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Tuesday, August 11, 2026
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अखिलेश के रहम-ओ-करम के मोहताज़ मुलायम!

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

संघर्ष और राजनीति के उतार-चढ़ाव के बीच जिस समाजवादी पार्टी की बुनियाद मुलायम सिंह यादव ने रखी थी और जिसकी बदौलत वह न सिर्फ मुख्यमंत्री बने बल्कि केंद्र की राजनीति में भी प्रधानमंत्री बनने के लगभग करीब पहुंच गए थे। उसी समाजवादी पार्टी में आज मुलायम सिंह बेटे अखिलेश के रहमोकरम के मोहताज हो गए हैं।

अखिलेश के हाथों हार के बाद पार्टी और चुनाव निशान दोनों गंवाने वाले मुलायम सिंह यादव न तो नई पार्टी बनाएंगे और ना ही कयास के अनुसार लोकदल में शामिल होकर चुनाव ही लड़ेंगे। यानि उन्होंने पूरी तरह अखिलेश के सामने या तो सरेंडर कर दिया है या सरेंडर का दिखावा कर रहे हैं।

हालांकि मुलायम को जानने वाले बताते हैं कि इतनी आसानी से कभी मुलायम ने हार नहीं मानी थी और जिस तरह अखिलेश के सामने उन्होंने आसानी से हथियार डाल दिए, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसको लेकर जहां विरोधी उन पर अखिलेश से मिलीभगत कर ड्रामा करने का आरोप लगा रहे हैं, तो मुलायम और शिवपाल से जुड़े पुराने समाजवादी नेता हाशिए पर चले गए हैं। दरअसल उन्होंने मुलायम का इतना मुलायम रूप पहले कभी देखा ही नहीं था। उधर मुलायम ने भाई शिवपाल के बेटों समेत अपने समर्थकों के लिए अखिलेश यादव से 38 विधानसभा टिकट मांगे है, लेकिन अखिलेश ने अभी तक 25 विधानसभा टिकट देने पर ही हामी भरी है। शेष लोगों पर विचार करने की बात कह कर फिलहाल टाल दिया है।

शिवपाल यादव ने खुद अपने लिए समाजवादी पार्टी से कोई टिकट नहीं मांगा है। यह इस बात का संकेत है कि शिवपाल भी मुलायम की तरह या तो सक्रिय राजनीति से दूर रहने वाले हैं या इतना सब कुछ होने के बाद अब अखिलेश के साथ काम करने में अपने को असमर्थ मान रहे हैं।

निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद भी शिवपाल मुलायम और अखिलेश के बीच कई बैठके हो चुकी हैं, लेकिन अब इन बैठकों का क्या प्रयोजन है और इन बैठकों में वास्तव में किन मुद्दों पर बात हो रही है। इसको लेकर सभी अलग-अलग कयास लगा रहे हैं। कुछ भी हो लेकिन अखिलेश आखिरकार समाजवादी पार्टी के बिग बॉस बन ही गए या यूं कहें की बना दिए गए।

अब समाजवादी पार्टी में वह सब कुछ होगा जो अखिलेश की मर्जी होगी अब ना तो उनकी मर्जी के खिलाफ समाजवादी पार्टी में चाचा शिवपाल की चलेगी और ना ही पिता मुलायम की।

सपा-कांग्रेस गठबंधन से खुश आज़म, कहा, “दोनों हाथ में लड्डू”

आँचल जायसवाल | Navpravah.com

समाजवादी पार्टी में सुलह के लिए कोशिश करने वाले आज़म खान का बयान आया है। आज़म खान ने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के बीच सुलह की कई कोशिशें की थी। दोनों गुटों में समझौता हो जाए, इसके लिए आज़म खान लगाकर प्रयास करते रहे। अब जबकि सुलह लगभग हो चुकी है और समाजवादी पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करने जा रही है, इसपर आज़म खान का बयान आया है।

आज़म ने कहा कि बीजेपी के सफाये के लिए गठबंधन जरुरी है, भाजपा को रोकने में सपा पूरी तरह से सक्षम है। जब मुलायम-अखिलेश समझौते पर आज़म से पूछा गया तो बेबाकी से आज़म खान ने जवाब दिया कि उनके दोनों हाथों में लड्डू है, उनके हाथ से ना मुलायम गये हैं और ना अखिलेश।

