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Thursday, August 6, 2026
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रूपानी होंगे गुजरात के मुख्यमंत्री, पटेल उपमुख्यमंत्री

शिखा पाण्डेय,

गुजरात के विधायक दल की बैठक में शुक्रवार को विजय रूपानी को नेता चुन लिया गया। अब राज्य के अगले मुख्यमंत्री रूपानी होंगे। नितिन पटेल को उप मुख्यमंत्री के रूप में चुना गया। अटकलें थीं कि पटेल ही सीएम बनेंगे लेकिन विधायक दल की बैठक में रूपानी के नाम पर मुहर लगी।

रूपानी राजकोट के जैन समुदाय के हैं। खबर है कि रूपानी मोदी के बेहद करीब हैं। इसलिए उन्हें मौके का फायदा मिला। पिछले कई महीने से ये चर्चा थी कि नितिन ही मुख्यमंत्री पद के पहले दावेदार हैं, लेकिन विधायक दल ने रूपानी पर ही भरोसा जताया।

भाजपा का यह निर्णय आगामी चुनाव को लेकर भी हो सकता है। क्योंकि राज्य में चुनाव को ज़्यादा वक़्त नहीं है। ऐसे में भाजपा किसी भी तरह की गलती नहीं कर सकती। पटेल पर चर्चा इसलिए भी थी कि पिछले कुछ समय से पाटीदार समाज राज्य सरकार से नाराज़ है।

‘बाहुबली 2’ की रिलीज डेट के राज से उठा पर्दा

सौम्या केसरवानी,

एसएस राजामौली के निर्देशन में बनी फिल्म ‘बाहुबली: द कॉनक्ल्यूजन’ की रिलीज डेट का खुलासा हो गया है। लोग इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। सभी ये जानना चाहते हैं कि आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा।

‘बाहुबली: द कॉनक्ल्यूजन’ 28 अप्रैल 2017 को रिलीज होगी। हालांकि बता दें कि अभी तक फिल्म की शूटिंग पूरी नहीं हुई है। लेकिन इससे पहले ही फिल्म के तमिलनाडु के थिएटर राइट्स 45 करोड़ रुपये में बिक गए हैं। बता दें कि बाहुबली’ रिलीज होते के बाद ही ऐसी हिट हुई कि बॉक्स ऑफिस 600 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर डाली थी।

‘बाहुबली’ फिल्म अंत में लोगों के सामने एक बड़ा सवाल छोड़ गई कि ‘कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा’। अभी फिल्म की शूटिंग चल रही है। फिल्म में प्रभास, राणा दुगुबती, अनुष्का शेट्टी और तमन्ना भाटिया भी मुख्य भूमिका में हैं।

लालू का भाजपा पर वार, कहा, “गौ माता दूध देती हैं वोट नहीं”

अब्दुल फ़हद,

भारतीय जनता पार्टी शासित राजस्थान की सबसे बड़ी गौशाला में गायों की बदहाल स्थिति को लेकर लालू प्रसाद यादव ने आरएसएस और भाजपा पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि स्वघोषित राष्ट्रवादी रक्षकों ने ‘गौ-मैया’ का जो हाल किया है वही हाल ये ‘गंगा-मैया’ का भी करेंगे।

यादव ने माइक्रोब्लागिंग साइट ट्वीटर पर आज लिखा, गौ-मैया दूध देती है, वोट नहीं। पर इनको लगता है कि गौमाता वोट देती है।

गाय कभी पाली नहीं, जानकारी कैसे हो। एक अन्य ट्वीट में राजद सुप्रीमों ने कहा, जो हाल इन तथा कथित स्वंयघोषित राष्ट्रवादी रक्षकों ने ‘गौ-मैया’ का किया है वही ‘गंगा-मैया’ का करेंगे।

बिहार के उप मुख्यमंत्री और यादव के पुत्र तेजस्वी यादव ने भी इस मामले में भाजपा पर निशाना साधा और कहा, कृपया गौ-माता को तो बख्श देते। उन्होंने कहा, राजस्थान में गौमाता के नाम पर घोटाला। वहां गऊ-पालन मंत्रालय है, करोड़ो का बजट है पर गौ माताएं भूख से मर रही है।

