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Friday, September 11, 2026
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भूली हुई यादें- “ कुक्कु मोरे ”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

क़ायनात की फ़ितरत ही नहीं ख़ुद-ब-ख़ुद चलना, कोई चलाता है इसे नज़र की हदों के बाहर से, हंसाता है, रुलाता है, ठहराता है और जब नचाता भी है ज़ोर से, कुछ चल नहीं पाता दिल या दिमाग़ का और एक खामोश मंज़ूरी के साथ, एक ही सदा गूंजती है कहकशां में, “मी रक़्सम, मी रक़्सम (मैं नाचता/नाचती हूं, मैं नाचूंगा/नाचूंगी)।” कुक्कु मोरे भी नाचीं, पहले फ़िल्मों में और फिर क़िस्मत के इशारों पर।

कुक्कु मोरे (PC-Cinestaan)

कुक्कु मोरे का जन्म, 1928 में, एक ऐंग्लो इंडियन परिवार में हुआ और बचपन से ही नाचना इन्हें पसंद था। परिवार का माहौल भी बहुत ख़ुशनुमा था और आए दिन किसी न किसी बहाने इन्हें अपनी कला दिखाने का मौक़ा मिलता ही रहता था। इससे इन्हें ख़ुशी तो मिलती थी लेकिन मन ही मन ये ठान चुकी थीं कि ये फ़िल्मों में काम ज़रूर करेंगी। अभी इनकी उम्र 18 साल की ही थी, कि इनकी ख़्वाहिश पूरी हो गई।

1951 की फ़िल्म ‘सगाई’ में कुक्कु मोरे    (PC-Fantastik India)

1946 में आई फ़िल्म, “अरब का सितारा”, इसमें इनके डांस की इतनी तारीफ़ हुई कि इनके पास बड़ी फ़िल्मों के काम आने लगे। 1948 में आई फ़िल्म, “अनोखी अदा”, महबूब ख़ान बना रहे थे और इसमें एक डांस सीक्वेंस, कुक्कु मोरे का भी रखा गया। इसके बाद इन्हें कामयाब फ़िल्मों का फ़ार्मुला मान लिया गया।

“1949 की फ़िल्म, “बरसात” का गीत, ” पतली कमर है, तिरछी नज़र है”, इतना मक़बूल हुआ कि कुक्कु मोरे, ख़ूबसूरती का मिसाल बन गईं। इन्होंने ख़ूब काम किया, ख़ूब दौलत कमाई।”

कुक्कु बहुत मेहमाननवाज़ थीं और दोस्ती निभाना जानती थीं। जब हेलेन का परिवार मुंबई में मुफ़लिसी का दौर काट रहा था, तब इन्होंने ही 13 साल की हेलेन को पहली बार फ़िल्मों में काम दिलवाया था और आगे भी कई साल तक मदद करती रहीं। शुरुआत के दिनों में जब प्राण बमुश्किल अपने दिन गुज़ार रहे थे, उनकी भी मदद कुक्कु ने की थी। इनका एक आलीशान बंगला था और तीन मोटर कारें थीं, रोज़ जलसे होते थे, रोशनी होती थी।

नरगिस और कुक्कु मोरे (PC-The Buzzing Story)

हेलेन को ये बहुत मानती थीं। 1958 में आई “यहूदी” और “चलती का नाम गाड़ी” में दोनों को साथ नाचते देखा जा सकता है और आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कौन बेहतर है। 1963 में आई “मुझे जीने दो” इनकी आख़िरी फ़िल्म साबित हुई, क्योंकि इसके बाद फ़िल्मों ने मीठी ज़ुबान और ज़मीर का ज़्यादा ख़याल न रखने वाले नए सितारे खोज लिए थे।

अब कुक्कु के बंगले पर जलसे भी बंद हो गए, मोटर कारें भी न रहीं और इन्हें कैंसर भी हो गया। कोई हमसफ़र भी न था। कुक्कु इतनी ग़रीब हो चुकी थीं कि सड़ी गली सब्जियां मांग कर खाना पकाना पड़ता था उनको।

1981 में कुक्कु गुज़र गईं और कोई नहीं आया उनकी उस रौशन दुनिया से, जहाँ होना उनका ख़्वाब था।

