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Wednesday, August 12, 2026
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पुस्तक समीक्षा: एक कर्मयोगी की जीवन-गाथा है “अर्घ्य”

डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय | Navpravah.com

पंडित बैजनाथ तिवारी की जीवन- गाथा पर आधारित ग्रंथ “अर्घ्य” ब्लूम्सबरी जैसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन की सद्यः प्रकाशित कृति है। लेखक पवन बख्शी की गहन जांच पड़ताल और उनके लेखकीय प्रतिबद्धता को दर्शाती यह पुस्तक हमारे समय का एक अद्वितीय दस्तावेज है। मूल्यों के क्षरण के दौर में इस प्रकार की पुस्तक का समाज में आना नई पीढ़ी के लिए किसी प्रकाश-स्तंभ से कम नहीं।

लेखक पवन बख्शी के अलावा यह कृति सामूहिक प्रयास की सुंदर परिणति है। पुस्तक का आवरण आकर्षक कलेवर में अत्यंत रमणीक बन पड़ा है। पुस्तक के पृष्ठ आवरण पर कई भाषाओं में पंडित बैजनाथ तिवारी का नाम अंकित है। संभवत: यह उनके भाषाई ज्ञान का द्योतक होगा। पुस्तक में पहला अर्घ्य सावित्री तिवारी ‘आज़मी’ के द्वारा ‘थे वह ससुर हमारे’ शीर्षक से दिया गया है। यही पुस्तक की प्रस्तावना और प्रवेश-द्वार भी प्रतीत होता है । इसके उपरांत रंगीन छवियों का सिलसिला शुरू होता है, जिसमें पुस्तक-नायक के सगे-संबंधियों की स्मृतियां संगृहीत हैं। ‘आह्वान’ शीर्षक के अंतर्गत लेखक पवन बख्शी ने पंडित बैजनाथ तिवारी की संघर्षपूर्ण जीवन-यात्रा का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है। पुस्तक का दूसरा अर्घ्य राजेंद्र तिवारी ने अर्पित किया है। ‘पूज्य! हो समर्पित अर्घ्य हमारा’ शीर्षक में उन्होंने पुस्तक में योगदान देने वाले सभी महानुभाव के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित की है।

‘आजमगढ़: जन्मभूमि और कर्मभूमि’ शीर्षक के अंतर्गत जनपद की समृद्ध विरासत के साथ-साथ इस मिट्टी में जन्मे ऋषियों-मनीषियों से लेकर अद्यतन साहित्यकारों और कलाकारों का परिचय उपलब्ध है। इसके बाद आरंभ होता है, एक कर्मयोगी की जीवन यात्रा का विस्तृत आख्यान। पूर्वजों द्वारा रीवा से पांती तक के स्थांतरण की जद्दोजहद से स्वयं सिद्ध है – ‘नहि मनुष्यात् श्रेष्ठतरं हि किंचित्’ अर्थात् सृष्टि में मनुष्य से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं। इसी क्रम में पंडित जी और और उनकी अर्धांगिनी श्रीमती जैराजी देवी के साथ-साथ तत्कालीन परिवेश का बड़ा ही सजीव चित्रण पुस्तक के लेखक ने किया है। ‘शिक्षा: अध्ययन से अध्यापन’ शीर्षक के अंतर्गत बैजनाथ जी की शैक्षणिक यात्रा का रोमांचक वर्णन मिलता है। टहर वाजिद पुर से लेकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय तक की पढ़ाई में पंडित जी ज्ञान और अनुभव के आवें में कुंदन की तरह निखरते रहे। तदुपरांत उन्होंने अध्यापन के लिए मध्यप्रदेश के बुरहानपुर शहर की तरफ रुख किया। वहां के अनुभव से लैस हो, अलीगढ़ की जातीय हिंसा का दंश झेलते हुए वे खुरासों
पहुंचे। यहीं पर उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ खुरासो रेलवे स्टेशन को आग के हवाले करके अपनी देश भक्ति का परिचय दिया था। इसका प्रमाण गयादीन जायसवाल इंटर कॉलेज खुरासो के प्रधानाचार्य हीरालाल यादव द्वारा उपलब्ध कराया गया जो पुस्तक में मौजूद है।

