नेपाल के पर्सा जिले में एक ट्रैक्टर-ट्राली के पलट जाने से दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। नेपाल के प्रमुख समाचार पत्र ‘द हिमालयन टाइम्स’ द्वारा सोमवार को जारी एक रपट के मुताबिक, दुर्घटना में मारे गए लोगों की पहचान बिहार के चंपारण जिले के 50 वर्षीय महेंद्र पासवान और नौ वर्षीय पूजा कुमारी के रूप में की गई है।
पुलिस उपाधीक्षक चक्र बहादुर जोशी ने बताया, “25 लोगों को ले जा रहा यह ट्रैक्टर रविवार रात पलट गया। हादसे में नौ लोग घायल भी हुए हैं। ये सभी यात्री नेपाल के पर्सा जिले में दुधेश्वर महादेव मंदिर दर्शन करने जा रहे थे।”
लाहौर के फिरोजपुर रोड पर एक शक्तिशाली बम ब्लास्ट में 25 लोगों की मौत हो गई है. अरफा करीम आईटी टावर के पास हुए इस धमाके में 39 अन्य घयाल हो गए हैं.
पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक, ‘एसपी इमरान अवान ने बताया कि मृतकों और घायलों को अस्पताल लेजाया जा रहा है जिनमें पुलिसवाले भी शामिल हैं.’ एसपी के मुताबिक धमाके के वक्त इलाके में अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी था.
मौके पर फॉरेंसिक दल भी पहुंच गया है जो धमाके के प्रकार की जांच कर रहा है. जहां धमाका हुआ उसके करीब ही पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री और नवाज शरीफ के शाहबाज शरीफ का ऑफिस है. इस घटना में दो गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त होने की खबर आई है.
लाहौर में इससे पहले भी कई धमाके हो चुके हैं. 13 फरवरी को असेंबली के पास हुए धमाके में 13 लोग मारे गए थे और पिछले साले ईस्टर के मौके पर हुए धमाके में 72 लोगों की मौत हो गई थी.
इराक में लापता 39 भारतीयों पर एक निजी चैनल के खुलासे के बाद चर्चा तेज हो गई है, अकाली दल सांसद चंदूमाजरा ने लोकसभा में लापता भारतीयों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लापता में से अधिकतर लोग पंजाब से हैं, मैं चाहता हूं कि सरकार इस विषय पर कुछ निर्णय लिया।
इससे पहले कांग्रेस पार्टी कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने की तैयारी थी, कांग्रेस ने सुषमा पर देश और संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया है। सुषमा स्वराज ने सभी नागरिकों के जीवित होने की बात कही थी, लेकिन सरकार के पास अभी इसकी कोई पुष्टि नहीं है।
लापता भारतीयों के संबंध में इराकी विदेश मंत्री इब्राहीम-अल जाफरी ने कहा है कि इराक सरकार के पास लापता 39 भारतीयों की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है, उन्होंने ये भी कहा कि बंधक बनाए गए भारतीय मजदूर जिंदा हैं या मारे गए, इसे लेकर भी उनके पास कोई सूचना नहीं है।
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि संसद में विदेश मंत्री द्वारा दी गई जानकारी भ्रामक है, हमें चिंतित होना चाहिए कि क्या वे जीवित हैं? कहां हैं? अगर वहां जेल नहीं है, तो हमें यह देखना चाहिए कि क्या विदेश मंत्रालय ने जानकारी सत्यापित की है।
एनसीपी माजिद मेमन ने इस मुद्दे पर कहा कि हम इस मुद्दे को उठाएंगे, हमने जो इंडिया टुडे पर देखा है इस मुद्दे पर सुषमा स्वराज को माफी मांगनी चाहिए।
मोसुल मसले पर पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर का कहना है कि सरकार इस मुद्दे पर गुमराह क्यों कर रही है, लोगों को सच्चाई क्यों नहीं बताते, सच्चाई सामने आने चाहिए उन्होंने कहा कि पिछले 2 साल से सरकार यही बात कह रही है कि वह इराक जेलों में वहां पर बंद है, लेकिन निजी चैनल का खुलासा कुछ और ही बंया कर रहा है।
आर के सिंह का कहना है कि 39 भारतीयों के बारे में जो भी कहा जा रहा है, उन को खोजने की जरूरत है, उन्होंने कहा कि जिस जेल की बात की जा रही है, वह जेल खाली है, हो सकता है उनको कहीं और ले जाया गया हो, वह सेफ है या नहीं यह नहीं कहा जा सकता है।
दिल्ली के लोक नायक भवन में लगी आग पर काबू पाने का प्रयास जारी है. आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की 26 गाड़ियां मौके पर पहुंच चुकी हैं.दमकल विभाग के कई कर्मचारियों की आग बुझाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. दमकल अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक इमारत में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है.
