रूस की स्टार टेनिस खिलाड़ी मारिया शारापोवा ने बताया है कि जनवरी में आस्ट्रेलियन ओपन के दौरान हुई उनकी ड्रग टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव है,जिसके चलते उनके खेलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
शारापोवा ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि वे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण 2006 से ही ‘मिल्ड्रोनेट’ नामक दवा ले रही हैं,जिसकी वजह से ड्रग टेस्ट में परिणाम ‘पॉजीटिव’ आया है. मगर वे नहीं जानती थीं कि इस दवा को इस वर्ष की शुरुआत में विश्व डोपिग रोधी एजेंसी (वाडा) द्वारा निषिद्ध सूची में शामिल कर लिया गया है.
शारापोवा ने कहा, “मेरे परिवार में पहले भी कई लोगों को मधुमेह की शिकायत रही है. मुझमें भी इसके लक्षण दिखने लगे थे .मैं बीमार रहने लगी थी और मुझमें मैग्निशियम की कमी हो गई थी. इसीलिए मैंने अन्य दवाओं के साथ इस दवा को लेना शुरू किया.”
टेनिस स्टार ने कहा, “आपको बा5अ दूँ कि पिछले 10 साल से यह दवा वाडा की प्रतिबंधित दवाओं की सूची में नहीं थी लेकिन 1 जनवरी को नियम बदल गए और इसे सूची में शामिल कर लिया गया, जिसके बारे में मुझे पता नहीं था.”
टेनिस स्टार द्वारा घोषणा किए जाने के एक घंटे बाद अंतर्राष्ट्रीय टेनिस महासंघ (आईटीएफ) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट में भी बताया कि 28 वर्षीया खिलाड़ी पर 12 मार्च से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.
आईटीएफ ने आगे बताया कि जनवरी में हुए आस्ट्रेलियन ओपन के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में सेरेना विलियम्स से हारने के बाद हुए ड्रग टेस्ट में असफल हुईं शारापोवा पर दो मार्च को डोपिंग रोधी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा था.
वहीं महिला टेनिस संघ (डब्ल्यूटीए) के टूर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) स्टीव सिमोन ने वाडा द्वारा नियमों में किए गए बदलाव पर निराशा जताते हुए कहा कि शारापोवा को नियमों के बारे में पता होना चाहिए था.
गौरतलब है कि इस मामले में पहली बार असफल होने वाले खिलाड़ियों पर आमतौर पर दो साल का प्रतिबंध लगाया जाता है. मिल्ड्रोनेट को मिल्डोनियम नाम से भी जाना जाता है, जिसे मधुमेह या मैग्निशियम की कमी के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है.
भारापुर क्षेत्र के गोविंदपुर गांव में खेत में काम कर रहे किसानों में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब उन्होंने बगल में एक पेड़ पर तेंदुए को बैठे देखा।तेंदुए को देखते ही किसान भाग खड़े हुए और अपनी जान बचाई।
जानकारी के मुताबिक, गांव के कुछ किसान रिजवान, गुलजार, मेहरबान, सुभम व सोनू आदि समीप के जंगल से सटे अपने खेतों में काम कर रहे थे। इसी बीच एक किसान की नजर खेत में एक बड़े से पेड़ पर पड़ी तो उसे मानो सांप सूंघ गया। उसने देखा कि पेड़ पर एक तेंदुआ बैठा हुआ है। जो किसानों की तरफ ही देख रहा। इस पर किसानों ने दूर भागकर जान बचाई और गांव में वापस आ गए।
इसकी सूचना किसानों ने वन विभाग को दी। इस पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कर्मियों ने तेंदुए को भगाने के लिए हवाई फायर भी किए। इस बीच तेंदुआ भागते-भागते एक कुत्ते को घायल कर गया। रेंजर महेश सेमवाल ने बताया की गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगा दिया गया है।
