दिल्ली उच्च न्यायलय ने आज आपसी सहमति से तलाक के सन्दर्भ में एक अहम फैसला लिया है। न्यायालय के मुताबिक, आपसी सहमति से तलाक के लिए राजी हो जाने के बाद अगर पति या पत्नी, दोनों में से कोई भी अपनी सहमति वापस लेता या लेती है, तो इसे मानसिक क्रूरता माना जाएगा।
दिल्ली उच्च न्यायलय के जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस योगेश खन्ना की खंडपीठ ने कहा, “बिनी किसी ठोस या वाजिब वजह के अगर दोनों में से कोई भी तलाक की अपनी सहमति वापस ले लेता है, तो इससे दूसरे के लिए बहुत मुश्किल खड़ी हो जाती है।”
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि आपसी सहमति से तलाक लेने को राजी होने के बाद अगर पति एकतरफा अपनी रजामंदी वापस ले लेता है, वह भी तब जबकि पत्नी सहमित की शर्तों को मानने के किए भी हमेशा से तैयार थी, तो इससे दूसरे पक्ष को काफी मुश्किल होती है। हाईकोर्ट ने मानसिक क्रूरता के आधार पर एक महिला को तलाक दिए जाने का फैसला सुनाते हुए यह बात कही है।
इस मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने पति द्वारा लिखी गई उस चिट्ठी को भी संज्ञान में लिया, जिसमें कि उसने दिल्ली पुलिस की महिला शाखा में अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने के लिए माफी मांगी। इससे पहले निचली कोर्ट ने महिला की अपील को स्वीकार करते हुए तलाक की अर्जी पर मुहर लगा दी थी, जिसके बाद पति ने निचली कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी थी।
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को जम्मू कश्मीर के कठुआ में शहीदी दिवस कार्यक्रम को संबोधित किया। अपने संबोधन में सिंह ने पाकिस्तान द्वारा जारी उनकी नापाक हरकतों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को हमने 1971 में तोड़ा था, एक बार फिर पाकिस्तान टूटेगा। हमने पाकिस्तान के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया, हमारे प्रधानमंत्री वहां दोस्ती का हाथ बढ़ाने गए थे, लेकिन उन्होंने सीजफायर का उल्लंघन कर दिया।
हमारे प्रधानमंत्री ने नवाज शरीफ को नई दिल्ली आने का निमंत्रण दिया, हमने उन्हें यहां हाथ मिलाने को नहीं बल्कि अच्छे रिश्तों में सुधार के वास्ते बुलाया, लेकिन उन्होंने हमें गुरदासपुर और पठानकोट दिया। जब हम आतंकावाद के खिलाफ बात करते हैं तो पाकिस्तान क्यों नहीं करता?
भारत पाकिस्तान को अपना परिवार मानता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि रिश्ते सुधारने की एवज में हमारे जवान गोलियां खाते रहेंगे। पाकिस्तान के अधिकारी मुझसे नई दिल्ली में मिले और मैंने उनसे कहा कि हम बॉर्डर पर उन पर फायरिंग नहीं करेंगे। हम उन्हें हमारा परिवार मानते हैं क्योंकि बंटवारे से पहले हम एक थे लेकिन अगर आपकी तरफ से गोलबारी हुई, तो हम भी नहीं छोड़ेंगे और गोलियों की गिनती नहीं करेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि पठानकोट में हुए आतंकी हमले को लेकर हमने अपनी एसआईटी टीम को पाकिस्तान नहीं भेजा और उनकी एसआईटी टीम को यहां आने दिया, लेकिन बाद में जब हमारे अधिकारियों ने पाकिस्तान जाने की इजाजत मांगी तो उन्होंने हमारी टीम को अनुमति नहीं दी। मैं पाकिस्तान गया लेकिन वहां मेरे विरोध में कई प्रदर्शन किए गए, उन लोगों को क्यों नहीं रोका गया? इसके बावजूद मैं वहां गया और भारत के नजरिए को रखा।
