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Friday, August 14, 2026
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बिखर रही समाजवादी पार्टी से एक और इस्तीफा

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

लगातार बिखरती समाजवादी पार्टी में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं में एक और नाम जुड़ गया है। यशवंत सिंह, बुक्कल नवाब, सरोजनी अग्रवाल के बाद अब पार्टी के महासचिव डॉ अशोक बाजपेई ने विधान परिषद की सदस्यता के साथ साथ समाजवादी से भी इस्तीफा दे दिया है।

डॉ. बाजपेई ने विधान परिषद के सभापति रमेश यादव को अपना इस्तीफा सौंपा है। हरदोई निवासी डॉ. बाजपेई को सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी लोगों में गिना जाता है। बाजपेई से पहले सपा से विधान परिषद के सदस्य यशवंत सिंह, बुक्कल नवाब, सरोजनी अग्रवाल ने सपा से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। हालांकि डॉ बाजपेई ने अभी तक भाजपा की सदस्यता नहीं ली है लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे जल्द भाजपा में शामिल होंगे।

अशोक बाजपेई ने सपा और एमएलसी पद छोड़े जाने के सवाल पर कहा है कि वे नेता जी के अपमान से आहत हैं जिन्होंन खून पसीन बहाकर पार्टी को खड़ा किया और वे अब इस अपमान को और बर्दास्त नही कर सकते इसलिए पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश: राहुल को लाओ और ईनाम पाओ

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में उनके लापता होने के पोस्टर जगह-जगह लगाए गए हैं, जिसमें राहुल गांधी को ढूंढ़कर लाने वाले को उचित इनाम देने की भी बात लिखी है।
पोस्टर में लिखा है, “माननीय सांसद श्री राहुल गांधी अमेठी से लापता हैं। जिसके कारण सांसद द्वारा कराए जाने वाले विकास कार्य इनके कार्यकाल में ठप हैं। इनके व्यवहार से अमेठी की आम जनता ठगा हुआ और अपमानित महसूस कर रही है।” पोस्टर में निवेदक की जगह “अमेठी की जनता” अंकित है लेकिन प्रकाशक और मुद्रक का नाम पोस्टर में नहीं लिखा गया है।

प्रदेश कांग्रेस कमिटी के जिलाध्यक्ष योगेन्द्र मिश्रा ने आरएसएस और बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह उनके लोगों का किया हुआ काम है। वे राहुल गांधी को बदनाम करना चाहते हैं। उन्होंने साथ में यह भी कहा कि राहुल गांधी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं,इसलिए हर समय अमेठी में उपलब्ध होना मुमकिन नहीं। पूर्व में भी ऐसी हरकतें होती रही हैं और इस मामले को लेकर वे खुद पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।

वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष उमाशंकर पांडे ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इस घटनाक्रम से भाजपा और संघ का कोई संबंध नहीं है। राहुल ने अगर अमेठी के लिये कुछ काम किया होता तो इसकी नौबत ही नहीं आती।
अपर पुलिस अधीक्षक बीसी दुबे ने कहा कि कांग्रेस की तरफ से इस संबंध में शिकायत का कोई पत्र नहीं मिला है। शिकायत पत्र मिलने के बाद जांच कर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

“बाबूमोशाय बन्दूकबाज” के राइटर ग़ालिब असद से नवप्रवाह की खास बातचीत.

कोमल झा| Navpravah.com

नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी स्टारर  ‘बाबूमोशाय बन्दूकबाज़’, सेंसर बोर्ड द्वारा 48 कट्स लगाए जाने के कारण विवादों में रही है. सेंसर बोर्ड के इस रवैये से बॉलीवुड में काफ़ी नाराज़गी है। फ़िल्म के विषय में लेखक ग़ालिब असद भोपाली से Navpravah.com  की लम्बी चर्चा हुई.

