31 C
Mumbai
Friday, August 14, 2026
Home Blog Page 1002

तो मंत्री जी ने जमीन भी हड़पी और डैम पर भी कब्जा कर लिया?

पीयूष चिलवाल | Navpravah.com
“अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता” की विचारधारा को अपनाने वाले नेता मंत्री बनते ही सरकारी माल दबोचने की ज़ोर आजमाइश में लग जाते हैं। सरकारी संपती को हड़पने के लिए नेतागण हर पैंतरा आजमाते हैं और मंत्री बनते ही उनकी चांदी हो जाती है।
फायनेंशियलएक्सप्रेस.कॉम  में प्रकाशित खबर के अनुसार एक आरटीआई में खुलासा हुआ है छत्तीसगढ़ के कद्दावर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का जो इन दिनों फिर से विवाद में हैं।
खबर के मुताबिक़ मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने वन विभाग की 175 एकड सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री अपनी पत्नी के नाम करवाकर वहां रिजॉर्ट बनवा दिया। साथ ही  सरकारी जमीन हड़पने के साथ ही मंत्री ने एक और घोटाले को अंजाम देते हुए रिजॉर्ट के अंदर मनरेगा के पैसों से सड़क का निर्माण करवा लिया है। क्षेत्र के किसानों को पानी पहुंचाने के लिए रिजॉर्ट के अंदर एक डैम बना है, उसपर भी मंत्री जी ने ही कब्जा कर जिसका इस्तेमाल वे रिजॉर्ट की बागवानी में करते हैं।
वर्ष 2016 में पीएमओ ने जांच के आदेश जारी किए थे लेकिन अब तक मंत्री पर कोई कार्यवाई नहीं हुई है।

भारत ने श्रीलंका को कोलम्बो टेस्ट में धूल चटाई

पीयूष चिलवाल | Navpravah.com
पहली पारी में टीम इंडिया के 622-9 (पारी घोषित) के जवाब में 183 रन पर ऑलआउट होने के बाद फॉलोऑन खेल रही श्रीलंका दूसरी पारी में 116.5 ओवरों में 386 रन बनाकर सिमट गयी। टीम इंडिया ने श्रीलंका को पारी और 53 रनों से धूल चटाते हुए लगातार दूसरी बार श्रीलंका में सीरीज जीत ली है।
कोलंबो के सिंहलीस स्टेडियम में श्रीलंका और भारत के बीच चल रहे दूसरे टेस्ट के चैथे दिन भारत ने मैच जीत कर इतिहास बना दिया है। इसी जीत के साथ कैप्टन कोहली ने लगातार 8 सीरीज जीतने के साथ आस्ट्रलिया के स्टीव वाॅ के लगातार सात सीरीज जीतने के रिकार्ड को ध्वस्त कर दिया है। लगातार सबसे ज्यादा 10 सीरीज जीतने का रिकाॅर्ड आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग के नाम है।
इसी मैच में अपने टेस्ट करियर में 150 विकेट पूरे करने वाले रविंद्र जडेजा को मैन आॅफ द मैच चुना गया, जडेजा ने पहली पारी में नाबाद 70 रन बनाए थे और मैच में 7 विकेट लिए थे।
मैच की दूसरी पारी में जडेजा ने पांच तथा अश्विन और हार्दिक पांड्या ने 2-2 विकेट लिए।