पंडित बैजनाथ तिवारी एक आदर्श शिक्षक थे। शिक्षा विहीन क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने का पुनीत कार्य इस महान शिक्षाविद ने किया। पुस्तक के कई अध्यायों में तिवारी जी के परिश्रम, लगन और ईमानदारी की बात बताई गई है। कड़क अनुशासन के कई उदाहरण उनके शिष्यों द्वारा साझा किए गए हैं। इस प्रक्रिया में मुंशी दीनानाथ लाल श्रीवास्तव और डॉक्टर श्री भगवान तिवारी का नाम विशेष रुप से उल्लेखनीय है। पंडित जी के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं को हास्य विनोद के रूप में टटोलने की सफल कोशिश की गई है। पुस्तक में बताया गया है कि पंडित बैजनाथ तिवारी गांधी-दर्शन और महामना पं. मदन मोहन मालवीय के विचारों को अपने जीवन में आत्मसात किया था। यही कारण है कि उन्होंने स्वच्छता को सर्वाधिक महत्व देकर अस्पृश्यता का घोर विरोध किया। बदलते वक्त पर उनकी पैनी नज़र थी।

“माजी पांती की यादें-तिवारी जी की बातें” शीर्षक आलेख के अंतर्गत लेखक की गहन छानबीन और कठिन श्रम का उदाहरण मिलता है। इस अध्याय में पवन जी ने जितेंद्र मोहन तिवारी, अनीता तिवारी, नरसिंह तिवारी, दयाशंकर तिवारी, दशरथ तिवारी, केशव प्रसाद उपाध्याय, लीलावती तिवारी, बाबू जंग बहादुर सिंह, दीनानाथ लाल श्रीवास्तव, बाबू रघुनाथ सिंह, मंगला प्रसाद राय, हीरालाल यादव, अनिल उपाध्याय, रामधनी पांडेय, बृजेश सिंह, श्री भगवान तिवारी कटोही, सुरेली राम, राजेंद्र तिवारी, रामाश्रय तिवारी, श्रीमती शीला तिवारी, श्रीमती सावित्री तिवारी, शिवजोर राम प्रजापति, कृष्ण मुरारी सिंह, चंद्रशेखर पांडेय और राजनाथ पांडेय के अंतर्मन को टटोला है। सबने एक स्वर में स्वीकार किया है कि पंडित बैजनाथ तिवारी का चरित्र आज की युवा पीढ़ी के समक्ष आदर्श हैं। उनके ऋण से हमारा समाज मुक्त नहीं हो सकता।

पुस्तक में लेखक के अलावा परिवारजनों ने भी अपने अपने-अपने शब्द-सुमन अर्पित किए हैं। इस क्रम में रामाश्रय तिवारी का ‘हमार काका : मेरे काका अर्थात् पिता मेरे आदर्श’, राजेंद्र तिवारी का ‘काका ने किया था, अपनी मृत्यु के बाद का वर्णन’, जितेंद्र मोहन तिवारी का ‘कठोर हृदय में छिपी कोमलता और स्नेहपूर्ण सागर की वह भावना’, श्रीमती शीला तिवारी का ‘हमारे बाबूजी समय के बड़े पक्के थे’, सावित्री तिवारी का ‘अश्रुपूरित आंखों से हम बाबूजी को जाते देखते रहे’, अनीता तिवारी का ‘मैंने तो मात्र अपना फर्ज पूरा किया है,’ साधना मिश्रा का ‘हमारे बाबा बाबा आवाज लगाते – ‘हे बहिनी !’, डॉक्टर संध्या तिवारी का ‘वह एक महान व्यक्ति थे, मुझे गर्व है कि वह मेरे बाबा थे’, डॉक्टर शालिनी पांडे का ‘एक जोड़ा मजबूत कंधे,’ नीलम दुबे का ‘बैजनाथ तिवारी: मेरे बाबा जी’, पूनम जालान का ‘जा अइसन पोती ना पइबा’, दीपक तिवारी का ‘आवा बाबू! चुम्मा दै द्या’, राहुल तिवारी का ‘मैं उनके पहरावे से बहुत प्रभावित था’ विवेक तिवारी का ‘न जाने किस खिड़की से जैसे बाबा झांककर नजर रख रहे हों’ और आशीष तिवारी का ‘संघर्ष भरा जीवन था उनका’ शीर्षक से लेख मर्मस्पर्शी हैं। इन लेखों को पढ़ते हुए आंखें नम हो आती हैं। सबके जीवन में उनके पिता का, ससुर का और बाबा का स्नेहिल दुलार था। तिवारी जी के विराट जीवन में प्रत्येक के लिए जगह थी।

