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Wednesday, September 9, 2026
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विश्व ओजोन दिवस : लॉकडाउन काल में भरा जीवन के लिए जरूरी ओजोन सुरक्षा कवच का गहरा घाव

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
इंसानों को कई जानलेवा बीमारियों से बचाने वाली ओजोन लेयर के लिए लॉकडाउन राहत वाला समय कहा जा सकता है. देश में लॉकडाउन का जो असर हुआ, उसका एक बड़ा फायदा ओजोन लेयर को भी मिला है. एनसीबीआई जर्नल में प्रकाशित भारतीय वैज्ञानिकों की रिसर्च कहती है, दुनिया के कुछ देशों में 23 जनवरी से लॉकडाउन लगने के बाद प्रदूषण में 35 फीसदी की कमी और नाइट्रोजन ऑक्साइड में 60 फीसदी की गिरावट आई है. इसी दौरान ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचाने वाले कार्बन का उत्सर्जन भी 1.5 से 2 फीसदी तक घटा और कार्बन डाई ऑक्साइड का लेवल भी कम हुआ. ये सभी ऐसे फैक्टर हैं, जो ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचाते हैं.
_ सूर्य की पराबैंगनी किरणों को रोकती है ओजोन लेयर
इसी साल अप्रैल महीने की शुरुआत में ओजोन लेयर पर बना सबसे बड़ा छेद अपने आप ठीक होने की खबर भी आई. वैज्ञानिकों ने पुष्टि कि आर्कटिक के ऊपर बना दस लाख वर्ग किलोमीटर की परिधि वाला छेद बंद हो गया है. सूर्य की खतरनाक पराबैंगनी किरणों को रोकने वाली इस लेयर को कोरोनाकाल में कितनी राहत मिली है, इस पर पूरी रिपोर्ट आनी बाकी है. पर्यावरणविद् शम्स परवेज के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचाने वाले कार्बन और दूसरी गैसों का उत्सर्जन 50 फीसदी तक घटा, जिसका पॉजिटिव इफेक्ट आने वाले समय में दिख सकता है. इस दौरान एयर ट्रैफिक 80 तक कम हुआ है, जो फिलहाल अच्छे संकेत रहे हैं.
क्या है ओजोन लेयर?
ओजोन लेयर दो तरह की होती है. एक फायदेमंद है और दूसरी नुकसानदेह. फायदेमंदर ओजोन लेयर एक ऐसी पर्त है, जो सूर्य की ओर से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोखकर रोकने का काम करती हैं. ओजोन परत पृथ्वी के वातावरण के समताप मंडल के निचले हिस्से में में मौजूद है. सामान्य भाषा में समझें तो यह पराबैंगनी किरणों को छानकर पृथ्वी तक भेजती है. इसकी खोज 1957 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रो. गॉर्डन डोब्सन ने की थी. वहीं नुकसानदायक ओजोन लेयर हमारे ब्रीदिंग लेवल (सांस लेने के स्तर पर) पर होती है, जो नुकसान पहुंचाती है. यह गाड़ियों और फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं में मौजूद नाइट्रोजन ऑक्साइड से बनती है. यह कार्सिनोजेनिक होती है, जो कैंसर का कारण बन सकती है. हवा की जांच करके इसके स्तर को समझा जाता है.
ओजोन लेयर में लिकेज का मतलब
इस लेयर में छेद होने पर सूर्य की पराबैंगनी किरणें सीधे धरती तक पहुंचेंगी. ये किरणें स्किन कैंसर, मलेरिया, मोतियाबिंद और संक्रमक रोगों का खतरा बढ़ाती हैं. अगर ओजोन लेयर का दाकयरा 1 फीसदी भी घटता है और 2 फीसदी तक पराबैंगनी किरणें इंसानों तक पहुंचती हैं तो बीमारियों का खतरा काफी हद तक बढ़ सकता है.
इन प्रॉडक्ट से पहुंच रहा ओजोन लेयर को नुकसान
ऐसे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट और स्प्रे का इस्तेमाल हो रहा जिसमें क्लोरोफ्लोरो कार्बन पाए जाते हैं. ये ओजोन लेयर को नुकसान पहुंचाते हैं. स्मोक टेस्ट के मानकों पर न खरे उतरने वाले वाहनों से निकलता धुआं. इसमें कार्बन अधिक पाया जाता जो क्षरण का कारण बनता है. फसल कटाई के बाद बचे हुए हिस्सों को जलाने से निकलने वाला कार्बन स्थिति को और बिगाड़ रहा है. इसके अलावा प्लास्टिक व रबड़ के टायर और कचरे को जलाने से भी इस लेयर को नुकसान पहुंच रहा है. अधिक नमी वाला कोयला जलाने पर सबसे बुरा असर पड़ रहा है.
ओजोन लेकयर को नुकसान पहुंचाने वाले कण
वातावरण में नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जब सूर्य की किरणों के साथ रिएक्शन करते हैं तो ओजोन प्रदूषक कणों का निर्माण होता है. वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाली कार्बन-मोनो-ऑक्साइड व दूसरी गैसों की रासायनिक क्रिया भी ओजोन प्रदूषक कणों की मात्रा को बढ़ाती हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, 8 घंटे के औसत में ओजोन प्रदूषक की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए.
ऐसे शुरू हुआ वर्ल्ड ओजोन डे
ओजोन परत में हो रहे क्षरण को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने पहल की. कनाडा के मॉन्ट्रियल में 16 सितंबर, 1987 को कई देशों के बीच एक समझौता हुआ, जिसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कहा जाता है. इसकी शुरुआत 1 जनवरी, 1989 को हुई. इस प्रोटोकॉल का लक्ष्य वर्ष 2050 तक ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों को कंट्रोल करना था. प्रोटोकॉल के मुताबिक, यह भी तय किया गया कि ओजोन परत को नष्ट करने वाले क्लोरोफ्लोरो कार्बन जैसी गैसों के उत्पादन और उपयोग को सीमित किया जाएगा. इसमें भारत भी शामिल था. इस साल वर्ल्ड ओजोन डे की थीम है ‘ओजोन फॉर लाइफ’ यानी धरती पर जीवन के लिए इसका होना जरूरी है.
_ लॉकडाउन में घटा 50 प्रतिशत प्रदूषण
6 महीने के लॉकडाउन में 50 फीसदी से अधिक प्रदूषण का स्तर घटा है, लेकिन ओजोन गैस का स्तर सिर्फ 20 फीसदी तक ही कम हुआ है. इसका स्तर इतना ही क्यों हुआ इसके जवाब में शम्स परवेज कहते हैं, लॉकडाउन के दौरान जगहों को सैनेटाइज करने में लिए सोडियम हायपो-क्लोराइड का इस्तेमाल हुआ. इससे ब्रीदिंग लेवल पर बनने वाली ओजोन गैस का स्तर उतना नहीं गिरा, जितना गिरना चाहिए था.
साउथ एशियाई देशों में प्रदूषण की अधिकता
दुनिया में बढ़ता तापमान और इस लेयर के बीच कोई संबंध नहीं है. वायुमंडल का तापमान तब बढ़ता है, जब प्रदूषण के कारण पर्यावरण में मौजूद कण सूरज की गर्मी को अवशोषित करते हैं. इनमें सबसे ज्यादा कार्बन होते हैं. साउथ एशियाई देशों में प्रदूषण अधिक होने के कारण तापमान और भी बढ़ रहा है.

