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Wednesday, August 12, 2026
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भारतीय रेल की ‘विकल्प’ योजना: अब लम्बी क़तारों से मिलेगी मुक्ति

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

बच्चों की छुट्टियां पड़ने पर या त्योहारों के सीज़न में गांव जाने के लिए टिकट की कतार में घंटों पसीना बहाने वालों के लिए भारतीय रेल एक अद्भुत ‘विकल्प’ लेकर आई है। जी हां! भारतीय रेल द्वारा जल्द ही ‘विकल्प’ योजना की शुरुआत की जाने वाली है। इस योजना के तहत मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों में टिकट बुक कराने वाले यात्री उसी मार्ग से जाने वाली राजधानी, शताब्दी, दुरंतो या सुविधा जैसी प्रीमियर ट्रेनों से गंतव्य तक यात्रा कर सकेंगे।

क्या हैं खास बातें-

– विकल्प योजना में प्रतीक्षा सूची वाले यात्रियों को वैकल्पिक ट्रेन में कंफर्म बर्थ मिल सकेगी। इसके लिए टिकट बुक कराते समय विकल्प सुविधा का चयन करना होगा।
– यह योजना एक अप्रैल से हर मार्ग के लिए प्रभावी हो जाएगी। आपको बता दें कि फिलहाल ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के तहत दिल्ली-लखनऊ, दिल्ली-जम्मू और दिल्ली-मुंबई रेलखंड पर ‘विकल्प’ योजना पिछले साल एक नवंबर से प्रभावी है।
– नियमानुसार दूसरे ट्रेन में कंफर्म टिकट के एवज में यात्रियों से किसी भी तरह का न तो अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा और न ही किराये में अंतर आने पर लौटाया जाएगा।
– विकल्प योजना का उद्देश्य प्रीमियर ट्रेनों जैसे राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, सुविधा और अन्य विशेष ट्रेन में खाली रह गई सीटों का उपयोग करना है।
– विकल्प योजना का लाभ पहले ऑनलाइन उपलब्ध होगा। मौजूदा सॉफ्टवेयर में बदलाव के बाद काउंटर पर भी इसके साथ टिकट मिल सकेंगे।
– इस योजना के तहत टिकट बुक होने के बाद संबंधित यात्री के मोबाइल पर एसएमएस अलर्ट आएगा। हालांकि, इसमें यात्री का नाम नहीं होगा। साथ ही प्रतीक्षा सूची से भी उनका नाम हटा दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि रेलवे को हर साल टिकट रद कराने के एवज में तकरीबन 7,500 करोड़ रुपये रिफंड करने पड़ते हैं। इस योजना के अमल में आने से कुछ हद तक इसकी भरपाई की जा सकेगी। रेलवे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘विकल्प’ योजना को यात्रियों के अनुकूल बताते हुए कहा कि प्रीमियर ट्रेनों में फ्लेक्सी किराया लाने से कुछ बर्थ खाली रह जाती हैं, जबकि उसी समय मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रियों को सीट नहीं मिलती है। इसके जरिये दो उद्देश्यों को पूरा किया जा सकेगा। पहला, यात्रियों को कंफर्म टिकट मिल सकेगा और दूसरा, रिक्त सीटों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।

जानिए किसे कहा ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने ‘विश्व खेलों का डोनाल्ड ट्रंप’

अनुज हनुमत | Navpravah.com

इस समय पूरे विश्व में डोनाल्ड ट्रंप ही छाये हुए हैं । उनकी कट्टर चरमपंथी छवि ही शायद उन्हें मीडिया में बनाये हुए है। इस बार का वाकया आस्ट्रेलियाई मीडिया का है, जिसने आज भारतीय कप्तान विराट कोहली को विश्व खेलों का डोनाल्ड ट्रम्प करार देते हुए आरोप लगाया कि वह उनके खिलाड़ियों के खिलाफ़ झूठी खबरें फैला रहे हैं।

