कलर्स चैनल के मोस्ट अवेटेड रियलिटी शो “बिग बॉस सीज़न-9” के लॉन्च के मौके पर सलमान खान मीडिया से रूबरू हुए और बिग बॉस के नए कांसेप्ट ‘डबल-ट्रबल’ को लेकर खूब बातें की। साथ ही हर सवाल का जवाब भी हँसते-हँसते दिया लेकिन जब एक सवाल में ऐश्वर्या राय का ज़िक्र आया तो सल्लू ज़ज़्बाती हो गए। पहले तो उन्होंने सवाल को इग्नोर किया लेकिन जब बार-बार ऐश्वर्या से जुड़े सवाल से पीछा नहीं छूटा तो ये कहकर टाल दिया कि आपने तो बेहद जज़्बाती सवाल पूछ लिया और ऐसा कह कर सलमान ने मीडिया पीछा छुड़ाया।
अब आप सोंच रहे होंगे की आखिर सवाल क्या था जिससे सलमान भागते नज़र आये, दरअसल बिग बॉस शुरू होते ही बड़े-बड़े सितारे अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए बिग बॉस हाउस जातें है और इस बार बिग बॉस के घर में सबसे पहला प्रमोशन होने वाला है ऐश्वर्या रॉय की कमबैक फिल्म “ज़ज़्बा” का. और यही बात जब सलमान से कन्फर्म किया गया तो वे कुछ इस तरह जज़्बाती हो गए कि पहले तो सवाल को टालने की कोशिश की और जब बात नहीं बनी तो हँसते-हँसते उन्होंने कह दिया कि ये सवाल बेहद जज़्बाती है।
पिछले सीज़न की तरह इस बार भी सलमान ने शाहरुख़ को बिग बॉस के घर में आने का न्योता दे दिया। सलमान ने कहा कि शाहरुख के पास काफी अनुभव है , अगर वे चाहें तो सभी प्रतिभागियों से अपना अनुभव साझा कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (सोमवार को) सैन होजे के सैप (SAP) सेंटर में 18000 भारतीय-अमेरिकियों को संबोधित किया। सैप सेंटर में उपस्थित लोगों ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। और मोदी-मोदी के नारे भी लगाए।
प्रधानमंत्री मोदी ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए अपने काम का सर्टिफिकेट भी माँगा। उन्होंने कहा, ‘मैंने कहा था मैं परिश्रम करने में कोई कमी नहीं छोड़ूंगा, आज 16 महीने बाद आपसे मुझे अपने काम का सर्टिफिकेट चाहिए।’
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कई बातें की। आतंकवाद मामले पर मोदी ने कहा कि राष्ट्र संघ तय करे कि आतंकवाद क्या है। गुड और बैड टेररिज्म को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तय हो जाना चाहिए कि कौन मानवता के साथ खड़ा है और कौन आंतक के साथ।
मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए कहा कि अब लोग कह रहे हैं कि 21वीं सदी हिंदुस्तान की सदी है, और अब ये सच भी लगने लगी है। उन्होंने कहा कि इसमें मोदी का कोई चमत्कार नहीं है। ये बदलाव मोदी के कारण नहीं आया। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों के संकल्प शक्ति से आया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज समूचा विश्व हिंदुस्तान से जुड़ना चाहता है। ये विश्वास का वातावरण ही देश को शिखर पर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं हिंदुस्तान की छवि देख रहा हूं, यहां मैं वाइब्रैंट इंडिया की इमेज देख रहा हूं। विश्व में हमारे देश की एक अलग पहचान बनी है। उन्होंने समय के साथ आगे बढ़ने की बात कहा। मोदी ने स्पष्ट किया कि जो बदलेना नहीं वो 21वीं शताब्दी में प्रासंगिक नहीं होगा।
दिल्ली सरकार के मंत्री अपने किसी न किसी बयान को लेकर हमेशा चर्चा में बने रहते हैं। इस बार दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने शराब पीने की उम्र को कम करने को लेकर समर्थन देने की बात कहकर खुद को चमकाने की कोशिश की है। दिल्ली में शराब पीने की कानूनी उम्र 25 साल है जिसे कपिल ने कम करके 21 साल करने की बात कही है।
