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Saturday, August 8, 2026
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चाचा-भतीजे में हो जाता है केंद्र के पैसे का बंटवारा, कैसे होगा विकास -अमित शाह

अमित द्विवेदी,

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर छींटाकशीं ज़ोर पकड़ती जा रही है। राजनीतिक पार्टियों ने आगामी चुनाव में लाभ लेने के लिए एक दूसरे को जनता के सामने नंगा करना शुरू कर दिया है। इसी फेहरिस्त में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लखनऊ में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र से भेजा गया पैसा यहाँ चाचा भतीजे में बंट जाता हैं। प्रदेश की जनता के पास भला कैसे पहुंचेगा। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश की समाजवादी सरकार पर यह आरोप लगाया कि वह केंद्र की लाभकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचने नहीं दे रही है।

शाह ने कहा कि राज्य में गरीबों का भला कैसे होगा, जब राज्य का मुखिया ही अपनी जनता के बारे में नहीं सोचता। मायावती पर भी हमला बोलते हुए शाह ने कहा कि बस वे भाषण में दलितों का भला करती हैं, असल में दलित हमेशा अकेले रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि मायावती बस दलितों की राजजनीति करती हैं।

जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि जिस भी प्रदेश में हमारी सरकार है, वहां विकास पर नज़र डालिए। हमें प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा-बसपा के चक्कर में उत्तर प्रदेश का विकास रूक गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए भाजपा को सत्ता में लाने की ज़रूरत है। जिससे प्रदेश का सही तरीके से विकाद हो सके।

झारखंड के चाईबासा में दो बसों में टक्कर, लगभग 10 की मौत, कई घायल

ब्यूरो
झारखंड के चाईबासा जिले में हाट गम्हरिया इलाके के पास दो बसों में भीषण टक्कर हो गयी, जिसमें लगभग 10 लोगों की मौत हो गयी है और कई यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों बड़ी गाड़ियों में इस भीषण टक्कर के कारण दोनों गाड़ियों की टंकियां फट गईं और डीजल में आग लग गयी। आपकी लपटें इतनी तेज थीं कि जल कर मरने वालों की हड्डियों का भी पता नहीं चल पा रहा है।

घटना स्थल पर आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड के दो वाहन पहुंचे हैं। प्रशासन की टीम राहत-बचाव कार्य में लगी है। 20 घायलों को सदर अस्पताल भेजा गया है।

अब तक प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ एक बस चाईबासा की ओर जा रही थी, जबकि दूसरी बस किरिबुरु की ओर जा रही थी। घटनास्थल पर टर्निंग भी है, जिससे गाड़ी के चालक रफ्तार पर नियंत्रण नहीं रख सके और दुर्घटना हो गयी। खबरों के मुताबिक मृतकों में दोनों वाहनों के चालक भी शामिल हैं।

” ‘आवाज़ ए पंजाब’ मात्र एक फोरम है, चुनाव में शिरक़त नहीं करेगा”-नवजोत सिंह सिद्धू

शिखा पाण्डेय

भाजपा का दामन हाल ही में छोड़नेवाले और ‘आवाज़ ए पंजाब’ का गठन करने वाले पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू ने आज एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ‘आवाज ए पंजाब’मात्र एक फोरम है, कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘आवाज ए पंजाब’ एक ऐसा फोरम है जो पंजाब की बेहतरी के लिए किसी भी गठबंधन का स्वागत करता है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा  कि उनका यह फोरम पंजाब के विधानसभा चुनाव में शिरकत नहीं करेगा।

उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर ने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। सिद्धू ने इससे पहले राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। नवजोत सिंह सिद्धू ने सितंबर के पहले सप्ताह में अधिकारिक रूप से अपनी नयी पार्टी ‘आवाज -ए- पंजाब’ के गठन की घोषणा की।

इस मौके पर उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह उन्हें ‘सजावटी समान’ की तरह इस्तेमाल करना चाहती थी, जिसका सिर्फ चुनाव में उपयोग किया जा सके। उन्होंने आम आदमी पार्टी और केजरीवाल पर भी यह आरोप लगाया कि वह उन्हें इस्तेमाल करना चाहते थे। एक बड़ा खुलासा करते हुए सिद्धू ने बताया कि  केजरीवाल ने उनसे कहा कि आप चुनाव ना लड़ें, हां अपनी पत्नी को चुनाव लड़वा सकते हैं, हम उन्हें मंत्रीपद भी दे देंगे।