असल में आज ‘डेली टेलीग्राफ’ में छपे एक लेख में बेबुनियाद दावों के लिए कोहली की आलोचना की गई। इसमें निराशा भी जताई गई कि बीसीसीआई या आईसीसी ने उनके खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की। दरअसल लेख में कहा गया है कि, “विराट कोहली खेलों के डोनाल्ड ट्रंप हो गये हैं। “

आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया-भारत के बीच चल रही टेस्ट सीरीज़ के दौरान ऑस्ट्रेलियन मीडिया विराट पर लगातार निशाना साध रही है। हाल ही में सीरीज़ का तीसरा टेस्ट खत्म हुआ है। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के अखबार डेली टेलीग्राफ ने एक आर्टिकल में विराट की तुलना ट्रम्प से की है। इसमें लिखा गया, “कोहली वर्ल्ड स्पोर्ट्स के डॉनल्ड ट्रम्प बन गए हैं। प्रेसिडेंट ट्रम्प की तरह कोहली भी अपनी करतूतों के लिए मीडिया को दोष देते हैं।”

मौजूदा श्रृंखला में कोहली ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ ने डीआरएस फैसले लेते समय ड्रेसिंग रूम की मदद ली। स्मिथ ने एक मौके पर यह बात स्वीकारी, लेकिन इससे इनकार किया कि उन्होंने हर बार ऐसा किया। तीसरे टेस्ट के दौरान डेविड वॉर्नर के आउट होने पर कोहली ने अपने कंधे पकड़कर विकेट का जश्न मनाया चूंकि स्मिथ ने उनकी कंधे की चोट का मज़ाक उड़ाया था। लेख में कहा गया कि ऐसी कोई फुटेज उपलब्ध नहीं है और सरकारी प्रसारक ने स्मिथ से माफ़ी मांग ली थी चूंकि उसी पर दावा किया गया था कि स्मिथ ने कोहली की कंधे की चोट का मज़ाक उड़ाया। इसमें कहा गया, “टीवी फुटेज से साफ़ था कि एक साथी खिलाड़ी ने स्मिथ के कंधे पर हाथ रखा था।”

सबसे खास बात यह है कि इस विषय पर बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने ट्वीट कर विराट के पक्ष में लिखा है कि “ऑस्ट्रेलियन मीडिया विराट को खेल की दुनिया का ट्रम्प कह रही है। उन्हें विनर और प्रेसिडेंट मानने के लिए शुक्रिया!”

योगी की ‘कठपुतली’ वाली ख़बर निराधार, यूपी में केंद्र की नहीं होगी दख़ल

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद तमाम मीडिया चैनलों व अन्य सूत्रों से खबर आ रही थी कि भले योगी को मुख्यमंत्री बनाया गया हो, लेकिन राज्य की बागडोर केंद्र के हाथ में होगी। योगी मात्र कठपुतली होंगे, सूत्रधार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे। जैसे मनमोहन सिंह का रिमोट सोनिया गांधी के हाथ में था, वैसे ही योगी का रिमोट मोदी के हाथ में होगा।

ऐसी तमाम खबरें मात्र अफवाह साबित हुई हैं। जी हां! प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री को काम करने की पूरी आजादी होगी। भाजपा के बड़े नेताओं और आला सरकारी अधिकारियों ने खुद यह जानकारी दी है।

भाजपा के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के हवाले से अंग्रेजी अखबार इकनॉमिक टाइम्स ने खबर छापी है कि योगी को अपने निर्णय स्वतंत्रता से लेने का अधिकार होगा, उसमें केंद्र की दखलंदाज़ी नहीं होगी। नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर उन्होंने अखबार को बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से उतर प्रदेश सरकार को कंट्रोल करने की जो भी खबरें आ रही हैं, वे मात्र अफवाह हैं, जनता को गुमराह करने के लिए फैलाई जा रही हैं।

गौरतलब है कि पहले यह खबर आयी थी कि प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा को योगी के हर कदम पर नज़र रखने के लिए व लखनऊ में राज्य की प्रशासनिक नियुक्तियों की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। अधिकारियों और भाजपा नेताओं ने इस मामले को लेकर कहा कि यह खबर बिलकुल झूठी है। एक अधिकारी ने बताया, “कुछ मीडिया हाऊस ने जिस दिन मिश्रा के लखनऊ में होने की बात कही थी, उस दिन वह दिल्ली में थे। हम इन खबरों से चकित हैं।”

भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह के साथ संवेदनशील नियुक्तियों पर चर्चा अवश्य की जायेगी, लेकिन राज्य को केंद्र द्वारा पूर्णतः कंट्रोल किए जाने की बात बिलकुल झूठी है।

आपसी सहमति से हो अयोध्या विवाद का हल- सुप्रीम कोर्ट

चुनाव सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

राम मंदिर का मुद्दा केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, समस्त भारत के लिए एक मुद्दा है। दशकों से चले रहे इस विवाद के कारण यूपी की राजनीति में समीकरण बनते बिगड़ते रहे हैं। एक तरफ बीजेपी राम मंदिर मुद्दे को अहम मुद्दा मानती है और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की बात करती है तो, वहीं बाबरी मस्जिद कमेटी भी यहाँ बाबरी मस्जिद को लेकर हक जताती रही है, ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कुछ अहम बातें कही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राम-मंदिर विवाद पर कहा है कि ये मुद्दा दोनों पक्षों को आपसी सहमति से सुलझाना चाहिए। बाबरी मस्जिद विवाद का हल आपसी सहमति से होना चाहिए। इसके अलावा ज़रूरत पड़ने पर कोर्ट दख़ल देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोध्या विवाद सुलझाने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। इस मामले में किसी जज को मध्यस्थ के रूप में नियुक्त कर सकता है। इलाहबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या में विवादित ज़मीन को राम जन्मभूमि माना था। हाईकोर्ट ने ज़मीन को रामलला, निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी बोर्ड को देने की भी बात कही थी।

गौरतलब है कि अयोध्या विवाद के कारण यूपी की सियासत में आये दिन भूचाल आते रहते हैं और धार्मिक आस्था से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट आपसी सहमति से इस विवाद के निपटारे पर जोर देता रहा है।

डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय को ‘शिक्षा रत्न’ सम्मान

ब्यूरो | Navpravah.com

इंटरनेशनल प्रेस कम्युनिटी (आईपीसी) ने अपने 12वें पुरस्कार वितरण समारोह में ‘शिक्षा रत्न अवार्ड’ के लिए डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय का चयन किया है। 25 मार्च को फोर्ट स्थित मराठी पत्रकार संघ के सभागृह में आयोजित एक भव्य समारोह में यह अवार्ड डॉ.पाण्डेय को दिया जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए यह अवार्ड दिया जाता है। शिक्षा में आमूलचूर्ण परिवर्तन के लिए देश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में डॉ. जितेन्द्र ने समय-समय पर अपनी चिंता जाहिर की है। इसके अलावा शिक्षा की अलख जगाने के लिए ये दर्ज़नों सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन करते आ रहे हैं। आईपीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पी. पाण्डेय ने बताया, “प्रतिवर्ष हम चिकित्सा, सिनेमा, मीडिया, शिक्षा और समाजसेवा से जुड़ीं हस्तियों को अवार्ड देकर सम्मानित करते हैं ताकि देश में सहयोग, शांति और सौहार्द बना रहे।”

डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय की इस उपलब्धि पर संजीव निगम, विल्फ्रेड नरोन्हा, विवेक तिवारी, अमित द्विवेदी, विजय पाण्डेय, रामनयन दूबे, भूपेंद्र सिंह, अनिरुद्ध शर्मा, प्रतिभा मिश्रा, मंगलदेव ‘राज’ आदि लोगों ने अपनी शुभकामनाएं दी ।

विश्वस्तर पर जलवा बिखेरने को तैयार है पंजाबी फिल्म ‘सरवन’