आम आदमी की बेटी नहीं इसलिए ज़िंदा हूं

पीयूष चिलवाल | Navpravah.com
डरी और सहमी हुई लड़की को जब आखि़र में पुलिस की मदद मिली तो उसने राहत की सांस ली। रात को अपनी कार से जा रही थी कि अचानक पीछ से एक कार उसकी कार के इतने करीब चलने लगी की वो सहम गयी। उसका मन घबराने लगा और बस किसी तरह एक बार उन से बच निकलने की सोचने लगी। छेड़छाड़ के बाद ज़िंदा बचे रहने के लिए वो किसी आम आदमी की बेटी न होने को ही जिम्मेदार मानती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ मामला है हरियाणा में बीजेपी के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला और उसके दोस्त आशीष का जिन्होंने एक आईएएस की बेटी के साथ छेड़छाड़ का है। शराब के नशे में धुत छेड़छाड़ को अंजाम देने वाला विकास बराला जहां एलएलबी का छात्र है तो उसका दोस्त आशीष एलएलबी पूरी कर चुका है।
 रात को धुत होकर जब दोनों घर आ रहे थ तो दोनों ने लड़की की कार का पीछा करना शुरू कर दिया। उन्होंने लड़की की कार के आगे अपनी कार लगाकर उसे कार से बाहर उतारने की कोशिश करने लगे इस बीच लड़की ने पीसीआर को फोन कर दिया और को लड़कों से बचने के लिए कार को भगा दिया। बाद में दोनों युवकों को पीसीआर ने हाउंसिंग बोर्ड चैक के पास पकड़ लिया और दोनों लड़कों पर पुलिस ने धारा 354 और 185 मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष तंवर ने बीजेपी पर अपने नेता के बेटे को बचाने के लिए कानून का दुरूपयोग करने का आरोप लगाया है उनका कहा कि छेड़खानी के मामले में कोई इतनी जल्दी कैसे छूट सकता है, सरकार पुलिस पर बेटा बचाने का दबाव बना रही है। प्रधानमंत्री ने बेटी बचाने का आह्वान किया था और खट्टर सरकार छेड़खानी करने वाले बेटे को बचा रही है।
उधर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर कहना है कि सुभाष बराला के बेटे का मामला मेरे संज्ञान में आया है और ये बीजेपी या सुभाष बराला से जुड़ा मुद्दा नहीं बल्कि एक व्यक्ति विशेष का मामला है और चंडीगढ़ पुलिस कार्यवाही करने में पूरी तरह सक्षम है। वह अपना काम बखूबी कर रही है। बराला ने ज्यादा कुछ न कहते हुए सिर्फ इतना कहा है कि कानून अपना काम कर रहा है और सच्चाई सबके सामने होगी।

