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Friday, July 31, 2026
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सुप्रीम कोर्ट की सख़्ती के बाद एसबीआई ने सौंपा चुनाव आयोग को इलेक्टोरल बॉन्ड्स का ब्यौरा

नृपेंद्र मौर्य| navpravah.com

नई दिल्ली| स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने चुनावी बॉन्ड की पूरी जानकारी चुनाव आयोग को मंगलवार को भेज दिया। शीर्ष अदालत में कल ही सीबीआई की समय सीमा बढ़ाने वाली याचिका को खारिज किया था। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया था कि एसबीआई 12 मार्च को कामकाजी घंटे खत्म होने तक इलेक्टोरल बॉन्ड की पूरी जानकारी चुनाव आयोग को दे। उसी के मुताबिक एसबीआई ने मंगलवार शाम साढ़े पांच बजे तक इलेक्टोरल बॉन्ड का पूरा डेटा चुनाव आयोग को भेज दिया है।

चुनाव आयोग 15 मार्च को यह डाटा अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करेगा। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने चुनाव आयोग को भी एसबीआई द्वारा साझा की गई जानकारी 15 मार्च को शाम पांच बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे। बेंच ने एसबीआई को नोटिस देते हुए कहा कि यदि बैंक उसके निर्देशों और समयसीमा का पालन करने में विफल रहता है तो कोर्ट अपने 15 फरवरी के फैसले की जानबूझकर अवज्ञा करने के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

क्या है मामला?

बता दें कि पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 15 फरवरी को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र की चुनावी बॉण्ड योजना को रद्द कर दिया था। साथ ही इसे असंवैधानिक करार देते हुए निर्वाचन आयोग को चंदा देने वालों, चंदे के रूप में दी गई राशि और चंदा प्राप्तकर्ताओं का 13 मार्च तक खुलासा करने का आदेश दिया था। इस फैसले के बाद एसबीआई ने चुनावी बॉन्ड के विवरण का खुलासा करने के लिए समय-सीमा 30 जून तक बढ़ाए जाने का अनुरोध किया गया था. हालांकि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई के अनुरोध को दरकिनार कर दिया और मंगलवार शाम कामकाजी घंटे के अंदर चुनाव आयोग को सारा डिटेल देने का आदेश दिया था।

कौन हैं नायब सिंह सैनी, जिन्हें मिली हरियाणा की कमान ?

नृपेंद्र मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | लोकसभा चुनाव से पहले हरियाणा में सियासी उथल-पुथल देखने को मिला। मंगलवार, 12 मार्च की सुबह हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही उनकी पूरी कैबिनेट ने भी राज्यपाल को इस्तीफा सौंपा, जिसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया गया। खट्टर के इस्तीफे के बाद अब नायब सिंह सैनी हरियाणा के नए मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने आज शाम मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

कौन हैं नायाब सिंह सैनी ?

नायब सिंह सैनी का जन्म अम्बाला के गांव मीज़ापुर माजरा में 25 जनवरी, 1970 को हुआ था। वो अंबाला जिले के नारायणगढ़ विधानसभा के गांव मिर्जापुर के रहने वाले हैं। नायब सिंह सैनी की उम्र 54 साल है। उन्होंने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई की है। वो एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने मुज़फ़्फ़रपुर (बिहार) के बी.आर.अम्बेडकर बिहार यूनिवर्सिटी से भी शिक्षा हासिल की।

नायब सिंह सैनी का राजनीतिक सफ़र-

हरियाणा के नए मुख्यमंत्री नायब सिंह बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष और कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट से BJP सांसद हैं। पिछले साल यानि अक्टूबर, 2023 में पार्टी ने उन्हें राज्य प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया था।