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

पंजाबी गानों और गायकों ने तो अब तक देश-विदेश में धूम मचाई ही थी, अब एक  दमदार पंजाबी फिल्म भी वर्ल्डवाइड अपना जलवा बिखेरने जा रही है और खासकर जब ब्यूटी क्वीन प्रियंका चोपड़ा का नाम फिल्म से जुड़ जाये, तो भाई वाह! फिर क्या कहना! जी हां! विश्व स्तर पर अपना जादू बिखेरने जा रही यह पंजाबी फिल्म है ‘सरवन’।

निर्देशक करण गुलानी की फिल्म ‘सरवन’ 30 अप्रैल से 7 मई को होने वाले न्यू यॉर्क फिल्म फेस्टिवल में स्क्रीन होने वाली है। फिल्म का निर्माण प्रियंका चोपड़ा ने किया है।
यह पहली बार होगा, जब पंजाबी भाषा में बनी कोई फिल्म इस मुकाम तक पहुंची है।

फिल्म की इस अद्भुत सफलता को मात्र एक अनोखा संयोग मानते हुए करण ने बताया कि वे एक हिंदी फिल्म में प्रियंका को कास्ट करना चाहते थे और उसी सिलसिले में प्रियंका से मिलने गए थे। उस वक्त प्रियंका ने उन्हें बताया कि अभी वे अपने हॉलीवुड के प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं, वे यह फिल्म नहीं कर सकतीं। करण के लिए जवाब निराशाजनक था, लेकिन संयोग यह रहा कि प्रियंका ने करण से यह पूछ लिया कि वे अब आगे किस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले हैं। करण ने उनसे अपनी इस पंजाबी फिल्म के बारे में बताया। प्रियंका को फिल्म की कहानी इतनी पसंद आ गई कि उन्होंने तुरंत यह फिल्म करने का निर्णय लिया और उसी दिन उन्होंने साइनिंग अमाउंट भी करण को दे दिया। करण ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रियंका इस फिल्म से जुड़ेंगी, या आगे चलकर फिल्म को ऐसी कामयाबी मिलेगी।

करण ने फिल्म की भूमिका स्पष्ट करते हुए बताया कि इस फिल्म की कहानी ड्रग्स पर आधारित नहीं है, बस बैकड्रॉप ही है। फिल्म की कहानी एक ऐसे बेटे की कहानी है, जो बुरी राह पर चला जाता है और फिर वह अपने माता-पिता की जिंदगी में लौटने की कोशिश करता है। करण ने बताया कि फिल्म की कहानी असल ज़िन्दगी से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने फिक्शन का इनपुट डाला है।

करण ने बताया, “कनाडा में एक जगह है, जहां काफी पंजाबी रहते हैं और सभी रईस पंजाबी ही हैं। सभी इस कदर पैसे के पीछे पागल हैं कि आपस में ही एक दूसरे को मारते रहते हैं। इस फिल्म का किरदार भी वहां मर्डर करके आया है और फिर पंजाब में आकर उसी घर में छुप जाता है, जिसके परिवारवालों की हत्या उसने की है। फिर उसके बुरे होने से एक योग्य बेटा बनने तक की कहानी है यह फिल्म।”
करण ने बताया कि हम अक्सर अपने माता पिता की बातों को नज़रंदाज़ करते हैं और आगे चलकर बहुत पछताते हैं। तब महसूस होता है कि वहुत देर हो गई गलतियाँ सुधारने में। करण के अनुसार इस फिल्म की कहानी कहीं न कहीं उनकी जिंदगी के भी बेहद करीब है।

तेजस्वी यादव पर भड़के सुशील मोदी, कहा, “नॉन मैट्रिक से अच्छे हैं योगी आदित्यनाथ”

tejasvi yadav's statement on Srijan Scam

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

जहाँ एक तरफ योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री पद संभालते ही एक्शन में आ गए हैं, वहीं उनके सीएम बनने से बौखलाए लोगों का रिएक्शन भी थमने का नाम नहीं ले रहा। अब रिकॉर्ड जीत दर्ज करने के बावजूद भाजपा इन रिएक्शन्स पर कोई पलटवार न करे, ऐसा संभव नहीं है। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने बिहार के उप मुख्यमंत्री व आरजेडी नेता लालू प्रसाद यादव के सुपुत्र तेजस्वी यादव की बोलती बंद कर दी है। उन्होंने तेजस्वी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘नॉन मैट्रिक’ से तो अच्छे ही हैं।

