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Wednesday, August 12, 2026
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एक अद्भुत ‘कल्पना’, जिसने ‘अबला’ को सबला साबित किया

अनुज हनुमत | Navpravah.com

यूँ तो हर किसी को एक न एक दिन इस खूबसूरत दुनिया को अलविदा कहना होता है, लेकिन दुनिया में कुछ लोग सिर्फ जीने के लिए आते हैं, मौत महज उनके शरीर को खत्म करती है। ऐसे ही जांबाजों में से एक भारत की बहादुर बेटी कल्पना चावला थीं। कल्पना चावला एक ऐसी महिला थीं, जिन्होंने अपने मजबूत इरादों से पूरे विश्व में यह साबित कर दिया, कि जब आप कोई कार्य पूरी लगन के साथ करते हैं, तब आप उसमें अवश्य सफल होते हैं। कल्पना अंतरिक्ष की यात्रा करने वाली पहली भारतीय महिला थीं। भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्‍पना की उड़ान रुक गई, लेकिन आज भी वे दुनिया के लिए एक मिसाल हैं।

नासा वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का जन्म हरियाणा के करनाल में हुआ था। कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थीं, हालांकि बाद में उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी। उनके पिता का नाम बनारसी लाल चावला और मां का नाम संज्योती था। कल्पना का शुरुआती शिक्षण करनाल के ‘टैगोर बाल निकेतन’ में हुई। जब वह आठवीं कक्षा में पहुंचीं, तो उन्होंने अपने पिता से इंजिनियर बनने की इच्छा जाहिर की। पिता उन्हें डॉक्टर या टीचर बनाना चाहते थे।

परिजनों के अनुसार बचपन से ही कल्पना की दिलचस्पी अंतरिक्ष और खगोलीय परिवर्तन में थी। वह अकसर अपने पिता से पूछा करती थीं कि ये अंतरिक्षयान आकाश में कैसे उड़ते हैं? क्या मैं भी उड़ सकती हूं? पिता बनारसी लाल उनकी इस बात को हंसकर टाल दिया करते थे। कल्पना ने फ्रांस के जॉन पियर से शादी की, जो एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे।

उल्लेखनीय है कि अंतरिक्ष में उड़ने वाली इस पहली भारतीय महिला से पहले राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत अंतरिक्ष यान से उड़ान भरी थी। कल्पना ने अपने पहले मिशन में 1.04 करोड़ मील सफर तय कर पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं और 360 घंटे अंतरिक्ष में बिताए। इसके बाद नासा और पूरी दुनिया के लिए दुःखद दिन तब आया, जब अंतरिक्ष यान में बैठीं कल्पना अपने 6 साथियों के साथ एक भयानक दुर्घटना का शिकार हुईं। कल्पना की दूसरी यात्रा उनकी आखिरी यात्रा साबित हुई और 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया। देखते ही देखते अंतरिक्ष यान के अवशेष टेक्सस शहर पर बरसने लगे।

इस दुःखद घटना के बाद कल्पना चावला के वे शब्द भी सत्य हो गए जिसमें उन्होंने कहा था, “मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं। हर पल अंतरिक्ष के लिए ही बिताया है और इसी के लिए मरूंगी।” कल्पना चावला आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारत ही नहीं, वरन समूचे विश्व की लाखों करोड़ों महिलाओं के लिए वे एक प्रेरणा हैं, देश का गौरव हैं और भारत के इतिहास का एक अजर अमर हिस्सा बन गई हैं।

JIO के ग्राहकों के लिए बड़ी खुशखबरी, TDSAT ने FREE सर्विस पर रोक लगाने से किया इंकार

अनुज हनुमत | Navpravah.com

अगर आप जियो का मुफ्त इंटरनेट प्रयोग कर रहे हैं तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दूरसंचार विवाद निपटान एवं अपीलीय न्यायाधिकरण (TDSAT) ने रिलायंस जियो की प्रचार प्रोत्साहन पेशकश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब साफ है कि Jio के हैप्पी न्यू ईयर प्लान के तहत मिल रही सभी फ्री सुविधाए 31 मार्च तक जारी रहेंगी । रिलायंस जियो जल्द ही इस सम्बन्ध में सूचना जारी कर सकता है ।

