30 C
Mumbai
Tuesday, September 8, 2026
Home Blog Page 51

एमडीएच के मालिक मसाला किंग ‘महाशय’ धर्मपाल गुलाटी नहीं रहे

नवप्रवाह न्यूज नेटवर्क

मसाला ब्रांड एमडीएच के मालिक ‘महाशय’ धर्मपाल गुलाटी का गुरुवार सुबह निधन हो गया है. वे 98 साल के थे. बताया जा रहा है कि, गुलाटी का पिछले तीन हफ्तों से दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था. गुरुवार सुबह उन्हें दिल का दौरा पड़ा और सुबह 5:38 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.

– कोरोना संक्रमित भी हुए थे
इससे पहले वे कोरोना से संक्रमित हो गए थे. हालांकि बाद में वे ठीक हो गए थे. पिछले साल उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

– भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद भारत आए थे
1947 में भारत आए, शरणार्थी शिविर में रहे ‘दादजी’, ‘मसाला किंग’, ‘किंग ऑफ स्पाइसेज’ और ‘महाशयजी’ के नाम से मशहूर धरमपाल गुलाटी का जन्म 1923 में पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था. स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ने वाले धर्मपाल गुलाटी शुरुआती दिनों में अपने पिता के मसाले के व्यवसाय में शामिल हो गए थे. 1947 में विभाजन के बाद, धर्मपाल गुलाटी भारत आ गए और अमृतसर में एक शरणार्थी शिविर में रहे.

– युवाओं के प्रेरणा स्रोत
धर्मपाल गुलाटी 98 साल की उम्र में भी स्वस्थ व तंदरुस्त रहे. उनकी युवाओं को सीख थी कि, कभी हार मत मानो, चलते रहो, एक न एक दिन मंजिल जरूर मिलेगी. वे युवाओं को कभी भी हताश न होने की सीख देते थे. धर्मपाल गुलाटी संयुक्त परिवार के भी समर्थक थे और वर्तमान समय में भी उनका परिवार संयुक्त परिवार की सीख देता है.

आरक्षण बचाने ओबीसी संगठन सड़क पर उतरे, पूर्व सांसद समीर भुजबल सहित अनेक हिरासत में

नवप्रवाह न्यूज नेटवर्क

ओबीसी आरक्षण बचाने के लिए अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद की अगुवाई में विभिन्न ओबीसी संगठन गुरुवार को पुणे की सड़कों पर उतर आये. इस कड़ी में शनिवारवाडा से जिलाधिकारी कार्यालय तक मोर्चा निकालने की घोषणा की गई थी. हालांकि महामारी कोरोना की पृष्ठभूमि पर पुलिस ने इसके लिए आखिरी क्षण तक अनुमति नहीं दी. इससे शनिवारवाडा पर आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष की स्थिति बनी रही. उसी में पुलिस ने पूर्व सांसद समीर भुजबल समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया. अंत में जगह पर ही आंदोलन करते हुए ओबीसी संगठनों ने अपनी मांगें रखीं.

– मोर्चा निकालने अड़े रहे आंदोलनकारी
मोर्चा निकालने की जिद पर आंदोलनकारी आखिर तक अड़े रहे वहीं पुलिस भी आखिर तक अनुमति न देने की भूमिका पर कायम रही. उनके बीच की चर्चा का कोई हल न निकलने से पुलिस ने भूतपूर्व सांसद समीर भुजबल, बापू भुजबल, राष्ट्रवादी महिला कांग्रेस की अध्यक्षा रूपाली चाकणकर, प्रितेश गवली, दीपक जगताप समेत कई आंदोलनकारी नेताओं को हिरासत में लिया. समीर भुजबल ने आंदोलन की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि, किसी भी समुदाय को आरक्षण देने पर अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद का न कोई विरोध है न कोई आपत्ति. हालांकि दूसरे समुदाय को आरक्षण देते वक्त ओबीसी आरक्षण को धक्का लगाने की साजिश को हम कामयाब नहीं होने देंगे.

