कई बार कुछ हरकती लोगों द्वारा अफवाह फैलाने से कई प्रतिष्ठित लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है या फिर उन्हें स्वयं सामने आ कर उस अफवाह का खंडन करते हुए, वास्तविकता को सामने लाना पड़ता है. लेकिन अफवाह और वास्तविकता, इन दो घटना के बीच के काल में उस प्रतिष्ठित व्यक्ति से भावनात्मक रूप से जुड़े लोगों को जो कष्ट सहना पड़ता उसका अंदाजा इन हरकती लोगों को कभी नहीं हो सकता. ऐसे लोग गंभीर सजा के हकदार होने चाहिए.
हालिया वाकया बिहार के पटना से है, जहां मंगलवार को कुछ हरकत बाजों ने प्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा के कोरोना वायरस से निधन की अफवाह वायरल कर दी. इस अफवाह से शारदा सिन्हा के चहेतों में शोक और चिंता छा गई. इसके बाद सच्चाई बताने के लिए खुद शारदा सिन्हा को सामने आना पड़ा. उन्होंने विडियो संदेश जारी कर कहा कि, वे बीमार है और उनका इलाज चल रहा है और इसमें सुधार भी आ रहा है. उन्होंने लोगों से किसी भी अफवाह पर यकीन न करने की अपील भी की. उन्होंने कहा कि अपने चाहने वालों की दुआओं से वे जरूर स्वस्थ होकर उनके बीच आएंगी.
– जिसका हुआ निधन वह महिला दरोगा थी
दरअसल, रविवार को बिहार के मोतिहारी नगर थाना में पदस्थापित एक महिला दारोगा शारदा सिन्हा की कोरोना संक्रमण से पटना के एक अस्पताल में मौत हो गई थी. वे जहानाबाद जिले के बाजितपुर की रहने वाली थीं. लोक गायिका शारदा सिन्हा का भी पटना के ही अस्पताल में कोरोना का इलाज चल रहा है. इसके बाद किसी ने गायिका शारदा सिन्हा की मौत की अफवाह उड़ा दी, जो देखते-देखते वायरल हो गई. बात इतनी बढ़ी कि खुद शारदा सिन्हा को सामने आकर अपनी बात रखनी पड़ी.
– छठ गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं शारदा सिन्हा
लोकप्रिय लोक गायिका शारदा सिन्हा बिहार की रहने वाली हैं. वह हिन्दी, भोजपुरी और मैथिली समेत कई भाषाओं में गाना गा चुकी हैं. शारदा सिन्हा को छठ गीतों का पर्याय माना जाता है. उनके गाने काफी पसंद किए जाते हैं.
– अब तक कई हस्तियों को अपनी चपेट ले चुका है कोरोना
भारत में कोरोना महामारी बहुत तेजी से फैल रही है और कई लाख लोग इसके चपेट में आ चुके हैं. अगर जानी-मानी हस्तियों की बात की जाए तो शारदा सिन्हा के अलावा अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, किरण कुमार, एसपी बालासुब्रमण्यम सहित तमाम लोगों कोरोना का शिकार हो चुके हैं.
महाराष्ट्र के रायगढ़ के महड में मंगलवार को धराशाई हुई इमारत के मलबे से 18 घंटे बाद 5 साल के बच्चे को सही सलामत बाहर निकाला गया। बच्चे का नाम मोहम्मद बांगी है। फिलहाल, बच्चे की हालत ठीक है। उसे एहतियात के तौर पर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने बताया कि यह बच्चा एक पिलर के किनारे था। ऐसे में मलबा सीधे उस पर नहीं गिरा और वह सुरक्षित रहा।
अधिकारी ने यह भी बताया कि करीब 18 घंटे तक चारों तरफ से मलबे से घिरे रहने के बाद बच्चे का सुरक्षित रहना किसी करिश्मे से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के दौरान दो जवानों ने बच्चे को देखा और उसे बाहर निकाला। बच्चे के माता-पिता के बारे में अभी कुछ भी पता नहीं चला है। रायगढ़ में सोमवार शाम करीब 7 बजे के आसपास इमारत गिरी थी। तब से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा है। मंगलवार दोपहर 1 बजे मलबे में फंसे 5 साल के एक बच्चे को सही सलामत बाहर निकाला गया।
रायगढ़ जिला कलेक्टर निधि चौधरी ने बताया कि अब तक हादसे में 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 4 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं। इस घटना को लेकर रायगढ़ पुलिस ने 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें बिल्डिंग का मालिक भी शामिल है। मारे गए 5 लोगों में से एक ने हार्टअटैक के बाद हॉस्पिटल में दम तोड़ा है। उन्होंने कहा कि 16 लोग अभी भी फंसे हुए हैं।
बलिया में सोमवार रात मारे गए पत्रकार रतन सिंह के पिता विनोद सिंह ने कहा है कि जब तक मेरे बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार फेफना के तत्कालीन थानाध्यक्ष की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, वो अपने बेटे की अर्थी नहीं उठने देंगे.