आपको बता दें कि रिलायंस जियो ने पिछले साल सितंबर में मुफ्त वायस और डेटा की पेशकश की थी। बाद में दिसंबर में इस मुफ्त पेशकश को बढ़ाकर 31 मार्च, 2017 कर दिया गया। नए ऑपरेटर द्वारा अपनी मुफ्त पेशकश को 90 दिन की तय सीमा से अधिक जारी रखने की अनुमति देने के ट्राई के फैसले के खिलाफ भारती एयरटेल और आइडिया जैसी ऑपरेटरों ने टीडीसैट में अपील की है।

फ़िलहाल टीडीसैट ने टेलीकॉम रेगूलेटर ट्राई (TRAI) से जियो को मुफ्त सेवाएं जारी रखने की अनुमति देने वाला 31 जनवरी का पत्र फिर से जांचकर दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है।

तिकड़मी नेता: नक़ली ‘सेकुलरिज्म’ से जनता को बरगलाने की जुगत में!

जटाशंकर पाण्डेय | Navpravah.com

भारतीय राजनेताओं के अनुसार, एक बहुत बड़ा मुद्दा, जिसमें जनता को लपेटा जा सकता है, वह है ‘सेकुलरिज्म’। हर पार्टी अपने को सेकुलर घोषित करने पर तुली रहती है , हर बड़ा नेता अपने को सेकुलर दिखाने की कोशिश करता है। नेताओं ने दरअसल सेकुलरिज्म की परिभाषा ही बदल दी है। भारत वर्ष में सेकुलरिज्म को सिर्फ हिन्दू-मुस्लिम समानता, या तमाम वर्ण जाति की समानता का नाम भर दे दिया गया है, जबकि यही असमानता फैलाकर तमाम राजनीतिक पार्टियां अपने वोट बैंक भरती हैं। यादवों के हितैषी सिर्फ हम, दलितों के हितैषी सिर्फ हम, मुस्लिमों के हितैषी सिर्फ हम, जाटों के हितैषी सिर्फ हम, वगैरह, वगैरह, वगैरह।

भारत में जितनी राजनैतिक पार्टियां हैं, उनमें से अधिकतर पार्टियों को भारतीय जनता पार्टी बदबू आती है। सभी विपक्षी पार्टियां एक जगह पर एक मत हो जाती हैं कि भाजपा जनता के अंदर जाति-वाद, प्रान्त-वाद, धर्म-वाद फैलाती है, देश को तोड़ने का काम करती है, हिन्दू मुस्लिम के बीच फूट डालने का काम करती है, लेकिन फिर वही बात साहब, “ये जो पब्लिक है सब जानती है।”

पिछले 60 सालों से सभी पार्टियाँ जनता के बीच यही जहर घोल कर सत्ता पर काबिज रहने के लिए जनता को बेवकूफ बना रही थीं। ये जनता को बताते रहे कि हम धर्म निरपेक्ष हैं। जातीय भेद भाव से परे एक मात्र हम हैं जो तुम्हें स्थिर और स्वच्छ सरकार दे सकते हैं। जनता का भोलापन और इनका बड़बोलापन! ये जनता को गुमराह करते रहे और राजसुख भोगते रहे लेकिन भैया, “ये पब्लिक है ये सब जानती है, ये जो पब्लिक है।”

इस बार के विधानसभा चुनाव में जनता ने इन्हें करारा जबाब दिया। ऐसी शिकस्त दी की एक इतिहास रच गया। आज तक के इतिहास में ऐसी जीत उत्तर प्रदेश में किसी पार्टी की नहीं हुई थी, जैसी जीत भा ज पा ने इस बार हासिल की है। आज तक किसी पार्टी को जनता का ऐसा समर्थन नहीं मिला था। पूरे भारत में न किसी पार्टी को, न किसी नेता को, न किसी मीडिया के पास ऐसा आंकड़ा था कि भाजपा इतनी सीट से विजयी होगी, लेकिन जनता जुबानी पुलाव खाते खाते ऊब चुकी है। झूठे वादे, झूठे दावे, खयाली रसगुल्ले, वो साइकिल, वो लैपटॉप, फ़ोन, बाग़- बगीचे, हाथी, पुतले, कुछ गले के नीचे नहीं उतरा और जनता ने ऐसी करारी चपत जड़ दी कि विपक्षियों के जबड़े हिल गए।

