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Saturday, August 8, 2026
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राहुल के ‘खून की दलाली’ वाले बयान के जवाब में बीजेपी नेता की अभद्र टिप्पणी, राहुल की पैदाइश पर उठाया सवाल

शिखा पाण्डेय,

सेना द्वारा पाकिस्तान में की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री मोदी पर ‘सेना के खून की दलाली’ जैसी अभद्र टिप्पणी कर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तो देश भर में आलोचना का शिकार बने ही हैं, अब भारतीय जनता पार्टी के सांसद बाबू लाल ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सीकरी से बीजेपी सांसद बाबूलाल ने राहुल गांधी की पैदाइश पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

राहुल गांधी की आपत्तिजनक टिप्पणी पर निशाना साधते हुए बाबूलाल ने कहा, “राहुल गांधी को किस चीज का सबूत चाहिए? सबूत तो राहुल गांधी के पास खुद नहीं है कि वे किसकी पैदाइश हैं। ये लोग हमारी सेना पर उंगली उठा रहे हैं। इसलिए ऐसे लोगों को पाकिस्तान या दुबई भेज देना चाहिए।”

उनके इस बयान के बाद कांग्रेस उनपर मुकदमा दर्ज करवाने की तैयारी में है क्योंकि कांग्रेस को भी इस बयान के बाद बीजेपी पर हमला करने का मौका मिल गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि राहुल गाांधी ने कभी सैनिकों को बुरा नहीं कहा तो क्यों बीजेपी नेता उनपर बयान दिए जा रहे हैं?

आम आदमी पार्टी ने बाबूलाल के बयान की निंदा की है। आम आदमी पार्टी के पूर्व उत्तराखंड प्रभारी अनूप नोटियाल का कहना है की इस तरह के बयानों से देश का नुकसान होता है इस लिए इस तरह के बयान किसी को भी नहीं देने चाहिए।

इधर बीजेपी ने उनके बयान से किनारा कर लिया है। उत्तराखंड बीजेपी महिला मोर्चे की अध्यक्ष नीलम अग्रवाल का कहना है की इस तरह के बयानों से सभी को बचना चाहिए और सभी नेताओं को हमारे हाईकमान ने पहले ही मना किया हुआ है इस लिए ये उनका व्यक्तिगत बयान हो सकता है पार्टी का नहीं।

गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 6 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जवानों की शहादत का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास करने का आरोप लगाया था। गांधी ने कहा था, “जो हमारे जवान हैं, जिन्होंने अपना खून दिया है, जम्मू और कश्मीर में खून दिया है, जिन्होंने हिन्दुस्तान के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किये हैं, उनके खून के पीछे आप (मोदी) छिपे हैं। उनकी आप दलाली कर रहे हैं। ये बिल्कुल गलत है।”

कोच्चि का ‘पीस इंटरनेशनल स्कूल’ बच्चों को सिखाता है धर्म के लिए जान देना

ब्यूरो,

विद्यालय, जहाँ विद्यार्थी जाति, धर्म, ऊँच-नीच से परे अपने उज्जवल भविष्य की तैयारी करता है, वहीं अगर उसका भविष्य गर्त में ढकेला जाए, तो निश्चित ही यह भारत के भविष्य के लिए अत्यंत चिंताजनक है। केरल के कोच्ची शहर से ऐसी ही एक चिंतनीय खबर सामने आयी है। कोच्ची के एक स्कूल पर आरोप है कि वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आपत्तिजनक सामग्री पढ़ाकर इस्लाम के लिए जान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था।

आपको बता दें कि कोच्ची के एर्नाकुलम में स्थित इस विद्यालय का नाम ‘पीस इंटरनेशनल स्कूल’ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार  इस स्कूल को ऐसा करने का आदेश देने वाला शख़्स विवादित धर्मगुरु जाकिर नाईक का परिचित है जो उस इलाके का एक जाना माना बिजनेसमैन है।

