यूपी के कानपुर नगर जिले के महाराजपुर क्षेत्र स्थित सरसौल कस्बा में उस समय हाहाकार मच गया जब दीपावली के लिए बनाई जा रही पटाखों से अचानक विस्फोट हो गया, विस्फोट इतना भयंकर था कि इससे आधा दर्जन मकान छतिग्रस्त हो गए।
कई मकानों के परखच्चे उड़ गए, हादसे के पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई, घटना की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने मलबे में दबे कई लोगों को गंभीर हालत में नजदीक के अस्पताल में भर्ती कराया है।
वहीं इस घटना में एक व्यक्ति की मौत होने की खबर आ रही है। मृत व्यक्ति के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, ख़बरों के अनुसार मलबे में दो लोगों के दबे होने की आशंका भी है। फ़िलहाल पुलिस राहत एवं बचाव कार्य में स्थानीय लोगों के साथ जुटी है।
हादसे की खबर मिलते ही लोगों की भीड़ मौके पर इकट्ठी हो गई, लोग छतों से इस दर्दनाक हादसे को देखते रहे, फ़िलहाल हादसा कैसे हुआ इसकी जांच पुलिस कर रही है। विस्फोट होने के कारणों के बारे में अभी पता नहीं चल पाया है।
योगी सरकार के मंत्री सतीश महाना ने प्रेस वार्ता के जरिये विभाग के कामकाज का लेखा-जोखा दिया, औद्योगिक विकास विभाग के कार्यों और निवेश की जानकारी सतीश महाना ने मीडिया के सामने रखा।
सतीश महाना ने कहा कि 15 सालों में सरकार और उद्योगों के बीच सामंजस्य नही था, पिछली सरकारों ने औद्योगिक विकास विभाग को अपने सुख का साधन बना रखा था, पिछले 6 महीने से मुझे ये विभाग मिला है और मेरे लिए ये एक बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने आगे कहा कि हम ऐसे इंडस्ट्रियल पॉलिसी लाएंगे जिसे पूरे देश के राज्य फॉलो करेंगे और वो कर भी रहे है, हमारी औद्योगिक नीति को देश भर में सराहा जा रहा है। कानपुर में मेदा लेदर क्लस्टर परियोजना की स्थापना हेतु वित्त पोषण के बैंक, वित्तीय संस्थाओं से 0375.68 करोड़ का ऋण दिया गया है।
उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना के लिए आवश्यक भूमि का नियोजन किया गया है, विगत 15 सालो में इंडस्ट्रीज और सरकार के बीच कोई कनेक्शन नही था, अब विदेशों से भी उत्तर प्रदेश की सरकार निवेश लाने का प्रयास कर रही है।
मोदी सरकार पर भीतर से हमला करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। यशवंत सिन्हा के बाद अब कमान अरुण शौरी ने संभाली है। खराब अर्थव्यवस्था को निशाना बनाते हुए शौरी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने नोटबंदी को काला धन सफेद करने वाली सबसे बड़ी मनी लांड्रिंग स्कीम करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र में ढाई लोगों की सरकार है। और ये ऐसी पहली सरकार है जो विशेषज्ञों बात नहीं सुनती है।
शौरी ने ये बातें एनडीटीवी चैनल से बातचीत करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि नोटबंदी एक बड़ी मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम थी। इसके तहत बड़े पैमाने पर काले धन को सफेद किया गया। इस बात का प्रमाण खुद आरबीआई ने यह कहकर दिया है कि नोटबंदी के दौरान 99 फीसदी पुराने नोट बैंकों में जमा किए गए।
जीएसटी पर भी उठाए सवाल
अरुण शौरी ने जीएसटी लागू किये जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश इस समय आर्थिक संकट से जूझ रहा है और यह संकट नासमझी में लिए गए जीएसटी के फैसले से पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी दिखाई कि इंफोसिस को जीएसटी सॉफ़्टवेयर का ट्रायल तक नहीं करने दिया गया।