बलिया में टीवी चैनल के पत्रकार रतन सिंह की हत्या के मामले में पिता ने फेफना के तत्कालीन थानाध्यक्ष (एसओ) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकार का शव घर पहुंचते ही वहां चीख-पुकार मच गई। पिता विनोद सिंह ने एसओ शशिमौलि पांडेय गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा जब तक उसको पकड़ा नहीं जाता वे बेटे की अर्थी उठने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि इस हत्याकांड के लिए सीधे तौर पर फेफना के एसओ जिम्मेदार हैं।
– मुख्यमंत्री ने की 10 लाख रुपए आर्थिक मदद की घोषणा
इससे पहले सुबह मुख्यमंत्री ने रतन सिंह के परिजनों को दस लाख रुपये आर्थिक मदद देने की घोषणा की थी। इसके बाद तय हुआ कि कृषक दुर्घटना बीमा के तहत 5 लाख की और मदद की जाएगी। वहीं जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पत्रकार रतन सिंह की पत्नी को एक महीने के अंदर स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर नौकरी दी जाएगी। बताया जा रहा है कि क्षेत्रीय विधायक और मंत्री उपेंद्र तिवारी ने फोन पर पत्रकार के पिता से बात की है।
इससे पहले सुबह रतन सिंह के पिता विनोद सिंह ने पुलिस की उस थ्योरी को झूठा करार दिया , जिसमें कहा जा रहा था कि यह आपसी विवाद में हत्या हुई है। आईजी ने बताया था कि जमीनी विवाद में एक पक्ष ने भूसा रखा था , तो दूसरे पक्ष ने उसी जमीन पर पुवाल लाकर रख दिया। इसी विवाद के बाद गोली चली और पत्रकार रतन सिंह की मौत हो गई।
पिता विनोद सिंह ने पत्रकारों से दावा किया है कि जिस जमीन के बारे में पुलिस बता रही है, वहां जाकर कोई भी देख ले कि पुवाल और भूसा रखा गया है या नहीं। उन्होंने कहा पुलिस पूरी तरह से झूठ बोल रही है। विनोद सिंह का कहना है कि यह आपसी रंजिश में हत्या नहीं है। मामले की सही जांच होनी चाहिए। उन्होंने स्थानीय पुलिस पर कई आरोप भी लगाए, उन्होंने कहा कि लोकल पुलिस बड़े अधिकारियों को सही जानकारी नहींहै।
– सोमवार को हुई थी गोली मार कर हत्या
सोमवार की रात करीब नौ बजे पत्रकार रतन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हमलावरों ने रतन को दौड़ाकर गोली मारी और वारदात को अंजाम देने के बाद भाग निकले. बताया जा रहा है कि पत्रकार रतन सिंह सोमवार को पूरे दिन जिला मुख्यालय बलिया में रहने के बाद शाम को अपने गांव चले गए. शाम को गांव में ही किसी के यहां बैठने के बाद पैदल ही वापस घर जा रहे थे।तभी घर कुछ लोगों ने उनपर फायरिंग कर दी। ग्रामीणों के मुताबिक जान बचाने के लिए रतन ग्राम प्रधान में घर में घुस गए. लेकिन हमलावरों ने पीछा नहीं छोड़ा और उन्हें तीन गोलियां मार दीं।इससे रतन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
मध्य रेल के महाप्रबंधक श्री संजीव मित्तल ने दिनांक 25.8.2020 को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई में मेडी-बॉट जीवक का ई उद्घाटन किया।इस अवसर पर सभी प्रधान विभागाध्यक्ष और पांचो मंडलों के मंडल रेल प्रबंधक डिजिटल माध्यम से उपस्थित थे।
मध्य रेल की परेल वर्कशॉप ने शुरू से ही कोविड 19 के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व किया है। इस वर्कशॉप ने कोविड योद्धाओं की सहायता के लिए मास्क, पीपीई किट ,कवरआल, सेनेटाइजर, आॅक्सीजन ट्राॅली का निर्माण और प्रदान किया है तथा रेलवे कोच को कोविड आइसोलेशन कोच में भी बदलने का कार्य भी किया है। श्री संजीव मित्तल, महाप्रबंधक, मध्य रेल के नेतृत्व में कोविड योद्धाओं को बेहतर सुविधाएँ और प्रेरणा प्रदान करने के अपने प्रयास में, इस कारखाने ने वर्तमान कोविड 19 महामारी में उपयोग के लिए मेडिकल रोबोट को डिजाइन और संकल्पित किया है।
