• आज एक बार फिर सुशांत के कुक नीरज से हो रही है पूछताछ।
• जल्द किसी की हो सकती है गिरफ़्तारी -सूत्र
• अटॉप्सी की फाइलों की जांच के लिए पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन।
मुम्बई पुलिस ने सौंपा सबूत-
• आज एक बार फिर सुशांत के कुक नीरज से हो रही है पूछताछ।
• जल्द किसी की हो सकती है गिरफ़्तारी -सूत्र
• अटॉप्सी की फाइलों की जांच के लिए पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन।
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
भारत की तीन फार्मास्युटिकल कंपनियों ने नेपाल को जीवनरक्षक दवा रेमडिसिविर की सप्लाई शुरू कर दी हैं। एंटी वायरल दवा का इस्तेमाल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए किया जाता है। यह दवा अब तक नेपाल में उपलब्ध नहीं थी। ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल नारायण प्रसाद ठकाल ने कहा कि हमने रेमडेसिविर के सप्लाई के लिए तीन कंपनियों को इजाजत दी है। हमारी मांगों के हिसाब से माइलान, सिप्ला और हेट्रो ड्रग्स एंटी वायरल दवा की आपूर्ति करेंगे। हम केवल इन कंपनियों द्वारा आपूर्ति की गई एंटी-वायरल के इस्तेमाल की इजाजत देंगे।
उन्होंने कहा कि इनमें से माइलान ने नेपाल को एंटी वायरल की डिलिवरी शुरू कर दी है। सबसे पहले हमने इसके 570 शीशियों का ऑर्डर दिया है, जिसकी डिलिवरी भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों तक पहुंच आसान है। वहां से इसे मंगाने में लागत भी कम आती है, इसलिए हमने उन्हें इजाजत दी।
रेमडेसिविर उन मरीजों के लिए कारगर साबित हुई है, जिन्हें इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में रखा गया। डीजी ढकाल ने कहा, ‘‘नेपाली बाजार में आने पर एक शीशी की कीमत लगभग 7,800 नेपाली रुपए होगी।’’ नेपाल में जो मरीज क्रिटिकल होते हैं, उनके परिवार को विशेष व्यवस्था के तहत इसे भारत से मंगाना पड़ता है। नेपाल में आने से यह आसानी से उन लोगों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही उनके खर्च में भी बचत होगी।
नेपाल के ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर जनरल ने बताया कि हमेशा भारतीय कंपनियां देश को ड्रग्स और फार्मास्युटिकल्स निर्यात के लिए आगे आती हैं। अन्य देशों से दवाओं के आयात की इजाजत 123 कंपनियों को मिली है। इनमें से आधे से ज्यादा भारतीय कंपनियां हैं, जो यूरोप या अमेरिका में हेडक्वॉर्टर वाली पैरेंट कंपनियों के लिए अलग-अलग रूप में काम करती हैं।
सऊदी अरब से दुलत्ती खाने के बाद पाकिस्तान इस हद तक पगलाया हुआ है कि अब वह सऊदी अरब में तख़्तापलट की तैयारी कर रहा है. जी हाँ, आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा. पाकिस्तान सऊदी अरब में तख़्तापलट की तैयारियां कर रहा है. द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के अनुसार, “ रियाद से सूत्रों ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मोहम्मद बिन सलमान द्वारा नकारे जाने पर इस्लामाबाद ने सऊदी राजघराने के विरोधी गुटों के साथ कूटनीतिक चैनल स्थापित करने की व्यवस्था की है।
बता दें कि पारंपरिक शैली में सऊदी के सुल्तान अपने भाइयों में ही विरासत को आगे बढ़ाते हैं। परंतु 2007 में सुल्तान अब्दुल्लाह ने एक Allegiance काउंसिल स्थापित कर सऊदी के भावी सुल्तान चुने जाने की प्रक्रिया स्थापित की, जिससे शाही घराने में दरार पड़ गई।’’ ऐसे में संदेश स्पष्ट है – सऊदी राजघराने के विरोधी गुट के बल पर पाकिस्तान राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान को अपदस्थ करने के सपने देख रहा है।
पाकिस्तान और सीरिया में क्या समानता है? दोनों ही अपने पड़ोसियों [भारत और इज़रायल] की आँखों में शूल की भांति चुभते हैं, और दोनों अपनी वास्तविक औकात से ज़्यादा की दुश्मनी पालते हैं। इसके अलावा एक और समानता ये भी है कि पाकिस्तान और सीरिया में लोकतान्त्रिक चुनाव ईद के चाँद की तरह होते हैं, जबकि असल सत्ता वहाँ की सेना के हाथ में रहती है। लेकिन इस बार पाकिस्तान ने सऊदी अरब के आंतरिक मामलों में दखल देकर अपनी औकात से ज़्यादा का पंगा मोल लिया है।