मुलायम सिंह यादव की लिस्ट में भी आज़म खान का नाम था, वहीं अखिलेश यादव द्वारा जारी लिस्ट में भी आज़म खान को जगह मिली थी। पार्टी में मुस्लिम चेहरा होने के नाते आज़म खान मुस्लिमों को सपा का साथी बताते रहे हैं, उन्होंने कहा कि यादव परिवार के झगड़े से मुस्लिम समाज दुखी है।

भड़के सैफ अली ख़ान, कहा, “बवाल न मचाइए”

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

पटौदी खानदान के नवाब, बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने अपने नवजात शहज़ादे तैमूर के नाम पर हुए तमाम विवादों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। सैफ का कहना है कि तैमूर कोई ऐतिहासिक क्रूर शासक नहीं था, जिस पर जनता ने इतना बवाल मचा रखा है।

एक अंग्रेजी अखबार से हुई बातचीत में सैफ ने कहा कि वे तुर्की के शासक तैमूर से वाकिफ हैं। उन्‍होंने स्पष्ट किया कि असल में तुर्किश शासक का नाम ‘तिमूर’ था, न कि ‘तैमूर’। सैफ ने अंतर स्पष्ट करते हुए कहा, “मेरे बेटे का नाम तैमूर है, न कि तिमूर। मेरे बेटे का नाम तुर्किश शासक से जोड़ा जाना बिल्‍कुल गलत है।”

उन्‍होंने कहा ” ‘तैमूर’ एक प्राचीन पर्शियन नाम है जिसका अर्थ है ‘लोहा’। ये बात भी ठीक है कि दोनों शब्‍द एक ही शब्‍द से निकले हैं, लेकिन नाम एक नहीं है।” सैफ ने यह भी कहा कि जब हमें बेटा हुआ तो मुझे और करीना को तैमूर नाम पसंद आया, हमने यही रख दिया। सैफ ने बताया कि उनसे ज़्यादा करीना को यह नाम पसंद आया था।

सोशल मीडिया में इस नाम को लेकर हुई तमाम उठापटक पर सैफ ने कहा, “सोशल मीडिया एक ऐसा प्‍लेटफॉर्म है, जहां पर लोग अपने विचार व्यक्त करते हैं। वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग जब अपनी बात रखते हैं, तो उनका तरीका बहुत ज्‍यादा बुरा होता है।”

सैफ ने कहा, “अब तो मुझे लगता है, उस वक्‍त मुझे फिल्मों की तरह डिस्‍क्‍लेमर भी देना चाहिए था कि इस नाम का किसी भी जीवित या मृत व्‍यक्ति से कोई संबंध नहीं है।”

जल्द अभिनय का जलवा बिखेरेंगी माइकल जैक्सन की बेटी पेरिस!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

‘किंग ऑफ पॉप’ के नाम से मशहूर दिवंगत पॉप स्टार माइकल जैक्सन की बेटी पेरिस जैक्सन बहुत जल्द ही अभिनय क्षेत्र में अपना जलवा बिखेरेंगी। जी हां! माइकल की 18 साल की बेटी पेरिस ने टीवी सीरीज ‘स्टार’ में एक भूमिका के लिए डायरेक्टर ली डेनियल्स के साथ मुलाकात भी की है। डेनियल्स ने इंस्टाग्राम पर अपनी और पेरिस की एक तस्वीर साझा की, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा, “जब पेरिस आपसे मुलाकात करने आती हैं, तो ढेर सारी बातें होती हैं।”

एक इंग्लिश वेबसाइट के मुताबिक पेरिस, ‘स्टार’ सीरीज के डायरेक्टर डेनियल्स के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही हैं और जल्द ही इस सीरीज के ज़रिये अभिनय क्षेत्र में डेब्यू करेंगी। इसके अतिरिक्त पेरिस को कई मॉडलिंग एजेंसियों से भी प्रस्ताव मिले हैं और उनकी तस्वीरें तीन प्रमुख फैशन मैग्जीन के कवर पेज पर भी पब्लिश होने जा रही हैं। यही नहीं पेरिस को कई ब्रांड्स के एड्वर्टीज़मेन्ट के लिए एप्रोच किया गया है।

अब देखना यह होगा कि अपने पहले डेब्यू शो से क्या पेरिस भी अपने पिता जैसे दर्शकों के दिलों में अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हो पाएंगी या नहीं।

