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Monday, August 10, 2026
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पीएम मोदी और अमित शाह का सर काटकर लाओ, ईनाम पाओ -तरुण देव यादव (सपा नेता)

अमित द्विवेदी,

समाजवादी पार्टी के नेता तरुण देव यादव ने सरे आम ये ऐलान किया है कि जो शख्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का सर कलम कर के लाएगा, उसे वे ईनाम देंगे। तरुण देव यादव ने यह ऐलान एक वीडियो के ज़रिये किया है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, वीडियो 7 दिसंबर को बनाया गया है। इस वीडियो में यादव नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते दिख रहे हैं। वीडियो में तरुण देव यादव एक भाषण को पढ़ते हुए कह रहे हैं कि जो भी कोई मोदी और अमित शाह का सिर कलम करके देगा, उसको उचित ईनाम दिया जाएगा।

आपको बता दें कि जिस पन्ने से तरुण सब पढ़ रहे थे वह समाजवादी पार्टी युवजन सभा जिला अध्यक्ष के लेटरहेड पर लिखा हुआ है। वीडियो में तरुण अमित शाह और नरेंद्र मोदी को नोटबंदी की वजह से आपातकाल जैसे हालात पैदा करने वाला और 2002 गोधरा दंगों को दोषी करार दे रहे हैं। तरुण यह भी कह रहे हैं कि सपा के लोग मोदी के पुतले फूंकेंगे।

वीडियो में तरुण, मोदी और शाह को बागपत में रैली करके दिखाने की चुनौती भी देते दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि यह वीडियो यूथ विंग की एक मीटिंग में शूट किया गया जो कि लोकल स्तर के किसी पार्टी कार्यालय में हुई थी। वैसे तो तरुण देव यादव बागपत जिले से सपा की यूथ विंग के अध्यक्ष थे, लेकिन सपा अध्यक्ष शिवपाल यादव ने जिले लेवल की सारी युनिटों को फिलहाल के लिए समाप्त कर दिया है।

वीडियो जारी करने के बाद इंडियन एक्सप्रेस अखबार से बात करते हुए भी तरुण अपनी बात पर कायम रहे और बोले कि जो भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह का सिर कलम करेगा उसे उचित ईनाम दिया जाएगा। बागपत एसपी शंकर राय ने बताया कि तरुण के इस अभद्र ऐलान पर उनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। तरुण भले अपनी ओर से भाजपा के खिलाफ आग उगल रहे हों, लेकिन जब सपा के राज्य  प्रवक्ता मोहम्मद शाहिद से तरुण के बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि पार्टी को उन जैसे लोगों के बयान से कोई लेना-देना नहीं है।

गौरतलब है कि यह वीडियो शुक्रवार को सामने आया।  बीजेपी के महासचिव विजय बहादुर पाठक ने इस विषय में कहा, “सपा में ऐसे कई लोग भरे पड़े हैं। अब देखना होगा कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव उस शख्स के खिलाफ क्या एक्शन लेते हैं जो पीएम के बारे में ऐसी बात कर सकता है।”

सरकार का ऐलान, “अब आएंगे प्लास्टिक के नोट”!

सौम्या केसरवानी,

नोटबंदी के बाद से सरकार हर रोज नए ऐलान कर रही है। सरकार ने इसी क्रम में आज लोकसभा में जानकारी दी कि जल्द ही प्लास्टिक के नोट आएंगे। इसके लिए कच्चा माल भी खरीदना शुरू कर दिया गया है।

सरकार से पूछा गया था कि क्या RBI की तरफ से कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक नोट लाने का कोई प्रस्ताव है? वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया, ”प्लाटिक या पॉलीमर आधारित बैंकनोट जारी करने का निर्णय लिया जा चुका है।” रिजर्व बैंक लंबे समय से प्लास्टिक नोट लाने की प्लानिंग कर रहा था।

फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को जानकारी दी थी कि देश के पांच शहरों में फील्ड ट्रायल के तौर परह 10-10 रुपये के एक अरब प्लास्टिक नोट उतारे जाएंगे। इन शहरों का चुनाव भौगोलिक और जलवायु विभिन्नताओं के आधार पर किया जाएगा। इन शहरों में कोच्ची, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर शामिल थे।

प्लाटिक नोट की खासियत की बात करें, तो इनकी उम्र पांच साल होती है और इनकी नकल करना बेहद मुश्किल होता है। प्लास्टिक नोट कागज के नोट से ज्यादा साफ होते हैं। इस तरह के नोट सबसे पहले जाली नोटों की समस्या से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया में जारी किए गए थे।

