29 C
Mumbai
Saturday, August 15, 2026
Home Blog Page 964

इस अभिनेत्री का वश चले तो ये कपड़े ही न पहने!

न्यूज़ डेस्क । Navpravah.com

ग्रैमी अवार्ड विजेता, मशहूर गायिका व अभिनेत्री मारिया कैरी की कई ज़बरदस्त परफॉरमेंसेस तो आप सब ने देखी ही होंगी, लेकिन क्या आपने कभी ये सुना है कि कैरी को कपड़े पहनना नहीं पसंद है! जी हां! आम लड़कियों की तरह कैरी को ढेर सारे रंगीन, फैशनेबल कपड़ों का नहीं, बल्कि शौक है एक से बढ़कर एक खूबसूरत इनरवियर पहनने का।

वेबसाइट femalefirst.co.uk के मुताबिक, मारिया ने एक फैशन पत्रिका के लिए एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उनकी जीवनशैली की झलक देखने को मिलती है। इस दौरान मारिया ने बताया कि उन्हें उत्तेजक अंतर्वस्त्र पहनने का बेहद शौक़ है। कैरी का कहना है कि उनका एक पूरा कमरा सिर्फ डिफरेन्ट वैरायटी के इंनेरवेयर्स से भरा हुआ है।
मारिया ने कहा, “मुझे ब्रांडेड कपड़े पहनना पसंद है, लेकिन अगर मेरा बस चले तो मैं घर में इनरवियर पहनकर घूमूं।”

मारिया ने इंस्टाग्राम पर इस वीडियो का कुछ हिस्सा पोस्ट भी किया है, जिसमें वे अपने फैन्स को अपने वार्डरोब की एक झलक दिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि इनरवियर के अलावा उन्हें खूबसूरत जूते खरीदने का भी बहुत शौक है।
उनका कहना है कि उनके पास 1000 से भी ज्यादा जूते हैं।

क़र्ज़ चुकाओ या किसी और के हवाले करो व्यापार :अरुण जेटली

arun jaitely finance minister india np

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

 वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए बैंकों के बकायेदार व्यापारियों को चेतावनी दी है. वित्त मंत्री ने कहा है कि या अतो समय से बैक से लये गये लोन को व्यापारी अदा करें या फिर उनका व्यापार किसी और के हवाले किया जाये ताकि बैंक का लोन अदा हो सके. व्यापारियों द्वारा बैंक्स से लिया गया लों न चुकाने के कारण बैंकों को काफी घाटा सहन करना पड़ रहा है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने दिवाला एवं रिण शोधन अक्षमता कानून के तहत तो ऐसी बड़ी कर्जदार कम्पनियों के खिलाफ दिवाला निकालने की कारवाई शुरू करने का निर्देश जारी किया है. इन कम्पनियों पर तकरीबन दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज है जोकि कुल बैंक कर्ज का एक चौथाई भाग है.

कर्जदारों के खिलाफ सरकार सख्त रुख अपनाने का मन बना चुकी है. वित्त मंत्री ने कहा है कि सर्कार बैंकों को और अधिक पूँजी मुहैया कराने के लिए तैयार है लेकिन सरकार कि सबसे बड़ी प्राथमिकता बैंकों का फंसा हुआ कर्ज निकालना है.

वित्त मंत्री ने ये स्पष्ट किया है कि हमें ज्यादा बैंक नहीं चाहिए, बल्कि हमें मजबूत बैंक चाहिए. बैंकों के लिए पूँजी का इंतजाम किया जा रहा है लेकिन बैंकों को बाजार से भी पूँजी जुटानी चाहिए. साथ ही उन्होंने बताया कि बैंकों को पहले ही सरकार ने सत्तर हजार करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए हैं. केंद्र सरकार बैंकों के विलयकरण के बारे में भी सक्रिय कदम उठाने के संकेत दे चुकी है.

 

राम रहीम के जेल जाने से खुश हैं कॉमेडियन कीकू शारदा ?

