राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वयोवृद्ध कार्यकर्ता एवं भारतीय जनता संघ (बीजेएस) के पूर्व अध्यक्ष बलराज मधोक का लंबी बीमारी के बाद आज दिल्ली में निधन हो गया। आरएसएस के एक अधिकारी ने बताया कि मधोक (96) ने सोमवार सुबह करीब नौ बजे मध्य दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर इलाके में स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह पिछले कई दिनों से बीमार थे।
प्रोफेसर बलराज मधोक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक, जम्मू-कश्मीर प्रजा परिषद के संस्थापक और मन्त्री, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संस्थापक, भारतीय जन संघ के एक संस्थापक और अध्यक्ष हैं। वे 1960 के दशक के वरिष्ठ राजनेता हैं। वे संसद (लोकसभा) के दो बार सदस्य रह चुके हैं। वे गणमान्य शिक्षाविद, विचारक, इतिहासवेत्ता, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक भी थे।
उनका जीवन समग्र दृष्टि से भारतमाता के सच्चे सपूत की भूमिका पर खरा उतरता है। 1947 में कश्मीर को बचाने, भारतीय जनसंघ की 1951 में स्थापना और ऊँचाईयों तक ले जाने में उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है। उन्होंने राष्ट्रहित सर्वोपरि के मंत्र के साथ स्पष्ट एवं दूरदर्शी सांसद के तौर पर देश की साहसपूर्वक सेवा की तथा राजनीति में ‘‘जीते जी शहीद’’ होना स्वीकार कर लिया परन्तु सिद्धान्तों से कभी समझौता नहीं करने की अडिगता बनाए रखी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब कांग्रेस ने पीएम की जन्म तिथि में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया है। पार्टी ने गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा मोदी की स्नात्कोत्तर डिग्री की जानकारी साझा करने के समय पर भी सवाल उठाया। विश्वविद्यालय ने पहले जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि एम एन कॉलेज के छात्र पंजीयक, जिसमें मोदी ने प्री-साइंस (12वीं) में दाखिला लिया था, में सर नरेन्द्र मोदी की जन्म तिथि 29 अगस्त, 1949 है। उनके चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी जन्म तिथि नहीं बतायी है बल्कि अपनी उम्र लिखा है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध उनकी औपचारिक जन्म तिथि 17 सितंबर, 1950 है। उन्होंने स्कूल रजिस्टर की प्रति दिखायी, जिसमें प्रधानमंत्री का नाम नरेन्द्र कुमार दामोदरदास मोदी, और उनकी जन्म तिथि लिखी है।
गोहिल ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि अलग-अलग जन्मतिथि के पीछे कारण क्या है। उनके पासपोर्ट या पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि क्या है और अलग-अलग जन्मतिथि के पीछे कारण क्या है।गोहिल ने मोदी के ५६ इंच सीने वाली बात पर व्यंग करते हुए कहा कि जनता यह नहीं जानना चाहती कि पीएम का सीना ५६ इंच का है या नहीं बल्कि जनता जानना चाहती है कि पीएम की सही जन्मतिथि क्या है,उनकी उच्च शिक्षा कहा से हुई है।उन्होंने कहा कि मोदी अपने साथ पढ़ने वाले किन्हीं १० छात्रों के नाम बताएं।
गौरतलब है कि पीएम की डिग्री को लेकर हुए विवाद के बाद रविवार को गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति एम एन पटेल ने बताया, “नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने १९८३ में राजनीती विज्ञानं में एम ए की परीक्षा पास की और बाहरी छात्र के तौर पर ८०० में से ४९९ अंक प्राप्त किए जो ६२.३ फ़ीसदी हैl” हालांकि पटेल ने मार्कशीट की कॉपी शेयर करने से मना कर दिया हैl उन्होंने कहा , “ मैं मार्कशीट की कॉपी मीडियाकर्मी या थर्ड पार्टी को नहीं दे सकताl वह केवल उम्मीदवार को ही दी जा सकती हैl यदि हमें पीएमओ या फिर सीआईसी से निर्देश मिलते है,तभी हम मीडिया को वह कॉपी सौंप सकते हैंl”
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार को बागी विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त में खुद की संलिप्तता दिखाने वाली स्टिंग सीडी में अपनी मौजूदगी को स्वीकार किया है जिसे वे अब तक ‘फर्जी और गलत’ बता रहे थे लेकिन यह भी कहा है कि यह सब भाजपा के आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा था और इसके लिए वे जेल जाने को तैयार हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने आरोप लगाया कि एक अपराधिक षड्यंत्र के तहत सीडी प्रकरण व सीबीआई जांच को लेकर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने दिलों दिमाग में मुझ पर जो भी जुल्म करने की सोच रहे हैं, मैं उसे भी सहने को तैयार हूं।“
रविवार को रावत ने स्टिंग सीडी में अपनी मौजूदगी को स्वीकार करते हुए कहा कि पत्रकार से मिलना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा, “क्या किसी पत्रकार से मिलना कोई अपराध है? क्या तब तक तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित नहीं हुए विधायकों में से किसी ने भी मुझसे बातचीत की, इससे क्या फर्क पडता है? राजनीति में क्या किसी चैनल को हम बंद कर सकते हैं?”
