29 C
Mumbai
Thursday, September 10, 2026
Home Blog Page 87

आदिवासी दिवस विशेष: क्या वनवासियों की संस्कृति तबाह करने के पीछे थी नेहरू की कोई चाल ?

  • 9 अगस्त आदिवासी दिवस के संदर्भ में विशेष।
  • वनवासी सँस्कृति को लांछित और अपमानित करती एल्विन की आत्मकथा के लिए “साहित्य अकादमी” जैसा पुरुस्कार दिया गया।
  • क्या धर्मान्तरण अपने आप में अधिकारों का निकृष्ट हनन नहीं है? 

डॉ. अजय खेमरिया | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क

वह एक कट्टर ईसाई और मिशनरीज में प्रमाणिक प्रशिक्षण प्राप्त अंग्रेज था। उसका मिशन घोषित रूप से भारत में वनवासियों की सँस्कृति को ईसाइयत के रंग में रँगकर औपनिवेशिक जड़ों को मजबूत करना था। अपने मिशन के लिए वह इस हद तक जुनूनी रहा कि उसने भारत मे वनवासियों से दो विवाह कर लिए। वह ईसाई मिशन के सबसे बड़े ब्रांड अम्बेसडर के रूप में काम कर रहा था। आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उसे पूरा सरंक्षण और आशीर्वाद था। 1927 से 1964 तक इस शख्स ने भारत में वनवासी मुद्दे पर जो अलगाव के बीज बोए उन्हें आज भी हम राष्ट्रीय एकता, अखण्डता और सद्भभाव के मोर्चे पर भोगने के लिए विवश है। इस शख्स का नाम है-वेरियर एल्विन।

मिशनरी सेवाओं के लिये एल्विन को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक अलंकरण पदम् भूषण से अलंकृत किया गया। वनवासी सँस्कृति को लांछित और अपमानित करती एल्विन की आत्मकथा के लिए “साहित्य अकादमी” जैसा पुरुस्कार दिया गया। उसे आसाम जैसे राज्य का गवर्नर बनाया जाता है। वह भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जनजातीय सलाहकार के रूप में काम करता है। देश मे वनवासी कल्याण के लिए बनी पहली समिति की कमान भी इसी अंग्रेज को सौंपी गई।

भारत विरोधी बीज बोने वाले को दिया बढ़ावा-

पूर्वोत्तर में भारत विरोधी गतिविधियों के बीज बोने वाले इस मिशनरी अध्येता को भारत की सरकार ने जीवन भर सिर माथे पर रखा। उसके खुरापाती और लक्ष्य केंद्रित अध्ययन को जनजातीय समाज के तथ्य बनाकर सुस्थापित करने से हमारे बुद्धिजीवी और वामपंथी नही चूके। एल्विन जैसे पापियों के पाप को आज भी बौद्धिक एवं वाम राजनीतिक जगत में प्रतिष्ठित किया जाता रहा है। हकीकत यह है कि एल्विन ने भारत के जनजातीय समाज को उसकी मूल जड़ों से काटने का काम किया। “आदिवासी दिवस” और “मूल निवासी” जैसे अलगाव आधारित  विचार असल में भारत की एकता एवं अखण्डता को तोड़ने के ईसाई षड्यंत्रों का हिस्सा है। इस सुगठित षड्यंत्र की शुरुआत अंग्रेजी राज के जमाने से ही शुरू हो गई थी। वाम और अंग्रेजी जीवनशैली में ढले नेहरू ने इस षडयंत्र को जानबूझकर न केवल अनदेखा किया, बल्कि उसे अपना खुला सरंक्षण भी दिया। यही कारण रहा कि 70 साल बाद भी धर्मांतरण और मिशनरीज के पाप क्षद्म सेक्युलरिज्म की आड़ में भी फलफूल रहे हैं।

प्रश्न यह है कि कोई बाहर से आया हुआ कथित मानवविज्ञानी कैसे भारत के हजारों साल के लोकजीवन का विशेषज्ञ बनकर भारत के निवासियों को ही हिन्दू धर्म से अलग साबित करता रहा और हमारी राजव्यवस्था उसकी बताई गई मनगढ़ंत थ्योरी को अधिमान्यता देती रहीं। कोई अन्य व्यक्ति अगर निजी जीवन में वनवासी महिलाओं के साथ एल्विन जैसी हरकत करता, तो क्या उसे पदम् विभूषण या साहित्य अकादमी जैसे सम्मान हासिल होते?

