दिल्ली ही नहीं बल्कि देश को दहला देने वाले 16 दिसंबर 2012 में सामूहिक बलात्कार की भयावह घटना को चार साल बीत चुके हैं। मामले में चार दोषियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना अहम फैसला सुनाएगा। जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानूमति और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि गैंगरेप के दोषियों को फांसी की सजा मिलेगी या नहीं।
गैंगरेप के चार दोषियों मुकेश, अक्षय, पवन और विनय को साकेत की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिस पर 14 मार्च 2014 को दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। दोषियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद तीन जजों की बेंच को मामले को भेजा गया और कोर्ट ने केस में मदद के लिए दो एमिक्स क्यूरी नियुक्त किए गए।
निर्भया कांड के एक साल गुजरने के बाद भी सरकार महज वादों से ही दिल जीतने की कोशिश में लगी हुई है। यह भी कम दुखद नहीं है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा और शोषण के विरोध में कई दफा प्रतिक्रिया दे चुके तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली नेशनल मिशन अथॉरिटी (एनएमए) की एक भी बैठक इस साल नहीं हुई है। यही नहीं इसके सदस्यों की जिम्मेदारी भी अब तक तय नहीं की गई है।
पीड़िता की मां आशा देवी ने कहा, ‘मुझे लगता है कि कुछ भी नहीं बदला। सरकारें भी बदल गई हैं। चार साल बीत चुके हैं, लेकिन हालात जस के तस हैं। पिछले चार साल में हम न्याय के लिए एक जगह से दूसरी जगह धक्के खा रहे हैं लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया।’ मामले के छह अपराधियों में से एक युवक को पिछले साल रिहा कर दिया गया क्योंकि जब उसने इस अपराध को अंजाम दिया था जब वह नाबालिग था। एक अपराधी ने आत्महत्या कर ली थी जबकि चार अन्य अब भी जेल में बंद हैं। उन्होंने उन्हें सुनाई गई मौत की सजा के खिलाफ अपील की है।
भारत सरकार जल्द ही देशभर में सड़कों का व्यापक नेटवर्क बनाने वाला ‘भारतमाला प्रोजेक्ट’ लॉन्च करने जा रही है। इसके पहले फेज में 20 हजार किमी हाइवे का कंस्ट्रक्शन होगा। रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मिनिस्टर नितिन गडकरी ने बताया कि हम जल्द ही ‘भारतमाला’ को लॉन्च कर देंगे। भारतमाला में नेशनल हाइवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (एनएचडीपी) समेत सभी मौजूदा हाइवे प्रोजेक्ट समाहित हो जाएंगे। पहले फेज में 20 हजार किमी हाइवे का कंस्ट्रक्शन होगा। गडकरी ने कहा कि एनएचडीपी और सभी मौजूदा स्कीम्स अगले छह माह में पूरे हो जाएंगे।
भारतमाला सरकार का एक मेगा प्लान है। यह एनएचडीपी के बाद दूसरा सबसे बड़ा हाइवे प्रोजेक्ट है, जिसमें करीब 50 हजार किमी हाइवे डेवलपमेंट हुआ। गडकरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस पर डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (डीपीआर) तैयार की जा रही हैं और भारतमाला प्रोजेक्ट के पहले फेज में 20 हजार किमी हाइवे का कंस्ट्रक्शन दिखाई देगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एनएचडीपी शुरू किया था। इसे कई फेज में लागू किया गया। इसमें मेट्रो शहरों को जोड़ने के लिए स्वर्णिम चर्तुभुज योजना भी शामिल थी। एचएचडीपी के तहत करीब 10 हजार किमी रोड अभी बनाए जाने हैं। इसमें श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ने वाला नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर और पोरबंदर से सिल्चर से जोड़ने वाला ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर शामिल है।
