सऊदी अरब से दुलत्ती खाने के बाद पाकिस्तान इस हद तक पगलाया हुआ है कि अब वह सऊदी अरब में तख़्तापलट की तैयारी कर रहा है. जी हाँ, आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा. पाकिस्तान सऊदी अरब में तख़्तापलट की तैयारियां कर रहा है. द स्टेट्समैन की रिपोर्ट के अनुसार, “ रियाद से सूत्रों ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मोहम्मद बिन सलमान द्वारा नकारे जाने पर इस्लामाबाद ने सऊदी राजघराने के विरोधी गुटों के साथ कूटनीतिक चैनल स्थापित करने की व्यवस्था की है।
बता दें कि पारंपरिक शैली में सऊदी के सुल्तान अपने भाइयों में ही विरासत को आगे बढ़ाते हैं। परंतु 2007 में सुल्तान अब्दुल्लाह ने एक Allegiance काउंसिल स्थापित कर सऊदी के भावी सुल्तान चुने जाने की प्रक्रिया स्थापित की, जिससे शाही घराने में दरार पड़ गई।’’ ऐसे में संदेश स्पष्ट है – सऊदी राजघराने के विरोधी गुट के बल पर पाकिस्तान राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान को अपदस्थ करने के सपने देख रहा है।
पाकिस्तान और सीरिया में क्या समानता है? दोनों ही अपने पड़ोसियों [भारत और इज़रायल] की आँखों में शूल की भांति चुभते हैं, और दोनों अपनी वास्तविक औकात से ज़्यादा की दुश्मनी पालते हैं। इसके अलावा एक और समानता ये भी है कि पाकिस्तान और सीरिया में लोकतान्त्रिक चुनाव ईद के चाँद की तरह होते हैं, जबकि असल सत्ता वहाँ की सेना के हाथ में रहती है। लेकिन इस बार पाकिस्तान ने सऊदी अरब के आंतरिक मामलों में दखल देकर अपनी औकात से ज़्यादा का पंगा मोल लिया है।
परंतु सऊदी अरब आखिर पाकिस्तान पर इतना भड़का क्यों हुआ है? पाक चाहता था कि सऊदी की अध्यक्षता वाले संगठन ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन यानि ओआईसी कश्मीर मुद्दे पर भारत का विरोध करे और पाकिस्तान के रुख का समर्थन करे। पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इसके लिए सऊदी को एक अल्टिमेटम भी दे दिया कि यदि ओआईसी ने उनकी बात नहीं मानी, तो पाकिस्तान ओआईसी से अलग गुट बनाकर कश्मीर के मुद्दे को उठाने के लिए बाध्य हो जाएगा।
इसके अलावा सऊदी राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान भी पाकिस्तानी प्रशासन से काफी खफा हैं। 2019 में उनके पाकिस्तानी दौरे पर इमरान खान के साथ किसी बात पर कहासुनी हुई थी, जिसके कारण सऊदी अरब के पाकिस्तान से सम्बन्धों में दरार आनी प्रारम्भ हुई। लेकिन रही सही कसर शाह महमूद कुरैशी ने सऊदी को चुनौती देते हुए पूरी कर दी। इसके कारण पाकिस्तान को न सिर्फ सऊदी के हाथों वित्तीय सहायता से हाथ धोना पड़ा, बल्कि जब पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख जनरल बाजवा सुलह कराने के लिए सऊदी अरब आए, तो उन्हे मोहम्मद बिन सलमान से बिना मिले वापिस लौटना पड़ा।
इसके अलावा पाकिस्तान तुर्की से भी काफी नज़दीकियाँ बढ़ा रहा है, जो सऊदी अरब के इस्लामिक जगत में वर्चस्व को खुलेआम चुनौती दे रहा है। परंतु क्या ये पहली बार है कि पाकिस्तान ने अपनी औकात से ज़्यादा ऊपर उठकर किसी शक्तिशाली देश को चुनौती देने का सोचा हो? ये पहला ऐसा अवसर नहीं है, क्योंकि जब 1967 में मिस्र, सीरिया, लेबनान समेत छह देशों ने इज़रायल पर आक्रमण किया था, तो पाकिस्तान ने भी इस इस्लामिक जिहाद में सहयोग करने के लिए अमेरिका से भीख में मिले अपने लड़ाकू विमान मोर्चे पर भेजे थे। परिणाम यह निकला कि इज़रायल ने उन छह देशों को हराया ही, और साथ ही साथ पाकिस्तान की भी सार्वजनिक बेइज्जती हुई। लगता है पाकिस्तान एक बार फिर 1967 और 1971 की भांति सार्वजनिक बेइज्जती कराना चाहता है, तभी वह सऊदी अरब में तख्तापलट के खयाली पुलाव पका रहा है।
एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में सीबीआई ने शुक्रवार को उनके कुक नीरज से पूछताछ की। सीबीआई ने नीरज से 10 सवाल पूछे। उनसे 13 और 14 जून के दिन घटी घटनाओं का सिलसिलेवार ब्योरा पूछा गया। सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई ने अपनी पूछताछ में नीरज के सामने यह सवाल किए हैं।
सीबीआई के नीरज से सवाल
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ आपके रिलेशन कैसे थे? आप कितने दिन से उनके साथ काम कर रहे हैं?