” ख़ामोशी पे ही हक़ रहा किया अपना

हम चिराग़ थे, कहते भी क्या बुझने के पहले”

-डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह ‘विमल’

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

सुप्रीम कोर्ट: लॉकडाउन में शराब दुकान बंद किये जाने पर याचिकाएं खारिज, लगाया 1 लाख जुर्माना

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

उच्चतम न्यायालय में लॉकडाउन के दौरान शराब की दुकानें बंद रखने संबंधी याचिकाएं दायर की गईं थीं, जिन्हें माननीय न्यायालय ने गत शुक्रवार को खारिज कर दिया है। इसके साथ इन याचिकाकतार्ओं पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदण्ड भी लगाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इन याचिकाओं में सोशल डिस्टेंसिंग नियमों के उल्लंघन हवाला दिया था।

जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बी आर गवई की बेन्च ने यह कहते हुए प्रकाश कुमार और गौतम सिंह की दो अलग याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि इस नेचर की कई याचिकाएं केवल प्रचार के लिए दायर की जा रही हैं।

जस्टिस राव ने याचिका की सुनवाई पर कहा कि, “हमारे पास इस तरह की कई याचिकाएं हैं। ये सभी प्रचारार्थ हैं। हम जुमार्ना लगाएंगे।”

न्यायालय ने प्रकाश कुमार पर 1 लाख का जुर्माना लगाया दिया। इसके कुछ देर बाद ही गौतम सिंह की याचिका सामने आई जिसपर न्यायालय ने रोष व्यक्त करते हुए याचिका खारिज की और जुर्माना भी लगा दिया।

जानिए, कैसा होगा लॉकडाउन 4 का रंग-रूप

लॉकडाउन 4
लॉकडाउन 4

ब्यूरो | navpravah.com 

लम्बे लॉकडाउन के बाद अब इसे खत्म करना भी जरूरी हो गया है, क्योंकि इससे आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। अब लॉकडाउन की वजह से नौकरियों पर खतरा मंडराने लगा है। हालात अगर ऐसे ही रहे तो हमारी इकोनॉमी को बचाना असंभव हो जाएगा। ऐसे में केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के चौथे भाग में कुछ ढील देने की बात कही है। जिससे कोरोना महामारी के प्रसार पर भी नियंत्रण रहे, साथ ही देश की इकोनॉमी भी पटरी पर लौट सके।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस लॉकडाउन में भविष्य को देखते हुए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, जिससे कोरोना वायरस के साथ-साथ हमारी जिंदगी भी चलती रहे। वर्तमान हालात को नई सामान्य स्थिति मानते हुए अब देश आगे बढ़ने की तैयारी कर रहा है। लॉकडाउन-4 में साफ-सफाई, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क आदि सुरक्षा का ख्याल रखते हुए, कई चीजों में ढील मिलेगी। हालांकि कंटेनमेंट जोन के लिए स्थितियां पहले जैसे ही रहेंगी। कोई भी राज्य पूरी तरह से लॉकडाउन खत्म किए जाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन सभी धीरे-धीरे बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ़ रहे हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक़, सभी तरह के ट्रांसपोर्ट में सोशल डिस्टेंसिंग और लोगों की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए प्लान तैयार किया गया है। केंद्र लोकल ट्रेन, बस और मेट्रो में हल्की ढील देने पर विचार कर रही है। जिसको लेकर तैयारी भी शुरू कर दी गई है। रेड जोन में इसे चलाया जाएगा, लेकिन कंटेनमेंट जोन को छोड़कर।

– ऑटो और टैक्सी को भी रेड जोन में चलाए जाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि यह ढील भी कंटेनमेंट जोन इलाकों में लागू नहीं होगी।

– परिवहन को अनुमति देने के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और यात्रियों की संख्या को लेकर भी दिशा-निर्देश तैयार किया गया है।

आर्थिक पैकेज: कई बड़े सुधारों का ऐलान, निवेश के लिए प्राइवेट सेक्टर्स को तरजीह

आर्थिक पैकेज: कई बड़े सुधारों का ऐलान, निवेश के लिए प्राइवेट सेक्टर्स को तरजीह
आर्थिक पैकेज: कई बड़े सुधारों का ऐलान, निवेश के लिए प्राइवेट सेक्टर्स को तरजीह

