“अफसरों ने योगी को अंधेरे में रखा ” -सपा
तिरंगा लगाकर घूमना, एक मुस्लिम युवक को पड़ा महंगा
बाढ़ की वजह से गोरखपुर में बंद कराये कई स्कूल
कल से राजनाथ सिंह का चार दिवसीय यूपी दौरा
सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
गृहमंत्री एवं लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह चार दिवसीय दौरे पर 17 अगस्त को अपने संसदीय क्षेत्र लखनऊ पहुंचेगे। भारतीय जनता पार्टी, लखनऊ महानगर के अध्यक्ष मुकेश शर्मा ने बताया कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह 17 अगस्त को दोपहर 2 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचेगे जहां पर महानगर इकाई के कार्यकर्ताओं द्वारा उनका स्वागत किया जायेगा।
राजनाथ सिंह एयरपोर्ट से सीधे 3:00 बजे स्मृति उपवन जायेंगे, जहां पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा फसली ऋण मोचन योजना के प्रमाण पत्र के वितरण कार्यक्रम का शुभारम्भ करेंगे, उसके बाद अपने आवास 4 कालीदास मार्ग आयेंगे।
18 अगस्त को दोपहर 12:30 बजे पार्टी कार्यकर्ताओं से भेंट तथा दोपहर 4:00 बजे लखनऊ विधायकों/मंत्रियों से के साथ बैठक अपने आवास 4 कालीदा मार्ग पर करेंगे। सायं 6:00 बजे अगस्त क्रांति 75वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में राजनाथ सिंह कन्वेंशन सेंटर चौक जायेंगे।
सायं 7:30 बजे मध्य विधानसभा के बूथ स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंचेगे, 19 अगस्त को प्रातः 9:30 बजे से प्रतिनिधि मण्डल व पार्टी कार्यकर्ताओं से अपने आवास पर भेंट करेंगे। प्रातः 11:30 बजे आरएलबी स्कूल सेक्टर 14 इन्दिरानगर लखनऊ में विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ बैठक करेंगे।
सायं 4:30 बजे इन्दिरानगर में सिन्धी काउंसिल आॅफ इण्डिया के कार्यक्रम में जायेंगे उसके बाद सायं 5:30 बजे बाल्मीकि पार्क पेपरमिल कालोनी में बाल्मीकि समाज के कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे।
फिर 20 अगस्त को प्रातः 11:00 बजे एन.आई.ए. नये परिसर का उद्घाटन करेंगे उसके पश्चात गृहमंत्री जी 12:30 बजे अमौस एयरपोर्ट से दिल्ली के लिये रवाना होंगे।
मोदी जी, ‘बेटी बचाओ’ नहीं, बेटियों को दरिंदों से बचाओ- दिव्यांका त्रिपाठी
शिखा पाण्डेय । Navpravah.com
देश का 71वाँ स्वतंत्रता दिवस, जब देश जश्न-ए-आज़ादी में डूबा था, एक 12 साल की मासूम बच्ची किसी हैवान की हैवानियत से खुद को बचाने के लिए चीख चिल्ला रही थी, मगर कोई उसकी चीख सुनने वाला नहीं था। जी हाँ। बात इस स्वतंत्रता दिवस पर चंडीगढ़ में हुई उस दरिंदगी की ही है, जिसने देश को एक बार फिर शर्मसार कर दिया है। टीवी अभिनेत्री दिव्यांका त्रिपाठी ने इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक के बाद एक कई ट्वीट कर समाज के समक्ष कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिव्यांका ने प्रधानमंत्री को ट्वीट कर कहा कि देश में ‘बेटी बचाओ’ की जगह ‘बेटियों को बचाओ’ नारे को अमल में लाने की ज़रूरत है। दिव्यांका ने प्रधानमंत्री से अपने ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत देश से ‘बलात्कारी रूपी कचरे’ को जल्द से जल्द हटाने की मांग की है। दिव्यांका ने लिखा,”क्या बेटी बचाओ? अब बेटी को बचाओ। बेटे की चाहत नहीं,पर अब डरती हूँ बेटी पैदा करने से। क्या कहूँगी, क्यूँ उसे स्वर्ग से नर्क की दहशत में ढकेला!”