असम के कोकराझार में हमलावरों ने की अंधाधुंध फायरिंग, 12 की मौत 30 घायल

अब्दुल फ़हद,

असम के कोकराझार में काले कपड़े पहन के आये हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग और गोलाबारी की। इस घटना में 12 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग घायल हो गए।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। सुरक्षा बलों ने हमलावरों को मार गिराया है। हमले के बाद इलाके का माहौल संवेदनशील हो गया है।

ग़ौरतलब है कि अभी के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का यहाँ परचम लहराया है और बीजेपी ने यहाँ जीत हासिल की है। कांग्रेस ने बीजेपी पर इस हमले के आरोप लगाये है और कहा कि बीजेपी असम में सरकार चलाने में नाकाम हो गई हैं, उसे सत्ता छोड़ देनी चाहिए। इस प्रकार का ये हमला असम में पहली बार हुआ है।

श्रीनगर में कर्फ्यू के चलते जनजीवन अस्त व्यस्त, इन्टरनेट सेवाएं बाधित

अनुज हनुमत,

घाटी में लगातार 28वें दिन जनजीवन अस्त व्यस्त बना हुआ है। अलगाववादियों की वजह से श्रीनगर जिले में कर्फ्यू लगा दिया गया है। बता दें कि अलगाववादियों के प्रस्तावित मार्च को रोकने के लिए हजरतबल दरगाह तक कश्मीर के कुछ और इलाकों में आज  कर्फ्यू लगा दिया गया है। कर्फ्यू के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त बना हुआ है।

पुलिस सूत्रों के हवाले से खबर मिली है कि गंदेरबल, बडगाम, अनंतनाग कस्बे, अवंतिपुरा, कुलगाम कस्बे, सोपोर को छोड़कर बारामूला जिले, शोपियां कस्बे, बांदीपुरा के कालूसा और हंदवाड़ा के इलाकों में भी कर्फ्यू लगा दिया गया है। सूत्रों के अनुसार शेष घाटी में चार या अधिक लोगों के एकत्र होने पर एहतियातन रोक लगाई गई है जिससे कानून व्यवस्था ख़राब न हो।

राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील एवं अति संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं। पूरी घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं। यहां प्रीपेड कनेक्शनों से फोन करने की सुविधा भी बाधित कर दी गई है।  अलगाववादियों ने कश्मीर में बंद लागू रहने की अवधि 12 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी है। उन्होंने मांग की है कि मुख्यधारा के राजनेता अपने दलों एवं पदों से इस्तीफा दें।

गौरतलब है कि 8 जुलाई को हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी बुरहान वानी के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद प्रदर्शनकारियों एवं सुरक्षा बलों के बीच हुए संघर्षों में आम नागरिकों की मौत से अलगाववादी बौखला गए। इन सबके खिलाफ अलगाववादियों द्वारा जारी बंद और प्राधिकारियों द्वारा लागू प्रतिबंधों के कारण घाटी में लगातार 28वें दिन जनजीवन प्रभावित रहा। इसके कारण स्कूल, कॉलेज, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, पेट्रेल पंप, बैंक एवं निजी कार्यालय बंद रहे और सड़कों से सार्वजनिक वाहन नदारद रहे। सरकारी दफ्तरों में भी बहुत कम उपस्थिति दर्ज की गई।

उत्तर प्रदेश: आम जनता को चुनावी लेमनचूस, सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन मुफ़्त

अनुज हनुमत

लखनऊ। मौजूदा समय में कानून व्यवस्था को लेकर घिरी अखिलेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया है। सूबे की अखिलेश सरकार ने तय किया है कि सरकारी अस्पतालों में दवा, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलॉजी जाँच के बाद अब ‘ऑपरेशन’ भी मुफ़्त होंगे।