पूर्व मुख्यमंत्री ने ये दावा किया कि सीडी में से ऐसा कुछ भी प्रमाणित हो जाए कि उन्होंने असंतुष्ट विधायकों का समर्थन लेने के बदले में उन्हें नकद या किसी और प्रकार की पेशकश की तो वह जनता के सामने फांसी पर लटकने को तैयार हैं।
रावत के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उनके और स्टिंग सीडी बनाने वाले उस पत्रकार के बीच मुलाकात हुई थी। रावत अब तक सीडी की सत्यता को ही चुनौती देते रहे थे और उन्होंने उसे ‘फर्जी और गलत’ बताया था।
गौरतलब है कि एक निजी चैनल के मुख्य संपादक द्वारा बनायी गयी और रावत के खिलाफ बागी हो गये नौ कांग्रेस विधायकों द्वारा प्रसारित की गयी स्टिंग सीडी में कथित रूप से रावत को बागी विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिये पत्रकार से सौदेबाजी करते दिखाया गया था। गत 18 मार्च को नौ कांग्रेस विधायकों के बागी हो जाने और राज्य विधानसभा में भाजपा के साथ खड़े हो जाने के बाद प्रदेश में सियासी संकट पैदा हो गया था जिसके परिणामस्वरूप 27 मार्च को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
अपनी सफाई में रावत ने कहा, “मेरे लिए कोई क्यों 15 करोड़ रुपये खर्च करेगा? वह पत्रकार मेरा मन बहलाने के लिए कुछ अर्थहीन बातें कर रहा था और मैंने उसका मन बहलाने के लिए ऐसे ही कुछ कह दिया। इससे क्या फर्क पड़ता है? हम रोजाना इस प्रकार की बातें कहते रहते हैं। क्या इसका मतलब है कि उनका प्रयोग हमारे खिलाफ किया जाए?”
रावत के प्रधानमंत्री और शाह पर लगाये गये आरोपों की बाबत प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि सत्ता से बेदखल होने से रावत का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और इसी के कारण वे बौखलाहट में ऊट पटांग बातें कर रहे हैं।
देश की आजादी के सत्तर वर्ष पूरे होने को हैं और आज भी हमारे देश के ऐसे बहुत से गाँव हैं जहाँ बिजली और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएँ अभी तक नही पहुँची हैं ।ऐसा ही बुन्देलखण्ड का एक रानीपुर गाँव है जो चित्रकूट जिले के अंतर्गत आता है। जिला मुख्यालय से 40 किमी की दूरी पर स्थित यह गाँव इस लिए भी खास है क्योंकि गाँव के ग्रामीणों ने ठीक 27 वर्ष पहले सड़क निर्माण के लिए अपनी सीधी लड़ाई तत्कालीन लोकतान्त्रिक व्यवस्था के विरुद्ध लड़ी थी। सन् 1989 में ग्राम रानीपुर के ग्रामीणों ने रानीपुर-कल्याणगढ़ से मानिकपुर तक संपर्क मार्ग के लिए तत्कालीन विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया था। तदोपरांत सम्पर्क मार्ग पास हुआ एवं निर्माण कार्य भी शुरू हुआ था लेकिन आज तक पूरा नहीं हुआ।
आज उस लड़ाई को भले ही 27 वर्ष का समय हो गया हो पर आज भी उस गाँव की युवा पीढ़ी को अपने बाबा-दादा के संघर्ष के दिन याद हैं और गाँव की इस मौजूदा युवा पीढ़ी ने ठान लिया है की अब किसी भी हाल में ये सड़क निर्माण पूरा कराकर रहेंगे और वो भी 27 वर्ष पहले वाले तरीके से यानि ‘रोड नहीं तो वोट नहीं ‘ के तहत आने वाले विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करके।
आपको बताते चले की ग्राम रानीपुर कल्याणगढ़ से मानिकपुर तक की दूरी मात्र 9 किमी की है और रास्ते में लगभग 4 किमी का रास्ता रानीपुर वन्य जीव बिहार से होकर जाता है जो की बहुत उबड़-खाबड़ है, जिसमें जंगली जानवरों एवं दस्युओं का खतरा बना रहता है। इस रास्ते से जिनवाह, कुबरी,कटरा,गिदुरहा आदि गाँवों के हजारों ग्रामीणजनों का आवागमन होता है। अतः इस संपर्क मार्ग का बनना अत्यंत आवश्यक है।