ये रहे पूरी चर्चा के प्रमुख अंश:

सेंसर बोर्ड ने आपकी फिल्म पर लगभग 48 कट लगाए हैं. क्या आपको लगता है कि सेंसर बोर्ड अपनी मनमानी कर रहा है ?

ग़ालिब असद भोपाली- “पता नहीं सेंसर बोर्ड के मेंबर्स पूरी फिल्म देखते भी हैं या नहीं…उन्होंने अपनी एक लिस्ट तैयार कर ली है, और बिना किसी फिल्म की थीम को समझे, अगर उन शब्दों का प्रयोग हो रहा हो, जो उनकी फेहरिस्त में शामिल नहीं है तो मेंबर्स उस पर आपत्ति जताने लगते हैं. फिर जब वह हमें बुलाते हैं, तो हमें ऐसा लगता है कि हम किसी स्कूल के बच्चों की तरह हैं और हमने कोई गलती कर दी है. हेडमास्टर की तरह वो हमें नसीहत देते हैं कि हमें फिल्म बनाने से पहले इस बारे में सोचना चाहिए था. ऐसा लगता है जैसे वो बता रहे हैं कि हमने बहुत बड़ा गुनाह कर दिया. ग़ालिब के मुताबिक सेंसर चीफ पहलाज निहलानी शुरूआती प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होते. पांच सदस्य पहले देखते हैं और फिर कट्स की डिमांड रखते हैं. वो खुद ही फैसला कर लेते हैं कि सवा सौ करोड़ जनता को क्या देखना है.”

सेंसर बोर्ड का तो काम ही फिल्म को सर्टिफाई करना है. फिर आपको उनके कट से क्या दिक्कत है?

ग़ालिब- “सेंसर बोर्ड का काम जो तय है वो है फिल्म को सर्टिफाई करना न कि फिल्म कट करना, हम लोगों ने जिसे सेंसर बोर्ड कह कर बना दिया है,असल में वो एक फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड है जिसका काम फिल्म को सर्टिफाई और फिल्म को categorize  करना है. फिल्म को categorize करना इसलिए ज़रूरी है ताकि सभी उम्र के दर्शकों के लिए फिल्म categorize हो जाये और ये भी सर्टिफाई हो कि मूवी कितनी अडल्ट है…मूवी में कितना वॉयलेंस है. फिर  ऑडिएंस खुद तय कर लेगी कि उनको क्या देखना है क्या नहीं.”

सेंसर बोर्ड में फिल्म के लोग होते है या राजनेता ?

ग़ालिब-  “सेंसर बोर्ड में फिल्म के लोग नहीं होते है. पहले कुछ लोग फिल्म से थे तो लोग खुश हुए थे कि कोई तो हमारी फिल्म को समझ सकेगा लेकिन आज सेंसर बोर्ड वाले फिल्म देखने के लिए अपने पांच मेंबर को भेजते है, वो फिल्म को देखते है फिर उनके हिसाब से फिल्म कट करते है. सेंसर बोर्ड के ये मेंबर फिल्म कि दुनिया से जुड़े नहीं होते है.”

सुनने में आया है कि सेंसर बोर्ड के मेंबर ने किरण शयाम श्रॉफ को कहा औरत होकर ऐसी मूवी कैसे बनाई. इस पर आप क्या कहना चाहेंगे !

ग़ालिब-  “..ये तो उनकी मानसिकता है. वो औरत को बोलते है, ये औरत कहां है ये तो पैंट शर्ट पहने हुए है. तो आप इससे अंदाजा लगा सकते है कि इनकी सोच कहा तक जा सकती है…और हमारी मूवी में ऐसा भी कुछ नहीं है जो सेंसर बोर्ड के मेंबर ऐसा कुछ बोलें… ये लोग ऐसा बर्ताव करते है,तो बड़ा अजीब लगता है. लेकिन मुझे लगता है कि आज के समय में अपनी कुर्सी का हर कोई फायदा उठाता है. ये ह्यूमन नेचर है.”