बताया जा रहा है कि यह आग दोपहर में 3:45 बजे के आस-पास लगी. फिलहाल आग लगने की वजह का पता नहीं लग पाया है. बिल्डिंग में मौजूद एक उच्च अधिकारी ने इस मामले में फ़र्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहा, देखिए जैसे ही सायरन बजा हमलोग बाहर की ओर दौड़े. लोगों को एक जोर की आवाज सुनाई दी. धमाका शायद एसी के कमप्रेशर से हुआ होगा. इस अधिकारी का दफ्तर तीसरे और चौथे मंजिल पर है.
दिल्ली के खान मार्केट में स्थित लोक नायक भवन में 18 से भी ज्यादा विभागों के दफ्तर हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग के अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का ऑफिस भी इसी बिल्डिंग में चल रहा है. इसके साथ कई कई कमीशनों के दफ्तरों भी बिल्डिंग में स्थित है.
ऐसा माना जाता है कि देश की खुफिया सूचनाओं सहित आयकर से संबंधित कई दस्तावेज इस बिल्डिंग में रखे जाते हैं. जिस तीसरे और चौथे मंजिलों में आग लगने की बात सामने आ रही है उस तल पर देश में बनाए गए कमीशनों के दफ्तर हैं.
जिस तल पर आग लगी है उस तल पर पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग,का ऑफिस है. यहां पर पेंशनभोगियों की शिकायतों और समस्याओं की देखरेख करनेवाला नोडल विभाग हैं. साथ ही सचिव (पीजी) लोक शिकायत निदेशालय का दफ्तर है. आग पर अगर जल्द ही काबू नहीं पाया गया तो काफी नुकसान हो सकता है. लोकनायक भवन में ईडी, इनकम टैक्स सहित और भी कई सरकारी संस्थाओं के ऑफिस हैं.
सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम में भारत के साथ सैन्य तनातनी के बीच चीन लगातार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। चीन की सरकार के बाद अब पहली बार चीनी सेना ने भी डोकलाम को लेकर धमकी दी है, चीनी सेना ने जारी अपने बयान में कहा है कि डोकलाम से भारत की सेना पीछे हट जाए, नहीं तो हम अपनी संख्या और बढ़ा देंगे।
आए दिन चीन की सरकार की ओर से धमकी आती रहती है लेकिन ये पहली बार है कि चीनी सेना ने बयान जारी कर गीदड़भभकी दी है। चीनी सेना ने कहा है कि वो संप्रभुता की रक्षा के लिए कुछ भी करेंगे।
चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू क़ियान ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “एक पहाड़ को हिलना आसान है, लेकिन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को हिलाना बहुत मुश्किल।” उन्होंने आगे कहा कि चीन अपने क्षेत्र और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए अपनी क्षमता ‘लगातार मजबूत’ कर रहा है।
1 अगस्त को पीएलए की 90 वीं वर्षगांठ से पहले एक विशेष ब्रीफिंग में पीएलए ने डॉकलाम पर एक मजबूत संदेश दिया है, PLA की तरफ से साथ ही कहा गया है कि डोकलाम में तैनाती भी बढ़ाई जाएगी।
पीएलए ने यह भी कहा कि इस घटना के जवाब में एक “आपातकालीन प्रतिक्रिया” के तौर पर क्षेत्र में और अधिक चीनी सेना उतार सकती है, इसके साथ ही वरिष्ठ कर्नल वू कि़आन ने रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता से डोकलाम पठार पर चीन के सड़क निर्माण का पक्ष भी रखा।