उनका कहना था कि जीएसटी का फॉर्म बहुत जटिल है और इसके डिजाइन में कई बड़ी खामियां हैं। अरुण शौरी ने कहा कि जीएसटी को लेकर सरकार को तीन महीने में सात बार नियम बदलने पड़े। जीएसटी का सीधा असर छोटे और मझोले उद्योगों पर पड़ रहा है। इससे उद्योगों के उत्पादों की बिक्री तथा उनकी आमदनी में गिरावट आई है।
इवेंट मैनेजमेंट सरकार
सरकार के कामकाज को आड़े हाथों लेते हुए अरुण शौरी ने कहा कि वर्तमान सरकार का फोकस सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट पर है। बड़े-बड़े दावों के लिए बड़े-बड़े आयोजन किए जाते हैं। ढाई लोग ही पूरी सरकार चला रहे हैं। किसी को भी यहां सुना नहीं जाता है।
यशवंत सिन्हा के सवालों का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि यशवंत सिन्हा ने सही कहा कि पार्टी में अपनी बात रखने का कोई मंच नहीं है। एक वरिष्ठ सांसद ने भी बताया कि पार्टी की बैठक में एक सांसद को चुप करा दिया गया।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी से भ्रष्टाचार में कमी होने के दावे किए जा रहे थे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। असंगठित क्षेत्र पर नोटबंदी का असर पड़ा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वस्तुओं की मांग घटी। इससे कंस्ट्रक्शन, टेक्सटाइल सेक्टर पर भी बुरा असर पड़ा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गठित आर्थिक सलाहकार परिषद के औचित्य पर उन्होंने कहा कि इस सलाहकार परिषद में नीति आयोग के ही सदस्य हैं। इसलिए उनकी सलाह कोई नई नहीं होगी और इस परिषद से देश की अर्थव्यवस्था के सुधार में कोई भी असर नहीं होगा।
बता दें कि अरुण शौरी प्रसिद्ध पत्रकार, लेखक हैं। वे विश्व बैंक में अर्थशास्त्री और योजना आयोग में सलाहकार भी रहे हैं। वे अंग्रेजी के कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादक रहे हैं और 1998-2004 तक भारत सरकार में मंत्री भी रहे हैं। राजग सरकार में उन्होंने विनिवेश, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों सहित कई अन्य विभागों में कार्यभार संभाला था। उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज केरल में भाजपा की जन रक्षा यात्रा में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के साथ शामिल हुए। भाजपा ने योगी को यात्रा में बुला कर अपनी हिंदुत्व वाली छवि को और राज्य में और प्रबल करने का प्रयास किया है।
आदित्यनाथ ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राजनीतिक संरक्षण में हो रही हत्याएं रुकनी चाहिए और हत्याओं का विरोध करना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि मैं यहां नागरिक कर्तव्य और भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते अपना विरोध प्रकट करने आया हूँ।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ माकपा की कथित हिंसा को लेकर विरोध जताने के लिए मंगलवार को 15 दिन की पदयात्रा शुरू की थी। भगवा पार्टी केरल में वाम दलों को एक कड़ी चुनौती पेश करने वाली पार्टी के तौर पर उभर रही है। शाह ने पहले दिन लगभग 9 किलोमीटर की पदयात्रा की थी।
पय्यानूर से शुरू होकर जन रक्षा यात्रा राज्य से होते हुए 17 अक्तूबर को तिरूवनंतपुरम में जाकर संपन्न होगी। इस मार्च में कई केन्द्रीय मंत्री भी शामिल होंगे। भाजपा का आरोप है कि राज्य में वर्ष 2001 के बाद से 120 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है जिनमें से 84 लोग केवल कन्नूर में मारे गए। गत वर्ष माकपा के सत्ता में आने के बाद से कन्नूर में 14 लोग मारे जा चुके हैं। माकपा ने राजनीतिक हत्याओं में उसकी सरकार और नेतृत्व की संलिप्तता से इंकार किया है और भाजपा और आरएसएस पर हिंसा का आरोप लगाया है।