सेंसर बोर्ड को क्या लव मेकिंग सीन्स से परेशानी है ?

ग़ालिब-  “सेंसर को इस फिल्म के 80 प्रतिशत लव मेकिंग सीन्स से परेशानी है. वो मानते हैं कि ये सब अश्लीलता है जिसे हटा दिया जाए.”

फिल्म के मुख्य किरदार के लिए कौन था पहली पसंद?

ग़ालिब-  “जब इस फिल्म की प्लानिंग हुई थी, तो नवाज़ का ही नाम आया था. वो एकदम बाबू के किरदार की तरह बात करते हैं. वो बिहार-यूपी के परिवेश से हैं, तो उनसे काफी जुड़ाव था. शायद यही वजह है कि लोग गैंग्स ऑफ़ वासेपुर से इस फिल्म की तुलना कर रहे हैं. चूंकि उस फिल्म में भी उन्होंने उसी परिवेश का किरदार निभाया था.”

‘बाबूमोशाय बन्दूकबाज़’ किसी वायलेंट फिल्म का टाइटल लगता है. क्या पारिवारिक दर्शक सिनेमा घरों तक पहुंचेंगे ?

ग़ालिब-  “इस फिल्म को देखने नॉर्मल फॅमिली नहीं जाएगी. इस फिल्म को देखने सिंगल ऑडिएंस और मल्टीप्लेक्स ऑडिएंस दोनों ही देखने जाएगी. फेमिलीज़ हो सकता है न जाये, क्योंकि आज भी लोग ऐसा समझते है कि फॅमिली के साथ ऐसी फिल्मे नहीं देखी जाती. फेमिली के सभी लोग देखते है वो बात अलग है. सब अकेले देखना पसंद करते है, लेकिन देखते सब है.”

इस फिल्म के  गाने भी आप ने ही लिखे हैं. इसमें बोर्ड ने कोई आपत्ति ज़ाहिर नहीं की ?

ग़ालिब-  “इस फिल्म में वैसे ही इतने कट्स  करने को कहा गया है. जब हम लोगो ने सेंसर बोर्ड को बर्फानी सॉंग भेजा तो एडल्ट कह कर रिजेक्ट कर दिया गया. हम लोगो को लगा कि कुछ विज़ुअल्स कि समस्या है…बाद में फिर भेजा तो कहा विज़ुअल्स क्यों हटाया, सोंग के लिरिक्स को सही करना था. लिरिक्स के वर्ड सही नहीं है. तो उनके हिसाब से शब्द या विज़ुअल्स, कुछ भी रोमैंटिक, नहीं होना चाहिए.”

क्या फिल्म को बनाते समय कोई ऐसी घटना हुई, जिससे आप को बहुत परेशानिया उठानी पड़ी हों ?

ग़ालिब-  “पहले यह फिल्म बंगाल में शूट की गयी थी, क्योंकि निर्माता कुशान नंदी बंगाली हैं. उन्हें लगा कि बंगाल में कोई दिक्कत नहीं होगी. लेकिन वहां तो मामला ही दूसरा हो गया। वहां भी काफ़ी परेशानी हुई. वहां के लोग हमारी भाषा नहीं समझ पा रहे थे, इसलिए हम वापस आये और फिर हमने दोबारा कहानी पर काम किया. इसके बाद बिहार का बैकड्रॉप सेट करना पड़ा। हालांकि फिल्म में बंगाल से जुड़ा हिस्सा भी होगा.”

कुशान नंदी निर्देशित बाबूमोशाय बन्दूकबाज़  25  अगस्त को रिलीज़ होगी और इस फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ बिदिता बाग लीड रोल में हैं.