– आंदोलन के जरिए रखी गई मांगे
ओबीसी आरक्षण बचाने के लिए राज्य सरकार की ओर से उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में वकील नियुक्त करने सहित विभिन्न मांगें इस आंदोलन के जरिये रखी गई. पूर्व सांसद समीर भुजबल के नेतृत्व में किये गए कस आंदोलन में अखिल भारतीय महात्मा फुले समता परिषद और ओबीसी आरक्षण बचाव कृति समिति के पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद थे. भूतपूर्व विधायक योगेश टिलेकर, नगरसेवक योगेश ससाणे, नगरसेवक गणेश कलमकर, डॉ. प्रल्हाद वडगावकर, एड मृणाल ढोले पाटील, एड मंगेश ससाणे, पूर्व नगरसेवक नंदला धिवर, राष्ट्रवादी काँग्रेस ओबीसी सेल के अध्यक्ष संतोष नांगरे, मिलिंद वालवाडकर, वडार समाज अध्यक्ष व पूर्व नगरसेवक दयानंद इरकल, वाणी समाज अध्यक्ष की माधुरी देव, साली समाज के अध्यक्ष महेश भागवत, नाई समाज अध्यक्ष के सोमनाथ काशीद, कैकाडी समाज के अध्यक्ष विजय जाधव, नंदकुमार गोसावी, धनगर समाज के नेता लक्ष्मण हाके, समता परिषद पुणे शहर अध्यक्ष पंढरीनाथ बनकर, शिवराम जांभुलकर समेत समस्त राज्यभर से ओबीसी समुदाय के नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस आंदोलन में शामिल थे.

विवाह बंधन में बंधे आदित्य नारायण, बेटे की शादी में जमकर नाचे उदित नारायण

नवप्रवाह न्यूज नेटवक

दिग्गज सिंगर उदित नारायण के बेटे आदित्य नारायण ने मंगलवार को मुंबई के जुहू स्थित इस्कॉन मंदिर में गर्लफ्रेंड श्वेता अग्रवाल से शादी कर ली है. दोनों ने भगवान के सामने एक-दूसरे को वरमाला पहनाकर पति-पत्नी स्वीकार किया. इससे पहले आदित्य के घर से उनकी बरात निकली, जिसमें वे अपने पिता उदित नारायण के साथ जमकर डांस करते नजर आ रहे हैं. आदित्य की मां दीपा नारायण ने भी बेटे की शादी में खूब डांस किया.

कोविड दिशा निर्देशों का पालन
पिछले दिनों एक इंटरव्यू में आदित्य ने कहा था, कोविड-19 की वजह से हम सिर्फ क्लोज फैमिली मेंबर्स और फ्रेंड्स को ही बुला सकते हैं. क्योंकि महाराष्ट्र में शादी में 50 से ज्यादा लोगों को बुलाने की इजाजत नहीं है. इसलिए यह मंदिर में छोटी सी शादी होगी और उसके बाद छोटा सा रिसेप्शन होगा. कोविड-19 की गाइडलाइन को ध्यान रखते हुए दूल्हा बने आदित्य नारायण मास्क लगाए नजर आए.

2 दिसंबर को रिसेप्शन
उदित नारायण ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वे अपने बेटे की शादी धूमधाम से करना चाहते थे. लेकिन कोरोना महामारी के चलते ऐसा संभव नहीं हो सका. हालांकि, वे बेटे के रिसेप्शन में कमी नहीं छोड़ना चाहते थे. उन्होंने एक अन्य इंटरव्यू में बताया कि इंडस्ट्री की कई बड़ी हस्तियां बेटे आदित्य के रिसेप्शन का हिस्सा बनेंगी. उदित के मुताबिक, 2 दिसम्बर को मुंबई के एक 5 सितारा होटल में आदित्य का रिसेप्शन होगा. इसका न्योता अमिताभ बच्चन से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को भेजा गया है.