एंटरटेनमेंट डेस्क | Navpravah.com

बाबा रामरहीम बनकर कॉमेडी करने वाले फेमस कीकू शारदा से ज्यादा खुश किसे होना चाहिए. जिस राम रहीम के मजाक बनाने पर उन्हें जेल कि हवा खानी पड़ी थी वही रामरहीम आज बलात्कार के आरोप में जेल कि हवा खा रहा है, और आने वाले बीस सालों तक वही उसका हवाखाना बना रहेगा.

14 दिन कि न्यायिक हिरासत में रहने वाले फेमस कॉमेडियन कीकू शारदा ने ट्वीट करके माफ़ी भी मांगी थी:

 

लेकिन अब जब बाबा जेल पहुँच चुका है तब भी कीकू शारदा कुछ भी कहने से बचते हुए नजर आ रहे हैं. उनके लेटेस्ट ट्वीट से तो यही लगता है. कीकू ने ट्वीट किया है कि मैं इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन आप सबके प्यार और सपोर्ट के लिए मैं शुक्रगुजार हूँ. अंत में उन्होंने हैष्टैग के साथ ‘कर्मा’ शब्द जोड़ते हुए एक चुटकी भी लेली.

प्रसिद्ध टीवी एक्ट्रेस कविता कौशिक ने भी कीकू को मजाकिया अंदाज में ट्वीट करते हुए .कहा , ‘आज खुश तो बहुत होगे तुम?”

मुंबई मे ढही पाँच मंजिला इमारत, 11 लोगों की मौत और 15 लोग घायल

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

तीन दिन पहले मुम्बई बाढ़ की स्थिती से अभी तक उभरा नही था कि, आज सुबह 8 बजे तक दक्षिण मुम्बई के भिंडी बाजार में आज सुबह पांच मंजिला इमारत गिरने से अब तक 11 लोगों की मौत हो गई है और 15 लोग घायल हो गए हैं।

मलबे में लगभग 40 लोगों के दबे होने की आशंका है। एनडीआरएफ की कई टीमें सुबह से वहाँ मौजूद हैं और निरन्तर राहत और बचाव के काम में लगी है। ये इमारत पचास साल पुरानी थी, मलबे से अब तक 9 लोग निकाले गए हैं और जिन्हें चोट आयी है उन्हें अस्पताल भेज दिया गया है। घटना के बाद आस-पास के लोग काफी डरे हुए हैं और पास में जो भी इमारतें हैं, उन्हें ख़ाली भी करवाया जा रहा है।

पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम सुबह से यहाँ मौजूद हैं और बचाव का काम जारी है। ये इमारत काफी जरजर और खस्ता हाल में थी और पिछले दिनों से मूसलाधार बारिश से और कमज़ोर हो गई थी।

एमसीजीएम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि, हमारे आपदा प्रबंधन को सुबह करीब आठ बज कर 40 मिनट पर इमारत गिरने की सूचना मिली, फिर हमने तुरंत फंसे हुये लोगों को बचाने के लिए दमकल कर्मचारियों को घटनास्थल पर भेजकर बचाव का काम शुरू करवा दिया।

मुंबई के एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुबह से हम यहीं मौजूद हैं, इमारत के नजदीक जितने इलाके थे, सबकी घेराबंदी कर दी गयी है और सुबह से ही दमकल विभाग और चिकित्सा टीम घटनास्थल पर मौजूद हैं।

पिछले 3 दिनों से हो रही बारिश की वजह से मुंबई की सड़कें पानी से भर गयी हैं। मुंबई मे सभी जगह बस पानी ही पानी था, जो बीएमसी और मुंबई सरकार की पोल भी खोल दिया है, ऐसा ही सैलाब मुंबई में आज से 12 साल पहले आया था।

मुंबई के मौसम विभाग का ये कहना है कि सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि मुंबई कज आस-पास सभी जगह बरसात का कहर अगले दो दिनों तक जारी रहेगा, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