सरकार हम बनाएंगे, उत्तर प्रदेश में भाजपा की है लहर -राजनाथ सिंह

सौम्या केसरवानी,

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार 9 दिसम्बर को उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे, जिसके तहत गृह मंत्री सूबे के फ़तेहपुर जिले में पहुंचे थे। जहाँ गृह मंत्री ने भारतीय जनता पार्टी की सत्ता ‘परिवर्तन यात्रा’ में शिरकत की। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम के तहत जनसभा का संबोधन किया।

उन्होंने कहा कि यूपी में अब बुआ और बबुआ का शासन नहीं चाहिए। यूपी में अब सिर्फ कमल का फूल खिलना चाहिए। समाजवादी पार्टी किसानों के हितैषी बनने का सिर्फ झूठा दावा करती है। किसानों की फसल को यूपी सरकार नहीं खरीद रही है। और अगर भाजपा की सरकार बनी तो फसल का पूरा मूल्य मिलेगा।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में आगे पाकिस्तान की नापाक हरकतों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि पाक सीमा पर अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, लेकिन भारतीय सेना पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दे रही है। और गृह मंत्री ने ये भी कहा कि इस बार उत्तर प्रदेश में भाजपा की लहर चल रही है। साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा।

500 रूपए के पुराने नोट हों तो उठा लीजिए फ़ायदा, 10 दिसंबर के बाद हो जाएगा रद्दी

सौम्या केसरवानी,

नोटबंदी से परेशान लोगों के पास अपने पुराने 500 रूपये के नोट खर्च करने का आखिरी मौका 10 दिसंबर तक है। अगर यह मौका भी आपने हाथ से गवा दिया, तो दोबारा कभी 500 के पुराने नोट खर्च करने का मौका नहीं मिलेगा।

शनिवार 10 दिसंबर से रेलवे, मेट्रो और सरकारी बसों में 500 के पुराने नोट चलना बंद हो जाएंगे। जिसके बाद लोगों को 500 रूपये के नोट चलाने का मौका नहीं मिल सकेगा। इसके बाद केवल आरबीआई में ही नोट बदलवाने का ऑपशन लोगों के पास रह जाएगा।

नोटबंदी का फैसला आने के बाद लोगों की सुविधा के लिए कुछ चुनिंदा जगहों पर पुराने नोट से भुगतान मान्य था। सरकार ने 2 दिसंबर को एक फैसले में कहा था कि रेलवे, सरकारी बस, अस्पताल और मेट्रो में 15 दिसंबर तक चलेंगे। लेकिन अब अचानक आए एक फैसले में स्पष्ट किया गया है कि 10 दिसंबर को यह सुविधा समाप्त कर दी जाएगी। हांलाकि दूध की दुकान पर 500 रूपये का पुराना नोट पहले की तरह चलता रहेगा।

जस्टिस काटजू सुप्रीम कोर्ट में बिना शर्त माफ़ी मांगने को तैयार

आनंद रूप द्विवेदी,

सौम्या हत्या केस पर अदालत के फैसले को लेकर पोस्ट लिखने वाले और उसे गलत ठहराने वाले पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जस्टिस काटजू बिना शर्त ओपेन कोर्ट में माफ़ी मांगने को तैयार हो गए हैं। साथ ही जस्टिस काटजू ने अवमानना मामले को बंद किए जाने की  भी फ़रियाद सुप्रीम कोर्ट के समक्ष की है।

बकौल जस्टिस काटजू वो न्यायपालिका का सम्मान करते हैं तथा जो भी फेसबुक पोस्ट्स उन्होंने सौम्या मर्डर केस के सम्बन्ध में अपनी वॉल पर किये थे, वो सब हटा लिए हैं। उन्होंने अवकाश पर जाने से पहले मामले की सुनवाई करने की भी मांग की है।

दरअसल हमेशा विवादित पोस्ट्स करने वाले जस्टिस काटजू ने सौम्या हत्या केस पर न्यायालय के फैसले को गलत बताया था, जिसके बाद कोर्ट ने काटजू को 11 नवम्बर को न्यायालय के समक्ष पेश होकर बहस करने के लिए कहा था। काफ़ी बहस करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस काटजू के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी करते हुए जवाब माँगा था, जिसके पश्चात काटजू ने न्यायालय से बिना शर्त माफ़ी की गुहार लगाई और मामले को बंद करने की फ़रियाद की।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय: नोटबन्दी को लेकर लगी ‘छात्र अदालत’, विद्यार्थी संगठनों में झड़प