आपको बता दें कि अभी माइनर व मेजर दोनों तरह के आपरेशन के लिए मरीजों को शुल्क देना पड़ता है, लेकिन अब सरकार ने फैसला किया है कि इसे भी मुफ़्त किया जायेगा। प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी की 100 से अधिक जाँच मुफ़्त कर दी है। इनमें ब्लड शुगर से लेकर तमाम जांच शामिल हैं। परन्तु अभी गरीब परिवारों के मरीजों को छोड़कर अन्य मरीजों से ऑपरेशन कराने का शुल्क लिया जाता है।

फ़िलहाल सरकारी अस्पतालों में माइनर ऑपरेशन के लिए 68 रूपये व मेजर आपरेशन के लिए 400 रूपये जमा कराने होते हैं। वैसे सरकार अब आपरेशन फीस को भी खत्म करने जा रही है। ये एक बड़ा फैसला है।

प्रदेश सरकार ने दिल के मरीजों के लिए होने वाली ईसीजी जांच व हेपेटाइटिस बी (एचसीबी) की भी जाँच मुफ़्त करने जा रही है। परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण राज्यमंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) रविदास मल्होत्रा ने अफसरों को इसके आदेश दे दिए हैं। उन्होंने अफसरों से कहा है कि इस बाबत प्रस्ताव बनाकर जल्द से जल्द पेश किया जाए। वह इसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से स्वीकृति दिलाकर जल्द से जल्द पूरे सूबे लागू करवाएंगे।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान की जमकर धुलाई की, पढिए सार्क सम्मेलन में क्या-क्या कहा

डेस्क,

नई दिल्ली। गुरुवार, 4 अगस्त को भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस्‍लामाबाद (पाकिस्‍तान) में आयोजित सार्क आंतरिक/गृह मंत्रियों की सातवीं बैठक को संबोधित किया। आतंकवाद जैसे ज्वलंत मुद्दे पर उन्होंने पाकिस्तान की जमकर धुलाई की। पढ़िए क्या क्या कहा उन्होंने सार्क सम्मलेन में-

सबसे पहले मैं महामहिम निसार अली खां साहेब को इस बैठक का अध्‍यक्ष चुने जाने पर बधाई देता हूं। मैं इस अवसर पर इस बैठक की मेजबानी के लिए पाकिस्‍तान सरकार द्वारा किये गये बेहतरीन प्रबंधों और मुझे तथा मेरे शिष्‍टमंडल को दिए गए उत्‍तम आतिथ्‍य सत्‍कार के लिए धन्‍यवाद देता हूं।

दो साल पहले हमारी सरकार के गठन से ही भारत ने अपने पड़ोसियों के साथ अच्‍छे संबंधों को अपनी सर्वोच्‍च प्राथमिकता देने की बात दोहराई है। हमारी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत हमने इस क्षेत्र के अपने भागीदारों के साथ मिलकर अपने लोगों के लिए शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए अपने संबंधों को मजबूत करने और मिलकर काम करने के प्रयास में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मैं इस बैठक में इसी उद्देश्‍य के साथ आया हूं।

उल्‍लेखनीय है कि इस मंच के तहत हम पिछली बार नवम्‍बर, 2014 में काठमांडू में आयोजित 18वें सार्क सम्‍मेलन से पूर्व मिले थे। उस शिखर सम्‍मेलन में हमारे नेताओं ने दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत बनाने में प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की थी। सार्क की स्‍थापना को 30 वर्ष हो चुके हैं। आज हमें पहले की अपेक्षा क्षेत्रीय सहयोग को उस स्‍तर पर ले जाने की कहीं अधिक जरूरत है, जिसमें हम अपने लोगों की आकांक्षाओं और उम्‍मीदों को पूरा कर सकें।

इस क्षेत्र के लिए हमारा दृष्टिकोण प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने 18वें शिखर सम्‍मेलन में व्‍यक्‍त किया था, जो व्‍यापार, निवेश, व्‍यापक विकास सहयोग, हमारी जनता के मध्‍य संबंध और सहज जुड़ाव के मजबूत स्‍तंभों पर निर्भर करता है। हमने उसी के अनुसार प्रधानमंत्री द्वारा घोषित पहलों को आगे बढ़ाया है। मुझे खुशी है कि हमने भारत में व्‍यापार कार्ड योजना लागू की है, जिससे भारत की अपनी यात्राओं के दौरान व्‍यापार जगत के दिग्‍गजों को सहायता मिलेगी।