गडकरी ने बताया, “भारतमाला के तहत बड़े पैमाने पर रोड कंस्ट्रक्शन कराएंगे और बार्डर एरिया में रोड नेटवर्क बिछाएंगे। हम सभी डिस्ट्रिक हेडर्क्वाटर्स को रोड से कनेक्ट करेंगे।” उन्होंने कहा कि दूर-दराज के एरिया और ट्राइबल और बैकवर्ड एरिया में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर खास जोर रहेगा।
एक सरकारी अफसर ने बताया कि इस माह की शुरुआत में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भारतमाला प्रोजेक्ट के प्रेजेन्टेशन के बाद पहले फेज के क्लियरेंस के लिए पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की मंजूरी के लिए कहा था। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत कुल 10 लाख करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट की उम्मीद है। पहले फेस में करीब 20 हजार किमी हाइवे नेटवर्क का कंस्ट्रक्शन होगा, जिसमें इकोनॉमिक कॉरिडोर स्कीम, कोस्ट और अन्य रोड शामिल होंगे।
अफसर के अनुसार, रोड, ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे मिनिस्ट्री का प्रजेन्टेशन देखने के बाद पीएमओ ने नोट दिया था कि प्रोजेक्ट को अप्रूवल के लिए पीआईबी के पास भेजा जाए।
रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे मिनिस्ट्री ने ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म एटी कर्ने द्वारा प्रपोज्ड भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत स्टडी कराई थी। फर्म ने 44 इकोनॉमिक कॉरिडोर आईडेंटिफाई किया था। इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट का मकसद कार्गो का तेजी से मूवमेंट कराना है।
भारत सरकार जल्द ही देशभर में सड़कों का व्यापक नेटवर्क बनाने वाला ‘भारतमाला प्रोजेक्ट’ लॉन्च करने जा रही है। इसके पहले फेज में 20 हजार किमी हाइवे का कंस्ट्रक्शन होगा। रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मिनिस्टर नितिन गडकरी ने बताया कि हम जल्द ही ‘भारतमाला’ को लॉन्च कर देंगे। भारतमाला में नेशनल हाइवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (एनएचडीपी) समेत सभी मौजूदा हाइवे प्रोजेक्ट समाहित हो जाएंगे। पहले फेज में 20 हजार किमी हाइवे का कंस्ट्रक्शन होगा। गडकरी ने कहा कि एनएचडीपी और सभी मौजूदा स्कीम्स अगले छह माह में पूरे हो जाएंगे।
भारतमाला सरकार का एक मेगा प्लान है। यह एनएचडीपी के बाद दूसरा सबसे बड़ा हाइवे प्रोजेक्ट है, जिसमें करीब 50 हजार किमी हाइवे डेवलपमेंट हुआ। गडकरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस पर डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स (डीपीआर) तैयार की जा रही हैं और भारतमाला प्रोजेक्ट के पहले फेज में 20 हजार किमी हाइवे का कंस्ट्रक्शन दिखाई देगा।
उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एनएचडीपी शुरू किया था। इसे कई फेज में लागू किया गया। इसमें मेट्रो शहरों को जोड़ने के लिए स्वर्णिम चर्तुभुज योजना भी शामिल थी। एचएचडीपी के तहत करीब 10 हजार किमी रोड अभी बनाए जाने हैं। इसमें श्रीनगर को कन्याकुमारी से जोड़ने वाला नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर और पोरबंदर से सिल्चर से जोड़ने वाला ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर शामिल है।
गडकरी ने बताया, “भारतमाला के तहत बड़े पैमाने पर रोड कंस्ट्रक्शन कराएंगे और बार्डर एरिया में रोड नेटवर्क बिछाएंगे। हम सभी डिस्ट्रिक हेडर्क्वाटर्स को रोड से कनेक्ट करेंगे।” उन्होंने कहा कि दूर-दराज के एरिया और ट्राइबल और बैकवर्ड एरिया में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर खास जोर रहेगा।
