तमाम फेर बदल और उठा पटक के बाद करीब ढाई साल बाद, मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपनी फाइनल कैबिनेट टीम मिल ही गई।
राजभवन में आयोजित शपथग्रहण समारोह के दौरान मंत्रिमंडल में 9 विधायको को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।
4 सदस्यों को कैबिनेट मंत्री, जबकि 5 सदस्यों को राज्यमंत्री पद की सदस्यता दिलाई गई। इसी दौरान मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य बाबूलाल गौर सरताज ने त्यागपत्र दिया। दोनों नेता शिवराज सरकार के इस निर्णय से बहुत दुखी हैं और उन्हें पद से इस्तीफा दिलवाने की वजह उन्हें बेहद छोटी लगती है।
शिवराज सिंह से नाराज़ बाबूलाल गौर ने कहा कि मैं अभी फिट हूं और रोज़ 12 घंटे काम करता हूँ। अपने एक क्षेत्र से लगातार 10 बार जीतता आ रहा हूं। अफ़सोस जताते हुए गौर ने कहा कि मुझे सिर्फ मेरी उम्र की वजह से हटना पड़ा।
बाबूलाल गौर का साथ देते हुए सरताज सिंह ने भी अपने दिल की बात कही। सरताज सिंह का कहना है कि शिवराज सरकार तीन बार उम्र के हिसाब से नहीं परफॉर्मेंस के हिसाब से बनी है। चुनाव उम्र नहीं परफॉर्मेंस के बल पर जीता जाता है। मुझे लगता है मुख्यमंत्री बदलाव के पक्ष में नहीं थे, अदल बदल तो केंद्र के हाथ में होता है।
बाबूलाल 87 और सरताज 77 वर्ष के हो चुके हैं। सरकार द्वारा तय किए हुए मंत्रियों की लिस्ट में ओमप्रकाश धुर्वे, रुस्तम सिंह, जयभान सिंह, अर्चना चिटणीस का नाम है और राज्य मंत्रियो में संजय पाठक, ललिता यादव, विश्वास सारंग, हर्ष सिंह और सूर्य प्रकाश मुख्य नेता है। मुख्यमंत्री को मिला कर मंत्रिमण्डल में कुल 30 मंत्री होंगे।
गुरूवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की। जिसमें अपने सभी सहयोगियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ आम आदमी को मिल रहा है या नहीं! उन्होंने सभी मंत्रियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि बजट की कमी नहीं है, योजनाओं में खर्च को लेकर किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए।
सभी मंत्रियों के साथ हुए इस बैठक में बजटीय आवंटन के खर्च और पिछले दो सालों में योजनाओं को लागू करने से जुड़े विषय शामिल रहे। मोदी ने कहा कि अभी तक आवंटित धनराशि का 25 प्रतिशत खर्च हो जाना चाहिए, लेकिन कई मंत्रालयों ने अभी तक उस बजट का उपयोग नहीं किया। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले तीन महीने में सभी मंत्रालय अपने बजट आवंटन का कम से कम 50 प्रतिशत खर्च करने को लेकर नज़र बनाए रखें।
मंत्रिपरिषद की यह बैठक लगभग 4 घंटे तक चली। जिसमें प्रधानमंत्री से सभी से वर्तमान में चल रही योजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शर्त पर योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। जिससे फण्ड और योजनाएं सार्थक हों। बैठक में शीर्ष अधिकारियों ने लगभग 100 से अधिक स्लाइड के माध्यम से प्रस्तुति दी।