गाँव के ग्रामीणों का कहना है कि अगर संपर्क मार्ग को जल्द से जल्द नहीं बनवाया गया तो हम निरीह ग्रामीणजन अनशन,प्रदर्शन एवं आने वाले चुनावों का बहिष्कार करने को मजबूर होंगे । इस पूरे संघर्ष को नई गति देने वाले रानीपुर गाँव के युवा अभिलाष जायसवाल का कहना है कि समस्त ग्रामीणवासी एकजुट हैं और अगर 2017 विधानसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण नहीं हुआ तो पुनः ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ का आंदोलन किया जाएगा। अभिलाष बताते हैं,” हमने कुछ दिन पहले सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर सहित डीएम और एसडीएम को पत्र भी प्रेषित किया था पर इसके बावजूद भी अभी तक कुछ नहीं हुआ। पर अभी तक हम लोगों ने हार नहीं मानी है। हमारी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक की सड़क निर्माण पूरा न हो जाए।”
बॉलीवुड ही नहीं,बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी विशेष पहचान बना चुकी सुपर स्टार प्रियंका चोपड़ा ने व्हाइट हाउस करसपोंडेंट डिनर में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और मिशेल ओबामा के साथ शनिवार शाम को डिनर किया।‘क्वांटिको’ स्टार इस समय अमेरिका हॉलीवुड फिल्म ‘बेवाच’ की शूटिंग कर रही हैं।33 वर्षीय बॉलीवुड ब्यूटी प्रियंका कल शाम आयोजित रात्रिभोज में काले रंग की गाउन में बेहद खूबसूरत लग रही थीं।
प्रियंका ने ट्वीट किया है, ‘बेहद मजाकिया और आकषर्क बराक ओबामा और खूबसूरत अमेरिकी प्रथम महिला के साथ मुलाकात शानदार थी।इस खूबसूरत शाम के लिए शुक्रिया।’ इतना ही नहीं,प्रियंका ने अपने इंस्टाग्राम पर ओबामा और मिशेल के साथ अपनी एक फोटो भी शेयर की है.
वाशिंगटन में हुए इस आयोजन में पत्रकारों, सेलिब्रिटी, नेताओं सहित कई जानी मानी हस्तियां शामिल हुईं.
“Lovely to meet the very funny and charming @barackobama and the beautiful @michelleobama . Thank you for a lovely evening. Cannot wait to start working on your girls education program #whitehousecorrespondentdinner”
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ का शुभारंभ किया।देशभर में आज भी चूल्हे पर खाना बनाने वाली महिलाओं को अब धुंए से मुक्ति मिलेगी। इन गरीब परिवारों को उज्जवला योजना के तहत अगले तीन साल में मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिया जाएगा।अगले 3 साल में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले 5 करोड़ परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए जाएंगे।
उज्ज्वला योजना की ये शुरुवात वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी की उस ‘गिव इट अप’ मुहिम से ही हो गई थी जिसके तहत उन्होंने लोगों से गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री ने ‘गिव इट अप’ मुहिम की शुरूआत पिछले साल 27 मार्च को की थी।इसके लिए टीवी और रेडियो पर विज्ञापन दिए गए। इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी बड़ी हस्तियां और सितारे भी इसके साथ जुड़े।गैस सब्सिडी छोड़ने वालों में खास के साथ आम लोग भी जुड़ते गए और अब एक साल में एक करोड़ 10 लाख से भी ज्यादा लोग गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी को छोड़ चुके हैं। इन्हीं 1 करोड़ से भी ज्यादा लोगों के त्याग का नतीजा है कि अब उन घरो में भी गैस पहुंचेगी जहां अब तक चूल्हे पर खाना बनता था।
सरकारी दावों के मुताबिक देशभर में इतने लोगों के सब्सिडी छोड़ने की वजह से सरकार की करीब 5 हजार करोड़ रुपए की बचत हुई है। अब उन 1 करोड़ लोगों के त्याग का फायदा देश के करीब 5 करोड़ परिवार तक पहुंचाने की तैयारी है।
अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के खास मौके पर इस योजना को प्रारंभ करते हुए पीएम मोदी बोले कि मैं गैस सब्सिडी छोड़ने वालों को शत शत नमन करता हूँ जिनके कारण आज ये संभव हो सका है।प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने श्रम कानून में ज़रूरी बदलाव किए हैं।मजदूरों के लिए 1000 रुपये न्यूनतम पेंशन की शुरुवात की गई है। उन्होंने बलिया जिले के लोगों को भी उनके प्रेमपूर्ण स्वागत के लिए नमन किया।