एक सरकारी अफसर ने बताया कि इस माह की शुरुआत में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भारतमाला प्रोजेक्ट के प्रेजेन्टेशन के बाद पहले फेज के क्लियरेंस के लिए पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की मंजूरी के लिए कहा था। भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत कुल 10 लाख करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट की उम्मीद है। पहले फेस में करीब 20 हजार किमी हाइवे नेटवर्क का कंस्ट्रक्शन होगा, जिसमें इकोनॉमिक कॉरिडोर स्कीम, कोस्ट और अन्य रोड शामिल होंगे।
अफसर के अनुसार, रोड, ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे मिनिस्ट्री का प्रजेन्टेशन देखने के बाद पीएमओ ने नोट दिया था कि प्रोजेक्ट को अप्रूवल के लिए पीआईबी के पास भेजा जाए।
रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवे मिनिस्ट्री ने ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म एटी कर्ने द्वारा प्रपोज्ड भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत स्टडी कराई थी। फर्म ने 44 इकोनॉमिक कॉरिडोर आईडेंटिफाई किया था। इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट का मकसद कार्गो का तेजी से मूवमेंट कराना है।
बॉलीवुड के महान दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना की आखिरी प्रार्थना मुंबई के वर्ली में रखी गई जहां पूरा बॉलीवुड आखरी बार विनोद खन्ना की विदाई के लिए पंहुचा. इस प्रार्थना सभा में बॉलीवुड के कई बड़े-बड़े माने जाने स्टार पहुंचे जिनमे अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय, फरहान अख्तर, ज़ोया अख्तर, रितेश सिद्धवानी, शाहरुख खान, फरीदा जलाल, आमिर खान, किरण राव, रितिक रोशन, करीना कपूर खान, अर्जुन रामपाल, अरबाज़ खान, रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी पत्नी टीना अंबानी के साथ, श्वेता नंदा, मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी और आकाश अंबानी, राकेश रोशन, पूनम ढिल्लन, प्रेम चोपड़ा, मुकेश भट्ट, पूजा भट्ट, आदित्य पंचोली, शक्ति कपूर, माधुरी दीक्षित, हेमा मालिनी, अब्बाज-मस्तान, सूरज पंचोली, फरहा खान, श्रीदेवी, बोनी कपूर, सोनू सूद, सोनाक्षी सिन्हा, मलाइका अरोरा खान, अनुराग कश्यप, संजय खान और जावेद अख्तर सहित तमाम और भी सितारे पहुंचे.
लेकिन लगता है कि यह ऐक्टर ऋषि कपूर के उस ट्वीट का ही असर था, जिसमें उन्होंने विनोद खन्ना की अंत्येष्टि पर बॉलिवुड के यंगस्टर्स की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए उन्हें जमकर फटकार लगाई थी। वैसे ऋषि कपूर की फटकार के बाद विनोद खन्ना की प्रार्थना सभा में लगभग पूरा बॉलिवुड पहुंचा लेकिन इस मौके पर खुद ऋषि कपूर नदारद रहे। कपूर खानदान से सिर्फ राजीव कपूर ही नजर आए.
इस हिसाब से मुझे मान लेना चाहिए के मेरे मरने पर मुझे कोई कन्धा नहीं देगा. आपको बता दे कि विनोद खन्ना का निधन 70 साल की उम्र में कैंसर के चलते हुए था. विनोद को मुखग्नि उनके छोटे बेटे साक्षी खन्ना ने दी थी. साक्षी खन्ना विनोद खन्ना की दूसरी पत्नी कविता का बेटा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आकाशवाणी से 31 वीं बार ‘मन की बात’ की। आज प्रधानमंत्री ने देश भर के युवाओं से कुछ नया जानने व सीखने का आह्वान किया व सभी देशवासियों के प्रयासों द्वारा ‘न्यू इंडिया’ का स्वप्न साकार करने का भरोसा भी जताया। प्रधानमंत्री ने कई महापुरुषों के योगदान की याद दिलाई व युवाओं से भी उन दिशाओं में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित करते हुए कहा कि ‘मन की बात’ में विविधताओं से भरी हुई जानकारियां मिलती हैं व पता चलता है कि देश के हर कोने में शक्तियों का अम्बार भरा पड़ा है। मन की बात पर आये सुझावों का सरकार विश्लेषण करती है। मोदी ने कहा,”,इस विश्लेषण से हमने जाना है कि सुझाव भेजने वाले मात्र सुझाव ही नहीं भेजते, वे स्वयं उन मुद्दों का अनुभव करते हैं, उन्हें सुलझाने के लिए प्रयत्नशील हैं व ‘मन की बात’ के माध्यम से उन मुद्दों को पूरे देश तक पहुँचाना चाहते हैं। मैं उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं।”