कपड़े सुखाते महिला का फिसला पैर, छठीं मंजिल से गिर कर हुई मौत

सांकेति चित्र

नवप्रवाह न्यूज नेटवर्क

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बड़ा हादसा हो गया. कपडे सुखाते वक्त महिला का पैर फिसला और छठी मंजिल से गिरने से महिला की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस ने पोस्ट मार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया. जानकारी के मुताबिक, मामला लसूड़िया थाना क्षेत्र स्थित सिंगापुर टाउनशिप का है, जहां रहने वाली महिला प्रमिला वैष्णव की छठीं मंजिल से गिरने से मौत हो गई है.

परिजनों के मुताबिक, प्रमिला कपड़े सुखाने के लिए छठीं मंजिल में बालकनी पर गई थी. कपडे डालने के महिला ने रस्सी देखी, रस्सी थोड़ी ऊंची होने से उसने प्लास्टिक की कुर्सी लगा ली और उसके ऊपर खड़ी हो गई. टाइल्स के कारण कुर्सी फिसल गई और महिला अंदर गिरने की जगह बाहर की तरफ गिर गई. छठी मंजिला से नीचे गिरने से महिला की मौके पर ही मौत हो गई.

बताया जा रहा है कि घटना के दौरान महिला का पति घर में ही था और किसी काम में व्यस्त था. इस मामले में पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा, मामले का मर्ग कायम किया गया है जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी. पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है.

ऑनलाइन कैसीनो में कैसे खेला जाता है जुआ?

भारत में जुए का खेल काफी प्रचलित है. यहां कैसीनो का कारोबार बड़े स्तर पर होता है. लगभग 7 महीनों से भी ज्यादा समय से भारत में कोरोना महामारी का प्रकोप जारी है. लंबे वक्त के लिए हुए लॉकडाउन ने कसीनो के कारोबार को भी ऑनलाइन शिफ्ट कर दिया है. ऑनलाइन कैसीनो का कारोबार अब भारत में भी बढ़ता जा रहा है. कई कैसीनो ने इतने आसान सॉफ्टवेयर डेवलप किए हैं, जिनके माध्यम से अपने मोबाइल फोन में भी जुआ खेलना आसान हो गया है.

भारत में कई ऑनलाइन कैसीनो हैं, ऑनलाइन अंदर बाहर, जहां आप ऑनलाइन जुआ खेल सकते हैं. ऑनलाइन कैसीनो में जुआ कैसे खेलेंयह सवाल कई प्लेयर्स के मन में रहता है. हालांकि, ऑनलाइन कसीनो में जुआ खेलना बहुत ही आसान है. जिस तरह से आप अपने मोबाइल फोन या टैब में लूडो इंस्टॉल कर इसे खेलते हैं, उसी प्रकार आप ऑनलाइन कैसीनो में भी जुआ खेल सकते हैं और पैसे जीत सकते हैं. ऐसे कई ऑनलाइन कैसीनो हैं जो बिगनर्स को खेलने के लिए गाइड भी करते हैं. यहां आप ऑनलाइन खेलने की पूरी प्रक्रिया को आसानी से समझ सकते हैं और साथ ही साथ अपनी किसी दुबिधा को भी समझ सकते हैं.

ऑनलाइन कैसीनो में जुआ खेलने के लिए सबसे पहले आपको ऑनलाइन कसीनो का एप्प डाउनलोड करना होता है इसके आलावा आप किसी ख़ास कैसीनो की साइट पर  भी विजिट कर सकते हैं. इसके बाद उस पर अपना अकाउंट बनाना होता है. यहां तक की प्रक्रिया बिल्कुल ही आसान है. अकाउंट बन जाने के बाद आपको उसमें कुछ कैश डिपॉजिट करने होते हैं. कैश डिपॉजिट करने के बाद ही आप गेम का हिस्सा बन पाएंगे. अलगअलग कैसीनो का कैश डिपॉजिट करने की एक न्यूनतम सीमा होती है. कैश डिपॉजिट करने के बाद आप अपनी पसंद के अनुसार गेम सेलेक्ट कर सकते हैं, फिर खेल सकते हैं. ऑनलाइन कैसीनो में कई तरह के गेम उपलब्ध होते हैं, मसलन तीन पत्ती या फ्लश, अंदर बाहर, रम्मी, ब्लैक जैकपोट, इत्यादि. भारत में तीन पत्ती और अंदर बाहर गेम को काफी ज्यादा पसंद किया जाता है.