अमित शाह के जल्द स्वस्थ होने की गई पूजा अर्चना

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के गृहमंत्री अमित शाह 12 सितंबर को तबियत बिगड़ने के बाद एम्स में भर्ती है. ऐसे में जहां राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओ ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है वहीं बीजेपी कार्यकर्ताओ द्वारा अब गृहमंत्री अमित शाह की लंबी आयु के लिए प्रार्थना की जा रही है.

इंदौर में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मालवा मिल चौराहे स्थित महादेव मंदिर में विशेष पूजन कर हवन किया और गृहमंत्री अमित शाह के स्वास्थ्य लाभ व दीर्घायु के प्रार्थना की. बता दें कि तबियत बिगड़ने पर गृह मंत्री अमित शाह एक बार फिर एम्स में भर्ती है. बीजेपी कार्यकर्ता योगेश ठाकुर ने बताया कि अमित शाह एक आदर्श नेता है और देश के गृहमंत्री के पद पर रहकर वो देश की सेवा में जुटे हैं और हम चाहते हैं कि वो जल्द ठीक हो ताकि उनका मार्गदर्शन सभी को मिल सके.

बॉलीवुड की असलियत सामने आई तो भड़क गई जया बच्चन

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में और ड्रग्स मामले में कंगना रनौत ने इन दिनों पूरी फिल्म इंडस्ट्री को बेनकाम कर दिया है। कंगना रनौत के कारण फल्म इंडिस्ट्री की धुमिल होती इस छवि से कई लोग नाराज है।
मंगलवार को संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन पहली शिफ्ट में राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री को बदनाम करने की कथित साजिश को लेकर राज्यसभा में शून्यकाल नोटिस दिया है।
जया बच्चन ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमाने वाले उसी को गटर कह रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि सरकार ऐसे लोगों से कहे कि वे इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करें।
जया बच्चन ने कहा कि कुछ लोगों की वजह से आप पूरे उद्योग की छवि को धूमिल नहीं कर सकते। मुझे शर्म आती है कि कल लोकसभा में हमारे एक सदस्य, जो फिल्म उद्योग से हैं, उन्होंने इसके खिलाफ बोला। यह शर्मनाक है। आप जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद नहीं कर सकते हैं।

मूसलाधार बारिश में नेपाल में भूस्खलन, 9 की मौत, 22 लापता

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
एक तरफ कोरोना, तो दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदा. देश सहित विदेशों में भी ऐसी कई तस्वीरें आए दिन सामने आ रही है. अब खबर भारत के पड़ोसी देश नेपाल से आ रही है, जहां मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन में करीब 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 से अधिक लोग अभी भी लापता है. यहां बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, जिसके बाद मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
जानकारी के अनुसार नेपाल के सिंधुपाल चौक जिले में दो अलग-अलग जगहों पर भूस्खलन में 9 की मौत हो गई और 22 लोग लापता हो गए. चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर उमेश कुमार ढकाल ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. 9 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं. लापता लोगों की तलाश जारी है. शनिवार रात से ही जिले में भारी बारिश हो रही है. रविवार सुबह 4 बजे के करीब भूस्खलन की घटनाएं हुईं. ढकाल के मुताबिक, बरहाबीस म्युनिसिपैलिटी में हुए भूस्खलन में दो रिहायशी इलाके तबाह हो गए. 19 घरों में पानी पूरी तरह घुस गया है. वहीं, काफी संख्या में दूसरे घरों को भी नुकसान पहुंचा है. 222 परिवारों के लिए तत्काल रहने की व्यवस्था करने की जरूरत है.
नेपाल के अफसरों के मुताबिक, चीन से सटे सिंधुपाल चौक जिले में अक्सर बाढ़ और भूस्खलन का खतरा रहता है. 2015 में यहां आए भूकंप में 9 हजार लोगों की जान गई थी. खास तौर पर बारहबीस इलाका में भारी बारिश के बाद भूस्खलन होने की संभावना ज्यादा रहती है.

बेनक़ाब हुआ ड्रैगन, चीन के ही सरकारी लैब से निकला था कोरोना

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
पूरे विश्व की कोरोना महामारी के अंधेरे कुंए में धकेलनेवाले कोरोना वायरस से पूरी दुनिया आज भी संघर्ष कर रही है, लेकिन अभी भी इस बीमारी का वैक्सीन नहीं मिल पाया है। अमेरिका लगातार यह दावा करता रहा है कि, चीन ने ही यह जानलेवा वायरस बना कर दुनिया को बर्बाद कर दिया, लेकिन चीन हर बार इन आरोपों को खारिज करता रहा है। लेकिन अब चीन की एक महिला डॉक्टर ने दावा किया है कि कोरोना वायरस वुहान की सरकारी लैब से निकला था।
डॉक्टर लि मेंग यान के मुताबिक, वे वुहान की उसी सरकारी लैब में निमोनिया पर रिसर्च कर रहीं थीं, जहां से कोरोना वायरस निकला। यान ने वही बात दोहराई है जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई महीनों से कहते आ रहे हैं। ट्रम्प ने मई में कहा था कि हम सही वक्त पर दुनिया के सबूत रखेंगे कि कोरोना वुहान के लैब से ही निकला है और यह चीन की साजिश है।
मेरे पास साइंटिफिक एविडेंस भी हैं-
ब्रिटेन के एक टीवी टॉक शो में यान ने कहा- इस बात के साइंटिफिक एविडेंस यानी वैज्ञानिक प्रमाण हैं कि कोरोना वायरस वुहान के सरकारी लैब से ही निकला. मैं यह साबित भी कर सकती हूं। इसे जानबूझकर तैयार किया गया। वुहान ही इस वायरस का एपिसेंटर था। दुनिया को धोखा देने के लिए इस साजिश को छिपाने की भी कोशिश की गई।
बीजिंग निवासी वॉयरोलॉजिस्ट हैं मेंग-
डॉक्टर लि मेंग यान बीजिंग की रहने वाली है। पेशे से वॉयरोलॉजिस्ट और इम्युनोलॉजिस्ट हैं। वे हॉन्गकॉन्ग में भी रह चुकी हैं। वहां से अमेरिका आ गईं। यान ने कहा- जब कोरोनावायरस फैलने लगा तो मैंने इसकी जानकारी अपने अफसर को दी। खास बात ये है कि वो अफसर डब्ल्यूएचओ में कन्सलटेंट भी हैं, लेकिन मेरी बात को उन्होंने अनसुना कर दिया। हर किसी ने मुझे चुप रहने को कहा। मुझसे यहां तक कहा गया कि अगर इस बारे में मुंह खोला तो मुझे गायब कर दिया जाएगा।
अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ पर भी लगाया था मदद का संगीन आरोप-
अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया था कि चीन वुहान लैब का सच छिपा रहा है। इसमें डब्ल्यूएचओ भी मदद कर रहा है। ट्रम्प ने तो डब्ल्यूएचओ की फंडिंग पर ही रोक लगा दी। यह अब भी जारी है। यान का दावा है कि शी जिनपिंग सरकार की इस हरकत को दुनिया के सामने लाने के लिए उन्होंने चीनी मूल के एक अमेरिकी यूट्यूबर से संपर्क किया था। यान के मुताबिक, वुहान का यह लैब चीनी सेना के अधिकार में आता है। यान ने कहा कि वे जल्द ही चीन की इस साजिश के बारे में सबूत भी पेश करेंगी। वे इस बारे में एक रिपोर्ट तैयार कर रही हैं।

बॉलीवुड से उतरता वामपंथी सेक्युलर लिबास…!

डॉ. अजय खेमरिया | नवप्रवाह न्यूज़ नेट्वर्क
पिछले 70 बर्षों से बॉलीवुड में कायम एकपक्षीय वैचारिकी को सुशान्त सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत औऱ कंगना रणौत की चुनौती ने विमर्श के उस पटल पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां अब तथ्यों पर बात हो रही है। मनमानी सामंती धारणाओं औऱ कथ्यों का निष्पक्षता से सिंहावलोकन हो रहा है। कला और अभिनय के झीने लिबास में जिहादी बौद्धिक जमात ने सांस्कृतिक साम्रज्यवाद के अपने एजेंडे को देश में सफलतापूर्वक लागू कराया औऱ उसकी प्रत्यक्ष अनुभूति सकल भारतीय समाज को आज की तरह कभी होने नही दी है।
बहुलता, सहिष्णुता, विविधता, फॅमिनिज्म, कला, शिक्षा औऱ अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर केवल हिन्दू समाज जीवन और उसके सांस्कृतिक मानबिंदु ही बॉलीवुड के निशाने पर रहे हैं। हाल ही में कंगना रनौत ने जिस साहस के साथ बॉलीवुड के नेपोटिज्म, इस्लामिक माफियावाद को बेनकाब किया, उसने देश को सोचने पर बाध्य कर दिया कि बॉलीबुड की जड़ें भारत और हमारी सँस्कृति से परे कहीं और भी तो नहीं टिकी हैं ? क्या कंगना को लेकर बॉलीबुड के कतिथ सितारों की असलियत आज सामने नही आ गई ? क्या फॅमिनिज्म की परिभाषा कटघरे में नही खड़ी है? क्या खान गैंग की अवधारणा सच साबित नही हो रही है? क्या मुंबई की रंगीन दुनियां पर माफिया का रिमोट कंट्रोल प्रमाणित नहीं हो रहा है? क्या बॉलीवुड वामपंथियों के वैचारिक  अधिष्ठान पर नही टिका है? ऐसे ही बीसियों सवालों के साथ आज बॉलीवुड में कला और अभिनय की दुनिया लांछित हो रही है। सच यह भी है कि बॉलीवुड का भारत विरोधी चेहरा भी इस विमर्श में सार्वजनिक हो रहा है। देश के करोड़ों लोग वामपंथी जमीन पर खड़े सिने जगत के विरुद्ध लामबंद हो रहे हैं।
हमारे बौद्धिक विमर्श को दूषित करने में बॉलीवुड की प्रायोजित भूमिका को आज गहराई से समझने की आवश्यकता है। लिब्रलजिम औऱ सेक्यूलिरजम ऐसे ख़तरनाक वैचारिक हथियार हैं, जिनके  माध्यम से वामपंथियों ने अपनी प्रस्थापनाओं को सफलतापूर्वक  भारतीय लोकजीवन में स्थापित किया है। बॉलीवुड की मारक औऱ विस्तृत प्रभावोत्पादक असन्दिग्ध है। इस प्रभावकीय वैशिष्ट्य ने भारत की मूल चेतना औऱ समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराओं से अलगाव निर्मित करने के  वामपंथी उद्देश्यों को पूरा करने में अहम किरदार अदा किया। इस धीमे वैचारिक बिषरोपण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीके जैसी फिल्में भगवान शंकर का सार्वजनिक अपमान करती हैं और हमारा समाज उसे कला की स्वतंत्र अभिव्यक्ति के नाम पर न केवल अधिमान्यता देता है, बल्कि करोड़ों की कमाई से आमिर खान की झोली भर देता है। यही आमिर जब भारत के मौजूदा राजनयिक दुश्मन देश तुर्की के प्रथम परिवार की मेहमाननवाजी करते हैं, तो लिबरल लॉबी उनके कलाकार के पक्ष को भारतीय हितों से ऊपर के निरूपण में लग जाता है।
