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Saturday, August 15, 2026
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“ओरिजिन ऑफ़ गॉडमैन” : जानिये बाबा रामरहीम के बारे में, कौन क्या कैसे?

आनन्द रूप द्विवेदी | Navpravah.com

रेप केस में दोषी पाए जाने के बाद डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम के भक्तों ने जमकर उत्पात मचाया. वाहनों में आग लगाई और जो बन सका वो तबाही की. किसी इंसान के इतने मदांध भक्तों को आखिर ये प्रेरणा मिली कहाँ से, ये जान पाना तो बेहद मुश्किल है लेकिन आइये जानते हैं कौन है वो शख्स जिसके भक्त इस कदर मतवाले हो चुके हैं.

गुरमीत सिंह का जन्म 15 अगस्त 1967 को मगहर सिंह और नसीब कौर के घर राजस्थान के गंगानगर में जाट सिख परिवार में हुआ. सात वर्ष की आयु में ही गुरमीत , डेरा सच्चा सौदा का अनुयाई बन गया जिसकी नींव संत मस्ताना जी ने 1948 में ही रख दी थी. खेलकूद में माहिर गुरमीत की पढ़ाई 10वीं. परिवार वालों ने स्कूल छोड़ने के बाद ही गुरमीत की शादी करवा दी. उसकी शादी से दो बेटियों और एक बेटे का जन्म हुआ.

अपनी बेटियों, परिवार के साथ राम रहीम

शादी के बाद भी गुरमीत डेरा में काम करता रहा. जहाँ वह शाह सतनाम जी के बेहद करीब आ गया. शाह सतनाम तत्कालीन डेरा के गुरु थे जिन्होंने 1990 में गुरमीत को डेरा का अगला प्रमुख बना दिया. अब गुरमीत बाबा राम रहीम बन चुका था. बतौर डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम ने समाज सेवा के कई महत्त्वपूर्ण काम किये जिनमें रक्तदान, वृक्षारोपण, सामूहिक शराब बंदी आदि काम शामिल हैं. अपने इन्हीं कामों के चलते बाबा राम रहीम लोगों के दिलों में जगह बना चुके थे. लोग बाबा राम रहीम को दीवानों की तरह चाहने लगे.

 

वर्ष 2002 में बाबा राम रहीम पर उनकी ही अनुयायी साध्वी द्वारा बलात्कार व कई अन्य महिलाओं पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को पत्र लिखकर पूरी दास्तान सुनाई गई, जिसपर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री ने चीफ़ जस्टिस को केस सौंप दिया.

2007 में में सिख समुदाय द्वारा ये आरोप लगाया गया कि बाबा राम रहीम ने सिखों के गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी जैसी वेशभूषा बनाकर सिखों की आस्था को चोट पहुंचाने का काम किया है. इसके बारे में डेरा द्वारा माफ़ी भी मांगी गई. सिखों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मुकदमा कायम किया गया लेकिन सिरसा कोर्ट द्वारा 2009 में व भटिंडा न्यायालय द्वारा 2014 में ये मुक़दमे खारिज कर दिए गये थे.

बाबा राम रहीम को ग्लैमर का शौक चढ़ा तो उन्होंने ‘लव चार्जर’ नाम से एक गाना शूट बनाया जो बेहद प्रसिद्द हुआ. भक्तों ने बाबा के इस रूप को स्वीकार करते हुए भी बहुत प्यार से पसंद किया. 2015 में बाबा फिल्म स्टार बनने निकल पड़े. उन्होंने ‘मैसेंजर ऑफ़ गॉड’ (MSG) सीरीज कई फ़िल्में बनाई जिनमें खुद हीरो बने. किसी सुपर हीरो की तरह बाबा राम रहीम ने फिल्मों में धाँसू एक्शन स्टंट्स किये.

पुराने पाप पीछा नहीं छोड़ते. ऐसा माना जाता है लेकिन बाबा के केस में ये मान्यता तब सच साबित हो गई जब पंचकुला कोर्ट ने बाबा को 2002 में साध्वी के साथ बलात्कार और क्रिमिनल इंटीमिडेशन जैसे चार्जेस में दोषी पाया. इसके बाद बाबा के अंधभक्तों ने पूरे क्षेत्र में जमकर उत्पात मचाया.