उधर, राज्य में सत्तारुढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को केरल के सुविधासम्पन्न सरकारी अस्पतालों का जायजा लेने के लिये आमंत्रित किया है ताकि वह अपने राज्य में अस्पतालों की बदहाली को दूर करने का सबक ले सकें। माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने भी योगी को भाजपा के अन्य नेताओं और मुख्यमंत्रियों को भी केरल के अस्पताल देखने के लिये अपने साथ लेकर आने की पेशकश की है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने बीते दिन कहा कि बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कई कंपनियों में ताले लग जाना, हर मोर्चे पर विफलता के कारण देश की जनभावना भारतीय जनता पार्टी शासित केंद्र सरकार के खिलाफ है।
उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा, समूचे देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, कृषि क्षेत्र संकट में है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, महंगाई चरम पर है वित्तीय क्षेत्र असफल हो रहा है और गरीब तबका बहुत परेशान है, ऐसे में हमें अगले चुनाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कपड़ा बनाने वाली 67 कंपनियां बंद हो गई हैं, 17,600 लोग बेरोजगार हो गए हैं। लारसन एंड टर्बो, इन्फोसिस और सुजलोन जैसी कंपनियों ने 17,000 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है।
पवार ने कहा कि आज स्थिति यह है कि लोग सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं और जवाब में सरकार उन्हें पुलिस नोटिस भेज रही है। राकांपा अध्यक्ष ने कहा, लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात प्रकट करने का अधिकार है।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे किसी को सरकार को नोटिस भेजकर धमकाना नहीं चाहिए और उनकी निजी स्वतंत्रता छीनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, लोग मौजूदा सरकार पर गुस्सा व्यक्त कर रही है, इससे सरकार को समझना चाहिए, कि ये उनके सरकार की नाकामी है।
पत्रकारिता को एक मिशन एक पूजा और दबे कुचलें बेजुबानों की जुबान माना गया है।लोकतंत्र में पत्रकारिता का विशेष महत्व होता हैे क्योंकि लोकतंत्र के तीनों खम्भें इसी पत्रकारिता के सहारे फलते फूलते और मजबूत होते हैं। पत्रकारिता सरकार और समाज के बीच में दोहरे आइने की तरह होती है जिसमें समाज और सरकार दोनों अपना अपना चेहरा देखकर उसमे सुधार कर सकते हैं। पत्रकारिता की लगन से व्यक्तित्व में निखार तथा दिमाग में प्रखरता और सेवा भाव आ जाता है।
पत्रकारिता समाज सेवा होती है और सेवा निःशुल्क होती है। पत्रकारिता भी एक समाज सेवा होती है व्यवसाय नही है।जब पत्रकारिता व्यवसायिक हो जाती है तब वह लक्ष्य से भटक जाती है और जान के खतरे पैदा हो जाते हैं।व्यवसाय स्वार्थ सिद्धि के लिए किया जाता है जबकि पत्रकारिता ईश्वरीय कार्य के लिये की जाती है।देवर्षि नारद को इस धरती का पहला पत्रकार माना जाता है और उन्होंने अपना सारा जीवन दूसरों की समस्या सुलझाने में लगा दिया था। पत्रकारिता का अतीत आदिकाल से रहा है यह बात अलग है कि उस समय न प्रिंट मीडिया थी और न ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ही थी।नारद की जुबान खुद अपने आप में अखबार और चैनल होती थी।आजादी के समय पत्रकारिता एक मिशन के रूप में आजादी की लड़ाई में योगदान दे रही थी।