दरअसल, स्कूल के खिलाफ एर्नाकुलम जिले के शिक्षा अधिकारी ने शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने स्कूल की एक रिपोर्ट भी तैयार की थी जिसमें उन्होंने लिखा था कि स्कूल में जो कुछ भी पढ़ाया जा रहा है वह धर्म निरपेक्षता के बिलकुल ख़िलाफ़ है। सूत्रों के अनुसार उस विद्यालय में विद्यार्थियों को इस्लाम के लिए जान तक देने जैसी शिक्षा दिनजाति है।

इस विषय में जानकारी मिलते ही पुलिस ने स्कूल पर आईपीसी की धारा 153A और 34 लगाई है जिसके तहत स्कूल के प्रिंसिपल, व्यवस्थापक और तीन ट्रस्टीज के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह स्कूल LKG से आठवीं तक के बच्चों को पढ़ाता है। कुछ लोगों को शक है कि जाकिर नाईक के कहने पर ही स्कूल के पाठ्यक्रम में विवादित चीजें डाली गई थीं।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में हमला करने वाले युवा लड़कों के जाकिर नाईक से प्रेरित होने की बात पता चलने के बाद से ज़ाकिर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। तभी से उनका जैम कर विरोध भी हो रहा है। बांग्लादेश में उनपर अब बैन लगा दिया गया है। कनाडा, लंदन जैसे कई देशों में उनपर पहले ही बैन है। इसके अतिरिक्त हाल ही में केरल से 6 संदिग्ध लोगों को आईएसआईएस से संबंध होने के शक़ में गिरफ्तार भी किया गया है।

अब अस्पताल में रोबोट रखेगा आपका ख़याल!

सौम्या केसरवानी,

अब दोबारा जब आपको अस्पताल जाना पड़े तो नर्सिंग सहयोगी कोई इंसान नहीं बल्कि रोबोट हो सकते हैं। इसके लिए हमें वैज्ञानिकों का शुक्रिया करना होगा, जिन्होंने रोबोट को इंसान के सभी कामों की नकल का प्रशिक्षण दिया है।

मरीजों की सुविधा के लिए वैज्ञानिकों ने दिन रात मेहनत करके यह नई व्यवस्था तैयार की है, जिससे बिना त्रुटि लगातार सेवा दी जा सके। इटली के पॉलिटेक्नीको डि मिलानो की एलेना डि मॉमी और उनके सहयोगियों द्वारा किये गये खोज में इस बात के संकेत मिलते हैं कि सर्जरी और अन्य महत्वपूर्ण अवसरों पर इंसान और रोबोट प्रभावी तरीके से अपने कामों को स्पष्ट रूप से कर सकते हैं।

खोजकर्ताओं ने कहा कि दूसरी बात ये है कि रोबोट इंसानों की तरह थकते नहीं है और जिससे गलती होने की गुंजाइश में कम होगी और सेवाओं में सुधार होगा।

स्वस्थ रहें…मस्त रहें

इंद्रकुमार विश्वकर्मा,

स्वास्थ्य ही जीवन का मूल है। एक सुखी स्वस्थ जीवन के लिए तन और मन दोनों का स्वस्थ होना बहुत आवश्यक है। आपने कभी सोचा है, या ध्यान दिया है कि जब हम बीमार होते हैं, तब हमको कुछ भी अच्छा नहीं लगता। न हम ठीक से काम कर पाते हैं, न आराम और न ही कुछ और। न हमको खाना अच्छा लगता है और न ही कही घूमने जाना।

हमारा स्वास्थ्य ही हमारी असली पूंजी है। एक स्वस्थ व्यक्ति ही अच्छा जीवन जी सकता है। इसीलिए अगर आपको अपने जीवन का पूरा आनंद उठाना है, तो अपनी सेहत का ख्याल रखिए।