अगर बात करें नायब सिंह के राजनीतिक सफर की तो उन्होंने सन् 1996 में सियासत में अपना पहला कदम रखा था। उन्होंने राजनीतिक करियर की शुरुआत BJP संगठन में एंट्री के साथ की थी और 2000 तक यहां कामकाज किया। इस दौरान वह संगठन में अलग-अलग पदों पर रहे। फिर 2002 में नायब सिंह अंबाला में युवा विंग के जिला महासचिव रहे। इसके बाद 2005 में वह अंबाला में जिला अध्यक्ष बनाए गए। काम के प्रति लगन-भाव को देखते हुए 2009 में उन्हें हरियाणा में बीजेपी किसान मोर्चा के राज्य महासचिव बनाया गया। 2012 में एक और प्रमोशन मिलने के बाद नायब सिंह को अंबाला बीजेपी जिला अध्यक्ष बनाया गया। इस दौरान उन्होंने अलग-अलग पदों पर सेवाएं दीं।

नायब सिंह का राजनीतिक सफर तब चमक उठा, जब वह 2014 में पहली बार अंबाला की नारायणगढ़ विधानसभा से विधायक बने। फिर 2016 में उनको हरियाणा सरकार में श्रम-रोजगार मंत्री बनाया गया। इसके अलावा वह खान और भूविज्ञान मंत्री और नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री भी रहे हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी और कांग्रेस प्रत्याशी निर्मल सिंह को 3 लाख 84 हजार 591 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में नायब सैनी को 6 लाख 88 हजार 629 वोट मिले थे, वहीं निर्मल सिंह को सिर्फ 3 लाख 84 हजार 591 वोट हासिल हुए थे।

मनोहर लाल खट्टर के है करीबी-

कहा जा रहा है नायब सिंह सैनी मनोहर लाल खट्टर के बेहद करीबी और इनकी बीजेपी संगठन में काफी पहुंच हैं। बताया जाता है 2019 में जब सैनी सांसद बने तो BJP ने न सिर्फ 10 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की, बल्कि पार्टी उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से प्रत्याशियों को हराया था।

देश में लागू हुआ CAA, जानिए, क्या है नागरिकता संशोधन क़ानून

नीतीश कुमार मिश्र और नृपेंद्र मौर्य की रिपोर्ट

नई दिल्ली | लोकसभा चुनाव 2024 नजदीक है। तारीखों का ऐलान अभी तक हुआ नहीं है, लेकिन उससे पहले ही केंद्र सरकार ने एक बड़ा सियासी दांव चल दिया है। वर्तमान केंद्र सरकार ने आज यानि सोमवार, 11 मार्च को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।

भारतीय नागरिकता संशोधन कानून भारत की संसद में 5 वर्ष पहले यानी कि 11 दिसंबर, 2019 को ही पारित हो गई थी, लेकिन यह अब तक लागू नहीं हो सका था। संसद में जब यह पारित हुआ था उस वक्त 125 वोट इसके पक्ष में पड़े थे और 105 वोट इसके खिलाफ थे। राष्ट्रपति द्वारा इस विधेयक को 12 दिसंबर 2019 को मंजूरी भी दे दी गई थी। लेकिन अब मोदी सरकार ने CAA को लेकर नोटिफिकेशन जारी कर दी है। आइए इस खबर के माध्यम से जानते हैं कि आखिरकार CAA क्या है और इसे लागू करने से देश में क्या बदलाव देखें जाएंगे-

क्या है CAA कानून?

नागरिकता संशोधन कानून, 2019 (सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट) भारत के तीन पड़ोसी मुस्लिम बाहुल्य देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के उन अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता खोलता है, जो दिसंबर 2014 तक किसी न किसी प्रताड़ना का शिकार होकर भारत में शरण लिए हुए हैं। इसमें गैर-मुस्लिम माइनोरिटी- हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग भी शामिल हैं। बता दें कि भारत के मुस्लिमों या किसी भी धर्म और समुदाय के लोगों की नागरिकता को CAA से कोई खतरा नहीं है।

किस साल में पारित हुआ था CAA?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहली बार सीएए 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था। यहां से तो यह बिल पास हो गया लेकिन राज्यसभा में जाकर ये अटक गया था। बाद में इसे संसदीय समिति के पास भेजा गया और फिर 2019 के लोकसभा चुनाव आ गए और फिर से बीजेपी की सरकार बनी। दिसंबर 2019 में इसे लोकसभा में दोबारा पेश किया गया और इस बार ये लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगहों से पास हो गया। इसके बाद 12 दिसंबर, 2019 को राष्ट्रपति द्वारा इसे मंजूरी मिल गई थी लेकिन कोरोना वायरस के कारण इसे लागू करने में देरी हुई।

किस-किस को मिल सकेगी नागरिकता?

