29 C
Mumbai
Thursday, September 10, 2026
Home Blog Page 84

पुणे में बलात्कार का आरोपी ट्रक चालक जलगांव से धराया

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
लोगों के घरों में काम करनेवाली एक महिला काो कोयते से धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में पिंपरी चिंचवड़ की तलेगांव दाभाड़े पुलिस ने एक ट्रक ड्राइवर को गिरफ्ता किया है. वारदात के बाद नागपुर भाग रहे आरोपी ट्रक ड्राइवर काे तलेगांव दाभाड़े पुलिस ने जलगांव से गिरफ्तार किया। 4 अगस्त काे दिनदहाड़े दाेपहर 3 बजे एक्सप्रेस वे पर गहूंजे गांव के ब्रिज के नीचे यह घटना घटी थी।
गिरफ्तार ट्रक चालक का नाम करमवीर गुलाबराम जैसवार (30, मानकाेली फाटा, दिवागांव, तहसील भिवंडी, जिला ठाणे, मूल निवासी बिसनपुर, तहसील किराकत, जिला जाैनपुर, उत्तर प्रदेश) है। जलगांव से हिरासत में लेकर पिंपरी चिंचवड़ लाने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया जहां उसे 25 अगस्त तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया गया। आराेपी ने साेचा था कि लाेकलाज के कारण यह मामला पुलिस तक नहीं पहुंचेगाऔर वह बचकर निकल जायेगा, लेकिन तलेगांव पुलिस ने जलगांव तक पीछा कर उसे सलाखाें के पीछे पहुंचाकर साबित कर दिया कि कानून के हाथ लंबे हाेते हैं।

तलेगांव दाभाड़े पुलिस थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अमरनाथ वाघमोड़े ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि, 4 अगस्त की दोपहर तीन बजे के करीब एक युवती पुणे-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर किवले के पास गहुंजे ब्रिज पर से जा रही थी। उसे अकेला देखकर ट्रक चालक करमवीर ने काेयते से धमकाते हुए वह उस पर झपट पड़ा। उसने कोयते से पीड़िता के कपड़े भी फाड़ दिये और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बारे में तलेगांव दाभाड़े पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। चूंकि आराेपी के बारे में काेई जानकारी नहीं थी, इसलिए पुलिस ने शुरुआत में पास की एक कंस्ट्र्नशन साइट पर काम करने वालाें, अन्य राज्याें से आये मजदूराें तथा शातिर अपराधियाें की जानकारी जुटाई, लेकिन काेई सुराग नहीं मिला।

इसके बाद तलेगांव पुलिस ने स्मार्ट तरीके से मामले की जांच शुरू की। वारदात के समय किवले फ्लाईओवर से गुजर चुके 30-32 ट्रकाें की जानकारी लेने के बाद उनमें से एक ट्रक ड्राइवर का हुलिया पीड़ित लड़की द्वारा बताई गई जानकारी के अनुसार निकला। पुलिस ने उस ट्रक की जानकारी हासिल कर संबंधित ट्रक के मालिक से पूछताछ की तो पता चला उसने हाल ही में काम छाेड़ दिया है और वह दूसरी कंपनी के ट्रक पर काम कर रहा है। पुलिस ने दूसरी कंपनी के ट्रक मालिक से संपर्क कर आराेपी की पूरी जानकारी हासिल की, तब करमवीर के नागपुर की ओर जाने की जानकारी मिली। इसके बाद जलगांव जिले की मुक्ताईनगर पुलिस स्टेशन की सीमा से उसे दबाेच लिया गया। पूछताछ में करमवीर ने अपना अपराध कबूल लिया। इस कार्रवाई को पुलिस निरीक्षक शहाजी पवार, सहायक पुलिस निरीक्षक कुंदा गावड़े, पुलिसकर्मी अतीश जाधव, सतीश मिसाल, राम बहिरट आदि की टीम ने अंजाम दिया।

महाराष्ट्र की जेलों में 1478 कैदी कोरोना संक्रमित

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

जेल प्रशासन से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र की 27 जेलों में कुल 1478 कैदी और जेलकर्मी संक्रमित पाए गए हैं। जेल विभाग के अनुसार अब तक कुल 1166 कैदियों और 312 जेलकर्मियों में संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनमें से 6 कैदियों की मौत हो चुकी है। जहां तक कैदियों की बात है तो नागपुर जेल संक्रमण के 219 मामलों के साथ सर्वाधिक प्रभावित है। उसके बाद पुणे के येरवडा जेल में कुल 190 कैदी संक्रमित पाए गए हैं।