श्री ए.के. गुप्ता, प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर एवं श्री बी.एम. अग्रवाल मुख्य कारखाना इंजीनियर के मार्गदर्शन में श्री विवेक आचार्य , मुख्य कारखाना प्रबंधक , परेल वर्कशॉप की टीम ने इसको डिजाइन किया है। यह COVID 19 रोगियों की देखभाल के लिए बनाया गया है और COVID19 रोगियों के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के संपर्क को कम करेगा। जीवक, रिमोट-नियंत्रित रोवर भी मरीजों के बेड पर जाने के लिए एक चिह्नित लाइन का अनुसरण कर सकता है। यह मरीजों की देखभाल और रक्तचाप की निगरानी, ऑक्सीजन संतृप्ति स्तर, शरीर के तापमान आदि से संबंधित विभिन्न गतिविधियों को करने के लिए वर्चुअल हेल्थकेयर कार्यकर्ता के रूप में काम करता है।
जीवक में रोगी का दोतरफा संचार और वीडियो कवरेज होता है। डॉक्टर रोगी से बात कर सकते हैं और रोगी को स्क्रीन पर देखकर एक आभासी जाँच कर सकते हैं। इसमे इनबिल्ट डिवाइस है जो रोगी के तापमान, रक्तचाप, हृदय गति और ऑक्सीजन के स्तर की निगरानी करता है। इन सभी मापदंडों को डॉक्टर अपने चैम्बर में बैठकर जांच कर सकते हैं। रोगी की आभासी जांच से डॉक्टर और पैरामेडिक स्टाफ के संपर्क में काफी कमी आएगी। मरीज को नियमित दवा देने के लिए जीवक में एक दवा का डिब्बा भी है। एक बार जब पूरी जाँच हो जाती है और रोगी को दवा दी जाती है, तो जीवक को कीटाणुशोधन के लिए उसके डेक पर वापस बुलाया जाएगा और फिर अगले रोगी के लिए यह अपने आप तैयार हो जाएगा।
ड्रोनस्टार्क और बीजीएन मेडेक्स (इंडिया) लिमिटेड प्राइवेट के सहयोग से परेल वर्कशॉप ने इस जीवक की अवधारणा और डिजाइन किया है। परेल वर्कशॉप ने मेडी -बोट जीवक भारत रत्न डॉ बाबासाहेब आंबेडकर मेमोरियल रेलवे अस्पताल भायखला को सुपुर्द कर दिया है,जिसका लाभ इस अस्पताल के डाक्टर एवं मरीजों को भली-भांति मिल रहा है।
मध्य रेल, मुंबई मंडल और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने व्यक्तिगत स्वच्छता को सक्षम करने के लिए एक संयुक्त पहल के तहत दिनांक 25.8.2020 को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई में फुट ऑपरेटेड हैंडवाश वेंडिंग मशीन (FHVM) स्थापित की है। यह मशीन कोविड 19 महामारी के दौरान यात्रियों के लिए संपर्क रहित लिक्विड हैंडवॉश और पानी को अलग अलग डिसपैंस करती है।
सोशल डिस्टेसिंग को ध्यान में रखते हुए, एक मशीन में 4 स्टेशन होते हैं, जिसमें 4 व्यक्ति एक साथ एक समय में अपने हाथ धो सकते हैं। इस मशीन को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई के प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर लगाया गया है।
– नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर कोविड 19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में मध्य रेल, मुंबई मंडल ने नमस्ते हेल्थ मेडिकल प्लेटफ़ॉर्म के साथ मध्य रेल पर मुंबई के चुनिंदा उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त स्वास्थ्य स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन किया। स्वास्थ्य जांच में लक्षण मूल्यांकन, नाड़ी की निगरानी, रक्त की ऑक्सीजन संतृप्ति और बीपी की निगरानी शामिल होगी। रिपोर्ट का विश्लेषण डॉक्टरों द्वारा किया जाएगा और रिपोर्ट रोगियों को भेजी जाएंगी। सभी रोगियों का स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता के साथ नि: शुल्क टेली परामर्श होगा और असामान्य रिपोर्ट वाले लोगों का एक एलोपैथिक डॉक्टर के साथ नि: शुल्क टेली परामर्श होगा।
मुफ्त शिविर की तारीख और स्टेशन सुबह 9.30 बजे से शाम 7.00 बजे तक होंगे।