यह महत्‍वपूर्ण है कि दक्षिण एशियाई माहौल में व्‍यापक क्षेत्रीय समृद्धि, जुड़ाव और सहयोग अर्जित करने की सभी आवश्‍यक परिस्थितियां मौजूद हैं, लेकिन इसकी सफलता के लिए हमें अपने प्रयासों को सफल बनाना होगा। हमने बढ़ती हुई चुनौतियों और घटनाओं को देखा है, जिससे हमारे क्षेत्र की शांति और स्थिरता को खतरा पैदा हो गया है। आतंकवाद सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है और इससे हमारी शांति को खतरा पैदा हो गया है। दक्षिण एशिया इस त्रासदी से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जैसा कि हमने अभी हाल ही में पठानकोट, ढाका, काबुल और अन्‍य स्‍थानों पर हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमलों में देखा है। केवल ऐसे आतंकवादी हमलों की कड़े शब्‍दों में भर्त्‍सना करना ही पर्याप्‍त नहीं है। हमें इस त्रासदी को समाप्‍त करने के लिए कड़ा संकल्‍प लेना चाहिए और इस दिशा में गंभीर प्रयास भी किये जाने चाहिए।

यह भी जरूरी है कि आतंकवाद को महिमा मंडित न किया जाए और किसी भी देश द्वारा उसे संरक्षण न दिया जाए। एक देश के आतंकवादी किसी दूसरे देश के लिए शहीद या स्‍वतंत्रता लडाकू नहीं हो सकते। मैं न केवल भारत या अन्‍य सार्क सदस्‍यों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए बोल रहा हूं कि किसी भी परिस्थिति में आतंकवादियों को शहीदों का दर्जा न दिया जाए। जो देश आतंकवाद को या आतंकवादियों को समर्थन प्रोत्‍साहन, संरक्षण, सुरक्षित आश्रय या अन्‍य सहायता उपलब्‍ध कराता है, उसे अलग-थलग किया जाए। न केवल आतंकवादियों या आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कदम उठाए जाने की जरूरत है, बल्कि उन व्‍यक्तियों, संस्‍थानों या देशों के खिलाफ भी ऐसी ही कड़ी कार्रवाई किये जाने की आवश्‍यकता है। इससे ही यह सुनिश्चित होगा कि मानवता के खिलाफ आतंकवाद के गंभीर अपराध को बढ़ावा देने में लगी ताकतों से केवल प्रभावी रूप से ही निपटा जा सकता है।

प्रतिबंधित और वांछित आतंकवादियों और उनके संगठनों के खिलाफ इच्‍छा शक्ति और अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय के अधिकार का सम्‍मान किया जाना चाहिए और उसे लागू भी किया जाना चाहिए। अगर हमें आतंकवाद से छुटकारा पाना है तो हमें इस बात में विश्‍वास करना होगा कि अच्‍छे और बुरे आतंकवादियों में भेद करने के प्रयास कोरा भ्रम फैलाने का प्रयत्‍न मात्र ही है। किसी भी प्रकार के आतंकवाद को किसी भी आधार पर मदद करना न्‍यायसंगत नहीं कहा जा सकता। अंतर्राष्‍ट्रीय आतंकवाद की किसी भी तरह से मदद करने वालों के खिलाफ तुरंत प्रभावी कार्रवाई किये जाने की जरूरत है, चाहे वो कोई भी हों। मुंबई या पठानकोट जैसे आतंकवादी हमलों के शिकार लोगों को भी तभी न्‍याय मिलेगा। हमें किसी भी प्रकार के आतंकवाद को बर्दाश्‍त नहीं करना चाहिए।

आतंकवाद के खिलाफ हमारी आम लड़ाई में आतंकवाद के खात्‍मे के लिए सार्क क्षेत्रीय सम्‍मेलन का कार्यान्‍वयन और इसके अतिरिक्‍त प्रोटोकॉल बहुत महत्‍वपूर्ण हो जाते हैं। इसमें प्रभावी प्रयासों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आतंकवादी वारदात करने वाले मुकदमे और दंड से न बच सकें तथा उनका प्रत्‍यर्पण हो और उन्‍हें सजा सुनिश्चित हो सके।