पूरे विश्व में आज महिला दिवस मनाया जा रहा है। फ़िल्म इंडस्ट्री में भी कई सितारों ने सोशल साइट्स के ज़रिए अपनी भावनाएं व्यक्त की। लेकिन महिला दिवस के अवसर पर महानायक अमिताभ बच्चन ने महिलाओं के लिए एक दिन ही निर्धारित किए जाने पर बड़ा सवाल उठाया है।
बिग बी अमिताभ बच्चन ने ट्वीट में लिखा कि हमारे जीवन में महिलाएं अपना हर दिन कुर्बान करती हैं, ऐसे में क्या हम उन्हें मात्र एक ही दिन क्यों देते हैं। हालाँकि बिग बी हमेशा से महिलाओं का काफी सम्मान करते हैं।
महिला दिवस के अवसर पर अमिताभ बच्चन के अलावा हेमा मालिनी, धनुष, निमृत कौर और दिव्या दत्ता जैसे कई सितारों ने महिलाओं को शुभकामनाएं भी दी हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेसेस पर आए दिन कंट्रोवर्शियल कमेंट्स करने वाले कमाल आर खान उर्फ केआरके ने भी महिला दिवस पर सभी महिलाओं को शुभकामनाएं दी हैं।
Bureau@navpravah.comविश्व महिला दिवस के अवसर पर वायु सेना अध्यक्ष अरूप राहा ने एक बड़ा ऐलान किया है। राहा ने कहा कि 18 जून को भारतीय वायु सेना में पहली बार महिला फाइटर पायलट शामिल होगी।
भारतीय वायु सेना अध्यक्ष अरूप राहा ने विश्व महिला दिवस के अवसर पर ऐलान किया कि इसी साल 18 जून को पहली बार महिला फाइटर पायलट मिलेगी। राहा के मुताबिक़ 3 महिला ट्रेनी का चयन किया गया है। पासिंग आउट परेड 18 जून को होगी। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि तीनों को उसी दिन कमीशन मिल जाएगा।
महिला पायलट के शामिल होते ही सेना के तीनों अंगों में वायुसेना पहली सेना होगी जिसमें फ्रंट लाइन पर पायलट के तौर पर महिला सैन्यकर्मियों की तैनाती होगी।
वायुसेना में महिला फाइटर पायलट को शामिल कराने वाले मामले पर लंबे समय से विचार चल रहा है। वायु सेना में फिलहाल 1500 महिला सैन्यकर्मी हैं जिनमें 94 पायलट और 14 नेवीगेटर हैं।
हाल ही में 6 महीने की अंतरिम जमानत पर रिहा हुए जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार, अब देशद्रोह के अन्य दो आरोपी छात्रों की रिहाई के लिए किए जा रहे आंदोलन की अगुवाई करेंगे.
कन्हैया ने कहा, ‘‘सरकार और पुलिस ने मेरी जमानत में देर करने का असफल प्रयास किया, लेकिन फिर भी इस मामले में मुझे ज़मानत मिल गई. मगर सिर्फ मेरी ज़मानत हो जाने भर से हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई है. उमर और अनिर्बान अब तक न्यायिक हिरासत में हैं. मैं अब उनकी रिहाई के लिए छात्र आंदोलन की अगुवाई करूंगा.’’
कन्हैया की अगुवाई वाले जेएनयू छात्र संघ ने आज रात परिषद की एक बैठक बुलाई है जिसमें ‘‘जेएनयू पर हमले’’ के मुद्दे पर चर्चा होगी और भविष्य के कदम को अंतिम रूप दिया जाएगा.
कन्हैया ने कहा, ‘‘यूं तो हमारा पहला मकसद उन दोनों को रिहा कराना है, लेकिन मुझे यकीन है कि यदि मैंने इसी प्रकार अपनी आवाज बुलंद करने की विचारधारा को अपनाया तो जेल आना-जाना मेरे लिए आम बात हो जाएगी.’’
गौरतलब है कि जेएनयू परिसर में बीते नौ फरवरी को आयोजित एक विवादित कार्यक्रम में कथित तौर पर लगे भारत विरोधी नारों के सिलसिले में कन्हैया, उमर और अनिर्बान पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था.
कन्हैया 18 दिन जेल में बिताकर रिहा हो चुके हैं. दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से जमानत दिए जाने के बाद कन्हैया को पिछले हफ्ते ही तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था. अन्य दो आरोपी उमर और अनिर्बान अब भी न्यायिक हिरासत में बंद हैं.
भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा द्वारा जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की रिहाई पर, उसकी प्रशंसा किए जाने पर उन्हीं की पार्टी के मंत्री नेता गिरिराज सिंह ने उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई है।
बीजेपी के केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने शत्रुघ्न सिन्हा को उनके दिए हुए बयान पर फटकारते हुए कहा कि उनकी ऐसी हरकतों के कारण ही उन्हें पार्टी जल्द बाहर का रास्ता दिखाने वाली है, क्योंकि कोई भी शख्स पार्टी के ऊपर नहीं है।
मीडिया से बातचीत के दौरान, जब गिरिराज सिंह से शत्रुघ्न सिन्हा के कन्हैया कुमार को सपोर्ट करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि देशद्रोह के एक आरोपी की ज़मानत पर शत्रुघ्न ने प्रसन्नता व्यक्त की है। उस आरोपी की प्रशंसा भी की। पार्टी जल्द ही उन्हें बाहर का रास्ता अवश्य दिखाएगी।
कन्हैया कुमार के विषय में बात करने पर गिरिराज सिंह बोले, “अब कन्हैया को कानून का डर सता रहा है। इसीलिए अब वह बार-बार अपना बयान बदल रहा है। पहले उसने कहा था कि देश के बाहर आजादी चाहिए, लेकिन अब कानून के डर से अपना बयान बदल कर अब बोल रहा है कि देश के भीतर आजादी चाहिए।”
गौरतलब है कि बीजेपी सांसद और बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को मिली जमानत पर ट्वीट किया था, “मैं कन्हैया की रिहाई से बेहद खुश हूं. यह आशा करता हूँ कि कन्हैया अपने विरोधियों को जवाब देने में जरूर सफल होगा।”
एक अन्य ट्वीट में शत्रुघ्न ने लिखा था, “मैं अनुरोध करता हूँ कि वे सभी लोग, जिन्हें लगता है कि कन्हैया के साथ गलत हुआ है, कन्हैया के समर्थन में आगे आएं, ताकि उनके समर्थन से कन्हैया अपने विरोधियों को करारा जवाब दे सके।”
यह कोई पहला मौका नहीं है कि ‘शत्रु’ ने पार्टी से अपनी शत्रुता ज़ाहिर की है। बल्कि बिहार चुनाव के दौरान भी उन्होंने पार्टी पर खूब निशाना साधा था और अक्सर वे पार्टी, सरकार और स्वयं प्रधानमंत्री मोदी पर भी व्यंग के बाण चलाते रहे हैं।
पाकिस्तान और भारत के बीच धर्मशाला में आगामी 19 मार्च को होने वाले क्रिकेट मैच के सुरक्षा इंतज़ामों का जायज़ा लेने के लिए सोमवार को पाकिस्तान का एक दल धर्मशाला पहुँच गया। इस दल में संघीय जांच एजेंसी के निदेशक और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के सदस्य शामिल हैं।
आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी20 में दोनों टीमें ग्रुप मैच में भिड़ेंगी। इस सुरक्षा जांच के लिए भारत की ओर से पाकिस्तान के दो सदस्यों को वीजा जारी किया गया है, जबकि तीसरा सदस्य भारत में इस दल में शामिल होगा। इन दोनों सदस्यों से जब पड़ताल को लेकर प्रश्न किया गया तो एक अधिकारी ने कहा कि आप सभी को पता है कि हम यहां क्यों आए हैं। अधिकारी ने इसके अलावा कोई भी जवाब नहीं दिया।
यह दल भारत-पाकिस्तान की संयुक्त सीमा चौकी वाघा-अटारी को पार करने के बाद धर्मशाला के लिए रवाना हो गया, जो अटारी से 235 किलामीटर दूर है।
गौरतलब है कि सुरक्षा को लेकर पिछले सप्ताह हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा था कि उनकी सरकार पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत पर आतंकी हमले करता है, जिसकी वजह से प्रदेश के पूर्व सैनिक और परिजन इस मैच का विरोध कर रहे हैं।
पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम प्रांत में स्थित अदालत परिसर में एक आत्मघाती हमले की खबर है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ इस आत्मघाती हमले में कुल आठ लोगों की जान गई है, जबकि 27 लोग घायल बताए जा रहे हैं।