बॉलीवुड की तमाम फिल्मों में भगवान को अदालत में खड़ा कर दिया जाता है। मन्दिर के पुजारी को आराध्य देव प्रतिमाओं के आगे बलात्कारी के रूप में फिल्माया जाता है। जातिबन्धन को सँस्कृति की जड़ों के साथ बताया जाता है। काशी और वृन्दावन से लेकर दक्षिण के मंदिरों की तमाम प्रमाणिक परम्पराओं को दूषित मनोविज्ञान के साथ दिखाने में भी बॉलीवुड को कभी गुरेज नही रहा है। यानी ध्यान से देखें, तो कला और अभिनय का पूरा एजेंडा ही उस सनातन जीवनशैली को लांछित करना रहा है, जिसका सबन्ध करोड़ों हिंदुओं से है। कमोबेश यह एजेंडा वामपंथियों ने देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों औऱ बौद्धिक विमर्श में भी चतुराई से स्थापित कर रखा है। अभिनय के माध्यम से पाकिस्तानी चरित्रों को स्थापित करने का कोण भी समझा जाना चाहिये, जो अंततः खान गैंग की उसी मनोवैज्ञानिक औऱ प्रत्यक्ष उपस्थिति को स्वयंसिद्ध करता है, जिसकी झलक हमें आमिर खान, शाहरुख खान, नसीरुद्दीन, सलमान जैसे अभिनेताओं के सेक्युलर बयानों में प्रतिध्वनित औऱ प्रतिबिंबित होती है।
वामपंथियों द्वारा जो सियासी एजेंडा निर्धारित किया जाता रहा, बॉलीवुड की चमकीली दुनिया उस पर रील औऱ रियल दोनों लाइफ में नाचती रही है। याद कीजिये कठुआ रेप कांड। करीना कपूर, शबाना आजमी, श्रुति सेठ, जावेद अखतर, फरहान खान, महेश भट्ट, करन जौहर, दीपिका, स्वरा जैसे बॉलीवुड के डिजाइनर सड़कों पर उतरकर “जस्टिस फ़ॉर….” अभियान चला रहे थे।कैसे बालीबुड का बड़ा वर्ग देश भर के हिंदुओं औऱ मंदिरों को लांछित करने में जुटा था। भारत को बलात्कारियों की धरती तक कहा गया, क्योंकि तब राहुल गांधी भी इस मुद्दे को हिन्दू मुस्लिम के नजरिये से उठा रहे थे। इस घटना के साथ ही शबाना, स्वरा, शाहरुख, आमिर, नसीर सहित तमाम कलाकारों को परिवार सहित डर लगने लगा था भारत में। कुछ दिनों बाद जब मंदसौर, अर्थला, सासाराम औऱ राजस्थान की मस्जिदों में हुए  बलात्कार की घटनाएं प्रकाश में आई, तो यही बॉलीवुड चुप्पी साध गया। क्या सिर्फ इसलिए क्योंकि पीड़िताएं हिन्दू थी और आरोपी मुसलमान। पहलू खान औऱ अखलाख की कथित लीचिंग पर खान गैंग को देश में असहिष्णुता की चिंता होने लगी थी लेकिन पालघर में साधुओं की हत्या होती है तो हत्यारों को बचाने की वामी स्क्रिप्ट पढ़ने में इन डिजाइनर नायकों को शर्म नही आई।सबरीमाला, तीन तलाक, 370, अयोध्या, गौरी लंकेश कलबर्गी, वेमुला,से लेकर सीएए, एनआरसी के मुददों को ध्यान से देखें तो बालीबुड का दोगला रवैया स्पष्ट  प्रमाणित होता आया है। इसे आप केवल सरकार से असहमति के सतही अर्थ में समझने की भूल न करें। यह उसी सिलेक्टिव अभिव्यक्ति का हिस्सा है, जो एंटी इंडिया और हिंदुत्व के तत्वों को प्रतिष्ठित करता है। यह स्टैंड बालीबुड में इस्लामोमेनिया को भी प्रमाणित करता है।
जिस नेपोटिज्म को कंगना रणौत ने उठाया है, उसे सत्ता  सिंडिकेट के अनुरूप समझने की भी जरूरत है। यह सिंडिकेट लिब्रलजिम के नाम पर भारतीय संस्कृति को अपमानित, लांछित औऱ नष्ट करने वाले अभिनय को ही प्रतिभा का एक मात्र आधार मानकर चलता है। जिस सांस्कृतिक साम्राज्यवाद को हमें समझने की आवश्यकता है, उसे शिकारा जैसी फिल्मों के जरिये भी समझा जा सकता है, जो कश्मीरी पंडितों पर बनाई गई। इस मूवी में पंडितों को ही कट्टरपंथी औऱ मुसलमानों को इंसानियत का सिपाही दिखाया गया।