हिन्दू ने भाजपा को चुना, मुस्लिम ने भाजपा को चुना। ब्राह्मण ने, क्षत्रिय ने, वैश्य ने, शुद्र ने, सबने भाजपा को चुना! सेक्युलर पार्टियां मुह ही ताकती रह गईं! अब इतनी बुरी तरह हार के बावजूद ये अपनी हार और हार का कारण स्वीकारने को राज़ी नहीं हैं। इन्हें आज भी लग रहा होगा कि ये रात्रि में कोई भयानक स्वप्न देख रहे हैं। बात इनके गले से नीचे नहीं उतर रही है कि ये या इनकी पार्टी हार गई है। हार किसी तरह मानते भी हैं, तो यह कहकर कि इवीएम मशीन में गड़बड़ी हुई है। बटन कोई भी दबाया गया है, ‘हाथी’ का, ‘साईकिल’ का, या ‘पंजे’ का, लेकिन मुहर ‘कमल’ पर ही लगी है। आज भी ये चुनाव आयोग के सामने यही दुहाई दे रहे हैं क्योंकि इन ‘सेक्युलर’ पार्टियों की दलील है कि हिंदुत्ववादी भाजपा का जीतना ‘भ्रष्टाचारमुक्त भारत’ जितना असंभव था।

सपा-कांग्रेस गठबंधन की समझ में कतई नहीं आ रहा कि इस क्षेत्र में 80% मुस्लिम, 15% यादव, 5% बाकी लोग, तो 95% वोट तो पक्का हमारा था, भाजपा आखिर जीती कैसे! बहन मायावती सोच रही हैं, 70% हरिजन, 20% बाकी सब, ये तो बसपा की सीटें थीं, फिर ये भाजपा कहाँ से टपकी! असली टक्कर तो बुआ-भतीजे में थी, ये गड़बड़ घोटाला कैसे हुए?

आज भी ये लोग जनता को गाँधी जी का पाठ, हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, आपस में सब भाई-भाई, पढ़ाते रहते हैं और खुद पढ़ते रहते हैं तिकड़मी गणित, मुसलमानों का इतना वोट मेरा, यादवों का इतना वोट मेरा, हरिजनों का इतना वोट मेरा। एक मात्र सवर्ण ऐसे हैं जो सभी पार्टियो को वोट देते हैं, क्योंकि सभी पार्टियों में ये लोग कुछ न कुछ टिकट पाते हैं। इसलिए इनका वोट बट के थोड़ा बहुत सब पार्टियों को मिलता है, लेकिन इनको यह नहीं पता है कि इतने दिनों की शिक्षा के बाद भारतीय जनता में कुछ तो ज्ञान जरूर उत्पन्न हुआ है। उसका प्रमाण इस चुनाव में देखने को मिला और जनता ने बता दिया कि नेता जी! हम ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र नहीं हैं, हम हिन्दू या मुस्लिम नहीं हैं, हम भारतीय हैं और देश के विकास के लिए नेता का चयन करने के ज्ञान की शिक्षा हम ले चुके हैं। अपने हिसाब किताब की चौपड़ी अब अपने तकिये तले रखिये, और मीठे मीठे सपने देखिये।

नोट बंदी के बाद जनता को केंद्र सरकार के खिलाफ तरह तरह से भड़काने वाले, भाजपा को कट्टर हिंदूवादी करार देने वाले , जनता को तमाम प्रलोभन देने वाले ये जान लें, कि जनता ने इस बार किसी वर्ण को नहीं, धर्म को नहीं, जाति को नहीं, प्रलोभन में आकर नहीं, राज्य हित में मतदान किया है, राष्ट्र हित में मतदान किया है। मुख्यमंत्री का चेहरा न जानते हुए भी अपने देश के प्रधानमंत्री पर विश्वास किया है, उनके तमाम प्रयासों को सराहने का प्रमाण दिया है।

बैलेट पेपर द्वारा दोबारा वोटिंग कराने की मांग कर रही ‘गुंडाराज’ पार्टियों के दिन लदते नज़र आ रहे हैं। इसीलिए खलबली मची हुई है। लेकिन उन तमाम महानुभावों को जनता ने अपना प्रेम भरा सन्देश दे दिया है कि ज़्यादा खलबलाइये मत, अब भारत वास्तव में ‘गणतंत्र’ पर चलेगा, ‘सेक्युलर’ तंत्र

