ही मालिकाना हक में बदलाव के लिए दी जाने वाली NOC की फीस को भी बढ़ाये जाने की आशंका है।

परिवहन विभाग अधिकारी एसपी सिंह ने फीस बढ़ाए जाने की खबर पर कहा, “यह असामान्य वृद्धि नहीं है। इस बारे में काफी वक्त से बात चल रही थी। इससे विभाग की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। उन लोगों पर जुर्माना ज्यादा लगेगा जो अपनी जानकारी वक्त पर अपडेट नहीं करवाते। कई बार प्रवर्तन एजेंसियों से भी जानकारी मिली है कि उनके द्वारा भेजे गए चालान वापस आ जाते हैं, क्योंकि जिसको वे चालान भेजते हैं, उन्होंने अपना घर बदल लिया होता है लेकिन उसे लाइसेंस में अपडेट नहीं करवाया होता।”

गौरतलब है कि दशकों से इस फीस में कोई बदलाव नहीं हुआ था। साथ ही इससे सभी राज्यों की फीस अब एक जैसी हो जाएगी। नई फीस के मुताबिक, भारी वाहन के फिटनेस टेस्ट के लिए 600 रुपए देने होंगे, वहीं कार के लिए इसे 400 रुपए अदा करने होंगे, जबकि स्वचालित परीक्षण की फीस और ज्यादा होगी।

कुछ ऐसे आशुतोष राणा ने याद किया ओम पुरी को

आनन्द रूप द्विवेदी | Navpravah.com

सुप्रसिद्ध अभिनेता आशुतोष राणा ने फेसबुक पेज पर दिवंगत अभिनेता ओम पुरी के प्रति  अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. ओम पुरी साहब को याद करते हुए आशुतोष राणा ने बेहद मर्मस्पर्शी लेख लिखा. पढ़ें क्या कहते हैं आशुतोष राणा:

“रात के ८ बजे थे सर्दी अभी शुरू ही हुई थी, मैं ओम पुरी साहब के साथ पुष्कर तीर्थ के ब्रह्म कुंड पर बैठा था। हम हिंदी फ़िल्म Dirty Politics की शूटिंग कर रहे थे।बात ही बात में मैंने उनसे पूछ लिया की पुरी साब लम्बे लम्बे डायलॉग को याद करने का आपका तरीक़ा क्या है? उन्होंने बहुत तीव्रता से अपनी पैनी आँखें मुझ पर गड़ा दीं,आँखों में भाव बिलकुल वैसा था जैसे कोई सिद्ध गुरु गूढतम रहस्य के उद्घाटन के पहले शिष्य की मनोभूमि की क्षमता को आंकता है.. फिर अपनी अत्यंत गहरी आवाज़ में बोले ..शब्द क्यों याद रखते हो ? भाव याद रखो।

भाषा तो भाव का घोड़ा है पंडित जी। जी, पुरी साहब मुझे लाड़ से पंडित जी कहते थे। पुरी साहब बोले ..मेरे लिए किन शब्दों में कहा गया ये इम्पोर्टेंट नहीं होता, क्या कहा गया इम्पोर्टेंट होता है,इसलिए कैसे कहना है ये अपने आप आ जाता है। भाव actor का वार होता है जो भाषा रूपी घोड़े पर सवार होता है। बोले दुनिया सिर्फ़ वार को और सवार को ही याद रखती है।