ये युवा ‘सेल्फ़ी विद सैपलिंग’ मुहिम से कर रहे हैं कुछ अनूठा काम

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
लगातार बढ़ती हुई ग्लोबल वार्मिंग से गर्मी भी बढ़ती जा रही है. प्रकृति का लगातार चल रहा दोहन हमें भयावह भविष्य की ओर ले जा रहा है. हिमपर्वतों की बर्फ पिघलती जा रही है. हमारी सामने ऐसी परिस्थितियाँ होने के बावजूद हम इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाते. इसी बीच जालौन, उत्तर प्रदेश से एक सकारात्मक खबर सुनकर शायद आपको प्रेरणा मिले. दरअसल जालौन के कुछ दोस्तों ने वृक्षारोपण के लिए एक मिसाल कायम कर दी है. लोगों को जागरूक और प्रेरित करने के लिए इन्होने दृढ़ संकल्प लिया है.
मेट्रो पोलिटन शहरों देश विदेशों में रहने वाले इन लड़कों ने “सेल्फी विद सैप्लिंग” की एक मुहिम चलाई है जिसके तहत जालौन के कई गावों में पौधे लगाकर सेल्फी लेते हैं.  दुबई, नोएडा, दिल्ली जैसी जगहों में नौकरी करने वाले ये युवा देश को हरित भविष्य की ओर ले जाने के लिए अग्रसर हैं. डीडी न्यूज़ में प्रकाशित  खबर के अनुसार इन लड़कों की मुहिम में स्कूली बच्चे भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. स्कूलों में इस कार्य से प्रेरित होकर वृक्षारोपण के फायदे बताये जाने लगे हैं.
PC: DD News
खबर के मुताबिक़ सेल्फी विथ सैपलिंग मुहिम की अलख जगाने वाले इन युवाओं के अनुसार, ‘समाज में समाज में तमाम बदलाव लाने के लिए सिर्फ सरकारी मशीनरी पर्याप्त नहीं होती, इनकी सफलता तब तक सुनिश्चित नहीं होती, जब तक जन-भागीदारी न की जाए. लोग सोशल मीडिया, मसलन फेसबुक, ट्विटर या व्हाट्सअप पर पर्यावरण पर चिंता तो जताते हैं लेकिन जब एक्शन की बात आती है तो दिखाई नहीं देते। हम क्यों न कुछ ऐसा करें जो उन्हें इस मुहिम से सीधे जोड़ दे.’
इन लड़कों का ग्रुप केवल जागरूकता ही नहीं फैला रहा है बल्कि गाँव गाँव में जाकर ये अपने पैसों से पौधे और ट्री गार्ड्स खरीद कर भी दे रहे हैं. इनकी इस पहल को देखकर कई गाँव के प्रधान भी इस अभियान के महत्त्व को समझ रहे हैं और उनके साथ जुड़ने लगे हैं. ऐसी सकारात्मक खबर बेशक समाज में एक प्रेरक मील का पत्थर है. जब ऐसे युवा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं तो आप और हम क्यों अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं.