गणेश शंकर विद्यार्थी महात्मा गांधी अटल बिहारी वाजपेयी लाला लाजपत राय जैसे अनगिनत लोग ऐसे हैं जिन्होंने पत्रकारिता को गति प्रदान कर हम सभी को गौरान्वित किया है।पत्रकारिता जब तक मिशन थी तब पत्रकार दिल खोलकर पत्रकारिता करता था लेकिन जबसे पत्रकारिता व्यवसाय से जुड़ गयी है तबसे पत्रकारिता दिल बंद करके होने लगी है।अब पत्रकारिता आत्मा की आवाज पर नहीं बल्कि मालिक या सम्पादक के इशारे पर होने लगी है।अब समाचारों का प्रकाशन या चैनलों का संचालन सम्पादकों के नही बल्कि मालिक की इच्छानुसार हो रहा है।
इधर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों की बाढ़ सी आ गयी है क्योंकि यह पुरानी परम्परा है कि समाज के कुछ लोगों को हमेशा रक्षा कवच की जरूरत पड़ती है।पहले ऐसे लोगों का काम राजनैतिक संरक्षण से काम चल जाता था लेकिन इन्हीं लोगों ने राजनीति को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।इस समय राजनेता ठेकेदार समाज के दुश्मन सभी पत्रकारिता का सहारा लेने के लिये इस क्षेत्र में आ रहें हैं। सभी लोगों ने अपने अपने अखबार या चैनल चला या चलवा रखें हैं जो हमेशा उनके हित में गुणगान किया करते हैं।कहने का मतलब समाज में गिरावट का असर धीरे धीरे पत्रकारिता पर भी पड़ने लगा है और घपला का पर्दाफाश करने के समाचार में घपलेबाज के पास उसका वर्जन पूंछने जाना पड़ता है कि आरोप सही हैं या गलत हैं।अब पत्रकारिता की जगह पर सूचनाओं का आदान प्रदान होने लगा है।पत्रकार, पत्रकार होता है चाहे वह देश की राजधानी या संसद विधानसभा का हो चाहे जिला तहसील ब्लाक या नगर क्षेत्र का हो।
पत्रकारिता बच्चों का खेल और रौब गालिब करने का साधन नही है बल्कि जान हथेली पर रखकर खेला जाने वाला जोखिम खेल होता है।जरा सी चूक होने पर जान चली जाती है और बीबी बच्चे अनाथ हो जाते हैं। पत्रकारिता हमेशा राष्ट्रहित समाज हित मानवीय हित को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।अधिक धन कमाने अथवा स्वार्थपूर्ति के लिये की गयी पत्रकारिता हमेशा जानघातक होती है।खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रकारिता से जुड़े साथियों के सामने पत्रकारिता करना बहुत जोखिमपूर्ण हो गया है।ग्रामीण पत्रकार या तो पत्रकारिता का लबादा ओढ़कर दलाल या तस्कर बन जाय या फिर समाज विरोधी लोगों का शिकार बने।
समाजविरोधी सभी चाहते हैं कि पत्रकार उनका पालतू बन जाय और बागी बन रहा हो तो रास्ते से हट जाय। विधानसभा या संसद में बैठे लोग भी इन्हीं ग्रामीण पत्रकारों के बीच से गुजरकर वहाँ तक पहुंचते हैं इसलिए वह कभी नहीं चाहते हैं कि पत्रकार का भला हो।समाज का बड़ा तबका ईमानदार तेजतर्रार पत्रकार की प्रंशसा तो करता है किंतु वह खुलकर साथ देने लायक बहुत कम होता है।पत्रकार को कुछ भी नही मिलता है फिर भी वह हर घटना स्थल पर पुलिस या अन्य अधिकारियों से पहले पहुंचने की कोशिश करता है।पीड़ित और प्रशासन के बीच न्याय हित में सेतु का काम करता है। थाना पुलिस तहसील ब्लाक दलाल चोर लकड़कट्टा व असमाजिक तत्वों की गतिविधियों पर आधारित उसके समाचार होते हैं इसलिए ईमानदार पत्रकार से सामना करने के लिए सभी सारे बुरे लोग सारे बैर भुलाकर एक मंच पर आ जाते हैं।परिणाम होता है कि लाला लाजपत राय हो चाहे अभी हाल में मारे गये पत्रकार साथी हो सभी को पत्रकारिता का ईनाम उनके बच्चों को अनाथ करके दिया गया।पिछले वर्षों जोगिंदर सिंह को जिंदा जला दिया गया तो अभी पिछले महीने गोंडा के एक पत्रकार साथी को गोली मारकर उनकी हत्या कर दिया।पत्रकार गौरी की हत्या का मामला अभी भी चर्चा में चल रहा है।अभी एक महीने भी नहीं हुआ है और रामरहीम डेरा सच्चा सौदा की तरफ से कई पत्रकारों को जान से मारने की धमकी दी गयी है।