दिलीप कुमार, यह नाम हिंदी सिनेमा का वह ध्रुव तारा है, जो रहती दुनिया तक सिनेमा जगत का सबसे चमकदार सितारा बना रहेगा। 11 दिसंबर 1922 को तत्कालीन हिंदुस्तान के पेशावर में जन्मा एक बच्चा, मुहम्मद युसूफ खान, एक दिन ‘दिलीप कुमार’ के नाम से भारतीय सिनेमा का सबसे बुलंद सितारा बन जायेगा, ये उनके के माता पिता ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा।
हिंदी सिनेमा में लगभग पांच दशकों तक अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर राज करनेवाले दिलीप कुमार को भारतीय फिल्मों के सर्वोच्च सम्मान, दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान-ए-इम्तियाज’ से भी सम्मानित किया गया है। वर्ष 2015 में उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से भी नवाज़ा गया।
दिलीप कुमार का आज 94वां जन्मदिन है, लेकिन इस बार दिलीप साहब अपना जन्मदिन नहीं मना रहे। एक तो उनकी सेहत बहुत नासाज़ है, दूसरे उनके साले, यानी सायरा बानो के भाई का हाल ही में निधन हुआ है।
आइये जानते हैं दिलीप कुमार के विवादों से भरे जीवन के कुछ अति दिलचस्प किस्से:
– वर्ष 1930 में युसूफ (दिलीप) का परिवार मुंबई आकर बस गया। वर्ष 1940 में पिता से मतभेद के कारण युसूफ पुणे आ गए। यहां उनकी मुलाकात एक कैंटीन के मालिक ताज मोहम्मद से हुई। ताज मोहम्मद की मदद से भविष्य के एक उज्जवल सितारे ने अपने रोज़गार की शुरुआत आर्मी क्लब में सैंडविच स्टॉल लगाकर की। कैंटीन कांट्रैक्ट से 5000 की बचत के बाद, वह मुंबई वापस लौट आए।
– वर्ष 1943 में चर्चगेट में इनकी मुलाकात डॉ. मसानी से हुई, जिन्होंने उन्हें बॉम्बे टॉकीज में काम करने की पेशकश की। इसके बाद उनकी मुलाकात बॉम्बे टॉकीज की मालकिन देविका रानी से हुई। देविका रानी को युसूफ का अंदाज़ इतना भाया कि युसूफ को उनकी पहली फिल्म मिल गई ‘ज्वार भाटा’ और अपना मशहूर नाम भी, ‘दिलीप कुमार’।
– 1949 में आई फिल्म ‘अंदाज’ की सफलता ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया। इस फिल्म में उन्होंने राज कपूर के साथ काम किया था। उसके बाद ‘दीदार’ (1951) और फिर ‘देवदास’ (1955) जैसी सुपरहिट फिल्में लगातार उनके खाते में जुड़ती गईं। फिल्म ‘देवदास’ में देवदास के किरदार को दिलीप साहब ने इस कदर आत्मसात कर लिया था कि जैसे देवदास का दुःख उनका अपना दुःख हो। दिलीप कुमार को इस किरदार ने दिमागी रूप से इतना जकड़ लिया था कि उनके इलाज के लिए विदेशों से डॉक्टर्स की टीम बुलाई गई और डॉक्टर्स ने उन्हें लगभग 3 साल तक ट्रैजिक रोल्स से दूर रहने की सख्त हिदायत दी।
– वर्ष 1957 में आयी दिलीप साहब की फिल्म तराना उनकी ज़िन्दगी में बेपनाह मुहब्बत लेकर आई लेकिन ऐसी नाकाम मुहब्बत, जो परवान न चढ़ सकी। निर्देशक राम दरयानी की फ़िल्म ‘तराना’ (1957) के लिए दिलीप कुमार को हीरो और मधुबाला को बतौर हीरोइन साइन किया गया। हीरो-हीरोइन का आमना-सामना क्या हुआ कि बस जादू हो गया। 17 साल की मधु ने अपनी ओर से प्यार के इकरार की पहल की और दिलीप साहब ने झट पट स्वीकार भी किया, लेकिन दो दिलों के बीच की दरार साबित हुए मधु के पिता अताउल्ला खान। फ़िल्मी दुनिया के तमाम मर्दों का किरदार उनके लिए शक के दायरे में था। दिलीप कुमार भी इस दायरे से बाहर न थे।