अजीब तो है वो लड़की :पुस्तक समीक्षा

 पीयूष चिलवाल | Navpravah.com
मैं भी उससे काफी बार मिला हूं और लोग जब भी उसके बारे में बात करते हैं तो यही कहते हैं “वो अजीब लड़की”। गलत भी क्या है उसमें? वो है ही एकदम अजीब, अजीब उन बाक़ी लड़कियों से और अजीब उस सोच से जो उसे अजीब होने का तमगा दे देती है, लेकिन वो सोच भी उसी की तरह है- एकदम अजीब।
ये अजीब लड़की यहीं कहीं है, मेरे आस-पास, तुम्हारे और मेर इर्द-गिर्द, किसी घर के अंदर तो किसी घर के बाहर, किसी स्कूल में गोरे लड़के को नकार सांवले लड़के से दोस्ती करने वाली या मेंटल असाइलम में अपने प्रेमी की मौत के बाद उसकी यादों के काफिले संग उसका इंतज़ार करती और पागल हुई जा रही है… संभावना तो इस बात की भी है कि वो अपने घर में ही सौतेलेपन की शिकार हो या भुक्तभोगी हो दो जिस्मों के बीच हुए तथाकथित प्रेम मेें होने वाले नाजायज प्रदर्शन की… हो सकता है कि वो अपने जिस्म की सौदेबाजी कर किसी जैन साहब की दुकान पर सिगरेट के उठते धुंएं से छल्ले बनाकर अपने खून को जला रही हो।
“वो अजीब लड़की” फि़लहाल कैद है बेहिचक और बेझिझक लिखने वाली प्रियंका ओम की कहानियों में, इंग्लिश लिटरेचर से ग्रेजुएट प्रियंका हिंदी में कमाल का लिखती हैं। अंजुमन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक चौदह लघु कहानियों का संग्रह है जिसकी हर कहानी पाठक के जेहन में उतर कर बाहर आने को छटपटाती हैं और किताब के 168वें पन्ने में जेहन की खिड़की खोल मस्तिष्क से बाहर आती हैं और अंतरात्मा से जवाब पाने की कश्मकश में बाहर ने जाने की शर्त रखकर दिल में अपने एक आशियाना बनाकर बैठ जाती हैं।
समाज के कड़वे सच को प्रियंका अपने जिस अंदाज में किताब की शक्ल देती हैं वो वाकई पाठकों के मन को झकदोर देता है और उन अनछुए पहलूओं को सोचने पर मजबूर कर देता है।
पहली कहानी में जहां लेखक एक ऐसी लड़की का जिक्र करती हैं जो अपने ही परिवार में अपनी छोटी बड़ी बहनों के बीच सौतेलेपन की शिकार हो जाती है तो दूसरी कहानी में वो उस पत्नि को लाने का प्रयास करती हैं जो अपने पति से सौरी नहीं बोलना चाहती और फिर एक के बाद एक तेरह पड़ाव पार करने के बाद जब पाठक आखिरी कहानी में फेयरनेस क्रीम के किस्से को पढ़ता है तो वो 21वीं सदी में भी जारी इस रंगभेद की परंपरा से खुद का बाहर निकालने की हर संभव कोशिश करता है। लेकिन इससे जब वो संग्रह की मुख्य कहानी “वो अजीब लड़की” को दसवें पाठ में पढ़ता है तो पुरूषवादी समाज से जुड़े कई सवाल उसके मन में आने लगते हैं और इसी वजह से लड़की का जैन साहब की दुकान से रोज सिगरेट पीना और उसके बाद हैपीडेंट चबाना उसे अजीब लगता है भले ही लड़की कहानी खत्म होते होते अपने ख़्वाब मुकम्मल कर लेती है लेकिन जैन साहब की दुकान में वो जिंदगी के पहलुओं का और बेहतर समझने के लिए जाना नहीं छोड़ती।
प्रियंका ओम
प्रियंका की बेस्टसेलर किताब जो अब तक तीन संस्करणों में आ चुकी है, हर तरह से बेहतरीन कहलाने की हक़दार है और अमेजॉन पर आसानी से उपलब्ध यह किताब फिलहाल आपकी लाइब्रेरी में आने का इंतज़ार कर रही है। प्रियंका को इस बेहतरीन कार्य के लिए मैं शुभकामनाएं देता हूं और भविष्य में और बेहतर साहित्यिक कृतियों के साथ मौजूदा समय में युवाओं के बीच लुप्त हिंदी साहित्य केे प्रति क्रेज को बढ़ाने की आशा करता हूं। बतौर समीक्षक पुस्तक को चार सितारे देने में किसी भी पाठक के हाथ नहीं कांपने चाहिए।
पुस्तक का नामः वो अजीब लड़की
लेखक का नामः प्रियंका ओम 
प्रकाशकः अंजुमन प्रकाशन, इलाहाबाद

डोनाल्ड ट्रंप का PAK को सख्त संदेश

america commented on pakistan
सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार जनरल एचआर मैकमास्टर ने पाकिस्तान को ट्रंप का बेहद सख्त संदेश दिया है, जिसमें उन्होंने पाक से कहा है कि वह तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और उस जैसे दूसरे आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने की ‘दोगली नीति’ को बदले, क्योंकि इससे खुद पाक को ही भारी नुकसान हो रहा है।
यूं तो आतंकियों को मदद पहुंचाने के अमेरिकी अधिकारियों के आरोपों का पाकिस्तान पुरजोर ढंग से खंडन करता रहा है, लेकिन यह मौका है अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाले से यह बात कही गई है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन में छपी खबर के मुताबिक, जनरल मैकमास्टर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी साफ किया कि अमेरिका इस इलाके में उन लोगों के बर्ताव में बदलाव देखना चाहता है, जो तालिबान, हक्कानी नेटवर्क और दूसरे आतंकी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह और मदद मुहैया करा रहे हैं।’
मैकमास्टर ने साथ ही कहा, ‘यहां खासतौर से पाकिस्तान की तरफ इशारा है और हकीकत में हम इन आतंकी संगठनों की मदद में कमी और इसे लेकर पाकिस्तानी की नीति में बदलाव देखना चाहते हैं।