एल्विन ने मप्र के डिंडोरी जिले की एक 13 बर्षीय वनवासी बालिका कौशल्या के साथ विवाह किया, फिर उसे छोड़कर अन्य महिला लीला से विवाह कर लिया।कौशल्या जब 13 साल की थीं जब 37 साल के एल्विन ने उनसे विवाह किया। फिर कुछ समय तक खुद को वनवासियों का समर्पित अध्येता बताकर सत्ता प्रतिष्ठानों में स्थापित कर लिया। 102 साल की आयु में कोसी उर्फ कौशल्या की मृत्यु हुई तो उसकी शव यात्रा में गांव के वनवासी इसलिए शामिल नही हुए क्योंकि वह ईसाई हो चुकी थी। जाहिर है कौशल्या जो 14 वर्ष की उम्र में एल्विन के बच्चे की मां बन चुकी थी, को उसका समाज अपने से अलग मानता था। जबकि एल्विन को प्रतिष्ठित करने वाले तर्क देते है कि उसने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया था। एल्विन ने कोसी को छोड़कर लीला नामक दूसरी महिला से विवाह कर कोसी को उसके हाल पर छोड़ दिया। फिर नगालैंड मिजोरम, अरूणाचल, आसाम सहित सभी सात राज्यों में मिशनरीज के एजेंट के रूप में वनवासियों को हिन्दू आस्था और विश्वास से अलग करने का जमीनी काम किया। उनकी परम्पराओं औऱ जनश्रुति को अपनी बौद्धिक क्षमता से खण्डित कर उन्हें ईसाई मत में भरोसे के लिए तैयार करने में एल्विन जैसे लोग अग्रणी रहे।

नेहरू के नवरत्नों में शुमार होने के कारण एल्विन की विश्वसनीयता भी राजव्यवस्था में बड़ी मजबूत थी। वह नेहरू का दोस्त भी था। असल मे वेरियर एल्विन कहने भर को मानवविज्ञानी था, उसका उद्देश्य भारत की असली पहचान और सांस्कृतिक मानबिन्दुओं को शातिराना ढंग से खत्म करना था। भारत सरकार की आधिकारिक बेबसाइट “अभिलेख पटल” पर नागालैंड को लेकर एक दस्तावेज उपलब्ध है, जिसमें नगालैंड साधुओं से मुक्त होने वाला पहला प्रदेश बना शीर्षक के साथ यह बताया गया है कि कैसे इस राज्य से हिन्दू साधूओं को खदेड़ कर ईसाई प्रचारकों के लिए जगह बनाई गई है। एल्विन यहां इस पाप का मुख्य किरदार है। उस समय के साधु समा के सचिव स्वामी आनंद भारत के अनुसार, “नेहरू और एल्विन के मध्य यह सहमति बनी थी कि आदिवासी समाज को उसकी मौलिकता के साथ जीवित रखने के लिए पूर्वोत्तर से साधु सन्यासियों को प्रतिबंधित किया जाना जरूरी है।” इसे नेहरू और एल्विन ने पंचशील का नाम दिया था। इसके तहत पांच कार्य प्रस्तावित थे।वनवासियों में प्रचलित जनश्रुतियों को हिन्दू धर्म की कुप्रथाओं के रूप में प्रस्तुत करना, हिन्दूओं को जड़ो से काटना इसमे प्रमुख आयाम था। एल्विन ने अपनी पुस्तक “मिथ्स ऑफ मिडिल इंडिया” में मध्यप्रदेश के वनवासियों की शैव परम्परा को मिथक बताकर प्रचारित किया। “बिच क्राफ्ट एन्ड मैजिक” किताब में तंत्र विद्या को चुड़ैल बताया गया। यानी जिन परम्पराओं औऱ जनश्रुतियों को वनवासी हजारों साल से जीते आ रहे थे, उन्हें खण्डित कर एक अलगाव की जमीन निर्मित करने का जनक आसाम का गवर्नर औऱ प्रधानमंत्री नेहरू का मित्र सलाहकार बेख़ौफ़ होकर करता रहा। नतीजतन आज पूर्वोत्तर की बदली हुई जनांनकीय सबके सामने है।मप्र,छत्तीसगढ़, ओडिसा, झारखंड के वनांचल में मिशनरीज की गहरी जड़ों को हमें नेहरुयुगीन षड़यंत्र के साथ ही पकड़ने की आवश्यकता है।