दरअसल तेजस्वी यादव ने याेगी आदित्यनाथ के उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री चुने जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि योगी आदित्यनाथ उत्तरप्रदेश के योग्य नहीं हैं। वह राज्य का विकास नहीं, विनाश करेंगे। वह जोड़ेंगे कम, तोड़ेंगे ज्यादा। आपको बता दें कि लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी के सपोर्ट में थी।

तेजस्वी के इस बयान का मुंहतोड़ जवाब देते हुए भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उन्हें नॉन मैट्रिक होने की याद दिला दी। मोदी ने कहा, “जो व्यक्ति मैट्रिक पास नहीं कर सकता, वह ‘कौन मुख्यमंत्री पद के योग्य होगा, कौन नहीं’, यह तय नहीं कर सकता। ” इतना ही नहीं, उन्होंने तेजस्वी यादव की मां और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की शैक्षणिक योग्यता की भी याद दिलायी। सुशील मोदी ने कहा, “राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री बनकर बिहार को जो नुकसान पहुंचाया, योगी आदित्यनाथ उनसे तो बेहतर हैं!”

आपको बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले बिहार के राघोपुर सीट से नॉमिनेशन भरने वाले तेजस्वी ने एफिडेविट में खुद को नॉन मैट्रिक बताया है और उन्होंने नई दिल्ली के आरके पुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल(DPS)से 9वीं तक की पढ़ाई पूरी की है, जबकि योगी आदित्यनाथ गणित विषय से स्नातक हैं।t

टेलि‍कॉम इंडस्‍ट्री की सबसे बड़ी डील, Idea-vodafone ने मिलाया हाथ

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

‘भारती एयरटेल’ व ‘रिलायंस जियो’ को कड़ी टक्कर देने की दिशा में ‘आईडिया’ व ‘वोडाफोन’ ने मिलकर एक बेजोड़ उपाय ढूंढ निकाला है। अब दोनों टेलीकॉम कंपनियां एक साथ मिलकर प्रतियोगी कंपनियों को मात देंगी। जी हां! टेलि‍कॉम ऑपरेटर ‘आइडि‍या’ के बोर्ड ने ‘वोडाफोन’ के साथ मर्जर को मंजूरी दे दी है। माना जा रहा है कि‍ यह टेलि‍कॉम इंडस्‍ट्री की सबसे बड़ी डील है। ‘आइडि‍या’ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार वोडाफोन के पास इस संधि की 45% हि‍स्‍सेदारी होगी। वहीं, आइडि‍या के पास 26% हि‍स्‍सेदारी होगी।

इंडिया रेटिंग एंड रिसर्च एजेंसी के मुताबिक इस डील के सफल होने पर मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी टेलिककॉम सेक्टर में भारत की सबसे बड़ी कंपनी होगी, जिसका मार्केट शेयर 40% और सब्सक्राइबर बेस 38 करोड़ होगा। एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि वोडाफोन और आइडिया के मर्जर से बनने वाली कंपनी का रेवेन्यू 77,500 करोड़ से 80,000 करोड़ रुपए होगा।

क्या हैं डील के अहम् पहलू-

– आइडि‍या के अनुसार‍ वोडाफोन करीब 4.9% हि‍स्‍सेदारी आइडि‍या प्रोमोटर्स को ट्रांसफर करेगी। मर्जर के बाद बनने वाली नई कंपनी टेलिकॉम सेक्टर में देश की सबसे बड़ी कंपनी होगी, जिसके करीब 38 करोड़ कस्टमर्स होंगे।

– आइडि‍या प्रोमोटर्स के पास एडिशनल 9.5% हि‍स्‍सेदारी लेने का अधि‍कार है। प्रोमोटर्स 130 रुपए प्रति‍ शेयर के हि‍साब से हि‍स्‍सेदारी ले सकते हैं।