मधुबाला के पिता जुआरी थे और मधु के जीवन में उनके द्वारा कदम कदम पर लगाई गई पाबंदियां दिलीप साहब को कतई गंवारा नहीं थीं। उन्होंने मधुबाला से साफ़ कह दिया था कि शादी के लिए उसे फ़िल्मों में काम करना तो छोड़ना ही होगा लेकिन उसी के साथ ही अपने पिता से सारे रिश्ते तोड़ने होंगे। मधुबाला अपने पिता को न छोड़ सकीं और दिलीप साहब से अलग होने का गम उन्हें आखिरी सांस तक रहा।
इस जोड़ी ने ‘तराना’ के बाद 1952 में ‘संगदिल’ और 1954 में ‘अमर’ में एक साथ लीड रोल निभाए थे। के आसिफ़ की ‘मुग़ल-ए-आज़म’, जो रिलीज़ भले ही 1960 में हुई, लेकिन उसकी शूटिंग 50 के दशक से ही चलती आ रही थी, दिलीप और मधु के जीवन की सबसे हिट फिल्म साबित हुई। 1956 में फिल्म ‘नया दौर’ के लिए तमाम विवादों के बाद मधुबाला की जगह वैजयंती माला को साइन करना, डायरेक्टर बी आर चोपड़ा को अताउल्ला खान द्वारा कोर्ट में घसीटना और दिलीप साहब द्वारा सच के पक्ष में, अर्थात चोपड़ा के पक्ष में बयान देना मधु और दिलीप को हमेशा हमेशा के लिए अलग कर गया। हालांकि दिलीप कुमार ने मजिस्ट्रेट आरएस पारख की अदालत में सबके सामने यह स्वीकार किया, “हां मैं मधु से प्यार करता हूं और उसे हमेशा प्यार करता रहूंगा।”
इस कथित अंत के बाद भी फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ की शूटिंग में दोनों साथ ही साथ काम करते रहे, लेकिन फ़िल्म के सीन शूट कर वे एक-दूसरे से मुंह फेर लेते थे। फिल्म में एक सीन ऐसा भी आया जब सलीम अनारकली को ग़ुस्से में एक थप्पड़ जड़ता है। इस सीन में दिलीप कुमार ने मधुबाला को ऐसा करारा तमाचा मारा था कि सेट पर मौजूद तमाम लोग हिल गए थे। मधुबाला को भी अपने होश संभालने में बड़ा वक़्त लगा।
– दिलीप कुमार ने अभिनेत्री सायरा बानो से वर्ष 1966 में शादी की। विवाह के समय दिलीप कुमार 44 वर्ष और सायरा बानो की 22 वर्ष की थीं। यहां भी पहल सायरा की ही थी, क्योंकि सायरा 8 वर्ष की उम्र से ही दिलीप कुमार की दीवानी थीं।
-दिलीप कुमार कभी पिता नहीं बन पाए। अपने इस दर्द को उन्होंने अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘द सबस्टांस एंड द शैडो’ में उकेरा है। बुक में दिलीप कुमार ने कहा है, “सच्चाई यह है कि 1972 में सायरा पहली बार प्रेग्नेंट हुईं। 8 महीने की प्रेग्नेंसी में सायरा को ब्लड प्रेशर की शिकायत हुई। इस दौरान पूर्ण रूप से विकसित हो चुके भ्रूण को बचाने के लिए सर्जरी करना संभव नहीं था और दम घुटने से बच्चे की मौत हो गई।” दिलीप की मानें तो इस घटना के बाद सायरा कभी प्रेग्नेंट नहीं हो सकीं।
– खबरों के अनुसार 30 मई, 1980 को बैंगलुरू में दिलीप ने आसमां नाम की एक पाकिस्तानी महिला से दूसरी शादी भी की थी। 1982 में दिलीप ने उससे छुटकारा तो पा लिया, लेकिन तीन साल तक वो झूठ बोलते रहे कि उनकी कोई दूसरी शादी नहीं हुई है। उस दौरान दिलीप और सायरा के रिश्ते में दूरियां आ गई थीं। ऐसा माना जाता है कि दिलीप साहब के दिल में पिता कहलाने की एक ललक थी, जिसे वे शायद आसमां के जरिये पूरी करना चाहते थे।
दिलीप कुमार और सायरा इन दिनों बुढ़ापे की दहलीज पर हैं। दिलीप कुमार अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित हैं और सायरा उनकी एकमात्र सहारा हैं। हर कहीं दोनों एक साथ आते-जाते हैं और एक-दूसरे का सहारा बने हुए हैं।