मैंने कहा आप ऐसा कैसे कह सकते हैं? इतिहास में जितना महत्व राणा प्रताप का है उतना ही महत्वपूर्ण चेतक भी है। वो बोले पंडित जी महाराणा के वार क़ातिल थे वे कमाल के सवार थे , इसलिए उनका घोड़ा लोगों को याद रह गया। ऐसा ही अपने धंधे में है जब किसी ऐक्टर के भाव प्रभावशाली होते हैं, दर्शक के मर्म पर चोट करते हैं तो लोगों को उसकी भाषा भी याद रह जाती है। इसलिए सिर्फ़ अच्छी भाषा के चक्कर में मत पड़ो सच्चे भाव को सिद्ध करो, भाषा की तारीफ़ लोग ख़ुद ब ख़ुद करने लगेंगे। धरती जीतना बहुत आसान है पंडित जी, बात तो तब है जब दुनिया का दिल जीत के बताओ। महत्व इस बात का नहीं है की आपने शहर में कितने मकान बना लिए महत्वपूर्ण ये है की आप कितनों के मन में जगह बनाते हो। याद रखिए हम Actors भी योद्धा ही होते हैं हमारी जगह लोगों के मकानों में नहीं लोगों के मनों में होती है। हम सिर्फ़ पैसे से नहीं महाराज,प्रशंसा से पलते हैं।पैसा कमाना जितना आसान है प्रशंसा कमाना उतना ही मुश्किल है।पैसा तो भीख माँगने पर भी मिल जाता है लेकिन प्रशंसा कोई भीख में नहीं देता।

तभी हमारे director ने pack up की घोषणा कर दी। पुरी साहब उठे प्रेम से मेरे कंधे पर हाथ रखा और बोले अच्छा पंडित जी चलते हैं, और वे चल दिए.. आज वे सदा के लिए चले गए,लेकिन मेरे जैसे करोड़ों करोड़ लोगों के दिलों को हमेशा हमेशा के लिए जीतकर। अस्तित्व ने जन्म से ही पुरी साहब को प्रतिकूल परिस्थितियाँ जैसे उपहार में दी थीं, और पुरी साहब ने अस्तित्व से मिले प्रतिकूल परिस्थितियों के इस उपहार को गरीमा सहित स्वीकार किया और लग गए चुन चुन कर प्रतिकूल को अनुकूल बनाने में। ॐ के नाद से यदि इस सृष्टि का निर्माण हुआ है तो इस धीरनायक ने ब्रह्मनाद को ही अपना नाम बना लिया। कभी ना चुकने वाले धैर्य को धारण करने वाला कला जगत का यह सूर्य आज मनोराज्य पर अपनी विजय पताका को फहराने के बाद ब्रह्मराज्य की ओर प्रयाण कर गया । असाधारण प्रतिभा के धनी कालजयी अभिनेता श्रद्धेय ओम पुरी साहब आपको भावपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि.

  • •शत् शत् नमन ••शिवास्तु ते पँथनाह~आशुतोष राणा”

 

महिला सुरक्षा: समाज के सामने खड़ा यक्ष प्रश्न!

जटाशंकर पाण्डेय | Navpravah.com

साल 2017, नया साल , जिसका सारी दुनिया बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी, वो कई खुशियां लुटाता आया, लेकिन कई ग़म भी बिखेर गया। एक तरफ तुर्की के इस्तानबुल में साल का पहला आतंकवादी हमला हुआ, तो दूसरी ओर भारत में हुईं छेड़छाड़ की कई शर्मनाक घटनाएं। नए साल के मौके पर कहीं कहीं लोग जश्न के माहौल में पूरी रात खुशियां मनाते दिखे, तो बंगलुरु व दिल्ली से महिलाओं के खिलाफ हुई कुछ ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने हमारे सामाजिक प्राणी होने पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया।

सारा देश इन घटनाओं की निंदा कर रहा है। अक्षय कुमार, रितिक रोशन, आयशा टाकिया सहित बॉलीवुड के तमाम बड़े कलाकारों ने खुलकर इन घटनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी, लेकिन इस बीच महिलाओं को कुछ चीजों से परहेज करने की बात कहकर सपा नेता अबू आजमी बुरे फंसे गए। अबू आज़मी ने बयान दे दिया कि जो हुआ वो गलत तो है, अपराधियों को कड़ी सजा ज़रूर मिले, लेकिन महिलाओं को भी इतने छोटे कपड़ों में, इतनी देर रात तक, अकेले नहीं घूमना चाहिए। आज़मी का तर्क शायद कुछ ऐसा है कि यह प्रकृति का सामान्य सा नियम है कि महिलाएं यदि पुरुषों के सामने इतना अंग प्रदर्शन करेंगी, तो पुरुषों में उन्मादकता आएगी ही और वो भी नशेे के माहौल में तो मामला सोने पर सुहागे का है। इसीलिए अक्सर अपने विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले आज़मी मर्द और औरत की तुलना चींटी और शक्कर से या फिर आग और पेट्रोल से कर बैठे। अब सारा देश इस घटना के साथ-साथ अबू आज़मी पर भी थू-थू कर रहा है।