अनुज हनुमत,

इलाहाबाद। केंद्र सरकार के नोटबन्दी के फैसले को एक महीने का समय पूरा हो गया। फैसले के विरोध में जहाँ एक ओर दिल्ली में विपक्ष ने काला दिवस मनाया, वहीं दूसरी ओर संगम नगरी इलाहाबाद स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘छात्र अदालत’ का आयोजन किया गया। इसका आयोजन आल इंडिया डीएसओ ने किया, लेकिन कैम्पस में तमाम आयोजनों की तरह ये कार्यक्रम भी विरोध की राजनीति की भेंट चढ़ गया ।

आपको बता दें कि कार्यक्रम अपने पूर्वनियोजित समय से ही शुरू हुआ और तीन जजों की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष नोटबन्दी के फैसले के विपक्ष में जिरह कर रहे वकील द्वारा आरोप पत्र दाखिल करने के साथ अदालत की कार्यवाही शुरू हुई। नोटबन्दी के फैसले पर दोनों वकीलों ने अपनी अपनी दलीलें पेश की और सबूत के तौर पर दर्जनों छात्रों ने पक्ष और विपक्ष में अपनी अपनी राय रखीं। अदालत की कार्यवाही ठीक ठाक चल ही रही थी कि कुछ छात्रों ने यह आरोप लगाते हुए भारत माता के नारे लगाने शुरू कर दिए कि हमें अपना पक्ष रखने से क्यों रोका जा रहा है। इसी बीच दोनों गुटों के समर्थक आपस में भिड़ते नजर आये लेकिन बीच-बचाव के बाद स्थिति सामान्य हुई लेकिन छात्र अदालत की कार्यवाही फिर नहीं शुरू हो पाई।

तीन सदस्यीय जजों की खंडपीठ का निर्णय छात्रों के बीच नहीं आ पाया। अचानक हुए इस विरोध के बीच छात्र इन्तजार करते रहे कि शायद छात्र अदालत शायद पुनः शुरू हो लेकिन ऐसा नही हुआ । छात्र नेता और आल इंडिया डीएसओ के जिला पदाधिकारी भीमसिंह चंदेल ने नवप्रवाह.कॉम से बात करते हुए कहा कि ‘नोटबन्दी के फैसले पर छात्रों की राय जानने के उद्देश्य से हमने छात्र अदालत कार्यक्रम का आयोजन किया था और कार्यक्रम ठीक चल रहा था लेकिन बीच में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कुछ छात्र कार्यकर्तायों ने भारत माता के नारों के साथ उपद्रव करना शुरू कर दिया, जिस कारण कार्यक्रम बन्द करना पड़ा। उन्होंने कहा कि छात्रों ने जिस प्रकार से पूरे कार्यक्रम में बढ़ चढ़कर भाग लिया वो भी काबिलेतारीफ है।

बहरहाल, इलाहाबाद विश्वविद्यालय कैम्पस में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में दो गुटों में आपसी विरोध होना आम बात हो गई है, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न ये है कि क्या कैम्पस यूँ ही तमाम छात्र संगठनों के आपसी नूरा कुश्ती का अखाड़ा बना रहेगा? या सभी आपसी विवाद छोड़कर छात्र हितों को प्राथमिकता देना शुरू करेंगे!

बीजेपी की इस ‘लकी कुर्सी’ के बारे में जानते हैं आप?, नहीं, तो ये पढ़िए

शिखा पाण्डेय,

राजनीति में ‘कुर्सी’ का बड़ा महत्त्व है। सत्ता की कुर्सी तो आप सब जानते होंगे, जिस पर बैठकर नेता अपने भाग्य का फैसला करने वाली जनता का भाग्य लिखते हैं, लेकिन क्या कभी ऐसी ‘कुर्सी’ के बारे में सुना है, जो ‘सत्ता की कुर्सी’ दिलाने के लिए बड़ी लकी साबित हुई हो? जी हाँ! भारतीय जनता पार्टी के पास एक ऐसी ही ‘लकी कुर्सी’ है जिसने 2014 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को 80 में से 71 सीटों पर जीत दिलाई थी।

लोकसभा चुनावों के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के कानपुर में रैली करने वाले हैं। ऐसे में मोदी के लिए उनकी लकी कुर्सी को तैयार कर लिया गया है। बीजेपी कार्यकर्ता चाहते हैं कि पीएम मोदी कानपुर रैली के दौरान उसी कुर्सी पर बैठें।

बीजेपी जिला अध्यक्ष सुरेंद्र मैथानी से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, “पीएम बनने के बाद मोदी पहली बार कानपुर आ रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ता मानते हैं कि वह कुर्सी पार्टी के लिए लकी है। जब मोदी ने लोकसभा चुनाव में उसका इस्तेमाल किया था तो यूपी में पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की थी। हम लोग मानते हैं कि अगर मोदी पर्रिवर्तन यात्रा की रैली में भी उसपर बैठेंगे तो 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी सबसे ज्यादा सीटें जीतेंगे।”