मोदी सरकार ने दिया मुस्लिम लड़कियों को रक्षाबंधन का तोहफा

पीयूष चिलवाल | Navpravah.com
रक्षाबंधन से ठीक पहले मोदी सरकार ने मुस्लिम लड़कियों को तोहफा दिया है। सरकार ने मुस्लिम लड़कियों में हायर एजुकेशन को प्रोत्साहित करने के मकसद से 51,000 रुपये की राशि बतौर शादी शगुन देने का ऐलान किया है यह राशि स्नातक कर चुकी मुस्लिम लड़कियों को उनकी शादी के दौरान दिया जाएगा इसलिए इस योजना को “शादी शगुन” नाम दिया है।
यह योजना केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के तहत शुरू की जाएगी।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने इस योजना की घोषणा की है और कहा है कि इस योजना की मदद से मुस्लिम लड़कियों की तालीम को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार ने 9वीं और 10वीं में पढ़ने वाली मुस्लिम छात्राओं को 10 हजार रुपए बतौर वजीफा देने का भी ऐलान किया है जो अब तक सिर्फ 11 और 12 में पढ़ने वाली लड़कियों को दिया जाता था।
एमएईएफ के कोषाध्यक्ष शाकिर हुसैन अंसारी ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं के एक बड़े हिस्से को आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा नहीं मिल पाती है। यह राशि तो ज्यादा नहीं लेकिन इससे मुस्लिम महिलाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
इस स्कीम के लिए एक वेबसाइट भी तैयार की जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम बच्चियों को इस स्कीम का फायदा मिले और इस स्कीम से जुड़ी तमाम जानकारियां वेबसाइट पर उपलब्ध होंगी। उन्होंने इस योजना का श्रेय मोदी सरकार और अल्पसंख्यक मंत्रालय को दिया है।

आद्य नायिका की व्याप्ति : एक समीक्षा

डॉ० जीतेंद्र पाण्डेय (साहित्य-सम्पादक) | Navpravah.com

युवा कवि अरुणाभ सौरभ की लंबी कविता “आद्य नायिका” अपने समय की बेहतरीन कविताओं में से एक है । यशस्वी संपादक विनोद तिवारी द्वारा संपादित ‘पक्षधर’ में पुस्तिका – 2 के रूप में यह हमारे सामने आती है । 96 पृष्ठों में आबद्ध यह लंबी कविता कालखंड विशेष को रेखांकित करती अपने समय के कठिन प्रश्नों से जूझती है । यहां ‘सुंदर दुनिया’ की उर्वर कल्पना से लैस एक ऐसा संसार निर्मित है जहाँ परस्पर विरोधी शक्तियां किसी महान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए समानांतर चलती-सी प्रतीत होती हैं ।

दीदारगंज की यक्षिणी को कवि ने आद्य नायिका के रूप में बिंबित करते हुए एक संवाद स्थापित किया है । यह संवाद यक्ष-यक्षिणी का है जिसमें यक्षिणी संपूर्ण नारी जाति का प्रतिनिधित्व करती है । यक्ष की भूमिका में कवि स्वयं है । आद्य नायिका के मन में पुरुष-वर्चस्व के प्रति आक्रोश किंतु सृष्टि-सृजन के लिए समर्पण है । इसीलिए यक्षिणी अपनी सहेलियों को चट्टान सी कठोर, पर्वत की तरह अडिग और कविता में सूर्य बनने के लिए कहती है । वह नारी शक्ति का आह्वान करती है- “पर्वत-शिखरों से उन्नत/अपूर्व शक्तियों की स्वामिनी/और मेरा रूप/उसकी सुंदरता में/केवल शक्तियां हैं-अथाह/और आद्य नारियों/इतनी शक्तिशाली हो जाओ
कि/कोई सम्राट न कर पाए/तुमसे छल/कोई ईश्वर तुम्हें/झांसा न दे सके ।”