यह पूर्णरूप से सही है कि ख़ुशी हर इंसान चाहता है, लेकिन हर इंसान के लिए ख़ुशी की परिभाषा अलग अलग होती है। सज्जनों की ख़ुशी अलग, बुरे लोगों की ख़ुशी अलग, बच्चों की ख़ुशी अलग बूढ़ों की अलग। दार्शनिक दृष्टि से देखें, तो इस घटना से ठीक पहले, उत्सव मनाने के दौरान औरतें अपने हिसाब से आनंद उठा रहीं थीं, मर्द अपने हिसाब से और पुलिस वाले अपने हिसाब से। इसमें कितने आदमी होश में थे, कितने नशे में यह कहना मुश्किल है। साथ ही कितनी औरतें होश में थीं कितनी नशे में यह कहना भी उतना ही मुश्किल है। पुलिस वालों की भी ड्यूटी होती है, लेकिन वर्दी के भीतर वो भी इंसान ही होते हैं। उनके पास भी बीवी बच्चे होते हैं, उन्हें भी अपनी जान प्यारी होती है। दिल्ली में हुई घटना के दौरान पुलिस ने मनचलों को पकड़ा तो, लेकिन उनके साथ आये अन्य कई साथियों ने पुलिस को ही धूल चटा दी और बखेड़ा खड़ा कर अपने साथियों को लेकर चंपत भी हो गए। अब 100 आदमी, और एक पुलिस वाला! बहुत नाइंसाफी है। आखिर वह कितनी व्यवस्था थाम सकता है?

बंगलूरू की घटना की यदि बात करें, तो रात के ढाई बजे, एकदम सुनसान सड़क पर एक अकेली लड़की। बेशक गलती छेड़नेवालों की है, बेशक आज भी भारतीय समाज में मर्द और औरत में भेदभाव की भावना सशक्त है, बेशक औरतों को भी मर्दों जैसी स्वतंत्रता मिलनी ही चाहिए, बेशक उन दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, जिन्होंने खुले आम उस महिला के साथ दुर्व्यवहार किया, लेकिन क्या कहीं भी, एक पल के लिए ये विचार नहीं किया जा सकता कि एक प्रतिशत ही सही, गलती उस औरत की भी थी! सारी परिस्थितियों, विकल्प, समाधान, सुविधा, असुविधा, हर पहलू पर गौर कर के देखिये। ऐसा नहीं कि जहां महिलाएं पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं, वहाँ बलात्कार का स्तर शून्य प्रतिशत है। बलात्कार, छेड़खानी, बदतमीज़ी वहाँ भी होती है, तो भारत में तो स्थिति अभी बहुत बदतर है। तो क्या कहीं न कहीं महिलाओं को परिस्थितियों के प्रति स्वयं सतर्क नहीं होना चाहिए? यदि जवाब ‘हां’ है, तो निश्चित ही रात के ढाई बजे सूनसान सड़क पर आपके अकेले घूमने पर प्रश्न उठेगा। रात भर नशे में पार्टी मनाने पर उंगलियां महिलाओं पर भी उठेंगी।

