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Sunday, August 2, 2026
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अमिताभ व कंगना ने जीता राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार,मनोज कुमार दादासाहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित

EntertainmentDesk@navpravah.com

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में पुरस्कार वितरण किया. 78 वर्षीय दिग्गज फिल्म अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार को इस पुरस्कार समारोह में 47वां दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया. महानायक अमिताभ बच्चन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और कंगना रनौत को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के सम्मान से नवाजा गया.
दिल्ली में विज्ञान भवन में हुए कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘पीकू’ और कंगना रनौत को फिल्म ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’ में शानदार अभिनय के लिए पुरस्कार दिया गया. संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ ने बेस्ट डायरेक्टर समेत चार अवार्ड अपने नाम किए.’बाहुबली’ को बेस्ट फीचर फिल्म और ‘बजरंगी भाईजान’ को बेस्ट पॉपुलर फिल्म के तौर पर पुरस्कृत किया गया.

 

देशभक्ति से जुड़ी फिल्में बनाने वाले मनोज कुमार ने इस मौके पर राष्ट्रपति को रिटर्न गिफ्ट के रूप में साईं बाबा की प्रतिमा भेंट की.

 

गौरतलब है कि इस समारोह में बॉलीवुड की कई हस्तियां उपस्थित थीं, जिनमें अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्य राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, संजय लीला भंसाली, कंगना रनौत, शबाना आजमी, जावेद अख्तर इत्यादि प्रमुख थे.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ऑनलाइन मुद्दा:छात्र संघ पदाधिकारियों का दूसरे दिन भी धरना जारी

AnujHanumat@Navpravah.com

महज कुछ महीनों की शांति के बाद पूरब का आक्सफोर्ड एक बार फिर हितों के टकराव को लेकर जल उठा है पर इस बार आमने सामने छात्र संघ के पदाधिकारी नही बल्कि विवि प्रशासन है । इलाहाबाद विश्वविद्यालय की सभी प्रवेश परीक्षाओं में ऑनलाइन के साथ ऑफ़लाइन का विकल्प देने की मांग को लेकर सोमवार को विवि कैम्पस में छात्र संघ के सभी पदाधिकारियों ने  एकजुट होकर सर्वप्रथम सुबह कैम्पस में विवि प्रशासन के विरुद्ध जुलूस निकाला और दोपहर 12 बजे के आसपास विवि के सभी कार्यालयों को बन्द करवा दिया। इसके बाद छात्र संघ पदाधिकारी अध्यक्ष ऋचा सिंह ,उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह , महामन्त्री सिद्धार्थ सिंह गोलू के नेतृत्व में धरने पर बैठ गए। वहीँ दूसरी ओर ऑनलाइन परीक्षा का समर्थन कर रहे सैकड़ों छात्रों ने कुलपति महोदय से मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा और अनुरोध किया कि विवि प्रशासन अपने इस निर्णय से पीछे न हटें। छात्रों के इस गुट का नेतृत्व कर रहे रिसर्च स्कॉलर अतुल नारायण सिंह ने कहा यह विवि के आगामी सत्र को लेट करने की साजिश मात्र है और इनके पास इसके आलावा कोई मुद्दा नही है और हमने आज ज्ञापन में भी कुलपति महोदय से मांग की कि विवि अपने इस निर्णय को वापस न ले, सत्र नियमित हो और कैम्पस में पठन पाठन का माहौल बन सके और विवि को अराजक तत्वों से सुरक्षित किया जाए।

 

छात्र संघ अध्यक्षा ऋचा सिंह का कहना है कि इस निर्णय से पूरी तरह ग्रामीण अंचल से आने वाले छात्र प्रभावित होंगे जो गाँवों से बड़ी आशा के साथ इस विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए आते हैं। हम किसी भी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे और विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिस प्रकार हमारे ऊपर लाठीचार्ज किया वो दुखद और शर्मनाक है। हम तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे जब तक विवि प्रशासन हमारी मांगे मान नही लेगा।

 

इसी मुद्दे पर ऑनलाइन पद्धति का विरोध कर रहे एबीवीपी के छात्र संघ नेता सूरज दुबे ने कहा की ऑनलाइन के साथ ऑफ़लाइन की व्यवस्था भी होनी चाहिए और कोई भी नई व्यवस्था जब लागू की जाती है उसके लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए, उसे छात्रों के ऊपर अचानक लादा नहीं जाना चाहिए। हमारे वि. में ग्रामीण क्षेत्र लगभग 70% छात्र पढ़ने के लिए आते हैं और ऐसे में इस व्यवस्था से उन्हीं का सबसे बड़ा घाटा होगा और हम किसी भी छात्र के साथ गलत नहीं होने देंगे।