पीएम ने किया बाढ़ पीड़ित इलाके का सर्वेक्षण, 500करोड़ रुपये के राहत पॅकेज की घोषणा

PC : India today

न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

देश मे कई दिनों से बाढ़ की समस्या लगातार बनी हुई है, इसी क्रम मे पीएम मोदी ने बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। पीएम ने 500 करोड़ रूपये की राशि देने की घोषणा की और साथ ही हरसंभव मदद करने की बात कही। प्रधानमंत्री ने पूर्णिया में नीतीश कुमार, सुशील मोदी एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ रहित क्षेत्रों के बारे में विस्तार से बातचीत की।

प्रधानमंत्री ने नुकसान कि अनुमान लगाने के लिए एक केंद्रीय टीम गठित करने का भी आश्वासन दिया है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों का जितना नुकसान हुआ है जल्द से जल्द उसका आकलन किया जाये, और फसल बीमा के सम्बन्ध में बीमा कम्पनियां उसका निरीक्षण करे और किसानों को उनका मुआवजा प्रदान किया जाये। परिवहन मंत्रालय को बाढ़ से प्रभावित सड़कों की मरम्मत के लिए निर्देश भी जारी किया गया। प्रधान मंत्री राहत कोष से बाढ़ से मरे परिवारों को 2 लाख रुपए एवं गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपए देने की घोषणा की गयी।

बाढ़ के मद्देनजर नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबाऔर प्रधानमंत्री मोदी में इस बात पर सहमति बनी है कि सप्तकोसी हाई डैम परियोजना और सुनकोसी संग्रहण योजना की विस्तृत रिपोर्ट को तैयार किया जाएगा। दोनों देश जलभराव और बाढ़ नियंत्रण पर भी आपस में समन्वय और मजबूत करेंगे।

‘राजनीतिक फायदे के लिए जलने दिया शहर’ :हाईकोर्ट

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
रेप के मामले में मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिये जाने के बाद पंचकूला समेत राज्य में भड़की हिंसा पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाते हुए कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए शहर जलने दिया।
हाईकार्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार ने सरेंडर किया है, अब तक इस हिंसा में 31 लोगों की मौत हो चुकी है, 200 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। पंजाब के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है।
कल शुरू हुई हिंसा में मीडियाकर्मियों पर हमला भी किया गया था, पंचकूला में 100 से अधिक वाहन आग के हवाले कर दिए गए हैं। साल 2002 में डेरा सच्चा प्रमुख बाबा गुरमीत राम रहीम पर साध्वी के यौन शोषण के आरोप लगे, इस मामले की जांच हाई कोर्ट ने सीबीआई को सौंप थी।
एक साध्वी ने गुमनाम चिट्ठी के जरिए गुरमीत राम रहीम पर यौन शोषण सहित कई अन्य संगीन आरोप लगाए थे। साध्वी ने आरोप लगाते हे एक पत्र मीडिया, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, पीएम के नाम जारी किया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने 24 सितंबर 2002 के इस मामले की जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया था।
लेकिन लंबे अरसे से मामला पंचकूला की सीबीआई अदालत में चल रहा है, कल राम रहीम को रेप मामले में दोषी करार दिया गया, अदालत सजा पर फैसला 28 अगस्त को सुनाएगी।

‘बाबूमोशाय बन्दूकबाज़’, फैज़ल खान बिलकुल नहीं है! :फिल्म समीक्षा

आनंद रूप द्विवेदी | Navpravah.com

नवप्रवाह रेटिंग★★★★ 

कलाकार: नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी, बिदिता बाग़, श्रद्धा दास, जतिन गोस्वामी, दिव्या दत्ता, अनिल जॉर्ज

निर्देशक: कुशान नन्दी

कहानी/गीत: ग़ालिब असद भोपाली

फ़िल्म कैटेगरी: एक्शन

अवधि: 2 घंटे 2 मिनट

फ़िल्म में बाबू बिहारी  यानी नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने एक कॉन्ट्रैक्ट किलर की भूमिका निभाई है. बांके  यानी जतिन भी एक कॉन्ट्रैक्ट किलर है. एक नामचीन शख्स की हत्या का कॉन्ट्रैक्ट संयोग से दोनों को ही मिल जाता है जिसके बाद हत्याओं की संख्या में प्रतिस्पर्धा दोनों के बीच शुरू हो जाती है. जो जितने ज्यादा क़त्ल करेगा वो ही नम्बर वन कहलायेगा.  बाबू बचपन से ही हत्याएं कर रहा है. बाबू और बांके दोनों ही इस बात से अनजान होते हैं कि उनकी हत्याओं की प्रतिस्पर्धा के बीच कुछ अलग ही गेम चल रहा है.

फिल्म को बिलकुल भी संस्कारी न समझें. अगर आप पहलाज निहलानी साहब का संस्कारी चश्मा पहन कर प्रगतिशील सिनेमा देखने जायेंगे तो असहज महसूस कर सकते हैं, क्योंकि गोली बारी के बीच आपको भरपूर सेक्स सीन्स देखने को मिलेंगे. यास्मीन यानि श्रद्धा डांसर है और बाबू के लिए सुपारी लाती है. फुलवा यानि बिदिता बाग़ ने अपने किरदार के साथ पूरी ईमानदारी बरती है. फुलवा फिल्म में बाबू की प्रेमिका की भूमिका में है जिसे देखने के बाद बांके को भी उससे प्यार हो जाता है. अब कहानी इन्हीं प्रेम त्रिकोण, हत्याओं , राजनीति के चारों तरफ घूमती नजर आती है. सुमित्रा यानी दिव्या दत्ता और दुबे यानि अनिल दोनों राजनेताओं के आपसी संघर्ष में कैसे दोनों किलर्स बाबू और बांके अपने खुद के मनमुटाव को डील करते हैं ये तो आपको फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा.

 

 

फिल्म की कहानी लिखने वाले ग़ालिब असद भोपाली ने बेहतरीन कथानक पेश किया है. फिल्म के गाने भी ग़ालिब ने ही लिखे हैं जो काफ़ी हद तक फिल्म की आत्मा के साथ मैच करने में कामयाब हुए हैं. फिल्म का संगीत औसत है. बर्फानी, चुलबुली और घुंघटा गाने फिल्म में आपको अच्छे लगेंगे.  हलांकि फिल्म का स्क्रीनप्ले थोड़ा और बेहतर बनाया जा सकता था. नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बेजोड़ अदाकारी के लिए जितना कहें कम होगा. बाबू के रोल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी आपको गैंग्स ऑफ़ वासेपुर का फैजल खान लग सकता है लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है.

अगर आप गैंग्स ऑफ़ वासेपुर देखकर बाबूमोशाय बन्दूकबाज़ की कल्पना कर रहे हैं तो ये बिलकुल भी न करें क्योंकि इस फिल्म का कथानक अलग है. राजनीति, प्रेम, और हत्याओं साजिशों के बीच बेहद होशियारी से रची गई इस कहानी से आपको वासेपुर की तस्वीर नजर नहीं आएगी. बेशक बाबूमोशाय बंदूकबाज अलग अलग टेस्ट की फिल्म है. बतौर निर्देशक  कुशान नंदी नंदी की ये फिल्म, नवाज़ुद्दीन और बिदिता बाग़ की बेजोड़ अदाकारी के लिए चार स्टार डिज़र्व करती है.

 

कश्मीर में सुरक्षाबलों पर जैश आतंकियों का हमला, 3 जवान शहीद

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

 

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के जिला पुलिस लाइन में आतंकवादी हमला हुआ है। इस हमले में अज्ञात आतंकियों की फायरिंग में एक पुलिसकर्मी शहीद हो गया। सीआरपीएफ के अनुसार जवानों पर फायरिंग करीब के फैमिली क्वाटर से हुई। इस फायरिंग मे सीआरपीएफ के 182 बटालियन के भी दो जवानों के शहीद ही गए। हमले में अब तक कुल तीन जवानों के शहीद व 5 जवानों के घायल होने की खबर है। इस हमले की जिम्‍मेदारी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद ने ली है। घायल सैनिकों का इलाज श्रीनगर  के 92 बेस अस्तपाल में चल रहा है। फिलहाल घायलों की हालत स्थिर बतायी जा रही है।

गोलाबारी की ये घटना तड़के 4 बजकर 15 मिनट पर हुई।

खबरों के अनुसार जवानों पर फायरिंग तब की गई, जब वे ऑपेरशन के लिए निकल रहे थे। सीआरपीएफ और पुलिस के जवानों ने उस इमारत को घेर लिया है, जिसमें आतंकी छिपे हुए हैं। जवानों ने अज्ञात आतंकियो की तलाश शुरू कर दी है। खबर है कि पुलिस क्वाटर मे तीन से चार आतंकी छिपे हो सकते हैं।

सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में दिक्कत हो रही है। कारण यह है कि पहले सुरक्षाबलों को पुलिस के परिवारों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ रहा है ताकि छुपे आतंकियो को आसानी से मार गिराया जा सके। दूसरी ओर उत्तरी कश्मीर के बारामुला के सोपोर के हयगाम मे भी आतंकियो ने सेना की कैस्पर गाड़ी पर फायर किया, लेकिन इस हमले किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

जमशेदपुर: एमजीएम मेडिकल कॉलेज में कुपोषण से 60 बच्चों की मौत

शिखा पाण्डेय|Navpravah.com

भारत को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए सरकार द्वारा तमाम योजनाएं बनाने के बावजूद देश में कुपोषण से मरनेवाले बच्चों की संख्या में शर्मनाक बढ़ोतरी हुई है। जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज में 60 बच्चों की मौत हुई है। ये सभी बच्चे कुपोषित थे। इन कुपोषित बच्चों को गंभीर स्थिति में अस्पताल के सीसीयू में भरती कराया गया था।

पिछले तीस दिनों में हुए हुई इन 60 मौतों की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम में डायरेक्टर मेडिकल एंड एजुकेशन डॉ एएन मिश्रा, रीजनल डिप्टी डायरेक्टर डॉ हिमांशु भूषण और सिविल सर्जन डॉ केसी मुंडा शामिल हैं। टीम के सदस्यों ने शुक्रवार को अस्पताल पहुंच कर मामले की जांच की। बाल विभाग के प्रभारी और नर्स से पूछताछ के बाद जांच टीम ने पाया कि अस्पताल में बच्चों की मौत से संबंधित आंकड़े ठीक नहीं हैं। बीएचटी में बच्चों की उम्र कुछ और डाटा इंट्री में कुछ और दर्ज है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि एक  हजार में 25 बच्चों की मौत होती है, तो यह मान्य है, पर यहां तो मौत का आंकड़ा अत्यंत चिंताजनक है।

उल्लेखनीय है कि इस अस्पताल में बंगाल, ओड़िशा सहित पूरे कोल्हान के लोग अपने बीमार बच्चे का इलाज कराने आते हैं। एनआइसीयू में शून्य से 28 दिन के बच्चों को रखा जाता है। बच्चों की मौत का मुख्य कारण उनका तय समय से पहले जन्म लेना, मां के कमजोर होने और उनमें खून की कमी होने से बच्चों का भी कमजोर होना शामिल है। टीम ने पाया कि पहले यहां पीआइसीयू व एनआइसीयू नहीं रहने के कारण गंभीर बच्चों को दूसरे अस्पतालों में भेज दिया जाता था, लेकिन अब वैसे बच्चों का भी यहां इलाज किया जाता है। मौत का आंकड़ा बढ़ने का यह भी अहम् कारण है। टीम ने जांच में पाया कि अस्पताल में हर माह बच्चों के भरती होने की संख्या बढ़ रही है। उसी अनुपात में मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है।

जांच दल में शामिल निदेशक मेडिकल एजुकेशन डॉ एएन मिश्र ने कहा, अब तक की जांच से पता चला है कि बच्चों की मौत कुपोषण से ही हुई है। गर्भवती मां अस्पताल में जाकर एएनसी नहीं कराती, जिस कारण उन्हें सही खुराक नहीं मिल पाती। टेटेनस की सुई नहीं मिल पाती। जन्म के बाद भी नवजात को जो टीका मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पाता। नतीजतन बच्चों की स्थिति जब बिगड़ जाती है, तब उन्हें अस्पताल लेकर आते हैं।