पिछली बार ‘मन की बात’ में भोजन की बर्बादी पर हुई बात का ज़िक्र करते हुए पीएम ने कहा कि जनता ने अन्न के अपव्यय को रोककर उसे लाखों-करोड़ों गरीबों तक पहुंचने के अप्रतिम उपाय सुझाये। जनता, खासकर युवा वर्ग इस विषय में काफी जागरूक हुआ है। पीएम ने ‘रोटी बैंक’ का भी ज़िक्र किया जहाँ लोग बचा हुआ खाना जमा कराते हैं और ज़रूरतमंद लोग निःसंकोच वहां से पेट भर भोजन प्राप्त कर पाते हैं।
बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो गई हैं। पीएम ने इन छुट्टियों के सदुपयोग व ‘सेल्फ इम्प्रूवमेंट’ के विषय में काफी महत्त्वपूर्ण बातें कीं। प्रधानमंत्री ने कहा, “कई युवा कंफर्ट जोन में ही रहना चाहते हैं, लेकिन मैं गर्मियों की छुट्टी में जाने वाले युवाओं को तीन सुझाव देना चाहता हूं। स्किल डेवलपमेंट, एक्सपेरिमेंट्स व एक्सपेरिएन्सेस।” पीएम ने बच्चों से आह्वान किया कि वे नई जगह घूमने जाएं, अनुभव लें। हमेशा रिजर्वेशन से सफर करने वाले कभी जनरल कोच में सफर कर के देखें। सफर के उन 24 घंटों में काफी कुछ नया जानने-सीखने को मिलेगा। उन नए हुनर व कलाओं को सीखें, जो आप सीखना चाहते हैं, नई भाषाएं सीखें। जो आपने सीखा है, उसे मुफ्त में उन लोगों को सिखाएं, जो उन चीज़ों को सीखने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक आपको जोड़ने के लिए है, अलग करने के लिए नहीं। उसका सदुपयोग कर नयी चीज़े सीखें व औरों को भी सिखाएं।
प्रधानमंत्री ने वीआईपी कल्चर के बारे में मन की बात में चर्चा करते हुए कहा, देश में वीआईपी की जगह इपीआई (Every Person Is Important) का महत्व बढ़ाने की आवश्यकता है। पीएम ने कहा, “सरकारी निर्णय से लाल बत्ती का जाना, ये तो एक व्यवस्था का हिस्सा है, लेकिन हमें इसे मन से भी प्रयत्नपूर्वक बाहर निकालना है। हम सबको मिलकर इसके लिए जागरूक प्रयास करना होगा, तभी कुछ लोगों की कुंठित मानसिकता से ये वीआईपी का टैग निकल सकेगा क्योंकि देश भर की 125 करोड़ जनता वीआईपी है। उन्होंने मध्यप्रदेश की शिवा चौबे का इससे संबंधित मेसेज भी साझा किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत रामानुजाचार्य को याद करते हुए कहा, इस वर्ष संत रामानुजाचार्य की 1000वीं जयंती है। 1000 वर्ष पूर्व रामानुजाचार्य जी ने जातिगत भेदभाव, ऊंच-नीच, छुवा-छूत के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने अपने आचरण द्वारा लोगों में अपनी जगह बनाई। अछूत को मंदिर में प्रवेश दिलाने के लिए आंदोलन किए। भारत सरकार उनके सम्मान में 1 मई को एक डाक टिकट जारी करेगी।
पीएम ने कहा कि 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में विश्व मनाता है। श्रमिकों के कल्याण के लिए बाबा साहब अंबेडकर का योगदान भुलाया नहीं जा सकता।12वीं सदी के समाजसुधारक बसवण्णा ने भी श्रम व श्रमिकों के हित में काफी जागरूकता फैलाई। उन्होंने कहा था कि परिश्रम से ही भगवान प्राप्त होते हैं। प्रधानमंत्री ने इस दिशा में भारतीय मजदूर संघ के जनक दत्तोपान्त ठेंगड़ी के योगदान को भी याद किया। पीएम ने आगामी पर्व बुद्ध पूर्णिमा का ज़िक्र करते हुए कहा कि समाज को शांति का संदेश देने वाले भगवान बुद्ध के सन्देश हिंसा, युद्ध, शस्त्र प्रयोग, भय, प्रतियोगिता के माहौल में बहुत प्रेरणादायी साबित होते हैं।