इस घटना पर गुस्सा जाहिर करते हुए ‘ ये हैं मोहब्बतें ‘ की लीड एक्ट्रेस ने लिखा, “महिलाओं को हर पार्टी को वोट देना बंद कर देना चाहिये, क्योंकि वह उन्हें देश के लिए इतना कम जरूरी समझते हैं। हम ‘बिना महिलाओं के’ या ‘बलात्कारियों के स्वर्ग’ में रहते हैं!” पीएम मोदी को संबोधित करते हुए उन्होंने लिखा,”क्यों हम ऐसे जघन्य अपराधों के लिए जघन्य सजा नहीं दे सकते? एक और बलात्कार! हम कौन सी स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं?”
दिव्यांका ने फिर लिखा, “प्रिय @narendramodi जी, #स्वच्छताअभियान के अंतर्गत इस रेपिस्ट नामक कचरे से निजात दिलाइये। हम घूरे में जी सकते हैं, इन भेड़ियों के डर के साथ नहीं।” उन्होंने आगे लिखा,”@narendramodi सर, ऐसी सज़ा गढ़िये इन महिलाभक्षियों के लिए कि औरतों को बुरी नज़र से देखने पर भी इन की रूह कांपे! आप पर भरोसा है, कुछ कीजिये।”
उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ में एक 8वीं की छात्रा के साथ रेप की घटना सामने आई है। यह बच्ची स्वतंत्रता दिवस के दिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद शॉर्टकट रास्ते से अपने घर जा रही थी और इसी बीच एक शख्स ने चाकू के बल पर इस घिनौनी हरकत का अंजाम दिया।
बिहार को अब उचित दर्जा मिलना चाहिए – केसी त्यागी
सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
दिल्ली में जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि अब बिहार और केंद्र दोनों जगह एनडीए की सरकार है इससे बिहार को विशेष पैकेज मिलने की संभावना है, जेडीयू हमेशा केंद्र के साथ मिलकर खड़ा है।
उन्होंने कहा कि जब NDA में थे तब केंद्र में UPA की सरकार थी, उस वक़्त विशेष राज्य के दर्जे की माँग ठुकरा दी गयी थी, बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने की चर्चा हुई सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भी मिल चुका है, अब बिहार और केंद्र दोनों जगह NDA की सरकार है, उम्मीद है अब बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिलेगा।
केसी त्यागी ने कहा कि कश्मीर को लेकर जो बातें पीएम मोदी ने कहीं उसका स्वागत करते हैं, अटल जी के इन सिद्धांतों का हम समर्थन पहले भी कर चुके हैं, अच्छी बोली के साथ कश्मीर को मुख्य धारा से जोड़ेंगें।
वरुण ने दिया पिता डेविड धवन को ये अनोखा सरप्राइज
शिखा पाण्डेय । Navpravah.com
अभिनेता वरुण धवन ने अपने पिता डेविड धवन के जन्मदिन के अवसर पर उन्हें एक खास तोहफा दिया है। धवन ने अपने प्रशंसकों के लिए अपनी आने वाली फिल्म ‘जुड़वा 2’ का पोस्टर सोशल मीडिया पर शेयर किया है।पोस्टर में वरुण दो बिलकुल अलग अंदाज़ में नजर आ रहे हैं। फिल्म की रिलीज डेट के साथ-साथ फिल्म की रिलीज डेट का भी खुलासा कर दिया गया है। फिल्म में जैकलीन फर्नांडीज और तापसी पन्नू भी मुख्य भूमिका में हैं। इनके अतिरिक्त अनुपम खेर भी मुख्य भूमिका नजर आयेंगे।
वरुण ने सोशल मीडिया पर पोस्टर साझा करते हुए लिखा, “दशहरा धमाका जुड़वा 2 पोस्टर, राजा और प्रेम। यह मेरे पिता की 43वीं फिल्म है, जो आज 65 साल के हो गए। कुछ घंटो में हम फिल्म का मोशन पोस्टर जारी करेंगे।” फिल्म में वरण ‘राजा’ और ‘प्रेम’ नाम के दो किरदारों में नजर आएंगे और कुछ इसी अंदाज में वह फिल्म के पोस्टर में भी दिख रहे हैं।
पोस्टर में वरुण के दोनों किरदार एक टैक्सी से उतरते नजर आ रहे हैं और टैक्सी की नंबर प्लेट पर लिखा है 299 7, जो फिल्म की रिलीज तारीख है। ‘जुड़वा 2’ वर्ष 1997 में आई सलमान खान अभिनीत ‘जुड़वा’ का रीमेक है। ‘जुड़वा 2’ का निर्देशन भी डेविड धवन ने किया है।