मुंबई की आर्थर रोड जेल में 182 और सांगली जेल में 145 मामले सामने आए हैं। नागपुर में अब तक 62 जेलकर्मी, मुंबई में 46, ठाणे में 35, औरंगाबाद में 34, कल्याण में 31 और येरवडा जेल में 26 जेलकर्मी महामारी कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। जेल प्रशासन के अनुसार 1166 कैदियों में से 848 कैदी और 312 जेलकर्मियों में से 272 कर्मी ठीक हो चुके हैं। राज्य में महामारी के संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए अब तक कुल 10 हजार 536 कैदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। फिलहाल राज्य की विभिन्न जेलों में कुल 26 हजार 408 कैदी बंद हैं।

लखनऊ में कबीर मठ के प्रशासनिक अधिकारी धीरेन्द्र दास पर फायरिंग

शादी की बुकिंग कराने आए थे हमलावर

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ एक बार फिर से दिनदहाड़े फायरिंग से दहल गई। सोमावर की सुबह लगभग 10:30 बजे डालीगंज में करीब मठ के प्रशासनिक अधिकारी धीरेंद्र दास को कुछ लोगों ने गोली मार दी। इस फायरिंग में धीरेन्द्र दास गंभीर रूप से घायल हो गए. घायल अवस्था में धीरेंद्र को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है।
माना जा रहा है कि कबीर मठ में शादी की बुकिंग कराने आए लोगों ने उनको गोली मारी है। कबीर मठ के प्रशासनिक अधिकारी धीरेंद्र दास को बारात घर बुकिंग के बहाने आए बदमाशों ने गोली मारी। धीरेंद्र दास सुरक्षित हैं। 2015 में भी बारात घर के इसी प्रशासनिक अधिकारी पर गोली चली थी। जांच में अन्दरूनी मामला निकला कर सामने आया था।
एडीशनल डीसीपी राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कबीर मठ के प्रशासनिक अधिकारी धीरेंद्र नाथ दास जी बरात घर की बुकिंग का काम भी करते हैं। आज कोई बुकिंग कराने वाले ग्राहक से कुछ विवाद की स्थिति में उनको गोली लगी है। उनका ट्रामा सेंटर में इलाज कराया जा रहा है, जहां पर उनकी स्थिति सुरक्षित बताई जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि हमले का कारण पता लगाया जा रहा है। जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हम लोग इस मामले की पड़ताल में लगे हुए हैं। वहां के सीसीटीवी फुटेज के साथ आसपास से भी जानकारी एकत्र की जा रही है।

शहीद राजगुरु जयंती: इस वजह से मां ने नाम रखा था शिवराम

सरदार भगतसिंह के साथ फांसी पर झूलनेवाले शहीद राजगुरू की जयंती आज

 