पाकिस्तान की हॉकी टीम के रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई न कर पाने के कारण पाकिस्तानी दल में खिलाड़ियों से अधिक अधिकारी शामिल होंगे। पाकिस्तान की हॉकी टीम रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रही थी और ऐसे में पाकिस्तानी दल में मात्र 7 खिलाड़ी और 11 अधिकारी शामिल होंगे।
पाकिस्तान ओलंपिक संघ के अध्यक्ष आरिफ हसन ने खेलों की दुर्दशा के लिये पाकिस्तान खेल बोर्ड को जिम्मेदार ठहराया। हसन विशेषकर हाकी टीम के क्वालीफाई नहीं कर पाने से निराश हैं। उन्होंने कहा, “हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है और ओलंपिक में इस खेल में हमारी पदक जीतने की हमेशा उम्मीद रहती है लेकिन इस बार हम ऐसी उम्मीद भी नहीं कर सकते हैं।”
7 खिलाडियों में तैराक लियाना स्वान और हैरिस बैंडी भी शामिल हैं जो विदेशों में बसे हुए हैं। जुडोका शाह हुसैन हैं जो तोक्यो में रहते थे। इनके अलावा निशानेबाज गुलाम मुस्तफा और मिनाल सोहेल तथा दो धावक हैं। सभी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को वाइल्ड कार्ड के जरिए रियो ओलंपिक में खेलने का मौका मिला है क्योंकि देश का कोई भी खिलाड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में क्वालीफाई नहीं कर पाया था।
यहां तक कोई भी पाकिस्तानी मुक्केबाज ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाया जबकि हॉकी को छोड़कर पाकिस्तान ने ओलंपिक में जो दो अन्य पदक जीते हैं उनमें से एक पदक मुक्केबाजी में मिला है। हुसैन शाह ने 1988 में कांस्य पदक हासिल किया था। जुडोका शाह हुसैन उन्हीं का बेटा है।
बॉलीवुड से हॉलीवुड तक अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले अभिनेता आज एक बयान के चलते सुर्ख़ियों में आ गए। इरफ़ान की आगामी फ़िल्म मदारी का प्रमोशन चल रहा है। प्रमोशन के दौरान ईद-उल-जुहा के लिए दी जाने वालो कुर्बानी को लेकर की गई टिप्पणी उन्हें भारी पड़ रही है।
कुर्बानी पर इरफ़ान ने जो बयान दिया, वो सोशल मीडिया पर भी छाया हुआ है। इरफ़ान ने कहा कि किसी प्यारी चीज़ को कुर्बान करना ही कुर्बानी का असली मतलब होता है न कि बाजार से दो बकरे ला कर उन्हें क़ुर्बान करना।
उन्होंने आगे ये भी कहा कि उस बकरे की क़ुरबानी देने से क्या मतलब, जिससे आपका कुछ लेना देना ही न हो। उन्होंने कहा कि इससे कौन सी दुआ क़ुबूल होगी। हर इंसान अपने दिल से पूछे कि किसी की जान लेने से उसे कौन सा पुन्य मिल जाएगा। इरफ़ान के इस प्रकार के स्टेटमेंट देने से लोग भड़क गए हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे पब्लिसिटी स्टंट भी बता रहे हैं।
इलाहाबाद। पूरब के आक्सफोर्ड के नाम से विख्यात इलाहाबाद विश्वविद्यालय एक बार फिर अपने नये विवाद के कारण जल उठा है। अभी कुछ ही महीनों पहले ऑनलाइन और ऑफ़लाइन के मुद्दे पर महीने भर विवि कैम्पस का माहौल गर्म था। उस विवाद से विवि कैम्पस ने जैसे तैसे राहत की साँस ली थी कि एक नए विवाद ने एक बार फ़िर छात्र हितों को ताक पर रख दिया है।