92 साल पुरानी परंपरा समाप्त, रेल और आम दोनों बजट आएँगे साथ

अनुज हनुमत,

आखिरकार केंद्रीय कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए उस व्यापक बदलाव के प्रस्ताव पर आज मुहर लगा दी है, जिसमें रेल बजट को आम बजट में मिलाने तथा योजना-व्यय और गैर योजना-व्यय में भेद को समाप्त करने की बात कही गई थी। गौरतलब है कि रेल मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही बजट के विलय के प्रस्ताव को अपनी सहमति प्रदान कर चुके हैं। आज कैबिनेट की बैठक में सुरेश प्रभु और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ए के मित्तल भी शामिल थे।

आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद रेल बजट को अलग से पेश करने की 92 साल पुरानी परंपरा खत्म हो गई है, जोकि अपने आप में खास निर्णय है ।

सबसे खास बात यह है कि रेल मंत्रालय किराया और माल भाड़ा तय करने के अधिकार को अपने पास रखना चाह रहा है और रेल मंत्रालय बाजार से पैसा उठाने के अधिकार को भी वित्त मंत्रालय को नहीं देना चाहता,क्योंकि रेल मंत्रालय की सबसे बड़ी चिंता सातवें वेतन आयोग का बोझ और माल भाड़े से मिल रहे राजस्व में तेज कमी है।

कुलमिलाकर अगर सूत्रों की मानें तो,  रेल मंत्रालय को अब वित्त मंत्रालय के सामने कुल बजटीय आवंटन के लिए सरकार के सामने हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा और रेल किराया बढ़ाने के अधिकार को लेकर वित्त और रेल मंत्रालय सहमत है कि आने वाले दिनों में किराये में कमी और वृद्धि के लिए रेल किराया प्राधिकरण बनाया जायेगा।

आपको बता दे कि रेलवे के कर्मचारियों को 2016-17 दौरान 70 हजार करोड़ रुपये, बिजली के लिए 23 हजार करोड़ रुपये व सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन मद में 45 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है और सरकार को लाभांश के तौर पर देने के लिए रेलवे को करीब 5500 करोड़ रुपये के राजस्व की आवश्यकता है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जानकारों की मानें तो अब रेलवे की स्थिति में और भी सुधार होगा।

प्रधानमंत्री मोदी को एक युवा हिंदुस्तानी का पत्र

प्रिय प्रधानमन्त्रीजी ,
हमारा पड़ोसी देश ‘आतंकवाद’ का रास्ता अपनाकर लगातार हमारे जवानों को मौत की नींद सुला रहा है और हमारे देश के स्वाभिमान का लगातार बलात्कार करने पर अमादा है। ऐसे वक्त में जब आपका व्यक्तित्व पूरे विश्व को शांति का एक नया सन्देश दे रहा है, अपने ही देश में अशांति क्यों ? सवा सौ करोड़ देश की जनता को आप पर विश्वास है कि पड़ोसी मुल्क के घृणित कार्यों पर आप लगाम लगाएंगे। लेकिन एक बात समझ नहीं आती कि ऐसे समय में जब देश की सभी राजनीतिक पार्टियों को एक मंच पर आकर आतंकवाद से निपटने के लिए ठोस कदम उठाना चाहिए, ऐसी स्थिति में भी हमारे देश के अधिकांश नेताओं की ‘मर्दानगी’ सियासी कुर्सी के लालच में चूड़ियाँ पहनकर बैठ जाती है।