अंत में पीएम ने भारत द्वारा आगामी 5 मई को लांच की जा रही दक्षिण एशिया सैटेलाइट का ज़िक्र करते हुए कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ से तात्पर्य बस अपने देश का नहीं, बल्कि सभी पड़ोसी मुल्कों का भी साथ व विकास है। भारत द्वारा प्रक्षेपित यह सैटेलाइट पूरे दक्षिण एशिया के लिए तमाम तरह से मददगार साबित होगा। उन्होंने इसे दक्षिण एशिया के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का उपयुक्त उदहारण व एक अनमोल नज़राना बताया। उन्होंने सभी दक्षिण एशियाई देशों को इस दिशा में सहयोग के लिए अनेक धन्यवाद व शुभकामनाएं दीं।
भारत ने देश में निर्मित सतह से हवा में मार करनेवाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-3 का गुरुवार को ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप सफलतापूर्वक प्रयोगिक परीक्षण किया। जमीन से जमीन पर मार करने वाला यह प्रक्षेपास्त्र परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और 3500 किलोमीटर तक किसी भी लक्ष्य को भेद सकता है। यह प्रक्षेपास्त्र 17 मीटर लंबा, दो मीटर चौड़ा और 50 टन वजनी है, जो डेढ़ टन विस्फोटक ढोने की क्षमता रखता है।
अग्नि-3 प्रक्षेपास्त्र दो चरण वाली ठोस प्राणोदक प्रणाली से लैस है। यह देश में किसी भी स्थान से हवा में उड़ाया जा सकता है। इस मिसाइल में द्विस्तरीय ईंधन भरे जाने की खासियत है। प्रक्षेपण के आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए इसके मार्ग की निगरानी टेली मेट्री स्टेशनों, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल प्रणाली और तट के निकट लगे आधुनिक रडारों तथा इंपैक्ट प्वाइंट के निकट लगे नौ सैनिक जहाजों के जरिए किया गया।
यह प्रक्षेपास्त्र हाइब्रिड नेविगेशन गाइडेंस एंड कंट्रोल प्रणाली के साथ एडवांस ‘ऑन बोर्ड कंप्यूटर’ से लैस है। इसका पहला परीक्षण नौ जुलाई 2006 को किया गया था। मिसाइल के परिक्षण के मौके पर गुरुवार को रक्षा मंत्रालय से जुड़े आइटीआर और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी व वैज्ञानिक दल उपस्थित था।
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को आरक्षित वर्ग में ही नौकरी मिलेगी, चाहे उसने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक क्यों न हासिल किए हों। जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने कहा कि एक बार आरक्षित वर्ग में आवेदन कर उसमें छूट और अन्य रियायतें लेने के बाद उम्मीदवार आरक्षित वर्ग के लिए ही नौकरी का हकदार होगा।
उसे सामान्य वर्ग में समायोजित नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह फैसला आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवार के मामले में दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि उसे सामान्य वर्ग में नौकरी दी जाए, क्योंकि उसने लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक हासिल किए हैं। नियम का हवाला कोर्ट ने कहा कि डीओपीटी की 1 जुलाई 1999 की कार्यवाही के नियम तथा ओएम में साफ है एससी/एसटी और ओबीसी के उम्मीदवार को, जो अपनी मेरिट के आधार पर चयनित होकर आए हैं, उन्हें आरक्षित वर्ग में समायोजित नहीं किया जाएगा।
उसी तरह जब एससी/एसटी और ओबीसी उम्मीदवारों के लिए छूट के मानक जैसे उम्र सीमा, अनुभव, शैक्षणिक योग्यता, लिखित परीक्षा के लिए अधिक अवसर दिए गए हों तो उन्हें आरक्षित रिक्तियों के लिए ही विचारित किया जाएगा। ऐसे उम्मीदवार अनारक्षित रिक्तियों के लिए अनुपलब्ध माने जाएंगे। याचिकाकर्ता ने उम्र सीमा में छूट लेकर ओबीसी श्रेणी में आवेदन किया था। उसने साक्षात्कार भी ओबीसी श्रेणी में ही दिया था। इसलिए वह सामान्य श्रेणी में नियुक्ति के अधिकार के लिए दावा नहीं कर सकती।