डिजिटल प्रौद्योगिकी के दुरुपयोग के कारण आतंकवाद का खतरा बहुत बढ़ गया है। आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए हमें अपने प्रयासों के तहत साइबर अपराध, आतंकवादियों से उसका संपर्क इत्‍यादि पर भी ध्‍यान देना होगा। हमें यह भी प्रयास करना होगा कि सोशल मीडिया और अन्‍य आधुनिक प्रौद्योगिकी का बेजा इस्‍तेमाल न हो तथा युवाओं को आतंकवाद की तरफ मोड़ने के प्रयासों को रोका जा सके।

मुझे खुशी है कि सभी सार्क सदस्‍य देशों ने हमारे इस प्रस्‍ताव का समर्थन किया है कि नई दिल्‍ली में 22-23 सितंबर, 2016 से सार्क आतंकवाद विरोधी प्रणाली को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों के उच्‍च स्‍तरीय समूह की दूसरी बैठक आयोजित की जाए। मुझे भरोसा है कि आप सभी इससे सहमत होंगे और मैं उम्‍मीद करता हूं कि बैठक अपने उद्देश्‍य को प्राप्‍त करेगी। मैं अपने गणमान्‍य सहयोगियों का ध्‍यान इस तरफ भी आ‍कर्षित करना चाहता हूं कि आपराधिक मामलों में पारस्‍परिक सहयोग संबंधी सार्क प्रस्‍ताव को तुरंत स्‍वीकार कर लिया जाए। कुछ सदस्‍य देश इस प्रस्‍ताव को अभी स्‍वीकार नहीं कर रहे हैं जिसके कारण हमें उसका पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। मैं उन सदस्‍य देशों से आग्रह करता हूं कि वे अतिशीघ्र उक्‍त प्रस्‍ताव को स्‍वीकार कर लें।

नशीले पदार्थों की तस्‍करी और उनके दुरुपयोग के कारण भी हमारे सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है जिसका बहुत दुष्‍प्रभाव पड़ रहा है। यह ऐसी समस्‍या है जो सीधे-सीधे संगठित अपराध से जुड़ी है। आज नशीले पदार्थों के व्‍यापार के जरिये अवैधानिक धनराशि का आवागमन हो रहा है। नशीले पदार्थों की तस्‍करी के साथ-साथ जाली मुद्रा के प्रसार की समस्‍या भी गंभीर हो गई है। इसके कारण आतंकवाद पनप रहा है और हमारे क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता को खतरा पैदा हो गया है। नशीले पदार्थों से संबंधित क्षेत्रीय प्रस्‍तावों के कार्यान्‍वयन के लिए हम हर संभव सहयोग देने, क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए तैयार हैं। इस समय इस बात की भी जरूरत महसूस की जा रही है कि सार्क आतंकवादी अपराध निगरानी डेस्‍क और सार्क नशीले पदार्थ आपराधिक निगरानी डेस्‍क को पूरी क्षमता से गतिशील किया जाए।महिलाओं और बच्‍चों की सुरक्षा के उपायों से सभी देश मजबूत होंगे। यह बहुत प्रासंगिक है कि सार्क ने इस क्षेत्र को प्राथमिकता दी है, क्‍योंकि सूचना प्रौद्योगिकी तथा विश्‍व अर्थव्‍यवस्‍था की परिवर्तनशीलता के कारण नये खतरे पैदा हो रहे हैं। भारत में हमने इस संबंध में कई नये कदम उठाए हैं, जिनमें बच्‍चों के बचाव के लिए ‘ट्रैक चाइल्‍ड’ राष्‍ट्रीय पोर्टल और ‘ऑपरेशन स्‍माइल’ जैसे कदम शामिल हैं। बच्‍चों के विरुद्ध हिंसा समाप्‍त करने के लिए दक्षिण एशिया पहल के संबंध में मंत्रिस्‍तरीय बैठक में हमने अपने अनुभवों को साझा किया था। इसका आयोजन अभी हाल में हमने किया था। हमारे प्रधानमंत्री ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे प्रमुख कार्यक्रम को शुरू किया है। यह कार्यक्रम तेजी से विकसित हो रहा है और लड़कियों की सुरक्षा, शिक्षा, जीवन और अधिकारिता सुनिश्चित करने की दिशा में बहुत योगदान कर रहा है।