13 जून की रात क्या घर पर कोई पार्टी हुई और 14 जून की सुबह घर का माहौल कैसा था?
कौन-कौन लोग सुशांत की मौत वाले दिन कमरे के अंदर और बाहर मौजूद थे?
14 की सुबह क्या-क्या हुआ, इसे सिलसिलेवार ढंग से बताइए? उस दिन सुशांत से आपकी कितनी बार मुलाकात हुई?
क्या सुशांत आमतौर पर अपने कमरे में ही रहते थे या फिर वे घर के लोगों या रिया के साथ समय बिताते थे?
क्या सुशांत ने 13 और 14 को सामान्य तरीके से खाना खाया था? उन्होंने क्या-क्या खाया था?
सुशांत और रिया चक्रवर्ती के बीच कैसे संबंध थे? क्या उन्होंने लॉकडाउन खत्म होने के बाद घर से जाने के लिए कहा था?
सुशांत की बॉडी सबसे पहले किसने देखी? क्या जब सुशांत का शव पंखे से लटका था तो आप कमरे में गए थे?
सुशांत की बॉडी को उतारने के लिए किसने बोला था? बॉडी उतारने के दौरान क्या आपने भी सहयोग किया था? बॉडी उतारते वक्त कितने लोगों ने सुशांत को पकड़ा था?
पीसीआर को कब कॉल किया गया और वो कॉल किसने किया था? पुलिस के आने से पहले और उसके बाद क्या-क्या हुआ डिटेल में बताइए?
रिया चक्रवर्ती ने नीरज को नौकरी पर रखा था
नीरज सिंह सुशांत के घर में पिछले 8 महीने से काम कर रहे थे। नीरज को रिया चक्रवर्ती ने ही नौकरी पर रखा था। नीरज से बिहार और मुंबई पुलिस पूछताछ कर चुकी है। नीरज ने एक इंटरव्यू में बताया था कि आत्महत्या वाले दिन सुशांत ने उनसे पानी मांगा था और फिर वह कमरे में चले गए थे।
नीरज ने बताया- 14 जून को क्या-क्या हुआ?