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक राहत पैकेज के अंतर्गत शनिवार को चौथे किस्त की घोषणाएं करते हुए कई बड़े सुधारों का ऐलान किया। सीतारमण ने निवेश के जरिए ग्रोथ बढ़ाने के लिए प्राइवेट सेक्टर के लिए कई रास्ते खोल दिए हैं। कोयला खनन और स्पेस सेक्टर में सरकार के एकाधिकार को खत्म करके प्राइवेट सेक्टर को भी आमंत्रित किया है। इसके अलावा भी वित्त मंत्री ने खनिज, बिजली, रक्षा उत्पादन और नागरिक विमानन सेक्टर के लिए भी बड़े सुधारों की घोषणा की है।

आर्थिक पैकेज की घोषणा के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए निवेश में नीतिगत सुधार किए जाएंगे। सचिवों के अधिकारप्राप्त समूह के जरिए निवेश योजनाओं को जल्द मंजूरी दी जाएगी। हर मंत्रालय में प्रॉजेक्ट डिवेलपमेंट सेल बनाएं जाएंगे। ये निवेशकों और राज्य सरकारों से समन्व्य करेंगे। राज्यों की रैकिंग की जाएगी। निवेश के लिए उनकी योजनाएं कितनी आकर्षक हैं इनकी रैकिंग की जाएगी। न्यू चैंपियन सेक्टर को प्रत्साहित किया जाएगा। निवेशकों को होने वाली ज़मीन की दिक्कतों पर भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। देश के 3376 औद्योगिक क्षेत्र 5 लाख हेक्टेयर जमीन में हैं। इन्हें मैप किया जाएगा, ताकि निवेशकों को जल्द जमीन उपलब्ध कराए जा सकें।

कोल सेक्टर में सरकार का एकाधिकार होगा ख़त्म-
वित्त मंत्री ने कहा कि कोल सेक्टर में कमर्शियल माइनिंग को मंजूरी दी जाएगी। कोयला क्षेत्र में सरकारी एकाधिकार खत्म होगा। अभी भी भारत काफी मात्रा में कोयला आयात करता है। हम अपनी क्षमता का दोहन नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए इसमें बदलाव किया जाएगा। कोयला माइनिंग के लिए नीलामी प्रक्रिया होगी। 50 नए ब्लॉक्स नीलामी के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास पर केंद्र सरकार 50 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि खनिज खनन सेक्टर में सुधार लाए जाएंगे। निजी निवेश को बढ़ाया जाएगा। एक पारदर्शी नीलामी तरीके से 500 खनिज ब्लॉक उपलब्ध कराए जाएंगे। बॉक्साइट और कोल मिनरल ब्लॉक के लिए संयुक्त नीलामी को बल दिया जाएगा। इससे बिजली खर्च में कमी आएगी। इससे खनन बढ़ेगा और रोजगार तैयार होगा।

रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाने के लिए आयात पर बैन लगाया जाएगा। साल दर साल भारत में ही हथियारों का उत्पादन बढ़ाया जाएगा और जो पुर्जे आयात करने पड़ते हैं, उनका भी उत्पादन देश में ही किया जाएगा। इसके लिए अलग से बजट दिया जाएगा। इससे रक्षा आयात खर्च होगा और उन कंपनियों को लाभ होगा जो भारत में सेना के लिए हथियार बनाएंगी। ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ऑर्गनाइजेशन को निगमीकृत किया जाएगा। वित्त मंत्री ने जोर दिया कि कामकाज में सुधार के लिए निगमीकृत किया जाएगा, निजीकरण नहीं किया जाएगा। इसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाएगा। आम लोग इसके शेयर खरीद सकेंगे। रक्षा उत्पादन में एफडीआई सीमा को 49 पर्सेंट से बढ़ाकर 74 पर्सेंट किया जा रहा है।

केवल 60 पर्सेंट हवाई क्षेत्र नागरिक विमानों के लिए हैं। इसलिए उन्हें लंबे रास्ते लेने पड़ते हैं और ईंधन अधिक खर्च होता है। इसे सरल किया जाएगा ताकि विमानों को समय में कमी आएगी और उनका खर्च बचेगा। इससे नागरिक विमानन सेक्टर को एक हजार करोड़ रुपए की कटौती होगी। इससे पर्यावरण को भी लाभ होगा। एयरपोर्ट्स पर सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