बता दें CAA लागू होने के बाद किसे नागरिकता देनी है और किसे नहीं देनी है, इसका पूरा-पूरा अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा। पाकिस्तान-अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी धर्म से जुड़े शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, जो लोग 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में आकर बस गए थे, केवल उन्ही लोगों को नागरिकता दी जाएगी.।

जानकारी के मुताबिक, सीएए कानून के तहत उन लोगों को अवैध प्रवासी माना गया है जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट और वीजा) के बिना घुस आए हैं या फिर वैध दस्तावेज के साथ भारत में आए लेकिन तय अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुक गए हों। 

कैसे करना होगा आवेदन ?

भारतीय नागरिकता पाने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इसे लेकर एक ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार हो चुका है। इस पोर्टल पर आवेदकों को अपना वह साल बताना होगा, जब उन्होंने बिना किसी दस्तावेज के भारत में प्रवेश किया था। नागरिकता पाने के लिए आवेदकों से किसी तरह का कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। पात्र विस्थापितों को सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपना आवेदन करना होगा, जिसके बाद गृह मंत्रालय आवेदन की जांच करेगा और आवेदक को नागरिकता जारी कर दी जाएगी।

चुनावी बॉण्ड मामला: सुप्रीम कोर्ट ने SBI को लगाई फटकार, १२ मार्च तक ब्योरा देने का निर्देश

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली | चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SBI की याचिका खारिज करते हुए 12 मार्च तक ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही EC को 15 मार्च तक ये ब्योरा पब्लिश करने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने SBI CMD को ब्योरा जारी कर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने SBI के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने से इनकार किया। SC ने चेतावनी दी कि हम एसबीआई को नोटिस देते हैं कि यदि एसबीआई इस आदेश में बताई गई समयसीमा के भीतर निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो न्यायालय जानबूझकर अवज्ञा के लिए उसके खिलाफ कार्यवाही कर सकता है।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डी.वाई.चंद्रचूड़ ने आदेश देते हुए कहा कि एसबीआई ने कहा कि कैश कराने वाले की जानकारी भी अलग से रखी है। दोनों को मिलाना कठिन काम है। 22 हजार से अधिक चुनावी बॉन्ड साल 2019 से 2024 के बीच खरीदे गए। 2 सेट्स में आंकड़े होने के चलते कुल आंकड़ा 44 हजार से अधिक है। ऐसे में उसके मिलान में समय लगेगा। हम एसबीआई का आवेदन खारिज कर रहे हैं। कल यानी 12 मार्च तक उपलब्ध आंकड़ा दे। चुनाव आयोग 15 मार्च तक उसे प्रकाशित करे। हम अभी एसबीआई पर अवमानना की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, पर अब पालन नहीं किया तो अवमानना का मुकदमा चलाएंगे।

मुंबई में ही हैं दोनों डीटेल्स, तो परेशानी कहां?: SC

SBI की याचिका पढ़ते हुए CJI ने कहा,’ आवेदन में आपने (SBI) कहा है कि सभी जानकारी सील करके एसबीआई की मुंबई मुख्य शाखा भेज दी गई। मुख्य शाखा में भुगतान की पर्चियां भी भेजी गईं। यानी दोनों विवरण मुंबई में ही हैं। लेकिन, हमने जानकारी का मिलान करने का निर्देश नहीं दिया था। हम तो सिर्फ यह चाहते थे कि एसबीआई डोनर्स की स्पष्ट जानकारी दे।’