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

शहीद भगत सिंह के साथ फांसी की बराबर सजा पाने वाले शिवराम राजगुरू की आज जयंती है। हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएश में चंद्रशेखर आजाद के अलावा अगर कोई शानदार शूटर था तो वे शिवराम राजगुरु थे। शिवराम सावन महिने के सोमवार में पैदा हुए थे, इसलिए उनकी मां ने उनका नाम शिव के नाम पर रखा गया था। राजगुरू चंद्रशेखर आजाद के चहेते थे और भगत सिंह से वे चुहल करते थे।
जगतगुरू शंकराचार्य ने उन्हें व्रत रखने की आदत डाली और बाद में उन्होंने आरएसएस के संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने भी उनको शरण और अपना आशीर्वाद दिया। राजगुरू की मां की मौत के बाद पूरे घर की जिम्मेदारी उनके बड़े भाई दिनकर पर आ गई. उस समय राजगुरू छह साल के थे। दिनकर को पुणे के राजस्व विभाग में नौकरी मिल गई और वो शादी कर वहां चला गया। इसके बाद उनके कस्बे में शंकराचार्य आए और उन्हीं के पुरखों के द्वारा बनाए गए विष्णु मंदिर में रुके।
राजगुरू, शंकराचार्य से इतने प्रभावित हुए कि उनके भक्त बन गए। शंकराचार्य ने उन्हें शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए पांच दिनों का निर्जल व्रत रखने को कहा। राजगुरू को लोकमान्य तिलक ने उनके साहस और अंदाज से प्रभावित होकर माला पहनाई। उस समय राजगुरू कक्षा तीन में पढ़ते थे और लोकमान्य के भाषण से काफी प्रभावित हुए थे। उन्हें देखकर लोकमान्य ने कहा कि शिवराज जैसे साहसी बच्चों के होते हुए स्वराज का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।
शिवराम राजगुरू संस्कृत के ग्रंथ पढ़ने में मन लगाते थे लेकिन उनके भाई दिनकर ने उन्हें अंग्रेजी पर जोर दिया। शिवराम अपने भाई को साफ कहते थे कि उन्हें अंग्रेजी हुकुमत के लिए काम नहीं करना है तो वे अंग्रेजी भाषा क्यों सीखें। साल 1924 में उनकी परीक्षाओं के नतीजे आए और उनके अंग्रेजी भाषा में काफी कम अंक आए, जिस पर दिनकर ने उन्हें दो वाक्य अंग्रेजी में बोलने को कहा नहीं तो घर छोड़ने का आदेश दे दिया। शिवराम ने इसके बाद अपनी भाभी के पैर छूकर घर छोड़ने का फैसला लिया और अंग्रेजी भाषा का बहिष्कार किया।
राजगुरू उसके बाद मंदिरों के दर्शन करते हुए नासिक पहुंचे और वहां कुछ दिन संस्कृत पढ़ी। सावरगांवकर ने ही राजगुरू को आजाद और बाकी क्रांतिकारियों से मिलवाया। राजगुरू को उनके अंदाज और शूटिंग स्किल्स के लिए उन्हें टाइटल दिया गया दि मैन ऑफ एचएसआरए। सांडर्स की हत्या करने में भी राजगुरू शामिल थे, आजाद के मना करने के बाद भी वह पिस्तौल लेकर सेंट्रल असेम्बली चले गए और उसी पिस्तौल से फायर कर दिया। नतीजा यह हुआ कि इस कांड में तीनों को फांसी की सजा सुनाई गई।
सांडर्स की हत्या के बाद राजगुरू नागपुर, अमरावती जैसे इलाकों में छिपते रहे। इसी दौरान डॉ. केबी हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के एक कार्यकर्ता के घर पर राजगुरू के रुकने की व्यवस्था कराई। कहा तो यह भी जाता है कि सांडर्स के मामले की सुनवाई के दौरान अंग्रेज जज को वह संस्कृत भाषा में जवाब देते थे और भगत सिंह से कहते थे कि वे इसका अनुवाद करें।

राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन घोटाला : 65 साल की वृद्धा ने 14 महीने में जनी 8 बच्चियां

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नाम पर हो रहे घोटाले का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। यहां 65 वर्षीय एक महिला ने सरकारी कागजों के हिसाब से 14 महीने में आठ बच्चियों को जन्म दिया है। इस मामले के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। दरअसल, बच्चियों के पैदा होने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के गबन के लिए इस पूरे प्रकरण को अंजाम दिया गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, जिले के मुशहरी प्रखंड में सरकारी राशि के गबन के लिए बिचौलियों ने फर्जी दस्तावेजों को कार्यलायों में जमा किया, इसके अनुसार 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने महज 14 महीनों में आठ बच्चियों को जन्म दिया। मेडिकल साइंस के अनुसार, ऐसा होना असंभव है। हालांकि, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की आड़ लेकर इसे सच साबित कर दिया गया है। वहीं, मिशन के अधिकारी और बैंककर्मी इन दस्तावेजों के आधार पर महिला के खाते में रुपयों को भेजते रहे। वहीं, जिन महिलाओं के नाम पर इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार किया गया है, उन्हें इस बात की भनक तक नहीं है।
माना जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में मुशहरी पीएचसी के कई कर्मचारी भी जुड़े हुए हैं। मुशहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी उपेंद्र चौधरी ने इस संबंध में एफआईआर दर्ज करवाई है। उन्होंने कहा कि ये मामला अविश्वसनीय है। दस्तावेजों में दिखाया गया है कि 65 वर्ष की उम्र में लीला देवी ने 14 महीनों के भीतर आठ बच्चियों को जन्म दिया। वहीं, उनके खाते में पैसे भी भेजे गए।
मुजफ्फपुर जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह ने मामले को लेकर कहा, जननी सुरक्षा योजना राशि को एक वर्ष में कई बार कुछ वृद्ध महिलाओं के बैंक खाते में जमा किया गया। हमने 4 सदस्यीय समिति बनाई है जो 2 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। अगर ये मामला सच है, तो हम मामले में प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई करेंगे।

नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा

  • भाजपा की घोषणा

  •  बिहार में एनडीए की सरकार बनना तय

  •  फिर सरकार बना कर करेंगे अच्छा काम : नड्डा

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
जहां एक ओर देश में कोरोना का प्रकोप छाया हुआ है, वहीं बिहार विधान चुनाव का शबाब भी चरम पर है। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति ने बिहार विधानसभा का चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ने पर मुहर लगा दी। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार में एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही विधानसभा चुनाव लड़ेगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार में एनडीए की सरकार बननी तय है।
नड्डा ने कहा कि बिहार को बदलने में हमने कड़ी मेहनत की है। इसीलिए तो बिहार की जनता को बीजेपी पर भरोसा है, एनडीए पर विश्वास है। हम फिर से सरकार बनाने में सफल होंगे। नड्डा प्रदेश कार्यसमिति के दूसरे दिन समापन सत्र को दिल्ली से ही वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विपक्ष की भी जमकर खबर ली और कहा कि अब तो वह कटाक्ष के लायक भी नहीं है।
आज का विपक्ष पूरी तरह अस्तित्वहीन हो चुका है। नड्डा ने कहा कि पार्टी सभी 243 विधानसभा सीटों पर समान रूप से काम करेगी। हम सर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि अपने सहयोगी दलों जदयू और लोजपा की जीत के लिए भी पसीना बहायेंगे। हम एक-एक सीट को चुनौती के रूप में लेंगे और उस पर जीत के लिए काम करेंगे।
नड्डा ने कोरोना से निपटने में बेहतर कार्य के लिए बिहार और केंद्र की सरकार की पीठ थपथपायी। कहा-पीएम ने समय पर लॉकडाउन का फैसला लिया। कोरोना में बिहार का कम भी प्रभावी रहा। नड्डा ने कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव को लेकर कई टास्क भी सौंपे। उन्होंने डोर टू डोर कैंपेन और छोटी-छोटी बैठकों पर फाेकस करें।
चुनाव के पहले हर मतदाता तक पहुंचने का संकल्प भी दिलाया। कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के विकास कार्यों को लेकर कार्यकर्ता लोगों के बीच जायें। हर व्यक्ति तक पीएम मोदी के संदेश पहुंचाएं। बिहार के लिए पीएम ने जिस पैकेज का ऐलान किया था, उस पर गंभीरता से काम हुआ है। हमें इसकी जानकारी आम लोगों तक पहुंचानी है।