125 करोड़ भारतीय हैं, ‘हम’ चाहे तो हमारी एक हुंकार से पड़ोसी देश में सुनामी आ सकती है, लेकिन हमारे यहाँ की आपसी राजनीतिक नूराकुश्ती के सियासी बुखार ने विश्व के सबसे मजबूत ‘भारतीय लोकतंत्र’ को भी बीमार कर रखा है। सर, तमाम सोशल साइट्स में अधिकांश लोगों द्वारा आपको युद्ध की सलाह दी जा रही है, लेकिन ऐसे मसले पर युद्ध ही अंतिम उपाय नही! सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि पिछले 50 सालों से ‘आतंकवाद’ पर जनप्रतिनिधि कोई ठोस हल क्यों नही ढूंढ पाये ? सर आपको भी पता है कि पहले आजादी के लिए हजारों-लाखों शहीद हुए और अब हम अपने ही देश शांति के लिए पड़ोसी मुल्क से भींख मांग रहे हैं। ऐसा कहाँ तक न्यायोचित है ?

सर एक कड़वा सच लिख रहा हूँ शायद अधिकांश जनप्रतिनिधियों को पढ़कर अच्छा न लगे, लेकिन आज ऐसी स्थिति में लिखना पड़ रहा है। देश की जनता द्वारा 1947 से लेकर अब तक चुने गए अधिकांश जनप्रतिनिधियों के ऐशो-आराम में तो कभी कोई कमी दिखी, फिर भी इस आतंकवाद को नासूर क्यों बनने दिया गया ? इसका कोई ठोस हल क्यों नहीं निकला। टैक्स भी हमारा और खून भी हमारा।

सर आज भी देश की जनता को आप पर पूर्ण विश्वास है कि आप इस ना’पाक पड़ोसी के घृणित कार्यों का मुंहतोड़ जवाब देंगे। हमें भी पता है कि हमारा देश विकास के रास्ते पर दुगुनी रफ़्तार से दौड़ रहा है और अन्य विकसित और विकासशील देश नहीं चाहते कि हम उनसे आगे निकल पाएं, इसीलिए हमारे देश में बीते कई दशक से प्रायोजित आतंकवाद फैलाया जा रहा है। इस समय पूरे संयम से काम लेना की आवश्यकता है।

सर मैंने बचपन में पढ़ा था कि देश की आजादी प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं होता। हमें उसकी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सतत जागरूकता की आवश्यकता होती है। देश की स्वतंत्रता और अखण्डता को कायम रखने के लिए हमें अपने साधनों से सुरक्षा-व्यवस्था को गठित करना पड़ता है, ताकि हम किसी संकट का सामना करने के लिए सदैव प्रस्तुत रहें। जो देश अपनी रक्षा करने में स्वयं समर्थ नहीं होते, उनकी आजादी अधिक दिन तक नहीं टिक सकती। अत: हर लोकतांत्रिक देश के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था को भली-भाँति कायम रखना अनिवार्य है।

भारतीय उपमहाद्वीप के विभाजन के बाद भारत स्वतंत्र हुआ। प्रारंभ से ही पड़ोसी राष्ट्र भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण व्यवहार करता रहा है। भारत को 1962 में चीन के हमले तथा 1965 और 1971 में पाकिस्तानी हमलों का मुकाबला करना पड़ा है। हमारी अच्छी सुरक्षा-व्यवस्था के कारण ही हम अपने देश को बचा पाये हैं। आज पाकिस्तान नए-नए किस्म के आधुनिक हथियारों को जमा कर रहा है। उसने परमाणु बम बनाने के साधन तक जुटा लिए हैं और अपने देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के स्थान पर वह हथियारों पर ध्यान लगा रहा है। जाहिर है कि कभी भी हमारे देश को इनका सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में देश की सुरक्षा व्यवस्था को और भी मजबूत बनाने की बड़ी आवश्यकता है, ताकि हम हर संकट का सफलतापूर्वक मुकाबला कर सकें और इसके लिए आवश्यक है कि सभी राजनीतिक पार्टी अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आये और आतंकवाद के खिलाफ इस कठिन लड़ाई में जनता का साथ दें, जिससे देश का स्वाभिमान बच सके।

सर, मैं भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के ‘अहिंसा के मार्ग’ को मानने वाला हूँ और जानता हूँ कि अहिंसा से शांति स्थापित की जा सकती है, लेकिन जब खुद अहिंसा का मार्ग ही खतरे पर हो तो फिर शांति केवल अस्त्र-शस्त्र से लाई जा सकती है । बार बार खून के आंसू रोने से अच्छा है, कोई ठोस निर्णय लिया जाये।