SBI ने जानकारी ना दे पाने के पीछे दिया ये हवाला-

SBI की तरफ से पेश हुए हरीश साल्वे ने कहा कि बॉन्ड खरीदने की तारीख के साथ बॉन्ड का नंबर और उसका विवरण भी देना होगा। इस पर CJI ने पूछा कि जब फैसला 15 फरवरी को सुनाया गया था और आज 11 मार्च हो गया है। अब तक फैसले का अनुपालन क्यों नहीं किया गया? सुप्रीम कोर्ट सवाल पर साल्वे ने कहा कि हम पूरी सावधानी बरत रहे हैं। ताकी गलत जानकारी देने के लिए हम पर मुकदमा ना हो जाए। इस पर जस्टिस खन्ना ने कहा कि इसमें मुकदमे की क्या बात है। आपके (SBI) पास सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं।

लोकसभा चुनाव 2024: उम्मीदवारों की पहली सूची आज जारी कर सकती है कांग्रेस पार्टी

सोनिया गाँधी
सोनिया गाँधी

संवाददाता | navpravah.com

नई दिल्ली | लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी अपने उम्मीदवारों की पहली सूची आज जारी कर सकती है। कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में छत्तीसगढ़, केरल समेत अन्य राज्यों के 60 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर सकती हैं। इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, चुनाव समिति में शामिल कई अन्य नेता, संबंधित राज्यों के प्रभारी और वरिष्ठ नेता शामिल थे।

सूत्रों के मुताबिक इन उम्मीदवारों में वायनाड की सीट से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का भी नाम शामिल हैं। सीईसी की बैठक में विभिन्न स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा भेजे नामों में से उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगाई जाती है।

जिन 40 उम्मीदवारों का नाम कांग्रेस की पहली लिस्ट में ला सकती है, उनमें तिरुवनंतपुरम से शशि थरूर, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नाम पर भी चर्चा हुई है। इन दोनों दिग्गजों का नाम भी पहली लिस्ट में शामिल हो सकता है। सूत्रों की मानें तो केरल के सभी सांसदों को फिर से टिकट मिल सकता है। वहीं कर्नाटक और तेलंगाना की भी 6-6 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम CEC की बैठक में तय किए जा चुके हैं।

सूत्रों ने बताया कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को राजनंदगांव और पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू को महासमुंद से उम्मीदवार बनाया जा सकता है। बैठक में दिल्ली, छत्तीसगढ़, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और पूर्वोत्तर के राज्यों की लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया गया।

बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव और छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट ने कहा, ‘‘ अच्छी चर्चा हुई है। जिन राज्यों को लेकर सीईसी की बैठक हुई, वहां की एक-एक सीट पर चर्चा की गई।’’ यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गांधी वायनाड से लड़ेंगे तो पायलट ने कहा, ‘‘जो भी निर्णय होगा उस बारे में आखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की तरफ से अवगत करा दिया जाएगा।’’ बड़े नेताओं के चुनाव लड़ने की संभावना पर पायलट ने कहा, ‘‘जो भी व्यक्ति चुनाव जीतने की स्थिति में है, उसे पार्टी चुनाव लड़ने के लिए आदेश करेगी और वह चुनाव लड़ेगा। लेकिन इस बारे में अंतिम निर्णय सीईसी लेगी।’’

सीईसी की बैठक में दिल्ली की तीनों सीट पर एक से अधिक उम्मीदवार होने की वजह से कोई फैसला नहीं हुआ। कहा गया कि तीनों सीट पर एक सिंगल नाम पहले तय किया जाए। दिल्ली की तीनों सीट पेंडिंग रखी गई है। इस पर अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष लेंगे।

बताते चलें कि कांग्रेस ने अभी तक कोई सूची जारी नहीं की है और वहीं भारतीय जनता पार्टी ने अपने पहली सूची में 195 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर चुकी है।

कलकत्ता उच्च न्यायालय का आदेश, शाहजहाँ शेख़ को तत्काल प्रभाव से CBI को सौंपे ममता सरकार