गेम शुरू करने से पहले साइट पर आपको उस गेम से संबंधित सभी नियम, कानून शर्तें बता दी जाती हैं. विनर बनने के बाद आप अपने जीते हुए पैसे अकाउंट वेरिफिकेशन करवा कर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं. भारत मेंमनीलॉन्ड्रिंगऔरफिशिंगके बढ़ते मामलों के कारण सभी कैसीनो अकॉउंट वेरिफिकेशन को गंभीरता के साथ करते हैं ताकि प्लेयर्स के जीते हुए पैसे सुरक्षित उनके खाते में पहुँच सके. अकॉउंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी बेहद आसान है. इस प्रकार हम देखते हैं कि ऑनलाइन कैसीनो में जुआ खेलना बहुत ही आसान और दिलचस्प है.

कोरोना : अभी ढिलाई ठीक नहीं

कोरोना के प्रति शासन, प्रशासन और आम जनता की लापरवाही के परिणाम अत्यंत भयावह रूप लेते दिखाई दे रहे हैं। संक्रमितों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के बाद भी हमारा समाज किसी प्रकार का सबक लेने की मानसिकता नहीं बना सका है। इससे पहले भी लॉकडाउन की अवधि के दौरान जनमानस अच्छे बुरे की पहचान कर चुका है। लेकिन ऐसा लगता है हम जानते हुए अनजान बन जाते हैं। इसके पीछे का कारण यह भी माना जा सकता है कि हमारा समाज लम्बे समय तक ऐसी राह का अनुसरण कर चुका है, जो पूरी तरह से पश्चिम के विकारों से ग्रसित है। प्रायः यही कहा जाता है कि जो व्यक्ति भारतीय संस्कृति की जीवन संहिताओं का पालन करता है, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमताओं में आशातीत वृद्धि होती है। जबकि पश्चिमी अवधारणा पर आधारित जीवन जीने वाला व्यक्ति समस्याओं को खुद ही आमंत्रित करता है।
वर्तमान में देश के कुछ हिस्सों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए धारा 144 और कर्फ्यू लगाने की आवश्यकता हुई है। केंद्र सरकार ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाकर राज्यों से अंकुश लगाने को कहा है। इसका तात्पर्य यही है कि अब हालात पहले से भी ज्यादा घातक हैं। पहले की तुलना में जहां संक्रमण बढ़ा है, वहीं कोरोना के कारण मृत्यु दर भी निरंतर बढ़ती जा रही है। इस स्थिति को लापरवाही की पराकाष्ठा ही माना जा सकता है। विशेष बात यह है कि इस बार कोरोना संक्रमित व्यक्ति गंभीर अवस्था में उपचार करा रहे हैं। मतलब समस्या काफी गंभीर है। समस्या इसलिए भी ज्यादा घातक है, क्योंकि अभी तक यह बीमारी लाइलाज है। लगभग एक वर्ष का समय व्यतीत हो जाने के बाद भी यह पता नहीं है कि इसकी दवा कब तक आएगी। केंद्र सरकार ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि वैक्सीन कब आएगी, यह वैज्ञानिकों के हाथ में है। तब तक किसी भी प्रकार की ढिलाई जीवन को खतरे में डाल सकती है।
चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपने आगोश में ले लिया है। दुनिया के देश इसके खतरों के प्रति पूरी तरह से अनजान होने के कारण पहले तो हल्के में लिया, लेकिन जैसे ही कोरोना का विकराल रूप सामने आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अमेरिका जैसे विकसित और चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर सेवा देने वाले इटली जैसे देश में भी इस वायरस ने तबाही जैसे हालात बना दिए थे। अभी खबर मिल रही है कि यूरोप और अमेरिका में कोरोना वायरस ने फिर पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। फ्रांस में भी कोरोना की दूसरी लहर ने स्वास्थ्य आपातकाल लगाने की स्थिति पैदा कर दी है। यही स्थिति भारत की है। हालांकि यह कहना तर्कसंगत ही होगा कि जब से कोरोना वायरस फैला है, तब से ही यह कहीं ज्यादा तो कहीं कम विस्तारित ही हो रहा है। सवाल यह आता है कोरोना के काल में ही कुछ लोंगों ने इसके प्रति उदासीन रवैया अपना लिया था। जिसका परिणाम आज सबके सामने है।