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल मे 123 लोगों की मौत
सौम्या केसरवानी । Navpravah.com
नेपाल के कई जिलों में लगातार हुई बारिश से अब तक 123 लोगों की मौत हो गयी है। नेपाल में बाढ़ से सुन्सारी, सिंधुली, झापा, बांके, मोरांग एवं पंच्छतर जिला अधिक प्रभावित हुआ है।
बाढ़ और भूस्खलन की घटना की वजह से नेपाल में सैकड़ों परिवार विस्थापित हो गए हैं। नेपाल के गृह मंत्री जनार्दन शर्मा ने कल संसद मे बताया कि कहा कि सभी सुरक्षा एजेंसियां एकीकृत तरीके से राहत कार्य चलाने के लिए जुटी है और चिकत्सीय सुविधाएँ भी लगातार बाढ़ इलाके क्षेत्र में दी जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि मोरांग में सैकड़ों घर पानी में डूब गए हैं, 80 प्रतिशत बाढ़ प्रभावित क्षेत्र पानी में डूब गयी है।
लगातार बारिश से आई बाढ़ ने निचले तराई इलाके में तबाही मचा दी है, पानी में फंसे हजारों लोगों को विस्थापित किया गया है। संपत्ति, पशुधन, मवेशियों और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई नदियों में पानी का स्तर खतरे के निशान को पार कर गया है और इससे लोगों के घर और आजीविका को खतरा पैदा हो गया है।
वहीं नेपाल से पानी छोड़ने के कारण बिहार मे बाढ़ आ गयी है और यहाँ पानी भी लगातार बरस रहा है, जिससे बिहार मे भी जान-माल को भारी नुकसान पहुंचा है, वहाँ भी लगातार राहत सामग्री व अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। नेपाल और बिहार के साथ-साथ यूपी के कई जिले, पश्चिम बंगाल और असम में भी बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल का फैसला, देश भर में एक समान होगी ‘मेट्रो नीति’

शिखा पाण्डेय । Navpravah.com
देश भर में मेट्रो के विस्तार को देखते हुए सरकार ने सभी मेट्रो रेल परियोजनाओं को एक समान मानकों के दायरे में लाने की योजना बनाई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस नयी मेट्रो नीति को बुधवार को मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी विकास मंत्रालय द्वारा देश भर के लिए एक समान मेट्रो नीति के मसौदा प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी।
नयी नीति के तहत देश भर के लिए एक समान मानक तय करते हुए एक ही कानून बनाया जायेगा। हाल ही में शहरी विकास मंत्रालय ने नया कानून बनने तक मेट्रो परिचालन संबंधी किसी भी शहर के प्रस्ताव को विचारार्थ स्वीकार करने पर रोक लगा दी थी। नयी नीति के तहत किसी भी शहर की परियोजना को मंजूरी देने संबंधी एक समान मानकों को तय करते हुए परियोजना के लिए तकनीकी एवं अन्य जरूरी सामान की खरीद, वित्तपोषण और परिचालन संबंधी एकीकृत मानक तय किये गये हैं।
उल्लेखनीय है कि अब तक दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता, चेन्नई, कोच्चि, मुंबई, जयपुर और गुरुग्राम में कुल 350 किमी में मेट्रो परिचालन किया जा रहा है, जबकि हैदराबाद, नागपुर, अहमदाबाद, पुणे और लखनउ में मेट्रो परियोजनायें अभी निर्माणाधीन हैं। फिलहाल दिल्ली मेट्रो रेल काॅरपोरेशन (डीएमआरसी) अधिनियम के मानकों के तहत देश के अन्य शहरों में मेट्रो परियोजना के प्रस्तावों को मंजूरी दी जाती है।
“स्त्री हैं ? तो सहना सीखिए !”
डॉ. मोनिका जौहरी | Navpravah.com
आप घर से कहीं बाहर जा रही हैं ? एक मर्तबा घड़ी देख लें, यदि शाम के सात से ज्यादा वक्त हो चुका है, तो बाहर जाना अगले दिन पर टाल दें। अगली सुबह जब घर से निकलें, तो आइने के सामने खुद को भली-भांति देख लें ! जांच लें, कहीं आप ने कोई भड़काऊ किस्म के कपड़े तो नहीं पहने हैं, कहीं आपने ज्यादा मेक-अप तो नहीं किया है, कहीं आप ने ज्यादा चुस्त या तंग कपड़े तो नहीं पहन रखे हैं !
यदि ऐसा कुछ पाएं, तो तुरन्त कोई सादा सलवार-कमीज पहनें, जिसमें आप पूरी तरह ढंकी हों। खुद को देखें और सुनिश्चित करें कि आप बिल्कुल साधारण दिख रहीं हो। आप जितनी साधारण और अनाकर्षक दिखेंगी, आपकी सुरक्षा के लिए बेहतर है। मुमकिन है आप इस पहलू से अनजान हों कि पुलिस और प्रशासन के कुछ नुमाइंदों का मानना है कि आपके भड़काऊ कपड़ों से झलकती ‘सेक्सुएलिटी’ आपको किसी मनचले की हवस का शिकार बना सकती है।

अब सोच लीजिए, आपकी इज्जत की हिफाजत आपके हाथों में हैं। कितना भी जरूरी काम-काज हो, आप रात गहराने से पहले घर लौट आएं। यदि घर आने के लिए किसी बस, टैक्सी या ऑटो में चढें, तो भीतर जांच ले कि कुछ संदेहास्पद तो नहीं है, आपको हर पल सतर्क रहना होगा। ऐसी घटना से बचने के लिए निजी वाहन का ही इस्तेमाल करें। दफ्तर के जरूरी कार्यों के अलावा किसी पुरुष से बातें करने से बचें, किसी भी स्थिति में पुरुष मित्र के साथ नहीं जाएं। सड़क पर कहीं पुरुषों का समूह दिखे, तो रास्ता बदल लें। नीची नजरें करके चलें। यदि सामने पुरुष दिखें, तो उनकी ओर नहीं देखें। कुछ वरिष्ठ और अनुभवी जनों का मत है कि पुरुष मित्रों से संपर्क बढ़ाना, उनके साथ बाहर जाना सुरक्षित नहीं है। ऐसे हालात में यदि आपके साथ कुछ दुर्घटना हो, तो उसके लिए आप स्वयं ही जिम्मेदार होंगी।
यदि आपकी उम्र 18 से अधिक है, तो आप यह सभी उपाय कर सकती हैं, लेकिन यदि आपके घर या पड़ौस में कोई किशोरी या बहुत छोटी ( 1 से 14 वर्ष ) लड़की है, तो उसे भी यह सब समझाने का प्रयास करें। अभी से उसे ढंक कर रखेंगी, तो वह आगामी कुछ वर्षों में यह सब भली-भांति जान पाएगी। जब तक वह बड़ी और ‘समझदार’ ना हो, उसकी इज्जत कभी भी खतरे में पड़ सकती है। आखिर एक बेटी को पालना बेहद मुश्किल जिम्मेदारी है, लेकिन अब दुर्भाग्यवश आपने एक बेटी के रूप में जन्म लिया है, तो अपनी सीमाओं में रहना आपको सीखना होगा। भूलें नहीं, आप एक भारतीय महिला हैं और मर्यादाओं का निर्वहन ही आपका धर्म है।
भारत संस्कारों, मर्यादाओं और सभ्यताओं की भूमि है, जहां महिलाओं को देवी तुल्य सम्मान दिया जाता है। बेटियों को बुजुर्गों के पैर स्पर्श नहीं करने दिया जाता। अब ऐसे संस्कारवान देश में यदि एक पुरुष किसी महिला का बलात्कार करे, तो दो ही स्थितियां संभावित हैं – या तो महिला ने पुरुष को उत्तेजित किया होगा या पुरुष मानसिक रूप से अस्थिर रहा होगा, अन्यथा भारतीय संस्कृति के गरिमामय परिवेश में पले-बढ़े पुरुष किसी महिला के साथ ऐसा अनाचार कैसे कर सकते हैं ?

आधुनिक युग में महिलाओं ने घर की दहलीज क्या लांघी, स्वयं को पुरुषों के बराबर आंकने लगीं। पुरुष सदैव महिला से बेहतर रहें हैं और रहेंगे, महिलाओं को यह समझ लेने की दरकार है। वे घर की चार-दीवारी में रहेंगी, पारिवारिक दायित्व निभाएगीं, तो पतिदेव कभी-कभार गुस्से में मार-पीट भले ही कर ले, लेकिन उनकी इज्जत पर किसी बाहरी पुरुष के हमला करने की आशंका बहुत कम ही रहेगी। और फिर एक भारतीय महिला की प्राथमिक जिम्मेदारी यही है कि उसका पति उस से खुश रहे, इसी में उसकी खुशी निहित है।
अब एक 23 वर्षीय छात्रा यदि एक पुरुष मित्र के साथ बाहर फिल्म देखने जाए और रात 9 बजे के बाद घर लौट रही हो, फिर घर पहुंचने के लिए किसी सार्वजनिक बस में सवार हो जाएं, यह तो स्वयं ही खतरे को आमंत्रित करने जैसा हुआ ना! फिर बस में पहले से बैठे छह पुरुष शराब के नशे में धुत हों, मस्ती और शरारत करने के मूड में हों, तो युवती को देख नियत बिगड़ना अस्वाभाविक कैसे कहा जा सकता है ?