नीरज ने इससे पहले बताया था कि रिया चक्रवर्ती 8 जून को सुशांत का घर छोड़कर चली गई थीं। सुशांत का 12 लोगों का स्टाफ था, जिसमें से कुछ लोगों को उन्होंने काम से निकाला था। नीरज ने यह भी बताया था कि घटना वाले दिन सुशांत रूम में चले गए थे। इसके बाद मैंने रूम का दरवाजा आराम से खटखटाया, लेकिन कोई रिप्लाई नहीं आया। मैं आधे घंटे के बाद फिर गया। केशव ने भी ऐसा ही किया। उसने दो बार सर को कॉल भी किया था, लेकिन रिप्लाई नहीं आया। फिर उनकी बहन को कॉल किया गया।
सैमुअल मिरांडा से 5 घंटे तक पूछताछ हुई
सीबीआई की टीम ने सुशांत सिंह राजपूत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा से 5 घंटे तक पूछताछ की। सुशांत के हाउस मैनेजर से सीबीआई ने क्या पूछा इसके बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं मिल पाई है। हालांकि, ये कहा जा रहा है कि सैमुअल से सीबीआई की टीम ने यह जानने की कोशिश की सुशांत के घर पर 13 जून और 14 जून को क्या कुछ हुआ था।
कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र चुनाव आयोग ने आगामी चुनाव से सम्बंधित गाइडलाइंस जारी कर दिया है। चुनाव प्रचार के दौरान भीड़-भाड़ न हो और उसकी वजह से कोरोना के मामले न बढ़ें, इसका आयोग ने ख़ास ख़याल रखा है। चुनाव प्रचार में नेताओं द्वारा जमा की जाने वाली भीड़ को भी आयोग ने गम्भीरता से लिया है और उस पर भी कैंची चलाई है। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि डोर टू डोर कैम्पेन में मात्र पाँच लोग ही जा सकेंगे।
विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा प्रचार के दौरान माहौल बनाने के लिए किए जाने वाले दिखावे पर आयोग ने कैंची चला दी है। चुनाव आयोग द्वारा बिहार विधानसभा चुनाव और अन्य उपचुनावों के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। अब उम्मीदवार समेत सिर्फ 5 लोग डोर टू डोर कैंपेन में हिस्सा ले सकेंगे। उम्मीदवार जमानत की राशि ऑनलाइन भर सकेंगे। पब्लिक मीटिंग और रोड शो की अनुमति गृह मंत्रालय और राज्यों के कोरोना पर दिशानिर्देशों के अनुसार मिलेगी। इसके अलावा भी चुनाव आयोग ने कई विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं।
चुनाव आयोग की नई गाइडलाइंस के अनुसार, नामांकन के दौरान उम्मीदवार के साथ सिर्फ दो लोगों और दो गाड़ियों को ले जाने की अनुमति मिलेगी। मतगणना हॉल में 7 से अधिक काउंटिंग डेस्क की इजाजत नहीँ होगी। एक विधानसभा क्षेत्र की काउंटिंग 3 से 4 हॉल में हो सकती है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान सैनिटाइजर, ग्लव्स, फेस शील्ड, मास्क, थर्मल स्कैनर का इस्तेमाल होगा. आयोग के मुताबिक-पोस्टल बैलट की सुविधा दिव्यांगों, 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, कोरोना से संबंधित पंजीकृत नौकरियों में लोगों को दी गई है।
आयोग ने राजनीतिक दलों द्वारा दिए गए विचारों और सुझावों पर विचार किया। उसने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा दिए गए सुझावों और सिफारिशों पर भी विचार किया।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा पर कृष्णा नदी पर बनाया गए श्रीसैलम पावर प्लांट की गत रात अचानक आग लग गई. देखते ही देखते यह आग बढ़ गई. बताया जाता है कि यह आग शॉर्ट सर्किट से लगी है. रेस्क्यू टीम नेकरीब 10 लोगों को बचा लिया है, जिसमें 6 टीएस जेंको और 3 एक अन्य प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी हैं, जबकि जबकि 9 लोग अभी भी अंदर फंसे है,
मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा है कि लगातार अपडेट ले रहे हैं। मंत्री जगदीश्वर रेड्डी और ट्रांसको-जेंको कंपनी के सीएमडी डी प्रभाकर राव से बात की है। वे दोनों मौके पर हैं।
तेलंगाना के मंत्री जी जगदीश्वर रेड्डी ने बताया कि हादसा गुरुवार रात करीब 10.30 बजे हुआ। 10 लोगों को बाहर निकाल लिया गया था। पावर सप्लाई भी बंद कर दी गई थी। हम सिंगारेनी कोल माइंस से मदद लेने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वे इस स्थिति पर काबू पाने में मददगार साबित हो सकते हैं। अंदर फंसे लोगों को निकालना हमारी प्राथमिकता है।
केरल के कोझीकोड स्थित करीपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 7 अगस्त को दुर्घटनाग्रस्त हुए एयर इंडिया एक्सप्रेस मामले की जांच में अब अमेरिका भी सहयोग करेगा। अभी तक इस दुर्घटना की जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) कर रहा था, लेकिन अब अमेरिकी परिवहन सुरक्षा निकाय नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) ने जांच में सहायता के लिए अपने मान्यताप्राप्त प्रतिनिधि और तकनीकी सलाहकार नियुक्त किए हैं।
एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने कहा कि दुर्घटना की जांच कर रही उसकी टीम अमेरिका के राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा बोर्ड के साथ समन्वय कर रही है। केरल के कोझीकोड स्थित करीपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुई दुर्घटना में दोनों पायलट समेत 18 यात्रियों की मौत हुई थी। एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान लैंडिंग करते समय दो टुकड़ों में बंटकर 35 फीट नीचे खाई में गिर गया था।
दिल्ली-मुंबई से भेजी गईं एयर इंडिया और एएआई की राहत टीमें दूसरे दिन केरल पहुंच गईं और राहत कार्य पूरा किया गया। एएआईबी, डीजीसीए और फ्लाइट सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम ने भी दूसरे दिन से ही घटना की जांच शुरू कर दी थी। इस दुर्घटना में 127 यात्री घायल भी हुए थे जिन्हें अस्पतालों में इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
चूंकि दुर्घटनाग्रस्त हुआ एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान अमेरिकी कंपनी का था, इसलिए जांच शुरू होने पर दुर्घटनाओं के नियमों के अनुसार एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने दुर्घटना के बारे में अमेरिकी परिवहन सुरक्षा निकाय नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) को सूचना दी। इसलिए एनटीएसबी ने आईसीएओ एनेक्स 13 प्रोटोकॉल के अनुसार जांच में सहायता के लिए अपने प्रतिनिधि और तकनीकी सलाहकार नियुक्त किए हैं। आईसीएओ अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन है। एएआईबी ने एक बयान में कहा है कि जांच दल एनटीएसबी के मान्यताप्राप्त प्रतिनिधि और तकनीकी सलाहकारों के साथ समन्वय कर रहा है।
. कुक नीरज से शुरू की पूछताछ . मुंबई पुलिस सौंपेगी दस्तावेज
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत प्रकरण की जांच करने के लिए गुरुवार शाम को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की दो टीम मुंबई पहुंच गई है। इस दोनों टीमों का नेतृत्व सीबीआई के ज्वाइंट संचालक मनोज शशिधर कर रहे हैं। दस सदस्यीय सीबीआई की एसआईटी ने आज सुबह अपनी जांच शुरू कर दी है। सबसे पहले सीबीआई ने सुशांत के कुक नीरज को बुला कर उससे पूछताछ कर रही है।