दादर पूर्व – 28.8.2020 तक
कुर्ला पश्चिम – 31.8.2020 से 4.9.2020
ठाणे पश्चिम – 7.9.2020 से 11.9.2020
डोम्बिवली पूर्व – 14.9.2020 से 18.9.2020
घाटकोपर पश्चिम – 28.9.2020 से 1.10.2020
नमस्ते रेलवे मेडिकल प्लेटफ़ॉर्म द्वारा मध्य रेल की गरीबी रेखा से नीचे के लोगों के लिए मुफ्त होम क्वरांटीन सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी। संपर्क नंबर 9019100555 सुबह 8 बजे से 9 बजे के बीच।
आधुनिक “राष्ट्र” राज्य की अवधारणा अपने भौगोलिक परिक्षेत्र और नागरिकों की सुरक्षा की प्रत्याभूति देती है। सामरिक सामर्थ्य हासिल करना प्रत्येक “राष्ट्र” की स्वाभाविक आवश्यकता है। शीतयुद्ध के खात्मे औऱ नई अर्थ केंद्रित विश्वव्यवस्था के आकार लेने के साथ ही दुनिया से सामरिक संघर्ष और शस्त्रों की होड़ कम नहीं होनी चाहिए थी? ग्लोबल इकॉनमी, विश्व ग्राम और वैश्विक आरोग्य एवं कल्याण के अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से भरी मौजूदा विश्व व्यवस्था की वास्तविक प्राथमिकताएं आखिर है क्या? पूंजीवाद और साम्यवाद के ध्रुवों के विलोपित हो जाने के बावजूद आज दुनियां पूंजीवादी राष्ट्रों के नए सुगठित और सुनियोजित बाजारवाद के चंगुल में फंसी हुई है? क्या बदलती ग्लोबल वैश्विक व्यवस्था में समानंतर रूप से सैन्य व्यय कम होकर नागरिक कल्याण सर्वोपरि प्राथमिकताओं में नही आने चाहिए थे।
यह वर्ष हिरोशिमा औऱ नागासाकी पर दुनिया की पहली आण्विक विभीषिका के 75 साल पूर्ण होने का भी है। इस त्रासदी के अक्स में भी देखें, तो कोरोना से जूझते मानवजगत के लिए यह विचारणीय पक्ष है कि हम दुनिया को किस राह पर ले जा रहे है? जिस तेजी के साथ दुनिया में हथियारों की होड़ लगी है, उससे यही साबित होता है कि विज्ञान की कौशलपूर्ण निधि आज भी उसी अंधी गली में दौड़ लगा रही है, जिसने हिरोशिमा औऱ नागासाकी जैसे पीढ़ीगत ज़ख़्म मानव समाज को दिए थे।
कोरोना ने पूरी दुनियां की प्राथमिकताओं को कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। कोरोना से कराहती मानवता के भावी कल्याण का बेहतर विकल्प आज समवेत रूप से हथियारों की होड़ को प्रबंधित करने का भी हो सकता है।क्योंकि ताजा अनुभव यह भी प्रमाणित करते है कि कोई भी देश अपनी पूंजी या प्रौधोगिकी के बल पर अकेले कोरोना जैसी महामारियों से नहीं जीत पायेगा। इस मौजूदा महामारी से निबटने में नाकाम दुनिया की स्थिति जनआरोग्य के मामले में 100 साल पुरानी ही इबारत के पुनर्वाचन जैसी लगती है। सकल मानवीय आवश्यकता और मानक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता का संतुलन आज भी बेहद खराब दौर में है।
वैश्विक इनफ़्लुएंज़ा महामारी में गई थी पाँच करोड़ लोगों की जान-
1918 में फैली वैश्विक इन्फ्लुएंजा महामारी से करीब 5 करोड़ लोगों की मौत हुई थी और एक तिहाई आबादी बीमार रही। आज दुनिया की आबादी 4 गुना बढ़ चुकी है और एक व्यक्ति संक्रमण वाहक के रूप में 36 घण्टे में विश्व के किसी भी कोने में पहुँच सकता है। कोविड 19 अगर काबू में नही आ सका, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि यह आंकड़ा 5 करोड़ तक जा सकता है। हार्वड ग्लोबल इंस्टिट्यूट के निदेशक डॉ आशीष झा के अनुसार, अकेले भारत में अक्टूबर 2020 तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 1 लाख 36 हजार 536 हो सकती है। डब्लू एच ओ के 267 अलग अलग शोधकर्ताओं के अनुसार इंफेक्शन फेटेलिटी रेट यानी संक्रमण से होने वाली मौतें पूरी दुनियां में 5 करोड़ के नजदीक ही संभावित है। यानी 2020 की दुनियां उसी 1918 के दौर में खड़ी नजर आ रही है?