PCB के नए चेयरमैन बने नजम सेठी

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने नजम सेठी को अपना चेयरमैन नियुक्त किया है, पाकिस्तान सुपर लीग के चेयरमैन सेठी को लाहौर राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में हुई बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया है।
इससे पहले 2013-14 में भी पीसीबी के चेयरमैन रहे सेठी ने अध्यक्ष चुनने के लिए बोर्ड के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब बोर्ड की अगली चुनौती पाकिस्तान में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को दोबारा जिंदा करने की है। सेठी को बधाई देते हुए शहरयार खान ने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि उनके अनुभव और मार्गदर्शन में पाकिस्तान क्रिकेट नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।”
चेयरमैन बनने के बाद नजम सेठी ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट रिश्तों पर कहा कि वो “भारत के साथ द्विपक्षीय सीरीज के लिए कोई दरवाजा बंद नहीं करने वाले हैं।”
पीसीबी के पिछले अध्यक्ष शहरयार खान ने बयान दिया था कि उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी नाकामी भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट रिश्तों को बहाल नहीं कर पाना था, अब नजम सेठी के सामने भी सबसे बड़ी चुनौती भारत और पाकिस्तान के बीच सीरीज कराना ही होगी।
पीसीबी का नया चेयरमैन बनने से एक दिन पहले नजम सेठी ने भारत में सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए यहां होने वाले आगामी टूर्नामेंटों को किसी अन्य तटस्थ स्थल पर करवाने की मांग की थी।
भारत को नवंबर में अंडर-19 एशिया कप की मेजबानी करनी है लेकिन नजम सेठी ने कहा, कि वह एशियाई क्रिकेट परिषद की इस हफ्ते होने वाली बैठक में इसका आयोजन किसी अन्य स्थान पर करेगें।

स्कूलों के आसपास अब नहीं मिलेगा जंक फूड -उत्तराखंड सरकार

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com

उत्तराखंड में स्कूलों के 200 मीटर के दायरे में जंक फूड नहीं मिलेगा। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगन्द्र खंडूड़ी ने कहा है कि आयोग ने प्रदेश के सभी स्कूलों में और स्कूलों के आसपास जंक फूड बेचने पर रोक लगा दी गयी है और अब अगर किसी स्कूल कैंटीन या स्कूल के 200 मीटर के दायरे में जंक फूड बेचा गया या कोई बेचते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने यह भी कहा है कि स्कूलों के हॉस्टल और कैंटीनों में भी जंक फूड पर रोक लगेगी।

आयोग ने फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कुपोषण की मुख्य वजह जंक फूड हैं और पाया गया है कि हॉस्टलों में रह रहे अधिकांश बच्चे पौष्टिक भोजन को छोड़ जंक फूड खाना पसंद करते हैं। स्कूल कैंटीनों और आसपास की जंक फूड की दुकानों में मोटा फायदा कमाने के लिए बच्चों को इस तरह पौष्टिकहीन खाने की चीजें बेची जाती है। इन सभी बातों पर गौर करते हुए आयोग ने यह कड़ा कदम उठाया है।

उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने इसके लिए मुख्य सचिव को आदेश जारी कर दिए हैं।

स्वस्थ हुए अभिनेता दिलीप कुमार, सकुशल लौटे घर

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com
मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती अभिनेता दिलीप कुमार की हालत में अब बिल्कुल सुधार है और आज वे सकुशल घर लौट चुके हैं। बीते दिनों डिहाइड्रेशन और मूत्र संबंधी संक्रमण के कारण उन्हें लीलावती अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था। दिलीप कुमार के ट्विटर अकांउट पर इस बात की जानकारी दी गयी।
आज दिन में ही अस्‍पताल ने बयान जारी कर बताया था कि उन्‍हें आज अस्‍पताल से छुट्टी दे दी जायेगी। उनकी पत्‍नी सायरा बानो ने भी बयान जारी कर कहा था कि दिलीप कुमार बिल्‍कुल ठीक हैं और बेसब्री से उनके घर आने का इंतजार कर रही हैं। बाद में उन्होंने दिलीप कुमार को अस्पताल से डिस्चार्ज किये जाने पर प्रसन्नता जतायी।
गौरतलब है कि दिलीप कुमार को पहले जनरल वार्ड में भर्ती कराया गया था। उस समय उन्हें डिहाइड्रेशन व किडनी से जुड़ी समस्याएं बतायी गयी थी। शुक्रवार को उन्हें आइसीयू में भर्ती कराया गया, ताकि नसों के माध्यम से उनका मेडिकेशन किया जा सके। पीटीआइ ने अस्पताल सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि उनकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है। हॉस्पिटल के सीइओ डॉ रविशंकर ने कहा था कि वे दिल्ली से भी डॉक्टरों व मेडिकल सुपरीटेंडेंट के माध्यम से दिलीप कुमार के स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने बताया था कि उनके शरीर का डिहाइड्रेशन ही परेशानी का एकमात्र बड़ा कारण है।
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अब बिना वीजा, कतर जा सकेंगे भारतीय