सुरेंद्र ने उम्मीद जताई कि रैली में लगभग पांच लाख लोग शामिल होंगे। सुरेंद्र ने आगे कहा, “हम लोगों को इसके लिए एसपीजी या फिर किसी और प्रशासनिक अधिकारी से इजाजत भी नहीं लेनी होगी क्योंकि कानपुर में जो पार्टी के कार्यकर्ता हैं उनके द्वारा ही रैली की सारी तैयारियां की जा रही हैं।”

क्या है किस्सा लकी कुर्सी का-

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कुर्सी से जुड़ा एक पुराना किस्सा है जो पार्टी कार्यकर्ताओं ने खुद बताया है। उन्होंने बताया कि पीएम बनने से पहले पीएम कैंडिडेट के रूप में मोदी ने सबसे पहली रैली, ‘विजय शंखनाद’ रैली 19 अक्टूबर 2013 को कानपुर में की थी। उस रैली के दौरान नरेंद्र मोदी उसी कुर्सी पर बैठे थे। उसके बाद बीजेपी ने यूपी में 80 में से 71 सीटें जीत ली थीं। तब से पार्टी कर्यकर्ताओं को विश्वास हो गया कि वह कुर्सी लकी है। कानपुर भाजपा नेताओं ने कुर्सी को संभाल कर रखने के लिए एक ग्लास का चैंबर भी बनवा लिया था। कुर्सी को ज्यादा वक्त तक संभालकर रखने के लिए पार्टी ने दिल्ली से मजबूत शीशा मंगाया था। उस शीशे से 6/5.5/3 फीट का बॉक्स बनवाया गया था।

कुर्सी पिछले तीन सालों से पार्टी के जिला कार्यालय में रखी हुई थी। कुर्सी के अलावा वह ग्लास जिससे पीएम मोदी ने रैली के दौरान पानी पिया वह भी रखा हुआ है। उसके अलावा एक डिब्बा और है। उसमें मशहूर ठग्गू के लड्डू रखे हुए हैं, जो कि मोदी को भेंट किए गए थे। मोदी की 19 दिसंबर को होने वाली रैली का कार्यक्रम तय होते ही कुर्सी को बाहर निकलवाकर उसे साफ करवाया गया और पॉलिश भी करवाया गया।

आपको बता दें कि यह रैली निराला नगर के रैलवे ग्राउंड में होनी है। गुरुवार (8 दिसंबर) को पार्टी कार्यकर्ताओं ने रैली की तैयारी शुरू करने से पहले पूजा भी करवाई थी। पार्टी कार्यकर्ता मेडिकल कॉलेज, आईआईटी-कानपुर, इंजीनियरिंग कॉलेजों और कोचिंग सेंटर्स में जा-जाकर रैली में आने का न्योता दे रहे हैं।

जयललिता की मृत्यु के बाद अब तक 77 समर्थकों की गई जान, अम्मा से था गहरा लगाव

शिखा पांडेय,

तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की लोकप्रियता का अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल है। उनकी लोकप्रियता आप इसी बात से भांप सकते हैं कि जयललिता द्वारा सोमवार की रात दम तोड़ने के बाद से लेकर अबतक कई लोग सदमें में अपनी जान दे चुके हैं। तमिलनाडु के सत्तारुढ दल अन्नाद्रमुक ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि जयललिता की बीमारी और उसके बाद निधन के दुख और सदमे से अभी तक 77 लोगों की मृत्यु हुई है।

अन्नाद्रमुक की ओर से बीती रात जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘अम्मा की बीमारी और मृत्यु के बारे में जानने के बाद दुख और सदमे से 77 लोगों की मृत्यु हुई है।” 5 दिसंबर को जयललिता की मृत्यु के बाद कथित रुप से आत्मदाह का प्रयास करने वाले पार्टी पदाधिकारी तथा अपनी अंगुलियां काट लेने वाले व्यक्ति को पार्टी ने 50-50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त पार्टी ने बुधवार को प्रत्येक पीडित परिवार को तीन-तीन लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है।

उधर केंद्रीय खुफिया एजेंसी ने अभी तक 30 लोगों के मरने और चार लोगों द्वारा आत्महत्या का प्रयास करने की बात कही है। अन्नाद्रमुक ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनकी बीमारी का मतलब 22 सितंबर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने से था या चार दिसंबर को दिल का दौरा पडने से।