– वर्ष 1991 में दिलीप साहब को पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। 1997 में जब दिलीप साहब को पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज़ से नवाज़ा गया, तब भारत में खलबली मच गई। कई भारतीयों ने इस सम्मान को स्वीकारने का कड़ा विरोध किया, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से विचार विमर्श कर दिलीप कुमार ने वह सम्मान स्वीकार किया।
आज के दौर में जिस तरह फिल्मों की सफलता में उनके गीत-संगीत एक अहम भूमिका निभा रहे हैं, उसे देखते हुए फिल्म संगीत की दुनिया से जुड़े लोगों की खुशी का अंदाजा लगाया जाना मुश्किल नहीं है। बेशक फिल्मी संगीत से जुड़े लोग परदे के पीछे रहकर अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं और फिल्म की कमाई तथा कामयाबी में अपना योगदान देते हैं, लेकिन संगीत की भूमिका एवं अहमियत बढ़ने के साथ अब उनका नाम तथा चेहरा भी दर्शकों से अनजान नहीं रह गए हैं।
अपनी काबिलियत के बल पर उन्हें अब वो पहचान मिल रही है जो उन्हें पहले कभी नसीब नहीं हुई। यह स्थिति संगीत की दुनिया से जुड़े उन युवा कलाकारों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है, जो मुंबई में बिना किसी पहचान या गॉडफादर के दम पर देश के दूरदराज के क्षेत्रों से अपना मुकाम बनाने आते हैं।
ऐसे ही युवा कलाकारों में एक नाम विवेक मिश्रा का है, जिनकी पार्श्वगायक के तौर पर पहली हिंदी फिल्म ‘लाइफ की ऐसी की तैसी’ जल्द रिलीज होने जा रही है। निर्देशक एजाज अहमद की इस फ़िल्म में सुनील पाल, जावेद हैदर तथा मुश्ताक खान मुख्य भूमिकाओं में हैं।
इलाहाबाद के रहने वाले विवेक अपनी इस फिल्म को लेकर बेहद उत्साहित हैं। वे कहते हैं, “इस फिल्म से मुझे काफी उम्मीद है। मैंने इससे पहले भी कुछ फिल्मों के लिए पार्श्वगायक के तौर पर आवाज दी है, लेकिन ‘लाइफ की ऐसी की तैसी’ रिलीज होने वाले मेरी पहली फिल्म है। मुझे यकीन है, इस फिल्म के बाद मेरे लिए आगे के सफर के नए रास्ते खुलेंगे और मुझे पीछे मुड़कर देखने की ज़रूरत नहीं होगी।”
सॉफ्ट और मेलॉडियस आवाज के मालिक विवेक मिश्रा ने चार साल पहले मुंबई का रुख करने के बाद से अब तक कुछ एक भजन एलबम्स में भी गाया है और कई टीवी कमर्शियल्स को अपनी आवाज दी है। इसके अलावा, उन्होंने ‘सरस्वती चंद्र’ तथा ‘कलश’ जैसे टीवी धारावाहिकों में बैक-वोकलिस्ट के तौर पर अपनी आवाज दी है और देश-विदेश में सैकड़ों म्यूजिकल शो किए हैं।
विवेक ने पद्म विभूषण पंडित रामआश्रय झा, पंडित छन्नूलाल मिश्रा, मून वाशिंगटन तथा पंडित शिवराम शर्मा जैसे संगीतज्ञों से सुरों की शिक्षा ली है और उन्हें उम्मीद है कि क्लासिकल म्यूजिक में उनकी यह ट्रेनिंग उनके करियर को दिशा देने में एक अहम भूमिका अदा करेगी।
मुम्बई की आरे कॉलोनी में एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है। इस दुर्घटना में 1 महिला की मृत्यु हो गई है और तीन अन्य घायल हो गए हैं। यह दुर्घटना ‘रॉयल पाम’ के करीब फिटलर पाढा इलाके में हुई है। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया है।