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com
अरब देशों से प्रतिबंध झेल रहे कतर ने 80 देशों की लिस्ट जारी की है जहां के नागरिक कतर में बिना वीजा के प्रवेश कर सकेंगे। भारत के साथ अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं। कतर की इस लिस्ट में पाकिस्तान को जगह नहीं मिली है।
कतर पर्यटन प्राधिकरण (क्यूटीए) के कार्यवाहक अध्यक्ष हसन अल इब्राहिम ने कहा है कि वीजा मुक्त यात्रा के आदेश को लागू कर दिया गया है और 80 देशों के नागरिकों को बिना वीजा कतर में आने देने की अनुमति देने के बाद कतर इलाके का सबसे ज्यादा खुला देश हो गया है जिससे पर्यटक कतर की संस्कृति और प्रकृति का लुत्फ उठा सकेंगे।  इसके लिए संबंधित व्यक्ति के पास कम से कम छह महीने की वैधता वाला पासपोर्ट और वापसी का टिकट होना अनिवार्य है।
वीजा में छूट पाने वाले देशों की कतर ने दो सूचियां तैयार की हैं। पहली सूची में 33 देश को शामिल को किया है जहां के नागरिकों को 180 दिनों के लिए छूट दी जाएगी और जो पहले 90 दिनों के मान्य होगी और फिर 90 दिनों के लिए इस और बढ़ा सकेंगे। जबकि दूसरी सूची में कतर ने 47 देशों को जगह दी है जिसमें भारत, अमेरिका और ब्रिटेन शामिल हैं। इन देशों को 30 दिनों के लिए छूट वैध होगी जिसे बाद में 30 दिनों के लिए और बढ़ाया जा सकता है।

मराठाओं को मिला आरक्षण

16 percent reservation for marathas
16 percent reservation for marathas
पीयूष चिलवाल । Navpravah.com
महाराष्ट्र में नौकरी और शिक्षा में आरक्षण समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे मराठा समाज के लोगों के लिए आखिरकार फडणवीस सरकार ने ओबीसी नियमों के तहत शिक्षा में आरक्षण देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसका ऐलान किया है।
नए नियमों के मुताबिक मराठा समाज के छात्रों को 605 कोर्सेस में ओबीसी कोटे की तरह रियायत मिलेगी। इससे लाखों छात्रों को फायदा मिलेगा। वहीं कौशल विकास योजना के तहत 3 लाख मराठा समाज के युवकों को रोजगार मिलेगा।
हर जिले में मराठा समाज के छात्रों के लिए होस्टलों का निर्माण किया जाएगा और एट्रोसिटी कानून पर विचार करने के लिए हर जिले में कमेटी का गठन किया जाएगा।
महाराष्ट्र के मराठा समुदाय के हजारों लोगों ने बुधवार को नौकरियों और शिक्षा सहित अन्य विभागों में आरक्षण की मांग लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में सुबह बायकुला के जीजामाता उद्यान से मौन मार्च निकाला जिसमें न तो कोई नारेबाजी और भाषणबाजी नहीं थी और न ही किसी राजनीतिक दल का बैनर था। मराठा क्रांति मोर्चा की यह 58वीं रैली थी।
दक्षिण मुंबई पूर्णतः भगवे रंग में रंगी थी। लोगों के सर में भगवा टोपी और हाथों में भगवा झंडा था। “एक मराठा लाख मराठा” लिखी तख्तियां भी हर जगह नज़र आ रही थी।