सवाल यह भी है जब कोरोना संक्रमण की बीमारी अंतरराष्ट्रीय स्तर की समस्या के तौर पर उपस्थित हुई है, तब ऐसी स्थिति में मात्र भारत सरकार को निशाने पर लेने की राजनीति कहीं न कहीं हमारी उदासीनता को ही प्रकट कर रही है। यह समस्या हर राज्य की है और हर क्षेत्र की है। यहां तक कि हर नागरिक से जुड़ी है, इसलिए इसका समाधान केवल सरकारी स्तर पर नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए हमको सभी स्तर पर जागरूक रहने की आवश्यकता है। इसमें सबसे पहले अपने आपको बचाकर रखने में ही अपनी और समाज की भलाई है। ऐसी अवस्था में और ज्यादा कठोरता होने की जरूरत है। नहीं तो देश में अकाल मौतें तो होंगी ही साथ ही कठोर लॉकडाउन का भी सामना करना पड़ सकता है।
जहां तक भारतीय परिवेश और खानपान की बात है तो यह कहना भी जरूरी है कि कोरोना संक्रमण के दौरान यह बात सबके ध्यान में भी आ चुकी है कि हाथ मिलाने के स्थान पर नमस्ते करने से भी संक्रमण से बचा जा सकता है। खानपान को व्यवस्थित करने से भी शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि की जा सकती है। इतना ही नहीं विश्व के कई देशों ने खुलकर यह स्वीकार भी किया है कि भारत के लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कहीं ज्यादा है, इसीलिए कई देशों की तुलना में भारत में इसका असर ज्यादा नहीं हुआ।
एक बात और भी 
कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शासन और प्रशासन ने कई बार आम जन से यह अपील की कि जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि इस अपील का आम समाज पर कोई प्रभाव नहीं हुआ। समाज का हर व्यक्ति भीड़ से परहेज नहीं, बल्कि उसका हिस्सा बनने की अग्रसर हो रहा है। भौतिक दूरी और चेहरे पर मास्क लगाने की भी जरूरत नहीं समझी जा रही। यह हमारे समाज की विसंगति ही कही जाएगी कि हम जीवन के प्रति बनाए गए नियमों में बंधना ही नहीं चाहते। हम नियमों की अवहेलना ही करने की ओर प्रवृत्त होते जा रहे हैं। यही सब कारण हैं कि हम समाधान के बजाय खुद ही समस्या बनते जा रहे हैं। भारत की जनता नियम पालन करने की मानसिकता बना ले तो स्वाभाविक रूप से बहुत सारी समस्याओं का समाधान निकल सकता है।
सुरेश हिन्दुस्थानी (वरिष्ठ पत्रकार)
द्वारा श्री राजीव उपाध्याय अधिवक्ता
सूबे की गोठ, कैलाश टाकीज के पास
नई सड़क लश्कर, ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
मोबाइल-9770015780

हैदराबाद को भाग्यनगर बनाएंगे : ओवैसी के किले में योगी की गर्जना

नवप्रवाह न्यूज नेटवर्क
हैदराबाद में हो रहे नगर निगम चुनाव में भाजपा का झंडा फहराने के उद्देश्य से उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जमकर गरजे. शनिवार को रोड शो कर उन्होंने तेलंगना राज्य की राजधानी में हलचल पैदा कर दी. इस मौके पर उन्होंने हैदराबाद का नाम बदलकर फिर से भाग्यनगर करने की बात भी जोरदार तरीके से उठाई. उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने पर हमने फैजाबाद का नाम बदलकर अयोध्या और इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया. ऐसे में हैदराबाद का भी नाम बदलकर फिर से भाग्यनगर किया जा सकता है.