यह जानकारी तुरंत प्राप्त नहीं हो पाई थी कि हेलीकॉप्टर किसका था और उसमें कितने लोग सवार थे। यह एक रॉबिन्सन R 44 एस्ट्रो मॉडल हेलीकॉप्टर है। बाद में प्राप्त जानकारी के मुताबिक 1992 मॉडल का यह हेलीकॉप्टर पवन हंस नामक कंपनी का था, लेकिन बाद में यह एक प्राइवेट एविएशन कंपनी को बेच दिया गया था। यह हेलीकॉप्टर जॉय राइड्स के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
आपको बता दें कि आरे कॉलोनी मुम्बई के गोरेगांव (पूर्व) उपनगरीय क्षेत्र में स्थित है। इस घटना के विषय में अभी विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
तीन बार नेशनल अवार्ड्स जीत चुकी बॉलीवुड ‘क्वीन’ कंगना रनौत ने कुछ समय से आ रही खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए अपना गुस्सा ज़ाहिर किया है कि वे अपनी फिल्मों के लिए कितने पैसे चार्ज करती हैं, इससे किसी और को कोई मतलब नहीं होना चाहिए।
बीते कुछ समय से ऐसी खबरें आ रही हैं कि कंगना ने अपनी प्रत्येक फिल्म के लिए अपना चार्ज बढ़ा कर 15 करोड़ रु. कर दिया है। जब इन ख़बरों की पुष्टि के लिए कंगना से बात की गई, तो कंगना ने न ही इस बात को स्वीकार किया और न ही इससे इनकार किया। कंगना ने कहा, “मैं अपनी किस फिल्म के लिए कितने पैसे लेती हूँ, इससे किसी और को सरोकार नहीं होना चाहिए। वह सिर्फ मुझे पता होना चाहिए।”
आपको बता दें कि कंगना के खाते में फ़िलहाल तीन फिल्में हैं, विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘रंगून’, हंसल मेहता की ‘सिमरन’ और केतन मेहता की ‘रानी लक्ष्मीबाई’। अगर कंगना के पेमेंट बढ़ाने की खबरें सच साबित होती हैं, तो कंगना बॉलीवुड की सबसे महंगी अभिनेत्री बन जाएंगी। अब तक यह टाइटल दीपिका पादुकोण के नाम पर है, जिन्होंने अपनी आगामी फिल्म ‘ पद्मावती’ के लिए 12 करोड़ चार्ज किए हैं।
डिज़ाइनर मनीष अरोरा द्वारा आयोजित ‘ब्लेंडर्स प्राइड फैशन शो’ में मीडिया से रूबरू होते हुए कंगना ने ये बातें कहीं। गुलाबी और हरे रंग की चनिया चोली में कंगना बेहद खूबसूरत नज़र आ रही थीं। यह पहली बार हुआ जब मनीष ने किसी बॉलीवुड पर्सनालिटी को अपने शो का हिस्सा बनाया था और उनके मुताबिक कंगना से बेहतर कोई विकल्प हो ही नहीं सकता था।
मनीष ने कहा, ” मैं वाक़ई चकित हूँ कि कंगना को फैशन और कपड़ों के रखरखाव की इतनी अच्छी समझ है।” जिसपर कंगना ने हंसकर जवाब दिया कि अक्सर डिज़ाइनर्स को ऐसा ही लगता है कि कलाकारों को फैशन की जानकारी नहीं है। कंगना ने कहा, “भारतीय परिधान डिज़ाइनर्स में मनीष मेरी पहली पसंद हैं। मैं इस बात से बहुत खुश हूँ कि उनके शो में शामिल होने वाली मैं पहली अभिनेत्री हूँ। यह क्षण मेरे लिए वर्ष 2016 का सबसे बेहतरीन क्षण है। इनका कलेक्शन वाक़ई अद्भुत है।”
आयकर विभाग ने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एक लॉ फर्म में छापा मार के 13 करोड़ रूपयों की नकदी बरामद की है, जिसमें लगभग ढाई करोड़ की नई नोटें भी थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने बताया कि शनिवार देर रात साढ़े दस बजे के आसपास क्राइम ब्रांच के साथ आयकर विभाग ने एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म के दफ़्तर में छापा मारा। छापेमारी के दौरान पूरा ऑफिस बंद था और केवल एक केयरटेकर मौजूद था।
नोट्बंदी के बाद आयकर विभाग लगातार कार्यवाही करने में जुटा हुआ है। आयकर विभाग द्वारा लगातार की जा रही छापेमारी में कर्नाटक के एक इलाके से भी लगभग साढ़े पांच करोड़ की नकदी बरामद की गई है।