विवि प्रशासन का कहना है की ये विरोध महज कुछ अराजक तत्वों द्वारा किया जा रहा है। इसमें कोई भी छात्र शामिल नहीं है और हमारे एडमिशन विभाग को भी अभी तक इस मुद्दे पर किसी छात्र द्वारा किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं प्राप्त हुई है और जिस मांग को लेकर छात्र संघ पदाधिकारी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं कि ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों प्रकार की व्यवस्था की जाए, वो अब नहीं की जा सकती क्योंकि ये मुमकिन नहीं है और फिर सत्र भी बहुत लेट हो जायेगा जिससे छात्रों का बहुत नुकसान होगा। इस समय कैम्पस में परीक्षाओं का समय चल रहा है और ऐसी दशा में किसी भी प्रकार की अराजकता स्वीकार नहीं की जायेगी और अगर किसी ने कैम्पस के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

आज आंदोलन के दूसरे दिन  छात्र संघ के समस्त पदाधिकारियों द्वारा धरना प्रदर्शन जारी है। कुछ छात्र नेताओं ने कहा है कि अगर शाम तक विवि प्रशासन हमारी मांगों पर कोई ठोस विचार नहीं करता है तो हम आमरण अनशन करेंगे। अभी समाचार लिखे जाने तक छात्रों का धरना प्रदर्शन जारी है।

हर डिफाल्टर को चोर नहीं कह सकते-नितिन गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ऋण न चुकाने वाले (डिफाउल्टर) हर किसी पर चोर का तमगा नहीं मढ़ा जाना चाहिए।उन्होंने यह बयान विजय माल्या के डिफाल्ट पर हो रही न्यायिक प्रक्रिया के विषय में दिया है। इस बयान के कई अलग अलग मायने निकाले जा रहे हैं।

 

सड़क परिवहन, राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने एक निजी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा कि विजय माल्या के डिफाल्ट पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है। जो भी सही होगा, वह कदम उठाया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि पहले माल्या की कंपनी बैंकों को नियमित रूप से ब्याज देती थी। उस समय लोग कंपनी को अच्छी रेटिंग दे रहे थे। सलाहकारों को अच्छा समझा जा रहा था। उनके प्रबंधकों को अच्छा समझा जा रहा था। जब एक कंपनी समस्याओं में घिर जाती है, तो सभी को चोर का तमगा दिया जाने लगता है। उन्होंने कहा कि सरकार कानून के मुताबिक कदम उठा रही है। गडकरी ने कहा कि जब वैश्विक स्तर पर और खासकर चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती है, तो भारत में अधिकतर उद्योगों का प्रदर्शन अच्छा नहीं है। सरकार के हस्तक्षेप से हालांकि अवसंरचना, इस्पात और सीमेंट उद्योग में मदद मिली है।

 

उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि हर चीज अच्छी स्थिति में नहीं है, परन्तु हम स्थिति को  सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। हम हर डिफाल्टर को चोर नहीं कह सकते। हमें यह देखना होगा कि इसके पीछे नीयत सही थी या बुरी।“ उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर एक सकारात्मक, विकासपरक रुख अपनाना ज़रूरी है। जिनकी नीयत बुरी नहीं है, उनकी मदद की जानी चाहिए और बुरी नीयत से ऋण वापस नहीं करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।

भारत में खुलेंगी तीन नई संस्कृत यूनिवर्सिटीज़!

मानव संसाधन एवं विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने लोकसभा में घोषणा की कि सरकार देश में तीन नई संस्कृत यूनिवर्सिटीज़ स्थापित करेगी।

लोकसभा में जमा की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार संस्कृत की तीन डीम्ड यूनिवर्सिटी को फंड करेगी। इनमें से दो दिल्ली में होंगी और एक तिरुपति में। दिल्ली में दो यूनिवर्सिटीज़ राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ नाम से होंगी, जबकि तिरुपति में राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ नाम से होगी।

मंत्रालय ने बताया कि 2015 में उसने कमिटी गठित करके एक रोडमैप तैयार किया है ताकि संस्कृत का विकास किया जा सके। 2014 में सेंकड संस्कृत कमिशन बैठाई गई थी जो कि अपने कार्यकाल के भीतर रिपोर्ट नहीं दे पाई थी।