– हिंदुस्तान शब्द प्रयोग न करने पर AIMIM के विधायक को फटकार
इस मौके पर योगी ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लमीन (AIMIM) के बिहार के विधायक अख्तारुल इमान द्वारा शपथ ग्रहण के दौरान हिंदुस्तान शब्द का प्रयोग न करने की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि ये लोग हिंदुस्तान में रहते हैं, लेकिन जब हिंदुस्तान के नाम पर शपथ लेने की बात आती है तो वे पीछे हट जाते हैं. एआइएमआइएम का यही असली चेहरा है.

– योगी पर भड़के ओवैसी
इस बीच एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी को निशाने पर लिया है. ओवैसी ने कहा, बीजेपी का उद्देश्य हैदराबाद का नाम बदलना है. यह चुनाव भाग्यनगर बनाम हैदराबाद है. बीजेपी के टिकट बंटवारे को लेकर ओवैसी ने योगी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘वो हमें सांप्रदायिक कहते हैं तो ये बताइए हमने हिंदुओं को टिकट दिया है, अब बीजेपी बताए कि उसने कितने मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है. बीजेपी का मकसद केवल हैदराबाद का नाम बदलना है. ये भाग्यनगर बनाम हैदराबाद है. मैं संविधान की शपथ लेता हूं और ये लोग मुझे जिन्ना कहते हैं.

– हम वोटर्स डेमोक्रेटिक स्ट्राइक करेंगे
ओवैसी ने कहा कि अगर बीजेपी सर्जिकल स्ट्राइक करेगी तो एक दिसंबर को वोटर्स डेमोक्रेटिक स्ट्राइक करेंगे. ओवैसी ने किसानों के मुद्दे पर भी केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया. दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों के ऊपर ठंड में पानी डाला गया, यह सरकार हर मोर्चे पर फेल है.

कोविशील्ड वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित : सीरम सीईओ आदर पूनावाला का दावा

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया सीरम इंस्टिट्यूट का जायजा

नवप्रवाह न्यूज नेटवर्क
सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ आदर पूनावाला ने दावा किया कि सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित किया जानेवाला कोरोना का कोविशील्ड टीका पूरी तरह से सुरक्षित है. कोरोना वैक्सीन में देरी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि कोविशील्ड के ट्रायल के नतीजे बहुत अच्छे रहे हैं. उन्होंने यह भी बताया कि कोविशील्ड के इमर्जेंसी में इस्तेमाल की इजाजत के लिए जल्द ही अप्लाई किया जाएगा. इसका साफ मतलब है कि वैक्सीन निर्माण अडवांस्ड स्टेज में है. आदर पूनावाला ने कहा कि हम कोविशील्ड के इमर्जेंसी में इस्तेमाल के लिए इजाजत की खातिर अगले 2 हफ्तों में आवेदन करने की प्रक्रिया में हैं. उन्होंने कहा कि ट्रायल के दौरान जीरो हॉस्पिटलाइजेशन बड़ी बात है.यह टीका पहले भारत में वितरित की जाएगी. उन्होंने कहा कि जुलाई 2021 तक इस टीका के करीब 30-40 करोड़ डोस उपलब्ध कराए जाएंगे.

– प्रधानमंत्री ने किया संस्थान के कार्यों का निरीक्षण 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड -19 वायरस वैक्सीन के विकास, उत्पादन, वितरण, भंडारण और प्रबंधन के बारे में जानने के लिए आज पुणे के सीरम संस्थान का दौरा किया. करीब एक घंटे तक वे इस इंस्टीट्यूट में रहे. इस दौरान  सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी निदेशक, डॉ. सायरस पूनावाला, मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदर पूनावाला, कार्यकारी निदेशक नताशा पूनावाला, वैज्ञानिक और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.  शुरुआत में, आदर  ने संगठन के बारे में मोदी को बताया. उसके बाद प्रधानमंत्री ने कोविड़  -19 निवारक वैक्सीन के उत्पादन के सिलसिले में भारत के सीरम संस्थान में चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया. इस समय, वैज्ञानिकों ने उन्हें टीका लगाने के प्रयासों की तैयारी, चुनौतियों के बारे में बताया.