सरकार भी इन बिन पैसे के समाज सेवकों की तरफ ध्यान नहीं दे पा रही है क्योंकि उसकी व्यवस्थापिका खुद भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंसी और वह इन पत्रकारों को अपना जिगरी दुश्मन मानती है।प्रधान हो चाहे कोटेदार चाहे दलाल मक्कार हो सभी इन पत्रकारों के दुश्मन मानते हैं। इधर पत्रकारिता को कंलकित करने का भी दौर शुरू हो गया है और इसमें इलेक्ट्रिक चैनलों की विशेष भूमिका है। चैनलों कोठे की वैश्याओं की तरह बिक रहे हैं और पत्रकारिता के लक्ष्य तार तार होने लगे हैं।कुछ लोग पत्रकारिता में सेवा नहीं धन कमाने आ रहें हैं और वहीं लोग अक्सर प्रायः हिंसा के शिकार हो जाते हैं।
बेंगलुरु : चलती ट्रेन के साथ सेल्फी लेने के चक्कर में आज बेंगलुरु के पास तीन किशोरों की मौत हो गयी|पुलिस ने बताया कि यह घटना यहां से करीब 30 किलोमीटर दूर बिदादी के पास हुयी और तीनों लडके सेल्फी लेने के चक्कर में चलती ट्रेन की चपेट में आ गए| मृतकों की उम्र 16 से 18 साल के बीच थी| लडके कथित तौर पर नशे की हालत में थे| रामनगर के पुलिस अधीक्षक रमेश भनोट ने कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें तस्वीरें खींचते देखा था| तीन में से दो नेशनल कालेज के छात्र थे जबकि एक ने पढाई बीच में ही छोड दी थी|पिछले दो साल में सेल्फी के चक्कर में दुनियाभर में 127 लोगों की जान जा चुकी है| इनमें 76 लोग सिर्फ भारत से है| सेल्फी के चक्कर में जान गंवाने वालों में भारत दुनिया में नंबर वन है
बिहार में भी सेल्फी लेने के चक्कर में दो लोगों की हुई थी मौत
बिहार के दो युवकों की मौत मंगलवार को सेल्फी लेने के चक्कर में हो गयी| सुपौल जिले के रतनपुरा थाने के नरपतपट्टी के आशुतोष की मौत जहां नदी में डूबने से हो गयी, वहीं कोलकाता के नदिया जिले के विजयनगर में राकेश त्रिभुवन की मौत ट्रेन से कट कर हो गयी|सुपौल जिले के रतनपुरा थाना क्षेत्र स्थित नरपतपट्टी का निवासी 24 वर्षीय आशुतोष राज मंगलवार को सेल्फी लेने के दौरान कोसी में समा गया| आशुतोष पटना के डैडकिन कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में हार्डवेयर इंजीनियरिंग का छात्र था| वह दादी के श्राद्धकर्म में शामिल होने गांव गया था़ इसी दौरान वह कोसी नदी के पूर्वी तटबंध के 17 किलोमीटर स्पर पर सेल्फी लेने चला गया| अचानक पैर फिसलने से कोसी में समा गया| परिजनों ने इसकी सूचना एनडीआरएफ की टीम को दी| एनडीआरएफ की टीम ने शव की तलाश की, लेकिन नहीं मिला| आशुतोष तीन दोस्तों के साथ कोसी नदी के पूर्वी तटबंध पर गया था| वहीं, मित्रों के साथ नदी के किनारे सेल्फी लेने लगा| लेकिन, इसी दौरान उसके पांव फिसल गया और वह कोसी नदी में डूब गया|
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ में मेधावी छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित किया, इस दौरान उनके साथ यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा सहित कई अन्य मंत्री भी उपस्थित रहे थे।
इस दौरान अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि मेधावी छात्र ही समाज की प्रतिभा हैं, सीएम ने कहा कि इन्हें जितना सम्मान दिया जायेगा, उससे हमारा राष्ट्र ही लगातार मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम कल होने वाला था, मगर मुझे किसी जरूरी काम से जाना पड़ रहा है। इसलिए मेधावियों के सम्मान का ये कार्यक्रम आज ही रखा गया है।