इस मंच से हमने भ्रष्‍टाचार के खिलाफ सहयोग पर भी चर्चा की है। इस संबध में मैं उल्‍लेख करना चाहता हूं कि अधिक पारदर्शिता और सुशासन हमारी नीति की बुनियाद है। मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं कि हमारी वित्‍तीय समावेश संबंधी जनधन योजना, विशिष्‍ट पहचान प्रणाली आधार जैसी विश्‍व की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक प्रणाली और प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण के जरिये हम अपनी सेवाओं में आमूल परिवर्तन कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सार्वजनिक योजनाओं के लाभ मैदानी स्‍तर तक पहुंचें।

अगले कुछ महीनों में इस क्षेत्र के सभी नेता 19वें सार्क शिखर सम्‍मेलन में हिस्‍सा लेने के लिए इस्‍लामाबाद में जमा होंगे। मैं उम्‍मीद करता हूं कि हम अपने नेताओं को यह बताने में सक्षम होंगे कि पारस्‍परिक हितों से संबंधित क्षेत्रों में हमने क्‍या ठोस प्रगति की है। अध्‍यक्ष महोदय, यह समय कार्रवाई करने का है। इन्‍हीं शब्दों के साथ मैं आप सबके प्रति और अपने सभी विशिष्‍ट सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता व्‍यक्‍त करता हूं।

(साभार- PIB)

लोगों की ज़िन्दगी बचाते हुए फायर फाइटर ने गवां दी अपनी जान

अब्दुल फ़हद,

दुबई एयरपोर्ट पर हुए एमिरेट्स विमान की क्रैश लैंडिंग के बाद उसमें आग लग गई और वो पूरी तरह जल गया। अगर वक्‍त रहते इसमें सवार 300 लोगों को नहीं निकाला गया होता, तो कई जाने जा सकती थीं। लेकिन विमान में सवार लोगों को बचाने के बावजूद एक व्‍यक्ति की मौत हो गई और वो था फायर फायटर टीम का सदस्‍य।

इस बहादुर इंसान ने दूसरों को तो बचा लिया, लेकिन इस दुर्घटना से खुद को नहीं बचा पाया। जसिल इसा मोहम्‍मद हुसैन नाम के इस साहसी फायर फाइटर ने अल्‍टीमेट सेक्रि‍फाइज करते हुए 300 लोगों को दुर्घटनाग्रस्‍त विमान से सुरक्षित बाहर निकाला। उसकी मौत की खबर मिलने के बाद डायरेक्‍टर जनरल सिविल एविऐशन अथॉरिटी सैफ अल सुवैदी ने कहा कि फायर फायटर ने दूसरों की जान बचाते हुए खुद की जान दांव पर लगा दी।

गंभीर चोटों के चलते उनकी मौत हो गई। उनके बलिदान को सलाम करते हुए जनरल सिविल एविएशन अथॉरिटी ने कहा कि हम ऊपरवाले के शुक्रगुजार हैं कि उसकी दया के चलते बड़ा हादसा टल गया। लेकिन हमें दुख है कि इसमें हमारे एक फायर फायटर की मौत हो गई, जो दूसरों की जिंदगी बचाने में लगा था।

आज होगीगुजरात के नए सीएम की घोषणा

शिखा पाण्डेय,

आज गुजरात के नए मुख्यमंत्री की घोषणा की जाएगी। विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नितिन पटेल गुजरात के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

भाजपा संसदीय बोर्ड ने दिल्ली में बुधवार को हुई बैठक में मुख्यमंत्री पद से आनंदी बेन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। गुरुवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उम्मीदवार के चुनाव के लिए पार्टी नेताओं के साथ बैठक की। अब जो उम्मीदवार चुना जायेगा, संभवतः वही 2017 विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेगा।