कि़आन ने कहा, “जून के मध्य में, चीनी सेना ने एक सड़क के निर्माण की जिम्मेदारी ली थी, डोंगलंग चीन का क्षेत्र है और चीन का अपने क्षेत्र में सड़क निर्माण करना एक सामान्य घटना है।” उन्होंने आगे कहा, “भारत द्वारा चीन के क्षेत्र में घुसना परस्पर मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय सीमा का एक गंभीर उल्लंघन है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।”
वरिष्ठ कर्नल वू ने कहा, “हम भारत से दृढ़ता पूर्वक आग्रह करते हैं कि वह अपने सैनिकों को दोनों देशों की सीमा रेखा से वापस बुलाए, यह समस्या को निपटाने के लिए आधार है।” उन्होंने आगे यह भी कहा, “हम दृढ़ता आग्रह करते हैं कि भारत अपनी गलतियों को सही करे और अपने उकसाने वाले कामों को समाप्त करे।”
85 वर्षीय भारतीय स्पेस सांइस के जनक यूआर राव का आज सुबह 2:30 बजे हार्ट की समस्या के कारण निधन हो गया है। लंबे वक्त से वे बीमार थे, जिसके कारण अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था।
कर्नाटक के अडामारू में 10 मार्च 1932 को एक साधारण परिवार में जन्मे राव को साल 2013 में सोसायटी ऑफ सेटेलाइट प्रोफेशनल्स इंटरनेशनल ने सेटेलाइट हॉल ऑफ फेम, वाशिंगटन में शामिल किया था। साल 1984 से लेकर 1994 तक ISRO के अध्यक्ष रह चुके राव का ही दिमाग था चंद्रयान-1 और मंगलयान के पीछे। प्रोफेसर राव को अंतरराष्ट्रीय एस्ट्रोनॉटिकल फेडरेशन ने प्रतिष्ठित द 2016 आईएएफ हॉल ऑफ फेम में भी शामिल किया था।
यूआर राव की अगुवाई में ही भारत का पहला उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ अंतरिक्ष में भेजा गया था, और 20 से अधिक उपग्रहों को भी उन्होंने ही डिजाइन किया था। प्रोफेसर यूआर राव का पूरा नाम उडुपी रामचंद्र राव था और साल 1976 में ही पद्मभूषण से सम्मानित होने के अलावा पिछले साल उन्हें भारत सरकार ने पद्म विभूषण से नवाजा था।
वैज्ञानिक यूआर राव पिछले कई सालों से विदेशी यूनिवर्सिटी समेत कई बड़े संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत थे। उन्होंने 10 से ज्यादा इंटरनेशनल अवॉर्ड और कई नेशनल अवॉर्ड जीते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने प्रोफेसर यूआर राव के निधन पर दुख जताया है। पीएम मोदी ने कहा कि प्रो. यूआर राव के योगदान को देश कभी नहीं भूल पाएगा।
Army Personnel brave the chill at the India -china border at Nathula on Monday.PTI *** Local Caption *** "B-109, GANGTOK-250201 - FEBRUARY 25, 2008 - Nathula: Indian army personnel braving the severe cold and snows at Nathula, Indp-China border, on Monday. PTI Photo"
सौम्या केसरवानी । Navpravah. com
भारत और चीन के बीच बढ़ रही तनातनी के बीच भारत सरकार नॉर्थ ईस्ट में अपनी सीमाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा के पास तक पहुंचने के लिए अब भारत सरकार वहां पर सुरंग बनाने पर जोर दे रही है।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, यह सुरंग दो लेन की होगी, सुरंग के बनने के बाद 13,700 फीट ऊंचे सेला दर्रे का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय लोगों समेत सेना को पहाड़ी यात्रा मार्ग की दूरी घटकर सिर्फ 7 किलोमीटर रह जाएगी।