कंगना विवाद के अक्स में वामपंथियों के फॅमिनिज्म की असलियत भी देश के सामने आ गई है। भारत में  “नारीवाद” नही एक तरह के “औरतवाद” के हामी है वामपंथी। वामपंथी नारीवाद के नाम पर भारत की मान्य मर्यादाओं को तिरोहित करके एक “भोगवादी औऱत” को लोकजीवन में गढ़ना चाहते है। कल्पना कीजिये अगर कंगना की जगह शबाना, स्वरा, दीपिका, एकता जैसे वामप्रिय चेहरों के घर पर यूं बुलडोजर बीजेपी सरकार में चला दिया जाता या कोई मंडल/पंचायत स्तर का नेता “हरामखोर” शब्द उपयोग करता, तो भारत ही नही दुनियाभर में हल्ला मचा दिया जाता। टाइम्स, हिन्दू, इंडियन एक्सप्रेस, टेलीग्राफ के पहले पेज सैफरॉन टेरिज्ज्म, फ़ण्डामेंटलिज्म से लेकर संघ और मोदी के विरुद्ध कुतर्कों से गढ़ी गई जबाबदेही तय कर रहे होते। राजदीप, स्वरा, अभिसार, राणा, आरफा, कन्हैया, राजदान, वृंदा, आशुतोष, पुण्य प्रसून, विनोद दुआ, तवलीन सिंह, बरखा, अशोक वाजपेयी, रोमिला, हर्ष मंदर, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण जैसे तमाम इंटलेक्चुअल के अलावा मायावती, ममता, सोनिया तक नारी सम्मान और समर्थन में हैशटेग चला रहे होते।
कंगना के मुद्दे पर नारीवाद की दुकाने आज पूरी तरह से बंद हैं, तो सिर्फ इसलिए कि कंगना उन लिबरल्स गिरोहों में नही है, जो भारतीय जीवनमूल्यों को तिरष्कृत कर, इस्लामिक तत्वों को ग्लोरीफाई करते है। हकीकत यह है कि कंगना औऱ राष्ट्रवाद दोनों फॅमिनिज्म के फ़्रेम में फिट नही हो सकते हैं, क्योंकि इस वामपंथी अवधारणा में पहली शर्त ही राष्ट्र औऱ हिंदुत्व के विरुद्ध खड़ा होना है।कंगना खंब ठोक कर राष्ट्र के साथ खड़ी हैं। लेकिन नारीवाद के ईकोसिस्टम में तो यह सब निषिद्ध है।इसलिए कंगना को वामपंथी नारीवादियों ने आइसोलेट कर दिया। लेकिन इस आइसोलेशन के अक्स में कामरेड वही गलती कर गए है, जो संसदीय राजनीति में उनके अस्तित्व को मिटा गई। वस्तुतः नए भारत की सामूहिक चेतना में आज बड़ा बदलाव आया है। सड़क-2 और छपाक के साथ दर्शकों की प्रतिक्रिया के साथ ही बॉलीवुड को इसे समझ लेना चाहिये। देश का बहुसंख्यक अब अपने अवचेतन में सांस्कृतिक साम्रज्यवाद को जगह देने के लिए तैयार नही है। संयोग से देश मे ऐसी सरकार भी है जो अल्पसंख्यकवाद को नही ढोती है। यह नैरेटिव अब देश में चलने वाला नही है, क्योंकि बॉलीवुड का एंटी हिन्दू लिबास सिलसिलेवार उतर रहा है। कंगना रणौत प्रतीकात्मक रूप से इस स्थापित सल्तनत को खण्डित कर रही है और इसे संसदीय राजनीति की तरह ही भारतीय अभिनय जगत का शुद्धिकरण भी हम कह सकते है।
पुनश्च : इतिहास उन्हें स्मरण रखता है, जो साहस का परिचय देते हैं, सत्य के साथ खड़े रहते हैं। इस सुगठित, सशक्त बौद्धिक जिहाद के विरुद्ध नव-सृजन की आहट को सुन रहा है राष्ट्र।
(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार हैं।)