प्रतिष्ठित जर्नल लासेन्ट ने अमेरिका के जॉन हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के शोध को जगह देते हुए बताया है कि करीब पांच महीने बाद दुनियां में 12 लाख बच्चे और 57 हजार माँ कोरोना के सह सबंधित प्रभावों के चलते मौत के मुँह में जा सकते है। इसी विश्वविद्यालय द्वारा जारी “ग्लोबल हैल्थ सिक्योरिटी रपट” में बताया गया है कि पूरी दुनियां में कोविड 19 जैसी महामारी से निबटने का कोई प्रमाणिक सिस्टम मौजूद नहीं है। इस रपट में कोई भी देश 100 में से 40.2 स्कोर को पार नहीं कर पाया, यानि किसी भी देश के पास वैश्विक महामारियों एवं संक्रमण से अपने नागरिकों को बचाने के लिए कोई कारगर तंत्र उपलब्ध ही नही है। अमेरिका, स्पेन, रूस, इटली जैसे मुल्कों में कोविड के कहर से जुटी नागरिकों की लाशें, इस विमर्श को भी खड़ा करतीं है कि क्या दुनिया को “वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा” को लेकर एक नई साझी और समावेशी नीति की ओर नहीं बढ़ना चाहिये? यह भी समझना होगा कि अमेरिका औऱ रूस जहाँ कोरोना से सर्वाधिक मौत हुई है, वे दुनिया के सबसे बड़े हथियार निर्माता और निर्यातक मुल्क है। इनके पास कुल 3750 एक्टिव परमाणु बम्बों में से 3250 का जखीरा है और दुनिया के लगभग हर मुल्क में इन देशों की फैक्ट्रियों से निकले अस्त्र शस्त्र मौजूद है।
हकीकत यह है कि दुनिया में हथियारों का बाजार लोकस्वास्थ्य से आगे इसलिये महत्वहीन है, क्योंकि यह अमेरिका, रूस, फ्रांस और यूरोप के एकाधिकार को बनाये हुए है। स्वीडन की स्वतंत्र संस्था “सीपरी” के अनुसार, दुनिया में हथियारों का कारोबार 1917बिलियन डॉलर का है। इस अथाह कारोबार में 100 बड़ी कम्पनियां है, जिनमें 43 अकेले अमेरिका, 10 रूस और 27 यूरोपीय मुल्कों की है। अब इस कारोबार के दूसरे पक्ष को भी समझना चाहिये-भारत ने 27.86 लाख करोड़ के 2020-21 के बजट में से 3.5लाख करोड़ की राशि रक्षा मद के लिये रखी, जबकि लोकस्वास्थ्य पर 2019 में हमारा कुल खर्च 64999 करोड़ ही था। यह जीडीपी का मात्र एक फीसदी है और रक्षा पर यह आंकड़ा 2.2 फीसदी है। पाकिस्तान में स्वास्थ्य खर्च 510 और बांग्लादेश में 4866 करोड़ था। इन दोनों देशों ने डिफेंस पर 2019 में क्रमशः 53164 , 27040 करोड़ खर्च किया। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि दुनियाभर में हथियारों की होड़ केवल अपने नागरिकों की सीमाई मुल्कों से रक्षा के लिए नही है, असल मे यह चंद धनी मुल्कों औऱ कारोबारी घरानों के इशारों पर नाचती वैश्विक व्यवस्था का बदनुमा पक्ष भी है।सवाल बुनियादी रूप से यही है कि विश्व में नागरिकों की सुरक्षा हथियारों के बल पर किया जाना अधिक जरूरी है या महामारियों से?यानी कोविड औऱ ऐसे ही अवश्यंभावी संक्रमण से मानवता को बचाने के लिए वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडा सुस्थापित करने का वक्त नही आ गया है? क्या जिन मुल्कों ने हथियारों के बाजार सजाए हैं, वे इस संक्रमण से बच सके है ? वे तो गरीब मुल्कों से ज्यादा संक्रमित हुए उनके यहां लाशों के ढेर लग गए। यानि उनकी सम्पन्नता कोई काम नहीं आ सकी। स्पष्ट है कि आर्थिक सम्पन्नता के बाबजूद कोई भी देश आज या भविष्य में कोविड जैसे अन्य खतरनाक संक्रमणों से अकेले लड़ाई नही लड़ सकता है। दुनिया भर में 10हजार इंटरनेशनल फ्लाइट्स प्रतिदिन उड़ती हैं और कोरोना संक्रमण का रीप्रॉडक्शन नम्बर 2:6 है जबकि 2009 में फैले स्वाइन फ्लू का यह नम्बर 1.3 था। यानी एक कोरोना पोजेटिव व्यक्ति 6 अन्य को संक्रमित कर सकता है।