इसके अलावा एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल का ग्लोबल हब बनाया जाएगा। इससे नागरिक और सैन्य विमानों की मरम्मत के लिए इन्हें विदेश जाना पड़ता है। अब इनके देश में मरम्मत की व्यवस्था की जाएगी। बड़े इंजन निर्माता भारत में यूनिट लगाएंगे। इससे सभी एयरलाइंस के लिए खर्च में कटौती होगी।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय स्पेस सेक्टर को प्राइवेट सेक्टर के लिए भी खोला जा रहा है। उन्हें भी इस क्षेत्र में भागीदार बनाया जाएगा। प्राइवेट कंपनियों को भी बराबरी का अधिकार होगा। वे भी सैटेलाइट लॉन्च कर पाएंगी। निजी क्षेत्र की कंपनियों को इसरो की सुविधाओं का इस्तेमाल करने का मौका दिया जाएगा। भविष्य में ग्रहों की खोज या दूसरे ग्रहों की यात्रा के लिए प्राइवेट सेक्टर को आमंत्रित किया जाएगा।

कैंसर के क्षेत्र में भारत ने दुनियाभर को दवाएं भेजी हैं। मेडिकल आइसोटॉप का उत्पादन करने के लिए पीपीपी मॉडल अपनाया जाएगा और रिसर्च रिएक्टर की स्थापना की जाएगी। इससे मानवता की सेवा को बढ़ावा मिलेगा। पीपीपी मोड में एकीकृत खाद्य संरक्षण केंद्र विकीरण टेक्नॉलजी के माध्यम से बनाएंगे ताकि कृषि क्षेत्र को इसका लाभ मिल सके। इसके अलावा स्टार्टप इकोसिस्टम को न्यूक्लियर सेक्टर के साथ जोड़ने जा रहे हैं।

MP: सागर सड़क हादसे में ५ प्रवासी मज़दूरों की मौत

सौम्या केसरवानी | navpravah.com

कोरोना वाइरस की वजह से हर जगह लॉकडाउन है, यह वायरस प्रवासी मजदूरों पर कहर बनकर टूटा है। आज सुबह उत्तर प्रदेश के औरैया में हुए हादसे के बाद अब मध्य प्रदेश से भी एक भीषण सड़क हादसे की ख़बर सामने आयी है।

यह हादसा मध्य प्रदेश के सागर में हुआ है। एमपी के सागर के दलबतपुर में मजदूरों को लेकर जा रही एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हो गई है। इस हादसे में 5 मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि 20 मजदूर घायल हो गए हैं।

हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर घटना की जानकारी लेने पहुंचे और राहत व बचाव का काम शुरू कर दिया है। वहीं स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को बंडा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया है। यह मजदूर महाराष्ट्र से मजदूर बस्ती की ओर जा रहे थे।

बता दें कि ये एक दिन में तीसरी ट्रक दुर्घटना है। आज सबसे बड़ी ट्रक दुर्घटना यूपी के औरैया में हुई, यहां रात 3.30 बजे सड़क के किनारे खड़ी मजदूरों से भरी एक ट्रक को दूसरी ट्रक ने टक्कर मार दी थी, इस घटना में 24 मजदूरों की मौत हो गई और 36 मजदूर घायल हो गए हैं।

Cyclone Amphan 8 राज्यों में ढाएगा क़हर, तेज़ हवा और भारी बारिश की सम्भावना

ब्यूरो | navpravah.com

मौसम विभाग की एक चेतावनी ने आठ राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग की जानकारी के मुताबिक़, कल शाम (16 मई) को बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती तूफान एम्फन (Amphan) आएगा, जिसके चलते अंडमान निकोबार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश हो सकती है। इस चक्रवाती तूफान के असर के चलते देश के आठ राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में भारी बारिश और तेज हवाओं  के चलने की सम्भावना है।