पाकिस्तान के एक अदालत में हुए आत्मघाती हमले की वजह से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पाक के उत्तर-पश्चिमी प्रांत में आत्मघाती हमले करने वालों को जब रोकने की कोशिश की गई तो हमलावरों ने विस्फोट से खुद को ही उड़ा लिया। प्रशासन ने रोकना चाहा लेकिन वे अपनी कोशिश में नाकाम रहे।
मिली जानकारी के अनुसार, घटनास्थल पर सुरक्षा बालों और सेना के जवान पहुँच गए हैं। इलाके को घेरकर सेना ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिस अदालत को निशाना बनाने की कोशिश की गई है, वह आतंक प्रभावी इलाका बताया जा रहा है।
घटनास्थल से अफगानिस्तान की सीमा भी नज़दीक ही है। यह आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रभाव वाला इलाका है। उसने ही इलाके में ज्यादातर हमले किए हैं।
कहते हैं की गंगा की बहती धारा में सभी अपना हाथ धोने की चाह रखते हैं और अगर मौजूदा समय में देश के शैक्षिक माहौल की बात करें तो कुछ तथाकथित अतिबौद्धिक लोगों द्वारा इसे जबरदस्ती बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है । अभी जेएनयू में लगी आग ठंडी भी नही हुई थी कि पूरब का आर्क्सफ़ोर्ड कहा जाने वाला इलाहाबाद विश्वविद्यालय भी इस आग की चपेट में आ गया है ।
जेएनयू और हैदराबाद यूनिवर्सिटी के बाद अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय भी विवादों के घेरे में दिखाई दे रहा है। यहां छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन उन्हें पद से हटाना चाहता है।
छात्रसंघ की पहली महिला निर्दलीय अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय में कई मुद्दों के लिए आवाज उठाई थी। जिसकी वजह से प्रशासन उनकी कुर्सी छीनना चाहता है और उनके साथ वैसा ही किया जा रहा है, जैसा हैदराबाद यूनिवर्सिटी में रोहित वेमुला के साथ किया गया था ।
ऋचा का आरोप है कि जेएनयू, रोहित वेमुला के मामले पर आवाज उठाने और एबीवीपी का विरोध करने के कारण केंद्र के इशारे पर उन्हें निशाना बनाने की तैयारी की जा रही है। ऋचा ने कहा कि अगर उन्हें आरक्षित सीट पर दाखिला दिया गया है, तो इसमें उनकी नहीं बल्कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की गलती है।
ऋचा विश्वविद्यालय में संचालित कोर्स ग्लोबलाइजेशन एंड डेवलपमेंट में डी. फिल की छात्रा हैं। उनका कहना है कि जेएनयू विवाद के बाद एबीवीपी अब उन्हें निशाना बना रही है और उनके 6 माह के कार्यकाल में उन्हें लगातार मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा है ।
ऋचा का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनके एडमिशन को गलत बताकर उन्हें बाहर कर के उनका पद एबीवीपी से छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंघ को सौंपना चाहता है। बता दें कि पिछले दिनों छात्र नेता रजनीश सिंह की शिकायत के बाद वीसी रतन लाल हंगलू ने ऋचा की एडमिशन प्रक्रिया के जांच के आदेश दिए थे।
वैसे यहाँ का मामला तो बिल्कुल अलग है पर एक बात इसे जेएनयू से जोड़ती है वो है यहाँ का मौजूदा ‘छात्रसंघ’। वैसे कहने को तो छात्र संघ का गठन छात्रहितों की पूर्ति के लिए किया जाता है, पर जब यही छात्र संघ ‘छात्रों’ के लिए ही सिरदर्द बन जाए तो ऐसी स्थिति में इनसे किसी कार्य की आशा करना बेमानी ही होगा।
जेएनयू कैम्पस में कुछ विकृत मानसिकता के लोगों द्वारा देशविरोधी नारे लगाये गए थे जिसके बाद देश का माहौल अचानक गर्म हो गया था। सभी गुस्से में थे। पूरा देश खुद से यही प्रश्न कर रहा था कि आखिर अपने ही देश के अंदर देश की अखण्डता व संप्रभुता को तार-तार करने वालों को क्यों तनिक भी अपने किये पर पछतावा नही हुआ ?