सीएम योगी के प्रदेश में चेन स्नेचर ने धक्का दे सरेआम की व्यक्ति की हत्या

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com
 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही जनता को अपनी जिम्मेदारी समझाने से चूकते न हों लेकिन उनके शासनकाल में उत्तर प्रदेश की बढ़ती आपराधिक घटनाओं के नियंत्रण में जरूर चूक हो रही है। मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इटौंजा क्षेत्र का है जहां बाइक पर जा रहे एक पति पत्नी के साथ ऐसा अपराध हुआ जिसने कुछ ही पलों में उनकी दुनिया उजाड़ दी।
बाइक से जा रहे दंपति की चेन लूटकर भागते हुए अपराधी ने धक्का देकर उन्हें गिरा दिया जिससे पति की मौके पर ही मौत हो गई। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के अनुसार मड़ियांव के बसंत बिहार कॉलोनी के रहने वाले पेशे से कैशियर राम नारायण दीक्षित अपनी पत्नी नीलम के साथ कसावां अटरिया सीतापुर स्थित अपनी ससुराल से बुधवार शाम लगभग साढ़े सात बजे वापस अपने घर लौट रहे थे। नॉवेल कॉलेज और बाबपुरवा मोड़ के बीच बाइक सवार दो बदमाशों ने नीलम की चेन लूटने के इरादे से झपट्टा मारा लेकिन कामयाब न हो सके। बदमाश उनका पीछा करने लगे। इससे घबराकर दंपति ने गाड़ी रोकी और मदद की गुहार लगाने लगे। बदमाश बाइक सवारों ने रामनारायण की बाइक पर ठोकर मारकर उन्हें गिरा दिया। ठोकर लगते ही दम्पत्ति सड़क में घिसटते हुए जा गिरे। रामनारायण डिवाइडर से जा टकराये जिस कारण उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। नीलम गंभीर रूप से घायल हो गईं।
सड़क पर तड़पती हुई नीलम की ओर पीछे बैठा बाइक सवार दौड़कर आया और उनके गले से चेन छीनकर भाग गया। राहगीर कुछ समझ पाते इससे पहले ही दोनों बाइक सवार मौके से फरार हो गए। खबर के मुताबिक पुलिस को फोन किया गया। लेकिन पुलिस समय से नहीं पहुंची। जिसके बाद राहगीरों ने ही दम्पति को रामसागर मिश्र सौ शैय्या अस्पताल पहुंचाया जहां पर रामनारायण को डॉक्टरों ने मृत करार दे दिया।
खबर के ही अनुसार होश में आने के बाद नीलम ने कहा कि, ‘ बदमाश मांगते तो चेन क्या लाखों के जेवर कुर्बान कर देती। लुटेरों ने मंगलसूत्र ही नहीं मेरा सुहाग भी छीन लिया। अब मेरे बच्चों की कौन देखरेख करेगा।’ खून से लथपथ नीलम की इन बातों  को सुनकर किसी की भी रूह कांप उठेगी।  पूरे परिवार में मातम छाया हुआ है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी में घटी ये दुर्घटना प्रदेश सरकार की नींद उड़ा पाने में कामयाब होती है ये तो नहीं पता लेकिन प्रशासन की कार्यशैली और पुलिस की तत्परता पर प्रश्न चिन्ह जरूर लग जाता है।

आज इसरो करेगा स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली वाला 8वां उपग्रह लॉन्च

एनपी न्यूज़ डेस्क|Navpravah.com

इसरो आज गुरुवार के दिन स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली पर आधारित उपग्रह IRNSS-1H लॉन्च करने की तैयारी में है। यह इस श्रृंखला का आठवां उपग्रह होगा। इसरो का कहना है कि इस प्रणाली से हमारे देश की नेविगेशन प्रणाली और भी सशक्त होगी।

इस उपग्रह को आज शाम सात बजे श्रीहरिकोटा स्थित हरीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा। इसे लॉन्च करने वाला पोलर सेटेलाइट व्हीकल (PSLV-C39) है जिसे पृथ्वी की जियोसिंक्रोनस ट्रांसफ़र ऑर्बिट में सिचुएट किया जाना है। कल दोपहर दो बजे से इस लॉन्च की 29 घंटे का काउंटडाउन शुरू कर दिया गया था जो कि आज शाम सात बजे लॉन्च होगा।

गौरतलब है कि इंडियन सेटेलाइट लॉन्चिंग सिस्टम ने दुनिया भर में अपनी धाक जमा दी है। IRNSS जिसे नेविगेशन विथ इंडियन कांस्टेलेशन को शार्ट फॉर्म में नाविक भी कहा जाता है। ये सिस्टम अमेरिका के GPS ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम की तरह ही काम करता है। इसकी रेंज भारत के 1500 के आसपास के क्षेत्र तक ही है।

इसी सिस्टम का उपयोग समुद्री जहाजों को रास्ता दिखाने व ट्रेन की लोकेशन बताने वाले तंत्र में किया जाता है। इसके साथ ही ऐसे कई क्षेत्रों में इस सिस्टम को इस्तेमाल किया जाता है।

अमेरिका रूस चीन जापान और यूरोपीय संघ के नेविगेशन सिस्टम की तरह ही, भारत के नाविक ने विश्व स्तरीय नेविगेशन प्रणाली में अपनी पैठ बना ली है। इसरो द्वारा लगातार भारत की नेविगेशन प्रणाली को विकसित किये जाने की ओर सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं जिससे देश को एक नई उम्मीद नज़र आई है।

“इससे बाहर आने का कोई रास्ता नहीं..” इतना लिखा, और ब्लू व्हेल खा गई उसे.