मौसम विभाग के अलर्ट के अनुसार, अंडमान निकोबार द्वीप समूह में आज और कल भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा ओडिशा के तटीय इलाकों और पश्चिम बंगाल में भी कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है।मछुआरों को बंगाल की खाड़ी के दक्षिण और सेंट्रल इलाके के समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। इन इलाक़ों में जो मछुआरे गए हैं, उन्हें भी तुरंत वापस लौट आने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भी चक्रवाती तूफान एम्फन को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के तटीय इलाकों में आगे 2-3 दिनों में भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र शनिवार को चक्रवात का रूप धारण कर सकता है। ऐसे में ओडिशा के चार तटीय जिलों को विशेष सतर्क रहने को कहा गया है। जबकि 12 अन्य जिलों के लिए भी अलर्ट जारी किए गए हैं। एहतियातन सभी सरकारी छुट्टियां रद कर दी गई हैं।

इन राज्यों में भी अलर्ट जारी-

एक्सपर्ट्स ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों जैसे, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान व पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी मौसम बिगड़ सकता है। इन राज्‍यों के लिए मौसम विभाग ने ऑरेन्‍ज अलर्ट जारी किया है। और लोगों से सतर्क रहते हुए घरों से बाहर नहीं निकलने की चेतावनी दी है।

UP: औरैया में ट्रक-डीसीएम की भिड़न्त में २४ प्रवासी मज़दूरों की मौत, ३६ घायल

न्यूज़ डेस्क | navpravah.com

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में शनिवार सुबह ट्रक और डीसीएम वाहन की भिड़न्त हो गई, जिसकी वजह ट्रक में सवार 24 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गयी। 36 अन्य मजदूर घायल हो गये हैं, इनमें से 14 गंभीर रूप से घायल मजदूरों को सैफेई इटावा के पीजीआई में भर्ती कराया गया है। इन दोनों वाहनों में ज्यादातर मजदूर पश्चिम बंगाल और झारखंड के थे।

कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने समाचार एजेंसी भाषा को बताया कि शनिवार सुबह एक डीसीएम मेटाडोर दिल्ली से मजदूरों को लेकर आ रही थी। इनमें से कुछ मजदूर औरैया और कानपुर देहात मार्ग पर मेटाडोर को रोककर सड़क किनारे एक चाय की दुकान पर चाय पी रहे थे। तभी राजस्थान के जयपुर से मजदूरों को लेकर आ रहे एक ट्रक ने इस मेटाडोर को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन सड़क किनारे बने गड्ढे में जा गिरे । उन्होंने बताया कि इस हादसे में 24 मजदूरों की मौत हो गयी, जबकि 36 मजदूर घायल हो गये। 

इस दर्दनाक सड़क हादसे पर प्रधानमंत्री ने अपनी संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें इस भीषण दुर्घटना पर बड़ा दुःख है। सरकार सभी ज़रूरी सहायता में जुटी है। इस घटना के राज्य सरकारों का प्रवासी मज़दूरों के पलायन को लेकर तनाव और बढ़ गया है।

भूली हुई यादें- “ सईदा ख़ान ”

डॉ० कुमार विमलेन्दु सिंह | Navpravah Desk

क़ज़ा, मौत, मर जाना, फ़ौत होना, ये कोई तय नहीं कर सकता, लेकिन पहले से, शायद हमारे यहाँ आने से पहले ही मुक़र्रर कर दिया जाता है वो लम्हा, जहां से हमारा होना रुक जाता है और दुनिया तेज़, बहुत तेज़ बढ़ जाती है बाक़ी बचे हुए लोगों के साथ। यादें, बेशक़ आती हैं, जो गुज़र जाता है उसकी, पर इतना ही सोच पाते हैं हम, वो होता तो कैसा होता। सईदा ख़ान को याद करने वाले कुछ ही हैं, पर बड़ी शिद्दत से याद करते हैं उन्हें।

सईदा ख़ान (PC-Flickr)

सईदा ख़ान, 1949 में कलकत्ता में पैदा हुई थीं और बचपन से ही फ़िल्मों में काम करना इनका शौक़ था। बचपन से ही ये बहुत चंचल और ख़ूबसूरत थीं। एक पार्टी में इन्हें, मशहूर प्रोड्यूसर एच०एस०रवैल ने देखा और पूछा कि क्या वे फ़िल्मों में काम करना चाहेंगी? सईदा ख़ान तो कब से इसी दिन का इंतज़ार कर रही थीं, उन्होंने तुरंत बात मान ली।

फ़िल्म ‘एक साल पहले’ में सईदा ख़ान (PC-Flickr)