इस बार विवाद का कारण, हाल ही में विवि में हुई प्रवेश परीक्षा है, जिसमें धांधली और पेपर आउट का मामला सामने आया था। इसके बाद तमाम छात्र संगठनों सहित छात्र संघ पदाधिकारियों ने इसका विरोध करते हुए यह मांग की थी की पीजीएटी और क्रेट का एक्जाम रद्द करके प्रवेश परीक्षा पुनः कराई जाय। इसी मांग को लेकर आज तमाम छात्र संगठनों सहित सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने कुलपति कार्यालय का घेराव किया और स्पष्ट तरीके से अपनी मांग रखते हुए कहा कि पीजीएटी और क्रेट की प्रवेश परीक्षा पुनः कराइ जाय।
इसी मौके पर विरोध कर रहे छात्रो की तरफ से छात्र सुनील पाण्डेय ने अपना सिर मुड़वाकर अपना विरोध दर्ज कराया और कहा की विवि प्रशासन की ये तानाशाही नही चलेगी। इस पूरे घेराव के दौरान सबसे खास बात यह रही कि कैम्पस में एक दूसरा पक्ष भी नारेबाजी करता हुआ कुलपति कार्यालय पहुंचा जिसकी कहना थी कि इस पूरे प्रकरण में विवि प्रशासन की कोई गलती नही है और ये महज कुछ शरारती तत्वों द्वारा विवि की गरिमा को ठेस पहुँचाने के दृष्टिकोण से किया जा रहा कुकृत्य है। लेकिन हम ऐसा कुछ नही होने देंगे और हम कुलपति महोदय और विवि प्रशासन के साथ हैं । दोनों पक्षों ने एक दुसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जमकर विरोध किया। दोनों पक्षों को सम्भालने में पुलिस प्रशासन को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।
इस पूरे घेराव के दौरान कुछ अराजक छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिनके पास विवि का आईडी कार्ड नहीं था। इसी बीच एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य प्रो. माताम्बर तिवारी विरोध कर रहे छात्रों के पास पहुंचे और उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन ने विशप जानसन के केंद्र में हुई क्रेट की प्रवेश परीक्षा को रद्द कर दिया है और आगामी 4 तारीख को कुलपति महोदय पीजीएटी के उन आम छात्रो से मिलेंगे, जिन्होंने प्रवेश परीक्षा दी थी न कि छात्र संघ पदाधिकारियों से।
इधर पीजीएटी और क्रेट प्रवेश परीक्षा में हुई कथित धांधली और पेपर आउट के मामले में विवि प्रशासन को आड़े हाथो लेते हुए, NSUI के राष्ट्रीय सचिव विवेकानंद पाठक ने कहा कि विवि की गरिमा खतरे में है और हमारी यह मांग कि ये उक्त प्रवेश परीक्षाएं रद्द हो और उसे पुनः सुचारू रूप से कराया जाये। इस पूरे प्रकरण के लिए विवि के कुछ चुनिंदा अधिकारी जिम्मेदार हैं, जिन्हें विवि से निकाला जाये। छात्र संघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का कहना है कि विवि प्रशासन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है और हम ऐसा नही होने देंगे। हमारी मांग है कि क्रेट और पीजीएटी की प्रवेश परीक्षा पुनः कराई जाए नहीं तो हम सब बड़ा आंदोलन करेंगे।
विवि कैम्पस में ही छात्र संगठन आइसा का इसी मुद्दे पर आज छठवें दिन भी क्रमिक अनशन जारी रहा। अब देखना होगा कि आने वालें दिनों में विवि का माहौल क्या होगा। इस पूरे विवाद के बीच ये प्रश्न भी कई छात्रों के मन में कौंध रहा है कि क्या समय रहते पढाई का ये सेशन चालू हो पायेगा ?
अफगानिस्तान में काबुल के बाहरी इलाके में आज पुलिस के एक काफिले पर आतंकियों ने हमला किया जिसमें 40 लोगों की मौत हो गई है। इस हमले में कई जवानों के घायल होने की खबर है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। हमले की ज़िम्मेदारी तालिबान ने ली है।
अधिकारियों के मुताबिक ये एक आत्मघाती हमला था। हमले के बाद चारों अफरा-तफरी मच गई। सूत्रों के अनुसार पुलिस के जवानों को लेकर पांच बसों का काफिला वरदाक प्रांत से काबुल की ओर जा रहा था तभी अचानक बस के निकट एक आत्मघाती हमलावर पहुंचा, जिसने खुद को उड़ा लिया। मृतकों में पुलिस अकादमी के कई ट्रेनर्स भी शामिल हैं, जिनकी फिलहाल शिनाख्त नहीं हो पाई है।
तालिबान के प्रवक्ता ने हमले की ज़िम्मेदरी ली है। प्रवक्ता जैबुआलाद्दीन मुजाहिद ने विस्तार से बताया कि पहला हमला उस वक्त किया गया, जब एक बस पुलिस कैडेट को लेकर जा रही था। दूसरा हमला बचाव व राहत कर्मियों के वाहन पर हुआ। विस्फोटक से भरी कार ने बचाव कर्मियों की कार पर धक्का मार दिया।
उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते भी तालिबान ने एक पैसेंजर बस पर हमला किया था। इसमें 14 लोग मारे गए थे। अप्रैल में भी काबुल में सिक्युरिटी सर्विस फेसेलिटी पर तालिबान ने हमला किया था, जिसमें करीब 64 लोगों मारे गए थे।
कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के उद्योगपति दामाद रॉबर्ट वाड्रा ने, जमीन घोटाला मामलों में अब तक लगाए गए तमाम आरोपों पर अपना दुःख सोशल मीडिया पर व्यक्त किया है। वाड्रा ने फेसबुक वॉल पर अपना दर्द बयान करते हुए लिखा है कि हमेशा उनका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए होता रहा है और भविष्य में होता रहेगा। खुद की छवि को बेहद पाक-साफ बताते हुए गुरुवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे उन्होंने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा कि करीब एक दशक से मुझ पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, जिसकी बुनियाद बेहद कमजोर है।
उन्होंने कहा, “जो सरकारें मेरे खिलाफ यह आरोप लगा रहीं हैं उनके पास सबूत का आभाव है या यूँ कहें कि कुछ है ही नहीं तो सबूत कहां से होगा। अपने झूठ को सच साबित करने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है।” वाड्रा ने आगे लिखा है कि मैं ऐसे समय में सच्चाई के साथ सिर ऊंचा करके चलूंगा। यही मेरे लिए बनाए गए गलत धारणाओं पर मुझे जीत दिलाएगा।
गौरतलब है कि जमीन घोटाले के आरोपों की वजह से अक्सर कांग्रेस विरोधियों के निशाने पर रहने वाले वाड्रा की कंपनी को हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में नोटिस जारी किया है। इतना ही नहीं निदेशालय ने वाड्रा की कंपनी को कुछ दस्तावेज सौंपने के भी आदेश दिए हैं। वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी और डीएलएफ के बीच लेन-देन की जांच ईडी पिछले काफी समय से कर रही है।
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग ने बुधवार को रेप संबंधी टिप्पणी पर उनके जवाब को अस्वीकार कर दिया और उन्हें 7 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। रेप वाले बयान पर सलमान खान ने महिला अयोग को जवाब भेजा था, जिसमें सलमान अपने बेतुके बयान पर झुकते नजर नहीं आए।
बता दें कि अपने वकील के माध्यम से 28 जून को भेजे पत्र में सलमान ने कहा था कि मामला राष्ट्रीय महिला आयोग के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए दोहराव से बचने के लिए इसे एमएसडब्ल्यूसी के तहत जारी नहीं रखा जाना चाहिए। एमएसडब्ल्यूसी की अध्यक्षा विजया राहतकर ने कहा, ‘हमारे पास एनसीडब्ल्यू के समान ही समवर्ती शक्तियां हैं। इस मामले की सुनवाई राज्य स्तर पर भी की जा सकती है। इसलिए उन्होंने जो कहा है वो मान्य नहीं है।’