– 60 प्रतिशत लोगों को अस्पताल जाने की जरूरत नहीं
पूनावाला की जानकारी के अनुसार संस्था में प्रति माह 5-6 करोड़ डोस बनाए जा रहे हैं. जनवरी के बाद 10 करोड़ डोस बनाए जाएंगे. ज्यादा से ज्यादा लोगों तक टीका पहुंचाने के लिए प्रयास किया जाएगा. यह टीका लोगों को कम दामों में उपलब्ध कराई जाएगी. पूनावाला के अनुसार हमारा ध्यान तीसरे ट्रायल के नतीजे पर लगा हुआ है. सरकार के साथ समन्वय कर जल्द ही इसके वितरण को लेकर जानकारी दी जाएगी. पूनावाला ने दावा किया कि इस टीका से 60% लोगों को अस्प्ताल में जाने की जरुरत नहीं होगी.

आंखों के सामने आ गया परिवार और छोड़ दिया आत्महत्या का खयाल, एक महीने से लापता उद्योगपति ने बयां किया दर्द

नवप्रवाह न्यूज नेटवर्क
ड्राइवर के हाथों सुसाइड नोट भेजकर करीबन माहभर पहले गुमशुदा हुए पुणे के नामी गिरामी उद्योगपति गौतम पाषाणकर को ढूंढ निकालने में पुलिस की क्राइम ब्रांच को सफलता मिल गई है. मंगलवार को पुलिस टीम ने 64 वर्षीय पाषाणकर को जयपुर के एक होटल से हिरासत में लिया. पुलिस उन्हें लेकर पुणे पहुंची. बीती शाम पुलिस आयुक्तालय में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने बताया कि, आर्थिक संकट के चलते वे मानसिक तनाव में घिर गए और उसी के कारण उन्होंने खुदकुशी करने का मन बना लिया था. मगर बाद में परिवार का ख्याल आने पर विचार बदल दिया.

पुणे के उद्योग क्षेत्र के जाने माने उद्योगपति गौतम पाषाणकर 21 अक्टूबर को अचानक से गायब हो जाने से खलबली मच गई थी. आखिरी बार उन्होंने अपने ड्राइवर को एक लिफाफा देकर कुछ देर बाद आने को कहा था. कारोबारी के गायब होने के 24 घंटे बाद शिवाजी नगर पुलिस थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई. इसके बाद से उनका कहीं कुछ भी पता नहीं चल सका. यहां पाषाणकर परिवार ने भी गौतम को तलाशने के लिए शहर में पोस्टर भी लगवाए हैं. पुलिस कारोबारी की तलाश में पूरे शहर के सीसीटीवी खंगाल रही हैं.

सीसीटीवी फुटेज से पाषाणकर के पुणे के अलग- अलग हिस्सों के अलावा वे कोल्हापुर में भी नजर आये थे. इससे पहले कि पुलिस के वहां पहुंचती पाषाणकर वहां से पुनः गायब हो गए थे. उनकी तलाश में पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें अलग-अलग दिशा में रवाना की गई. तकनीकी विश्लेषण के आधार पर की गई जांच में उनके जयपुर के एक होटल में रहने की जानकारी मिली. करीबन 34 दिनों की खोजबीन के बाद क्राइम ब्रांच यूनिट 1 की टीम ने उद्योगपति पाषाणकर को जयपुर जाकर होटल से हिरासत में लिया.

बुधवार को उन्हें पुणे लाया गया, इसके बाद एक संवाददाता सम्मेलन में पाषाणकर ने बताया कि वे भारी मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, इसकी वजह से उन्होंने खुदकुशी करने का मन बनाया. ड्राइवर के हाथों सुसाइड नोट भेजकर वे चले गए. हालांकि परिवार का खयाल आने से उन्होंने मन बदल दिया मगर वे पुणे नहीं लौटना चाहते थे.