तथ्य यह है कि कांग्रेस के एकछत्र शासन ने इन षडयंत्र के विरुद्ध उठने वाली आवाजों को सदैव दबाकर रखा, क्योंकि जब राजव्यवस्था एल्विन जैसे लोगों को गवर्नर बनाती रही, उन्हें पद्म पुरस्कार देती रही, तब इस आवाज को सुनने वाला कौन हो सकता था? इस राज्य पोषित षडयंत्र की जड़े आज भी इतनी गहरी है कि हमारे लिए इनसे मुकाबला करना एक युद्ध की तरह है। आज भी नेहरू के मानस पुत्र व्यवस्था में जमे हुए है। स्मरण ही होगा कि डॉ विनायक सेन को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माओवादी नक्सलियों के समर्थन के आरोप में कारावास की सजा सुनाई थी। तब इस मुद्दे पर भारत मे कितना हो हल्ला हुआ था। तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी से लेकर जिहादी एकेडेमिक्स की पूरी फ़ौज मातमपुर्सी पर उतर आई थी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर छत्तीसगढ़ की सरकार और हाईकोर्ट को खलनायक की तरह प्रचारित किया गया। बाद में डॉ विनायक सेन को सोनिया गांधी की सलाहकार मण्डली में भी शामिल किया गया। समझना होगा कि भारत में मूल निवासी या बाहरी का प्रश्न वनवासियों को लेकर एक गढ़ा गया षड्यंत्र है, इसकी जड़ें करीब सौ साल से भी पुरानी है और दुर्भाग्य से भारत मे एक बड़ा तबका इस षड्यन्त्र में साझीदार रहा है। एक तरफ मानवाधिकार औऱ अन्तःकरण की आजादी की बातें होती हैं, दूसरी तरफ करुणा औऱ सेवा के नामपर धर्मांतरण। क्या धर्मान्तरण अपने आप में इन अधिकारों का निकृष्ट हनन नहीं है? आदिवासी दिवस के संदर्भ में हमें इसषड्यंत्र को भी बारीकी से समझने की जरूरत है।

(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार हैं)