राजेंद्र तिवारी ने ‘बाबूजी के अभिन्न संगी-साथी’ शीर्षक लेख में मौनी जी महाराज से लेकर श्री राम सिंगार यादव तक की भावनाओं का शब्दांकन बड़े ही सरल और प्रभावी ढंग से किया है। इनसे गुज़रते हुए ऐसा लगता है मानो ये अंतरंग संगी-साथी खुद-ब-खुद अपनी पीड़ा बयां कर रहे हों। बाबूजी की जीवन-गाथा की कल्पना इन्हीं के मन में पैदा हुई थी। वर्षों बाद यह ‘अर्घ्य’ के रूप में हमारे सामने फलित हुई। कल्पना से यथार्थ की इस यात्रा में अनेकों खट्टे-मीठे अनुभवों से राजेंद्र जी को गुजरना पड़ा। पुस्तक के फ्लैप पर उन्होंने लिखा है, “इस पुस्तक की सामग्री संकलन हेतु ऐसे बहुत से लोगों से हमारा संपर्क हुआ, जिन्हें हम बाबू जी के जीवन काल में नहीं मिले थे। कुछ ऐसे लोग भी मिले जिनसे बाबूजी के बारे में जानने की बहुत उम्मीद थी, लेकिन हमारे प्रयास असफल रहे। वहीं कुछ ऐसे लोग भी मिले, जिनसे इतना अधिक मिला कि जितनी कि हमें आशा भी न थी।”

परिशिष्ट की सामग्री पुस्तक को अधिक प्रामाणिक और पारदर्शी बनाती है। चाहे ‘पंडित बैजनाथ तिवारी-एक वाक्य में’ हो, बोलते चित्र हों, बोलती डायरी हो या पंडित बैजनाथ तिवारी के प्रशासनिक शिष्यों व उनसे जुड़े शिक्षाविदों द्वारा अर्पित श्रद्धांजलि, सबमें बाबू जी की शानदार छवि उभरती है। विवेक तिवारी का यात्रा संस्मरण ‘मेरी बुरहानपुर यात्रा’ अधिक सजीव व सार्थक बन पड़ी है। विवेक जी की इस यात्रावृत्त को पढ़कर लगता है कि बुरहानपुर का समूचा परिवेश रील की नाईं आंखों के सामने चल रहा हो। इनके लेखन की शैली पाठकों के मन और मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ती है। इसी तरह आजमगढ़ के इतिहास में तिवारी जी की भूमिका में डूबकर माथा गर्व से ऊँचा और सीना चौड़ा होता जाता है। साथ ही इस जनपद के चप्पे-चप्पे से पाठक रूबरू होता है। आज़मग़ढ को आतंक की नर्सरी कहने वाली मीडिया को इस पुस्तक का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। नज़रिया बदल जाएगा।

पुस्तक में अंतिम अर्घ्य लेखक पवन बख्शी ने स्वयं अर्पित किया है। पंडित बैजनाथ तिवारी के संपूर्ण व्यक्तित्व का सार प्रस्तुत करते हुए लेखक की स्वीकारोक्ति है, “जिस प्रकार अंतरिक्ष में जब कोई सितारा टूटता है, तो वह अपने पीछे पुनर्जन्म के पिंड छोड़ जाता है। ठीक उसी प्रकार महान व्यक्तित्व के धनी पुरुष निधन के बाद अमर हो जाते हैं। इतिहास साक्षी है कि निरंतर आक्रमणों के कारण भारत संकट से घिरा रहा, परंतु यहां के आध्यात्मिक लोग रचनात्मक विचारों की खान रहे हैं। सत्य के प्रति उनके प्रेम ने ऐसे विचारों और आदर्शों को जन्म दिया, जिन्होंने देश को निरंतर ऊर्जा प्रदान की तथा अपने सृजनात्मक अभिव्यक्ति में उन्होंने सुव्यवस्था और भाईचारे पर जोर दिया और उन्हीं देदीप्यमान व्यक्तियों के मध्य का व्यक्तित्व है-‘पंडित बैजनाथ तिवारी’।”

निष्कर्षतः ‘अर्घ्य’ एक ऐसी नायाब पुस्तक है, जिसमें साहित्य की लगभग सभी विधाएं एक साथ मुखर हैं। इसमें आद्यंत रोचकता बनी रहती है। काल के तीव्र प्रवाह में फिसलते एक महान शिक्षाविद् और बेहतरीन समाज सुधारक को शाब्दिक अमरता देकर तिवारी परिवार ने राष्ट्र हित में अपनी बेजोड़ हिस्सेदारी दर्ज़ की है। भावी पीढ़ी पंडित बैजनाथ तिवारी की जीवटता, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासनप्रियता और सेवाभाव से प्रेरणा लेती रहेगी। ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ का पाठ पढ़ाती यह पुस्तक ऐतिहासिक महत्त्व की अधिकारी है। अस्तु।

तीन तलाक को खत्म करने के लिए इन मुस्लिम महिलाओं ने किया ‘हवन’