सिल्वर स्क्रीन पर बोनी कपूर की ‘मॉम’ फिर बिखेरेंगी जलवा

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

‘मिस हवाहवाई’ से ‘शशि गोडबोले’ तक, तमाम अलग अलग प्रकार के किरदार बखूबी निभाकर अपनी अदाकारी के जलवे बिखेरने वाली गोल्डन अभिनेत्री श्रीदेवी एक बार फिर सिल्वर स्क्रीन पर अपना जादू दिखाने जा रही हैं। 15 साल के लंबे अंतराल के बाद ‘इंग्लिश विंग्लिश’ में नज़र आई अभिनेत्री इस बार एक सौतेली माँ का किरदार निभाती नज़र आएंगी। उनकी अपकमिंग फिल्म का नाम है ‘मॉम’। यह फिल्म एक सौतेली बेटी के साथ, मां के रिश्ते पर अधारित है। फिल्म का पहला लुक भी रिलीज़ हो चुका है।

हाल ही में एक अवार्ड शो में मूवी को लॉन्च किया गया। फिल्म का परिचय कराते हुए अवार्ड शो में सलमान खान ने श्रीदेवी की तुलना तीनों खान व अक्षय कुमार से की। सलमान खान ने कहा, “आमिर खान, शाहरुख खान, अक्षय कुमार और मैंने कई फिल्मों में काम किया है। आमिर ने 50 फिल्में की होंगी। उनके पास बहुत समय है, क्योंकि वो साल में एक ही फिल्म करते हैं। शाहरुख ने 100 फिल्में की होंगी। मिलकर साथ में हमने 250-275 फिल्में की होंगी, लेकिन एक लेजेंड हैं, जो काफी टैलेंटेड, डेडिकेटिड, मेहनती और प्रोफेशनल एक्टर हैं, वे हैं श्रीदेवी।”

श्रीदेवी ने फिल्म का अपना पहला लुक ट्विटर पर खुद साझा किया है। फिल्म का नाम अंग्रेजी में लिखे जाने के अलावा पोस्टर पर कई भाषाओं में ‘मॉम’ यानि की ‘माँ’ लिखा गया है। तस्वीर के साथ श्रीदेवी ने लिखा है, ”जब एक महिला को चुनौती मिलती है.. मैं यहां मॉम का पहला लुक जारी कर रही हूं। मॉम का पहला लुक।” इस तस्वीर में श्रीदेवी के पाश्र्व में उनका काला परिधान नजर आ रहा है।

श्रीदेवी की इस आगामी फिल्म को उनके पति बोनी कपूर ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म का निर्देशन रवि उदयवार कर रहे हैं। फिल्म की कहानी और पटकथा का अभी खुलासा नहीं किया गया है। ‘मॉम’ फिल्म में अक्षय खन्ना, अभिमन्यु सिंह और पितोबश त्रिपाठी भी नजर आने वाले हैं। नवाजुद्दीन सिद्दकी अतिथि भूमिका में नजर आएंगे।

गैंगरेप के आरोपी गायत्री प्रसाद प्रजापति लखनऊ से गिरफ्तार

अनुज हनुमत | Navpravah.com

लखनऊ | उत्तर प्रदेश की सियासत बदलते ही सूबे की सियासी तस्वीर भी बदलती हुई दिख रही है। यूपी के पूर्व कद्दावर एवं बाहुबली मंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता गायत्री प्रसाद प्रजापति को लखनऊ से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, गायत्री प्रसाद प्रजापति पर गैंगरेप का आरोप है और अब सपा के इस नेता को लखनऊ के आलमबाग थाने में लाने की तैयारी की जा रही है। इस बात की पुष्टि यूपी के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) दलजीत चौधरी ने एक चैनल को दिए बयान में कही।

आपको बता दें कि गैंगरेप मामले में केस दर्ज होने के बाद गायत्री प्रसाद प्रजापति कई दिनों से फरार था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था, जहां अदालत ने गायत्री को जल्द गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। अब यूपी में चुनाव के बाद हालात बदल चुके हैं। गायत्री की गिरफ्तारी यूपी पुलिस के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।