विकासशील देशों की सूची से विकसित देशों की सूची की ओर तीव्रता से बढ़ता भारत कई मायनों में पाश्चात्य संस्कृति व तथ्यों को अपना चुका है। कई मायनों में यह सही भी है, लेकिन भारत की विश्व स्तर पर एक खास पहचान ‘भारतीय संस्कृति’ को लेकर है। वह भारतीय संस्कृति, जहां नारी को अगर नारायणी का दर्ज़ा दिया गया है, तो उसके लिए कुछ मर्यादाएं भी निर्धारित की गई हैं। और यदि आप ऐसी संस्कृति को रूढ़िवादी विचारधारा मानते हैं, तो पूर्णतः पाश्चात्य संस्कृति ही अपना लीजिये। आधुनिक भारतीय विचारधारा ‘धोबी के कुत्ते’ जैसी हो गई है, न घर की, न घाट की। और सारी समस्या की जड़ यही है।

सभी बातों का निचोड़ यह है कि ऐसे अपराधों को ख़त्म करना इतना आसान नहीं है। ऐसा अपराध मनुष्य की व्यक़्क्तिगत सोच विचार को बदलने से ख़त्म हो सकते हैं ।भाषण देने से या प्रशासन चुस्त दुरुस्त करने से नहीं। यदि पुरुषों को अपनी सोच और मानसिकता बदलने की ज़रूरत है, तो महिलाओं को भी परिस्थितियां बदलने तक, वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से खुद को सुरक्षित रखने की ज़रूरत है, किसी भी ‘मोड़’ पर दुर्घटना घटे, उससे पहले ही उस ‘मोड़’ पर जाने में सावधानी बरतने की ज़रूरत है। यदि महिलाएं इज़्ज़त को अपना गहना मानती हैं, तो सबसे पहले खुद अपनी हिफाज़त करने की ज़रूरत है। महिलाएं पहले खुद अपनी इज़्ज़त करें, तब दुनिया से उसकी उम्मीद करें। खुद को सशक्त अवश्य बनाएं, पर परिस्थितियों के अनुसार सावधान भी रहें, ताकि कल कोई आप पर प्रश्न उठाने का साहस न कर सके।

बाल मजदूरी को बढ़ावा दे रही समाजवादी पार्टी!

आँचल जायसवाल | Navpravah.com

देश के पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा में आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। जिसके बाद सभी दल चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय पर स्कूली बच्चों को सपा का प्रचारक बनाये जाने का मामला सामने आया है।

प्रदेश में चुनाव की तिथियों की घोषणा हो चुकी है और आचार संहिता भी लागू कर दी गई है। ऐसे में यूपी के औरैया जिले के ककोर क्षेत्र में स्थित स्कूल बच्चों को सपा प्रचारक के रूप में इस्तेमाल कर रही है। कई छोटे छोटे स्कूली छात्र साईकिल पर बस्ते की जगह सपा के प्रचार वाले पोस्टर और कैलेंडर बांधे हुये थे। ऐसे में सपा की जिला कार्यकारणी के ऊपर एक बडा सवाल उठता है कि जब बच्चों के पढ़ने के वक्त सपा की प्रचार सामग्री बटवाई जायेगी तो कैसे सुधरेगा बच्चों का भविष्य ?

इस मामले पर बोलने या कुछ कहने से सपा के नेता बच रहे है। इस पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी दो फाड़ होगयी है। ऐसी स्थिति में सपा कार्यकर्ता भी असमंजस में हैं। बीजेपी ने ये भी कहा कि स्कूली छात्रों से प्रचार सामग्री बटवाना भी बाल श्रम है, जिसका सपा उल्लंघन कर रही है, और वो इसकी घोर निंदा करती है।

अपराधियों को धड़ल्ले से टिकट दे रही हैं मायावती!

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

अपराध मुक्त उत्तर प्रदेश का दावा करने वाली बसपा खुद ही अपराधियों को टिकट दे रही है। बसपा ऐसा करके अपने दावों से ही नहीं पलट रही, बल्कि चुनाव आयोग की नियमों की भी धज्जियां उड़ाने में लगी हुई है। इससे पहले भी बसपा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाकर जातिगत आधार पर टिकट बाटने का काम किया था।