पूर्वी लद्दाख की अहम चोटियों पर भारतीय सेना का कब्जा; पैंगॉन्ग में चीन की घुसपैठ नाकाम

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना ने अहम चोटियों पर कब्जा कर लिया है और चीनी सैनिकों पर बढ़त हासिल कर ली है। दरअसल, इस बढ़त के पीछे भारतीय सैनिकों का दमखम और पहाड़ी इलाकों में लड़ने की कुशल क्षमता है। आलम यह है कि जब भारतीय सैनिकों ने अगस्त के आखिर में चीन की घुसपैठ को नाकाम कर ऊंचाई वाली जगहों पर अपना कब्जा किया, तब एक चीनी अफसर ने इन इलाकों पर वापस कब्जा हासिल करने के लिए काउंटर अटैक से इनकार कर दिया था।
चुशूल देमचोक सड़क पर नजर नहीं रख पा रही चीनी सेना
न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने एक्सपर्ट रिटायर्ड कर्नल रनबीर सिंह जाखड़ के हवाले से यह बात कही है। उन्होंने बताया कि भारतीय सैनिक अब अहम इलाकों में मजबूत स्थिति में हैं और इसके चलते चीनी सैनिकों को मुश्किल आ रही है। अब चीन की सेना चुशूल-देमचोक सड़क पर भी ठीक तरह से नजर नहीं रख पा रही है। भारतीय सैनिकों का सामना करने के डर से चीन के सैनिकों को नींद नहीं आ रही है।
भारतीय सैनिक पूरी दुनिया में सबसे बेहतर
कर्नल जाखड़ के मुताबिक, जब बात माउंटेन वारफेयर की हो तो भारतीय जवानों का प्रशिक्षण चीन के सैनिकों से ज्यादा बेहतर तरीके से होता है। हाल के दिनों में भारतीय सेना ने चीन की सरकार को यह दिखा दिया है कि मशीनों के पीछे खड़े इंसान मायने रखते हैं ना कि मशीनें। रिटायर्ड कर्नल का कहना है कि भारतीय सैनिक देशभक्ति से भरे होते हैं और वो अदम्य साहस के साथ जंग लड़ते हैं, दूसरी ओर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों (पीएलए) के लिए सेना में भर्ती होना अनिवार्य होता है।

लगातर उग्र होता जा रहा है कंगना और शिवसेना के बीच ट्वीट वॉर

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

शिवसेना की चुनौती के बाद डंके की चोट पर पिछले 9 सितंबर को मुंबई पहुंची कंना रनौत मुंबई में पूरे पांच दिन गुजारने के बाद अपनी बहन रंगोली के साथ मनाली लौट गई है। लेकिन कंगना और शिवसेना के बीच चल रहा वॉर थमने का नाम नहीं ले रहा है। मनाली पहुंचते ही कंगना ने आदित्य ठाकरे पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि मैंने उद्धव के प्यारे बेटे आदित्य के साथ घूमने वाले मूवी माफिया, सुशांत के हत्यारों और ड्रग रैकेट का पर्दाफाश किया, इसी से महाराष्ट्र के सीएम को परेशानी है। कंगना ने कहा कि यही उनका सबसे बड़ा अपराध भी हो गया है, जिसके लिए वो अब मुझे सबक सिखाना चाहते हैं। कंगना ने चुनौती देते हुए लिखा, देखते हैं कौन किसको सबक सिखाता है।