पाषाणकर ने अपनी गुमशुदगी के दौरान के सफर के बारे में बताया कि, गत कुछ माह से कारोबार के हालात बिगड़ गए थे तमाम कोशिशों के बाद भी कोई सुधार नहीं हो रहा था. जो कभी सामने ठहरने की हिम्मत न करते थे ऐसे देनदारों से काफी खरी खोटी सुनने की नौबत आई. इन सबके चलते घर छोड़ने और खुदकुशी करने का निश्चय किया. जेब में 80 हजार रुपए की नकदी थी. ड्राइवर को सुसाइड नोट बन्द लिफाफे में सौंपकर ऑटो रिक्शा से स्वारगेट आने के बाद वे बस से सीधे कोल्हापुर गए. वहां से कोयंबटूर, बेंगलुरु, तिरुपति बालाजी, कन्याकुमारी, जैसलमेर की यात्रा करते हुए जयपुर पहुंचे. बुधवार को जयपुर छोडने से पहले ही पुलिस पहुंच गई और मुझे पुणे ले आयी.

पुलिस उपायुक्त बच्चनसिंह ने बताया कि, गौतम पाषाणकर को खोजने के लिए छह पुलिस टीमें गठित की गई थी. उनके पुत्र ने एक राजनेता द्वारा उसके पिता को अगवा किये जाने का शक जताया था. इसके बाद इस घटना को अलग मोड़ मिल गया था. मगर छानबीन में यह स्पष्ट हुआ कि पाषाणकर का अपहरण नहीं हुआ है और वे सुरक्षित हैं. जांच के दौरान पाषाणकर कोल्हापुर के एक होटल के सीसीटीवी फुटेज में नजर आए थे. मगर पुलिस के वहां पहुंचने से पहले ही वे होटल से निकल गए थे. उनके पास न तो मोबाइल फोन था न उन्होंने गुमशुदगी के दिनों में डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया. इसकी वजह से उन्हें खोजने में दिक्कतें आती रही. हालांकि बाद में तकनीकी विश्लेषण में उनके जयपुर के एक होटल में रहने की जानकारी सामने आयी और पुलिस की एक टीम वहां भेजकर उन्हें पुणे ले आयी.

ग्वालियर-दौंड के बीच दौड़ेगी स्पेशल ट्रेन

नवप्रवाह न्यूज नेटवर्क
यात्रियों की सुविधा के लिए रेल प्रशासन ने दौंड – ग्वालियर के बीच साप्ताहिक विशेष गाड़ी चलाने का निर्णय लिया है. विशेष गाड़ी सं. 04190 ग्वालियर – दौंड एक्सप्रेस 28 नवंबर से प्रति शनिवार ग्वालियर से 17.15 बजे रवाना होकर अगले दिन पुणे 16.55 बजे तथा दौंड 18.20 बजे पहुंचेगी. विशेष गाड़ी सं. 04189 दौंड – ग्वालियर एक्सप्रेस दौंड से 29 नवंबर से प्रति रविवार 23.10 बजे रवाना होकर पुणे में अगले दिन 00.20 बजे तथा मंगलवार को 01.10 बजे ग्वालियर पहुंचेगी.

इस गाड़ी में 01 एसी टू टियर, 02 एसी थ्री टियर, 07 स्लीपर एवं 05 द्वितीय श्रेणी सीटिंग कोच होंगे. रास्ते में यह गाड़ी पुणे, चिंचवड, पनवेल, वसई रोड, बोईसर, वापी, वलसाड, सूरत, भरूच, वडोदरा, गोधरा, दाहोद, रतलाम, नागदा, उज्जैन, मक्सी, ब्यावरा, राजगढ़, रुठियाई, गुना तथा शिवपुरी स्टेशनों पर रुकेगी.

पुणे रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज झंवर ने बताया कि, यह विशेष गाड़ी पूरी तरह आरक्षित होगी तथा यात्रा करने हेतु अग्रिम आरक्षण आवश्यक है. जिन यात्रियों के पास कन्फर्म टिकट होंगे उन्हें ही यात्रा की अनुमति होगी. यात्रियों से अनुरोध है कि कोरोना महामारी के चलते रेल यात्रा हेतु जारी मार्गदर्शक सूचनाओं, जैसे यात्रा के दौरान मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंस, सेनिटाइजर का उपयोग आदि का पालन करें.