राजस्थान: विधायकों को लेकर अब टेन्शन में भाजपा, तीर्थाटन शुरू

  • विधायक बचाने को लेकर अब भाजपा में तनाव!
  • भाजपा के कई विधायक चार्टर प्लेन से पहुँचे पोरबंदर।
  • रिसॉर्ट में रुकेंगे सभी विधायक, चरम पर सियासी ड्रामा।
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 
राजस्थान में कांग्रेस के बाद अब भाजपा का तनाव बढ़ता नज़र आ रहा है। राजनीतिक उठा-पटक में विधायकों को बचाने के लिए कांग्रेस को नाकों चने चबाने पड़े। अब वही हाल भाजपा का होता दिख रहा है। ख़बर है कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ विधायक गुजरात चले गए हैं।
राजस्थान में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय जनता पार्टी के दर्जन भर विधायक गुजरात चले गए हैं। इस बात को लेकर सियासी गलियारे में चर्चा गर्म है। क़यास लगाया जा रहा है कि भाजपा अपने विधायकों की संख्या को बैलेंस रखने के लिए ऐसा कर रही है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, छह विधायक शनिवार को चार्टर विमान से पोरबंदर के लिए रवाना हुए। हालांकि पार्टी के नेताओं ने अपने विधायकों को किसी एक जगह जगह रखकर ‘बाड़ेबंदी’ करने जैसी किसी स्थिति से इनकार किया है। ग़ौरतलब है कि इससे पहले भाजपा के 12 से अधिक विधायक शुक्रवार को गुजरात गए थे।
हवाई अड्डे के अधिकारियों ने बताया कि छह यात्रियों को लेकर एक चार्टर विमान शनिवार को गुजरात में पोरबंदर के लिए रवाना हुआ। विमान में भाजपा विधायकों निर्मल कुमावत, गोपीचंद मीणा, जब्बार सिंह सांखला, धर्मेंद्र मोची और गुरदीप शाहपीनी के होने की सूचना है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि सभी विधायक एक रिसॉर्ट में रुकेंगे। राजस्थान का सियासी ड्रामा ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

Ranchi: एयर एशिया विमान से टकराया पक्षी, टला बड़ा हादसा

  • एक और विमान हादसा होते-होते बचा।
  • एयरपोर्ट अधिकारियों की उड़ी नींद। 
  • बाल-बाल बचा एयर एशिया विमान।
रांची ब्यूरो | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
झारखण्ड में एक बड़ा विमान हादसा होते-होते बचा। एयर एशिया विमान उड़ान भरते समय एक पक्षी से टकरा गया। हालाँकि सभी यात्री सुरक्षित हैं। एक ही दिन पहले केरल के विमान हादसे के बाद इस घटना ने एयरपोर्ट के अधिकारियों की नींद उड़ा दी।
रांची से मुंबई जाने वाली एयर एशिया विमान (i5-632) से टेक-ऑफ के दौरान शनिवार को पक्षी टकरा गया। आनन-फ़ानन में मुस्तैद अधिकारियों ने जायज़ा लिया लेकिन किसी भी तरह अप्रिय घटना नहीं घटी। एयरपोर्ट के अधिकारी ने बताया कि मुंबई जा रही एयर एशिया फ्लाइट (i5-632) रांची एयरपोर्ट पर टेक ऑफ के वक्त पक्षी से टकरा गई। किसी भी यात्री को तकलीफ़ नहीं हुई है।
यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब एक दिन पहले ही केरल के कोझिकोड में एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान हादसे का शिकार हो गया, जिसमें पायलट सहित कम से कम 18 यात्रियों की मौत हो गई। दुबई से आ रहा यह विमान रनवे को पार करता हुआ खाई में जा गिरा और इसके दो टुकड़े हो गए।
फिलहाल विमान का निरीक्षण किया जा रहा है। परिचालन के लिए विमान को मंजूरी मिलने के बाद उड़ान को रवाना होना है। एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि एयर एशिया इण्डिया मेहमानों और चालक दल की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और इस देरी के कारण होने वाली असुविधा पर खेद व्यक्त करता है।

निर्मल पाण्डेय स्मृति ऑनलाइन फ़िल्म फेस्टिवल 2020 ने की अवॉर्ड के नामों की घोषणा

निर्मल पाण्डेय स्मृति ऑनलाइन फ़िल्म फेस्टिवल 2020

ऋषिमुम प्रोडक्शन एवं चम्बल सिने प्रोडक्शन के साझा प्रयास से निर्मल पाण्डेय की स्मृति में आयोजित हो रहा निर्मल पाण्डेय स्मृति ऑनलाइन फ़िल्म फेस्टिवल 2020 ने आज लाइफ़ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड एवं एक्टिंग आइकॉन अवॉर्ड के नामों की घोषणा की।