दूसरी ओर यक्षिणी का विवेकशील आक्रोश खूबसूरत सृष्टि-निर्माण में पुरुष-संग अमरत्व के बीज बोने के लिए भी तैयार हो जाता है-“तुम्हारे अंतस में छिपे/गुणों की पहचान करने/आत्मा की/आंतरिक संरचना में/अमरत्व का बीज देने/तुम्हें जीवन-पथ पर/सदैव संग रखने/तुम्हारे संग/जीने/रहने/और रहकर सदैव/अपने अस्तित्त्व में रहने/तुम्हारे भीतर छिपी स्त्री को/अपने भीतर छिपे पुरुष को/जगाने हेतु/हम संग रहेंगे।” इस प्रकार कवि ने सामाजिक समरसता स्थापित करते हुए वर्तमान स्त्री विमर्श को एक संतुलित मोड़ देने का कार्य किया है ।

नारी की अथाह शक्ति “आद्य नायिका” का मूल स्वर है किंतु साथ ही मगध का रक्तरंजित इतिहास, पर्यावरण-क्षरण की बेचैनी, मरणासन्न मनुष्यता, वैचारिक अभिव्यक्ति पर पहरा आदि ऐसी स्थितियां हैं जो पाटलीपुत्र को पटना में परिवर्तित करती हैं । महत्त्वाकांक्षा और शोण के प्रबल प्रवाह में कला की समझ लुप्त होती जा रही है । सौंदर्य एकाकी जीवन जीने के लिए अभिशप्त और प्रकृति-राग अंतर्यात्रा पर है । युवा कवि को इस प्रकार का मलाल होना कविता के लिए शुभ है । वह लिखता है –“देव परियों/सिखला दो/संसार को/नाट्य और गायन कौशल/कि संसार से/संगीत की आत्मा नष्ट हो चुकी।”

“आद्य नायिका” में व्यंजित ध्वन्यात्मकता और नाद सौंदर्य अनुपम है । भौगोलिक चित्रण कालिदास के ‘मेघदूतम्’ का स्मरण कराता है । नायिका भेद व नायिका का आभ्यंतर सौंदर्य अपनी क्लासिकी गरिमा में बेजोड़ है । शैल्पिक कसाव काव्य-भाषा को मुखर और संप्रेषणीय बनाती है । यहां बिंबों की तारतम्यता है जिससे कविता में रोचकता आद्यंत बनी रहती है । कविता से गुजरते हुए ऐसा लगता है मानो पाठक भारत के वैभवशाली इतिहास के विशेष कालखंड का हिस्सा हो । उत्थान-पतन, भय-सौंदर्य, रति क्रीड़ा, युगल-केलि, युद्ध विभीषिका जैसे दृश्यों से वह पूर्णतः साधारणीकृत हो जाता है ।

कथा-क्रम अबाध है । इसे समझने के लिए संपादक ने ऐतिहासिक तथ्यों और जनश्रुतियों का उल्लेख अपनी प्रस्तावना में किया है । वे लिखते हैं – “पटना के नजदीक दीदारगंज में गंगा नदी के किनारे सन् 1917 ई. में स्त्री की एक कलात्मक प्रस्तर मूर्ति प्राप्त हुई । इसे दीदारगंज की यक्षिणी के नाम से जाना गया । 2017 में इसकी प्राप्ति का शताब्दी वर्ष है । मौर्यकालीन यह मूर्ति अपने नाक-नक्श, अंगों के यथेष्ट सानुपातिक कटाव, उठान और वक्रता, चित्ताकर्षक गढ़न और ओपदार पेंटिंग की अद्भुत कला के लिए मशहूर है ।” कवि अरुणाभ का आत्मकथ्य यक्ष के रूप में सामने आता है । यह विद्रोही नहीं बल्कि शक्ति का आकांक्षी है ताकि दुनिया को बेहतर बनाया जा सके । हाँ, जातियों और धर्मों में बँटी दुनिया से यक्षिणी के साथ पलायन की बात करता है किंतु दूसरे ही क्षण वह पाटलीपुत्र को पटना बनने से बचाने के लिए यक्षिणी का साथ चाहता है ।