बसपा प्रमुख मायावती को कई बार उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने का दावा करते देखा गया है। इसी मुद्दे पर अपनी सबसे बड़ी विरोधी पार्टी सपा को कई बार घेरती आईं हैं। लेकिन लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव में वह इस बात का खयाल रखना भूल गई। इसलिए उन्होंने चुनाव के लिए जारी की पहली लिस्ट में 7 ऐसे उम्मीवारों को टिकट दिए, जिन पर कई आपराधिक मामलें दर्ज हैं और कई मामलों में सुनवाई भी जारी है।

सहारनपुर की बेहट सीट से मो. इकबाल पर 9 केस दर्ज है, इनमें से कुछ मामलों की सुनवाई जारी हैं। मेरठ की किठौर सीट से गजराज सिंह पर भी मुकदमा चल रहा है। बिजनौर की चांदपुर सीट से मो. इकबाल पर भी गंभीर धाराओं में कई केस दर्ज है। गाजियाबाद की साहिबाबाद सीट से अमरपाल शर्मा पर भी कई केस दर्ज हैं। बुलंदशहर से अलीम खान पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं। इसी तरह कई और लोगों पर अपराधिक घटनाएं दर्ज हैं, अब देखना ये होगा कि इस पर बसपा क्या सफाई देगी।

फिल्म ‘रंगून’ का ट्रेलर रिलीज

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म रंगून का ट्रेलर रिलीज हो गया है। इस फिल्म में सैफ अली खान, शाहिद कपूर और कंगना रनौत मुख्य भूमिका में हैं। विशाल भारद्वाज की यह फिल्म 1940 के दशक में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि पर आधारित एक रोमांटिक फिल्म है। हालाँकि विशाल इस फिल्म को ओमकारा के बाद ही बनाना चाहते थे, लेकिन कुछ वजहों से ऐसा न हो सका।

देखिये रंगून का ट्रेलर:

इस फिल्म में कंगना रनौत फिल्म के दोनों लीडिंग एक्टर्स सैफ और शाहिद के साथ रोमांस करती नज़र आएंगी। फिल्म में दोनों एक्टर्स के साथ उनके कुछ बोल्ड सीन भी हैं। ट्रेलर रिलीज से पहले फिल्म के बारे में हालांकि सबकुछ गोपनीय रखने की कोशिश की गई, लेकिन शाहिद का आर्मी अफसर के रूप में लुक फिल्म की शूटिंग के दौरान ही लीक हो गया था।

इस फिल्म में कंगना रनौत साल 1940 के दशक की एक्शन डीवा जांबाज, मिस जूलिया की भूमिका निभा रही हैं। कंगना के लुक का पहला पोस्टर भी कल जारी किया गया है। साजिद नाडियाडवाला और विशाल भारद्वाज निर्मित ‘रंगून’ 24 फरवरी 2017 को रिलीज होगी।

समाजवादी पार्टी में सुलह की कोशिशें तेज, CM अखिलेश से मिलने पहुंचे शिवपाल

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

समाजवादी पार्टी में जारी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। आज शिवपाल यादव अखिलेश यादव से मिलने मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। जल्द ही दोनों मुलायम सिंह यादव से मिलने जाएंगे। इससे पहले देर रात तक मुलायम सिंह यादव के घर बैठक चलती रही। शिवपाल और अमर सिंह की मौजूदगी में घंटों चली बैठक में भी सुलह का कोई फॉर्मुला तय नहीं हो सका। इधर, आज़म खान भी लगातार दोनों गुटों के बीच सुलह की कोशिश में जुटे हैं।

गुरुवार को अखिलेश से बातचीत के बाद आज़म ने कहा कि अखिलेश का रुख पॉजिटिव है। उम्मीद है उन्हें उनकी कोशिशों में कामयाबी मिलेगी। सूत्रों के अनुसार शिवपाल यादव राज्य की राजनीति और अपनी सीट (जसवंत नगर) छोड़ने को तैयार हो गए हैं। साथ ही अमर सिंह भी पार्टी की कलह सुलझाने के लिए पार्टी छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन मुलायम सिंह यादव अध्यक्ष पद को लेकर अब भी अड़े हैं।

