28 C
Mumbai
Sunday, August 23, 2026
Home Blog Page 756

आज के प्रमुख समाचार

आज के प्रमुख समाचार
headlines of the day

संसद में गुरुवार को पेश होगा बजट, कल आया था आर्थिक सर्वे।

हम सपने पूरा करने वाला बजट लेकर आएंगे -पीएम मोदी

विकास दर नीचे, लेकिन अच्छे दिन आएंगे -राहुल गांधी

कासगंज हिंसा: कल रात फिर हुई आगजनी और तोड़फोड़, 12 गिरफ्तार।

राज्यपाल राम नाईक ने कासगंज हिंसा को बताया कलंक।

चालू वित्तीय वर्ष में विकास दर 6.75 रहने का अनुमान -आर्थिक सर्वे

दिल्ली में 8 महीने के मासूम से रेप के मामले में चचेरा भाई गिरफ्तार।

यूपी के हापुड़ में इनामी बदमाश मोहन पासी मुठभेड़ में ढ़ेर।

‘गॉड सेक्स एन्ड ट्रुथ’ को इंटरनेट पर मिल रहे रेस्पॉन्स को देखते हुए रामगोपाल वर्मा ने GST2 बनाने का एलान किया।

U-19 विश्वकप: सेमीफाइनल में भारत की पाक को 273 रनों की चुनौती, पाक के गिरे 20 रनों पर 3 विकेट।

1984 सिख दंगा: जब सिखों की हत्याएं हो रही थीं, तब राजीव गांधी दंगों का निरीक्षण कर रहे थे -सुखबीर बादल

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की गयी थी, जिसके बाद दंगें भड़क गये थे। उसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीश टाइटर ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि खुद प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उनके साथ दिल्ली के कई इलाकों का दौरा किया था।

पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने टाइटर की सफाई पर पटलवार करते हुए दंगों में राजीव गांधी की भूमिका पर ही सवाल खड़े करते हुए कहा कि टाइटर की बातों से साफ जाहिर होता है कि जब 1984 के दंगों में दिल्ली में सिखों की हत्याएं हो रही थीं, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी दंगों का निरीक्षण कर रहे थे। यह बहुत ही गंभीर मामला है, और इसकी जांच करनी चाहिए।

जगदीश टाइटर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब सभी सांसद उनके घर पर मौजूद थे, तब राजीव गांधी ने सभी सांसदों को हड़काते हुए अपने-अपने इलाकों में जाने को कहा था।

यह मामला ऐसे समय में तूल पकड़ा है, जब इस महीने की शुरूआत में सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों की पुन: जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया है। इस कमेटी में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राजदीप सिंह और आईपीएस अधिकारी अभिषेक दुल्लर को भी शामिल किया गया है। यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट में दो महीने के अंदर अंतरिम रिपोर्ट सौंपेगी।

31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के अंगरक्षकों ने गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। इस हत्या के विरोध में देशभर में दंगे हुए थे।

रैंकिंग: IIM बेंगलुरु-कोलकाता ने लगाई लंबी छलांग

रैंकिंग: IIM बेंगलुरु-कोलकाता ने लगाई लंबी छलांग

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 
 
आईआईएम बेंगलुरु और आईआईएम कोलकाता ने ग्लोबल रैकिंग में सुधार किया है। आज ‘फाइनेंशियल टाइम्स लंदन’ द्वारा जारी किया गया है, जिसमें आईआईएम बेंगलुरु 49वें स्थान से 35वें स्थान पर पहुंच गया है। जबकि आईआईएम कोलकाता 95वें स्थान से 78वें स्थान पर आ गया है।

वहीं आईआईएम अहमदाबाद और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस की रैकिंग में गिरावट आई है। आईआईएम अहमदाबाद भी 29वें 31 पायदान पर पहुंच गया है, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस को पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम की वजह से विश्व के टॉप 100 कॉलेजों में 28वें स्थान पर रखा गया है।