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com

तमिलनाडु के मदुरई में एक 19 वर्षीय लड़का ब्लू व्हेल कि बलि चढ़ गया. ब्लू व्हेल गेम खेलते हुए उसने आत्महत्या कर ली. विग्नेश नामक इस लड़के ने खुद को फांसी लगा ली लेकिन उसने एक नोट छोड़ा है जिसमें लिखा हुआ है, ‘ये कोई गेम नहीं बल्कि खतरा है, एक बार आप अंदर आये तो बाहर जाने का कोई रस्ता नहीं है.’

विग्नेश के हाथ पर ब्लू व्हेल का निशान

विग्नेश के बाएँ हाथ पर एक ब्लू व्हेल का चिन्ह बना  है और उसमे लिखा हुआ है ब्लू व्हेल. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ विग्नेश एक निजी कॉलेज में सेकेण्ड इयर कॉमर्स का स्टूडेंट था. उसके दोस्तों से बात करने में पता लगा है कि विग्नेश अपना ज्यादातर समय मोबाइल फोन में ही बिताता था. इससे ये स्पष्ट हो रहा है कि विग्नेश गेम में ज्यादा ही इनवौल्व हो चुका था.

तमिलनाडु में ब्लू व्हेल गेम से होने वाली मौत का ये पहला मामला है. इससे पहले मुम्बई, उत्तर प्रदेश, और केरल में घटनाएँ सामने आ चुकी हैं. सरकार की तरफ से भी ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल पर पाबन्दी लगाए जाने के निर्देश आ चुके हैं. परिवार वालों और माता पिता प्र अपने बच्चों की इन गतिविधियों पर कड़ी निगरानी करने के लिए भी कहा जा रहा है.

रूस के 22 वर्षीय डेवलपर फिलिप बडकीन ने ये गेम बनाया है जिसे गिरफ्तार भी किया जा चुका है. दुनिया भर में ब्लू व्हेल गेम के कारण अब तक सौ से ज्यादा मौतों के मामले सामने आये हैं.

पुलिस की गुंडई की वजह से गयी थी विकास की जान, क्या मिलेगा उसे इंसाफ़?

सौम्या केसरवानी । Navpravah.com

जब से योगी सरकार सत्ता में आयी है, तबसे किसी न किसी विवाद में घिरती नज़र आई है। सरकार में पुलिस की गुंडई बढ़ती जा रही है, बीते 23 जुलाई को देवरिया के पास पुलिस ने विकास नाम के 28 वर्षीय युवक की बड़ी बेहरमी से हत्या कर दी गयी थी।

पहले तो पुलिस ने मामला दर्ज करने से मना कर दिया, लेकिन मृतक विकास के भाई विवेकानंद और परिवार वालों की गुहार पर पुलिस ने 28 जुलाई को केस दर्ज कर लिया था, जिसकी खोजबीन पुलिस ने शुरू कर दी थी, इसी क्रम मे दोषी पुलिस वालों के खिलाफ जिलाधिकारी के आदेश से मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं और 28 अगस्त को गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किया गया है, इस पूरे मामले में पुलिस ने अवैध वसूली के चक्कर में एक बेकसूर लड़के विकास तिवारी को बहुत बेरहमी से मारा है।

देवरिया जिले के रामपुर कारखाना थाना परिक्षेत्र के दो पुलिसकर्मी राय साहब यादव एवं राय साहब बर्मा एवं उनके सहयोगी पुलिस कर्मियों द्वारा इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया, जिसमें शहर कोतवाल तक की भी भूमिका संदिग्ध नजर आती है। इन लोगों द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी छेड़छाड़ की गई थी। समाज की रक्षा करने का दायित्व पुलिस विभाग को है और जब रक्षक ही भक्षक हो जाए, तो हम किससे न्याय की उम्मीद रखेंगे?