देश से बाहर निकाले जायेगें गैरकानूनी तौर से रह रहे 40 हज़ार रोहिंग्या

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने फरमान जारी किया है कि गैरकानूनी तौर पर रह रहे 40 हज़ार रोहिंग्या देश से बाहर निकाले जाएंगे, रोहिंग्या मुसलमान देश में अलग-अलग जगहों पर रह रहे हैं और अब समस्या बनते जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, ज्यादातर रोहिंग्या मुसलमान इस वक्त जम्मू कश्मीर, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान में रहते हैं। गृह मंत्रालय के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस समय यूएनएचसीआर के पास भारत में रह रहे 14,000 से अधिक रोहिंग्या के बारे में जानकारी मौजूद है।
अवैध विदेशी नागरिकों का पता लगाना और उन्हें वापस भेज देना एक निरंतर प्रक्रिया है, केंद्र सरकार यानी गृह मंत्रालय विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 3(2) के तहत अवैध विदेशी नागरिकों का पता लगाने और उन्हें वापस भेजने के लिए मिले अधिकार के आधार पर उन्हें भेजने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।
राज्य सरकारों और वहां के प्रशासन को भी रोहिंग्या सहित अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने उन्हें रोकने और उन्हें वह वापस भेजने की शक्तियां दी गई हैं।
म्यांमार सरकार ने 1982 में राष्ट्रीयता कानून बनाया था, जिसमें रोहिंग्या मुसलमानों का नागरिक दर्जा खत्म कर दिया गया था। जिसके बाद से ही म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को देश छोड़ने के लिए मजबूर करती आ रही है।
2012 में म्यांमार के राखिन राज्य में हुए सांप्रदायिक दंगों ने इसमें हवा देने का काम किया, उत्तरी राखिन में रोहिंग्या मुसलमानों और बौद्ध धर्म के लोगों के बीच हुए इस दंगे में 50 से ज्यादा मुस्लिम और करीब 30 बौद्ध लोग मारे गए थे। इसी क्रम में कई रोहिंग्या मुसलमान भारत में भी घुस आये थे और अब केंद्र सरकार इन पर एक्शन लेने के मूड में हैं।

फ़िर आएगा 500 का नया नोट

पीयूष चिलवाल । Navpravah.com
8 नवंबर 2016 को एक हजार व पांच सौ के नोट बंद करने के बाद सरकार ने पांच सौ व दो हजार रुपये के नए नोट जारी किए गए थे। इसी क्रम में नोटबंदी के बाद मंगलवार को रिजर्व बैंक ने महात्मा गांधी सीरीज के 500 के नए नोट को लेकर अधिसूचना जारी की है।
500 के नए नोट में ज्यादा परिवर्तन नहीं किए गए हैं। जहां नंबर पैनल होता है वहां अंग्रेजी में “ए” लिखा है और इस पर रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के साइन हैं। इसके पीछे की तरफ नोट जारी करने का वर्ष 2017 अंकित किया गया है।
जहां कल संसद में कांग्रेस ने एक ही नोट के दो रूप होने को लेकर इतना ज्यादा हंगामा किया कि उपसभापति को सदन की कार्रवाई स्थगित करना पड़ी थी वहीं रिजर्व बैंक के द्वारा पांच सौ रुपये का नया नोट जारी कर दिया गया है।
इस नए नोट के आने से बाजार में मौजूद पुराने नोटों के चलन में कोई फ़र्क नहीं पडेगा और पुराने नोट पहले की तरह चलते रहेंगे।