तुर्की के इस्तांबुल शहर में आज दो बम धमाके हुए हैं। इन धमाकों में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 29 बताई जा रही है और 160 से ज़्यादा घायल हैं। मरने वालों में अधिकतर पुलिस अधिकारी हैं। जानकारी मिली है कि दोनों धमाके गाड़ियों में हुए। तुर्की के गृह मंत्री ने बताया कि इन धमाकों के सिलसिले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पहला धमाका तुर्की की दो मशहूर फ़ुटबॉल टीमों के बीच हुए मैच के एक घंटे बाद हुआ। यह धमाका फ़ुटबॉल स्टेडियम के बाहर खड़ी एक पुलिस बस को निशाना बनाकर किया गया।
इसके कुछ देर बाद ही नजदीक के एक पार्क में एक आत्मघाती बम हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। दूसरे धमाके के बाद गोलीबारी की आवाजें सुनी गईं। घटनास्थल पर एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ियाँ तुरंत भेजी गईं।
सूत्रों के अनुसार इन हमलों के लिए कुर्दिश अलगाववादियों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। हालांकि अब तक हमले की ज़िम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन तुर्की में इससे पहले सुरक्षा बलों पर हुए हमलों के लिए ज़्यादातर कुर्द चरमपंथियों या इस्लामिक स्टेट को ज़िम्मेदार ठहराया जाता रहा है। आपको बता दें कि 16 महीने पहले खत्म हुए संघर्ष विराम के बाद से ही कुर्दिश अलगाववादी सुरक्षा बलों को निशाना बना रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इस्तांबुल में आखिरी बड़ा हमला जून में एयरपोर्ट पर हुआ था जिसके लिए इस्लामिक स्टेट गुट को जिम्मेदार ठहराया गया था।
आज पूरे भारत के सामने एक बड़ा संकट खड़ा है, नोट बंदी का संकट। आलम यह है कि पूरा भारत भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ है। कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरा देश आवाज उठा रहा है और उठाता रहा है, चाहे वह किसी भी धर्म का, किसी भी जाति का हो, किसी भी पार्टी का हो, कहने के लिए वह भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ है। फिर प्रश्न यह उठता है कि जब सब लोग इसके खिलाफ हैं, तो यह होता कैसे है? यह करता कौन है? हर आदमी यदि सच्चे दिल से यह प्रश्न अपने आप से पूछे तो उत्तर अपने आप मिल जाएगा। हर किसी को यह सोचना होगा कि हम देश के हित में कितना सोचते हैं और उसके लिए कितना समर्पित हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भ्रष्टाचार व कालेधन की समस्या समाप्त करने के लिए ही 8 नवंबर की रात नोट बंदी का फैसला लिया गया। लगभग 70% लोगों ने इसका समर्थन किया। सवाल यह है कि क्या 70% लोग 30%के आगे हार जायेंगे? इन 70% लोगों में कुछ अमीरों का भी समर्थन रहा है। मध्यम वर्ग का समर्थन ज्यादा रहा है, क्योंकि यह वर्ग इस फैसले से जुड़ी सच्चाई को बहुत करीब से जानता है। रही अति गरीब वर्ग की बात, तो इन लोगों तक सच्चाई का जितना प्रचार और प्रसार हुआ है, चाहे अच्छा या बुरा, वे उसके मुताबिक अपना मत व्यक्त कर रहे हैं।
अब समस्या यह है कि 30% लोग, 70% लोगों के लिए बहुत बड़ी परेशानी का कारण बने हुए हैं। इन 30% लोगों में काला धन रखने वाले, स्वार्थ के लिए काला धन रखने वालों के पैसे बदल कर थोड़े कमिशन पर सफेद करने वाले, और विपक्षी पार्टी वाले शामिल हैं।