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

तीन तलाक के मुद्दे पर अब मुस्लिम महिलाएं खुलकर सामने आ रही हैं, तीन तलाक का मुद्दा अलीगढ़ में भी गरमाया हुआ है। यही वजह है कि शुक्रवार को वर्षों से न्याय की आस में भटक रहीं दो मुस्लिम महिलाओं ने अखिल भारत हिंदू महासभा के दफ्तर में आयोजित ‘हवन’ में हिस्सा लिया।

मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली फैजा और सलमा ने कहा कि अब वे मुस्लिम महिलाओं पर होने वाले अत्याचार को ज्यादा दिन तक होने नहीं देंगी। इस मौके पर संकल्प लिया कि तीन तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगी।

अलीगढ़ के नौरंगाबाद में हिंदू महासभा के कार्यालय में महंत शकुन पांडे ने हवन का आयोजन किया था। इन दोनों महिलाओं का दावा है कि उन्हें उनके पति ने तलाक दिया है, इस मौके पर इनके परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। फैजा का कहना है कि उनके पति ने सात साल पहले तीन बार तलाक बोलकर उन्हें तलाक दे दिया था। अलीगढ़ इलाके की ढोहर्रा की निवासी ने कहा कि वे तीन बेटियों की मां हैं, वे उनकी जिम्मेदारियों पर चिल्लाती हैं। वे काफी परेशानियों का सामना करती हैं।

टप्पल की रहने वाली सलमा तलाक के बाद अपने माता-पिता के घर रहती हैं। तलाक के बाद उनके ससुराल वालों ने उन्हें घर से निकाल दिया था। उनकी दो बेटियां हैं, जिसके लिए वे संघर्ष कर रही हैं।

इन दोनों पीड़ित महिलाओं को हवन के लिए लाने वाले कार्यकर्ता भुट्टो खान ने मुस्लिम समुदाय की रू़ढ़ियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर मुस्लिम समाज इनकी मदद करता, तो आज ये लोग यहां नहीं होतीं, अब समय आ गया है कि समाज में इस तरकी कुप्रथाओं को बंद करना होगा।

हिंदू महासभा के राज्य उपाध्यक्ष गजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि इस तरह की तलाकशुदा महिलाओं के लिए वो मुफ्त में केस लड़ेंगे। इसके अलावा, इस मौके पर पांडेय ने कहा कि जिन तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है, तो वे धर्म परिवर्तन करें, उन्हें पूरा संरक्षण व सुरक्षा दी जाएगी।

ईवीएम को लेकर कांग्रेस में दो फाड़, मोईली के बाद कैप्टन अमरिंदर ने कहा, ‘नहीं हुई छेड़छाड़’

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

चुनाव के दौरान ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ के मामले में कांग्रेस में दो फाड़ होता दिख रहा है। जहाँ कांग्रेस की मुख्य धारा का मानना है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ हुई है, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का कहना है कि ऐसा असंभव है। कॅप्टन अमरिंदर सिंह ने बुधवार को कहा कि अगर ईवीएम से छेड़छाड़ होती, तो वे नहीं, बल्कि अकाली सत्ता में होते।

अमरिंदर सिंह ने नई दिल्ली में कहा, “अगर ईवीएम से छेड़छाड़ की गई होती, तो मैं पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं होता। यहां अकाली होते।” दूसरी ओर कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर आरोप लगा रही है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से छेड़छाड़ हुई है, जिससे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा को विधानसभा चुनाव जीतने में सहयोग मिला है। कांग्रेस ने मांग की है कि ईवीएम की जगह पुराने मतपत्रों का इस्तेमाल किया जाए।

उल्लेखनीय है कि पूर्व कानून मंत्री वीरप्पा मोईली के बाद अमरिंदर सिंह कांग्रेस के दूसरे वरिष्ठ नेता हैं, जो ईवीएम के बचाव में उतरे हैं, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि मशीन से छेड़छाड़ हुई है। पंजाब में विधानसभा की 117 सीटों में से 77 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज कर एक दशक से सत्ता में काबिज अकाली-भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाया।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अखिलेश दास गुप्ता का आकस्मिक निधन

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बीबीडी विश्वविद्यालय के चेयरमैन अखिलेश दास गुप्ता का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। वे 56 वर्ष के थे। बुधवार सुबह उनके आवास पर ही अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उन्हें शुगर की भी लम्बे समय से बीमारी थी। अखिलेश दास के निधन से उनके परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके घर के बाहर उनके समर्थकों का हुजूम लगा हुआ है।