इस पूरे मामले को विकास के भाई विवेकानंद ने मुख्यमंत्री शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में भी ऑनलाइन दर्ज कराया है, जहां से अभी तक कुछ भी उचित कार्यवाही नहीं हुई है। पुलिस लगातार इस मामले से बचने की कोशिश कर रही है और गवाहों को परेशान करने से लेकर साक्ष्यों को नष्ट करने की कोशिश भी की जा रही है।

क्या था पूरा मामला :

पीड़ित 28 वर्षीय विकास तिवारी बिहार का निवासी था, जो किसी पारिवारिक कार्यक्रम में अपने दोस्तों के साथ यूपी के देवरिया जिले के रामगुलाम टोला में आया था। गत 23 जुलाई को विकास का शव बैकुंठपुर के पास गंडक नदी के किनारे मिला। मृतक विकास के परिवार वालों का कहना है कि, विकास जब देवरिया के पास रात 9 बजे तीन युवक बाइक से जा रहे थे, तभी पास के हाइवे पर कुछ पुलिस वालों ने उन्हें रोका और अपनी धाक जमाते हुए पैसे की मांग करने लगे. 28 वर्षीय विकास तिवारी ने पुलिस वालों से उनके आइडी कार्ड दिखाने को कहा लेकिन पुलिस वालों ने मना कर दिया और तीनों लड़कों के साथ मारपीट शुरू कर दी।

किसी तरह एक युवक वहाँ से भाग गया और बाकी दोनों युवकों को पुलिस वालों ने मारना शुरू कर दिया, विकास तिवारी नामक युवक को पुलिस ने ज्यादा मार दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी, घबराये पुलिस वालों ने आनन फानन में विकास की लाश को गंडक नदी पर फेंक दिया और तीसरे युवक को अपने गिरफ्त मे ले लिया था।

मुंबईकरों की एकता से बप्पा खुश, पर पूछ रहे, “मेरा नंबर कब आएगा?”

शिखा पाण्डेय|Navpravah.com

1997 के बाद अगस्त महीने की ये सबसे भीषण वर्षा, मुम्बई निवासियों को कहाँ से कहाँ बहा ले गई,पता ही नहीं चला। लोग भूल ही गये कि कल 5वें दिन का गणेश विसर्जन भी होना था। मुम्बई में आई तूफनी बारिश और शाम 4 बजे से समुद्र में आए हाई टाइड के कारण कहीं भी किसी के मुँह से गणपति विसर्जन का नाम सुनने को नहीं मिला। गणेश जी अपना आसान जमाये टकटकी बांधे जोहते ही रह गए कि कोई तो मेरी भी सुध ले। गणपति बप्पा की सवारी तमाम घरों से, तमाम छोटे पंडालों  से कल निकलने की बजाय वहीं धरी की धरी गई!

सोमवार रात से शुरू हुई बारिश धीमे धीमे कम होने की बजाय, सरपट गति से बढ़ती ही गई। सड़कों पर ट्रैफिक जाम, ट्रेन की गति धीमी और धीरे धीरे मशीनी मुम्बई की धड़कन बिलकुल थम गई। दिन के करीब 11 बजे से ट्रेनें घंटों देर से चलने लगीं। ट्रेन की पटरियों पर पानी भरे होने के बावजूद, पश्चिम रेलवे की एक ट्रेन 2 बजे तक दादर स्टेशन पर अपनी अंतिम सांसें गिनते गिनते पहुँची और उसके बाद जो ट्रेनें जहाँ थीं, वहीं रुक गईं। तमाम लोग, जो दो-चार-दस किलोमीटर चलने लायक थे, वो अपनी छतरी या रेनकोट लिए सड़कों पर आ गए और कहीं घुटने भर, कहीं कमर भर पानी में लड़खड़ाते हुए अपने अपने घरों के लिए चल दिए। सड़कों पर मोटर साइकिल और कार-टैक्सी जहाँ के तहाँ फंसे थे। कुछ गाड़ियां अति धीमी रफ़्तार से चलती नज़र आईं। वडाला, खार, दादर, माटुंगा, सायन, लाल बाग आदि आदि आदि… सब धीरे-धीरे ठप्प। रेजिडेंशियल, ऑफिशियल, कमर्शियल एरिया से लोग झुंड बना बना कर सड़कों पर बूड़े पानी में उतर अपने अपने घरों की तरफ बढ़ते गए। इतनी बड़ी मुसीबत आने के बाद भी कई आनंद उठाने वाले लोग उस जल सैलाब में भी आनंद उठाते नजर आए।