गुजरात भाजपा के अध्यक्ष और प्रदेश के परिवहन मंत्री विजय रूपानी ने कहा कि शुक्रवार शाम गांधीनगर स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी के विधायकों और पदाधिकारियों की बैठक होगी और वहीं नए मुख्यमंत्री की घोषणा होगी। शाह के आवास पर हुई लंबी चर्चा के बाद रूपानी ने बताया, “अमित शाह के अलावा, पार्टी के सभी विधायक, पदाधिकारी और हमारे पर्यवेक्षक नितिन गडकरी तथा सरोज पांडेय बैठक में शामिल होंगे।”

बैठक के बाद जब संवाददाताओं ने नितिन पटेल से सवाल किया कि क्या वे मुख्यमंत्री पद स्वीकार करेंगे, तब साफ़ साफ़ खुलासा न करते हुए पटेल ने कहा, “पार्टी जिसे भी चुने, हम सभी साथ मिलकर काम करेंगे।” गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पद के लिए जिनके नाम सामने आ रहे हैं, वे हैं कैबिनेट में नंबर दो नितिन पटेल, केन्द्रीय मंत्री पुरूषोत्तम रूपाला और विधानसभा अध्यक्ष तथा आदिवासी नेता गनपत वासवा।

उत्तर प्रदेश: लगातार बढ़ रहे हैं दुष्कर्म के मामले, लचर कानून व्यवस्था

अनुज हनुमत,

लखनऊ। यूपी की अखिलेश सरकार का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है, लेकिन पिछले साढ़े चार वर्ष के अपने कार्यकाल में अखिलेश सरकार ने लचर होती कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कोई ठोस कद नहीं उठाये। इसीलिए इस समय यूपी में अपराधियों को कानून और प्रशासन से कोई डर नहीं नजर आ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यूपी में पिछले एक वर्ष में दुष्कर्म की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है।

बुलंदशहर की घटना के बाद महिलाओं के अपराध का शिकार होने से संबंधित आंकड़ों की पड़ताल की जा रही है और उन्‍हें रोकने में नाकाम पुलिस की सजगता को भी परखा जा रहा है। राज्य अपराध ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पिछले एक साल (2014 से 2015) में दुष्कर्म के मामलों में 161 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश राज्य अपराध ब्यूरो की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2014 में उप्र में दुष्कर्म की 3,467 घटनाएं हुई थीं, जो 2015 में बढ़कर 9,075 हो गईं।

अपराधियों के सामने बेबस नज़र आ रही यूपी पुलिस-

उत्तर प्रदेश सरकार भी प्रदेश में लगातार बढ़ रही इन घटनाओं को रोकने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। यूपी पुलिस की बात करें तो वह अपराधियों के सामने बेबस सी नजर आ रही है। ये आंकड़े आम आदमी में भय पैदा कर रहे हैं। देखने से तो ये महज कुछ आंकड़े ही लग रहे हैं, लेकिन तस्वीर इससे भी भयावह है। यदि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो 2014 की रिपोर्ट्स से मिले राष्ट्रीय आंकड़ों की उत्तर प्रदेश के आंकड़ों से तुलना करें, तो पता चलेगा कि यूपी में अपराध का औसत देशभर के अपराध के औसत से अधिक है। यूपी में होने वाले अपराध देश के अपराध से औसतन दो गुना अधिक हैं।

देश में जहां वर्ष 2010 से 2014 के बीच रेप के मामलों की संख्या 22,172 से बढक़र 36 हजार 735 हो गई। वहीं यूपी में रेप के मामलों की संख्या में इसी दौरान 121 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। यानी इस दौरान रेप के मामलों की संख्या 1,563 से बढक़र 3,467 हो गई। आज उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी का आलम है कि 5 करोड़ से ज्यादा बेरोजगार युवा ठोकर खा रहे हैं। और ये सब तब है, जबकि राज्य में लगभग 5 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं। बहरहाल जल्दी ही यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में लचर दिख रही कानून व्यवस्था अन्य सियासी रणनीतिकारों के लिए एक अचूक चुनावी ब्रह्मास्त्र साबित हो सकता है।