परंतु सऊदी अरब आखिर पाकिस्तान पर इतना भड़का क्यों हुआ है? पाक चाहता था कि सऊदी की अध्यक्षता वाले संगठन ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानि ओआईसी कश्मीर मुद्दे पर भारत का विरोध करे और पाकिस्तान के रुख का समर्थन करे। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसके लिए सऊदी को एक अल्टिमेटम भी दे दिया कि यदि ओआईसी ने उनकी बात नहीं मानी, तो पाकिस्तान ओआईसी से अलग गुट बनाकर कश्मीर के मुद्दे को उठाने के लिए बाध्य हो जाएगा।
इसके अलावा सऊदी राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान भी पाकिस्तानी प्रशासन से काफी खफा हैं। 2019 में उनके पाकिस्तानी दौरे पर इमरान खान के साथ किसी बात पर कहासुनी हुई थी, जिसके कारण सऊदी अरब के पाकिस्तान से सम्बन्धों में दरार आनी प्रारम्भ हुई। लेकिन रही सही कसर शाह महमूद कुरैशी ने सऊदी को चुनौती देते हुए पूरी कर दी। इसके कारण पाकिस्तान को न सिर्फ सऊदी के हाथों वित्तीय सहायता से हाथ धोना पड़ा, बल्कि जब पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख जनरल बाजवा सुलह कराने के लिए सऊदी अरब आए, तो उन्हे मोहम्मद बिन सलमान से बिना मिले वापिस लौटना पड़ा।
इसके अलावा पाकिस्तान तुर्की से भी काफी नज़दीकियाँ बढ़ा रहा है, जो सऊदी अरब के इस्लामिक जगत में वर्चस्व को खुलेआम चुनौती दे रहा है। परंतु क्या ये पहली बार है कि पाकिस्तान ने अपनी औकात से ज़्यादा ऊपर उठकर किसी शक्तिशाली देश को चुनौती देने का सोचा हो? ये पहला ऐसा अवसर नहीं है, क्योंकि जब 1967 में मिस्र, सीरिया, लेबनान समेत छह देशों ने इज़रायल पर आक्रमण किया था, तो पाकिस्तान ने भी इस इस्लामिक जिहाद में सहयोग करने के लिए अमेरिका से भीख में मिले अपने लड़ाकू विमान मोर्चे पर भेजे थे। परिणाम यह निकला कि इज़रायल ने उन छह देशों को हराया ही, और साथ ही साथ पाकिस्तान की भी सार्वजनिक बेइज्जती हुई। लगता है पाकिस्तान एक बार फिर 1967 और 1971 की भांति सार्वजनिक बेइज्जती कराना चाहता है, तभी वह सऊदी अरब में तख्तापलट के खयाली पुलाव पका रहा है।
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
केरल के कोझीकोड स्थित करीपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 7 अगस्त को दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया एक्सप्रेस मामले की जांच में अब अमेरिका भी सहयोग करेगा। अभी तक इस दुर्घटना की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) कर रहा था, लेकिन अब अमेरिकी परिवहन सुरक्षा निकाय नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) ने जांच में सहायता के लिए अपने मान्यताप्राप्त प्रतिनिधि और तकनीकी सलाहकार नियुक्त किए हैं।
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने कहा कि दुर्घटना की जांच कर रही उसकी टीम अमेरिका के राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड के साथ समन्वय कर रही है। केरल के कोझीकोड स्थित करीपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई दुर्घटना में दोनों पायलट समेत 18 यात्रियों की मौत हुई थी। एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग करते समय दो टुकड़ों में बंटकर 35 फीट नीचे खाई में गिर गया था।
दिल्ली-मुंबई से भेजी गईं एयर इंडिया और एएआई की राहत टीमें दूसरे दिन केरल पहुंच गईं और राहत कार्य पूरा किया गया। एएआईबी, डीजीसीए और फ्लाइट सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम ने भी दूसरे दिन से ही घटना की जांच शुरू कर दी थी। इस दुर्घटना में 127 यात्री घायल भी हुए थे जिन्हें अस्पतालों में इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
चूंकि दुर्घटनाग्रस्त हुआ एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान अमेरिकी कंपनी का था, इसलिए जांच शुरू होने पर दुर्घटनाओं के नियमों के अनुसार एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने दुर्घटना के बारे में अमेरिकी परिवहन सुरक्षा निकाय नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) को सूचना दी। इसलिए एनटीएसबी ने आईसीएओ एनेक्स 13 प्रोटोकॉल के अनुसार जांच में सहायता के लिए अपने प्रतिनिधि और तकनीकी सलाहकार नियुक्त किए हैं। आईसीएओ अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन है। एएआईबी ने एक बयान में कहा है कि जांच दल एनटीएसबी के मान्यताप्राप्त प्रतिनिधि और तकनीकी सलाहकारों के साथ समन्वय कर रहा है।