अखिलेश दास गुप्ता वर्ष साल 1993 में लखनऊ के मेयर चुने गए थे। वे 1996 में कांग्रेस से पहली बार राज्यसभा सांसद बने थे। साल 2002 में दोबारा कांग्रेस ने उन्हें उच्च सदन तक पहुंचाया। साल 2004 में जब मनमोहन सरकार शासन में आयी, तब उन्हें स्टील मिनिस्ट्री में केंद्रीय राज्यमंत्री बनाया गया था। राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद साल 2008 में वे बसपा शामिल हो गए थे। अखिलेश दास ने 5 नवंबर 2014 को मायावती पर करोड़ों रुपये लेकर राज्यसभा का सांसद बनाने का आरोप लगाकर बसपा छोड़ दी थी और फिर कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जन्मे डॉ. अखिलेश दास गुप्ता का खेलों से भी नाता रहा है। वे इंटरनेशल लेवल के बैडमिंटन खिलाड़ी भी रह चुके हैं। मौजूदा समय में वह बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष भी थे। उनके पिता बनारसी दास गुप्ता 1979 से 1980 तक यूपी के मुख्यमंत्री रहे।

भारतीय रेलवे द्वारा चलाई जाएंगी सुविधाओं से लैस 10 नई टूरिस्ट ट्रेनें

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने व देशी-विदेशी पर्यटकों को सुविधा देने के उद्देश्य से भारतीय रेल एक नई पॉलिसी तैयार कर रहा है। रेलवे द्वारा तैयार की गई ड्राफ्ट पॉलिसी के मुताबिक, रेलवे 10 नई टूरिस्‍ट ट्रेनें चलाएगा। साथ ही, टूरिस्‍ट प्‍लेस की ओर जाने वाली ट्रेनों में फॉरेन टूरिस्‍ट कोटा भी निर्धारित किया जाएगा, जिनमें एक साल पहले भी रिजर्वेशन कराया जा सकेगा। इतना ही नहीं, ट्रेनों में टूरिस्‍ट कोच भी शुरू किए जाएंगे। इसका मकसद जहां देश में टूरिज्‍म को बढ़ावा देना है, वहीं रेलवे अपनी आमदनी भी बढ़ाना चाहता है।

ड्राफ्ट पॉलिसी के मुताबिक विदेशी पर्यटकों को ध्‍यान में रखते हुए लग्‍जरी टूरिस्‍ट ट्रेन चलाई जाएंगी, जिनमें लग्‍जिरयस इंटिरियर के अलावा इंटरटेनमेंट लाउंज, रीडिंग लाइब्रेरी, बार और एक्‍सक्‍लूसिव रसोई होगी। ये ट्रेनें राज्‍य सरकारों के टूरिस्‍ट डिपार्टमेंट या आईआरसीटसी के साथ पार्टनरशिप में चलाई जाएंगी। इन ट्रेनों में अलग अलग पर्यटन स्थलों पर घूमने का पैकेज भी ऑफर किया जा सकता है।

इसके अलावा सेमी लग्‍जरी टूरिस्‍ट ट्रेन भी चलाये जाने की योजना है, जो पूरी तरह एयर-कंडीशंड होंगी और इनका किराया लगभग राजधानी के समान होगा। इन ट्रेनों के लिए एक पैकेज बनाया जाएगा, जिसमें ट्रेन यात्रा के अलावा लोकल ट्रांसपोर्टेशन, साइट देखना, भोजन इत्यादि भी शामिल होगा। इसमें मिलने वाली सुविधाएं एक 3 स्‍टार होटल के समान होंगी।

रेलवे ने पिछले कुछ समय से धार्मिक पर्यटन केंद्रों की ओर विशेष फोकस किया है। इस पॉलिसी में भी इसकी झलक दिखाई देगी। रेलवे द्वारा ‘आस्‍था सर्किट ट्रेन’ और ‘स्‍टेट तीर्थ ट्रेन’ चलाई जाएंगी। आस्‍था सर्किट ट्रेन का रूट इस तरह से तैयार किया जाएगा, ताकि देश के ज्‍यादा से ज्‍यादा धार्मिक स्‍थल कवर हो जाएं। स्‍टेट तीर्थ ट्रेन राज्‍यों की रिक्‍वेस्‍ट पर चलाई जाएंगी।

रेलवे देश में पॉपुलर बुद्धिस्‍ट सर्किट के लिए अलग स्‍पेशल ट्रेन चलाना चाहता है। इस तरह की एक ट्रेन ‘महापरिनिर्वाण एक्‍सप्रेस’ चलाई जा रही है, लेकिन रेलवे की योजना है कि इसे एक रेगुलर फीचर बनाया जाए और इस ट्रेन में सेमी लग्‍जरी ट्रेन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। रेलवे द्वारा भारत दर्शन ट्रेनें अभी चलाई जा रही हैं, लेकिन पॉलिसी में स्‍पष्‍ट किया गया है कि रेलवे इनकी संख्‍या बढ़ाकर अधिक से अधिक टूरिस्‍ट को अपना कंज्‍यूमर बनाना चाहता है। इन ट्रेन का किराया मेल या एक्‍सप्रेस ट्रेन के समान होगा।