– डील से पहले आइडि‍या अपनी इंडस में मौजूद 11.15 फीसदी हि‍स्‍सेदारी को बेचकर क़र्ज़ कम करेगी। डील से वोडाफोन ग्रुप का कुल क़र्ज़ 8.2 अरब डॉलर तक कम होगा।

– आइडि‍या-वोडाफोन की डील 72 रुपए प्रति‍ शेयर के हि‍साब से पूरी होगी। यह डील 2018 तक पूरी होने की उम्‍मीद है।

– मर्जर कंपनी के बोर्ड में कुल 12 डायरेक्‍टर्स होंगे। दोनों कंपनि‍यों के 3-3 डायरेक्‍टर्स होंगे। नई कंपनी के बोर्ड में 6 इंडि‍पेंडेंट डायरेक्‍टर्स होंगे।

 – वोडाफोन मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी में सीईओ और सीएफओ पद का चुनाव करेगा, जबकि कंपनी का चेयरमैन घोषित करने का हक आइडिया को होगा।

आपको बता दें कि अभी देश में एयरटेल 26.34 करोड़ कस्टमर्स के साथ देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर है। वोडाफोन इंडिया 20.028 करोड़ कस्टमर्स के साथ दूसरी और आइडिया सेल्युलर 18.77 करोड़ कस्टमर्स के साथ तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है। दोनों की संधि के बाद, इनके कुल 38 करोड़ सब्सक्राइबर्स हो जाएंगे। सीएलएसए की एक रिपोर्ट के मुताबिक वोडाफोन-आइडिया को मिलाकर बनने वाली नई कंपनी के पास 2018-19 तक मोबाइल मार्केट की 43% हिस्सेदारी होगी, जिससे यह पहले नंबर पर होगी। दूसरे नंबर पर भारती एयरटेल के पास 33% और रिलायंस जियो की 13% हिस्सेदारी रहेगी।

“करवटें बदलते रहे सारी रात हम”

जटाशंकर पाण्डेय | Navpravah.com

“करवटें बदलते रहे सारी रात हम, आप की कसम आप की कसम।” ये अल्फ़ाज़ आज कल समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की ज़बान पर सज रहे हैं। 15 मार्च को उत्तर प्रदेश पुलिस के चंगुल में आये गायत्री ने कभी सपने में भी न सोचा होगा कि सत्ता हाथ से छूटते ही ऐसी दुर्गति होगी। एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और उसकी नाबालिग बच्ची के यौन शोषण के आरोपी गायत्री प्रजापति, जो सत्ता में रहते हुए पुलिस-रक्षित थे, सत्ता परिवर्तन के साथ ही पुलिस के कब्जे में आ गए और इन्हें लाव लश्कर के साथ लखनऊ जेल भेज दिया गया।

होत न एक समान सबै दिन, होत न एक समान। क्या पता था कि ऐसा दिन भी आएगा जब 7 सितारा होटलों से ले कर अच्छे से अच्छे गेस्ट हाउस, डाक बंगला, तथा सारी सरकारी सुख सुविधाओं को भोगने के बाद उन्हें लखनऊ जेल की सख्त फर्श पर तमाम कैदियों के बीच अपने पुराने कुकृत्यों को याद करते बुरे स्वप्नों के साथ रातें गुजारनी पड़ेंगी। जब इंसान जमीन से एक खास उचाई पर पहुँच जाता है, तो वह नीचे देखना बंद कर देता है। अगर वह नीचे भी देखता रहे, तो उसका पतन न हो, लेकिन वह सिर्फ ऊपर ही देखने लगता है और सत्ता का मद भी हो तो वह मदान्ध हो जाता है। भविष्य में उसका कोई कुछ बिगाड़ सकता है, ऐसा वह सोचता ही नहीं।