निदेशक प्रमुख डॉ  सुमंत मिश्रा ने कहा कि बच्चों की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है। अभी तक की जांच में यह बात सामने आयी है कि जिले में संस्थागत प्रसव बढ़ा है। मिश्रा के अनुसार , पहले बच्चे की मौत हो जाती थी, तो पता ही नहीं चलता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। संस्थागत प्रसव के बाद बच्चे की स्थिति खराब होने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और उसके बाद अस्पताल भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा, “सरकार गर्भवती महिलाओं के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जागरूकता के अभाव में गर्भवती महिलाएं इसका लाभ नहीं उठा पाती हैं। इससे विटामिन की पूरी खुराक नहीं मिल पाती है, जिससे माताएं कमजोर हो जाती हैं। इससे बच्चे भी कमजोर व कुपोषित पैदा हो रहे हैं।” मिश्रा ने बताया कि जांच टीम ने  रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जायेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

क्या हैं मौत के आंकड़े?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक अस्पताल में मई से अगस्त के दौरान एनआइसीयू, पीआइसीयू व वार्ड में विभिन्न रोगों से ग्रस्त 1867 बच्चों को भरती किया गया था। इनमें से 164 बच्चे की मौत हो गयी। सिर्फ एनआइसीयू की यदि बात करें, तो इसमें कुल 343 बच्चे भरती थे और यहीं सबसे अधिक, अर्थात 112 बच्चों की मौत हुई। अगस्त में इन तीनों जगहों पर कुल 470 बच्चों को भरती कराया गया था, जिनमें 41 बच्चों की मौत हो चुकी है। पीआइसीयू में 110 बच्चों में 31 और वार्ड में 1410 में 21 बच्चों की मौत हो गयी।

अब घर बैठे बनेगा ड्राइविंग लाइसेंस!

न्यूज़ डेस्क । Navpravah.com

सरकार ने चुनाव मे जो वादा किया था, उसे कल से पूरा करने जा रहा है, परिवहन विभाग अब महिलाओं के ड्राइविंग लाइसेंस मुफ्त में बनाएगा। जानकारी के मुताबिक़ आज से यह सुविधा लागू की जायेगी।

वहीं विभाग ने बस ड्राइवरों की मुश्किल बढ़ा दी है, अब उन्हें साल में एक बार अपनी आंखों की जांच करवाना होगी, साथ में आई टेस्ट प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से रखना होगा। परिवहन विभाग ने हाल ही में इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था, इसमें महिलाओं को राहत देने सहित वाहन चालकों, वाहन मालिकों के लिए नए नियम लागू किए गए हैं।

गत वर्ष मार्च में वित्तमंत्री ने महिलाओं को लाइसेंस फीस से छूट देने की घोषणा की थी। यह छूट महिलाओं को पहली बार लाइसेंस के लिए आवेदन देने पर दी जाएगी। आरटीओ एमपी सिंह के मुताबिक, यह छूट लर्निंग व स्थायी दोनों लाइसेंस के आवेदनों पर रहेगी।

वर्तमान में लर्निंग लाइसेंस के लिए 70 रुपए और दो व चार पहिया वाहनों के स्थायी लाइसेंस के लिए 100 रुपए फीस चुकाना होती है। मगर वास्तव में स्थायी लाइसेंस के लिए 300 रुपए वसूले जाते हैं, इसमें स्मार्ट चिप कंपनी द्वारा जारी कार्ड की फीस भी शामिल है।

अब बस ड्राइवरों को अपनी आंखों की वर्ष में एक बार अनिवार्य रूप से जांच करवाना होगी। मान्यता प्राप्त नेत्र विशेषज्ञ का प्रमाण पत्र भी साथ रखना होगा। उसमें इस बात का उल्लेख जरूरी होगा कि वह नेत्र रोगी या रतौंधी से पीडि़त नहीं है।

इन प्रावधानों में भी हुए संशोधन-

(1) लंबी दूरी के सफर को आरामदायक बनाने के लिए पहले 150 किमी से अधिक दूरी के लिए 50 सीटर बसें अनिवार्य थी, अब इस प्रावधान को बदलते हुए अब 75 किमी से अधिक दूरी के लिए 50 सीटर बसें चलाना होंगी।
(2) इसी तरह वाहनों की उम्र को भी कम करते हुए अब 15 वर्ष कर दिया गया है।