फ़िल्म फेस्टिवल संस्थापक, फ़िल्म व टीवी शो निर्देशक अनिल दुबे एवं सह संस्थापक व फेस्टिवल असिस्टेंट रवीन्द्र चौहान ने संयुक्त रूप से आज डिजिटल माध्यम से अवॉर्ड के पोस्टर रिलीज कर नाम की घोषणा करते हुए बताया कि फेस्टिवल आयोजन समिति ने निर्मल पाण्डेय स्मृति लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भारतीय फिल्म कलाकार, थिएटर आर्टिस्ट और टीवी अभिनेता श्री राजेन्द्र गुप्ता जी एवं निर्मल पाण्डेय स्मृति एक्टिंग आइकॉन अवॉर्ड भारतीय फिल्म कलाकार, थिएटर आर्टिस्ट और टीवी अभिनेता खिलेन्द्र मिश्रा जी का चयन किया है।

राजेन्द्र गुप्ता छोटे पर्दे पर फैंटसी शो चन्द्रकान्ता में पंडित जगन्‍नाथ की भूमिका के लिए जाने जाते हैं। राजेन्द्र गुप्ता का जन्म 22 फ़रवरी 1945 को पानीपत (हरियाणा) में हुआ था। राजेंद्र गुप्ता ने अपने करियर की शुऱुआत वर्ष 1985 में छोटे पर्दे से की। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में भी काम किया। नब्बे के दशक तक आते आते गुप्ता जी करीबन चालीस से अधिक टीवी शो में अपना अभिनय का लोहा मनवा चुके थे। इसके लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी दर्ज है।

अखिलेन्द्र मिश्रा एक भारतीय फिल्म और टेलीविजन अभिनेता हैं, जिन्हें 1990 के दशक में दूरदर्शन की काल्पनिक टेलीविजन श्रृंखला चंद्रकांता में उनके किरदार के लिए जाना जाता है। उनके अन्य अभिनयों में 1999 की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्म सरफरोश में मिर्ची सेठ का रोल शामिल है। अकादमी पुरस्कार नामांकित फिल्म लगान में भी अर्जन का किरदार निभाया हिंदू महाकाव्य रामायण के 2008 के टेलीविजन रूपांतरण में राक्षस राजा रावण की भूमिका निभाई।1995 में रिलीज़ हुई वीरगति में सलमान खान के विरोधी का किरदार निभाया था।

फेस्टिवल के मुख्यातिथि रंग जगत व फ़िल्म टीवी अभिनेता गोविंद नामदेव जी है। गोविन्द नामदेव एक भारतीय फिल्म एवं टीवी अभिनेता हैं। इनका जन्म 3 सितंबर 1950 को सागर, मध्‍यप्रदेश में हुआ था। इनके करियर की शुरुआत साल 1992 में डेविड धवन की फिल्म शोला और शबनम से हुई। उन्होंने हिंदी फिल्मों में कई तरीके के रोल अदा किये, जिसके लिए उन्हें कई सारे अवार्डों से भी सम्मानित किया गया। वह हिंदी सिनेमा में फिल्म बैंडिट क्वीन, विरासत,सत्या,कच्चे धागे, मस्त, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, सत्ता,सरफ़रोश, क़यामत, ओह माय गॉड, जैसी फिल्मों में अपने अभिनय के लिए जाने जाते है।

शॉर्ट फिल्म कैटेगरी में मर्द, ललक, कचरे वाली लव स्टोरी, चित्रकार, द लास्ट ईब, मेट्रो मजनूं, कलावा चेलिया, पी अम्रेला, द सेक्रेड काऊ, सेविंग सीता, लीला, मन्टो नींद, हैप्पी बिर्थ डे, बदलाव, टेलीफ़ोन, आई विश, कमरा खाली है, रस्सी, पनिहाई, हल्लोरी, न्यू नॉर्मल, अन एफर्ट, हालात, मुखोटा, लालन, माइक्रो शॉर्ट फिल्म कैटेगरी में ओल्ड गेम, हण्टर, ट्रुथ, कोरोना कलाम, लिटिल स्टार, पालछिन, ध्यान रखेगा इंडिया, ड्राइंग बुक, मैजिशियन, भ्रम, उनका शुक्रिया, द लास्ट गेम, वृत्तचित्र कैटेगरी में द सेक्रेट ऑफ स्नेकस, काला घोड़ा-द फेस्टिवल ऑफ आर्ट, कफ़न-द लास्ट वेल, जितिया- द सोल ऑफ कल्चरल सिटी दाऊदनगर, होमलेस, लेट मी टच द ब्लू स्काई, बदलाव की बयार फिल्मों का ऑफिसियल सेलेक्शन हुआ है।