गौरतलब है कि मंत्रालय के संस्कृत को लोकप्रिय बनाने के फैसलों की पहले ही से भारी आलोचना होती रही है। अप्रैल में लोकसभा को कहा गया था संस्कृत साहित्य में मौजूद विज्ञान एवं तकनीक के अध्ययन के लिए संस्कृत पढ़ाई जाए। इससे पहले यानी पिछले साल जर्मन को थर्ड लैंग्वेज के तौर पर हटा कर संस्कृत को लाने का फैसला भी आलोचना के केंद्र में रहा था। यह फैसला देश के करीब 500 केंद्रीय विद्यालयों पर लागू करने का फैसला लिया गया था। हालांकि स्मृति ईरानी संस्कृत को कंपल्सरी करने की मांग को खारिज कर चुकी हैं।

प्यार के अंधे होने की एक और मिसाल,सास हुई दामाद के साथ फरार

AnandRoopDwivedi@navpravah.com

नैनीताल के हल्द्वानी में एक सास का दिल अपने दामाद के भाई पर फ़िदा हो गया। प्यार ऐसा परवान चढ़ा कि सास अपनेे चचेरे दामाद के भाई के साथ फरार हो गई।

दरअसल महिला नेपाली मूल की है और बनभूलपुरा थाना क्षेत्र में रहती है। दामाद के भाई से सास की आँखें चार हुईं, मान मर्यादा को ताक पर रखते हुए दोनों घर से भाग निकले। पुलिस के दबाव पड़ने पर दोनों वापस आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार घर वापसी के बाद ससुर और दामाद के भाई में मारपीट भी हुई। पुलिस ने इन सभी को फ़िलहाल हिरासत में ले लिया है।

महिला की जिद है कि वो अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती और अपने दामाद के भाई के साथ ही रहना चाहती है। पति इसके लिए नहीं तैयार हुआ। झगड़े के बाद पुलिस ने इनके विरुद्ध शांति भंग का मामला दर्ज कर मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया है। मजिस्ट्रेट के आदेशानुसार महिला को नारी निकेतन भेज दिया गया और ससुर दामाद और प्रेमी भाई को जेल में रखा गया है।

भारत किड्ज़ फैशन वीक में नन्हें उस्तादों का जलवा

Entertainmentdesk@navpravah.com

नवप्रवाह मीडिया नेटवर्क्स के बैनर तले शनिवार को आयोजित भारत किड्ज़ फैशन वीक में छत्तीसगढ़ के नन्हें उस्तादों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। फैशन वीक में 5 से 10 वर्ष के वर्ग की प्रतियोगिता के विजेता बने मनमोहन निर्मलकर और अनुष्का सिंह और 10 से 15 वर्ष की प्रतियोगिता में जीत हासिल की भानुप्रिया और अजय दुबे ने।

शनिवार को दुर्ग के होटल ‘सूर्या पैलेस’ में आयोजित भारत किड्ज़ फैशन वीक में छत्तीसगढ़ के होनहार बच्चों ने रैम्प पर जलवा बिखेरा। फैशन शो में 5 से 15 साल तक के 30 बच्चों ने रैम्प पर वॉक किया। मुंबई से आए निर्णायक छत्तीसगढ़ के नन्हें उस्तादों का टैलेंट देखकर दंग रह गए। नवप्रवाह मीडिया नेटवर्क्स के मैनेजिंग एडिटर प्रज्ञात द्विवेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की युवा प्रतिभाओं में बहुत दमखम है। इन्हें प्लेटफॉर्म मिले तो कमाल कर देंगे।

दुर्ग के उप जिलाधिकारी ए.के. वाजपेयी ने कहा कि वाक़ई में बच्चों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। इनके अभिभावकों को इनकी कला को गम्भीरता से लेना चाहिए, जिससे ये अपना और अपने क्षेत्र का नाम रोशन कर सकें। दुर्ग की ज़िला खेल अधिकारी कल्पना स्वामी ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया। आयोजक यशु यादव ने कहा कि यह आयोजन दुर्ग के साथियों दीपक दुबे, हेमंत, योगेश पटेल, संदीप पाटिल, ओम यादव, ऋषि सिंह, लुषिका साहू, सुशील पराटे और डिज़ाइनर देबाशीष के बगैर संभव ही नहीं था।

छत्तीसगढ़ में लाखों रुपयों की धोखाधड़ी के बाद कारोबारी फरार!