बीजेपी शासित राज्यों का हवाला देते हुए मिश्र ने कहा कि जब बीजेपी शासित राज्यों में शराब पीने की उम्र 21 है तो दिल्ली में क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में फिलहाल शराब पीने की उम्र ज्यादा है जिसे कम कर दिया जाना चाहिए। कपिल ने रेस्टोरेंट मालिकों से मुलाकात कर ये बात कही।
हालाँकि रेस्टोरेंट एसोसिएशन इसकी मांग पहले से ही करता रहा है। एसोसिएशन के नेताओं का कहना है कि उनको पुलिस के द्वारा उम्र सीमा को लेकर बहुत प्रताड़ित किया जाता है।
कपिल ने कहा कि बाकी सभी राज्यों में जहां बीजेपी या कांग्रेस की सरकार है वहाँ शराब पीने की उम्र 25 साल से कम है। अगर वे विरोध करते हैं तो पहले उन्हें अपने शासित राज्यों में झाँकना चाहिए।
इस मामले में दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा कि अभी तक सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया है। प्रस्ताव आयेगा तो विचार किया जाएगा।
क्रॅासवर्ड मुंबई में 22 सितंबर 2015 को मुंबई के दर्शकों के लिए “इट डजन्ट हर्ट टू बी नाइस” नाम की नई किताब को लॉन्च किया गया। इस किताब का उदेश्य और लक्ष्य कामकाजी और व्यक्तिगत जीवन में दया व खुशियां बाटना हैं। पुस्तक अपनी शैली और विषय में सफल है,जिसको पढते समय पाठक सुखद विचारों का अनुभव कर सकते हैं। यह किताब देश के अग्रणी प्रकाशकों में एक स्ष्ट्री प्रकाशन द्वारा प्रकाशीत की गई है।
कामकाजी जीवन में दया, किसी भी प्रकार का डर भय न होना और सदैव अपने विचारों को उच्च कोटि का रखने के साथ अपने विचारों में दया भाव लाना ऐसे ही विषयों को इस नई किताब में संबोधित किया गया है। जिसका नाम “इट डजन्ट हर्ट टू बी नाइस” अमीषा सेठी दावारा लिखी गई उनके कैरियर की पहली किताब है।
कहानी की नायिका युवा कॉरपोरेट महिला है। यह कहानी उसके जीवन के उल्लासित, नाटकीय और रोमांचक अनुभवों के बारे में है, जो उसके गुजरते दिनों के जीवन के परम उदेश्य को समझाती है। उसकी एक छोटी मुंबई यात्रा के दौरान देश का बड़ा बॅालीवुड उसको यह सिखाता है कि आप क्या हैं और दूसरे आप से क्या रखने की उम्मींद नहीं करते हैं।
इस किताब पर किताब की लेखिका का कहना है कि “ आंतरिक शांति के अलावा जीवन में और कुछ भी नहीं है। इस शांति को पाने के लिए एक अच्छा मनुष्य होना जरूरी है। मैं पूर्ण विश्वास रखती हूं कि प्रत्येक अनुभव आपको अपने जीवन के उदेश्य के काफी करीब लाता है, मुझे विश्वास है,मेरे अंदर अनंत अच्छाई है। वे अद्वितीय और अद्भुत लोग इस किताब को पढ़ने के लिए कम से कम दो घंटे या उससे कम दे सकते हैं या एक फीसदी लोग भी इसकों पढ़ सकें तो उनको संबंधित जीवन के बारे में अच्छा लगेगा।”
इस विषय पर चेन्नई एक्सप्रेस और ब्योमकेश बक्शी के मशहूर रैप और गायक स्मोकी के साथ एक संगीत वीडियो नाईसनेस वायरल है, जो कि हाल में लॉन्च किया गया है। वीडियो पहले से ही फेसबुक और यूटयूब पर 150, 000 से अधिक विचारों को पार कर गया है।
अमीषा सेठी के विषय में –
अमीषा सेठी व्यापक ब्रांड के विपणन में अनुभव रखने के साथ रणनीति और अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता विपणन के साथ ही विपणन और व्यापार की नेता हैं। उन्होंने 2014 में एक सॉफ्टवेयर बहुराष्ट्रीय कंपनी के साथ वैश्विक सीएमओ के पद पर कार्य किया है। वह 2013 में एयर एशिया के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी और वे 7 सालों तक कार्य करती रही हैं। यहां ब्लैक्बेरी पर ब्रांड मार्केटिंग एशिया के निदेशक रही इसके साथ ही उन्होंने 4 साल के लिए प्रमुख दूरसंचार कंपनी एयरटेल में काम किया है।