20 सितंबर तक टाली गई 2G स्पेक्ट्रम मामले की सुनवाई

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा, कनिमोझी और अन्य के खिलाफ 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की सुनवाई 20 सितंबर तक टाल दी है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओ.पी.सैनी ने इस संदर्भ में दस्तावेजों के अध्ययन की प्रक्रिया जारी रहने की वजह से मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है।

न्यायाधीश ने कहा कि इसमें कुछ समय लग सकता है, अदालत 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन के दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई कर रही थी। इसमें से एक की जांच सीबीआई ने, जबकि दूसरे की प्रवर्तन निदेशालय ने की है। सीबीआई के मुताबिक, राजा ने 2जी मोबाइल वायु तरंगें और दूरसंचार कंपनियों को लाइसेंस देने में पक्षपात किया, जिससे राजस्व को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई द्वारा दायर आरोपपत्र के मुताबिक, डीबी समूह से कलाइगनर टीवी को 200 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए।

नियमों को ताक पर रखकर स्वान टेलीकॉम को 2जी स्पैक्ट्रम आवंटन करने के बदले दिए गए, ईडी ने धनशोधन मामले में अलग से मामला दर्ज किया है। इसमें राजा, कनिमोझी, डीएमके सुप्रीमो एम. करुणानिधी की पत्नी दयालु अम्माल और अन्य के खिलाफ षडयंत्र रचने का आरोप लगाया गया था।

टेंशन में आसाराम, इन बाबा को कहा, “जलता है मजनू”

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

बाबा राम रहीम पर बलात्कार का अपराध सिद्ध होने के बाद अन्य बड़ी हस्तियों का बयान बाद में, आसाराम बापू का बयान पहले आ गया है। बलात्‍कार के ही आरोप में सालों से जेल में बंद आसाराम बापू ने गुजरात की जेल से ही इस फैसले पर बयान जारी क‍िया है। उन्‍होंने इस मामले को बाबा रामदेव व भारतीय जनता पार्टी की मिली जुली साजिश बताया है।

आसाराम ने बाबा रामदेव पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा, “बाबा रामदेव ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर हम दोनों को फंसवाया है। बाबा रामदेव शुरू से ही हमारी प्रसिद्धि से जलते थे। मेरे और बाबा राम रहीम के जलवे बाबा रामदेव से कहीं ज्यादा थे। अगर हमें फंसवाते नहीं तो हम उनके धंधे को चौपट कर सकते थे।”

asaram,s counter attack on baba ramdev

आसाराम ने कहा, “मैं और बाबा गुरमीत राम रहीम बिल्कुल निर्दोष हैं। हम दोनों बाल ब्रह्मचारी हैं। हम लोगों ने आज तक किसी महिला को छुआ तक नहीं है, तो रेप कैसे कर सकते हैं। मैंने और बाबा राम रहीम ने डेरा सच्चा सौदा के कैंप में ऑपरेशन करवाया था। उसके बाद हम लोग ब्रह्मचारी बन गए थे।”

आसाराम ने कहा, ” रामदेव की पतंजलि से ज्यादा डेरा सच्चा सौदा और मेरे प्रोडेक्ट बिकते थे। वे बाबा बिरादरी पर अकेला राज करना चाहते हैं।” आसाराम ने कहा कि उनके मामले में फैसला इसलिए नहीं सुनाया जा रहा क्योंकि सरकार जानती है कि अगर फैसला आ जाता है तो हमारे समर्थक भी सड़कों पर उतरेंगे और हमें भूल चुकी जनता एक बार फ‍िर हमारा रुतबा देखेगी। उन्‍होंने च‍िंता जताई कि‍ कहीं जेल में ही उनकी मृत्‍यु न हो जाए और रेप का कलंक कभी धुल ही न पाए।

आसाराम ही नहीं, इस मामले में बाबा रामपाल की भी प्रतिक्रिया आ गई। रामपाल का भी यही मानना है कि उन्‍हें भी बाबा रामदेव ने ही फंसाया है। बाबा रामपाल ने तो यहाँ तक मांग कर दी कि उन्हें, बाबा आसाराम और बाबा राम रहीम को एक ही जेल में रखा जाए, ताक‍ि राम रहीम गाना बजाना कर उनका मनोरंजन तो कर सकें।