संगठन के प्रोजेक्ट कमांडर आरएस राव ने इस मुद्दे को लेकर वेस्टर्न कामेंग के उपायुक्त सोनल स्वरूप से भी मुलाकात की। अभी लोगों को तिब्बत की सीमा तक पहुंचने के लिए गुवाहाटी से भालुकपोंग होकर तवांग तक 496 किमी. का सफर करना पड़ता है, लेकिन सुंरग के बाद यह सफर घटेगा और समय बचेगा। इसके तहत 475 मीटर और 1.79 किमी. की सुरंग बनाई जाएगी, जो कि 11,000 फीट और 12,000 फीट की ऊंचाई पर होगी।
इसके अलावा असम की सरकार भी बांग्लादेश से लगी असम की सीमा को सील करने पर भी काम शुरू कर रही है। सर्वानंद सोनोवाल इस मुद्दे को चुनाव में उठाकर सत्ता तक पहुंचे हैं, इस मुद्दे के लिए उन्होंने सेना से भी मदद मांगी है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा है और सेना के इंजीनियरों की तैनाती की मांग की है।
इससे पहले मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ढोला सदीया सेतु’ पुल का उद्घाटन किया था, ये पुल चीन की सीमा के नजदीक भारत में किसी नदी पर बना सबसे लंबे पुल है। यह 60 टन वजनी युद्धक टैंक का वजन भी उठा सकता है।
औरंगाबाद के जिलाधिकारी कंवल अनुज ने एक सभा को स्वच्छता अभियान के लिए सम्बोधन करते हुए एक विवादित बयान दे डाला। शनिवार को सभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो अपनी बीवी के लिए शौचालय नहीं बना सकते, उन्हें अपनी बीवी को बेच देना चाहिए। जिसके बाद से वह विवादों मे घिर गए हैं।
डीएम अनुज ने कहा, कि ‘यहां कौन गरीब है जो कहेगा कि उसकी बीवी की इज्जत 12,000 रुपये से भी सस्ती है। कोई ऐसा नहीं होगा जो बोलेगा कि मेरी बीवी की इज्जत ले लो और 12,000 दे दो।’ कोई भी पैसे के लिए अपनी बीवी का बलात्कार नहीं करने देगा फिर शौचालय के लिए क्यों?
जानकारी के अनुसार, ज़िलाधिकारी स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के लिए इस कार्यक्रम में शिरकत करने पंहुचे थे। उसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने उनसे कहा कि उनके पास शौचालय बनाने के लिए पैसा ही नहीं है। सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। जिस पर डीएम ने कहा कि “एडवांस पैसा देने की बात करते हैं, लेकिन इंदिरा आवास के तहत जो एडवांस पैसे मिले थे, कई लोगों ने उस पैसों से अपनी बेटी की शादी कर ली और दूसरी चीजों में खर्च कर दिया।” इस बयान के बाद बिहार में नेताओं और लोगों ने उनका जमकर विरोध किया है।
काबुल: अफगानिस्तान के उत्तरी बगलान प्रांत में रविवार को एक यात्री बस के पलट जाने से 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 26 अन्य यात्री घायल हो गए. एक स्थानीय अधिकारी ने यह जानकारी दी. चीनी समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से कहा, “एक यात्री बस मजार-ए-शरीफ से काबुल की ओर जा रही थी, लेकिन लापरवाही से वाहन चलाने के कारण दुशी जिले के किलागी में बस पलट गई. हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 26 अन्य घायल हो गए.”