डिजिटल मोड से खरीददारी करने पर मिलेंगे .75% की छूट -अरुण जेटली

शिखा पांडेय,

डिजिटल इंडिया’ व भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने की दिशा में प्रयासरत केंद्र सरकार डिजिटल ट्रांसक्शन को बढ़ावा देने के लिए नयी नयी तरकीबें निकाल रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके डिजीटल ट्रांज़ैक्शन के विषय में घोषणा की कि जो लोग डिजीटल मोड से पेट्रोल खरीदेंगे उन्हें 0.75 प्रतिशत का छूट मिलेगी। यह छूट 1 जनवरी 2017 से लागू हो जायेगी और इसकी शुरुआत मुम्बई उपनगरीय रेलवे से होगी।

आज नोट बंदी के पूरे 1 माह बीत जाने के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कांफ्रेंस कर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, ” इन तीस दिनों में देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बदलाव हुआ है। हम पूरा प्रयास कर रहे हैं कि कॅश का लेन देन कम से कम हो।”

इसके अतिरिक्त उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे टिकट ऑनलाइन बुक कराने वालों को 10 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा दी जायेगी। उन्होंने कहा, “हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लेन देन डिजीटल हो जाए। बैंक्स भी इसी प्रयास में लगे हैं कि क्रेडिट, डेबिट कार्ड व इ-वॉलेट को प्रोत्साहित किया जाए। सरकार इसे और प्रोत्साहित करने की कोशिश करेगी।”

आपको बता दें कि साढ़े चार करोड़ ग्राहक रोज पेट्रोल और डी़जल खरीदते हैं। लगभग 18 सौ करोड़ रुपये का कारोबार हर दिन होता है। यह 20 से लेकर 40 प्रतिशत तक डिजीटल हो गयी है।

प्रियंका को पछाड़ दीपिका पहली बार बनीं “सेक्सिएस्ट एशियन वुमन”!

शिखा पाण्डेय,

अपने अभिनय और अदाओं से अच्छे अच्छों को मस्ताना बनाने वाली मस्तानी, दीपिका पादुकोण एक के बाद एक बड़े खिताब अपने नाम करती जा रही हैं। हाल ही में एक्सक़्वायर अवार्ड्स 2016 में ‘वुमन ऑफ़ द ईयर’ चुनी गयी दीपिका ने पहली बार “सेक्सिएस्ट एशियन वुमन” का खिताब जीता है। पिछले दो सालों से यह खिताब जीतने वाली बॉलीवुड बेब प्रियंका चोपड़ा को करारी शिकस्त देकर दीपिका ने यह खिताब अपने किया है।

आपको बात दें कि हर साल इस खिताब का आयोजन ब्रिटेन स्थित न्यूजपेपर ईस्टर्न आई (Eastern Eye) कराता है। Eastern Eye ने इसके लिए एक पोल कराया था, जिसमें सबसे ज्यादा वोट दीपिका पादुकोण को मिले। वहीं, लगातार पिछले 2 सालों से विनर रही प्रियंका चोपड़ा इस पोल में दूसरा पायदान पर रहीं। कमाल की बात तो यह रही कि 2 टीवी सीरियल एक्ट्रेसस ने तीसरा और चौथा पायदान हासिल किया, जबकि आलिया भट्ट पांचवें स्थान पर रहीं। तीसरा स्थान टीवी सीरियल ‘जवाई राजा’ में रोशनी खुराना का किरदार निभाने वाली निया शर्मा को मिला है। वहीं चौथा पायदान टीवी अभिनेत्री दृष्टि धामी के नाम रहा है।

ईस्टर्न आई की एंटरटेनमेंट एडिटर अस्जद नजीर ने बताया, “यह साल दीपिका के नाम रहा। उन्होंने ना सिर्फ यह खिताब जीता, लेकिन वह बॉलीवुड की क्वीन और भारतीय सिनेमा की सबसे महंगी महिला कलाकार भी बनी हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी पहली हॉलीवुड फिल्म में भी काम किया और नॉन-बॉलीवुड ऑडियंस में फिल्म की रिलीज से पहले ही काफी उत्साह पैदा कर दिया है।”

बॉलीवुड में धमाल मचाने के बाद जल्द ही हॉलीवुड में भी पदार्पण करने जा रही दीपिका ने इस विषय में कहा, “इससे मेरे चेहरे पर मुस्कान आई है, लेकिन अलग-अलग लोगों के लिए सेक्सी का मतलब भी अलग होता है। मेरे लिए यह सिर्फ शारीरिक नहीं है। जिसके साथ आप सहज हैं, वही सेक्सी है। आत्मविश्वास सेक्सी है। मासूमियत और सौम्यता सेक्सी है।”