इसके बाद सईदा ख़ान, अपनी मां के साथ कलकत्ते से मुंबई चली गईं, और जैसा कि रवैल साहब ने कहा था, सईदा ख़ान को उनकी पहली फ़िल्म, “कांच की गुड़िया”, बतौर हेरोइन मिल गई। ये फ़िल्म शानदार अदाकार, मनोज कुमार की भी पहली फ़िल्म थी, और साल था, 1961। इसके बाद कुछ दिनों तक इन्होंने, उस वक़्त के सभी बड़े अदाकारों, जैसे प्रदीप कुमार, फ़िरोज़ ख़ान और किशोर कुमार के साथ काम किया।  ज़िंदगी रोज़ ऊंचाई की तरफ़ बढ़ रही थी और इसी सफ़र में एक ठिकाना मोहब्बत का भी आया। मशहूर प्रोड्यूसर और लेखक, बृज सदाना से इन्होंने शादी कर ली।

फ़िल्म ‘हम मतवाले नौजवाँ’ में सईदा ख़ान (PC-Flickr)

इन्हें बड़ी फ़िल्में मिलना कम तो हो ही गया था, सो B और C ग्रेड की फ़िल्मों में भी ये दिखीं, लेकिन शादी के बाद अपनी दुनिया में ही ख़ुश रहने लगीं। बॄज सदाना बहुत बड़े प्रोड्यूसर थे, उन्होंने “चोरी मेरा काम” और “विक्टोरिया नं० 203” जैसी फ़िल्में प्रोड्यूस की थीं। सईदा ख़ान की ज़िंदगी अब ख़ुशनुमा थी, इनके एक बेटा और एक बेटी भी हुए। बेटे का नाम कमल सदाना रखा गया, जो फ़िल्मों में बतौर हीरो, मशहूर भी हुए। 1993 में आई फ़िल्म, “रंग”, जिसमें दिव्या भारती भी थीं, उसमें कमल सदाना पर फ़िल्माया गया गाना,” तुझे ना देखूं तो चैन, मुझे आता नहीं है”, आज भी बहुत पसंद किया जाता है। बेटी का नाम था, नम्रता।

“कमल सदाना बताते हैं कि “1990 में मेरे जन्मदिन, 21 अक्टूबर को, शराब के नशे में, मेरे पिता बृज सदाना ने मेरी माँ (सईदा ख़ान), मेरी बहन (नम्रता) को गोली मार दी, मुझपर भी गोली चलाई, पर मैं बच गया, ज़ख़्मों के इलाज के बाद, जब मैं अस्पताल से घर आया तो देखा कि मेरे पिता ने उसी बंदूक से ख़ुदक़ुशी कर ली थी, मेरी पूरी दुनिया उजड़ चुकी थी।”

फ़िल्मों में वे अच्छा कर सकते थे लेकिन पूरे परिवार की मौत ने उन्हें ऐसा करने न दिया।

सईदा ख़ान, को अब लगभग सब भूल चुके हैं और उनकी फ़िल्मों में से भी ज़्यादातर भुला दी गयी हैं, लेकिन कमल की तो वे दुनिया थीं। कमल ही शायद इस दुनिया में अपनी मां को याद करते हैं अब, और बहन की याद में अपनी बेटी का नाम नम्रता रखा है उन्होंने।

सईदा के बेटे ‘कमल सदाना’ (PC-Midday)

सईदा ख़ान, एक अदाकारा के अलावा उस घुटन की तस्वीर के तौर पर भी याद की जाती हैं, जो इस रुपहले पर्दे के पीछे की दुनिया में काबिज़ है।

(लेखक जाने-माने साहित्यकार, स्तंभकार, व शिक्षाविद हैं.)

बिहार: दसवीं का परीक्षा परिणाम जल्द

ब्यूरो | navpravah.com

पटना जिले में बिहार बोर्ड का मैट्रिक मूल्यांकन गुरुवार शाम को खत्म हो गया। इस साल कुल 7 लाख 14 हज़ार 60 कॉपियां थी। बोर्ड की मानें तो मई के चौथे सप्ताह रिजल्ट दे दिया जाएगा। पटना जिले में एक केंद्र पर बची हुई उत्तरपुस्तिकाओं की जांच गुरुवार को पूरी कर ली गई है। अंतिम दिन चार हजार कॉपियों की जांच की गयी।