बताया जा रहा है कि सीबीआई पांच टीमें बनाकर मुंबई में मामले की जांच करेगी। मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह ने कहा है कि हम जांच में सहयोग करेंगे। जो भी दस्तावेज मांगे जाएंगे, हम उन्हें उपलब्ध कराएंगे।
सीबीआई टीम के आने की खबर मिलते ही गुरुवार को मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह मंत्रालय में जाकर गृहमंत्री अनिल देशमुख से मिले थे। इस दौरान परमबीर सिंह ने इस मामले को विस्तृत चर्चा की। हालांकि मंत्रालय से निकलते समय परमबीर सिंह ने पत्रकारों से बात नहीं की। गृहमंत्री पहले ही इस मामले में सीबीआई को हर तरह का सहयोग करने की घोषणा कर चुके हैं। इस मामले में सीबीआई व मुंबई पुलिस के बीच तालमेल रखने के लिए आईपीएस अधिकारी सुवेज हक की नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्ति की गई है। सीबीआई की टीम मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह से मिलकर सुशांत सिंह मामले के महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लेगी।
सीबीआई ने पहले ही इस मामले में रिया चक्रवर्ती, उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती, मां संध्या चक्रवर्ती, भाई सौविक चक्रवर्ती सहित 6 लोगों पर मामला दर्ज किया है। सीबीआई सबसे पहले इस मामले में मुंबई पुलिस से सुशांत के बरामद डिजिटल सामान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिंक जांच रिपोर्ट हासिल करेगी। यह भी जानकारी मिली है कि सीबीआई टीम मुंबई में 10 दिनों तक रहेगी लेकिन मुंबई नगर निगम टीम के सदस्यों को क्वारंटीन नहीं करेगा।
तिवारी के ट्वीट के बाद गृह मंत्रालय को देनी पड़ी सफ़ाई।
गृह मंत्रालय के बयान के बाद मनोज तिवारी ने डिलीट किया ट्वीट।
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
अभिनेता से नेता बने अतिउत्साही मनोज तिवारी अपनी हरकतों की वजह से आज ख़ूब चर्चा में रहे। बिना पुख़्ता जाँच के तिवारी ने ट्वीट कर दिया कि भारत के यशस्वी गृह मंत्री अमित शाह का कोविड टेस्ट निगेटिव आया है। मनोज तिवारी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बाढ़ आ गई। फिर गृह मंत्रालय का बयान आया कि ऐसी कोई जाँच ही नहीं हुई।
गृह मंत्रालय ने मनोज तिवारी के ट्वीट के बार स्पष्ट किया कि मंत्री अमित शाह की कोविड जाँच नहीं कराई गई है। ट्विटर पर मनोज तिवारी के ट्वीट की वजह से लाखों लोगों ने उन्हें बधाई दी। गृह मंत्रालय के बयान के बाद मनोज तिवारी ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। मनोज ने ट्वीट तो डिलीट कर दिया लेकिन खिंचाई करने के लिए इतना काफ़ी था।
अब मनोज तिवारी के भरोसे जिन्होंने शाह को शुभकामना दिया था, वो कह रहे हैं कि मनोज तिवारी का कभी भरोसा मत करना। एक यूज़र ने लिखा, “सभी लोग अपना ट्वीट डिलीट कर दें। भविष्य में कभी मनोज तिवारी के ट्वीट का भरोसा न करें। मनोज तिवारी के अतिउत्साह की वजह से एक बार फिर से उनकी किरकिरी हो गई।
दरअसल अमित शाह ने पिछले दिनों कोरोना संक्रमण (COVID-19) के हल्के लक्षण दिखने के बाद कोविड टेस्ट कराया था। उन्होंने दो अगस्त को खुद ट्वीट कर बताया था कि वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिसके बाद उन्हें राजधानी दिल्ली से सटे गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
वनवासी सँस्कृति को लांछित और अपमानित करती एल्विन की आत्मकथा के लिए “साहित्य अकादमी” जैसा पुरुस्कार दिया गया।
क्याधर्मान्तरणअपनेआप में अधिकारोंका निकृष्टहनन नहीं है?