अलग-अलग वर्ग को ध्‍यान में रखते हुए फ्लेक्‍सी पैकेज टूरिस्‍ट ट्रेन शुरू की जाएगी। इसमें डिमांड के मुताबिक स्लिपर 3ए, 2ए और 1ए कोच लगाए जाएंगे। इसका किराया भी नॉमर्ल होगा और आईआरसीटीसी द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं दी जाएंगी। टूरिस्‍ट को अलग-अलग ऑप्‍शन दिए जाएंगे, जैसे कि वे ऑफ बोर्ड सर्विसेज, आवास, साइट देखना, लोकल ट्रांसपोर्टेशन चाहते हैं या नहीं।

इनके अलावा रेलवे ‘ऑर्डनरी टूरिस्‍ट ट्रेन’, ‘हिल टूरिस्‍ट ट्रेन’ ‘स्‍टीम टूरिस्‍ट ट्रेन’ भी चलाएगा,जिनमें ऑर्डनरी टूरिस्‍ट कोच, डेडिकेटेड टूरिस्‍ट कोच भी लगाए जाएंगे। साथ ही ‘फॉरेन टूरिस्‍ट कोटा’ भी निर्धारित किया जाएगा, जिसका विश्व स्तर पर प्रचार किया जाएगा। इसमें एक साल के दौरान कोई भी फॉरेन टूरिस्‍ट बुकिंग करा सकता है, ताकि फॉरेन टूरिस्‍ट यदि एक साल पहले भी इंडिया का टूर प्‍लान कर रहा है, तो वह आसानी से बुकिंग करा सके।

कुलभूषण जाधव को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगें – सुषमा स्वराज

कुलभूषण मामले पर कल सुषमा स्वराज देंगी जवाब

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

पाकिस्तान द्वारा बीते दिन एक और नापाक हरकत को अंजाम देते हुए एक ऐलान किया गया है। इस ऐलान के अनुसार उन्होंने भारत के पूर्व वायुसेना अफसर कुलभूषण जाधव को मौत की सज़ा सुनाई है। पाकिस्तान द्वारा जाधव पर जासूसी का आरोप लगाया गया है। इस मुद्दे पर पूरा देश आक्रोशित हो गया है, जिसका असर आज लोकसभा और राज्य सभा की कार्यवाही के दौरान भी देखने को मिला है।

राज्यसभा में आज पूर्व वायुसेना अफसर कुलभूषण जाधव की सज़ा का मामला चर्चा में रहा है। इसी क्रम में लोकसभा में भी कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे को उठाया गया है। इसके तहत दोनों सदनों में आज इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। साथ ही सरकार द्वारा जाधव को बचाने के हर संभव प्रयास का आश्वासन भी दिया गया है।

सभी पार्टियों द्वारा केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए कुछ कड़े कदम उठाने की मांग की गयी है, जिसके बाद अब विदेश मंत्री द्वारा राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान सरकार का पक्ष रखा गया है। इस दौरान सुषमा स्वराज द्वारा जाधव को भारत का बेटा भी बताया गया है, साथ ही उन्होंने बताया है कि वे लगातार उनके परिवार के संपर्क में बनी हुई हैं।

सदन के माध्यम से विदेश मंत्री ने जनता तक यह बात पहुंचाई है कि वे जल्द ही जाधव को बचाने का हर संभव प्रयास करेंगी। उन्होंने बताया कि सरकार जाधव को बचाने का हर वह प्रयास कर रही है, जो अनिवार्य हैं। उनके इस बयान पर कांग्रेस नेता आज़ाद द्वारा सहमति प्रकट की गयी है, साथ ही सरकार के प्रयासों का स्वागत भी किया गया है।

लंबे अरसे बाद ग़ज़ल गायिका चित्रा सिंह फिर बिखेरेंगी अपनी आवाज़ का जादू

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

‘वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी’ याद दिलाने वाली मशहूर ग़ज़ल गायिका चित्रा सिंह लंबे अरसे बाद गायकी की दुनिया में वापसी करने जा रही हैं। 27 सालों से खामोश हुई उनकी यह सुरीली आवाज़ वाराणसी के संकट मोचन के मंच से दोबारा अपना जादू बिखेरेगी। चित्रा ने 27 वर्ष पूर्व कभी न गाने की घोषणा कर अपने करोड़ों श्रोताओं को निराश कर दिया था, लेकिन अब गायकी में उनकी वापसी उनके श्रोताओं के लिए वाक़ई लाजवाब खबर है।