कुछ नुस्खे आपके तन को स्वस्थ रखने के लिए-
-रोज़ स्नान कीजिये व स्वच्छ रहिये।
-पर्याप्त नींद (7-8 घंटे)
-स्वस्थ और पौष्टिक आहार खाइए, जंक भोजन जैसे की बर्गर, पिज़ा इत्यादि न खाइए या कम खाइए।
-रोज़ व्यायाम कीजिये।
-खूब पानी पीजिये।
-रसदार फल जैसे की संतरा, सेब, आम, केला इत्यादि रोज़ खाइए।
-नारियल पानी भी सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है।

तन की सेहत के साथ मन का स्वस्थ रहना भी आवश्यक है।

मन या दिमाग को स्वस्थ रखने के नुस्खे
-तनाव या स्ट्रेस न लें।
-पर्याप्त नींद लें।
-रोज़ व्यायाम करें।
-अगर कोई बात परेशान कर रही हो, तो किसी मित्र से बात करें या किसी कागज़ पर लिख दें।
-मधुर संगीत भी मस्तिष्क के लिए अच्छा होता है।
-पौष्टिक आहार लें व खूब जल पियें।
-अगर आपको लगे कि चिंता हद से ज्यादा हो रही है, तो किसी मनोवैज्ञानिक की सलाह लें।
-अनावश्यक तनाव से बचें।

यूपी: दयाशंकर की पत्नी स्वाति सिंह बनी भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष, बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

अनुज हनुमत,

किसी ने सही कहा है कि राजनीति में आपका इंट्रेस्ट हो न हो, लेकिन राजनीति का इंट्रेस्ट आपमें हमेशा रहता है। ऐसा ही एक वाकया तब देखने को मिला, जब बसपा सुप्रीमो मायावती को अश्लील टिप्पणी करने के मामले में भाजपा के नेता दयाशंकर सिंह बुरी तरह फंसे और पार्टी के लिए बड़ी मुसीबत बन गए। उस वक्त सियासत तब और गर्म हो गई जब बीएसपी के लोगों ने दयाशंकर की पत्नी और बेटी के लिए भी वैसी ही भाषा का प्रयोग कर बदला लिया था।

इस मामले के बाद स्वाति ने भी बीएसपी नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और फिर शुरू हुआ एक नया घटनाक्रम, जिसने यूपी में भाजपा को एक नई संजीवनी प्रदान कर दी और दयाशंकर सिंह की टिप्पणी से बैकफुट पर आई पार्टी को स्वाति सिंह (दयाशंकर सिंह की पत्नी) के रूप में सूबे में एक नया चेहरा मिल गया।

अब इसी चेहरे को आगे करते हुए यूपी भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या ने मिशन-2017 से पहले विरोधियों के खेमे में हलचल पैदा करने के खातिर स्वाति सिंह को पार्टी की महिला प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नई जिम्मेदारी दी है।

खास बात यह है कि स्वाति सिंह उस समय सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी और कहा था कि मायावती यूपी में किसी भी सामान्य सीट से चुनाव लड़ें, वो खुद उनके खिलाफ चुनाव लड़ेगी।

स्वाति ने उस समय कहा था कि चुनाव लड़ने से ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा मां और बेटी के सम्मान की लड़ाई है। चुनाव अगले साल होंगे, इसलिए हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि चुनाव की बात से मेरी लड़ाई कमजोर होगी। इसलिए इस बारे में कोई बात नहीं करें।

आपको बता दें कि स्वाति सिंह यूपी की सियासत के लिए कभी जाना पहचाना चेहरा नहीं रहीं, लेकिन आज वो प्रदेश सबसे चर्चित हस्तियों में शुमार हैं।शायद इसी का परिणाम है कि पार्टी द्वारा उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

सबसे अहम बात यह है कि 2017 में यूपी में चुनाव होने हैं और चुनाव को लेकर कोई भी राजनीतिक दल किसी भी तरह का मौका नहीं चूकना चाहती है। सूबे के सियासी पंडितों की मानें तो बीजेपी का ये कदम चुनावी नजर से काफी अहम साबित हो सकता है।