कल लखनऊ पुलिस ने गायत्री प्रसाद प्रजापति पर शिकंजा कसने के लिए उनके दोनों बेटों को हिरासत में लिया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गायत्री के बेटों ने आरोपियों को शरण दी थी।

क्या आरोप था गायत्री प्रजापति पर-

महिला का आरोप है कि वह प्रजापति से लगभग तीन साल पहले मिली थी। उस समय मंत्री ने उसकी चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर बेहोशी की हालत में उसके साथ बलात्कार किया और उसकी तस्वीरें भी ले ली। महिला ने आरोप लगाते हुए कहा था कि इसके बाद प्रजापति ने उसको कई बार तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करते हुए रेप किया।

कौन हैं गायत्री प्रजापति?

गायत्री प्रजापति पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं। उन्हें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी किया था, लेकिन बाद में दोबारा शामिल कर लिया। इस बार उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर अमेठी से किस्मत आजमाई, लेकिन हार गए।

अभी कुछ दिन पहले ही आचार संहिता उल्लंघन का मामला भी देखने को मिला जब कानपुर से अमेठी ले जाई जा रही 4000 साड़ियों की एक खेप को पुलिस ने पकड़ा। बिल पर भी गायत्री प्रजापति का नाम था। इस मामले में केस दर्ज हुआ था ।

गुजरात: सूरत में फटा सिलिंडर, 4 बहनों की जलकर मौत

इंद्रकुमार विश्वकर्मा | Navpravah.com

सूरत ज़िले के मुलाद गांव में सोमवार को एक झोपड़ी में आग लगने से 4 मासूम बहनों की जलकर मौत हो गयी। महुआ पुलिस स्टेशन के उपनिरीक्षक पीवी पटेलिया ने बताया कि प्राथमिक जाँच में पता चला है कि घरेलू गैस के रिसाव से आग लगी थी।

सूत्रों के मुताबिक दुर्घटना तब घटी जब बच्ची के पिता घर पर नहीं थे। इस दुर्घटना में दर्शना(10), मानसी(9), तेजश्री(8) और राजश्री(7) की मृत्यु हो गई।

पुलिस ने बताया कि पटेल कुछ दिनों से अपनी 4 बेटियों के साथ उस झोपड़ी में रह रहा था और कुछ दिनों पहले उसकी पत्नी का देहांत हो गया था। सोमवार को वह बाज़ार में सब्जी बेचने के लिए सूरत शहर चला गया और घर का दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया। उस वक़्त चारों बेटियाँ घर में सो रही थीं, तभी गैस रिसने से आग लग गयी और सभी बच्चियों की बुरी तरह जलने से मौत ही गयी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जाँच की जा रही है।

“नेताजी, ये पब्लिक है सब जानती है!”

जटाशंकर पाण्डेय | Navpravah.com

बटेसर और पनारू, जो एक दूसरे को फूटी आँख नहीं सुहाते थे, आज कनखियों से एक दूसरों को ‘फ्रेंड रिक्वेस्ट’ भेजते नज़र आ रहे हैं। जी हां साहब! अपने अस्तित्त्व की नैया डावांडोल दीखते ही लोग गधे को भी बाप बनाने को तैयार हो जाते हैं। जो अखिलेश और राहुल रोज आपस में गाली गलौज करते नहीं थकते थे, हर सभा में एक दूसरे की टांग खींचते थे, चुनाव नजदीक आते आते लंगोटिये यार बन गए!

बड़े बुज़ुर्ग कह गए हैं न कि दुश्मन से भी ऐसे लहजे में बात न करें कि कभी समय आने पर उसके सामने यदि सर झुकाना पड़े, तो पीठ पर दुलत्ती पड़े। जो आज दुश्मन है कल घना मित्र हो सकता है। जो बात गुप्त रखने वाली है, उसे खास मित्र से भी मत कहो, क्योंकि जो आज घना मित्र है, कल कट्टर दुश्मन भी तो हो सकता है। यही राजनीति है भैया!