संकट मोचन मंदिर में 15 से 20 अप्रैल तक संगीत समारोह का आयोजन किया जायेगा। यह आयोजन 11 अप्रैल को हनुमान जयंती के पावन मौके पर शुरू किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार चित्रा सिंह का लंबे समय बाद मंच पर आना एक बहुत बड़ी बात है।

उल्लेखनीय है कि साल 1990 में एक आकस्मिक हादसे में चित्र सिंह और जगजीत सिंह के जवान बेटे की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद दोनों को गहरा सदमा लगा और जगजीत और चित्रा ने गाना छोड़ दिया। कुछ सालों बाद जगजीत सिंह तो गायकी के क्षेत्र में धीरे-धीरे लौट आये लेकिन चित्रा सिंह ने अपने रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी और यह भी ऐलान किया था कि वो आगे नहीं गायेंगी और न‍ ही किसी गाने की रेकॉर्डिंग करेंगी।

सूत्रों के अनुसार चित्रा सिंह एक बार फिर जगजीत सिंह के लिए भारत रत्‍न की मांग करने वाली हैं। चित्रा काफी लंबे समय से अपने पति , मशहूर गजल गायक स्‍वर्गीय जगजीत सिंह के लिए भारत सरकार से भारत रत्‍न की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिल पाई है।

10 मई के बाद से हर रविवार पेट्रोल पंप बंद रहेंगे, बाक़ी दिन भी बस 8 घंटे ही मिलेगा पेट्रोल!

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

अगर आपके पास पेट्रोल-चलित अपना वाहन है, तो सावधान हो जाइये। अब से आपको रविवार के दिन पेट्रोल नहीं मिल सकेगा। जी हाँ! तेल कंपनियों की लगातार हो रही अनदेखी से गुस्साएं कंसोर्टियम ऑफ इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स (सीआईपीडी) ने 10 मई के बाद से हर रविवार को पेट्रोल पंप बंद रखने का ऐलान किया है।

सीआईपीडी ने ऐलान किया है कि 10 मई के बाद से हर रविवार को पेट्रोल पंप बंद रहेंगें, साथ ही 10 मई के बाद हर दिन केवल 8 घंटे ही पेट्रोल पंप खोलने का ऐलान किया है। सीआईपीडी के अनुसार इसके बाद भी अगर पेट्रोलियम कंपनियों ने सुध नहीं ली तो पेट्रोल पंप को रात में भी बंद रखा जाएगा।

दरअसल पिछले साल नवंबर में और इस साल मार्च में तेल कंपनियों के साथ हुई बैठक में सीआईपीडी की समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद कुरुक्षेत्र में हुई बैठक में सीआईपीडी ने हर रविवार पेट्रोल पंप बंद रखने का फैसला लिया था। फैसले के लागू होने से देश के लगभग 53000 पेट्रोल पंप पर केवल एक ही समय पेट्रोल और डीजल मिलेगा। इस फैसले के लागू होने से सबसे ज्यादा समस्या आम लोगों को होगी। सीआईपीडी के इस ऐलान के बाद पेट्रोलियम कंपनियों की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

उत्तर प्रदेश में मुस्लिम लड़कियों ने भी की योगी की प्रशंसा, एंटी रोमियो दल के गठन से मुस्लिम समुदाय खुश

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जब से आई है, तब से एक एक नए नए फरमान दे रही है। यही कारण है कि प्रदेश की जनता के बीच योगी आदित्यनाथ इतने लोकप्रिय हो गये हैं। जहां अब तक प्रदेश के मुस्लिम तबके को योगी राज नही पसंद था, वहीं योगी द्वारा चलाये गये एंटी रोमियो दल के गठन के बाद से ही मुस्लिम तबका भी उन्हें पसंद करने लगा है। यही नहीं, मुस्लिम लड़कियाँ भी योगी आदित्यनाथ की मुरीद हो गयी हैं।

इस विषय में बात करने पर इलाहाबाद के हमिदिया इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों तरह की छात्राओं ने सड़क पर अपने साथ छेड़खानी और छींटाकशी की घटना का जिक्र किया व एंटी रोमियो दल के गठन के बाद हुई सुविधाओं के बारे में बात की। बीए की छात्रा शबाना ने कहा कि हमारे शहर में इस तरह के स्क्वायड के गठन से हमें घर से बाहर निकलने में सहूलियत हो गई है। पहले यूपी की लड़कियों को घर से निकलने में डर लगता था, लेकिन अब मनचलों को घर से बाहर निकलने में डर लगता है। साथ ही उन्होंने कहा कि रोड पर निकलने में हमें पहले कई तरह की दिक्कतें होती थीं, हमारे ऊपर छींटाकशी होती थी, बदनामी के डर से हम चाह कर भी कुछ नहीं बोल पाते थे, पर अब हम निडर होकर निकलते हैं।