एयरफोर्स डे पर सेना ने दिखाया दम, राष्ट्रपति सहित पीएम मोदी ने किया सैल्यूट

सौम्या केसरवानी,

आज एयरफोर्स डे है। भारत देश की वायुसेना आज 84 साल की हो गई। इस मौके पर गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर परेड के साथ साथ वायुसेना की अदम्य ताकत का प्रदर्शन किया जा रहा है। लड़ाकू विमान, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलीकॉप्टर फ्लाई पास्ट में हिस्सा ले रहे हैं।

इस कार्यक्रम में पहली बार फ्लाई-पास्ट में स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस भी शिरकत करेगा। वायुसेना की स्थापना आठ अक्टूबर 1932 में की गई थी, और आज 84 साल पूरे हो गये हैं।

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भारतीय वायुसेना की 84वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या के अवसर पर एयरफोर्स को बधाई दी और कहा कि राष्ट्र को वायु सेना की क्षमता और दक्षता पर गर्व है और आधुनिकीकरण के फलस्वरूप यह भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम सामरिक बल बनेगा।

वायुसेना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करके वायुसेना को बधाई दी है। वायु सेना के जवानों के साथ अपनी एक फोटो ट्वीट कर पीएम ने कहा कि एयरफोर्स डे के मौके पर मैं अपने जवानों और उनके परिवार को सैल्यूट करता हूं। हमारे आसमान की सुरक्षा की लिए मैं आप लोगों को धन्यवाद देता हूं। आपकी ताकत भारत को गौरवांवित कराती है।’

बहुएँ हो जाएं सावधान! टीवी सीरियल देखकर घर में मचाया उत्पात, तो पति देगा तलाक़

शिखा पाण्डेय,

अब सास बहू की आपसी साज़िशों के एपिसोड्स को घर में लाइव परफॉर्म करने वाली बहुओं को सजग हो जाना होगा, क्योंकि उच्चतम न्यायालय उनके लिए एक अत्यंत कड़ा कानून लाया है। सुप्रीम कोर्ट के नए फरमान के अनुसार अगर कोई महिला अपने पति को उसके  बूढ़े मां-बाप से अलग रहने को मजबूर करती है, तो उसका पति उसे तलाक दे सकता है क्योंकि हिन्दू लॉ के मुताबिक कोई भी महिला किसी भी बेटे को उसके मां-बाप के प्रति पवित्र दायित्वों के निर्वहन से मना नहीं कर सकती है।

आपको बता दें कि कोर्ट ने कर्नाटक की एक दंपत्ति के तलाक की अर्जी को मंजूरी देते हुए ये टिप्पणी की है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि माता-पिता से अलग रहने की पश्चिमी सोच हमारी सभ्यता-संस्कृति और मूल्यों के खिलाफ है।

जस्टिस अनिल आर. दवे और जस्टिस एल. नागेश्वर राव की खंडपीठ ने कहा कि शादी के बाद लड़की पति के परिवार की सदस्य बन जाती है। वह इस आधार पर उस परिवार से अपने पति को अलग नहीं कर सकती है कि वो अपने पति की आय का पूरा उपभोग नहीं कर पा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने जजमेंट में लिखा, “एक बेटे को उसके मां-बाप ने न केवल जन्म दिया, बल्कि पाल-पोसकर उसे बड़ा किया, पढ़ाया, लिखाया। अब उसकी नौतिक और कानूनी जिम्मेवारी बनती है कि वह बूढ़े मां-बाप की देखभाल करे। खासकर तब जब उनकी आय या तो बंद हो गई है या कम हो गई है।”

‘अतुल्य भारत’ में अब भी अनेकों दलित व आदिवासी बालिकाएं शिक्षा से वंचित!