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली | कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में ईडी के अधिकारियों पर हुए हमले की जांच सीबीआई को मंगलवार (5 मार्च, 2024) को सौंप दी। साथ ही कोर्ट ने ममता सरकार को ये आदेश दिया कि वह मामले में आरोपी शाहजहां शेख को आज मंगलवार शाम तक सीबीआई की हिरासत में सौंप दें। वहीं सूत्रों की मानें तो हाईकोर्ट के इस आदेश को ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है।

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणनम और न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की खंडपीठ ने ये फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य पुलिस के सदस्यों के साथ एक स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी के गठित करने के पहले के आदेश को रद्द कर दिया और राज्य को सभी कागजात तुरंत सीबीआई को ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नजात पुलिस स्टेशन और बोनगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज तीनों मामलों को सीबीआई को सौंपा जाएगा। ED अधिकारियों पर हमले के मामले में हाईकोर्ट ने एसआईटी को बर्खास्त कर दिया है।

मामला क्या है?

ईडी पीडीएस घोटाले के मामले में शाहजहां शेख के परिसरों की तलाशी ले रही थी। इस दौरान परवर्तन निर्देशालय की टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया था। इसको लेकर केंद्रीय जांच एजेंसी ने बयान जारी कर कहा था कि जान लेने के इरादे से 800 से 1000 लोगों ने अटैक किया। इस केस का मुख्य आरोपी शाहजहां शेख फिलहाल संदेशखाली में महिलाओं का यौन उत्पीड़न करने और जमीन पर कब्जा करने के मामले में जेल में है।

संदेशखाली के लोगों ने शाहजहां शेख पर लगाए गंभीर आरोप-

संदेशखाली के लोगों ने पिछले कुछ हफ्तों में टीएमसी के नेता शाहजहां शेख और उसके सहयोगियों के खिलाफ आवाज मुखर की थी। लोगों का आरोप है कि शाहजहां शेख और उसके साथियों ने उनकी जमीनें हड़पीं और उगाही की। सूबे में इस बीच पूरे मसले पर जमकर सियासत भी तेज दिखी। बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाने का प्रयास किया और ममता सरकार पर आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के नेताओं की ओर से संदेशखाली में महिलाओं का यौन शोषण किया गया है।

महाराष्ट्र: सीट शेयरिंग को लेकर NDA में माथापच्ची, क्या अमित शाह सुलझा पाएँगे समस्या ?

ब्यूरो | navpravah.com

मुम्बई | लोकसभा चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति दिन ब दिन पेंचीदा होती जा रही है। जहां एक तरफ इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग तय नहीं हो पा रही, वहीं एनडीए में भी कुछ संतुलित नहीं लग रहा हैं। गृहमंत्री कल इन उठा-पटकों के बीच महाराष्ट्र के दौरे पर रहेंगे।

अमित शाह का दौरा बीजेपी के पहली लिस्ट जारी होने के बाद होने जा रही हैं। बीजेपी ने जिन 195 लोगों को मैदान में उतारा हैं उसमें से एक भी नाम महाराष्ट्र से नहीं हैं।

गृहमंत्री अमित शाह अपने दौरे के दौरान अकोला में बैठक कर चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे और वहीं उत्तरी महाराष्ट्र के जलगांव में एक युवा सम्मेलन और संभाजीनगर में एक रैली को भी संबोधित करेंगें।

महाराष्ट्र में NDA के साथ क्या हो रही है दिक्कत?

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी का यहां गठबंधन से थोड़ा मतभेद हैं और बात बनने में अड़चन आ रहीं हैं। लेकिन, ये माना जा रहा हैं कि अब अमित शाह के दौरे के बाद सारी समस्या सुलझ जाएगी।

महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष सी बावनकुले ने कहा कि अमित शाह विदर्भ क्षेत्र के अकोला में एक बैठक करेंगे जहां अकोला, बुलढाणा, अमरावती, चंद्रपुर और वर्धा जैसी प्रमुख सीटों की समीक्षा की जाएगी। यह माना जा रहा है कि इन सीटों पर एनडीए के बीच बात बनने में दिक्कत महसूस हो रही है।

किन सीटों पर है समस्या?