2018 में टॉप 10 में शामिल संस्थान हैं-

1. स्टैनफोर्ड ग्रैजुएट स्कूल आॅ बिजनेस, यूनाइटेड स्टेट्स
2. इनसीड फ्रांस/सिंगापुर
3. यूनिवर्सिटी आॅफ पेंसिल्वेनिया
4. लंदन बिजनेस स्कूल
5. हार्वर्ड बिजनेस स्कूल
6. यूनिवर्सिटी आॅफ शिकागो
7. कोलंबिया बिजनेस स्कूल
8. चाइना यूरोप इंटरनेशनल ​बिजनेस स्कूल
9. एमआईटी स्लोन, यूएसए
10.यूनिवर्सिटी आॅफ कैलिफोर्निया 

अब तक के प्रमुख समाचार

आज के प्रमुख समाचार
headlines of the day

तेजस्वी यादव की यात्रा पर इतनी हाय-तौबा क्यों -राजद

सीलिंग का विरोध करने संसद मार्ग पहुंचे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर पुलिस द्वारा जमकर लाठी चार्ज।

कासगंज की घटना यूपी के लिए कलंक -राम नाईक

कासगंज हिंसा: साम्प्रदायिक हिंसा में जान गवाने वाले चंदन गुप्ता के परिवार ने चेक लेने से किया इनकार।

जातिवाद से लालू का चोली-दामन का साथ -जेडीयू

गठबंधन के लिए अब दूसरे ग्रहों से BJP को खोजने होंगे मित्र -शिवसेना

छत्तीसगढ़ में राज्य के पहले राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय का निधन, गृह नगर बिहार के मधेपुरा में ली अंतिम सांस।

पाकिस्तान के खिलाफ सिर्फ बोले नहीं, एक्शन भी ले ट्रम्प -हामिद करजई

कश्मीर के नेशनल कांफ्रेंस विधायक ने किया आजादी का समर्थन।

26/11 मुंबई हमले में शहीद हेमंत करकरे की मौत की जांच की याचिका उच्च न्यायालय ने की खारिज।

#Me Too से जुड़ी हॉलीवुड एक्ट्रेस एन हैश, प्रोड्यूसर पर लगाया यौन उत्पीड़न का आरोप

एन हैश ने ज्वाइन किया #me too कैंपेन

पारुल पाण्डेय | Navpravah.com 

हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइनस्टाइल के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी बीच #Me Too कैम्पेन से एक और नाम जुड़ गया है। हॉलीवुड एक्ट्रेस एन हैश ने हार्वे पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। एक निजी न्यूज एजेंसी के अनुसार, 48 वर्षीया एन ने बताया है कि हार्वे ने उनसे सेक्स के लिए ऑफर किया था, लेकिन जब उन्होंने इससे इनकार कर दिया, तो उन्हें फिल्म प्रोजेक्ट से बाहर निकाल दिया गया था। यानि यह बात साफ़ है कि बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक कास्टिंग काउच का कड़वा जहर फैला हुआ है। 

पॉडकास्ट ‘एलिज्डली विद थियो वॉन ऐंड द मैथ्यू कोल वाइस’ में यह पूछने पर कि अक्टूबर से पहले वाइनस्टाइन के खिलाफ आवाज़ किसी ने क्यों नहीं बुलंद की, इस पर एन ने बताया कि सबसे पहली बात यह कि आपको धमकी दी जाती है और दूसरा बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। मैंने वह नहीं किया, जो हार्वे चाहता था, तो उसने मुझे बाहर का रास्ता दिखा दिया। उसके साथ किसी भी तरह के फिजिकल कॉन्टेक्ट में आने से पहले ही मैं रूम से बाहर हो गई।