शोध संस्थान बायोआरर्काइव्स में अपने एक अध्ययन में यह भी बताया है कि जलवायु परिवर्तन का एक खतरनाक पक्ष ग्लेशियरों के पिघलने के साथ नए वाइरस को जन्म देना भी है। अकेले तिब्बती ग्लेशियरों में 35 वायरस पाए गए जिनमे 28 पूरी तरह से नए है। जाहिर है दुनियां में वायरस अटैक की कोविड 19 जैसी संभावनाएं आने वाले वक्त में बलबती है।ऐसे में मानव जाति की रक्षा अमेरिकी या यूरोपियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां औऱ उनके उत्पाद कर पाएंगे या ग्लोबल स्वास्थ्य सेवाएं ? तथ्य यह है कि आज वैश्विक प्राथमिकताओं को नए सिरे से निर्धारित किये जाने का सबसे उपयुक्त समय आ गया है। जितना कठिन मानवता को इन संक्रमित हमलों से बचाया जाना है, शायद खतरनाक आयुध का विनिर्माण औऱ निर्यात उतना चुनौतीपूर्ण नही है।राष्ट्रीय हित औऱ सामरिक सुरक्षा के महत्व को अस्वीकार नहीं किया जा सकता है, तथापि कोविड 19 के त्रासदपूर्ण अनुभव के बाद वैश्विक प्राथमिकताओं में लोकस्वास्थ्य को सर्वोपरि रखने के लिए एक समावेशी पहल अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी जैसे धनी-मानी मुल्कों को करनी ही होगी। यह भी तथ्य है कि ऐसा किया जाना व्यवहार में बहुत आसान भी नहीं है, लेकिन इन्हीं सम्पन्न देशों का हैल्थ सिस्टम जिस तरह से कोविड के आगे लाचार नजर आया, उससे आशा की जाना चाहिये कि दुनिया इस मौजूदा औऱ आने वाले संकट की भयाभयता को समझकर मानवता के हक में आगे आने का संकल्प लेगी।
अभी तक कई सारी वेब सीरीज बन चुकी है, लेकिन जिस तरह मिर्जापुर का इंतजार हो रहा था, वैसा इंतजार अन्य किसी वेब सीरीज का होते हुए नहीं देखा गया. गूगल सर्च के इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है. लेकिन अब इस वेब सीरीज का इंतजार करनेवालों के लिए एक अच्छी खबर आ रही है. अमेजन प्राइम वीडियो की मोस्ट अवटेड वेब सीरीज ‘मिर्जापुर 2’ की रिलीज डेट का खुलासा कर दिया गया है। अमेजन प्राइम वीडियो ने एक दमदार टीजर जारी करते हुए इस बात की जानकारी दी है कि ‘मिर्जापुर-2′ 24 अक्टूबर को रिलीज होनेवाली है। सोशल मीडिया पर यह टीजर तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में गूड्डू पंडित के चरित्र का नरेशन हैं। वह कहते हैं- दुनिया में दो किस्म के लोग होते हैं। ज़िंदा और मुर्दा और फिर होते हैं घायल। हमसे सब छीन लिए और हमें जिंदा छोड़ दिए। गलती किए.’ इसके साथ मिर्जापुरी की डेट की घोषणा की गई है। मिर्जापुर की टोन भी सुनने को मिलती है।
पंकज त्रिपाठी, अली फज़ल, दिव्यांन्दु, श्वेता त्रिपाठी शर्मा, रसिका दुगल, हर्षिता शेखर गौड़, अमित सियाल, अंजुम शर्मा, शीबा चड्ढा, मनु ऋषि चड्ढा और राजेश तैलंग जैसे कलाकारों के इस एक्शन से भरपूर श्रृंखला में लौटने साथ स्टाइलिश व असभ्य दुनिया जहां अपराध, ड्रग्स और हिंसा शासन और जीवित रहने के लिए लड़ने की जरूरत है की यात्रा के लिए तैयार हो जायें।