उल्लेखनीय है कि डेरा सच्चा सौदा प्रमुख बाबा राम रहीम को साध्वी रेप मामले में सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार (25 अगस्‍त) को दोषी करार दे दिया। फैसला आते ही बाबा को हिरासत में ले लिया गया। उनके समर्थक उनके द‍िखाए रास्‍ते पर दौड़ने लगे। ज‍िसे जहां देखा, वहीं मारा, गाड़‍ियां जलाईं, स्‍टेशनों को आग लगाया। वैसे भी राम रहीम सिंह से जुड़ा ये कोई पहला मामला नहीं था, उनपर कई अन्य केस हैं, जिससे वो पहले भी विवादों के घिरे में रहे हैं।

“समाज में बदलाव चाहिए? तो शुरुआत करनी ही पड़ेगी”

 प्रो. हेमलता श्रीवास्तव | Navpravah.com

सामाजिक परिवर्तन या सुधार तभी सम्भव हो पाते हैं, जब सम्बंधित समाज ये स्वीकार करे कि “अमुक बुराई” हममें है । सती प्रथा समाप्त हो गई लेकिन कानून और विधान के बावजूद दहेज़ प्रथा और अस्पृश्यता का दंश आज भी हिन्दू समाज को ज़बरदस्त ढंग से भीतर तक सालता है  सोचिये क्यों ? क्योंकि हम अभी भी कुछ कारणों से उन्हें पूरी तरह त्याग नही पाए हैं ।

बीए में पढ़ते समय सारिका पत्रिका में मेहरुन्निसा परवेज़ की कहानी “हलाला” पढ़ी। रूह काँप गई। प्रिंसिपल, टीचर्स, मुस्लिम सहेलियों और माँ से भी बात की; दो ही जवाब मिले पहला  कि, कहानी है , सच नहीं और दूसरा कि, फ़ालतू चीज़ें न पढ़ा करो ।

नब्बे के दशक में जब गूगल बहुत प्रचलित नहीं था,  डॉ नवल अल सादवी की आत्मकथा पढ़ी ” The Hidden Face of Eve “. रोंगटे खड़े हो गए । इसी बीच NIP और दैनिक जागरण में भी उस क्रूर परंपरा के विषय में पढ़ा जिसमे अरब देश सहित विश्व के अनेकों देशों में मुस्लिम लड़कियों को 7-12 की आयु के बीच महिला-खतना (Female-Circumcision) से गुजरना पड़ता था। विनी मंडेला और नवल अल सादवी प्रमुख महिलाएं थीं जिन्होंने इसका विरोध किया था।

वुमेन सेल की अध्यक्ष होने के नाते मैंने तमाम महिला शिक्षकों को वे कागज़ात, अध्ययन और आंकड़े बताए कि कैसे लगभग प्रत्येक वर्ष हज़ारों लड़कियाँ इन्फेक्शन के कारण या  पहले प्रजनन में ही मृत्यु को प्राप्त होती हैं । दो को छोड़कर बाकी सब कागज़ात भी वही छोड़ गईं और मुस्लिम टीचर्स ने तो यहाँ तक कहा कि हमारे धर्म को हेमलता बदनाम कर रही है। ये अलग बात है कि अब गूगल मेरे सत्य को प्रमाणित करता है, लेकिन अपना समाजशास्त्रीय अध्ययन भी मेरी उपेक्षा का कारण बन गया ।

परिवर्तन और सुधार की पहली शर्त होती है, ” हाँ हममें कुछ कमियाँ हैं …. हम इन्हें समाप्त करेंगे … दूसरों को भी समझाएँगे …. सब मिलकर समाज और समुदाय को सुधारेंगे ” । रूढ़िवादी परंपराओं का विरोध करने के लिए आत्म विश्वास भी होना चाहिए कि “हम गलत नहीं हैं ” । मासिक धर्म आने के बाद भी मैंने नृत्य किये, NCC में परेड की, टेबल टेनिस खेली (वह भी तब, जब Spasmindon खाकर मासिक धर्म को स्थगित करने की जानकारी हमें नहीं थी)। पूजा-पाठ भी किये, मंदिर भी गई और अचार-पापड़ भी बनाए ।  सब समझाते थे कि भगवान नाराज़ हो जाएँगे। मेरा मानना था कि देवी-देवताओं के बच्चे भी तो इसी जैविक प्रक्रिया के माध्यम से जन्म लिए होंगे ! जो देवियों और माता रानी के साथ भी होता हो ;  वो मासिक धर्म भला अपवित्र कैसे हो सकता था ?