भारत माता के स्वाभिमान को बचाने में एक बार फिर उरी में दर्जनों भारतीय सपूतों की जान चली गई। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। सर (प्रधानमन्त्री जी), आपसे निवेदन है कि पाक को कड़ा जबाव मिलना चाहिए, जिससे देश के जाबांजों का बलिदान निर्रथक न होने पाये और हर माँ खुशी खुशी अपने बच्चों को तिलक लगाकर देश की सेवा की खातिर सरहद पर भेज सके।

जय हिंद
अनुज हनुमत।

कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठक जारी, हो सकता है अहम फैसला

अनुज हनुमत,

उरी में आतंकी हमले के बाद चौतरफा दबाव झेल रही केंद्र की मोदी सरकार पर पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने दबाव बढ़ता जा रहा है। लगातार केंद्र में गहमागहमी और बैठकों का दौर जारी है और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट की सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई है। जिसे बहुत ही ज्यादा अहम माना जा रहा है। इस बैठक में उरी हमले में शहीद जवानों और उसके बाद के हालात पर चर्चा हो सकती है।

सूत्रों की मानें तो मोदी सरकार कोई बड़ा फैसला ले सकती है यानि की सुरक्षा समिति की बैठक में उरी हमले का जवाब किस तरह से दिया जाए, इस नीति पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। साथ ही साथ इस बैठक में मंगलवार को उरी में एलओसी पर पाकिस्तानी फौज की ओर से जारी फायरिंग और मुठभेड़ में 10 आतंकियों के मारे जाने पर भी चर्चा होगी।

मोदी सरकार इस हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही करने को लेकर हीलाहवाली करने के मूड में नहीं है। केंद्रीय सुरक्षा समिति भारत का रक्षा बजट तय करती है और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले भी तय करती है और साथ ही साथ सुरक्षा से जुड़ी अहम नियुक्तियों की जिम्मेदारी भी इसी की है।

जानकारी के लिये आपको बता दें कि रविवार को तड़के उरी में सेना के कैंप पर पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हमला कर दिया था, जिसमें 18 जवान शहीद हो गए थे। जिसके बाद से ही देशवासिसों में भारी नाराजगी है और वो सरकार से मांग कर रहे हैं कि पाकिस्तान को इस हमले का कड़ा जवाब दिया जाए। सोशल साइट्स से लेकर धरातल तक सभी प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांग रहे हैं।

कुमार सानू ने पाकिस्तान जाने से किया इन्कार, कहा, ‘देश से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं’

अमित द्विवेदी,

उरी में हुए आतंकी हमले का चौतरफा विरोध हो रहा है। इसका असर अब सांस्कृतिक गतिविधियों में भी होता नज़र आ रहा है। गायक कुमार सानू ने अपनी पाकिस्तान यात्रा रद्द करते हुए कहा कि जो हमारे देश के जवानों पर कायरतापूर्ण हमले करता ही वहाँ मैं कार्यक्रम कैसे कर सकता हूँ।

आगामी 26 सितंबर को पाकिस्तान के लाहौर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमे कुमार सानू को शिरकत करना था। उरी आतंकी हमले के बाद कुमार सानू ने आयोजक को फोन करके साफ़ मना कर दिया कि वे इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सकते।

उरी में सैनिक छावनी पर आतंकियों के हमले के विरोध में कुमार सानू ने अपनी पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी है। कुमार सानू ने कहा कि जिस देश ने आपके देश के जवानों पर हमला किया उस देश में जाकर मैं कार्यक्रम नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि व्यवसाय अपनी जगह है देश अपनी जगह और हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण देश है।

आतंकी देश घोषित हो पाकिस्तान, अमेरिकी संसद में विधेयक हुआ पेश

पाकिस्तान में फिर आतंकी हमला

अनुज हनुमत,

उरी में हुए सैन्य शिविर पर आतंकी हमले को लेकर पहले रूस का साथ और अब अमेरिका के राजनीतिक दलों के दो प्रभावशाली सांसदों का साथ मिला है। आपको बता दें कि दोनों सांसदों ने पाकिस्तान को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश घोषित करने के लिए प्रतिनिधि सभा में एक विधेयक पेश किया है।