उन्हें दुनिया में महिलाओं के नेतृत्व में कांग्रेस 2014 में “युवा राइजिंग स्टार ‘से सम्मानित किया गया था वह एशिया प्रशांत क्षेत्र में विपणन में अपने काम के लिए पुरस्कारों की संख्या और मान्यता जीता है। वह एमिटी बिजनेस स्कूल से प्रबंधन, नॉर्थवेस्टर्न विश्वविद्यालय, शिकागो के केलॉग स्कूल के एक पूर्व छात्र, और यह भी एक एमबीए हैं।
हज के दूसरे दिन मक्का शहर के मीना में शैतान को पत्थर मारने के समय मची भगदड़ में अब तक 717 लोगों की मौत हो गई है और तकरीबन 850 लोगों के घायल होने की खबर है।
सिविल डिफेन्स अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ हज के दूसरे दिन मक्का शहर से कुछ दूरी पर बसे मीना में शैतान को कंकड़ मारने के दौरान हाजियों के बीच भगदड़ मच गई। जिसकी वजह से यह भारी दुर्घटना घटी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 4000 लोगों को राहत कार्य में लगाया गया है। इसके अलावा सैकड़ों इमरजेंसी यूनिट भी राहत कार्य में तैनात हैं।
सूत्रों की मानें तो मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है। लेकिन खबर लिखे जाने तक 717 लोगों के मौत की पुष्टि हुई थी।
बता दें कि मक्का में इसी महीने एक क्रेन दुर्घटना में 107 लोगों की मौत हो गई थी।
देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई में भी डेंगू ने अपना पाँव पसार लिया है। मुम्बई में डेंगू से 36 साल की एक महिला की मौत हो गई है। इस महीने डेंगू के लगभग 2500 ऐसे मरीजों की जांच की जांच की गई, जिनके डेंगू पीड़ित होने की संभावना थी। इनमें से 469 मामलों की पुष्टि की जानकारी मिली है।
फ़िल्मी सितारों की सुरक्षा को लेकर 16 हस्तियों के घर औचक निरिक्षण किया गया। जांच के बाद सफाई को लेकर लापरवाही बरतने के लिए बीएमसी ने अभिनेता अनिल कपूर, अभिनेत्री जूही चावला, जितेंद्र और गायक अमित कुमार को नोटिस जारी किया है।
इन सभी सितारों के घर में साफ पानी का जमावड़ा पाया गया, जहां डेंगू पल रहे थे।
लापरवाही बरतने वाले इन सभी कलाकारों को सफाई के प्रति लापरवाही बरतने को लेकर धारा 381 b के तहत नोटिस जारी किया गया है। जिसके तहत 2 हजार से 10 हजार तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
हालाँकि जांच में अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, शिल्पा शेट्टी, यशराज के बंगले और संजय खान जैसे कुछ के बंगले साफ पाए गए।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका के एक अधिकारी ने बताया कि जांच में पॉजिटिव पाए गए कुल 469 में से 356 मरीज 13 से 45 वर्ष की उम्र के हैं। डेंगू को रोकने के लिए बीएमसी ने हर वार्ड के लिए अलग-अलग टीम गठित किया है। पालिका प्रशासन के मुताबिक़ स्कूल और सार्वजनिक स्थलों की साफ़ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय, मुम्बई के हिन्दी विभाग ने विद्यापीठ की सौवीं जयंती के पावन अवसर पर ‘हिन्दुस्तानी प्रचार सभा’, मुम्बई के साथ मिलकर ‘हिन्दी दिवस’ (14 सितम्बर) का दो सत्रों में भव्य आयोजन किया, जिसमें मराठी व गुजराती विभाग की भी सक्रिय भागीदारी रही।
पहले सत्र में ‘भाषा और प्रतिरोध की राजनीति’ पर बोलते हुए वरिष्ठ हिन्दी कवयित्री व जुझारू चिंतक सुश्री कात्यायनी (लखनऊ) ने कहा, “सत्तातंत्र की राजनीति व स्वार्थपरता एवं अंग्रेजी के वर्चस्व व अंग्रेजीयत की संस्कृति ने आम जनता पर जो आतंक व देश में भाषा को लेकर जो कलह-विग्रह पैदा किया है, उस कारण आज की संकल्पना ‘हिंदी दिवस’ के रूप न करके ‘भारतीय भाषा दिवस’ के रूप में करनी चाहिए’”। विशेष अतिथि के रूप में हि.प्र.सभा के ट्रस्टी व मानद सचिव श्री फ़िरोज़ पैच ने भाषा व स्त्री शिक्षा पर अपना मंतव्य प्रस्तुत किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में कुलगुरु प्रो. वसुधा कामत ने भाषा को आनन्द और अपनी भावनाओं को दूसरों तक पहुँचाने के माध्यम के रूप में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना और इसलिए इस दिवस को उन्होंने हिंदी या मराठी…आदि दिवस के रूप में न मनाकर ‘भाषा दिवस’ के रूप में मनाने की बात कही। सत्र का संचालन व अतिथियों का स्वागत प्रो. सत्यदेव त्रिपाठी (हिन्दी विभागाध्यक्ष) ने किया और हि.प्र.सभा निर्मित कप प्रदान करते हुए वहाँ की विशेष अधिकारी डॉ सुशीला गुप्ता ने सबका आभार माना।
कार्यक्रम का दूसरा सत्र कवि सम्मेलन का रहा, जो आज के हँसोड व फूहड कवि-सम्मेलनों से नितांत अलग और विश्वविद्यालय की गरिमा के अनुकूल एक सुरुचिपूर्ण व साहित्यिक आयोजन सिद्ध हुआ। इसकी अध्यक्षता की – वरिष्ठ व लोकप्रिय कवि श्री नरेश सक्सेना ने और संचालन किया शहर की मानिन्द हस्ती श्री विश्वनाथ सचदेव ने। इस कवि-सम्मेलन में गीत-नवगीत, ग़ज़ल व मुक्त छन्द की तीन धाराओं के संगम में तिरता रहा छात्राओं, प्राध्यापकों व शहर का रसिक साहित्य-प्रेमी समाज।
हिन्दी के अग्रणी गीतकार बुद्धिनाथ मिश्र के वन्दना-गीत से शुरुआत हुई और दो पारियों में लगभग दस चुनिन्दा गीतों में उनकी पहचान वाला गीत ‘एक बार और जाल फेंक रे मछेरे, जाने किस मछली में बन्धन की चाह हो… तो शामिल था ही, किशोरवय को अह्लादित करने वाला ‘अभी तो सपने नये-नये हैं, अभी तो हसरत नयी-नयी है, अभी न जाओ यूँ रूठकर तुम, अभी मुहब्ब्त नयी-नयी है’ के साथ ‘अपनी चिट्ठी बूढी माँ मुझसे लिखवाती है, जो भी मैं लिखता हूँ, कविता हो जाती है..’ जैसे मार्मिक गीत भी थे, जिनमें रसमग्न होता रहा श्रोता समुदाय। ‘सात भाइयों के बीच चम्पा’ ‘उस औरत से डरो’ ‘कविता के विरोध में एक कविता’ जैसी दर्जन भर तेज व विख्यात कविताओं से कात्यायनीजी ने नारी व समाज-चेतना का स्वर बुलन्द किया। स्थानीय कवियों – श्री वि.ना. सचदेव, श्री हस्तीमल हस्ती व श्री राकेश शर्मा – ने अपनी चुनिन्दा कविताओं व ग़ज़लों से सभा को आनन्दित व आन्दोलित किया।
अध्यक्षीय काव्य-पाठ में नरेशजी ने पहले अपनी छोटी-छोटी, सरल व अर्थगर्भित कवितायें सुनायीं – शिशु लोरी के शब्द नहीं, संगीत समझता है… वेद-पुरान-क़ुरान सभी को व्यर्थ समझता है, अभी वह अर्थ समझता है..’ जैसी गहरे मर्म वाली ‘एक वृक्ष बचा रहे, कॉंक्रीट, अच्छे बच्चे, इस बारिश में..आदि के दौरान सभा का नीरव आह्लाद देखते ही बना। और श्रोताओं की फरमाइश पर जब ‘चम्बल : एक नदी का नाम’ शुरू की, तो धीरे-धीरे सभागार आँसुओं की नदी बनता गया, जो तीनो बहनों के नदी में डूबने तक आते-आते सिसकियों-हिचकियों का सागर बन गया, पर प्यास फिर भी नहीं गयी…
प्रो. सत्यदेव त्रिपाठी के भावमय आभार-अदायगी के बाद बाहर चाय के साथ सबकी ज़ुबान पर एक ही वाक्य था – कहाँ लुप्त हो गये ऐसे कवि सम्मेलन….!!
इसी शृंखला में 15 सितबर को ‘महर्षि कर्वे व्याख्यान-माला के अंतर्गत ‘आज का समय और भाषा’ पर श्री नरेश सक्सेना का व्याख्यान हुआ तथा 16 सितम्बर को सक्सेनाजी ने ही हिन्दी-मराठी-गुजराती व संस्कृत की छात्राओ के साथ सम्मिलित रूप से ‘कविता :सृजन एवं आस्वाद’ विषय पर कार्यशाला संयोजित की।
इस प्रकार सम्पन्न हुआ हिन्दी का त्रिदिवसीय समारोह… !
अलजाइमर्स यानि भूलने की बीमारी का पहला चरण। इसमें याददाश्त कम होने के साथ-साथ मरीज के व्यवहार में कई नए परिवर्तन देखने को मिलते हैं। हालाँकि इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करके इस रोग पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।
क्या है अलजाइमर्स?
यह एक पूरी तरह से ठीक न होने वाली बीमारी है, जो धीरे-धीरे स्मरण शक्ति को नष्ट कर देती है। सामान्यतः इस रोग से ६५ वर्ष से अधिक उम्र के लोग प्रभावित होते हैं। इस बीमारी से संबंधित मरीज का सबसे भयंकर व्यवहार, बेवजह घूमने निकल जाना है। ऐसे मरीज बहुत जल्दी खो जाते हैं। जिससे अनेक दुष्परिणाम दिखाई देते हैं।
कुछ चौंकानेवाली बातें
चिकित्सकों के मुताबिक़ यह एक वंशानुगत रोग है। यह परिवार में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलता है।
• वर्तमान में भारत में अल्जाइमर से पीड़ित मरीजों की संख्या लगभग ३७ लाख है, जिसमें सबसे अधिक मरीज महाराष्ट्र प्रदेश (५ लाख ५० हजार) में हैं।
•अल्ज़ाइमर के सफल इलाज के लिए तमाम अनुसंधान हो रहे हैं लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों को सफलता नहीं मिल पाई है।
जेजे अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. सागर मुगदड़ा बताते हैं कि इस बीमारी को लोग गंभीरता से नहीं लेते। केवल १० प्रतिशत लोग ही शुरुआती दौर में इलाज करवाने आते हैं, जबकि २५ से ३० प्रतिशत लोग इसे बढ़ती उम्र की समस्या समझकर छोड़ देते हैं।
डॉ. मुगदडा के अनुसार इस बीमारी से जूझ रहे ब्यक्ति का सालाना खर्च ४३ हजार तक होता है। जो आर्थिक खर्च संभाल पाते हैं, वह कई बार केयरटेकर रख लेते हैं जबकि आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोग अपने बुजुर्गों को वृद्धाश्रम अथवा कही बहार छोड़ आते हैं।
लक्षण-
इसके शुरुआती लक्षणों में अनिद्रा, चिंता, परेशानी, भटकाव, अवसाद और स्मृति का खोना आदि हैं।
इसलिए डॉक्टरों द्वारा नियमित तौर पर जाँच करवाने की बेहद जरुरत है। इसकी जाँच स्मृति परीक्षण, सीटी स्कैन और एमआरआई आदि जाँच प्रक्रिया से की जाती है।
कैसे हो देखभाल
रोगियों को सक्रिय रखने के लिए उन्हें कुछ शारीरिक व्यायाम करना चाहिए।
डॉक्टर सागर मुगदड़ा के अनुसार ऐसे मरीजों से निरंतर मरीजों से बातचीत करते रहना जरुरी है ताकि वह अपने काम को याद रख सकें।अपने कार्यों को याद रख सकें।
साथ ही मरीजों को हमेशा जाँच के लिए ले जाना भी आवश्यक है साथ ही इन मरीजों के साथ प्यार से व्यवहार करना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को 23-29 सितम्बर के बीच की अपनी दो देशों की यात्रा प्रारंभ करते हुए आयरलैंड के लिए रवाना हुए।
आज प्रधानमंत्री आयरलैंड की प्रधानमंत्री एंडा केनी से मुलाकात करेंगे व आयरलैंड के साथ मजबूत आपसी संबंध और आर्थिक संबंध विकसित करने पर बातचीत करेंगे। किसी भारतीय प्रधानमंत्री का 60 वर्षो में यह पहला दौरा है।
प्रधानमंत्री मोदी २४ सितम्बर को सिलिकॉन वैली में उद्योग जगत के नेताओं से मिलने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए रवाना होंगे।
दो कार्य दिवसों में प्रधानमंत्री बीस कार्यक्रमों में भाग लेंगे जिसके अंतर्गत वे गूगल और फेसबुक के मुख्यालय का दौरा करने सहित माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला के साथ व एप्पल के टिम कुक के साथ बैठक करेंगे तथा शीर्ष टेक सी.ई.ओ. दल के साथ रात्रि भोज में शामिल होंगे।
मोदी एक ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर अमेरिका जा रहे हैं, जब संयुक्त राष्ट्र अपनी 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। मोदी न्यूयार्क में 2015 के बाद के नए सतत विकास एजेंडे की औपचारिक स्वीकृति के लिए आयोजित संयुक्त राष्ट्र सतत विकास शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे।वह राष्ट्रपति ओबामा द्वारा शांति स्थापना पर आयोजित एक शिखर बैठक में भी हिस्सा लेंगे।
भारत न्यूयार्क में G-4 के नेताओं की एक शिखर बैठक आयोजित करेगा, जिसमें मुख्य एजेंडा ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सुधार’ होगा।
आजादी के बाद पहली बार करवाई गई सामाजिक,आर्थिक और जाति आधारित जनगणना 2011 में जारी की गयी। नई रिपोर्ट में आर्थिक विकास की होड़ में शामिल भारत के ग्रामीण इलाकों की बेहद दयनीय तस्वीर उभरकर सामने आई हैं ।
आंकड़ो के मुताबिक आजादी के सात दशक बाद भी ग्रामीम क्षेत्र की आधी से अधिक आबादी अब भी खेतिहर मजदूर है । उन्हें साल भर की बजाय सिर्फ फसलो में ही काम मिलता है। इतना ही नही 5.37 करोड़ यानी 29.97 फीसदी परिवार भूमिहीन हैं और मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं ।
विशाल ग्रामीण आबादी में महज ढाई करोड़ लोग ही सरकारी ,सार्वजनिक क्षेत्र या निजी यानी की संगठित क्षेत्र में नौकरी करते हैं । आंकड़ो की माने तो 2.37 करोड़ परिवार एक कमरे के कच्चे मकान में रहते हैं और 4.08 लाख परिवार कूड़ा बीन कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं । स्थिति तब और बदतर दिखती है जब आंकड़ें बताते हैं की 11% ग्रामीण परिवार दयनीय स्थिति में जीवन जी रहे हैं और 6.68 लाख लोग भीख मांगकर अपना परिवार चलाते हैं ।
आंकड़ो पर अगर पैनी नजर डालें तो स्थिति और भी गंभीर है क्योकि रिपोर्ट के मुताबिक़ 75% ग्रामीण परिवार के सदस्यों की मासिक आय 5 हजार से भी कम है और मात्र 9.68% ग्रामीण परिवार ही नौकरीपेशा हैं । रिपोर्ट के मुताबिक (2011 की जनगणना के अनुसार) देश के ग्रामीण इलाको में 29.43% परिवार अनुसूचित जनजाति (sc) और अनुसूचित जनजाति (st) से आते हैं ।
भारत मे 2.3 करोड़ बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इसी क्रम में भारत में ही 20 करोड़ से ज्यादा लोग भूखे पेट ही प्रतिदिन सो जाते हैं।
कुपोषण के कारण ही भारत में लगभग 42% बच्चे अंडरवेट हैं जबकि दुनिया में कुल 92.5 करोड़ बच्चे भूख कुपोषण के शिकार हैं ।
भारत में कुपोषण को कम करने हेतु सबसे पहले पहल करने वाले हैदराबाद के प्लास्टर आफ पेरिस की एक मामूली दूकान करने वाले समाजसेवी अजहर मक्सूशी हर रोज 150 लोगो को मुफ़्त पौष्टिक आहाररयुक्त भोजन देते हैं। इस मुहीम में उनका साथ फेसबुक दोस्त भी करते हैं ।