बलिया के कार्यक्रम के बाद मोदी वाराणसी जाएंगे जहाँ वे 1000 इ-रिक्शा वितरित करेंगे और रिक्शा चालकों के परिवार से भी मिलेंगे।शाम को पीएम अस्सी घाट पर 11 इ-बोट गंगा को समर्पित करेंगे।इसके साथ ही अस्सी घाट पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम शाम- ए-बनारस में भी शिरकत करेंगे।
इन दिनों पूरे देश में भयंकर गर्मी पड़ रही है, जिस कारण आम जनता बूँद बूँद पानी के लिये तरस रही है। सबसे ज्यादा विकराल स्थिति बुन्देलखण्ड की है जहाँ पानी की सबसे ज्यादा किल्लत है। ऐसे ही स्टेशनों का सबसे बुरा हाल है। बुन्देलखण्ड के स्टेशनों की हालत सबसे ज्यादा दयनीय है।
मानिकपुर जंक्शन बुन्देलखण्ड का सबसे ज्यादा चहल पहल वाला स्टेशन है, जहां से दिनभर में सैकड़ों की संख्या में ट्रेने आती जाती हैं और लाखों यात्री रोजाना सफर करते हैं पर रेलवे प्रशासन द्वारा पानी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है, जिसकी वजह से यात्रियों को महंगी दरों पर लोकल पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। एक तरफ रेलवे प्रशासन द्वारा प्लेटफॉर्म्स पर पानी की कोई कारगर व्यवस्था नहीं की गई है, वहीं दूसरी ओर स्टेशनों में बड़ी मात्रा में अवैध पानी बेचा जा रहा है।
स्थानीय रेल प्रशासन और विक्रेताओं की ही मिलीभगत का परिणाम है कि स्टेशन में पानी के जिन रजिस्टर्ड कंपनियों के बोतल उचित रेट पर बिकने चाहिए, वही बड़ी मात्रा में लोकल पैकिंग वाला पानी मनमानी कीमत पर धड़ल्ले से बेंचा जा रहा है। एक लीटर पानी के बोतल की कीमत 20 रूपये तक वसूली जा रही है, जबकि प्रिंट रेट 15 रूपये होता है। ज्यादा पूछताछ करने पर आम यात्रियों को जवाब मिलता है कि लेना हो लो नही तो आगे बढ़ों। वज्र गर्मी का लाभ उठाते व्यापारी आम आदमी के बारे में सोचना भी पसंद नहीं करते हैं। जिसकी वजह से भारी मात्र में यात्री त्रस्त हैं।
जानकारी के लिए आपको बताते चलें कि मौजूदा समय मानिकपुर जंक्शन में चार प्लेटफार्म हैं, जहाँ सिर्फ प्लेटफार्म नम्बर चार पर ही स्वच्छ और ठंडा पानी आता है लेकिन इस प्लेटफार्म में इक्का दुक्का ट्रेनें ही आती हैं। इस प्लेटफार्म का निर्माण अभी हाल ही में हुआ है और यहाँ एक बोर किया गया है। बाकी के एक, दो और तीन नम्बर प्लेटफार्म में पानी की टोटियां पानी तो देती हैं पर उसके साफ स्वच्छ होने की कोई गारन्टी नहीं। हमने कुछ यात्रियों से बातचीत की तो सभी ने इसके लिए रेल प्रशासन को जिम्मेदार माना। 38 वर्षीय जानकी का कहना है कि एक तो वैसे भी हमारे बुंदेलखंड में सूखा पड़ा है और पानी की भारी किल्लत है। और जब हम स्टेशन आते हैं तो यहाँ भी पानी नहीं मिलता। हम 20 रूपये का इतना मंहगा पानी नहीं खरीद सकते, इसलिए मजबूरन हमें गन्दा और गरम पानी ही पीना पड़ता है ।
वैसे ये हाल तो भारत के अधिकांश स्टेशनों के हैं पर बुन्देलखण्ड जिस प्रकार भीषण सूखे की चपेट में है वैसे में कम से यहाँ के स्टेशनों में आमजनमानस के लिए पानी की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए और अवैध रूप से मनमाने रेट पर बिक रहे पानी पर रोक लगाई जानी चाहिए ।
क्रिकेटर एस श्रीसंत सहित 283 उम्मीदवारों ने केरल विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करके चुनावी बिगुल बजा दिया है। जानकारी के मुताबिक़ अब तक राज्य में 916 उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर चुके हैं। भाजपा से श्रीसंत की उम्मीदवारी तय होने के बाद से ही केरल का राजनीतिक माहौल एकदम से बदल सा गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केरल में क्रिकेटर श्रीसंत का भाजपा से चुनाव लड़ना पार्टी के हित में है। हालाँकि कुछ लोगों का मानना है कि पिछले कुछ समय पहले श्रीसंत की छवि पर लगे आरोपों को भी विपक्षी अपना हथियार बना सकते हैं। लेकिन भाजपा का माहौल राज्य में बनता नज़र आ रहा है।