फ़िल्म फेस्टिवल की ज्यूरी में टीवी व फ़िल्म अभिनेत्री आभा परमार, टीवी व फ़िल्म अभिनेत्री सादिया सिद्दीकी, टीवी अभिनेता आरिफ शाहड़ोली, फ़िल्म समीक्षक व लेखक डॉ. कुमार विमलेन्दु, फ़िल्म समीक्षक व लेखक सुनील मिश्र, रंगकर्मी व फ़िल्म निर्देशक अशोक मेहरा है।

आयोजन समिति में फेस्टिवल मैनेजर कनुप्रिया, सलाहकार मिथलेश पाण्डेय, टेक्निकल हेड ऋत्विक ऋषभ, मीडिया हेड कविता गाँधी, प्रोग्राम हेड प्रशान्त पचौरी, डिज़ाइन कंसल्टेंट ईशा दुबे, शीलेन्द्र प्रताप सिंह, सतीश कुमार, कल्पना रघुवंशी है।

मीडिया पार्टनर के रूप में पाखी पत्रिका, द संडे पोस्ट, नव प्रवाह, ब्लंट इंडिया, न्यूज़ लाइव चम्बल, हिंदुस्थान समाचार, संदेश वाहक, ए टू जेड टीवी, न्यूज़ टाइम्स, बुन्देली बौछार, तेजस खबर जुड़े हुए है।

काले नमक का उपयोग करने से शरीर को मिलता है ये लाभ, दूर होती है ये बिमारी

यदि किसी को पेट में अक्सर गैस और कब्ज की शिकायत रहती है तो उसे इंसान को काले नमक का सेवन करना चाहिए। काले नमक में मौजूद सोडियम क्लोराइड, सल्फेट, आयरन, फेरिक ऑक्साइड जैसे न्यूट्रिएंट्स पेट में बनने वाली गैस और कब्ज की परेशानी को दूर करते है।

 

काला नमक हमारी हड्डियों को मजबूत बनाता है। काले नमक में मौजूद मिनरल्स हमारी हड्डियों को मजबूत बनाते है। काला नमक हमारी स्किन को हेल्दी रखने में भी सहायक होता है।

काले नमक में मौजूद सल्फर, जिंक जैसे न्यूट्रिएंट्स डेड और ड्राय स्किन की समस्या को दूर करने में सहायक होते हैं। रेगूलर इसका पानी पीने से स्किन हेल्दी रहती है, साथ चेहरे का ग्लो भी बढ़ता है।

काला नमक पेट के अंदर हाइ ड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीन डाइजेस्ट करने वाले एंजाइम को एक्टिव करता है। यह एंजाइम हमारे पेट के डाइजेशन का सुधारने में मदद करता है।

काला नमक हमारे सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है। अगर आप को इसके बारे में पता नहीं है तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं काले नमक के वो फायदे जिससे आप अपने डाइजेशन को ठीक रख सकते है।

 

 

अब घर बैठे इस आसान से तरीके से बनाए पनीर कोफ्ता, जानिए ये है रेसपी

एक दूसरे पैन में कोफ्तों को हल्का फ्राई कर लें. अब फ्राई किए हुए कोफ्तों को तैयार की गई ग्रेवी में डालें. धीमी आंच पर 5 से 6 मिनट पकने दें. इस पर नींबू का रस निचोड़े और हरे धनिए से गार्निश करके सर्व करें.