MP: Stone Crusher उद्योग से ख़तरे में मन्दिरों और ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
मध्य प्रदेश के दतिया के भाण्डेर नगर में इन दिनों क्रशर प्लांट उद्योग बहुत अच्छी तरह से फल फूल रहा है। शहर के चिरगांव रोड एवं सरसई रोड पर दर्जनों क्रेसर प्लांट लगे हुए हैं। जिनके कारण प्लांट के इर्दगिर्द स्थित गॉवों के लोग सदैव दहशत के साये में जीवन यापन कर रहे हैं। क्योंकि प्लांट पर बारूदी सुरंग के द्वारा स्टोन ब्लास्टिंग की जाती है। जिससे आसपास के घर मकान मंदिर मस्जिद एवं अन्य एतिहासिक स्मारकों की दीवारें हिल जाती है। साथ ही क्रेसर प्लांट से उड़ने बाली स्टोन डस्ट आसपास के किसानों की कृषि भूमि को भी बंजर बना रही है।
क्रेसर प्लांट की बारूदी ब्लास्टिंग के दुष्प्रभाव क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थल एवं प्राचीन स्मारकों पर देखने को मिला है। अभी हाल ही में दो दिवस पूर्व केसरी सरकार मंदिर के पास स्थित क्रेसर प्लांट के ब्लास्टिंग से मंदिर के निर्माणाधीन श्रीराम मंदिर की दीवारों के टाइल्स उखड़ गये या चटक गये। साथ ही 10 किलो ग्राम से 20 किलोग्राम तक वजन के पत्थर हवा में उछल कर जमीन पर गिरते हैं। दुर्भाग्य से यदि वहां कोई व्यक्ति फंस जाये तो उसकी मौत निश्चित है। इसलिये प्रशासन से अनुरोध है कि इस प्रकार की ब्लास्टिंग पर रोक लगाई जाये।
केसरी सरकार मंदिर के अलावा प्रभावित होने वाले धार्मिक स्थलों एवं प्राचीन स्मारकों मे प्रमुखतः रिछारी सरकार मंदिर, पोला पहाड़ स्थित हनुमान मंदिर, मिश्र जी की बगिया बाले हनुमान जी,चित्रगुप्त मंदिर, लक्षमण मंदिर,सेवला साहब, बड़ी ईदगाह,एवं अठखम्वा जो पौराणिक महत्व का एवं नगर की प्राचीन धरोहर है। एक प्रमुख एतिहासिक स्मारक है। यह सब नष्ट होने के कगार पर है।
क्रेसर प्लांट के आसपास के ग्रामीणों से जब इस संदर्भ में चर्चा की गई तो सालोन के ही निवासी बताते हैं कि ब्लास्टिंग अक्सर रात को होती है। कभी कभी दिन में भी हो जाती है। हम लोग हमेशा भययुक्त जीवन यापन कर रहे हैं। डर लगता है कि कहीं ब्लास्टिंग के समय पत्थर जो हवा मे तैर रहा होता है कहीं मेरे ऊपर न गिर जाये। कई बार तो ब्लास्टिंग के समय हम लोग खेतों में भी होते हैं। तब हमारे इर्दगिर्द भी पत्थर गिर जाते हैं। लेकिन अब भय के साथ जीने की आदत पड़ गई है। उपरोक्त ग्रामीणों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि ब्लास्टिंग प्रथा पर तत्काल रोक लगाई जाये। ताकि जनजीवन एवं प्राचीन धरोहर, इनकी जद मे आने बाले समस्त धार्मिक स्थल,प्राचीन स्मारक आदि सुरक्षित रहें।

सुशांत मामले में सीबीआई ने सिद्धार्थ, दीपेश और नीरज से तीन घंटे की सख्त पूछताछ, बयानों में भिन्नता से तीनों संदेह के घेरे में

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
सुशांत सिंह केस में सीबीआई जांच का रविवार को तीसरा दिन है। रविवार को सीबीआई की टीम सुशांत के फ्लैट पर उनके दोस्त सिद्धार्थ पिठानी, हेल्पर दीपेश और कुक नीरज सिंह को लेकर पहुंची। यहां करीब 3 घंटे तक तीनों लोगों से अलग-अलग 13 और 14 जून की घटना के बारे में सवाल किए गए। सूत्रों का कहना है कि क्राइम सीन सीक्वेंस, लाश उतारने और 13-14 जून की घटना के बारे में तीनों के बयान विरोधाभासी हैं।
सीबीआई की एक टीम रविवारको उस वाटर स्टोन रिसॉर्ट में भी गई, जहां सुशांत ने 2 महीने गुजारे थे। टीम रिसॉर्ट में 2 घंटे रुकी। स्टाफ से यह पता किया कि जब सुशांत वहां रुके थे, तो उनका व्यवहार कैसा था। इससे पहले सीबीआई की टीम ने सुशांत के फ्लैट ओनर संजय लालवानी से पूछताछ की, इसके बाद छत पर जाकर फिर एक बार क्राइम सीन रीक्रिएट किया।
– सीबीआई ने इन सवालों पर तीनों को घेरा
सूत्रों के मुताबिक, तीनों ने बेड और पंखे की ऊंचाई को लेकर अलग-अलग बयान दिया। सुशांत की लाश नीचे कैसे उतारी गई, इस बारे में नीरज का जवाब बाकियों से अलग है। नीरज ने टीम को ये भी बताया कि 13 जून की रात सुशांत को एक खास सिगरेट नहीं मिली। दीपेश जो कि रिया का सबसे करीबी बताया जा रहा है, वह सीबीआई को गुमराह कर रहा है। सिद्धार्थ और नीरज ने क्राइम सीन सीक्वेंस के बारे में पूछे गए सवालों के अलग जवाब दिए। 13 और 14 जून की घटनाओं के बारे में सिद्धार्थ और नीरज ने अलग-अलग जानकारियां दीं। 8 जून की रात सुशांत और रिया के बीच क्या हुआ था, इस पर भी सिद्धार्थ का बयान अलग।
सीबीआई ने शनिवार को सुशांत के फ्लैट पर घटना को री-क्रिएट किया था। साथ ही सुशांत की ऑटोप्सी करने वाले कूपर अस्पताल के 3 डॉक्टर्स से सवाल-जवाब किए। सूत्रों के मुताबिक डॉक्टर्स ने बताया, ‘मुंबई पुलिस के कहने पर सुशांत का पोस्टमॉर्टम बिना कोरोना टेस्ट किए जल्दबाजी में करवाया था। रात में ही ऑटोप्सी की गई थी।’
सुशांत के पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने शनिवार को खुलासा किया, ‘सुशांत के घर की लाइट आमतौर पर सुबह 4 बजे तक जली रहती थी। लेकिन, 13 जून की रात 10 बजे से 11 के बीच बंद हो गई थी। उस रात कोई पार्टी नहीं हुई थी। इसमें कुछ गड़बड़ लगती है।’