भड़के बीजेपी कार्यकर्ता, मोदी के पोस्टर पर पोती कालिख़

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

बीजेपी की पहली लिस्ट जारी होते ही पार्टी में विरोधी सुर तेज हो गए है। टिकट वितरण की प्रक्रिया से नाखुश कार्यकताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर पर कालिख पोत दी है, वहीं अमित शाह के पोस्टर पर चप्पल फेंक रहे है। पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता अपने साथ व चहेते प्रत्याशियों के साथ हुई नाइंसाफी को लेकर पूरे प्रदेश भर में विरोध कर रहे हैं।

बीजेपी के टिकट वितरण का विरोध करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी, राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, राजवीर सिंह के मुँह पर कालिख पोत दी है। वहां पर लगे शीर्ष नेताओं के पोस्टरों पर इन कार्यकर्ताओं ने अपना गुस्सा उतारा। प्रदेश भर में जिन नेताओं के टिकट काटे गए है, उनके समर्थक पार्टी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ नारेबाजी और पुतला फूंक अपना गुस्सा निकाल रहे हैं।

समर्थकों का कहना है कि पार्टी में जातिगत आधार पर टिकट बाटें जा रहे हैं। बीजेपी के शीर्ष नेता बाहर से आए लोगों को ज्यादा वरीयता दे रहे हैं। इसकी वज़ह से पार्टी के पुराने नेताओं को साइड लाइन कर दिया गया है। ऐसे में जिन प्रत्याशियों के टिकट काटे गए हैं, वह दूसरी पार्टी का रूख कर सकते है।

चुनाव चिह्न मामले में क्यों खामोश रहे मुलायम!

अनुज हनुमत | Navpravah.com

कल चुनाव आयोग ने महीनों से चले आ रहे समाजवादी कुनबे के विवाद पर बड़ा फैसला देते हुए साईकिल चुनाव चिह्न को अखिलेश यादव गुट के हवाले कर दिया। समाजवादी पार्टी में मुलायम और अखिलेश के बीच जारी जंग में चुनाव आयोग से मुलायम गुट को करारा झटका लगा है। आयोग ने सोमवार को पार्टी के चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ अखिलेश के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी को देने का फैसला सुनाया। इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ी बात यह देखने को मिली कि मुलायम सिंह यादव चुनाव चिह्न को लेकर ज्यादा आक्रामक नही दिखें! जानकारों का मानना है कि हो सकता है मुलायम सिंह यादव खुद भी यह चाहते थे कि चुनाव चिह्न बेटे को ही मिले और वही पार्टी का प्रतिनिधित्व करे।

गौरतलब हो कि कल फैसला आते ही अखिलेश यादव की चुनाव आयोग में पैरवी करने वाले वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि चुनाव आयोग ने कई नजरियों से जांच पड़ताल के बाद ये फैसला सुनाया है। उन्होंने कहा कि मुलायम गुट चुनाव आयोग के निर्देशों के हिसाब से दस्तावेज नहीं पेश कर पाए। उनके पास अपनी बात साबित करने के सबूत नहीं थे। फ़िलहाल निर्वाचन आयोग ने सोमवार को चुनाव चिह्न ‘साइकिल’ को लेकर पिता-पुत्र (मुलायम-अखिलेश) के बीच चल रही खींचतान के बीच फैसला अखिलेश के पक्ष में सुनाया। सपा नेता रामगोपाल यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने साइकिल चुनाव चिह्न अखिलेश को दिया है और पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष माना है।

दरअसल जब से समाजवादी कुनबे में विवाद शुरू हुआ है, तब से मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश पर किसी भी फैसले को लेकर ‘मुलायम’ ही दिखें है। शायद इसीलिए पांच साल पहले मुलायम सिंह यादव ने बेटे के हाथों में सूबे की बागडोर सौंप दी थी।

यूपी चुनावी दंगल: उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस की जुगलबंदी

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

उत्तर प्रदेश के चुनावी दंगल में अगले 24 घंटों में कुछ नया ट्विस्ट देखने को मिल सकता है। देश में इस वक़्त की सबसे सशक्त पार्टी, भारतीय जनता पार्टी को पटखनी देने के लिए, कभी एक दूसरे पर जम कर फब्तियां कसने वाली कांग्रेस और सपा हाथ मिलाने की पूरी तैयारी में हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने ऐलान किया है कि कांग्रेस और सत्ताधारी समाजवादी पार्टी का गठबंधन पक्‍का होगा। उन्होंने बताया कि अगले 24 से 36 घंटों में इस बारे में अंतिम फैसला हो जाएगा।