अनुज हनुमत,
कहने को तो हमारा देश चाँद और मंगल तक उड़ान तय कर चुका है लेकिन आज भी इस अतुल्य भारत की कई ऐसी तस्वीरें देखने को मिल जाती हैं, जो दिल और दिमाग दोनों को झकझोर देती हैं।  ये तस्वीर हमारे देश के कुछ ऐसे पिछड़े इलाकों की हैं जहाँ दलित व आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा सामान्य वर्ग की बालिकाओं से काफी पीछे है।

आपको बता दें की देश कि सामाजिक बनावट व आर्थिक श्रेणीबद्धता ‘सभी के लिए एक जैसी शिक्षा’ के सिद्धांत के सामने हमेशा यही यक्ष प्रश्न रहा है और शिक्षा हमेशा स्तरीय खांचों में बंटी रही है लेकिन सबसे बदहाल स्थिति ये है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद शिक्षा के मामले में आज तक दलित और आदिवासी बालिकाओं की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं आया है ।

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सामान्य जनसंख्या के सापेक्ष दलित बालिकाओं का ड्रॉप आउट अंतर बहुत ज्यादा है। उच्च शिक्षा में भी दलित वर्ग की बालिकाओं का अनुपात सामान्य वर्ग की बालिकाओं की तुलना में बहुत पीछे है।
उच्च शिक्षा में सकल नामांकन दर 13.8% है, जबकि अनुसूचित जाति की बालिकाओं की दर 1.8 % एवं अनुसूचित जनजाति की बालिकाओं की दर 1.6% मात्र है। 6 से 14 आयु वर्ग के 35.1 लाख आदिवासी बच्चों में 54 प्रतिशत अभी भी स्कूलों से बाहर हैं। इस आयु वर्ग में 18.9 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं।

आदिवासी मामलों के जानकार बुन्देलखण्ड के प्रसिद्ध शिक्षाविद् शंकर प्रसाद द्विवेदी का मानना है कि
आदिवासी बालिकाओं में शिक्षा के प्रति अभिरुचि पैदा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को जनता के साथ मिलकर लोगों में जागरूकता पैदा करने की जरुरत है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति की बालिकाएं शिक्षा के मामले में अपने वर्ग के बालकों एवं सामान्य वर्ग की बालिकाओं से बहुत पीछे हैं।

शिक्षाविद् श्री द्विवेदी आगे बताते हैं कि शिक्षा में इस बात का बहुत महत्व है कि बालिकाओं का कितना अनुपात पढ़ाई पूरी किए बगैर स्कूल छोड़कर घर बैठ जाता है। शिक्षा के सभी स्तरों पर दलित बालिकाओं की ड्रॉप आउट दर सामान्य जनसंख्या के अनुपात में बहुत ज्यादा है। द्विवेदी ने आगे बताया कि विद्यालयों में आदिवासी बालिकाओं के नामांकन में पर्याप्त कमी आयी है जो बेहद चिंताजनक है। आदिवासी एवं दलित समुदाय में बालिका शिक्षा की स्थिति काफी बुरी है। आदिवासी समुदाय की कुल 41.4 प्रतिशत लड़कियां शिक्षित हैं। सहरिया और बैगा समुदाय में तो यह स्थिति और भी बुरी है। मात्र 15.9 प्रतिशत सहरिया लड़कियों का प्रतिशत ज्यादा है। 45.36 प्रतिशत स्कूल के बाहर लड़कों की तुलना में 54.64 प्रतिशत लड़कियां स्कूल से बाहर थीं और कुल 10 प्रतिशत स्कूल से बाहर पाए गए।

आपको बता दें कि प्राथमिक स्तर पर प्रवेश लेने वाली बालिकाओं में से 24.82 प्रतिशत कक्षा 5 तक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं और उन्हें विद्यालय छोड़ना पड़ता है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 50.76 प्रतिशत बालिकाओं को बीच में ही विद्यालय छोड़कर घरेलू कार्यों में संलग्न होना पड़ता है।  कुल मिलाकर ये आंकड़े सभी सरकारों की पोल खोलने भर के लिए पर्याप्त हैं। आखिरकार देश को स्वतन्त्रता मिले 70 वर्ष बाद भी हम ऐसे आंकड़ों की सच्चाई से मुंह क्यों मोड़ लेते हैं? इसमें जितनी गलती तमाम सरकारों की है, उतनी ही उन गैर सरकारी संगठनो की भी है जो इसके बहाने हजारों करोड़ों की रकम डकार जाते हैं।