एन हैश ने माना कि हार्वे के यौन उत्पीड़न का शिकार हुई अधिकतर लड़कियां कम उम्र की थीं, जिनके पास ट्रेडिशनल सपोर्ट सिस्टम नहीं था। उन्होंने कहा कि आपके पास जाने की कोई अलग जगह नहीं होती। आपको लॉस एंजेलिस अपने दम पर अकेले आना होता है। आपके पास ऐसे दोस्त नहीं होते, जिनसे बात कर सकें और वे इसी बात का फायदा उठाते हैं। 19, 20, 21 या 22 की उम्र में ही ये सब होता है। वह 40 साल की उम्र के पीछे नहीं पड़ने वाला। उन्होंने कहा कि वाइनस्टाइन से बड़ा राक्षस कोई नहीं है।

इन आरोपों पर वाइनस्टाइन की प्रवक्ता ने कहा कि उस समय एन हैश और वाइनस्टाइन के दोस्ताना संबंध थे। 
वाइनस्टाइन ने आरोपों से इनकार किया है। वाइनस्टाइन के खिलाफ न्यूयॉर्क, लॉस एंजेलिस और लंदन में जांच चल रही हैं। बता दें कि वाइनस्टाइन पर 60 से ज्यादा औरतें यौन प्रताड़ना के आरोप लगा चुकी हैं।  
 

रक्षामंत्री से बातचीत कर सेना के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर -महबूबा मुफ्ती

सीएम महबूबा मुफ़्ती ने फाइल किए FIR पर दिया बयान

पारुल पाण्डेय | Navpravah.com 

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने शनिवार को हुए प्रदर्शन के दौरान हुई घटना पर विधानसभा में बयान दिया है। इस दौरान सेना की कार्रवाई में दो युवकों की मौत हो गई थी, जिस पर एफआईआर दर्ज किया गया है। मुफ्ती ने हत्या की धाराओं में केस दर्ज करने के सरकार के फैसले का बचाव किया। शोपियां की इस घटना के बाद सेना के एक मेजर और कुछ सैनिकों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज की गई है। मुफ्ती ने कहा कि दोषी के खिलाफ कार्रवाई से सेना के मनोबल पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वह इस मामले को किसी नतीजे तक ले जाएंगी।

महबूबा मुफ्ती ने बताया कि एफआईआर दर्ज करने से पहले रक्षामंत्री से बातचीत की गई थी। जिसके बाद यह  एफआईआर दर्ज की गई है। इतना ही नहीं, रक्षा मंत्री ने मुफ्ती से बातचीत में कहा कि अगर गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाया गया है या फिर कुछ गलत हुआ है, तो इस पर एक्शन  लिया जाना चाहिए। जिसके बाद एफआईआर दर्ज किया गया और मेजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए।

ज्ञात हो कि बीजेपी ने मांग की थी कि मेजर के खिलाफ दर्ज नामजद शिकायत को वापस लिया जाए और बिना नाम के नई एफआईआर दर्ज की जाए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने शोपियां जिले के गनोवपुरा गांव से गुजर रहे सुरक्षा बलों के एक काफिले पर पथराव किया था, जिसमें जवानों ने अपने बचाव में हवा में कथित तौर पर कई राउंड गोलियां चलायी थी, जिसमें कुछ लोग घायल हो गए।   

एक रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि जवानों ने तब गोलियां चलायीं, जब भीड़ ने एक जूनियर कमीशन अधिकारी की पीट-पीटकर हत्या करने की कोशिश की और उनका हथियार छीन लिया। घायलों में जावेद अहमद भट(20) और सुहैल जावेद लोन ( 24) की बाद में मौत हो गयी। सेना का कहना है कि उन्होंने आत्मरक्षा में फ़ायरिंग की थी।

दिल्ली: कचरे के डब्बे में मिला नवजात बच्ची का शव

कचरे में मिला बच्चे का शव

सौम्या केसरवानी | Navpravah.com

दिल्ली में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यह मामला दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल का है, जहाँ नवजात का सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार करने के बजाय उसे कचरे के डब्बे में फेंक दिया गया।