आज़ाद के अनुसार यह गठबंधन केवल नंबर बढ़ाने के लिए नहीं होगा, सरकार बनाने के लिए होगा। उन्होंने कहा, “हमारा गठबंधन प्रदेश में सरकार बनाएगा।” हालांकि उन्होंने सीटों के बंटवारे को लेकर सहमति पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि महागठबंधन पर अभी कोई चर्चा नहीं करेंगे। जब अलायंस पर विस्‍तार से प्रेस कॉन्‍फ्रेंस होगी, तब इस बारे में बताया जाएगा।

इधर साइकिल पर कब्जा करने के बाद मुख्यमंत्री व ताज़ा तरीन सपा सुप्रीमो बने अखिलेश यादव ने भी मंगलवार को अपने सरकारी आवास पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश ने साफ किया कि गठबंधन और पार्टी प्रत्याशियों पर फैसला जल्द ही ले लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार अगले चौबीस घंटे में अखिलेश इसका ऐलान कर देंगे।

कांग्रेस से गठबंधन के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि कृपया थोड़ा इंतजार कर लीजिए, जल्द ही इसका ऐलान भी कर दिया जाएगा। अखिलेश ने कहा कि अब जिम्मेदारी बड़ी है, इसलिए अब उनका सारा ध्यान दोबारा सरकार बनाने पर रहेगा। आज वह पार्टी दफ्तर न जाकर, पूरा समय प्रत्याशियों के चयन में ही लगाएंगे। एक से दो दिन में इसका ऐलान कर दिया जाएगा।

इससे पहले चुनाव आयोग का निर्णय आने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने गठबंधन पर साफ किया था कि वह चाहते हैं कि गठबंधन हो, लेकिन अंतिम फैसला अखिलेश द्वारा ही लिया जायेगा।

नितीश पर बरसे लालू, कहा, “सरकार की लापरवाही के चलते हुई नाव दुर्घटना”

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती नज़दीकियों से अंदर ही अंदर खफा चल रहे राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पटना में हुए नाव हादसे के लिए नितीश सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है। अपनी ही पार्टी के साथ गठबंधन से बनी सरकार के खिलाफ बोलते हुए लालू ने कहा कि यदि आयोजन सरकार द्वारा किया गया था, तो समुचित व्यवस्था भी सरकार को ही करनी थी।

लालू के आवास पर रविवार को अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के लिए ‘दही-चूड़ा’ भोज का आयोजन होना था, लेकिन नाव हादसे के कारण इसे रद्द कर दिया गया। फिर भी सुदूर जिलों के सैकड़ों नेता एवं कार्यकर्ता लालू के आवास पर पहुंचे। घटना से दुःखी लालू ने सबसे मुलाकात की। उन्हें मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं और भोज रद्द होने की वजह बताई।

लालू प्रसाद ने कहा है कि पतंगोत्सव सरकार का आयोजन था, इंतजाम भी उसी तरह का होना चाहिए था। नाव हादसे के लिए समुचित व्यवस्था न करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को समुचित व्यवस्था भी करनी चाहिए थी।

लालू ने पतंगबाजी के आयोजन की पूर्व जानकारी से इन्कार किया और कहा कि उन्हें हादसे के बाद बताया गया कि वहां इस तरह का कोई आयोजन भी था। उन्होंने कहा कि घटना की तह तक जांच कराई जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

समाजवादी दंगल: साईकिल की क़िस्मत का फैसला आज

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

इस उम्र में किस्मत मुलायम को बैल से खेत जोतने की कगार पर ले आई है, जबकि अखिलेश पिता को हल से खेत जोतता छोड़कर मोटरसाइकिल से फर्राटे भरते दिखाई देंगे। आज चुनाव आयोग समाजवादी दंगल में अम्पायर बन फैसला सुनाने वाला है। आयोग में अखिलेश की तरफ से रामगोपाल यादव ने पक्ष रखा है कि सपा के 80 फीसदी विधायक और कार्यकर्ता पार्टी के नए अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ है।

इस मामले में मुलायम सिंह यादव ने चुनाव आयोग के सामने यह दलील रखी है कि वे रामगोपाल को पहले ही पार्टी से निकाल चुके थे, लिहाजा उनके द्वारा बुलाया अधिवेशन अवैध है और वह ही सपा क़े राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इस स्थिति में जानकारों की राय है कि चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे में चुनाव आयोग के सामने इतना समय नहीं है कि वह विवाद की सुनवाई कर किसी नतीजे पर पहुँच सके। क्योंकि इस प्रक्रिया में चार से पांच माह का समय लगेगा । लिहाजा विवाद का निपटारा होने तक उसके सामने सबसे बेहतर विकल्प है कि वह साइकिल चुनाव चिन्ह और समाजवादी पार्टी दोनों का नाम फ्रीज कर दे और 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में दोनो से अलग पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने के लिए कह दे। अगर ऐसा हुआ तो इतनी जल्दी नई पार्टी का नाम और चुनाव निशान मतदाताओं तक पहुँचना दोनो खेमे के लिये सबसे बड़ी समस्या होगी।