कवि अरुणाभ सौरभ

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि कवि अरुणाभ की कविता व्यापक फलक पर प्रतिष्ठित है, इतनी कि जितनी हम तलाश सकें । यहाँ इतिहास की अनुगूँज वर्तमान की धमनियों में दौड़ रही है । शरीर, मन और आत्मा में उतर चुकी है । इसीलिए तो कवि कोलाहल से दूर आद्य नायिका की गोद में मृत्यु की इच्छा प्रकट करता है । अस्तु ।

 

 

आद्य नायिका: अरुणाभ सौरभ कि लम्बी कविता 

प्रकाशक: पक्षधर (डॉ. विनोद तिवारी,नई दिल्ली)

 

Copyright © 2017 Navpravah Media Networks Pvt. Ltd..  All rights reserved. 

अब दफ्तर में फोन नहीं ले जा पाएंगे सरकारी कर्मचारी

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

दिनभर अपने स्मार्ट फोन पर गेम खेलने और वाट्सएप पर व्यस्त रहने वाले सरकारी कर्मचारियों पर राजस्थान सरकार ने अपनी कमर कस ली है। राजस्थान के सरकारी दफ्तरों में अब कर्मचारी स्मार्ट फोन का उपयोग नहीं कर पाएंगे और अगर कोई कर्मचारी स्मार्ट फोन दफ्तर लेके आता है तो उस दिन उसे घर भेज दिया जाएगा और साथ में छुट्टी भी दर्ज होगी।

प्रायोगिक तौर पर यह आदेश सिर्फ सिंचाई विभाग में लागू किया जाएगा और बाद में सभी सरकारी विभागों में स्मार्ट फोन लाने अथवा उपयोग पर रोक लगाई जाएगी। सरकार ने सिंचाई विभाग के सभी अधिशासी अभियंताओं को आदेश पर अमल करने का फरमान सुना दिया है। इसी कड़ी में सबसे पहले उदयपुर के अधिशासी अभियंता हेमंत पानगड़िया ने अपने अधीन सभी जोनल कार्यालयों में आदेश की प्रति भेज दी है जो आगामी आठ अगस्त से लागू होगा।

कार्यालय में किसी आगंतुक को भी मोबाइल फोन लेकर प्रवेश नहीं करने का आदेश दिया गया है और अगर कोई आगंतुक मोबाइल लेकर कार्यालय के भीतर प्रवेश करता है तो उसे 500 रुपये का जुर्माना भरना पड़ेगा।

चीन की चिंदीचोरी, भारत को हड़काने के लिए नेपाल को पटाने में जुटा

relation of nepal and china
सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
डोकलाम को लेकर भारत के साथ चल रही तनातनी के बीच चीन अब इस मसले पर नेपाल को अपने साथ लाने की कोशिश में जुट गया है। इसी के तहत चीनी राजनयिकों ने नेपाली अधिकारियों को इस मुद्दे पर अपना पक्ष बताया है।
अंग्रेजी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया ने राजनयिक सूत्रों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया कि डोकलाम मुद्दे पर चीन के मिशन उपप्रमुख ने अपने नवनिर्वाचित नेपाली समकक्ष के साथ शिष्टाचार भेंट में डोकलाम मुद्दे पर चर्चा की और इसे लेकर चीन के रुख से अवगत कराया है। भारत बातचीत के जरिये डोकलाम मसला हल पर जोर दे रहा है, वहीं चीन इस बात पर अड़ा है कि डोकलाम मुद्दे पर किसी भी तरह की अर्थपूर्ण वार्ता के लिए भारत को पहले वहां से अपने सैनिक हटाना होगा।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, चीन और नेपाल के अफसरों के बीच काठमांडू और बीजिंग में भी ऐसी ही बैठकें हुई हैं, यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत इस मसले को ट्रैक-2 डिप्लोमेसी के जरिये भी सुलझाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने का चीन का यह फैसला दो वजहों से अहम माना जा रहा है। पहला तो यह कि भारत इस विवादित क्षेत्र में चीन और नेपाल के साथ ट्राइजंक्शन शेयर करता है, वहीं दूसरी वजह यह है कि भारत बीते कुछ वक्त से पड़ोसी मुल्क नेपाल पर प्रभाव बनाए रखने को लेकर संघर्ष कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में अपनी चीन यात्रा के दौरान लिपुलेख पास के जरिये चीन के साथ व्यापार बढ़ाने का फैसला लिया था, इस कदम को लेकर नेपाल में काफी नाराजगी देखने को मिली थी और वहां संसद में मांग उठी कि भारत-चीन संयुक्त बयान में लिपुलेख का जिक्र हटाया जाए, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। नेपाली संसद ने यह भी जानना चाहा था कि क्या यह समझौते नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमतर तो नहीं कर रहा।
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि भारत और चीन के बड़े नेता इस महीने नेपाल की यात्रा करने वाले हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज जहां BIMSTEC की बैठक के लिए अगले हफ्ते काठमांडू जाएंगी, वहीं, चीन के उप प्रधानमंत्री वांग यांग भी 14 अगस्त को शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने नेपाल में होंगे। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सुषमा और यांग, दोनों ही डोकलाम विवाद पर चर्चा करेंगे।