शव आज कचरे के डब्बे से बरामद किया गया। छानबीन करने पर पुलिस को उस नवजात के पिता ने बताया कि उसकी पत्नी ने मरी हुई बच्ची को जन्म दिया था, जिसके बाद उसने नवजात के शव को कचरे के डब्बे में फेंक दिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

एक व्यक्ति ने ट्वीट किया, ‘निश्चित तौर पर यह आमनवीय है।’ किसी ने लिखा, ‘हे भगवान! मानव जीवन के लिए कोई सम्मान नहीं है। क्या हमलोग असंवेदनशील होकर इस स्तर तक पहुंच चुके हैं? नवजात के शव को कचरे के डब्बे में फेंक दिया गया? जानवर भी इससे ज्यादा सम्मान दिखाता है।’

भारत उच्च शिशु मृत्यु दर वाले देशों की श्रेणी में आता है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य सेवा में सुधार के साथ ही स्थिति में कुछ सुधार हुआ है। इसके बावजूद भी हर साल बड़ी संख्या में बच्चों की मौत होती है। पिछले साल ‘लांसेट’ में एक रिपोर्ट छपी थी, जिसके अनुसार 2005 के बाद से हालात में तेजी से सुधार हुआ है। तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र की स्थिति में सबसे ज्यादा सुधार हुआ है और नवजात मृत्यु दर में सालाना 3.4 फीसद की कमी आई है।

IPC परीक्षा में सिमरन केस्सर ने हासिल किया पहला स्थान 

सिमरन केस्सर ने हासिल किया पहला स्थान

एनपी न्यूज़ डेस्क | Navpravah.com 

इन्स्टिट्युट आॅफ चार्टर्ड अकाउन्ट्स आॅफ इंडिया (आईसीएआई) की ओर से लिए गए चार्टर्ड अकाउन्ट्स इंटरमिडिएट यानि आईपीसी परीक्षा का परिणाम रविवार को घोषित कर दिया गया। कुल परिणाम 26.72 प्रतिशत लगने के साथ ही मुंबई की सिमरन केस्सर ने 74.43 प्रतिशत अंकों के साथ राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं देश में वह तीसरे स्थान पर हैं।  

आईपीसी परीक्षा नवंबर महीने में ली गई थी। वहीं सेठ ने 75.71 प्रतिशत अंकों से देश में पहला स्थान हासिल किया है।  वहीं जयराम ने 75.14 प्रतिशत अंकों से दूसरा स्थान पर हैं। इस साल इस ग्रुप एक की परीक्षा में 72 हजार 148 विद्यार्थियों ने भाग लिया था। वहीँ ग्रुप दो में 65 हजार 393 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी। इन दोनो ही ग्रुप में से 13 हजार 149 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। जबकि दोनों ग्रुप को मिलाकर कुल 49  हजार 215 विद्यार्थियों ने यह परीक्षा दी थी।   

2014 के मुजफ्फरनगर की तरह, ‘कासगंज दंगा’ 2019 की तैयारी है -पूर्व आईपीएस

पूर्व आईपीएस ने कासगंज दंगे पर दिया बयान

सौम्या केसरवानी। Navpravah.com

कासगंज में गणतंत्र दिवस पर भड़की हिंसा के बाद इस मुद्दे पर राजनीति तेज हो गई है। पक्ष-विपक्ष के साथ कई संगठनों और पूर्व अफसरों ने भी इस मामले में आरोप-प्रत्यारोप लगाने शुरू किए हैं। इसी क्रम में गुजरात के बर्खास्त आईपीएस अफसर संजीव भट्ट ने ट्वीट कर कासगंज हिंसा के पीछे राजनीतिक साजिश का इशारा किया। उनके ट्वीट पर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