एक्सेल एंटरटेनमेंट के प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी ने कहा, “एक्सेल एंटरटेनमेंट को लगातार नए विचारों के लिए असीम प्यार मिला है। मिर्जापुर उस प्रयास में एक कदम था। यह केवल दर्शकों के लिए सोच की सीमाओं को तोड़ने के बारे में नहीं था, बल्कि कंटेंट निर्माताओं के रूप में खुद के लिए भी था। प्रामाणिकता को खोए बिना भारत के भीतरी इलाकों से रोमांचकारी और अनकही कहानियों को लाना हमारी सबसे बड़ी जीत रही है।
न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में से मिर्जापुर सीज़न 1 को प्रशंसा मिली है, जो कि सौभाग्य है। यह एक्सेल एंटरटेनमेंट और अमेज़ॅन प्राइम वीडियो को शो के दूसरे सीज़न के साथ गति को जारी रखने के लिए प्रेरित करता है। सीज़न 2 के साथ मिर्जापुर का कुनबा बड़ा हो जाता है लेकिन नियम समान रहते हैं!
कुछ लोग होते है, जिनके कर्मों से कहावतें-मिसाले बनती है और कुछ लोग उन कहावतों को सही साबित कर दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन जाते हैं। एक मिसाल है, “मंजिले उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है।” मतलब यदि इरादे मजबूत हों, तो आपको मंजिल हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता। कुछ ऐसा ही जज्बा है पायल कुमारी का भी। पायल कुमारी वैसे तो बिहार की रहनेवाली है, लेकिन वर्तमान में वह अपने मजदूर पिता के साथ केरल में रह रही है। हाल ही में पायल कुमारी ने महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी में टॉप किया है। वह भी तब जबकि एक वक्त उनके पास कॉलेज की फीस भरने तक के पैसे नहीं थे। इतना ही नहीं, अब उनकी निगाहें सिविल सेवाओं में किस्मत आजमाने पर हैं।
– ऑर्कियोलॉजी विषय में किया टॉप
पायल कुमारी ने यूनिवर्सिटी के बीए आर्कियोलॉजी कोर्स में टॉप किया है। पायल के पिता करीब दो दशक पहले बिहार से केरल आकर बस गए थे। मजदूर परिवार के लिए कॉलेज की 3 हजार रुपये की वार्षिक फीस भरने की भी चुनौती थी, लेकिन टीचर्स समेत अन्य लोगों की मदद से ये बाधा भी दूर होती गई। कोच्चि के करीब पेरुंबावूर स्थित मारथोमा महिला कॉलेज की छात्रा पायल ने इस साल 85 प्रतिशत अंक हासिल किए।
– इतिहास के टीचर ने भरी फीस
पायल कुमारी के पिता प्रमोद कुमार बिहार के शेखूपुरा जिले से ताल्लुक रखते हैं। प्रमोद 19 साल पहले परिवार के साथ केरल आकर बस गए थे। पायल समेत प्रमोद के तीन बच्चे हैं। पायल ने अपनी हिस्ट्री टीचर की तारीफ करते हुए कहा कि उनके प्रथम वर्ष की फीस उन्होंने ही जमा की थी। पायल ने कहा, मैं जानती थी कि मैंने अच्छा एग्जाम दिया है, लेकिन रैंक आने की उम्मीद मुझे नहीं थी। मेरे पेरेंट्स ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया।
– अब सिविल सेवा का लक्ष्य
पायल कुमारी पोस्ट ग्रेजुएशन की अपनी पढ़ाई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से करना चाहती हैं। इसके अलावा पायल की योजना सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने की है। उन्होंने साथ ही कहा, जब हम बिहार से केरल आए तब मैं चार साल की थी। मगर मैंने जल्द ही मलयालम भाषा सीख ली। अब मेरे माता-पिता मेरी उपलब्धि से बेहद खुश हैं।
– मुख्यमंत्री ने दी बधाई