डॉ. अजयखेमरिया | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
वह एक कट्टर ईसाई और मिशनरीज में प्रमाणिक प्रशिक्षण प्राप्त अंग्रेज था। उसका मिशन घोषित रूप से भारत में वनवासियों की सँस्कृति को ईसाइयत के रंग में रँगकर औपनिवेशिक जड़ों को मजबूत करना था। अपने मिशन के लिए वह इस हद तक जुनूनी रहा कि उसने भारत मे वनवासियों से दो विवाह कर लिए। वह ईसाई मिशन के सबसे बड़े ब्रांड अम्बेसडर के रूप में काम कर रहा था। आजाद भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का उसे पूरा सरंक्षण और आशीर्वाद था। 1927 से 1964 तक इस शख्स ने भारत में वनवासी मुद्दे पर जो अलगाव के बीज बोए उन्हें आज भी हम राष्ट्रीय एकता, अखण्डता और सद्भभाव के मोर्चे पर भोगने के लिए विवश है। इस शख्स का नाम है-वेरियर एल्विन।
मिशनरी सेवाओं के लिये एल्विन को भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक अलंकरण पदम् भूषण से अलंकृत किया गया। वनवासी सँस्कृति को लांछित और अपमानित करती एल्विन की आत्मकथा के लिए “साहित्य अकादमी” जैसा पुरुस्कार दिया गया। उसे आसाम जैसे राज्य का गवर्नर बनाया जाता है। वह भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जनजातीय सलाहकार के रूप में काम करता है। देश मे वनवासी कल्याण के लिए बनी पहली समिति की कमान भी इसी अंग्रेज को सौंपी गई।
भारत विरोधी बीज बोने वाले को दिया बढ़ावा-
पूर्वोत्तर मेंभारत विरोधी गतिविधियों के बीज बोने वाले इस मिशनरी अध्येता को भारत की सरकार ने जीवन भर सिर माथे पर रखा। उसके खुरापाती और लक्ष्य केंद्रित अध्ययन को जनजातीय समाज के तथ्य बनाकर सुस्थापित करने से हमारे बुद्धिजीवी और वामपंथी नही चूके। एल्विन जैसे पापियों के पाप को आज भी बौद्धिक एवं वाम राजनीतिक जगत में प्रतिष्ठित किया जाता रहा है। हकीकत यह है कि एल्विन ने भारत के जनजातीय समाज को उसकी मूल जड़ों से काटने का काम किया। “आदिवासी दिवस” और “मूल निवासी” जैसे अलगाव आधारित विचार असल में भारत की एकता एवं अखण्डता को तोड़ने के ईसाई षड्यंत्रों का हिस्सा है। इस सुगठित षड्यंत्र की शुरुआत अंग्रेजी राज के जमाने से ही शुरू हो गई थी। वाम और अंग्रेजी जीवनशैली में ढले नेहरू ने इस षडयंत्र को जानबूझकर न केवल अनदेखा किया, बल्कि उसे अपना खुला सरंक्षण भी दिया। यही कारण रहा कि 70 साल बाद भी धर्मांतरण और मिशनरीज के पाप क्षद्म सेक्युलरिज्म की आड़ में भी फलफूल रहे हैं।
प्रश्न यह है कि कोई बाहर से आया हुआ कथित मानवविज्ञानी कैसे भारत के हजारों साल के लोकजीवन का विशेषज्ञ बनकर भारत के निवासियों को ही हिन्दू धर्म से अलग साबित करता रहा और हमारी राजव्यवस्था उसकी बताई गई मनगढ़ंत थ्योरी को अधिमान्यता देती रहीं। कोई अन्य व्यक्ति अगर निजी जीवन में वनवासी महिलाओं के साथ एल्विन जैसी हरकत करता, तो क्या उसे पदम् विभूषण या साहित्य अकादमी जैसे सम्मान हासिल होते?
एल्विन ने मप्र के डिंडोरी जिले की एक 13 बर्षीय वनवासी बालिका कौशल्या के साथ विवाह किया, फिर उसे छोड़कर अन्य महिला लीला से विवाह कर लिया।कौशल्या जब 13 साल की थीं जब 37 साल के एल्विन ने उनसे विवाह किया। फिर कुछ समय तक खुद को वनवासियों का समर्पित अध्येता बताकर सत्ता प्रतिष्ठानों में स्थापित कर लिया। 