तमाम मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे जनता की मदद के लिए आगे आये, घरों से दूर फंसे लोगों को आश्रय दिया, भोजन दिया। इस मूसलाधार बारिश ने चाहे जितना भी बड़ा नुकसान कराया हो, यह बारिश एक सबसे बड़ा फायदा यह करा गई, कि मुंबईकरों को, सिर्फ ‘मुंबईकर’ होने का एहसास दिला गई। फलस्वरूप यह देखने को मिला कि पूरी मुम्बई में कोई किसी से यह नहीं पूछ रहा था कि तुम भैया हो, बिहारी हो, मराठी हो, अण्णा हो, सिख हो, क्रिस्चियन हो या बंगाली हो। जगह-जगह लोकल लोग खुद कमर भर पानी में खड़े रहकर फंसे हुए लोगों की मदद के लिए तत्पर दिखे। बच्चे-जवान-बूढ़े, हर किसी ने लोगों को रास्ता पार कराने या गाइड के रूप में ‘इधर से जाओ, उधर गढ्ढा है, उधर पानी ज्यादा है’ हर संभव मदद की। तमाम लोगों की रातें रेलवे स्टेशनों पर, बस स्टेशनों पर, अपने परिचितों के यहाँ गुज़री। तमाम होटल और रेस्तरां लोगों को खाना-पानी, रहने के लिए शरण दे रहे थे, बिना किसी स्वार्थ या भेद भाव के। ये एकता मुंबईकरों में हर आपातकाल स्थिति में नज़र आती है, फिर सामान्य स्थिति में हम ये भूल कैसे जाते हैं कि हम क्या हैं? मात्र कुछ राजनीतिक ताकतें हमारी इस एकता की शक्ति पर भारी कैसे पड़ जाती हैं?

पूरी रात जो बच्चे, महिलाएं, आदमी  जगह जगह अटके रहे, वो सुबह सवेरे धीमी धीमी लोकल ट्रेनों और बसों की रफ़्तार के साथ अपने अपने घरों को वापस होने लगे और जो लोग अपने घर पहुँच गए, और जो कल रात को पहुंचे, वो काम पर जाने की सोचने लगे। मुंबई की रफ़्तार कोई ताक़त, कोई आपदा रोक नहीं सकती, फिर वो प्राकृतिक हो, या मानवीय। मुम्बई कभी ऑफ़- ट्रैक नहीं होती, अपनी पटरी पर तुरंत दौड़ती नज़र आती है।

गणपति बप्पा अपने पंडाल में, अपने सिंहासन पर, मूषक राज के साथ बैठे यही सब सोच विचार करते, मुस्कुराते नज़र आये। प्रभु प्रसन्न दिखे, कि इन मुंबईकरों के लिए मानव धर्म, ईश्वर धर्म से अधिक महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि मेरा वास, हर मानव में जो है। हर न्यूज़ चैनल, अखबार, न्यूज़ एजेंसी पोर्टल, सब कल के हादसे के बारे में बताने में लगे थे।मीडिया व सोशल मीडिया भी अपना पूरा सहयोग दे रहे थे। कितने डूबे ,कितने बह गए, किसे कहाँ से मदद मिल सकती है, वगैरह वगैरह वगैरह….कहीं भी गणपति बप्पा के विसर्जन की चर्चा सुनने को नहीं मिली। अब प्रभु मुंबईकरों की गतिविधियों पर नज़र गड़ाए बैठे हैं, कि सब तो अपनी अपनी जगह पहुँच रहे हैं, पर अपने थाने- पवाने जाने का मेरा नंबर कब आएगा?