 

टमाटर प्यूरी और थोड़ा दूध डालकर हल्की आंच करके पकाएं. हल्का पक जाने पर इसमें मलमल के कपड़े में लटका हुआ दही और चीनी मिलाएं. ढककर 10 से 15 मिनट के लिए रख दें.

एक पैन में तेल गर्म करें. इसमें दालचीनी स्टिक, हरी इलायची, काली इलायची, लौंग, तेजपत्ता और जीरा डालकर भून लें. इसके बाद प्याज, नमक, अदरक-लहसुन का पेस्ट, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डालकर प्याज के हल्का ब्राउन होने तक भूनें.

एक बाउल में पनीर, आलू, खोया, अदरक-लहसुन पेस्ट, नमक, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पत्ती, पिसा हुआ जीरा, धनिया, किशमिश और सरसों के तेल को मिलाकर गूंथ लें. अब इन सभी सामग्रियों को ​मिलाकर एक सख्त डो के रूप में तैयार कर लें.

इस बार रक्षाबंधन (Rakshabandhan) पर अपने भाई को अपने हाथों से बनाकर पनीर कोफ्ते का स्वाद जरूर चखाएं. पनीर कोफ्ते को आप पराठा, नान या रोटी के साथ सर्व कर सकते हैं. आइए आपको बताते हैं इसकी आसान रेसिपी के बारे में.

तैयार की गई ग्रेवी में कोफ्ते बनाकर डाले जाते हैं. पनीर कोफ्ता एक ऐसी रेसिपी है जिसे बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी पसंद करते हैं.

पनीर कोफ्ता (Paneer Kofta) एक लजीज रेसिपी (Recipe) है जिसमें किशमिश और खोए का स्वाद अलग ही टेस्ट ला देता है. इसकी क्रीमी ग्रेवी को कई बेहतरीन मसालों के साथ तैयार किया जाता है.

हरभजन सिंह ने इंस्टाग्राम पर शेयर की ये फोटो, देख शिखर धवन ने किया ये कमेंट

वह शायद करियर के 15 साल का जश्न मनाने में काफी व्यस्त हैं. अगर आपको कहीं यह मिले तो जानकारी शेयर करे.’ हरभजन की तस्वीर पर भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने कमेंट करते हुए लिखा, ‘ब्याह के बाद सब ऐसे ही गायब हो जाते हैं, हैं ना पाजी.’

 

अगर इनकी कोई खबर मिले तो शेयर करें.’ हरभजन सिंह ने तस्वीर के कैप्शन में लिखा, ‘लंबे समय से मेरी सुरेश रैना से बात नहीं हो पाई है.

हरभजन सिंह ने जो तस्वीर शेयर की है उसमें रैना का फोटो है और ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है कि इस साल मार्च से यह शख्स गुम हो चुका है.

तस्वीर के नीचे रैना का नाम है साथ ही लिखा गया है, ‘शायद रैना सीख चुके हैं कि कैसे खाना बनाया जाता है पर वह शायद भूल गए हैं कि मैसेज कैसे किया जाता है.

हरभजन ने लोगों से पूछा है कि क्या उन्होंने रैना (Suresh Raina) को कहीं देखा है. उनके इस पोस्ट पर सुरेश रैना ने तो नहीं लेकिन शिखर धवन (Shikhar Dhawan) ने कमेंट करते हुए भारतीय बल्लेबाज की गायब होने की वजह बताई है.

हालांकि रैना के इस खास अवसर पर भारतीय स्पिन गेंदबाज हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने उनके नाम का गुमशुदगी का पर्चा बनाकर इंस्टाग्राम पर शेयर किया है.

भारतीय बल्लेबाज सुरेश रैना (Suresh Raina) ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय करियर में 15 साल पूरे कर लिए. इस मौके पर उन्हें सभी की ओर से बधाई मिल रही थी.