संजीव भट्ट ने आज ट्वीट कर कहा है, ‘कासगंज तो शुरुआत है, यह लो-ग्रेड सांप्रदायिक बुखार 2019 के लोकसभा चुनाव तक जारी रहेगा, ठीक उसी तरह जैसे 2014 के लिए मुजफ्फरनगर कांड हुआ था। इस बार यह और बड़े पैमाने पर होगा और इसका असर गहरा होगा।’ उनके इस ट्वीट के बाद कुछ लोगों ने पूर्व पुलिस अफसर पर विपक्षी नेताओं से मिलीभगत का आरोप लगाया। राजीव चड्ढा ने कहा कि भारत आप पर भरोसा नहीं करता भट्ट।

इस मामले में पुलिस ने अब तक दोनों पक्षों से 112 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस घटना में सात लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज है। मुख्य आरोपी शकील फरार बताया जा रहा है। डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि अभी स्थिति को नियंत्रण में है, कस्बे में तनावपूर्ण शांति है। हिंसा में शामिल लोगों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जा रहा है। कासगंज में नेताओं के जाने पर भी रोक लगा दी गई है और इस मामले की जाँच तेजी से की जा रही है।

बिहार में शिक्षकों को मिलेगा एक समान वेतन: सर्वोच्च न्यायालय

शिक्षकों को मिलेगा समान वेतन

पारुल पाण्डेय | Navpravah.com 

बिहार में पंचायत के जरिए चुने गए शिक्षकों को नियमित अध्यापकों के बराबर वेतन देने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश पर सुप्रीम ने रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने एक समान वेतन देने के मामले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी बनाने का आदेश दिया है और कमेटी को यह जिम्मेदारी दी है कि वह देखे कि इन शिक्षकों को नियमितों के समान वेतन देने के लिए किस प्रकार के और टेस्ट लिए जा सकते हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 15 मार्च को होनी है। 

जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की पीठ ने कहा कि वेतन आज नहीं तो कल बराबर तो करना ही होगा। ये शिक्षक राज्य में कुल शिक्षकों का 60% हैं। कोर्ट ने कहा कि ये असमानता उचित नहीं है, उन्हे बराबरी पर लाना ही चाहिए। पंचायत के जरिए 2006 में और इससे पूर्व चुने गए 3.5 लाख शिक्षकों को एक समान वेतन देने के लिए सरकार को 10,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। इन शिक्षकों को सरकार अभी 6000 रुपये प्रति माह देती है, जबकि नियमित शिक्षकों को 50,000 रुपये प्रति माह मिलते हैं।

वहीं पटना हाईकोर्ट का कहना है कि जब स्कूल एक है, योग्यता एक है, बच्चे एक है, काम भी एक है, तो वेतन में असमानता क्यों। राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी है। कहा है कि इससे राज्य पर 28,000 करोड़ रुपये का भार पड़ेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को भी पार्टी बना दिया है और एएसजी पीएस नरसिम्हा से कहा है कि वह सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद रहें। पटना हाईकोर्ट ने 31अक्टूबर 2017 को दिए आदेश में इन शिक्षकों को नियमितों के बराबर वेतन देने का आदेश दिया था।

जबकि राज्य की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह, गोपाल सुब्रह्मण्ययम ने मुकुल रोहतगी से बहस की। उन्होंने कहा कि पंचायत शिक्षकों का काम एक जैसा नहीं है, वह पंचायत क्षेत्र में ही रहते हैं। जबकि नियमितों का राज्य भर में तबादला होता है। वहीं, उनका चयन भी उतना कठिन नहीं होता। उनके लिए एक पब्लिक नोटिस निकाला जाता है और मेरिट पर चयन कर लिया जाता है। 

पीठ ने कहा कि यह अब सामान्य हो गया है, पहले काम वेतन पर भर्ती कर लो और फिर उन्हें निकालने की बात करो। यह नहीं होगा, आप को इन्हें वेतन देना ही होगा।