दरअसल मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी अयोध्या में बाबरी ढांचा ध्वस्त होने के एक साल पहले ही बनाई थी। जबकि मुलायम सिंह यादव ने अपना राजनीतिक सफर लोकदल के साथ शुरू किया था। मुलायम सिंह यादव सन 1982 में लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। जबकि 1985 में उन्होंने लोकदल के बैनर तले चुनाव लड़ा था और 85 विधानसभा सीटे भी जीती थी। इसी के बाद वह नेता विपक्ष बने थे। अब जब पार्टी पर बेटे अखिलेश ने कब्जा कर लिया है और कभी उनकी जय जयकार करने वाले नेता अखिलेश की हैंडिल पकड़ चुके हैं, तो अब मुलायम सिंह यादव के सामने एक ही रास्ता बचा है कि वह फिर से अपनी पार्टी में वापस लौट जाएं। जिसकी संभावना काफी अधिक दिखाई दे रही है।

अगर ऐसा हुआ तो 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव भाई शिवपाल और अमर सिंह के साथ दो बैलों की जोड़ी लेकर किसान के भेष में इस उम्र में खेत जोतते नजर आएंगे।

सूत्रों की माने तो लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह से अमर सिंह, मुलायम सिंह यादव और शिवपाल से लगातार वार्ता हो रही है। लोकदल मुलायम सिंह यादव को पार्टी अध्यक्ष बनाने को तैयार भी है। अब मुलायम और शिवपाल समर्थक सपा नेताओं को लोकदल से टिकट दिया जाएगा। बस इन्तजार है तो चुनाव आयोग के फैसले का जिसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

पकड़ा गया सलमान खान का झूठ!

शिखा पाण्डेय | Navpravah.com

बॉलीवुड के मोस्ट फेमस बैचलर सलमान खान की उम्र 51 साल की होने के बावजूद अब तक उन्होंने शादी नहीं की, इस बात का दुःख उनके करोड़ों फैन्स को है। लेकिन क्या सल्लू के चाहनेवाले ये जानते हैं कि वोटर आईडी के अनुसार सलमान खान 64 वर्ष के हो गए हैं? जी हां! दुनियाभर को सलमान बताते हैं कि उनकी उम्र 51 साल है, लेकिन उनका मतदाता पहचान पत्र यानि वोटर आईडी कुछ और ही बताता है।

दरअसल वोटर आईडी की एक तस्वीर इंटरनेट पर वायरल हो रही है, जिसमें मतदाता का नाम सलमान ख़ान और उसके पिता का नाम सलीम ख़ान है। फोटो सलमान ख़ान की ही लगी है और उम्र दिखाई गई है 64 साल, लेकिन इसके पीछे सच्चाई यह है कि ये फोटो आईडी एक सरकारी गलती है, जो द ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनावों के दौरान 2016 में हुई थी।आपको बता दें कि ये फ़र्ज़ी वोटर आईडी का क्लासिक केस है, जो चुनावों के दौरान सामने आया था। ऐसे मामले अक्सर ख़बरों में छाए रहते हैं, जिनमें किसी मतदाता के पहचान पत्र में नाम, पता, पिता का नाम, जन्म तिथि या फोटो का गोलमाल हो, लेकिन किसी ऐसे सेलेब्रटी के नाम पर पहचान पत्र इशू हो जाना, जिसे देश-विदेश में लाखों-करोड़ों लोग जानते हों, आश्चर्यजनक है।

मानाकि सलमान नाम के लोगों की इस देश में कमी नहीं है। ऐसे लोग भी मिल जाएंगे, जिनका नाम सलमान और पिता का नाम सलीम होगा, लेकिन सबसे बड़ा सवाल वोटर आईडी पर लगी फोटो है, जो बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान ख़ान का है। आश्चर्य वाली बात है कि चुनाव अधिकारियों ने बॉलीवुड के दबंग सलमान को 64 वर्षीय हैदराबाद का रहिवासी बना दिया है।