कॉलेज की ही एक छात्रा शाहिदा ने कहा  कि सरकार की ओर से ये जो दस्ता बना है, हम इसका स्वागत करते हैं और हम इस दस्ते का पूरा साथ देंगे ताकि हमें और किसी भी तरह की दिक्कतें न हों।

अब घरेलू उड़ानों की टिकट बुकिंग के लिए भी आधार कार्ड होगा ज़रूरी!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

एयर इंडि‍या के स्‍टाफ के साथ शि‍वसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ की हाथापाई की घटना के बाद सरकार अपने नियमों में जल्द ही बड़े बदलाव कर सकती है। इसके तहत अब हवाई यात्रा करने वालों को घरेलू उड़ानों के टिकट बुक करने से पहले उनका आधार नंबर या पासपोर्ट देना अनिवार्य बनाया जा सकता है। जी हाँ! सरकार जल्द ही घरेलू उड़ानों की टिकट बुकिंग के लिए आधार नंबर या पासपोर्ट को अनिवार्य बना सकती है। इसके अतिरिक्त सरकार पैसेंजर्स की पहचान के लिए जल्द ही एक ‘नो फ्लाई’ लिस्ट लाने वाली है, जिसमें चार तरह के अपराधों के हिसाब से कार्रवाई तय होगी। आधार या पासपोर्ट से ऐसे पैसेंजर्स की पहचान हो सकेगी, जो विमान में बुरा या आपत्तिजनक व्यवहार करते हैं।

मीडि‍या रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, सरकार ‘नो फ्लाई लि‍स्‍ट’ में चार लेवल वाला सि‍स्‍टम बनाने पर वि‍चार कर रही है, जि‍समें यात्रि‍यों को उनके व्यवहार के आधार पर बांटा जाएगा। हर लेवल पर एक तय वक्त के लि‍ए ट्रैवल बैन लगेगा। ग्रेड सि‍स्‍टम को अंति‍म रूप देने का काम चल रहा है, जि‍सके तहत यह तय होगा कि‍ #नो फ्लाई लि‍स्‍ट’ में शामि‍ल कि‍स कैटेगरी के यात्री पर कि‍तने दि‍न का ट्रैवल बैन लगेगा।  जून या जुलाई तक इस नए सिस्टम के लागू होने की उम्मीद है। यदि यह सिस्टम लागू होता है, तो इसके तहत फ्लाइट बुक कराते वक्‍त आधार नंबर या पासपोर्ट की डि‍टेल देने को कहा जा सकता है। इन दोनों में से कि‍सी एक को चुना जाएगा।

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी आरएन चौबे ने न्यूज एजेंसी को बताया कि डारेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) जल्द ही इस नए सिस्टम पर काम शुरू करने जा रहा है। मिनिस्ट्री ने इस बारे में डीजीसीए से अगले हफ्ते तक ड्रॉफ्ट लाने को कहा है। मिनिस्ट्री इस ड्रॉफ्ट पर प्राइवेट एयरलाइन्स और जनता से सुझाव लेगी। ‘नो फ्लाई’ लिस्ट के जरिए फ्लाइट्स में सिक्युरिटी अरेंजमेंट को दुरुस्‍त करने के साथ ही खराब बर्ताव करने वाले पैसेंजर्स को रोका जा सकेगा।

गौरतलब है कि मिनिस्टर ऑफ स्टेट फॉर सिविल एविएशन जयंत सिन्हा ने भी ट्वीट कर यह कहा था कि विमान में बुरा बर्ताव करने वाले पैसेंजर्स को ‘नो फ्लाई’ लिस्ट में डालना जरूरी है, जिससे आगे इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके। शिवसेना सांसद गायकवाड़ के विवाद के बाद एयर इंडिया ने ‘नो फ्लाई लिस्ट’ पर विचार शुरू किया था। ऐसे में आधार नंबर या पासपोर्ट से ऐसे पैसेंजर्स की पहचान में मदद मिलेगी, जो विमान में गलत व्यवहार करते हैं।

इसके अतिरक्त सरकार ने 1 जुलाई से इनकम टैक्‍स रिर्टन फाइल करने के लिए परमानेंट अकाउंट नंबर ( PAN) के साथ आधार को लिंक करना जरूरी कर दिया है। इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने इसके लिए एक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है, जिसमें 30 जून तक इसे लिंक करना जरूरी है।