डीपीओ मोइनुल रहमान ने बताया कि मूल्यांकन समाप्त हो गया। सभी अंकों की एंट्री भी देर शाम तक कर बोर्ड को भेज दी गयी है। पटना के अलावा दूसरे जिलों में भी लगभग मूल्यांकन समाप्त हो गया। सभी जिलों से अंक भी बोर्ड को भेज दिये गए हैं। साथ ही बोर्ड रिजल्ट की तैयारी में जुट गया।

अंकों के कंप्यूटर पर कंपाइलेशन का काम काफी हद तक पूरा कर चुका है। बताया जा रहा है कि बिहार बोर्ड ने टॉपरों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी है और उन्हें जल्द ही फोन किया जाएगा। फोन पर एक उचित समय देकर विषय विशेषज्ञों द्वारा उनका इंटरव्यू लिया जाएगा। इंटरव्यू की ये प्रक्रिया आने वाले दो-तीन दिन में हो सकती है।

टॉपरों के इंटरव्यू व वेरिफिकेशन संपन्न होने के बाद रिजल्ट को फाइनल टच दे दिया जाएगा और रिजल्ट की डेट घोषित कर दी जाएगी। इस हिसाब से देखा जाएगा तो 20 मई से पहले या उसके आसपास रिजल्ट जारी हो सकता है।

2019 में 80.73 प्रतिशत स्टूडेंट्स पास हुए थे। बिहार बोर्ड मैट्रिक 2018 की परीक्षा में कुल 68.89 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए थे।

“लाउडस्पीकर से अज़ान देना इस्लाम का अंग व मौलिक अधिकार नहीं” -इलाहाबाद हाईकोर्ट

न्यूज़ अपडेट | Navpravah Desk

हाई कोर्ट इलाहाबाद ने मस्जिद से लाउडस्पीकर द्वारा अजान दिए जाने पर अहम फ़ैसला सुनाया है। न्यायालय ने कहा कि मानव स्वर में अज़ान देना इस्लाम का धार्मिक हिस्सा है लेकिन लाउडस्पीकर से अज़ान देना इस्लाम का धार्मिक अंग नहीं है।

न्यायालय ने जिला प्रशासन के आदेशों को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं और पत्र याचिकाओं को सुनते हुए ऐसी टिप्पणियां कीं, जिसमें COVID-19 लॉकडाउन के दौरान बार बार अजान को प्रतिबंधित किया गया था।

याचिकाकर्ताओं में गाज़ीपुर के बसपा सांसद अफ़ज़ाल अंसारी, पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और वरिष्ठ अधिवक्ता एस०वसीम ए० कादरी शामिल हैं। याचिकाकर्ता के द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर का उपयोग करके “मुअज़्ज़िन” के माध्यम से अज़ान सुनाने की अनुमति मांगी गई थी, और कहा गया था कि यह इस्लाम का अभिन्न अंग है।

उक्त याचिका के सम्बंध में आदेश देते हुए न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की युगल खंडपीठ ने कहा:

“यह माना जाता है कि अज़ान इस्लाम का एक अनिवार्य और अभिन्न अंग हो सकता है, लेकिन लाउड स्पीकर या अन्य ध्वनि प्रवर्धक उपकरणों के माध्यम से अज़ान की पुनरावृत्ति को धर्म का एक अभिन्न अंग नहीं कहा जा सकता है, इसलिए यह नहीं कह सकते कि स्पीकर से अजान रोकना अनुच्छेद 25 के धार्मिक स्वतंत्रता के मूल अधिकारों का उल्लंघन है, जो कि पब्लिक ऑर्डर, नैतिकता या स्वास्थ्य और भारत के संविधान के भाग III के अन्य प्रावधानों के अधीन है। “

कोर्ट ने कहा कि, ‘इसलिए जब तक कि ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत संबंधित अधिकारियों से अनुमति नहीं मिलती है, किसी भी परिस्थिति में, अज़ान को किसी भी लाउडस्पीकर उपकरण के माध्यम से नहीं सुनाया जा सकता है। यदि अज़ान को पूर्वोक्त साधनों के माध्यम से सुनाया जा रहा है, तो यह ध्वनि प्रदूषण नियमों के निहित प्रावधानों का उल्लंघन होगा और कानून के अनुसार, ऐसे नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। “