लेफ्ट से आर-पार की लड़ाई लड़ने जेटली पहुंचे केरल

पीयूष चिलवाल | Navpravah.com

लंबे वक़्त से चल रहे लेफ्ट और भाजपा-आरएसएस कार्यकर्ताओं के बीच जारी केरल में खूनी संघर्ष के बीच भाजपा के सीनियर नेता एवं केंद्र सरकार में वित्त एवं रक्षा मंत्री अरूण जेटली केरल पहुंचे हैं। जेटली यहां आरएसएस कार्यकर्ता राजेश के घर पहुंचे हैं जिनकी कथित तौर पर सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने हत्या कर दी है।

हाल ही में सीपीएम कार्यकर्ताओं के कथित हमले में बुरी तरह घायल हुए उस आरएसएस कार्यकर्ता के घर भी जाएंगे साथ में वे हिंसा के शिकार अन्य पीड़ित परिवारों से भी मुलाकात करेंगे। केरल में चल रही ये राजनीतिक हत्याएं नई नहीं है पिछले एक दशक में 60 से अधिक लोग इस खूनी संघर्ष में अपनी जान गंवा चुके हैं।

देश के लगभग आधे भाग की राजनीति पर दबदबा कायम करने के बाद अब बीजेपी की निगाहें केरल पर है। और अपने कार्यकर्ताआंे की हत्या के बाद बीजेपी आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में आ चुकी है। इसी के तहत पार्टी ने अपने सबसे सीनियर नेताओं को केरल के मोर्चे पर उतारने का फैसला किया है।

कहा जा रहा है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी अगले कुछ दिनों में केरल में नज़र आ सकते हैं।
वहीं विरोधियों की अवधारणा यह है कि बीजेपी केरल में सिर्फ अपने राजनीतिक वर्चस्व को स्थापित करने के लिए केरल में हो रही हिंसा को तवज्जो दे रहा है साथ में यह भी कहा जा रहा है कि हाल ही में हुए मेडिकल काॅलेज घोटाले की आग से धुमिल हुई बीजेपी की साख को वो राजनीतिक हिंसा के मामले को ज़ोर शोर से उछालकर साफ करना चाहती है। विराधियों का यह भी कहना है कि जब हाल में बीजेपी और आरएसएस के कथित सदस्यों के हमले में एक दर्जन से ज्यादा लेफ्ट कार्यकर्ताओं की मौत हुई और कई लोग घायल हुए तब बीजेपी कहां सोयी हुई थी।

अपने गढ़ को सुरक्षित करने की कोशिश में जुटा सीपीएम इस मामले के राष्ट्रीय परिदृश्य में आने से खासा चिंतित है। सीपीएम के लोगों का कहना है कि जेटली को उन लोगों के घरों का भी दौरा करना चाहिए जिनकी जान कथित तौर पर आरएसएस और बीजेपी सदस्यों की हिंसा में गई है।