102 साल की आयु में कोसी उर्फ कौशल्या की मृत्यु हुई तो उसकी शव यात्रा में गांव के वनवासी इसलिए शामिल नही हुए क्योंकि वह ईसाई हो चुकी थी। जाहिर है कौशल्या जो 14 वर्ष की उम्र में एल्विन के बच्चे की मां बन चुकी थी, को उसका समाज अपने से अलग मानता था। जबकि एल्विन को प्रतिष्ठित करने वाले तर्क देते है कि उसने हिन्दू धर्म स्वीकार कर लिया था। एल्विन ने कोसी को छोड़कर लीला नामक दूसरी महिला से विवाह कर कोसी को उसके हाल पर छोड़ दिया। फिर नगालैंड मिजोरम, अरूणाचल, आसाम सहित सभी सात राज्यों में मिशनरीज के एजेंट के रूप में वनवासियों को हिन्दू आस्था और विश्वास से अलग करने का जमीनी काम किया। उनकी परम्पराओं औऱ जनश्रुति को अपनी बौद्धिक क्षमता से खण्डित कर उन्हें ईसाई मत में भरोसे के लिए तैयार करने में एल्विन जैसे लोग अग्रणी रहे।
नेहरू के नवरत्नों में शुमार होने के कारण एल्विन की विश्वसनीयता भी राजव्यवस्था में बड़ी मजबूत थी। वह नेहरू का दोस्त भी था। असल मे वेरियर एल्विन कहने भर को मानवविज्ञानी था, उसका उद्देश्य भारत की असली पहचान और सांस्कृतिक मानबिन्दुओं को शातिराना ढंग से खत्म करना था। भारत सरकार की आधिकारिक बेबसाइट “अभिलेख पटल” पर नागालैंड को लेकर एक दस्तावेज उपलब्ध है, जिसमें नगालैंड साधुओं से मुक्त होने वाला पहला प्रदेश बना शीर्षक के साथ यह बताया गया है कि कैसे इस राज्य से हिन्दू साधूओं को खदेड़ कर ईसाई प्रचारकों के लिए जगह बनाई गई है। एल्विन यहां इस पाप का मुख्य किरदार है। उस समय के साधु समाज के सचिव स्वामी आनंद भारत के अनुसार, “नेहरू और एल्विन के मध्य यह सहमति बनी थी कि आदिवासी समाज को उसकी मौलिकता के साथ जीवित रखने के लिए पूर्वोत्तर से साधु सन्यासियों को प्रतिबंधित किया जाना जरूरी है।” इसे नेहरू और एल्विन ने पंचशील का नाम दिया था। इसके तहत पांच कार्य प्रस्तावित थे।वनवासियों में प्रचलित जनश्रुतियों को हिन्दू धर्म की कुप्रथाओं के रूप में प्रस्तुत करना, हिन्दूओं को जड़ो से काटना इसमे प्रमुख आयाम था। एल्विन ने अपनी पुस्तक “मिथ्स ऑफ मिडिल इंडिया” में मध्यप्रदेश के वनवासियों की शैव परम्परा को मिथक बताकर प्रचारित किया। “बिच क्राफ्ट एन्ड मैजिक” किताब में तंत्र विद्या को चुड़ैल बताया गया। यानी जिन परम्पराओं औऱ जनश्रुतियों को वनवासी हजारों साल से जीते आ रहे थे, उन्हें खण्डित कर एक अलगाव की जमीन निर्मित करने का जनक आसाम का गवर्नर औऱ प्रधानमंत्री नेहरू का मित्र सलाहकार बेख़ौफ़ होकर करता रहा। नतीजतन आज पूर्वोत्तर की बदली हुई जनांनकीय सबके सामने है।मप्र,छत्तीसगढ़, ओडिसा, झारखंड के वनांचल में मिशनरीज की गहरी जड़ों को हमें नेहरुयुगीन षड़यंत्र के साथ ही पकड़ने की आवश्यकता है।
तथ्य यह है कि कांग्रेस के एकछत्र शासन ने इन षडयंत्र के विरुद्ध उठने वाली आवाजों को सदैव दबाकर रखा, क्योंकि जब राजव्यवस्था एल्विन जैसे लोगों को गवर्नर बनाती रही, उन्हें पद्म पुरस्कार देती रही, तब इस आवाज को सुनने वाला कौन हो सकता था? इस राज्य पोषित षडयंत्र की जड़े आज भी इतनी गहरी है कि हमारे लिए इनसे मुकाबला करना एक युद्ध की तरह है। आज भी नेहरू के मानस पुत्र व्यवस्था में जमे हुए है। स्मरण ही होगा कि डॉ विनायक सेन को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माओवादी नक्सलियों के समर्थन के आरोप में कारावास की सजा सुनाई थी। तब इस मुद्दे पर भारत मे कितना हो हल्ला हुआ था। तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी से लेकर जिहादी एकेडेमिक्स की पूरी फ़ौज मातमपुर्सी पर उतर आई थी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर छत्तीसगढ़ की सरकार और हाईकोर्ट को खलनायक की तरह प्रचारित किया गया। बाद में डॉ विनायक सेन को सोनिया गांधी की सलाहकार मण्डली में भी शामिल किया गया। समझनाहोगाकिभारतमेंमूलनिवासीयाबाहरीकाप्रश्न वनवासियोंकोलेकरएकगढ़ागयाषड्यंत्रहै, इसकीजड़ेंकरीबसौ सालसेभीपुरानीहैऔरदुर्भाग्यसेभारतमेएकबड़ातबकाइस षड्यन्त्र मेंसाझीदाररहाहै। एकतरफमानवाधिकारऔऱअन्तःकरण की आजादीकीबातेंहोती हैं, दूसरीतरफकरुणाऔऱसेवाकेनामपरधर्मांतरण। क्याधर्मान्तरणअपनेआप में इनअधिकारोंका निकृष्टहनन नहीं है? आदिवासीदिवसकेसंदर्भमेंहमेंइसषड्यंत्रकोभीबारीकीसेसमझनेकीजरूरतहै।