अधिकारी ने हालांकि अपनी पहचान उजागर करने से इनकार कर दिया.दुशी जिले के गवर्नर समशुद्दीन सरहदी ने दुर्घटना की पुष्टि की है. बगलान प्रांत की राजधानी पुल-ए-खुमरी के एक अस्पताल के प्रमुख मोहम्मद अनवर ने 14 शवों और 26 घायलों को अस्पताल लाए जाने की पुष्टि की.
संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने रविवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को विदायी दी. संसद के सेंट्रल हॉल में मुखर्जी को विदायी दी गयी. अपने विदायी भाषण में मुखर्जी ने कहा कि ‘अगर मैं यह कहूं कि इस संसद ने मुझे बनाया है तो इसे अशिष्टता नहीं माना जाएगा.’ इस मौके पर लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित एक पुस्तक मुखर्जी को भेंट की.
समारोह में राष्ट्रपति ने कहा, ”अगर मैं यह दावा करूं कि मैं इस संसद की रचना हूं तो शायद इसे अशिष्टता नहीं समझा जाएगा. मुझे लोकतंत्र के इस मंदिर ने, इस संसद ने तैयार किया है. 22 जुलाई 1969 को पहला राज्यसभा सत्र अटेंड किया था. संसद में 37 साल का सफर 13वें राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित होने के बाद ख़त्म हुआ था, फिर भी जुड़ाव वैसा ही रहा. अगर मैं यह दावा करूं कि मैं इस संसद की रचना हूं तो शायद इसे अशिष्टता नहीं समझा जाएगा. संसद में पक्ष और विपक्ष में बैठते हुए मैंने समझा कि सवाल पूछना और उनसे जुड़ना कितना ज़रूरी है. जब संसद में किसी व्यवधान की वजह से कार्रवाई नहीं हो पाती तो लगता है कि देश के लोगों के साथ गलत हो रहा है. मैंने बहुत से बदलाव देखे, हाल ही में जीएसटी का लागू होना भी गरीबों को राहत देने की दिशा में बड़े कदम का उदाहरण है.”
राष्ट्रपति मुखर्जी को संसद की ओर से विदाई देते हुए लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि यह सभी सदस्यों के लिए अपना सम्मान व्यक्त करने का एक सुअवसर है.
इसके साथ ही उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में राष्ट्रपति के पद की प्रतिष्ठा और गरिमा बढ़ाई. हामिद अंसापी ने कहा कि राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर राष्ट्रपति मुखर्जी के विचारों ने शीर्ष पद का कद बढ़ाया है.
अपने विदाई भाषण में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने भावपूर्ण विदाई के लिए सभी संसद सदस्यों और सेंट्रल में मौजूद सभी गणमान्य लोगों का शुक्रिया अदा किया. मुखर्जी ने इस मौके पर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को अपना मेनटॉर बताया. इसके साथ ही उन्होंने अतीत के दूसरे कई बड़े नेताओं को याद किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, ” मेरे जेहन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जुड़ाव की खूबसूरत यादें रहेंगी और उनका मेरे प्रति स्नेही और विनम्र व्यवहार मुझे हमेशा याद रहेगा.” इस मौके पर राष्ट्रपति मुखर्जी ने ये भी कहा कि अध्यादेश का रास्ता केवल अपरिहार्य परिस्थिति में अपनाया जाना चाहिए.
आपको बता दें कि अपने 5 साल के कार्यकाल में प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति पद की गरिमा को नई ऊंचाईयों पर ले गए. एक शिक्षक से नेता और उसके बाद राष्ट्रपति तक का सफर तय करने वाले प्रणब मुखर्जी अपने शालीन व्यक्तिव और विद्वता के लिए जाने जाते हैं.
राष्ट्रपति पद के रूप में प्रणब दा का कार्यकाल कभी विवादों में नहीं रहा. प्रणब दा ने अपने कार्यकाल का तीन साल मोदी सरकार के साथ गुजारा लेकिन कभी राष्ट्रपति और सरकार के बीच टकराव की स्थिति नहीं आई.