सीएम योगी ने कहा कि जनभागीदारी से समाज की सभी परेशानी का हल निकल सकेगा, सरकार केवल सहयोग के रूप में रहे तो बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। सीएम योगी ने कहा कि यूपी में पहली बार मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया है।
इस दौरान एक बच्ची सीएम द्वारा सम्मान पाए जाने से छूट गयी थी, इसके बाद उसने बताया कि मेरिट होने के बाद भी उसे सम्मान नहीं मिल पाया है। इसे सरकार ने जाँच के बाद सही पाया और उसका सम्मान किया गया।
दशहरा की छुट्टियों के बाद जब इलाहाबाद हाईकोर्ट खुला तो कामकाज शुरू होते ही एशिया ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा हाईकोर्ट का दर्जा मिल गया। इलाहाबाद स्थित प्रधान पीठ में एकसाथ कुल 59 और लखनऊ खंडपीठ में कुल 21 कोर्ट चलेंगी। एक राज्य की सर्वोच्च न्यायिक संस्था में एकसाथ कुल 80 अदालतें बैठेंगी।
दुनिया में इतनी बड़ी तादाद में कहीं भी एक हाईकोर्ट में कोर्ट नहीं चलतीं। प्रधान पीठ में दो न्यायाधीशों की कुल 20 खंडपीठ और एकल न्यायाधीश वाली कुल 39 एकल पीठ काम करेंगी। इसी तरह लखनऊ खंडपीठ में कुल आठ खंडपीठ और 13 एकल पीठ बैठेंगी। 160 न्यायाधीशों वाले हाईकोर्ट में पहली बार न्यायाधीशों की संख्या 100 के पार पहुंची है।
दशहरा की छुट्टियों के ठीक पहले 19 नए अपर न्यायाधीशों के शपथ लेने के बाद यह संख्या चीफ जस्टिस सहित 109 हो गई है। जजों की संख्या बढ़ने से काम में तेजी आने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। मुकदमों के निस्तारण में तेजी आने से हाईकोर्ट पर मुकदमों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट की स्थापना 17 मार्च 1866 को हुई थी, वकील इसे हाईकोर्ट के 150 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय मानते हैं। वकीलों का कहना है इतनी बड़ी संख्या में अदालतों के काम करने से निश्चित तौर पर मुकदमों के निस्तारण में तेजी आएगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएचयू में कर्मकांड और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नमाज़ पढ़ाने पर रोक लगाने के लिए दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि संविधान किसी भी धर्म की ग्रहण करने पर रोक नहीं लगाता।
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले एवं न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने दिया है। शाश्वत आनंद व पांच अन्य छात्रों ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कर्मकांड व नमाज पढ़ाने की वैधता को चुनौती दी थी । याचिका में कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 28 के तहत सरकारी विश्वविद्यालय को धार्मिक पूजा पद्धति की शिक्षा देने का अधिकार नहीं है ।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अरुणा राय केस का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का मौलिक अधिकार है । संविधान धर्म के बारे में जानकारी लेने पर रोक नहीं लगाता । प्रत्येक व्यक्ति को अपने व अन्य धर्मों के बारे में जानकारी लेने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि याची यह नहीं बता सके कि विश्वविद्यालयों में ऐसा क्या पढाया जा रहा है जो संविधान के अनुच्छेद 28 के तहत प्रतिबंधित किया गया है। इसी के साथ कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है ।