“कल गिराता था जो तुमको, आज वो छूता चरण है,
राजनीति का समझ लो सरल सा यह व्याकरण है।”

दुनिया में एक ही जगह ऐसी है जहां सब जायज है, जहाँ कुछ नाजायज होता ही नहीं, वह है राजनीति। यहाँ पूरे दिन लोग आपस में लड़ते झगड़ते हैं, शाम को साथ में पार्टी करते हैं। पर्दे पर अलग दिखते हैं और पर्दे के पीछे अलग होते हैं। यह क्या है? ये लोग जनता को क्या समझे हैं, अपने आप को खूब होशियार और जनता को पूर्ण बेवकूफ! लेकिन आज की जनता मूर्ख नहीं है भाई साहब! “ये जो पब्लिक है सब जानती है, ये जो पब्लिक है।”

पांच राज्यों के चुनाव खत्म हो गए हैं। रुझान आने शुरू हो गए हैं। एग्ज़िट पोल के आधार पर ही लोगों के कमेन्ट आने शुरू हो गए थे। किसकी कितनी सीट आने पर किसके साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं, यह जोड़ घटाव कल ही से शुरू हो गया है। कुर्सी कुर्सी कुर्सी! हर तरफ केवल कुर्सी की मारा मारी है। कुर्सी मिलनी चाहिए, चाहे जिस भी कीमत पर। जनता के अंदर विष घोला जा रहा है। जातिगत आंकड़ा, धर्मगत आंकड़ा, सब जनता के अंदर घोलने के बाद अब खुद अपनी जरूरत से गले मिलेंगे।राजनीति में कोई किसी का दुश्मन नहीं होता है।अपना हित साधने के लिए नेता लोगों को आपस में लड़ाते हैं। दिलों से दिलों के बीच की दूरिया  लोगों में बढ़ाते जा रहे हैं, मगर उनकी आपसी दूरी केवल जनता को दिखने के लिए होती है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कल ही ऐलान कर दिया था कि अगर बहुमत न मिला, तो भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू नहीं होने देंगे। इसका तात्पर्य तो समझ ही रहे होंगे आप। अब अखिलेश भैया द्वारा बने एक्सप्रेस हाईवे पर यदि साइकिल पंक्चर हो जायेगी तो हाथी दौड़ा देने की फ़िराक में लग रहे हैं मुख्यमंत्री जी, लेकिन कमल कतई खिलने नहीं देना चाहते। इधर मतगणना शुरु होते ही पासा पलटता हुआ दिखाई दे रहा है। कीचड़ में से खिलखिलाकर खिल आया है कमल, और साइकिल, हाथी, पंजा, झाड़ू, लालटेन सब धड़ाम से गिर गए हैं कीचड़ में!

जरा सोचिए 10 अलग अलग पार्टियों के अपने अपने पचासों विचार, जो एक दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं। पार्टी का मतलब होता है विचारों में भिन्नता, सोच में भिन्नता, कार्य करने के ढंग में भिन्नता। इसी के कारण तो अलग पार्टी बनती है। चुनाव के समय एजेंडा में भिन्नता,जनता के बीच किसी बात को समझाने में भिन्नता, एक दूसरे की निंदा करने में भिन्नता। इनकी समानता मात्र एक जगह देखने को मिलती है तब, जब ये पूर्ण बहुमत में नहीं आ पाते। अपनी सरकार बनाने के लिए किसी भी अलग विचारधारा वाली पार्टी के सामने घुटने टेक देते हैं। कुर्सी पाने के लिए ये अनचाही  विचारधारा को भी अपना लेते हैं।

दरअसल इनकी अपनी कोई विचारधारा ही नहीं है, बस जनता की कमज़ोर नस को पकड़ कर नस्तर चलाने और अपना उल्लू सीधा करने में ये पीएचडी किए हुए होते हैं। जाति, धर्म, ऊंच-नीच, का भेदभाव फैलाकर ये जनता की जलती अंगीठी पर अपनी रोटियां सेंकते हैं, लेकिन जनता को मूर्ख समझनेवाले ये धूर्त नेता, इस बार के चुनाव परिणामों से बेशक ये समझ पा रहे होंगे कि, “अंदर क्या है, अजी बाहर क्या है, ये सब कुछ पहचानती है, ये पब्लिक है, सब जानती है।”

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति पार्क गेन को पद से हटाया गया