Narayansingh@navpravah.com

छत्तीसगढ़ की एक कंपनी से धोखाधड़ी के आरोप के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने शहर के प्रतिष्ठित कारोबारी के आवास और व्यावसायिक प्रतिष्ठान में छापे मारे मगर छापे की भनक से पहले ही कारोबारी फरार हो गया।

छत्तीसगढ़ की कंपनी आई एन एनर्जी का हिमाचल के चंबा में बिजली उत्पादन का प्लांट है। आरोप है कि कारोबारी अश्वनी की ‘अश्वनी एंड सन्स’ ने उस कंपनी से डील की थी कि वे उनकी उत्पादित बिजली हरियाणा सरकार को बेचेंगे।
पुलिस के एसआईआरएस नेता के मुताबिक कारोबारी अश्वनी को कंपनी ने समझौते के तहत पचास लाख रुपये भी दिए। साथ ही यह समाझौता भी हुआ कि यदि तीन माह के भीतर यह डील नहीं होती तो पैसे वापस कर दिए जाएंगे। इसकी एवज में अश्वनी ने कंपनी को पचास लाख का चेक दिया।

आरोप है कि तीन माह बीतने पर भी जब बिजली बेचने का कांट्रेक्ट हरियाणा सरकार से नहीं हुआ तो कंपनी ने अपनी राशि वापस लेने के लिए अश्वनी की ओर से दिया चेक बैंक में जमा कराया मगर यह चेक बाउंस हो गया।

इस पर कंपनी ने छत्तीसगढ़ के रामपुर जिले के उरला थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया। आज उसकी गिरफ्तारी के वारंट के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस ने कारोबारी अश्वनी के रामपुर स्थित आवास व सिविल लाइन्स स्थित प्रतिष्ठान में छापे मारे। आरोपी करोबारी गीतांजलि ज्वेलर्स का मालिक भी है।

जनसंघ के संस्थापक बलराज माधोक का निधन

AnujHanumatDwivedi@navpravah.com

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वयोवृद्ध कार्यकर्ता एवं भारतीय जनता संघ (बीजेएस) के पूर्व अध्यक्ष बलराज मधोक का लंबी बीमारी के बाद आज दिल्ली में निधन हो गया। आरएसएस के एक अधिकारी ने बताया कि मधोक (96) ने सोमवार सुबह करीब नौ बजे मध्य दिल्ली के न्यू राजेंद्र नगर इलाके में स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वह पिछले कई दिनों से बीमार थे।

प्रोफेसर बलराज मधोक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक, जम्मू-कश्मीर प्रजा परिषद के संस्थापक और मन्त्री, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संस्थापक, भारतीय जन संघ के एक संस्थापक और अध्यक्ष हैं। वे 1960 के दशक के वरिष्ठ राजनेता हैं। वे संसद (लोकसभा) के दो बार सदस्य रह चुके हैं। वे गणमान्य शिक्षाविद, विचारक, इतिहासवेत्ता, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक भी थे।

उनका जीवन समग्र दृष्टि से भारतमाता के सच्चे सपूत की भूमिका पर खरा उतरता है। 1947 में कश्मीर को बचाने, भारतीय जनसंघ की 1951 में स्थापना और ऊँचाईयों तक ले जाने में उनका अविस्मरणीय योगदान रहा है। उन्होंने राष्ट्रहित सर्वोपरि के मंत्र के साथ स्पष्ट एवं दूरदर्शी सांसद के तौर पर देश की साहसपूर्वक सेवा की तथा राजनीति में ‘‘जीते जी शहीद’’ होना स्वीकार कर लिया परन्तु सिद्धान्तों से कभी समझौता नहीं करने की अडिगता बनाए रखी।

कांग्रेस द्वारा घूसकांड से ध्यान भटकाने को जन्मतिथि का बवाल!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब कांग्रेस ने पीएम की जन्म तिथि में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया है। पार्टी ने गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा मोदी की स्नात्कोत्तर डिग्री की जानकारी साझा करने के समय पर भी सवाल उठाया। विश्वविद्यालय ने पहले जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि एम एन कॉलेज के छात्र पंजीयक, जिसमें मोदी ने प्री-साइंस (12वीं) में दाखिला लिया था, में सर नरेन्द्र मोदी की जन्म तिथि 29 अगस्त, 1949 है। उनके चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी जन्म तिथि नहीं बतायी है बल्कि अपनी उम्र लिखा है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध उनकी औपचारिक जन्म तिथि 17 सितंबर, 1950 है। उन्होंने स्कूल रजिस्टर की प्रति दिखायी, जिसमें प्रधानमंत्री का नाम नरेन्द्र कुमार दामोदरदास मोदी, और उनकी जन्म तिथि लिखी है।

गोहिल ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि अलग-अलग जन्मतिथि के पीछे कारण क्या है। उनके पासपोर्ट या पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि क्या है और अलग-अलग जन्मतिथि के पीछे कारण क्या है।गोहिल ने मोदी के ५६ इंच सीने वाली बात पर व्यंग करते हुए कहा कि जनता यह नहीं जानना चाहती कि पीएम का सीना ५६ इंच का है या नहीं बल्कि जनता जानना चाहती है कि पीएम की सही जन्मतिथि क्या है,उनकी उच्च शिक्षा कहा से हुई है।उन्होंने कहा कि मोदी अपने साथ पढ़ने वाले किन्हीं १० छात्रों के नाम बताएं।