खैर समय बीतने के साथ प्रश्न भी कमजोर हो गया है। वैसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र राजनीति का मुख्य केंद्र रहा है, इसने देश को बहुमूल्य हीरे दिए हैं। पर अब यहाँ के छात्र संघ की स्थिति बिल्कुल ख़राब हो गई है। इस वर्ष जब नये छात्र संघ चुनाव का परिणाम आया तो विश्वविद्यालय के इतिहास ने एक नई करवट ली और स्वतंत्रता के बाद पहली बार छात्रों को निर्दलीय उम्मीदवार ‘ऋचा सिंह’ के रूप में पहली महिला अध्यक्ष मिली। कहने को तो इन्होंने अकेले ही बिना किसी सपोर्ट के चुनाव जीता पर शुरू से ही इनके ऊपर पार्टी विशेष से सपोर्ट लेने का आरोप लगता रहा है। ये आरोप इसलिए भी कैम्पस की छात्र राजनीति के केंद्र में रहा क्योंकि जब इन्होंने चुनाव प्रचार शुरू किया था, तब इनका कहना था कि हम धनबल और दलबल से दूर रहेंगे क्योकि हमें एक स्वच्छ राजनीति करनी है।
अध्यक्ष पद के अलावा सारे पद अ.भा.वि.प. को मिले और यहीं से शुरू हुआ छात्र संघ का आपसी संघर्ष, हर दिन एक नए विवाद के साथ खत्म होता है और मानों अगला दिन एक नए विवाद के स्वागत में फूल मालाएं लिये खड़ा रहता है। इन सब विवादों में सबसे ज्यादा जिसका घाटा हुआ वो था ‘छात्र’ जो अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
ये तो आने वाला समय बताएगा की अध्यक्ष ऋचा सिंह का पद रहेगा या नहीं पर एक बात साफ़ तौर पर स्पष्ट है कि इससे छात्रों का किसी भी प्रकार का भला नही होने वाला है। मामला कुछ भी हो पर उसे तत्कालीन समय से जोड़कर अपना फायदा लेना भी कही न कहीं गलत है। ऐसे में यह कहना कि मेरा विरोध केवल इसलिए हो रहा है क्योकिं मैंने रोहित वेमुला और कन्हैया का समर्थन किया। ऐसा बयान केवल अपनी राजनीति सहेजने का प्रयास लगता है क्योंकि मौजूदा समय में खुद की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए इससे अच्छा कोई भी मास्टर स्ट्रोक नही हो सकता। इन विवादों से इतर अगर कैम्पस की बात करें तो माहौल काफी बिगड़ चुका है। आये दिन मारपीट और छेड़छाड़ का सीधा प्रसारण देखने को मिल ही जाता है। कोई किसी की भी पिटाई कर सकता है लेकिन न तो वहां पे खड़े छात्र नेता किसी को बचाएंगे और न ही आस पास खड़े लोग।
सभी एक सुर से यही कहते हैं कि कैम्पस में सीसीटीवी कैमरे लगने चाहिए हम तो अपनी नंगी नजरों से कुछ गलत नही देखेंगे। अब तो लोगो के अंदर गलत के विरोध करने की भी हिम्मत नही रह गई। मारपीट के बाद भी ऐसा माहौल बनाया जाता है कि उस विषय पर कोई किसी से कुछ बात न कर सके । कहने को तो शिक्षा के मंदिर में ये सब नही होना चाहिए, पर शायद अब शिक्षा के ये प्राचीन मंदिर वैसे पूज्यनीय नही रहे।
फिर ऐसे में छात्र संघ की प्रासंगिकता बनी रहे ये मुमकिन नहीं। इसका सबसे बड़ा कारण यह कि मौजूदा समय में छात्र राजनीति खुद की शख्सियत संवारने का सबसे बड़ा ‘अड्डा’ बनकर रह गया है।