अध्यक्षा ने कहा कि अभिनेता को 7 जुलाई को अपने वकीलों सहित एमएसडब्ल्यूसी के कार्यालय में आने का आदेश दिया गया है। सलमान को रेप पीड़ित संबंधी उनके बयान के लिए नोटिस जारी किया गया था। पिछले सप्ताह मीडिया से बातचीत के दौरान सलमान खान ने कहा था कि फिल्म ‘सुल्तान’ की कठिन शूटिंग के बाद उन्हें ‘रेप पीड़ित महिला जैसा महसूस हुआ था।’
बालेश्वर (ओडिशा) : भारत ने इज़राइल के साथ संयुक्त रुप से विकसित की गई सतह से हवा में मार करने वाली एक नई मिसाइल का आज सफलतापूर्वक प्रायोगिक परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के तट के पास स्थित रक्षा ठिकाने से किया गया है। डीआरडीओ के एक अधिकारी ने कहा कि मध्यम दूरी की मिसाइल (एमआर-एसएएम) भारत और इस्राइल के साझा उपक्रम का एक उत्पाद है।
इस मिसाइल को चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सुबह लगभग आठ बजकर 15 मिनट पर एक मोबाइल लॉन्चर की मदद से दागा गया। अधिकारी ने बताया, “यह प्रायोगिक परीक्षण सफल रहा और इसने सभी लक्ष्य पूरे कर लिए।”
मिसाइल द्वारा बंगाल की खाड़ी के ऊपर गतिशील हवाई लक्ष्य को अवरुद्ध किए जाने में मानवरहित वायुयान (यूएवी) ‘बेंशी’ की एक अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रणाली में मिसाइल के अलावा बहु संचालनात्मक निरीक्षण और खतरे की सूचना देने वाला राडार लगा है ताकि मिसाइल और उसके मार्ग की पहचान की जा सके और उसको निर्देशित किया जा सके।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक ने कहा,”एमएफ-स्टार के साथ यह मिसाइल प्रयोगकर्ताओं को हवाई खतरों को अप्रभावी करने की क्षमता से लैस करेगी।”
सतह से हवा में लंबी और मध्यम दूरी तक की मारक क्षमता रखने वाली ऐसी 100 मिसाइलों का प्रति वर्ष उत्पादन करने के लिए मेसर्स भारत डायनेमिक्स लिमिटेड में एक नई उत्पादन इकाई की स्थापना की गई है। इस मिसाइल का परीक्षण कल ही होना था लेकिन अंतिम समय पर इसे आज के लिए टाल दिया गया था।
अधिकारियों ने कहा कि इससे पहले भी भारतीय नौसेना ने सतह से हवा में लंबी दूरी तक की मारक क्षमता रखने वाली मिसाइल का सफल परीक्षण किया था। यह परीक्षण 30 दिसंबर 2015 को पश्चिमी समुद्री तट पर आईएनएस कोलकाता से किया गया था। उन्होंने कहा कि सतह से हवा में मारने वाली इस तरह की मध्यम दूरी की मिसाइलों की मारक क्षमता 50 से 70 किलोमीटर की होती है।
उत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारियों को भी सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा का लाभ मिलेगा। प्रदेश के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक़, ” राज्य सरकार भी केंद्र सरकार की तरह अपने कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ देने के लिए तैयार है। वहीँ कुछ लोग इसे चुनावी रंग से भी रंगते नज़र आ रहे है। सातवें ब्वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद प्रदेश के लगभग 22 लाख कर्मचारी, शिक्षक और पेंशनधारकों को लाभ होगा।
अब उत्तर प्रदेश सरकार भी राज्य सरकार की राह पर चलती नज़र आ रही है। अब उत्तर प्रदेश में भी राज्य सरकार के कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के आधार पर वेतन और पेंशन मिलेगी। सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार इस मसले में अपना निर्णय ले चुकी है, बस उसे केंद्र सरकार की अधिसूचना की प्रतीक्षा है। जैसे ही केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होती है, राज्य सरकार रिपोर्ट के लिए उच्च अधिकारियों की एक टीम गठित करेगी। [प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के ज़िम्मे यह कार्यभार सौंपा जाएगा।
वित्त सचिव अजय अग्रवाल के मुताबिक़, सरकार ने सातवें वेतन आयोग के हिसाब से पहले ही बजट में अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान कर दिया है। अग्रवाल के अनुसार, राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के हिसाब से तनख्वाह देने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।