गायत्री प्रजापति के करीबी बताते हैं कि वो एक ग़रीब परिवार से आते हैं और साल 2002 तक उनकी स्थिति ये थी कि वो बीपीएल कार्ड धारक थे, यानी ग़रीबी की रेखा से नीचे आते थे। देखते ही देखते विधायक से कैबिनेट मंत्री तक का सफर सुपरसोनिक स्पीड में ऐसे तय कर गए, कि अच्छे अच्छे तिकड़मी गच्चा खा गए। ज़मीन घोटाला, खनन घोटाला, रोडवेज़ घोटाला, ऐसे तमाम प्रकार ले तमगे गले में लटकाए बिंदास उन्मुक्त पंछी का जीवन जी रहे गायत्री इस बलात्कार के केस में ऐसे फंसे, कि निकल नहीं पाए। निकल भी जाते, लेकिन ऐन वक़्त पर पार्टी की ‘हार’ ने ‘बेकार’ बनाकर रख दिया बेचारे मंत्री जी को!

जेल पहुँचने के बाद गुस्साए, तमतमाये  मंत्री जी ने सुबह का नाश्ता नहीं लिया। मुर्ग-मुसल्म और शाही कबाब का लंच और डिनर करने वाले साहब जी को रात में मिली आलू बैगन की सब्जी, उड़द की दाल और रोटियां। बताइये भला, कहाँ शाही कबाब और कहाँ कलूटे बैंगन! जो ‘आम’ कैदियों को खाना मिलता है, वही ‘खास’  मंत्री जी को भी दिया गया। गायत्री जब से जेल में आए थे, उन्हें काफी बेचैनी महसूस हो रही थी। वे कई बार पानी पी रहे थे, उनका माथा पसीने से सराबोर हो रहा था। उन्होंने इसकी शिकायत जेल अधिकारियों से भी की, लेकिन कोई खास असर नहीं हुआ। किसी प्रकार की सुविधा इन्हें प्रदान नहीं की गई। उनके लिए एकमात्र राहत की बात ये रही कि इसी केस से संबंधित इनके  2 अन्य साथीदार अपराधी भी इसी बैरक में बंद थे। शायद इससे उनको थोड़ी सांत्वना मिली हो।

देर रात उनको थोड़ी नींद आई, फिर सुबह जल्दी ही उठ कर, तरोताज़ा होकर इन्होंने कुछ समय भगवान की प्रार्थना भी की।  भगवान को मानने वाले ये लोग भी ऐसे कृत्यों में लिप्त होते हैं साहब, क्योंकि ये लोग सपा के मार्गदर्शक मुलायम सिंह के कथन को सर आँखों पर रखते हैं, ‘लड़के हैं, गलती हो जाती है कभी-कभी।’ इन्हें यह पता नहीं होता है कि भगवान कोई इनके खासम-खास नहीं होते हैं। जो भगवान इनके हैं, वही औरों के भी होते हैं और उनके दरबार में देर और अंधेर दोनों ही नहीं है। पहली बात, गलत काम करने वाले की आत्मा तुरंत वह कार्य करने से पहले हिचकिचाती है, लेकिन मन की सुनने के कारण अगर मान लीजिए इंसान ऐसा कर भी देता है, तो उसकी आत्मा उसे बाद में तो धिक्कारती ही है। सम्हलने वाला यहाँ भी सम्हल जाता है। जो ‘अति-चतुर’ होता है, वह यहाँ भी नहीं सम्हलता, वो ये समझता है कि भगवान की आंखें भी उसके सामने धोखा खा जाती हैं, लेकिन भगवान को वो धोखा देता नहीं है, वह अपने आप को धोखा  देता है। फिर आप यह तो जानते ही हैं कि ‘अति सर्वत्र वर्ज्यते’, एक न एक दिन पाप का घड़ा फूटता ही है।

‘अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत’। अब न सत्ता है, न परिजन हैं, न बाहु हैं, न बली हैं। अब एकमात्र अदालत के फैसले का आसरा है, इसमें भी इनका दिल इनसे तो जरूर कहता होगा कि क्या होने वाला है। सोचते ज़रूर होंगे कि मैंने अच्छा बुरा, जो किया है, उसकी क्या सजा होनी चाहिए। यदि अब भी गलती मान लें तो गनीमत है और ऐसा तभी संभव है, जब ये सत्ता के गरूर से नीचे उतरेंगे। दूसरी सम्भावना यह है कि मन ही मन सोच रहे होंगे, ‘निकलने के बाद सबकी खबर लेगें, या हमारी सरकार आने दो, तब बताऊँगा।’ अगर इंसान अपने अहंकार से नीचे उतरे तो सुधार हो सकता है, वर्ना ‘जस करनी तस भोगहु ताता..जेल सड़त काहें पछताता’!