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

जहां भारत में दागी से दागी व्यक्ति भी चुनाव लड़ सकता है, जीत भी सकता है, तमाम मुक़दमे चलते रहने के बावजूद मंत्री मिनिस्टर बना रह सकता है, वहीं भारत से कई गुना छोटे साउथ कोरिया जैसे देश ने दुनिया के सामने एक अद्भुत मिसाल पेश की है। सैमसंग मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगने के कारण साउथ कोरिया की संसदीय कोर्ट ने वहां की राष्ट्रपति पार्क गेन हुई को उनके पद से हटा दिया है। यह साउथ कोरिया के इतिहास में पहली बार हुआ है।

साउथ कोरिया की पहली महिला राष्ट्रपति पार्क गेन हुई की शक्तियां दिसंबर में ही सस्पेंड कर दी गई थी। तब उनके खिलाफ विधायी महाभियोग वोट की वजह से ऐसा किया गया था। वहीं भ्रष्टाचार के इस मामले में सैंमसंग के वाइस प्रेसिडेंट और उत्तराधिकारी ‘ली जे योंग’ को पहले ही पद से हटाया जा चुका है। योंग पर पार्क और उनके खास लोगों को रिश्वत देने का आरोप लगा था। आरोप है कि सैमसंग इलेक्ट्रानिक्स के उपाध्यक्ष ली (48) ने राष्ट्रपति की एक गुप्त सहयोगी को चार करोड़ अमेरिकी डालर की रिश्वत दी ताकि सरकार की नीतियों को उनके अनुकूल बनाया जा सके।

उल्लेखनीय है कि पार्क गेन हुई शीत युद्ध के वक्त के तानाशाह पार्क चुंग-ली की बेटी हैं। पार्क पहले भी चर्चा में रह चुकी हैं। नोर्थ कोरिया की न्यूक्लियर शक्ति को हद में करने के लिए उन्होंने अमेरिका का साथ दिया था।

तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत के आसार, गोवा-उत्तर प्रदेश में बीजेपी अव्वल

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

देश के 5 राज्यों में हुए चुनावों के नतीजे 11 मार्च को सामने होंगे, लेकिन उससे पहले तमाम सर्वे एजेंसीज व न्यूज़ चैनल अपने अपने एग्जिट पोल्स लेकर हाज़िर हैं। इन एग्जिट पोल्स के मुताबिक जहां 2 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की साख मज़बूत नज़र आ रही है, वहीं देश भर में अपनी डूबती नैया को किनारे लगाती कांग्रेस अन्य 3 राज्यों में विजयी होती नजर आ रही है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के तारे गर्दिश में नज़र आ रहे हैं। राष्ट्रीय सर्वे एजेंसी ‘नेटज़ेक रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ द्वारा पांच राज्यों में किए गए सर्वे के अनुसार गोवा व उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी बढ़त बनाये हुए है। मणिपुर, पंजाब व उत्तराखंड में कांग्रेस का बोलबाला नज़र आ रहा है।

पंजाब की 117 विधानसभा सीटों के एग्जिट पोल्स पर यदि नज़र डालें, तो 117 सीटों में से कांग्रेस 61 सीटों पर   जीत दर्ज कर सकती है। दूसरी प्रबल पार्टी के रूप में आप पंजाब में 27 सीटें जीत सकती है। शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन को लगभग 24 सीटें व अन्य को मिलने के आसार हैं। उत्तराखंड के एग्जिट पोल्स के अनुसार राज्य की  70 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस द्वारा 36 सीटें जीतने के आसार नज़र आ रहे हैं। भाजपा को 27,बसपा को 1 व अन्य को 2 सीटें मिलने की उम्मीद है।

मणिपुर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कुल 60 सीटों में से 29 सीटों पर कब्ज़ा जमा सकती है। भाजपा के खाते में 19  सीटें आने की उम्मीद है। एक्टिविस्ट इरोम शर्मिला की पीआरएजेए(पीपल्स रेसर्जस एंड जस्टिस अलायन्स) पार्टी को 7 सीटें तथा अन्य को 5 सीटें मिलती नज़र आ रही हैं।
यदि गोवा की बात करें, तो कुल 40 सीटों में से भाजपा के खाते में 24 सीटें आने के आसार नज़र आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस को 7, आम आदमी पार्टी को 7, एमजीपी व अन्य को 1-1 सीट मिलने की उम्मीद है।