सूत्रों ने बताया कि मलप्पपुरम में सबसे अधिक 128 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए, जबकि पथनममित्ता में सबसे कम 23 उम्मीदवार हैं। नामांकन दाखिल करने का कल आखिरी दिन है। 30 अप्रैल को नामांकन पत्रों की छानबीन होगी और नामांकन वापस लेने की आखिरी तिथि दो मई है। राज्य में 16 मई को मतदान होना है। इसलिए अब हर पार्टी मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बनाने की हर संभव कोशिश में लगा है। अब देखना यह है कि केरल में श्रीसंत की उम्मीदवारी से बीजेपी को कितना लाभ मिलता है।
आज उत्तराखंड मामले में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया कि आगामी 3 मई तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू रहेगा। इस मामले की सुनवाई के दौरान ही सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि 29 अप्रैल को बहुमत सिद्ध करने के लिए शक्ति परीक्षण नहीं कराया जाएगा।
उत्तराखंड मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले पकर अगले 3 मई गक के लिए रोक लगा दी है। कोर्ट ने अपने एक टिप्पणी में कहा कि स्पीकर सदन का मास्टर होता है। उत्तराखंड के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कुछ अहम सवाल पूछे।
1. क्या राज्यपाल ने आर्टिकल ने 175 (2) के तहत जिस तरीके से फ्लोर टेस्ट की बात सूचित की, क्या इस तरीके से संदेश भेजा जा सकता है?
2. विधायकों की सदस्यता रद्द करने का स्पीकर का फैसला क्या राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार बनता है?
3. क्या राष्ट्रपति विधानसभा की कार्यवाही का संज्ञान आर्टिकल 356 के तहत ले सकता है?
4. विनियोग विधेयक का क्या स्तर रहा, वो पास हुआ या फेल, राष्ट्रपति का इस मामले में क्या रोल है?
5. फ्लोर टेस्ट में देरी होना क्या राष्ट्रपति शासन का आधार बनता है?
6. लोकतंत्र कुछ स्थायी मान्यताओं पर आधारित होता है, उसके अस्थिर होने का मानक क्या हैं? ये बताया जाए?
जानकारों का मानना है कि इन सभी प्रश्नों का जवाब संविधान पीठ को भेजा जा सकता है।
कॉंग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने ऑगस्टा वेस्टलैंड हेलीकाप्टर सौदे को लेकर उनपर लगाए जा रहे आरोपों को आधारहीन बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें और उनकी पार्टी को अनावश्यक इस घोटाले से जोड़ा जा रहा है। आज राज्यसभा में बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस डील में सोनिया गांधी का ज़िक्र जैसे ही किया, सभी कॉंग्रेसी सांसदों ने हंगामा कर दिया।
ऑगस्टा वेस्टलैंड हेलीकाप्टर डील में सोनिया गांधी में बीजेपी के आरोपों को निराधार बताया और बीजेपी से सवाल किया कि 2 साल तक इस पूरे मामले में बीजेपी खामोश क्यों रही। गांधी ने कहा कि जिन्हें मेरा नाम लेना है, लेते रहें। उन्होंने कहा कि मैं भयभीत नहीं हूँ , मेरे ऊपर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद और झूठे हैं।
सोनिया गांधी ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, जिससे पूरा मामला स्पष्ट हो सके। वेस्टलैंड मामले में आज राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में बहस हुई। राज्यसभा में कॉंग्रेसी सांसदों के विरोध की वजह से सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पडी।
इस मामले में कोंग्रेस ने स्पष्ट किया है कि 2013 में इस सौदे में अनियमितता की बात सामने आने के बाद संप्रग सरकार ने कदम उठाया और इस डील को काली सूची में डाल दिया। लेकिन राजग सरकार ने इसे काली सूची से हटाया। अब भाजपा इस पूरे मामले पर सोनिया गांधी पर निशाना साध रही है।