बलात्कार पीड़िता ने खोली यूपी पुलिस की पोल

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

उत्तर प्रदेश पुलिस हमेशा ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ कहावत को चरितार्थ करती दिखाई देती है, अर्थात जिसकी सत्ता, उसकी पुलिस। जी हां! उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति पर बलात्कार का आरोप लगानेवाली महिला ने उत्तर प्रदेश पुलिस के दोहरे बर्ताव की पोल खोली है।

पीड़िता ने यूपी पुलिस द्वारा मामले को गंभीरता से न लेने और मुकदमा दर्ज ना करने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। तब जाकर कोर्ट ने FIR दर्ज करने का आदेश किया और तब गौतमपल्ली थाने में गायत्री प्रजापति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

गायत्री प्रजापति की गिरफ़्तारी के बाद पीड़िता ने अपनी दर्दभरी दास्ताँ सुनाई, पीड़िता पूरे प्रकरण पर कई लोगों के क्रियाकलापों पर सवाल उठाये, पीड़िता ने एक इंटरव्यू के दौरान पूरे मामले में कई राज खोले। उसने कहा कि गायत्री प्रजापति ने मेरे साथ गैंगरेप किया और गन्दी-गन्दी तस्वीरें निकालीं। गायत्री के साथ दो लोग और भी थे।

पीड़िता के मुताबिक दुष्कर्म के बाद उसे धमकाया गया था। उसने कहा, “उन लोगों ने मेरी बेटी का यौन शोषण किया। मेरी बेटी एकदम असहज हो गई थी और वो जिन्दा नहीं रहना चाहती थी। मेरी बेटी के साथ जो कुछ हुआ, मैं उसे सहन करने में असमर्थ थी।”

पीड़िता ने यूपी पुलिस की दबंगई बयां करते हुए बताया, “पुलिस ने कहा कि सरकार उनकी है और आरोपी सरकार में मंत्री है। पुलिस आरोपी की हिमायत में लगी हुई थी। मैंने मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, मुझे धक्का देकर बाहर किया गया था। ऐसे में हमारे पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा कोई चारा ही नहीं बचा था, अंत में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद ही इस मामले में मुकदमा दर्ज हो सका।”

पीड़िता ने कहा, “जो पुलिस सपा के शासन में गायत्री को नहीं पकड़ पायी, सरकार बदलते ही पुलिस ने गायत्री प्रजापति को पकड़ लिया! अखिलेश यादव और उनकी सरकार से कोई उम्मीद ही नहीं रह गई थी। यूपी पुलिस पर भी बिलकुल यकीन नहीं है। महिला ने कहा कि अब नयी सरकार से उन्हें न्याय व सुरक्षा की पूरी उम्मीद है। उसने कहा, “हमारी बेटी और हमारे मददगार सुरक्षित रहें। नयी सरकार से यही उम्मीद करती हूँ कि दोषी गायत्री प्रजापति को कड़ी सजा मिले।

उल्लेखनीय है कि कई दिनों तक फरार रहने वाले प्रजापति के साथियों को पुलिस पहले ही दबोच चुकी थी, लेकिन गायत्री प्रजापति की गिरफ़्तारी 15 मार्च को हुई। भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच गायत्री प्रजापति को कोर्ट में पेश किया गया था। उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पूर्व में अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार के आरोप में गायत्री प्रजापति को कैबिनेट से बर्खास्त भी कर दिया था, लेकिन मुलायम सिंह यादव के दबाव में फिर से मंत्रालय दे दिया गया।