लॉकडाउन के चलते भूखे मरने की कगार पर डब्बावाले

  • सुब्रमण्यन स्वामी ने की सरकार से मदद की अपील।
  • पाँच हज़ार डब्बावालों की हालत ख़राब।
  • पाँच हज़ार डब्बावाले क़रीब दो लाख लोगों को पहुँचाते हैं ख़ाना।

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क 

डिलीवरी सिस्टम के लिए दुनिया भर में मशहूर मुंबई के 5000 डब्बावालों के सितारे लॉकडाउन के बाद गर्दिश में हैं और अब उनके सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। खाने के डिब्बों की डिलीवरी का काम बंद हो जाने से डब्बावालों की आर्थिक स्थिति बिल्कुल जर्जर हो चुकी है और यह संकट दिन ब दिन गहराता जा रहा है। हालांकि मिशन बीगिन अगेन के तहत कामकाज अब धीरे-धीरे खुल रहा है, लेकिन डब्बावालों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि लोकल ट्रेनें अभी भी बंद है।
डब्बावालों को संकट से बचाने के लिए बीजेपी से राज्यसभा सांसद और वकील सुब्रमण्यन स्वामी ने ट्वीट करके डब्बा वालों के पक्ष में अपील की है। स्वामी ने अपने ट्वीट में पोस्ट किया कि डब्बावाले अपने में अद्वितीय भारतीय उद्यम हैं और इन लोगों ने भारत के विकास में योगदान किया है। डब्बा वालों ने मुंबई की काफी सेवा की है और ऑफिस में काम करने वाले लोगों को घर का बना खाना पहुंचाया है। महाराष्ट्र की सरकार और भारतीय जनता पार्टी को आज उन्हें भूखे मरने से बचाना चाहिए।
गौरतलब है कि काम करने में उनकी दक्षता के चलते ही हमेशा चर्चा में रहने वाले 5000 डब्बावाले रोजाना करीब 2 लाख लोगों को खाना पहुंचाते हैं। इनके बारे में कहा जाता है कि एक बार व्यक्ति अपने आफिस भले ही लेट पहुंचे, लेकिन ये डब्बावाले कभी लेट नहीं होते। मुंबई डब्बावाला एसोसिएशन एक ‘रोटी बैंक’ को भी चलाने मदद करता है, जिससे अस्पतालों में इलाज कराने के लिए आए गरीब मरीजों के परिजनों और सड़कों पर गुजारा करने वालों को मुफ्त में भोजन दिया जाता है।
जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, इन डब्बावालों का काम बंद है। ज्यादातर डब्बे वाले पुणे के नजदीक के ग्रामीण इलाकों के रहने वाले हैं और वापस गांव घरो की तरफ चले गए हैं। वहां भी खेती से उनका गुजारा मुश्किल से हो रहा है, जिसके बाद वे लगातार अलग-अलग प्लेटफार्म से मदद के लिए अपील कर रहे हैं और अब बीजेपी के नेता स्वामी ने डब्बा वालों की मदद की बात कही है।
स्वामी की पहल का मुंबई डब्बावाला एसोसिएशन के प्रेसीडेंट सुभाष तलेकर का स्वागत करते कहा कि 130 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि हमारे लोग इतनी विषम आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अभी कुछ दिनों पहले ही महाराष्ट्र सरकार ने असंगठित क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को 5000 रुपये का आर्थिक सहायता देने की बात कही थी, पर हमारे बारे में सरकार ने पता नहीं अब तक कोई फैसला क्यों नहीं लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार जल्द उनकी भी सुधि लेगी।