सबसे अहम राज्य उत्तरप्रदेश में भाजपा अपनी विजय पताका फहरा सकती है। राज्य की 403 सीटों में से लगभग 209 पर भाजपा जीत दर्ज कर सकती है। सपा-कांग्रेस गठबंधन को लगभग 105 सीटें मिलने की उम्मीद है। वहीं मायावती की बहुजन समाज पार्टी लगभग 78 सीटें जीत सकती है, तो आरएलडी के खाते में 9 व अन्य द्वारा 7 सीटें जीतने के आसार हैं।

पब्लिसिटी के लिए नौटंकी कर रहे हैं ‘अनारकली ऑफ़ आरा’ के निर्माता-निर्देशक -पहलाज निहलानी

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

अक्सर किसी भी अपकमिंग फिल्म के साथ सेंसर बोर्ड का नाम जुड़ते ही फिल्म झटपट सुर्ख़ियों में आ जाती है। आज कल ऐसी ही सुर्खी बनी हुई है डायरेक्टर अविनाश दास की फिल्म ‘अनारकली ऑफ़ आरा’, लेकिन इस बार मुद्दा कुछ अलग है। जहां एक तरफ अनारकली ऑफ आरा के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर उन बदलवों के बारे में बात कर रहे हैं, जो सेंसर बोर्ड ने करने को कहे थे, वहीं सेंसर बोर्ड प्रमुख पहलाज निहलानी का कहना है कि फिल्म अब तक सेंसर हुई ही नहीं है। निहलानी ने इसे एक अफवाह बताते हुए पब्लिसिटी का एक सस्ता जरिया बताया है।

पहलाज निहलानी का कहना है कि सेंसर बोर्ड ने इस नाम की किसी फिल्म में अभी तक कोई कट नहीं लगाए हैं, ना ही कोई सर्टिफिकेट दिया है। एक अख़बार को दिए अपने इंटरव्यू निहलानी ने कहा, “इस फिल्म को अभी तक सेंसर नहीं किया गया है, ना ही कोई सर्टिफिकेट दिया गया है। हमने इस नाम की किसी फिल्म में कोई कट नहीं लगाए हैं। ऐसे में सेंसर का सवाल कहां से आता है?”

निहलानी ने कहा,”मैं इसे पैसा बचाने वाली पब्लिसिटी कहूंगा। जैसे ही आप अपनी फिल्म के बैन होने को लेकर बात करते हैं, आपको बहुत सारी मीडिया कवरेज मिलती है। आप एक कम बजट की फिल्म बनाते हैं, जिसे लोगों की नजर में आने होता है। ऐसे में आप सेंसर बोर्ड से जुड़ी परेशानियां सामने लेकर आते हैं, जबकि ऐसा कुछ नहीं है।’

निहलानी ने बताया, “बार-बार पब्लिसिटी के लिए हमारा नाम घसीटे जाने से हम परेशान हो चुके हैं। आप चाहें अनारकली ऑफ आरा, छपरा, रोहतक या रायबरेली बनाएं, सीबीएफसी को इससे कोई मतलब नहीं है। अगर किसी फिल्ममेकर को पब्लिसिटी के लिए सीबीएफसी के नाम का इस्तेमाल करना है, तो इसके लिए सबूत भी रखने होंगे। ऐसे ही फेसबुक या ट्विटर पर गाली देना नहीं चलेगा।”

उधर फिल्म के डायरेक्टर का कहना है, ” सेंसर बोर्ड ने हमें कोई सर्टिफिकेट नहीं दिया है, लेकिन उन्होंने कट जरूर बताए हैं। हमने फिल्म का एडिटेड वर्जन बोर्ड के पास भिजवा भी दिया है। फिल्म के प्रोड्यूसर का कहना है कि सेंसर बोर्ड ने 11 कट बताए हैं, जिसमें फिल्म के बोल्ड सीन्स भी शामिल हैं। इसके साथ ही एक डायलॉग से अमिताभ बच्चन और अमरीश पुरी का नाम भी हटाने को कहा गया है, क्योंकि यह किसी की भावनाओं को आहत कर सकता है।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले इस फिल्म के कुछ सीन लीक हुए थे। एक तरफ जहां फिल्म के डायरेक्टर अविनाश दास ने कहा था कि यह फिल्म के सेंसर्ड सीन थे, वहीं पहलाज निहलानी का दावा है कि जो सीन लीक हुए वह सेंसर नहीं किए जा सकते थे।