आप यदि अक्सर रेस्टॉरंट्स में खाने जाते रहते हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। आपके बिल में ऐड होने वाला कंपल्सरी सर्विस चार्ज अब आपकी मर्ज़ी के बगैर नहीं लिया जा सकेगा। कंज्यूमर अफेयर्स मिनिस्टर रामविलास पासवान ने कहा है कि होटेल और रेस्टॉरंट्स में सर्विस चार्ज देना जरूरी नहीं है। यह पूरी तरह से कस्टमर की इच्छा पर निर्भर करता है कि वह इसे दे या नहीं। इसलिए हॉटेल्स यह तय नहीं कर सकते हैं कि वह कितना पैसा सर्विस चार्ज के रूप में लेंगे। सरकार ने आज इस बारे में गाइडलाइन को मंजूरी दे दी है।
इस विषय में कंज्यूमर अफेयर मिनिस्टर रामविलास पासवान ने कहा, “अब सर्विस चार्ज नहीं लगेगा। इसे गलत चार्ज किया जा रहा है। हमने इस पर एक एडवायजरी तैयार की है। इसे अप्रूवल के लिए पीएमओ को भेजा गया है।” पासवान ने कहा, “सरकार ने सर्विस चार्ज पर तैयार गाइडलाइन को मंजूरी दे दी है। सर्विस चार्ज देना है या नहीं ये हॉटेल्स और रेस्टॉरंट्स तय नहीं करेंगे, बल्कि कस्टमर तय करेगा।”
गाइडलाइन के मुताबिक, बिल में सर्विस चार्ज का कॉलम कस्टमर के लिए खाली छोड़ना होगा। वो फाइनल पेमेंट के वक्त इसे भरेगा। अगर सर्विस चार्ज देना जरूरी किया गया तो कस्टमर्स कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कंज्यूमर अफेयर मिनिस्ट्री के एक सीनियर ऑशियल के मुताबिक, “मौजूदा कंज्यूमर प्रोटेक्शन लॉ के तहत इसमें बड़ा जुर्माना लगाने या कड़ी कार्रवाई करने का मिनिस्ट्री को पावर नहीं है। हालांकि, नए कंज्यूमर प्रोटेक्शन बिल में उसे यह पावर दिया जाएगा।”
हॉटेल्स एंड रेस्टॉरंट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के प्रेसिडेंट दिलीप दतवानी ने कहा, “सर्विस चार्ज दुनियाभर में लगता है और यह भारत में करीब 50 सालों से लगाया जाता रहा है। यह चार्ज ढका-छुपा तो है नहीं। मेन्यु में इसका साफ-साफ जिक्र किया जाता है। फूड आउटलेट पर आने वाला कस्टमर अच्छी तरह जानता है कि उसे सर्विस चार्ज देना होगा। सिर्फ हॉस्पिटैलिटी में ही नहीं, बल्कि कई बिजनेस हैं, जिनमें ऐसे चार्ज लगाए जाते हैं। मुझे समझ नहीं आ रहे कि अकेले हमें ही क्यों इससे बाहर किया जा रहा है।”
उल्लेखनीय है कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के मुताबिक, अगर किसी कंज्यूमर को गलत तरीके से सर्विस के बदले पैसा देने के लिए मजबूर किया जाता है तो वह इसकी शिकायत कंज्यूमर फोरम से कर सकता है। कंज्यूमर अफेयर मिनिस्ट्री को लोगों की तरफ से कई शिकायतें मिली थीं कि हॉटेल्स और रेस्टॉरंट्स में टिप के नाम पर 5 से 10% तक सर्विस चार्ज वसूला जा रहा है। कई हॉटेल्स और रेस्टोरेंट्स में सर्विस बेहतर ना होने के बावजूद कस्टमर्स को यह चार्ज देना पड़ रहा है, जिसके चलते सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के पहले दिन से ही पूर्व समाजवादी सरकार के लिए कई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से कई समाजवादी योजनाओं को बंद या उनके स्वरुप को बदल चुके हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी सरकार की एक और योजना की समीक्षा के आदेश दे दिए हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने सपा सरकार द्वारा वितरित यश भारती सम्मान की गहन समीक्षा के आदेश दिए हैं। यह आदेश मुख्यमंत्री योगी ने संस्कृति एवं लोक सेवा प्रबंधन विभाग को देखने के बाद दिया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले भी कई सपा योजनाओं की समीक्षा के आदेश दे चुके हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि पुरस्कारों के वितरण के दौरान उनकी गरिमा का ध्यान रखा जाये। अपात्र को पुरस्कृत करने से पुरस्कार की गरिमा गिरती है।