अब जबकि पायल कुमारी ने ये उपलब्धि हासिल कर ली है तो राज्य के मुख्यमंत्री पिनारी विजयन ने भी उन्हें फोन कर बधाई दी है। सीएम ने कहा, पायल की उपलब्धि गर्व और खुशी की बात है। मैं उनके सुखद भविष्य की कामना करता हूं।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में सोमवार को देर रात बड़ा हादसा हो गया। यहां पुलिस लाइन में बैरक की छत गिरने से चार पुलिसकर्मी दब गए। पास की बैरकों से घटनास्थल पर पहुंचे सिपाहियों ने चारों को निकाला। उन्हें कानपुर के रीजेंसी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। वहीं, एक सिपाही अरविंद की इलाज के दौरान मौत हो गई। हादसे के बाद कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई।बैरक गिरने के बाद मलबा हटाते पुलिसकर्मी।घटना के बाद मौके पर आईजी मोहित अग्रवाल और एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह समेत कई बड़े अधिकारी भी पहुंचे।
बताया जा रहा है कि बैरक में रहने वाले सिपाही खाना खाने के बाद रात में अपने-अपने बैरक में सोने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान एक बैरक की छत भरभरा कर गिर पड़ी। बैरक पूरा खाली करा लिया गया है। सिपाहियों के सामान अंदर हैं, जिसे सुबह निकालने प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. एसएसपीएसएसपी ने कहा- हमारे तीन लोग घायल हो गए, जबकि एक की मौत हो गई है। हम उनके परिवार के प्रति संवेदना जताते हैं। सिपाही के परिवार को मुआवजा दिया जाएगा। उनका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ किया जाएगा।
बचाव अभियान लगभग पूरा हो चुका है। घटना की जांच की जाएगी।घायल हुए सिपाहीहादसे में जो सिपाही घायल हुए हैं, उनमें कौशांबी के अमृतलाल, अजीतमल (औरैया) के मनीष और औरैया अच्छलदा के राकेश हैं। एसएसपी के मुताबिक, बैरक पूरा खाली करा लिया गया है। सिपाहियों के सामान अंदर हैं, जिन्हें मंगलवार सुबह निकाला जाएगा।
सोनिया गांधी ही अभी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। 7 घंटे बैठक के बावजूद सीडब्ल्यूसी की बैठक में नए अध्यक्ष पर फैसला नहीं हो पाया। माना जा रहा था कि वर्किंग कमेटी की बैठक में नए अध्यक्ष पर फैसला हो जाएगा। सोनिया ने खुद बैठक में पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की, पर फैसला यही हुआ कि सोनिया ही यह जिम्मा संभालती रहेंगी। हालांकि, बैठक में यह फैसला जरूर किया गया कि पार्टी का नया अध्यक्ष 6 महीने के भीतर चुन लिया जाएगा।
पार्टी की सबसे बड़ी संस्था कांग्रेस वर्किंग कमेटी यानी सीडब्ल्यूसी की सोमवार को जब बैठक शुरू हुई, तो सोनिया गांधी ने अंतरिम अध्यक्ष का पद छोड़ने की पेशकश की। वहीं, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोनिया को भेजी गई नेताओं की चिट्ठी की टाइमिंग पर सवाल उठाए। राहुल का आरोप था कि पार्टी नेताओं ने यह सब भाजपा की मिलीभगत से किया। राहुल के इस बयान को बमुश्किल 20-25 मिनट नहीं बीते होंगे कि उनका विरोध शुरू हो गया। विरोध करने वालों में सबसे आगे थे गुलाम नबी आजाद और कपिल सिब्बल। बाद में कांग्रेस ने कहा कि राहुल ने ‘भाजपा के साथ मिलीभगत’ जैसा या इससे मिलता-जुलता एक शब्द भी नहीं बोला था।
दरअसल, करीब 15 दिन पहले पार्टी के 23 नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर कहा था कि भाजपा लगातार आगे बढ़ रही है। पिछले चुनावों में युवाओं ने डटकर नरेंद्र मोदी को वोट दिए। कांग्रेस में लीडरशिप फुल टाइम होनी चाहिए और उसका असर भी दिखना चाहिए।