दिसंबर 2018 तक पाकिस्तान से लगी सारी सीमाएं होंगी सील -राजनाथ सिंह

अनुज हनुमत,

आज राजस्थान के जैसलमेर में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। बैठक के बाद पत्रकारों के वार्ता करते हुए सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 तक पाकिस्तान से लगी सारी सीमा पूरी तरह से सील हो जाएगी।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बॉर्डर को सील करने का काम तय समय में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा पर किसी भी कीमत पर आंच नहीं आने दी जाएगी। सीमा की हिफाजत के लिए उन्होंने बॉर्डर सिक्योरिटी ग्रिड की स्थापना करने का भी ऐलान किया है। इसके साथ ही मंत्रालय सभी राज्यों को दिशा-निर्देश भी जारी करेगा।

आपको बता दें कि आज राजस्थान पहुंचने पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह का स्वागत राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किया। जानकारों की मानें तो मौजूदा हालात में ये बैठक काफी अहम साबित हो सकती है।

बहरहाल भारत सरकार का यह निर्णय इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं। राजनीतिक पंडितों की मानें तो उससे पहले तक का समय देकर मोदी सरकार ने इतना तो स्पष्ट कर दिया है कि भारत पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर वह अब किसी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने वाला।

‘शहीदों के खून की दलाली’ बोलकर पछता रहे हैं राहुल गांधी, झेल रहे चौतरफा हमला

अनुज हनुमत,

अभी हाल ही में भारत द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर में हुए सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कल दिल्ली के जंतर मंतर पर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘खून की दलाली’ का आरोप जड़ दिया था। अब राहुल गांधी ने अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने ट्वीट किया कि ”वो सर्जिकल स्ट्राइक का समर्थन करते हैं, लेकिन राजनीतिक पोस्टर में सेना का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।”

गौरतलब है कि बीते दिन राहुल गांधी ने सर्जिकल स्ट्राइक पर पीएम नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा, “हमारे जिन जवानों ने जम्मू कश्मीर में अपनी जान दी, सर्जिकल स्ट्राइक किया है, आप उनके खून की दलाली कर रहे हो। ये बिल्कुल गलत है।” कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल यहीं नहीं रुके पीएम मोदी को नसीहत देते हुए कहा, ”सेना ने अपना काम किया है, आप अपना काम कीजिए।”

आपको बता दें कि राहुल गांधी की किसान यात्रा का आज आखिरी दिन था। कुल 26 दिनों तक चली किसान यात्रा में राहुल ने 48 जिलों और 57 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया। इससे पहले राहुल गांधी सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर राहुल पीएम मोदी की तारीफ भी कर चुके हैं। छः दिन पहले राहुल ने कहा था, ”जब प्रधानमंत्री जी, एक प्रधानमंत्री के लायक काम करते हैं तो मैं भी उनका समर्थन करता हूं। मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने ढाई साल में पहला एक्शन लिया है, जो प्रधानमंत्री के लायक एक्शन है, और मेरा उनको पूरा समर्थन है।”

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया। हम सेना के इस कदम की पहले भी तारीफ कर चुके हैं, आज भी हमें गर्व है। केजरीवाल ने राहुल गांधी के खून की दलाली वाले बयान पर दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि सेना की शहादत को ‘खून की दलाली’ बोलना गलत है। इसकी हम कड़ी निंदा और आलोचना करते हैं।

केजरीवाल ने कहा कि इस वक़्त सारे राजनीतिक मतभेद छोड़ कर हमें सेना के साथ खड़ा होना चाहिए और प्रधानमंत्री जी देश की सुरक्षा के लिए जो जो कदम उठा रहे हैं, हमें उनका साथ देना चाहिए। बहरहाल राहुल गांधी ने जो बयान दिया है, अब वे उसी में फंसते नजर आ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, राहुल गांधी के इस बयान का प्रभाव उनकी किसा यात्रा का प्रभाव कम कर सकता है।