उस पर बस चलाने वाले राम सिंह की दयनीय स्थिति पर नजर डालिए – उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी है, एक हादसे में उसके दोनों हाथ टेढे हो चुके हैं, वह हीन भावना से ग्रस्त है। ऐसे में अपनी मर्दानगी साबित करने का मौका वह कैसे गंवाता ?
यूं भी अकेली महिला के साथ एक पुरुष हो (उसे भी मार-पीटकर बांध दिया गया हो) और सामने छह पुरुष हों, तो मर्दानगी दिखाने के मौके का भरपूर फायदा उठाने में कोई पीछे नहीं रहा होगा। यह एक साधारण घटना है, जिसे बेवजह ही तूल दिया जा रहा है। देश के किसी ना किसी हिस्से में रोज बलात्कार होते हैं, फिर इसी घटना पर इतना हंगामा क्यों ? हां, लड़की की स्थिति गंभीर है, उसकी पांच बार सर्जरी की जा चुकी है, 23 टांके लगे हैं, आंते निकालनी पड़ी हैं और वह जीवित भी रह पाए, संदेह है, लेकिन इससे अधिक कुछ नहीं है।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मार्कंडेय काटजू का भी यही तर्क है, कि देश में और भी बहस के मुद्दे बचे हैं, यह इकलौती गंभीर समस्या नहीं है। ग्रामीण भारत में इस तरह की घटनाएं आए दिन होती रहती हैं, फिर दिल्ली में हुए एक हादसे को इतना तूल क्यों दे दिया गया ? अब तो समझ जाइए! यदि ऐसी दुर्घटनाओं से बचना चाहती हैं, तो अपनी सीमाओं को कदापि नहीं लांघें। राजधानी के हालिया मामले से तो आपके जेहन में यह बात पैठ गई होगी कि आखिर पुरुषों के सामने एक महिला की क्या बिसात है।
पुरुष जो चाहें, जैसा चाहें, महिला के साथ बर्ताव कर सकते हैं। आपकी भलाई इसी में है कि मौन रहें। यदि आप किसी छेड़छाड़, शारीरिक शोषण, हिंसा या बलात्कार की शिकार हुई हैं, तो भी चुप्पी बनाएं रखें। क्या मालूम, जिस पुलिस अधिकारी के पास आप रिपोर्ट दर्ज कराने जाएं, वहां दोबारा आपका बलात्कार हो जाए। कौन जाने, जिस डॉक्टर के पास आप मेडिकल जांच के लिए पहुंचे, वह भी आप पर टूट पड़े।
आप स्त्री हैं…याद रखिए, स्त्री और पृथ्वी को बहुत कुछ सहना पड़ता है। अपनी सहनशीलता बढ़ाइए, अपने दर्जे को जानिए और छोटी-छोटी बातों को तूल देना छोड़ दीजिए। यूं विरोध करना हम महिलाओं को शोभा नहीं देता। आप बचपन की सब सीख भूल गई हैं क्या? लज्जा ही स्त्री का सच्चा आभूषण है। अपने घूंघट में ही रहिए, इसी में आपकी बेहतरी है। इस सबक को भूलेंगी, तो तमाशबीनों के इस देश में कब आप खुद तमाशा बन जाएंगी, आपको भान भी नहीं होगा, इसलिए संभल कर रहिए, अपनी तथाकथित सीमाओं में.
(प्रस्तुत लेख डॉ. मोनिका जौहरी की फेसबुक वाल से साभार उधृत है. डॉ. जौहरी, लंदन में बतौर मनोवैज्ञानिक चिकित्सक कार्यरत हैं. फीचर्ड फोटो डॉ. जौहरी के इन्स्टाग्राम से साभार उद्धृत है.)