गौरतलब है कि पीएम की डिग्री को लेकर हुए विवाद के बाद रविवार को गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति एम एन पटेल ने बताया, “नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने १९८३ में राजनीती विज्ञानं में एम ए की परीक्षा पास की और बाहरी छात्र के तौर पर ८०० में से ४९९ अंक प्राप्त किए जो ६२.३ फ़ीसदी हैl” हालांकि पटेल ने मार्कशीट की कॉपी शेयर करने से मना कर दिया हैl उन्होंने कहा , “ मैं मार्कशीट की कॉपी मीडियाकर्मी या थर्ड पार्टी को नहीं दे सकताl वह केवल उम्मीदवार को ही दी जा सकती हैl यदि हमें पीएमओ या फिर सीआईसी से निर्देश मिलते है,तभी हम मीडिया को वह कॉपी सौंप सकते हैंl”

हरीश रावत ने स्टिंग सीडी में स्वीकारी मौजूदगी,पर कहा सबूत हो तो फंसी पर लटका दो

Bureau@navpravah.com

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार को बागी विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त में खुद की संलिप्तता दिखाने वाली स्टिंग सीडी में अपनी मौजूदगी को स्वीकार किया है जिसे वे अब तक ‘फर्जी और गलत’ बता रहे थे लेकिन यह भी कहा है कि यह सब भाजपा के आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा था और इसके लिए वे जेल जाने को तैयार हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने आरोप लगाया कि एक अपराधिक षड्यंत्र के तहत सीडी प्रकरण व सीबीआई जांच को लेकर राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने दिलों दिमाग में मुझ पर जो भी जुल्म करने की सोच रहे हैं, मैं उसे भी सहने को तैयार हूं।“

रविवार को रावत ने स्टिंग सीडी में अपनी मौजूदगी को स्वीकार करते हुए कहा कि पत्रकार से मिलना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा, “क्या किसी पत्रकार से मिलना कोई अपराध है? क्या तब तक तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित नहीं हुए विधायकों में से किसी ने भी मुझसे बातचीत की, इससे क्या फर्क पडता है? राजनीति में क्या किसी चैनल को हम बंद कर सकते हैं?”

पूर्व मुख्यमंत्री ने ये दावा किया कि सीडी में से ऐसा कुछ भी प्रमाणित हो जाए कि उन्होंने असंतुष्ट विधायकों का समर्थन लेने के बदले में उन्हें नकद या किसी और प्रकार की पेशकश की तो वह जनता के सामने फांसी पर लटकने को तैयार हैं।

रावत के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उनके और स्टिंग सीडी बनाने वाले उस पत्रकार के बीच मुलाकात हुई थी। रावत अब तक सीडी की सत्यता को ही चुनौती देते रहे थे और उन्होंने उसे ‘फर्जी और गलत’ बताया था।

गौरतलब है कि एक निजी चैनल के मुख्य संपादक द्वारा बनायी गयी और रावत के खिलाफ बागी हो गये नौ कांग्रेस विधायकों द्वारा प्रसारित की गयी स्टिंग सीडी में कथित रूप से रावत को बागी विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिये पत्रकार से सौदेबाजी करते दिखाया गया था। गत 18 मार्च को नौ कांग्रेस विधायकों के बागी हो जाने और राज्य विधानसभा में भाजपा के साथ खड़े हो जाने के बाद प्रदेश में सियासी संकट पैदा हो गया था जिसके परिणामस्वरूप  27 मार्च को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।

अपनी सफाई में रावत ने कहा, “मेरे लिए कोई क्यों 15 करोड़ रुपये खर्च करेगा? वह पत्रकार मेरा मन बहलाने के लिए कुछ अर्थहीन बातें कर रहा था और मैंने उसका मन बहलाने के लिए ऐसे ही कुछ कह दिया। इससे क्या फर्क पड़ता है? हम रोजाना इस प्रकार की बातें कहते रहते हैं। क्या इसका मतलब है कि उनका प्रयोग हमारे खिलाफ किया जाए?”

रावत के प्रधानमंत्री और शाह पर लगाये गये आरोपों की बाबत प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि सत्ता से बेदखल होने से रावत का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और इसी के कारण वे बौखलाहट में ऊट पटांग बातें कर रहे हैं।