सीएम योगी ने कहा कि मैत्रेय परियोजना पर पुनर्विचार की जरुरत है। अनावश्यक भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसान विरोध कर रहे हैं। किसी भी योजना में भूमि अधिग्रहण से पहले किसानों की राय लें। उन्होंने आगे कहा कि पर्यावरण में होने वाले बदलावों से हम सभी प्रभावित होते हैं। पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। नदियों के किनारे उद्योगों से होने वाले जल प्रदूषण को रोका जाये।
यदि आप भी भारतीय रेल की ट्रेनों में सफर करते हुए उनके बदबूदार और गंदे शौचालयों से परेशान हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। अब जल्द ही आपको भारतीय रेल की प्रीमियम ट्रेनों में लक्ज़री टॉयलेट्स की सुविधा मिलने वाली है। जी हाँ! ट्रेन के डिब्बों के टॉयलेट्स की गंदगी को लेकर आ रही लगातार शिकायतों के चलते रेलवे ने यह अहम फैसला लिया है। इस प्लान के तहत सुविधाजनक यात्रा के लिए अगले चार महीनों में 66 प्रीमियम ट्रेनों में लग्जरी टॉयलेट सेटअप लगवाए जाएंगे।
दरअसल भारतीय रेल काफी लम्बे समय से यात्रियों के लिए ट्रेन के डिब्बों में साफ-सफाई रखने और एक क्लीन टॉयलेट मुहैया कराने को लेकर संघर्ष कर रही है। तमाम कोशिशों के बावजूद मौजूदा टॉयलेट्स के साथ साफ़ सफाई बनाये रखना संभव नहीं हो पा रहा, जिसके चलते रेलवे ने यह फैसला लिया है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इन नए प्रस्तावित टॉयलेट्स में लग्जरी फिनिशिंग पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। रोचक बात यह है कि ट्रेनों में बनाए जाने वाले नए टॉयलेट्स में तमाम सुविधाओं के अलावा यूरिनल और नैपी चेंजिंग काउंटर भी बनवाए जाएंगे, जिससे यात्रियों को काफी सुविधा होगी।
अधिकारियों की मानें तो उच्च क्वालिटी की फ्लोरिंग के प्लान की बात की जा रही है, जिसकी साफ-सफाई और मेन्टेनेन्स काफी आसान होगी। रेलवे ने नए टॉयलेट्स बनवाने के लिए दो डिजाइन्स को अप्रूव भी कर लिया है। उल्लेखनीय है कि इस नए प्रस्तावित प्रत्येक टॉयलेट डिजाइन की लागत लगभग 1.7 लाख रूपये होगी, जो वर्तमान के ट्रेनों के डिब्बों में इस्तेमाल किये जा रहे टॉयलेट की कीमत के बराबर ही है।
पिछले एक साल से काम के सिलसिले में न्यूयॉर्क में रह रहीं अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा इस सप्ताह भारत वापस लौटने वाली हैं। भारत से दूर इतना लंबा समय किसी अन्य देश में व्यतीत कर , उस देश से हुआ उनका भावनात्मक जुड़ाव उनके ट्वीट में साफ़ साफ़ नज़र आया। न्यूयॉर्क में अपने ‘आखिरी सप्ताह’ पर भावुक होकर प्रियंका ने ट्विटर पर अपनी मिलीजुली भावनाएं जाहिर कीं। ‘
प्रियंका ने ट्विटर पर लिखा, “मिलीजुली भावनाओं के साथ समान समेट रही हूं। कई सारी बातें दिमाग में आ रही हैं, जो आपको याद भी नहीं रहतीं। अगली बार आने तक…न्यूयॉर्क में आखिरी आधिकारिक सप्ताह….”
Packing up the house is such a conflicted emotion!so many things pop out that u didn’t remember..Last official week in NYC until next time..
— PRIYANKA (@priyankachopra)April 16, 2017
सूत्रों के मुताबिक प्रियंका ने एबीसी स्टूडियो और ‘क्वांटिको’ के निर्माताओं के साथ अनुबंध किया है, जो क्वांटिको के तीसरे सीजन के आने की ओर इशारा करता है, लेकिन शो निर्माताओं की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वैसे प्रियंका मई में एक बार फिर अपनी पहली हॉलीवुड फिल्म ‘बेवॉच’ का प्रचार करने अमेरिका जाएंगी। गौरतलब है कि प्रियंका ने पिछले महीने ही क्वांटिको के दूसरे सीजन की शूटिंग खत्म की है।