सरकार ने आम ज़रूरतों के हिसाब से समय समय पर कई नए नियम लाये। सेविंग एकाउंट से 24000 तथा करेंट अकॉउंट से 50000 रु. लोगों को निकलने की सुविधा दी। शादी वाले घरों की समस्या समझकर उनके लिए 2,50,000 की सीमा तय की, लेकिन जनता को बड़े शहरों में यह राशि भले ही मिल जाए, पर छोटे शहरों में 24000 की जगह 4 या 5 हजार रु. तथा 50 हजार की जगह 10 या 15 हजार रु. निकालने को मिल रहे हैं। कहीं कहीं तो बिलकुल पैसे ही नहीं मिल रहे, और इन सब वजहों से पूरे देश में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा प्रश्न यह खड़ा हो रहा है कि जहाँ लाइन में लोगों को निर्धारित धन नहीं मिल पा रहा है, वहां करोड़ों रूपए टॉयलेट्स और घरों में कैसे मिल रहे हैं? पुलिस और सीबीआई आए दिन करोड़ों रुपयों के नये नोट छापे मार मार कर पकड़ रही है। जब सरकार द्वारा सबके लिए समान सीमा तय की गई है, तो ये नोटों की गड्डियां उन लोगों तक पहुँच कैसे रही हैं? इस जुगाड़ में जो लोग लगे हुए हैं, वे जनता में ही शामिल कुछ ‘खास’ लोग हैं। इसमें कुछ बैंक कर्मचारी, कुछ नेता, कुछ कमिशन खोर एजेंट भागीदार हैं, लेकिन ये भी तो हैं तो जनता के ही अंग!
अकेले सरकार या विपक्ष तो पूरे अर्थतंत्र को सुधार नहीं सकता। इसमें पूरे देश का सहयोग जरूरी है, प्रत्येक नागरिक का। ये 30% लोग पूरे देश के अर्थतंत्र को झकझोर रहे हैं और उन्हें सही साबित कर रहे हैं इन 70% ईमानदार लोगों में छुपे कुछ जयचंद, जो सामने से इस फैसले के समर्थन में हैं और परदे के पीछे ‘ब्लैक टू वाइट’ का घटिया खेल, खेल रहे हैं। अब देखिए जीत 30% विरोधियों की होती है कि 70% समर्थकों की। अब यह तो 50 दिनों के बाद आने वाला समय ही बताएगा कि आखिर में ईमानदारी जीतती है, या पराजित होती है।
राजद सुप्रीमोे लालू प्रसाद यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि मोदी को भारत की नहीं, बल्कि इंडिया की चिंता है। लालू के अनुसार, 80% भारतीय कृषि से जुड़े हैं, लेकिन मोदी को मात्र उन 2% इंडियंस की चिंता है, जिनकी पूंजी से सेंसेक्स ऊपर-नीचे होता है।
लालू ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर यह कटाक्ष किया है कि पीएम मोदी को भारत की नहीं, इंडिया की चिंता है। इसके अलावा लालू ने यह भी कहा, “भागते भूत की लंगोटी भली। नोटबंदी में मिट्टी पलीत होते देख पीएम काला धन का अलाप त्याग, अब #CashlessEconomy के पल्लू में छुप रहे हैं।”
इससे पहले भी लालू ने ट्वीट कर मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने ट्वीट किया था, “पीएम के 50 दिनों की मोहलत में 22 दिन बाकी हैं। 50 दिन बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई तो क्या मोदी जी इस्तीफा देंगे या मुँह छुपाते घूमेंगे?”
बता दें कि नोटबंदी के फैसले के विरोध में पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है। संसद में आए दिन नोटबंदी के मुद्दे पर हंगामा हो रहा है। संसद का शीतकालीन सत्र जब से शुरू हुआ है, विपक्ष लगातार नोटबंदी के विरोध में हंगामा कर रहा है और पीएम मोदी को संसद में बोलने की मांग कर रहा है। कल भी नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में जोरदार हंगामा हुआ, जिसके बाद दोनों सदनों को 14 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया।