क्राइम डेस्क. Samajwadi Party के नेता एवं जिला पंचायत सदस्य के बेटे जितेंद्र यादव की सोमवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हमले में जितेंद्र का एक साथी भी गंभीर रूप से घायल हुआ है।
बताया जा रहा है दो महीने पहले भी जितेंद्र यादव पर जानलेवा हमला हुआ था, उस वक्त वह बच निकला था। सोमवार को पुरंदरपुर के महुअवा महुअई चौराहे पर जितेंद्र को अज्ञात बदमाशों ने गोली मार दी। चार गोली लगने से घायल हुए जितेंद्र ने अस्पताल जाते वक्त दम तोड़ दिया। इस हमले में गंभीर रूप से घायल उसके साथी का इलाज चल रहा है।
बता दें मृतक जितेंद्र को दो महीने पहले भी अज्ञात बदमाशों ने तीन गोलियां मारी थीं। लेकिन इस हमले में वह बच गया था। दो महिने में दो बार एक ही व्यक्ति को गोली मारने से पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
नई दिल्ली. महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर सरकार चला रही शिवसेना ने नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन किया है। वहीं कांग्रेस के साथ पूरे विपक्ष ने इस बिल पर कड़ा विरोध जताया।
शिवसेना ने नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) को पेश करने समर्थन में वोट किया है। लोकसभा में बिल को पेश करने के पक्ष में 293 और ना पेश करने के पक्ष में 82 वोट ही पड़े। जबकि कांग्रेस ने पहले ही इस विधेयक को ‘असंवैधानिक’ करार दिया है।
इसस पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने सोमवार को ट्विटर पर इसकी घोषणा की थी। उन्होंने कहा, “गैर-कानूनी रूप से रह रहे घुसपैठियों को बाहर निकाला जाना चाहिए।” राउत ने आगे कहा, “अप्रवासी हिंदुओं को नागरिकता दी जानी चाहिए, लेकिन अमित शाह, वोट बैंक बनाने के आरोपों को विराम दें और उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं दें। इस पर आप क्या कहते हैं? और हां (कश्मीरी) पंडितों के बारे में आपका क्या कहना है? क्या अनुच्छेद 370 रद्द किए जाने के बाद वे वापस कश्मीर जाकर रह पाएंगे?
होम मिनिस्टर अमित शाह के लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पेश करते ही विपक्षी दलों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। विधेयक पेश करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि वह हर सवाल का जवाब देने को तैयार हूं और विपक्ष को कहा कि वॉक आउट मत कर जाना। वहीं शिवसेना संसद में सोमवार को इस विधेयक का समर्थन कर सकती है। शाह ने बताया कि इस बिल की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने धर्म के आधार पर विभाजन किया।
अमित शाह ने कहा, यह बिल संविधान के किसी अनुच्छेद के खिलाफ नहीं है और ना ही अनुच्छेद 14 के खिलाफ है। ऐसा पहली बार नहीं है कोई सरकार नागरिकता पर कोई बिल लेकर आए है। 1971 में इंदिरा सरकार ने फैसला लिया था कि बंग्लादेश से आए सभी लोगों को नागरिकता दी जाए। तो पाकिस्तान के लोगों को नागरिकता क्यों नहीं दी गई। फिर वो सरकार बिल लेकर युगांडा वालों को नागरिकता दी गई इंग्लैंड वालों को नहीं।
नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019, के तहत उन हिंदुओं, ईसाइयों, सिखों, पारसियों, जैनों, और बौद्धों को भारतीय राष्ट्रीयता प्रदान की जाएगी, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में उत्पीड़न से भाग कर यहां आए हैं। हालांकि कांग्रेस के साथ विपक्ष ने पहले ही इस पर आपत्ति जता दी है।
Mumbai. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बीच मुलाकत हुई। दोनों नेता सोलापुर के विधायक संजय शिंदे की बेटी की शादी में शामिल होने पहुंचे थे।
पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बीच करीब 20 मिनट बातचीत भी हुई। सोशल मीडिया पर इन नेताओं की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें दोनों हंसते दिख रहे हैं। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका है कि उनके बीच किस मामले पर बात हुई।
इससे पहले महाराष्ट्र में 23 नवंबर की सुबह भाजपा ने राकांपा प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार की अगुवाई में सरकार बना ली थी। फडणवीस ने सुबह 7.30 बजे मुख्यमंत्री पद की जबकि अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि, केवल 80 घंटे के बाद सरकार गिर गई थी। बहुमत न होने के कारण फडणवीस को इस्तीफा देना पड़ा था। इससे पहले ही अजित पवार ने इस्तीफा दे दिया था।
भोपाल. जिला प्रशासन के काम करने के तरीके से दुखी होकर एक पंडितजी ने टंकी पर चढ़ कूदने की धमकी दे रहे हैं। पंडितजी की मांग है कि जब उनसे मुख्यमंत्री बात करेंगे तभी वे नीचे उतरेंगे। मौके पर मौजूद अधिकारी जब उन्हें समझाइश देने लगे तो पंडितजी ने अपनी बात कहने के बाद कान पकड़ लिए और कूदने की धमकी देने लगे। फिलहाल टंकी के नीचे लोगों की भीड़ लगी हुई है।
जानकारी के अनुसार पंडित राजेंद्र दुबे ने 3 दिसंबर अपनी समस्याओं के निराकरण के लिए एक आवेदन दिया था। जिले के समस्त जिम्मेदार अफसरों को आवेदन देने के बाद उनसे पावती भी ली। आवेदन में अंतिम लाइन में लिखा था कि अगर उनकी समस्या का निदान 8 दिसंबर तक नहीं हुआ तो वे 9 दिसंबर को टंकी से कूद आत्महत्या कर लेंगे। लेकिन उस समय उनकी इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
अपने किए हुए वादे के अनुसार पंडितजी टंकी पर चढ़ गए। जैसे ही पुलिस और प्रशासन को पंडितजी के टंकी पर चढ़े होने की बात मालूम चली। सभी टंकी के पास पहुंच गए। उन्होंने पंडितजी से नीचे उतरकर बात करने कहा। अधिकारियों की बात सुनने के बाद पंडितजी ने कहा कि उनके दिए हुए आवेदन पर सभी अफसरों के हस्ताक्षर हैं। अब उन्हें कोई बात नहीं करनी, मुख्यमंत्री से बात कराओ।
पंडितजी ने तीन दिसंबर को जो आवेदन दिया था उसकी फोटो कॉपी भी उन्होंने टंकी से नीचे फेंकी हैं, जिस पर लिखा है कि सरकार बदल गई, लेकिन तरीके नहीं बदले। हर विभाग में रिश्वत अभी भी ली जा रही है। मैंने सीएम के नाम यह आवेदन जनसुनवाई में अधिकारियों को दिया था। फिलहाल पंडितजी टंकी पर ही बैठे हुए हैं।
नई दिल्ली. कर्नाटक की 15 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव की मतगणना जारी है। रुझानों में भाजपा 2 सीटों पर आगे है। 10 सीटें जीत ली हैं। कांग्रेस को दो सीटों पर जीत मिली है। एक सीट पर निर्दलीय को बढ़त मिली है। 6 सीटें जीतने के साथ ही भाजपा की येदियुरप्पा सरकार सुरक्षित हो गई है। उपचुनाव के यह नतीजे भाजपा सरकार के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि उपचुनाव के बाद विधानसभा में 222 सीटें हो जाएंगी। उस स्थिति में बहुमत का आंकड़ा 112 होगा। इस स्थिति में येदियुरप्पा को सत्ता बचाने के लिए 6 सीटें जीतना जरूरी था।
इसी बीच, कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा- मैंने कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद से इस्तीफा दे दिया है। विधायक दल का नेता होने के नाते मुझे लोकतंत्र का सम्मान करना चाहिए। मैंने अपना इस्तीफा सोनिया गांधी को भेज दिया है। वहीं, कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने हार स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा- उपचुनाव में जनता ने दल बदलने वालों को पसंद किया। हमें नतीजे से निराश नहीं होना चाहिए। 5 दिसंबर को उपचुनाव की 15 सीटों पर 165 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे।
क्यों हुए 15 सीटों पर उपचुनाव
कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के फ्लोर टेस्ट से पहले इस्तीफा दे दिया था। तब के स्पीकर केआर रमेश कुमार ने इस्तीफा स्वीकार न करते हुए सभी विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था, इसलिए 15 सीटों पर उपचुनाव हुए। दो सीटों मस्की और राजराजेश्वरी नगर पर कर्नाटक हाईकोर्ट में मामला लंबित है, इसलिए यहां चुनाव बाद में होंगे।
कर्नाटक में सीटों का गणित
कर्नाटक विधानसभा में कुल 224 सीटें हैं। 17 विधायकों को अयोग्य ठहराने के बाद विधानसभा सीटें 207 रह गईं। इस लिहाज से बहुमत के लिए 104 सीटों की जरूरत थी। भाजपा (105) ने एक निर्दलीय के समर्थन से सरकार बना ली। 15 सीटों पर उपचुनाव होने के बाद विधानसभा में 222 सीटें हो जाएंगी। उस स्थिति में बहुमत का आंकड़ा 112 होगा। भाजपा को सत्ता में बने रहने के लिए कम से कम 6 सीटों की जरूरत होगी।
मनोरंजन डेस्क। मिस वर्ल्ड रह चुकी यह एक्ट्रेस एक बार फिर सुर्खियों मे है। इस बार ये एक्ट्रेस खिताब छिन जाने की वजह से सुर्खियों में है। पूर्व मिस यूक्रेन रह चुकीं Veronika Didusenko ने कहा Miss world organization ने शादीशुदा होने और एक बच्चे की मां होने की वजह से उन्हें यह सजा दी गई है। वहीं पूर्व मिस यूक्रेन ने अब कानून कार्रवाई करने का फैसला लिया है।
पूर्व मिस यूक्रेन ने इस बारे में अपने Instagram account पर जानकारी शेयर करते हुए कहा कि Miss world organization के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है। सितंबर 2018 में मिस यूक्रेन के खिताब पर कब्जा जमाने वाली Veronika Didusenko को मिस वर्ल्ड कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने से भी रोक दिया गया है।
Miss world organization ने जिस वजह से 24 साल की Veronika Didusenko से मिस यूक्रेन का खिताब छीना और उन्हें प्रतिभागी बनाने से इनकार किया है, वो बेहद चौंकाने वाली है। Veronika Didusenko के अनुसार, Miss world organization ने शादीशुदा होने और एक बच्चे की मां होने की वजह से उन्हें यह सजा दी गई है।
पूर्व मिस यूक्रेन Veronika Didusenko अपने साथ हुए इस बर्ताव को अमानवीय मानती हैं। वह चाहती हैं कि सौंदर्य प्रतियोगिताओं की आयोजक संस्थाएं महिलाओं के साथ भेदभाव पर अपने नियम-कानून में बदलाव करें।
पूर्व मिस यूक्रेन ने अपने Instagram account पर ब्रिटिश ह्यूमन राइट वकील रवि नायक और बेटे की तस्वीर भी साझा की है। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था, ‘एक बच्चे की मां और शादीशुदा होने की वजह से मेरे साथ ऐसा सुलूक हुआ है। इतना ही नहीं, Veronika Didusenko ने इस पोस्ट में ये भी लिखा कि उन्हें अपना क्राउन वापस नहीं चाहिए। वे सिर्फ इसके कानूनों में बदलाव की मांग कर रही हैं, ताकि भविष्य में महिलाओं के साथ ऐसा भेदभाव न हो।
क्राइम डेस्क। हैदराबाद और फिर उन्नाव में लड़की से गैंगरेप के बाद जिंदा जलाने की घटना से पूरे देश में आक्रोश है। इसी बीच गुजरात से रेप का ऐसा मामला सामने आया है जिसके बारे में जानकर आप हैरत में पड़ जाएंगे। यहां एक मां अपनी ही 12 साल बेटी का एक साल से रेप करवा रही थी। इस मामले के संज्ञान में आने के बाद तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं लड़की की मां अभी फरार चल रही है।
जानकारी के मुताबिक, पीड़िता के पिता ने FIR में आरोप लगाया है कि तीन लोगों ने एक साल से ज्यादा वक्त तक उसकी बेटी के साथ लगातार रेप किया और उसकी पत्नी ने भी अपनी बेटी के रेप में मदद की। यह घटना पालिताना तालुका में भुतिया गांव की है और शनिवार को मामले की एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
रेप पीड़िता ने बताया कि उसके पिता के खाने में कुछ मिला दिया जाता था जिससे वह बेहोश हो जाते थे। पिता के बेहोश होने पर आरोपी उसके साथ रेप करते थे। पीड़ित लड़की के पिता ने आरोपियों की पहचान शांति धांधुकिया (46 वर्षीय), बाबूभाई सरतनपारा (43 वर्षीय) और चंद्रेश सरतनपारा (32 वर्षीय) के तौर पर की है।
New Delhi। लोकसभा में भारी विरोध और देशभर में चल रहे प्रदर्शन के बीच मोदी सरकार ने नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पास हो गया है। सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह नागरिकता संशोधन बिल पेश कर दिया। इस विधेयक के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।
लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल पेश करने को लेकर वोटिंग कराई गई। जहां बिल के पक्ष में 293 वोट पड़े तो वहीं इसके खिलाफ 82 वोट पड़े।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिन्दुओं सिखों, बुद्ध, ईसाईयों के साथ पक्षपात किया गया। उन्होंने कहा कि यह आरोप गलत है कि इस बिल से मुस्लिम के अधिकार ले ले जाएंगे।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा में नागरिक संशोधन बिल का विरोध करते हुए कहा कि यह कुछ और नहीं बल्कि देश के अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए लाया गया विधेयक है। जबकि, अमित शाह ने कहा कि यह बिल .001 फीसदी भी देश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। जबकि, दूसरी तरफ नागरिक संशोधन बिल पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और आजमगढ़ से सांसद अखिलेश यादव ने कहा- हम नागरिक संशोधन बिल के खिलाफ हैं और पार्टी हर कीमत पर इसका विरोध करेगी।
नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के मुताबिक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसम्बर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध शरणार्थी नहीं माना जाएगा बल्कि उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी। यह विधेयक 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा का चुनावी वादा था। मोदी सरकार ने अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया था और वहां पारित करा लिया था। लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों में प्रदर्शन की आशंका से उसने इसे राज्यसभा में पेश नहीं किया। पिछली लोकसभा के भंग होने के बाद विधेयक की मियाद भी खत्म हो गयी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित लोकभवन में सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई यूपी सरकार की कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। यूपी सरकार की कैबिनेट बैठक में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचारों के हित में बड़ा फैसला लिया गया है। यूपी की योगी सरकार ने प्रदेश में 218 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने की मंजूरी दी है। इनमें से 144 नई अदालतें केवल रेप मामले की सुनवाई करेगा जबकि 74 अदालतें पॉस्को एक्ट वाले केस सुनेगी।
कैबिनेट बैठक के बाद योगी सरकार में कानून मंत्री ब्रजेश पाठक बताया कि प्रदेश में 42389 पोस्को और 25749 बलात्कार के मामले अभी पेंडिंग है। जिसके चलते यूपी सरकार ने ये बड़ा फैसला लिया है। ब्रजेश पाठक ने बताया कि इसके जजों की भर्ती जल्द शुरू की जाएगी। इन अदालतों के गठन पर होने वाले खर्च का 60% हिस्सा केंद्र सरकार तथा 40% हिस्सा राज्य सरकार उठाएगी। हर कोर्ट का खर्च 75 लाख रुपये आएगा।
इसके अलावा कैबिनेट बैठक ने 14 शहरों में इलेक्ट्रिक एसी बसे चलाने का प्रस्ताव पास किया है। इसके अंतरगत लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज, गाजियाबाद, कानपुर, आगरा, वाराणसी, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़, झांसी, बरेली, मथुरा, गोरखपुर और शाहजहांपुर में इलेक्ट्रिक एसी बसे चलेंगी।
योगी सरकार ने तीन नगर निगम सीमा विस्तार पर भी मुहर लगा दी है। इसमें अयोध्या और गोरखपुर और फिरोजाबाद का विस्तार होगा। अयोध्या नगर निगम सीमा क्षेत्र में 41 राजस्व गांवों को शामिल करने का फैसला किया है। वहीं, गोरखपुर और फिरोजाबाद नगर निगम सीमा क्षेत्र में क्रमाश: 41 और एक कॉलोनी को शामिल किया जा रहा है।
बिजनेस डेस्क। सार्वजनिक क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है। SBI ने कोष की सीमान्त लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) में 0.10 प्रतिशत की कटौती की है। SBI ने को कहा कि यह कटौती सभी एक साल के उत्पादों के लिए होगी। कटौती कल मंगलवार से लागू होगी।
चालू वित्त वर्ष में SBI ने एमसीएलआर में लगातार आठवीं बार कटौती की है। SBI ने बयान में कहा कि कोष की घटती लागत का लाभ ग्राहकों को देने के लिए हमें एमसीएलआर 0।10 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया है।
अब नई एक साल की कोष की सीमान्त लागत आधारित ऋण दर 7।90 प्रतिशत होगी। अभी यह आठ प्रतिशत है। भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दरों को 5।15 फीसदी पर कायम रखा था।