कांग्रेस के सदस्य एवं आतंकवाद पर सदन की उपसमिति के अध्यक्ष टेड पो ने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि हम पाकिस्तान की धोखाधडी के लिए उसे धन देना बंद कर दें और उसे वह घोषित करें जो वह है , आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश।’ इस बिल को रिपब्लिकन पार्टी के पो और डेमोक्रेटिक पार्टी से कांग्रेस के सदस्य डाना रोहराबाचर ने पेश किया है। ख़ास बात यह है कि रोहराबाचर आतंकवाद पर कांग्रेस की प्रभावशाली समिति के रैंकिंग सदस्य हैं।

उपसमिति के अध्यक्ष टेड पो ने कहा, ‘‘पाकिस्तान विश्वास न करने योग्य सहयोगी ही नहीं है, बल्कि उसने अमेरिका के शत्रुओं की वर्षों से मदद भी की है और उन्हें बढावा भी दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘‘ओसामा बिन लादेन को शरण देने से लेकर हक्कानी नेटवर्क के साथ उसके निकट संबंध तक, इस बात से पर्याप्त सबूत हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ जंग में किस ओर है और वह अमेरिका की ओर नहीं है।’

पो ने आगे कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा को इस विधेयक के पारित होने के 90 दिनों में एक रिपोर्ट जारी करने बताना होगा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को समर्थन मुहैया कराया है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘इसके 30 दिनों बाद विदेश मंत्री को एक और रिपोर्ट जारी करनी होगी, जिसमें उन्हें या तो पाकिस्तान को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश कहना होगा या फिर इस बात का स्पष्टीकरण देना होगा कि कानूनी रुप से पाकिस्तान को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश क्यों घोषित नहीं किया जा सकता।’

पाकिस्तान 30 सालों से आतंक को कर रहा प्रायोजित-

इस बीच कांग्रेस के एक अन्य सदस्य पीट ओल्सन ने कहा, ‘‘मैं कश्मीर में भारतीय सैन्य अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें 18 भारतीय जवानों की जान चली गई। भारत शांति में मजबूत साझेदार एवं सहयोगी है।’ ओल्सन ने कहा, ‘‘मैं इस घृणित कृत्य को अंजाम देेने वालों को खोजने के हर प्रयास का समर्थन करता हूं, ताकि अपराधियों को न्याय के दायरे में लाया जा सके। मैं पीडितों के परिजन के प्रति संवेदनाएं प्रकट करता हूं।’ ‘ओवरसीज फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी (ओएफबीजेपी) -यूएसए’ ने कहा, ‘‘पाकिस्तान लगभग 30 वर्षों से अपनी रणनीतिक नीति के रुप में आतंकवाद को प्रायोजित कर रहा है, ताकि वह सीमा पार से अपने नापाक इरादों को अंजाम दे सके।

अमेरिकी सांसदों के इस बयान के बाद पाकिस्तान एक बार फिर बुरी तरफ से बैकफुट पर आ गया है। अमेरिकी सांसद यहीं नहीं रुके, बल्कि उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में पाकिस्तान वैश्विक आतंकवाद का उद्गम स्थल एवं केंद्र बन गया है।’ उन्होंने कहा, ‘‘ओएफबीजेपी-यूएसए का मानना है कि उरी में पाकिस्तानियों ने भारतीय सेना पर जो हमला किया है, उसे घुसपैठियों द्वारा अंजाम दी गई आतंकवाद की एक अन्य घटना करार नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि इसके पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ युद्ध के कृत्य के रुप में देखा जाना चाहिए और भारत को पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने के लिए जवाबी कार्रवाई करनी चाहिए।’

नवाज़ शरीफ़ का नाम ‘बेनवाज़ शरीर’ रख दिया जाना चाहिए -सलीम ख़ान

शिखा पाण्डेय,

पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा भारत पर किए गए हमले से पूरा भारत बौखलाया हुआ है। बॉलीवुड पटकथा लेखक सलीम खान ने भी ट्विटर पर पाकिस्तान के प्रति अपना रोष ज़ाहिर किया है। ट्विटर पर नवाज शरीफ पर कटाक्ष करते हुए सलीम ने लिखा है कि उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का नाम ‘बेनवाज शरीर’ रख दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब  पाकिस्तान में कोई अपने प्रधानमंत्री की नहीं सुनता तो क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कोई भारत के बारे में उनकी शिकायत पर ध्यान देगा?