वजन घटाने के लिए करे ये आसान सा घरेलू उपाय

भोजन से पहले 500 मिलीलीटर पानी पीने से मेटाबॉलिज्म में 30 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है. गर्म या गुनगुना पानी रोजाना सुबह या दिन भर पीने से तीन तरह से वजन घटाने की प्रक्रिया में मदद मिल सकती है.

 

पानी शरीर को पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है और टॉक्सिक वेस्ट को बाहर निकालता है. 2003 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन के अनुसार, गर्म पानी पीने से वजन घटाने की प्रक्रिया बढ़ सकती है.

साथ ही गर्म पानी भोजन के पाचन को बेहतर बनाता है. इसके अलावा, यह आमतौर पर माना जाता है कि पीने का पानी (विशेष रूप से गर्म पानी) कुछ किलो वजन कम करने में मदद कर सकता है.

ठंडे और गर्म पानी दोनों अपना महत्व है. एक गिलास ठंडा पानी आपको एक्सरसाइज सेशन के बाद कूल डाउन करने में मदद करता है, जबकि गर्म पानी शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करता है.

 

 

शिल्पा शेट्टी के इस नए लुक ने मचाया धमाल, देख लोगो को लगा करंट

इसके साथ ही उन्होंने श्रग को कमर पर बांधा हुआ था. जो उनके लुक को और भी स्टाइलिश बना रहा है. एक्ट्रेस ने अपने श्रग के मैचिंग के फुटवियर भी पहने हैं. फेस शील्ड के साथ ही एक्ट्रेस ने ग्लव्स भी पहने हैं.

 

शिल्पा का यह स्टाइलिश फेस शील्ड उनके फैंस को बहुत पसंद आ रहा है और सभी कमेंट के जरिए उनकी तारीफ़ कर रहे हैं. बात करें एक्ट्रेस के लुक की तो इस दौरान उन्होंने ब्लू कलर का शॉर्ट ड्रेस पहना है.

शिल्पा ने जो फेस शील्ड डिज़ाइन करवाया है. उसके ऊपर नीले रंग की पट्टी पर सफेद रंग से लिखा है – ‘SSK.’ जिसका मतलब है शिल्पा शेट्टी कुंद्रा.

अब तक बॉलीवुड के सितारे डिज़ाइनर मास्क पहनकर फोटोज शेयर कर चुके हैं. जिसके बाद अब बॉलीवुड एक्टर शिल्पा शेट्टी कुंद्रा ने खुद के लिए फेस शील्ड डिज़ाइन करवाया है. जिसके फोटोज अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.

लगातार बढ़ रहे वायरस के कहर की वजह से सभी की अपनी सेफ्टी का ध्यान रखना पड़ रहा है. सरकार के निर्देशों के अनुसार सभी को मास्क लगातार घर से बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है. ऐसे में सभी अपनी पसंद के हिसाब से अपना मास्क डिज़ाइन करवा रहे हैं.

 

12वीं पास करे टेक्नीशियन के पदों पर आवेदन, मिलेगी इतनी तनख्वाह

परीक्षा तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी। शैक्षणिक योग्यता साइंस/मैथ्स के साथ 12वीं । एवं ईसीजी टेक्नीशियन कोर्स में दो साल का डिप्लोमा। आयु सीमा 18 से 40 वर्ष। आयु सीमा का निर्धारण 1 जनवरी, 2021 से किया जाएगा।

 

इसमें गैर-अनुसूचित क्षेत्र के 177 और अनुसूचित क्षेत्र के 18 पद शामिल हैं। इन पदों के लिए 6 अगस्त से आवेदन की प्रक्रिया शुरू होगी। ऑनलाइन आवेदन करने व फीस जमा कराने की अंतिम तिथि 4 सितंबर है।

राजस्थान सबऑर्डिनेट एंड मिनिस्ट्रियल स्टाफ सलेक्शन बोर्ड (RSMSSB) ने ईसीजी टेक्नीशियन की 195 वैकेंसी निकाली हैं।