पारम्परिक वेशभूषा में भारतीय स्त्री (प्रतीकात्मक चित्र)

प्रथाएँ, परम्पराएँ और रीति-रिवाजों के सामने खड़े हो सकने के लिए …. आपके पास अकाट्य तर्क होने चाहिए ।  1977 में विवाह के पश्चात फाफामऊ (इलाहाबाद) पहुँची। यहाँ का अलिखित कानून है कि दूल्हा-दुल्हन आलोपी देवी के दर्शन करेंगे । सजा धजा कर मुझे तैयार किया गया। टेम्पो बुलवाई गई। चलते समय मेरी नज़र अरुण जी पर पड़ी ; अरुण जी घरेलू कपड़ों में थे। ननद से पूछा “तुम्हारे दद्दा ?” झट चचिया सास बोल पड़ीं “अरुण न जइहैं ।”  मैंने पूछा “काहे ?”   अबकी सासु माँ बोलीं  “अरुण क़ब्बउ पूजा पाठ नै किहें ।“   मेरा पारा चढ़ गया – ” तो हमार का दूसर बियाह बा ? हमहू कबहू नै कियें । “

सन्नाटा पसरा गया, बुआ सास समझाने लगीं, “अईसन नै होत दुल्हिन । पूजा तो करै कै पड़ी । ”  मैंने अब अपनी ममिया सास से पूछा, ” मामी ! जो पूजा पति-पत्नी द्वारा गाँठ बांधकर की जाती है, वह अरुणजी के बिना कैसे होगी ?”  एक शानदार सुझाव कही पीछे से मारवाड़ी चाची द्वारा सुझाया गया, ” अरे! अरुण केर पट्टा (शादी का गुलाबी स्टोल) बा न? पूजा होय जाई । ” मैं रुकी, मुड़ी और अपनी ओढ़नी उतारकर मारवाड़ी चाची से बोली, ” चाची ! अब कै लिहू पूजा , ई रहा अरुणजी केर पट्टा अउर ई रहा हेम केर दुपटटा । ” न अरुणजी गए न वो पूजा हुई।  क्या पूजा पाठ केवल स्त्रियों का कर्म क्षेत्र है?

प्रो.हेमलता श्रीवास्तव

विवाह के पहले ही सास-ससुर से घूँघट न करवाने का वादा ले चुकी थी। एक ताया ससुर, दो चचिया ससुर, एक फुफिया ससुर और एक ममिया ससुर के अतिरिक्त उनकी पत्नियों ने भी मेरे ससुर जी के सम्मुख आपत्ति की। उन्होंने मुझे 10 लोगों की सभा के बीच बैठा दिया। मैंने एक ही प्रश्न किया, ” आपने लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा, सीता, रिद्धि, सिद्धि, सन्तोषी माता को कभी घूँघट में देखा है ?  पता है क्या हुआ?  मेरे बाद परिवार में आनेवाली हर दूर दराज की दुल्हन का भी घूँघट हट गया ।

सत्य केवल इतना होता है कि शुतुरमुर्ग की तरह रेत में मुँह छिपा लेने से आँधी से बचाव नहीं हो सकता । मुस्लिम बहनों ने तीन तलाक़ झेला , आर्थिक अधिकार गँवाए, हलाला की पीड़ा झेली और अंततः डटकर सामने आ गईं । इसलिए बदलाव हो पाएगा ।

(लेखिका, प्रो.हेमलता श्रीवास्तव, इलाहाबाद विश्वविद्यालय (सीएमपीडीसी) के समाजशास्त्र विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष, व वरिष्ठ समाजशास्त्री हैं ।)

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