फिलहाल अखिलेश यादव ने पार्टी विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस कलह से दूर अपने-अपने चुनाव क्षेत्र में जाकर फौरन चुनाव प्रचार में जुटने को कहा है। अखिलेश ने गुरुवार को देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़ और मिर्जापुर जिला इकाई के अध्यक्ष नियुक्त किए थे। इन सभी जिलों के अध्यक्षों को शिवपाल यादव ने हटा दिया था।

शिवपाल मुलायम सिंह यादव के धड़े वाली समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाए गए हैं जब प्रतिद्वंद्वी धड़े ‘समाजवादी पार्टी’ नाम और ‘साइकिल’ चुनाव चिह्न का कब्जा हासिल करने के लिए चुनाव आयोग के समक्ष अपना बहुमत साबित करने की खातिर पार्टी सांसदों, विधायकों और प्रतिनिधियों का समर्थन जुटाने का जी-तोड़ प्रयास कर रहे हैं।

…जब चुनाव आयोग को मिला खून से लिखा ख़त

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

नेशनल हाईवे स्थित डासना टोल टैक्स के करीब बनी रोहन एन्क्लेव कॉलोनी निवासी बहन-भाई ने नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग तथा मुलायम सिंह को अपने खून से लिखा पत्र भेजा है। दोनों बच्चों अजीम तथा सना का कहना है कि सपा का चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ प्रदेश मुखिया अखिलेश यादव को ही दिया जाए।

इतना ही नहीं, दोनों ने धमकी भी दी है कि यदि अखिलेश यादव को चुनाव चिह्न साइकिल न दिया गया तो दोनों ही आत्महत्या कर लेंगे। इसके लिए जिम्मेदार मुलायम सिंह यादव व केंद्रीय चुनाव आयोग होगा। सना आध्यात्मिक नगर इंटर कॉलेज में हाई स्कूल की परीक्षा देने की तैयारी कर रही है, जबकि अजीम एक स्थानीय मदरसे का छात्र है।

दोनों ने बताया कि वे काफी दिन से मुलायम सिंह तथा अखिलेश यादव की जीतने की दुआ करते रहे हैं, लेकिन पिता-पुत्र में राजनीतिक एवं सार्वजनिक फूट पड़ जाने के कारण उन्हें भारी सदमा लगा है। इस सदमे के चलते ही उन्होंने अपने खून से मुलायम सिंह यादव तथा चुनाव आयोग को पत्र लिखा है।

सना का कहना है कि अखिलेश अंकल ने प्रदेश में जितने काम किए हैं, पहले किसी ने नहीं किए। अखिलेश यादव ने छात्राओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। 2014 में सना ने सपा के लिए एक गीत भी लिखा था।

सबको घर बैठे पैसे देगी मोदी सरकार

आँचल जायसवाल | Navpravah.com

मोदी सरकार देश के हर नागरिक को प्रत्येक महीने आमदनी के तौर पर एक निश्चित रकम देने की तैयारी में है। इस स्कीाम का फायदा सभी को होगा। चाहे व्यक्ति काम करता हो चाहे नहीं, इसके लिए कहीं जाना नहीं पड़ेगा।

भारत सरकार ‘यूनिवर्सल बेसिक इनकम’ नाम की एक नई योजना लाने पर विचार कर रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आम बजट में इसका ऐलान हो सकता है।

लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गायस्टैडिंग ने इस प्रस्तााव को तैयार किया है। मोदी सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सम्भावना जताई जा रही है कि बहुत जल्द इस सुविधा का लाभ देशवासियों को मिल सकेगा।

हालाँकि देश के सवा अरब लोगों को हर महीना 500 रुपये देने से सरकार पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।फिर भी इस स्कीम के लिए सरकार माइनिंग और बड़े प्रोजेक्ट पर अलग से सरचार्ज निकालकर राशि जुटा सकती है। मोदी सरकार शुरुआत में यह स्कीम सिर्फ गरीबों के लिए लॉन्च कर सकती है। इस तरह से सरकार 20 करोड़ लोगों को हर माह एक निश्चित रकम दे सकेगी।