भाजपा के कई विधायक चार्टर प्लेन से पहुँचे पोरबंदर।
रिसॉर्ट में रुकेंगे सभी विधायक, चरम पर सियासी ड्रामा।
न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
राजस्थान में कांग्रेस के बाद अब भाजपा का तनाव बढ़ता नज़र आ रहा है। राजनीतिक उठा-पटक में विधायकों को बचाने के लिए कांग्रेस को नाकों चने चबाने पड़े। अब वही हाल भाजपा का होता दिख रहा है। ख़बर है कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ विधायक गुजरात चले गए हैं।
राजस्थान में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय जनता पार्टी के दर्जन भर विधायक गुजरात चले गए हैं। इस बात को लेकर सियासी गलियारे में चर्चा गर्म है। क़यास लगाया जा रहा है कि भाजपा अपने विधायकों की संख्या को बैलेंस रखने के लिए ऐसा कर रही है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, छह विधायक शनिवार को चार्टर विमान से पोरबंदर के लिए रवाना हुए। हालांकि पार्टी के नेताओं ने अपने विधायकों को किसी एक जगह जगह रखकर ‘बाड़ेबंदी’ करने जैसी किसी स्थिति से इनकार किया है। ग़ौरतलब है कि इससे पहले भाजपा के 12 से अधिक विधायक शुक्रवार को गुजरात गए थे।
हवाई अड्डे के अधिकारियों ने बताया कि छह यात्रियों को लेकर एक चार्टर विमान शनिवार को गुजरात में पोरबंदर के लिए रवाना हुआ। विमान में भाजपा विधायकों निर्मल कुमावत, गोपीचंद मीणा, जब्बार सिंह सांखला, धर्मेंद्र मोची और गुरदीप शाहपीनी के होने की सूचना है।
भाजपा सूत्रों का कहना है कि सभी विधायक एक रिसॉर्ट में रुकेंगे। राजस्थान का सियासी ड्रामा ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा है।
झारखण्ड में एक बड़ा विमान हादसा होते-होते बचा। एयर एशिया विमान उड़ान भरते समय एक पक्षी से टकरा गया। हालाँकि सभी यात्री सुरक्षित हैं। एक ही दिन पहले केरल के विमान हादसे के बाद इस घटना ने एयरपोर्ट के अधिकारियों की नींद उड़ा दी।
रांची से मुंबई जाने वाली एयर एशिया विमान (i5-632) से टेक-ऑफ के दौरान शनिवार को पक्षी टकरा गया। आनन-फ़ानन में मुस्तैद अधिकारियों ने जायज़ा लिया लेकिन किसी भी तरह अप्रिय घटना नहीं घटी। एयरपोर्ट के अधिकारी ने बताया कि मुंबई जा रही एयर एशिया फ्लाइट (i5-632) रांची एयरपोर्ट पर टेक ऑफ के वक्त पक्षी से टकरा गई। किसी भी यात्री को तकलीफ़ नहीं हुई है।
यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब एक दिन पहले ही केरल के कोझिकोड में एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान हादसे का शिकार हो गया, जिसमें पायलट सहित कम से कम 18 यात्रियों की मौत हो गई। दुबई से आ रहा यह विमान रनवे को पार करता हुआ खाई में जा गिरा और इसके दो टुकड़े हो गए।
फिलहाल विमान का निरीक्षण किया जा रहा है। परिचालन के लिए विमान को मंजूरी मिलने के बाद उड़ान को रवाना होना है। एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि एयर एशिया इण्डिया मेहमानों और चालक दल की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है और इस देरी के कारण होने वाली असुविधा पर खेद व्यक्त करता है।