भारत में कुपोषण दूर करने के लिए किसी समाजसेवी द्वारा किया गया ये एक पहला और अनूठा प्रयास है ।
एक पत्रकार वार्ता में अजहर ने बताया की मेरे और मेरे परिवार का जन्म गरीब लोगो की भूख मिटाने के लिये यदि सार्थकता का पर्याय बन जाता है तो ये मेरे लिए खुशी की बात है । और जब उनसे ये पूछा गया की आप अपने बच्चों को क्या शिक्षा देंगे तो उन्होंने कहा की मैंने अपने बच्चों को भी यही शिक्षा दी है की जिंदगी में नौकरी उतनी अहमियत नही रखती जितनी की समाज में रह रहे दबे कुचले गरीब लोगो की सेवा इसीलिए मैंने उन्हें जिंदगी में हमेशा समाज के लिए जीने की सीख दी है ।
आज पूरा विश्व 21वीं शताब्दी में प्रवेश कर चुका है और कहने को तो हम चाँद से भी आगे निकलकर मंगल तक की यात्रा तय कर चुके हैं पर सच्चाई ये है की आज भी पूरे विश्व में 75% लोगो के पास दो वक्त का भोजन और तन ढंकने के लिए एक अदद कपड़ा नही है । ऐसे में किसी विशेष एकलक्षीय विकास की जिस धारा में पूरा विश्व आज बहता जा रहा है उसका कोई किनारा नही है जहाँ हमारे विश्व की ये हँसती मुस्कुराती सभ्यताएं ठहराव पा सकें ऐसे में हमें इस सच को स्वीकार करना होगा की आज भी विश्व का एक बड़ा भाग मुख्य धारा से दूर है और ऐसे में किसी भी विकास की कोई अहमियत नही ।
संस्कृत में एक श्लोक है ‘भुभुक्षितः किम् न करोति पापम्’ अर्थात भूखे पेट रहने वाले लोगो में ही अपराधिक प्रवृत्तियाँ जन्म लेती हैं और कोई भी पाप करने में भूखा व्यक्ति परहेज नही करता इसी प्रकार ठीक ही कहा गया है की ‘भूखे भजन न होहिं गोपाला ‘ ।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि भूखे लोगों का देश के विकास में योगदान नगण्य होता है ।कुपोषण और भूख के शिकार बच्चे ही ढाबों, ईंट के भट्टो, होटलों में बंधुआ मजदूरी को विवश हैं इस कारण बचपन की असामयिक मौत का क्रम निरन्तर जारी है ।
बुन्देलखण्ड में बाल कुपोषण को रेखांकित करते हुए कवि नवोदित जी अपने शब्दों के द्वारा इंगित करते हुए कहते हैं कि
“बंधक है बचपन ढाबे में ,सड़क रात भर जागे;
गायब है मासूम लड़कपन ,रिश्तों के टूटे धागे! कभी कभी मैं सोंच यही घुटघुट के मरता हूँ;
न जाने मैं क्यों खुद की परछाई से डरता हूँ ।”
शिक्षा के प्रसार के लिए तमाम योजनाओं पर काम कर रही मोदी सरकार को अपने सर्वे से लडकियों की साक्षरता की असलियत का पता चला है । सरकार द्वारा कराये गए एक सर्वे के मुताबिक़ देश में सात साल से अधिक उम्र की लड़कियों की साक्षरता दर महज 65.8 फीसदी ही है जबकि इसी आयु वर्ग के लड़को की साक्षरता दर 81 फीसदी है ।
सर्वे ने बाल विवाह पर पाबंदी लगाने के प्रयासों की कलई खोलते हुए यह भी उजागर किया कि अब भी 10 से 19 साल के बीच की आयु में करीब छह से सात फीसदी बच्चियों की शादी की जा रही है । वैसे ये रैपिड सर्वे महिला एवम् बाल विकास मंत्रालय की जोर से जारी किये गए हैं ।
एक तरफ इन सभी आंकड़ो ने सरकार की सांसे जरूर बढ़ा दी होगी पर सच्चाई ये है कि पिछले कई दशको में ग्रामीण क्षेत्र के विकास को लेकर राजनीतिक गलियारों में खूब गिल्ली डंडा खेला गया है। पर अब वो समय आ गया है जब मौजूदा सरकार को इन आंकड़ो के प्रति संवेदनशील होकर कुछ ठोस निर्णय लेने होंगे नही तो वो समय दूर नहीं जब देश के विकास का आधार ही नष्ट हो जायेगा और देश का विकास रुक जाएगा ।