भारी मन से मुंबई छोड़ रही हूं
‘‘भारी मन से मुंबई छोड़ रही हूं, जिस तरह से इन दिनों लगातार मुझे आतंकित किया गया था और मेरे काम की जगह के बाद मेरे घर को तोड़ने की कोशिश में लगातार हमले और गालियां दी गईं। मुझ पर हमले को लेकर सुरक्षाकर्मी अलर्ट थे। कहना चाहिए कि पीओके को लेकर कही गई मेरी बात सही थी।’’

शिवसेना विधायक प्रताप सरनाइक ने दिया कुत्ते की दुम का उदाहरण
शिवसेना विधायक प्रताप सरनाइक ने कहा- कुत्ते की पूंछ नली में डालकर रखने के बावजूद टेढ़ी की टेढ़ी रहती है। इस बात का अर्थ मुझे आज समझ आया। पिछले एक सप्ताह से शिवसेना को अड़चन में डालने के लिए जो लोग कंगना के पक्ष में खड़े थे, उन सभी के चेहरे को कंगना काला करके चली गईं। शिवसेना के मंत्री ने कहा- मुंबईकर तय करेंगे कि मुंबई में कौन रहेगा. वहीं शिवसेना मंत्री अनिल परब ने कहा कि कंगना ने मुंबई को पीओके बुलाया। अब, मुंबईकर तय करेंगे कि मुंबई में कौन रहेगा। कंगना एक स्क्रिप्ट के अनुसार काम करने वाली अभिनेत्री हैं, जो उन्हें दी जाती है। उधर, कोर्ट ने शनिवार, रविवार और सोमवार को गिरफ्तार सभी 7 आरोपियों को 23 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

दुष्कर्म मामले में गिरफ्तार कांग्रेस नेता सिकंदर खान पर बोले वी डी शर्मा, ‘लव जिहाद की घटनाएं मानवता पर कलंक’

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क
मध्यप्रदेश के सतना जिले में कांग्रेस पदाधिकारी सिकंदर खान (Sikandar Khan) पर नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपों को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सख्त बयान देते हुए कहा है कि इस तरह की घटनाएं मानवता पर कलंक हैं और मध्य प्रदेश में इस प्रकार की लव जिहाद की घटनाएं किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होंगी। सरकार ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करेगी।
सरकार मामले को लेकर गंभीर
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कहना है कि इस तरह की घटनाएं मानवता पर कलंक हैं। इस प्रकार की लव जिहाद की घटनाएं मध्यप्रदेश में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी, और सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। ऐसे लोगों को जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए, और उन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही इस लव जिहाद के नेटवर्क में कौन-कौन लोग हैं, इस मामले में भी सरकार गंभीरता से काम करेगी।
 नाबालिग से बलात्कार मामले में कांग्रेस का सिकन्दर खान गिरफ्तार
आपको बता दें कि सतना जिले में पुलिस ने कांग्रेस नेता समीर सिकन्दर खान को गिरफ्तार किया है, उस पर नाबालिग के साथ दुष्कर्म और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप था। इसके बाद पुलिस ने कांग्रेस नेता पर पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया है।

मध्य प्रदेश के गुना में 12 साल की मासूम से बलात्कार

न्यूज़ डेस्क | नवप्रवाह न्यूज़ नेटवर्क

मध्य प्रदेश के गुना जिले के सिरसी थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय एक किशोरी के साथ दुष्कर्म की दिल दहला देने वाली वारदात का मामला सामने आया है। इस जघन्य वारदात के बाद पीडि़ता के परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। घटना को लेकर क्षेत्र में जबर्दस्त आक्रोश व्याप्त हो गया है।

ग्रामीण विकास मंत्री के क्षेत्र में वारदात
मामला पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया की विधानसभा क्षेत्र का है। जहां के सिरसी थाना क्षेत्र में आने वाले ग्राम हथियाबड़ में एक 12 वर्षीय किशोरी के साथ पड़ोसी गांव के ही एक युवक ने दुष्कर्म की जघन्य वारदात को अंजाम दिया। इसकी जानकारी जब पीडि़ता के परिजनों को लगी तो वह उसे स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां से एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

ग्राम में पुलिस फोर्स तैनात
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह सहित कई अधिकारी भी जिला अस्पताल पहुंच गए हैं और एहतियात के तौर पर पुलिस तैनात किया गया है। ग्राम हथियाबड़ में भी पुलिस फोर्स भेजा गया है। हालांकि वारदात के संदर्भ में अब तक पुलिस ने किसी तरह का खुलासा नहीं किया है। लेकिन बताया जा रहा है कि किशोरी के साथ बर्बरता की गई है।