जानिए, कब मिल पाएगी सीरम की कोरोना वैक्सीन

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
भारत में कोरोना वायरस वैक्‍सीन की रेस में सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) सबसे आगे है। वह ऑक्‍सफर्ड यूनिवर्सिटी की डेवलप की गई वैक्‍सीन का ट्रायल और प्रॉडक्‍शन कर रही है। कंपनी को सरकार से वैक्‍सीन के उत्‍पादन की मंजूरी मिली है लेकिन केवल भविष्‍य में इस्‍तेमाल के लिए। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया था कि SII की वैक्‍सीन COVISHIELD 73 दिन के भीतर बाजार में उपलब्‍ध होगी। मगर कंपनी का कहना है कि यह केवल कयास हैं। वैक्‍सीन बाजार में तभी आएगी जब ट्रायल सफल हों और रेगुलेटरी अप्रूवल मिल जाए।
सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने एक बयान में कहा, “सरकार ने अभी हमें केवल भविष्‍य में इस्‍तेमाल के लिए वैक्‍सीन के उत्‍पादन और भंडारण की अनुमति दी है।” कंपनी ने साफ कहा कि COVISHIELD को तभी कॉमर्शियलाइज्‍ड किया जाएगा जब ट्रायल्‍स में इसे सफलता मिले और फिर रेगुलेटरी अप्रूवल्‍स मिल जाएं।
ऑक्‍सफर्ड-अस्‍त्राजेनेका की वैक्‍सीन का फेज-3 ट्रायल चल रहा है। कंपनी ने कहा कि एक बार वैक्‍सीन प्रतिरोधी और प्रभावी साबित हो जाए तो वह उसकी उपलब्‍धता की पुष्टि करेगी। कंपनी का टीका निम्न और मध्यम आय श्रेणी में आने वाले देशों (LMICs) में महज 3 डॉलर (करीब 225 रुपये) में उपलब्ध करवाया जाएगा।
‘नेचर’ जर्नल में छपी स्‍टडी के मुताबिक, बंदरों पर यह वैक्‍सीन पूरी तरह असरदार साबित हुई। उनमें कोविड-19 के प्रति इम्‍यूनिटी डेवलप हुई। इंसानों पर फेज 1 और 2 ट्रायल पूरा हो चुका है। भारत, ब्राजील समेत दुनिया के कई देशों में फेज 3 ट्रायल जारी है। 17 सेंटरों पर 1600 लोगों के बीच यह ट्रायल 22 अगस्त से शुरू हुआ है। हर सेंटर पर करीब 100 वालंटिअर हैं। नवंबर तक ट्रायल पूरा होने की उम्‍मीद है। नतीजे अच्‍छे रहे तो रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद वैक्‍सीन का लार्ज-स्‍केल प्रॉडक्‍शन शुरू होने में अगले साल की शुरुआत तक का वक्‍त लग सकता है।
केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि हमारी एक वैक्सीन कैंडिडेट क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में है। सरकार SII के अलावा कई फार्मा कंपनियों के संपर्क में है और ज्‍यादा से ज्‍यादा टीके हासिल करना चाहती है। अगर ICMR और भारत बायोटेक द्वारा विकसित की जा रही ‘कोवैक्सीन’ और जायडस कैडिला की ‘ZyCoV-D’ ट्रायल में सफल होती हैं, तो उनके ऑर्डर भी दिए जा सकते हैं।