सलीम ने मंगलवार को ट्वीट किया, ” माफ़ी चाहता हूं  शरीफ साहब,लेकिन जिन लोगों ने आपका नाम रखा था, वे आपकी विशेषताओं के बारे में जानते तो वे आपका नाम ‘बेनवाज शरीर’ रख देते। उनसे एक बड़ी गलती हुई है।”

उन्होंने नवाज़ शरीफ़ को लताड़ते हुए कहा, ” यह आपकी अपनी स्वीकृति है कि पाकिस्तान में कोई भी आपकी नहीं सुनता, चाहे वह सेना हो, आपकी संसद या आपकी जनता। पता नहीं, आपका सम्मानित परिवार भी आपकी सुनता है या नहीं?”

they would have named you Be-Nawaz Sharir.A big blunder has been comitted. Its your own admission that no one listens to u in Pakistan be it your army, your parliament or your people. Wonder if your respected family listens to you ???

— Salim Khan (@luvsalimkhan)September 20, 2016

उरी आतंकी हमला: नहीं जले गाँव में चूल्हे, भारी मन से दी गई शहीद को अंतिम विदाई

इंद्रकुमार विश्वकर्मा,

कश्मीर के उरी में आतंकी हमले में शहीद राजेश सिंह के गांव जौनपुर के भकुरा में कल चूल्हे नहीं जले। शहीद के गम में उसके घर वाले ही नहीं, बल्कि पूरा गाँव शोकाकुल है। गाँव में उसके संगी साथी बचपन में उसके साथ बिताए क्षणों को यादकर भावुक हो रहे हैं। शहीद राजेश सिंह को कल देर रात जौनपुर में गोमती नदी के तट रामघाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

सरायख्वाजा क्षेत्र के भकुरा गांव स्थित शहीद राजेश सिंह के घर पर जिलाधिकारी भानुचन्द्र गोस्वामी, पुलिस अधीक्षक अतुल सक्सेना, वाराणसी के गोरखा रेजिमेंट के मेजर आदित्य पाटिल, प्रदेश के राज्यमंत्री जगदीश सोनकर, सांसद के पी सिंह, पूर्व विधायक सुरेन्द्र प्रताप सिंह, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष इन्दभुवन सिंह, उपजिलाधिकारी सदर आर के पटेल, राकेश उपाध्याय और हरेन्द्र सिंह ने शहीद के शव पर पुष्प चक्र एवं माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

कल रात शहीद की शवयात्रा जब निकली तो सबकी आंखे नम हो गईं। शवयात्रा जौनपुर के पचाहतियां स्थित गोमती नदी के तट रामघाट पहुंची, जहाँ पर पुलिस एवं सेना के जवानों ने शहीद को अंतिम विदाई दी। शहीद को मुखाग्नि उनके पिता ने दी। भकुरा गांव निवासी राजेन्द्र सिंह के तीन पुत्रों में राजेश कुमार सिंह सबसे छोटे थे। सबसे बड़े उमेन्द्र एवं उनसे छोटे राकेश हैं।

इस घटना से आहत परिवार के लोगों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया है। शहीद राजेश सिंह के पिता राजेन्द्र सिंह, माता परमावती देवी, पत्नी जूली सिंह, पुत्र ऋषांत सिंह एवं परिवार के अन्य सदस्य बेहाल हैं। कल रात भकुरा गांव में किसी के घर चूल्हा नहीं जला, चारों तरफ मातमी सन्नाटा पसरा है।

जिलाधिकारी भानुचन्द्र गोस्वामी ने कहा कि शहीद परिवार के इस दु:ख के घड़ी में प्रशासन उनके साथ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शहीद के परिवार को 20 लाख रूपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।