सूत्रों के अनुसार जिन सीटों पर मामला फंस रहा हैं उन में से एक अमरावती की भी सीट है जहां से निर्दलीय महिला सांसद नवनीत राणा हैं।

एनडीए में ये सीट ही सबसे ज्यादा फंसी नजर आ रही हैं। हालांकि खबर ये भी आ रही है कि नवनीत राणा बीजेपी के टिकट से लड़ने के लिए तैयार हो गईं हैं। लेकिन वो एससी जाति के प्रमाण पत्र हासिल करने के गलत तरीके को लेकर एक मामले में आरोपी हैं और इस पर मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है जबकि (शिंदे गुट) भी इस सीट से चुनाव लड़ना चाहती है।

दूसरी सीट है चंद्रपुर, जहां बीजेपी को उम्मीदवार चयन को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी राज्य मंत्री सुधीर मुनगंटीवार को मैदान में उतारने की योजना बना रही थी लेकिन पार्टी के कुछ नेता ऐसा नहीं चाहते हैं।

अगर बात करें कोंकण क्षेत्र की तो बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) दोनों सिंधुदुर्ग-रत्नागिरी सीट चाहती हैं। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने ने कहा कि बीजेपी ही इस सीट पर चुनाव लड़ेगी।

अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी और बीजेपी के बीच पश्चिमी महाराष्ट्र की सीट शिरूर को लेकर मतभेद दिख रहा हैं, इस समय इस सीट से मौजूदा सांसद अमोल कोल्हे हैं।

डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने क्या कहा?

सीट बंटवारे को लेकर खींचतान की खबरें सामने आने पर डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने कहा कि एनडीए की किसी भी पार्टी के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। उन्होंने कहा, “सीटों का बंटवारा जमीनी हकीकत और उम्मीदवारों की जीत की ताकत को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गठबंधन के तीन सहयोगियों में से किसी पर भी गलत प्रभाव ना पड़े।”

जानिए, पवन सिंह के चुनाव लड़ने से इनकार करने के पीछे की कहानी

नृपेंद्र मौर्य | navpravah.com

नई दिल्ली | भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने आसनसोल से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है, कल ही भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया था और आज पवन सिंह ने वहां से चुनाव लड़ने से मना कर दिया।

पवन सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दिल से आभार प्रकट करता हूं. पार्टी ने मुझ पर विश्वास करके आसनसोल का उम्मीदवार घोषित किया लेकिन किसी कारणवश में आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ पाऊंगा…’

आइए समझते है पवन सिंह ने क्यों लिया ऐसा फैसला:

सूत्रों की माने तो बंगाल के बीजेपी नेताओं ने शीर्ष नेतृत्व से भोजपुरी स्टार पवन सिंह की उम्मीदवारी पर विचार करने का अनुरोध किया था। कहा कि संदेशखाली आदि घटनाओं से बीजेपी ने बंगाल की महिला हिंसा को जिस रहा से बड़ा मुद्दा बनाया है, उस पर सिंगर के बंगाली महिलाओं को लक्ष्य कर बनाए गाने पानी फेर देंगे। क्योंकि टीएमसी को काउंटर का मुद्दा मिल गया है। पार्टी ने एक सीट के लिए पूरे राज्य में नुकसान की आशंका पर पवन को न लड़ाने का फैसला लिया। पवन सिंह ने सोच भी नहीं होगा कि उनके गाने ही उनके टिकट पर कैची चला देंगे

संदेशखाली के मुद्दे को और बड़ा करने की प्लान में है बीजेपी:

संदेशखाली के मुद्दे को बीजेपी हाथ से गवाना नही चाहती, प्रधान मंत्री मोदी बार बार अपने भाषणों में भी संदेशखाली का जिक्र करते हुए ममता सरकार पर निशाना साधते हैं। महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को बीजेपी बड़ा मुद्दा बना कर बंगाल फतेह करने के प्रयास में हैं और यही कारण बना है पवन सिंह के टिकट कटने का।

कौन हो सकता है उम्मीदवार:

संदेश खाली के मुद्दे को बड़ा करने और इन बंगाली महिलाओं पर बने गानों को पाटने के लिए बीजेपी एक महिला उम्मीदवार को उतार सकती हैं। सूत्रों की माने तो अब इस रेस में अक्षरा सिंह सबसे आगे हैं।

कल मिठाई बाँट रहे थे पवन सिंह, अचानक भाजपा से कैसे हो गया ‘मोहभंग’

संवाददाता | navpravah.com

नई दिल्ली | भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने आसनसोल से चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है, कल ही भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया था और आज पवन सिंह ने वहां से चुनाव लड़ने से मना कर दिया।

पवन सिंह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दिल से आभार प्रकट करता हूं. पार्टी ने मुझ पर विश्वास करके आसनसोल का उम्मीदवार घोषित किया लेकिन किसी कारणवश में आसनसोल से चुनाव नहीं लड़ पाऊंगा…’

बताते चलें कि आसनसोल से वर्तमान में बॉलीवुड अभिनेता और टीएमसी के नेता शत्रुघ्न सिन्हा सांसद हैं जिनके खिलाफ पवन सिंह को बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया था। ये लड़ाई बड़ी ही रोचक होने वाली थी लेकिन उससे पहले पवन सिंह ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया।

इससे पहले जब बीजेपी ने आसनसोल सीट के लिए शनिवार को पवन सिंह के नाम का ऐलान किया तो उन्होंने तुरंत पोस्ट करते हुए बीजेपी आलाकमान को धन्यवाद दिया था। उन्होंने लिखा, ‘आसनसोल से मुझे लोकसभा उम्मीदवार बनाए जानेक के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी के सभी माननीय महानुभावों का वंदन चंदन व अभिनंदन करते हैं।

लोकसभा चुनावों से पहले राजनीतिक पिच से गौतम का ‘गम्भीर रिटायरमेंट’

ब्यूरो | navpravah.com

नई दिल्ली | पूर्व भारतीय क्रिकेटर और पूर्वी दिल्ली से मौजूदा सांसद गौतम गंभीर ने राजनीति से सन्यास लेने का ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफोर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि उन्होंने इसे लेकर बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा को जानकारी भी दी है।

गौतम गंभीर ने लिखा, “मैंने माननीय पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा से अनुरोध किया है कि मुझे मेरे राजनीतिक कर्तव्यों से मुक्त करें ताकि मैं अपनी आगामी क्रिकेट प्रतिबद्धताओं पर ध्यान केंद्रित कर सकूं. मुझे लोगों की सेवा करने का अवसर देने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं. जय हिन्द!’

गंभीर ने साल 2018 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद 2019 में बीजेपी की तरफ से पूर्वी दिल्ली की सीट से लोकसभा चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी। ऐसे में जब देश में आगामी तीन महीनों में 2024 लोकसभा चुनाव होने है, उससे पहले गंभीर का ये फैसला काफी चौंकाने वाला है।

अंदाजा ये लगाया जा रहा था कि बीजेपी दिल्ली मौजूदा 7 सांसदों में से 4 से 5 सांसदों का टिकट काट सकती है जिसमें गौतम गंभीर का नाम भी शामिल हो सकता है।

बता दें कि गौतम आईपीएल 2024 में केकेआर के मेंटर के रूप में नजर आएंगे। बतौर कप्तान इसी टीम के लिए खेलते हुए गंभीर ने 2012 और 2014 में फ्रैंचाइजी को खिताब जिताए थे। जबकि इससे पहले पूर्व क्रिकेटर 2022 और 2023 सीजन के लिए नई फ्रैंचाइजी लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटॉर थे।